Yesterday, 12:13 PM
(This post was last modified: Yesterday, 12:20 PM by rajusethzee. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
*(कल्लू ने मम्मी की बात सुनी तो उसके अंदर की वासना और भी भड़क उठी। उसने अपनी गति थोड़ी बढ़ा दी और अब वह बिना रुके तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। हर झटके के साथ मम्मी का शरीर आगे-पीछे हिल रहा था।)*
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"तो आपको अच्छा लग रहा है मालकिन? बताइए ना... कैसा लग रहा है जब मैं आपके अंदर ये कर रहा हूँ?"
*(कल्लू ने हाँफते हुए और उत्तेजना से भरे स्वर में पूछा। उसके पसीने की बूंदें मम्मी की पीठ पर गिर रही थीं।)*
"उफ़्फ़... आह्ह्ह... हाँ... ऐसे ही... रुकना मत... और तेज़ कर... मुझे पागल कर देगा तू... आह््ह!"
*(कल्लू ने अचानक अपनी गति बदली। उसने मम्मी की कमर को मजबूती से पकड़ा और उन्हें ऊपर उठाकर अपने ऊपर बिठा लिया। अब मम्मी कल्लू के ऊपर सवार थीं और उनका भारी, नंगा बदन कल्लू के सख्त शरीर से टकरा रहा था।)*
---
*(मम्मी ने खुद को संभालते हुए कल्लू के कंधों पर हाथ रखा। जैसे ही वे नीचे बैठीं, कल्लू का मोटा अंग उनके भीतर पूरी गहराई तक समा गया। मम्मी के मुंह से एक लंबी और मदहोश कर देने वाली चीख निकली।)*
"ओह्ह्ह खुदा... कल्लू... तू तो मेरे अंदर पूरा समा गया... आह्ह्ह!"
*(मम्मी अब कल्लू के ऊपर बैठकर लय बनाने लगीं। वे अपनी कमर को ऊपर-नीचे और आगे-पीछे घुमा रही थीं, जिससे कल्लू का अंग उनके भीतर हर तरफ रगड़ खा रहा था। कल्लू नीचे लेटे हुए उनकी सुडौल देह और ऊपर-नीचे होते उनके उभारों को देख रहा था, जो उसे लगभग बेकाबू कर रहे थे।)*
![[Image: 38596]](https://cdn.porngifs.com/img/38596)
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"आह्ह्ह... कल्लू... तेरा ये अंग... कितना गरम और सख्त है... मेरा रोम-रोम पिघल रहा है..."
*(मम्मी ने हांफते हुए कहा, उनकी आँखें आधी बंद थीं और चेहरा वासना से लाल हो चुका था। उन्होंने कल्लू के सीने पर अपने नाखून गड़ा दिए और अपनी सवारी और भी तेज़ कर दी।)*
*(मम्मी की सवारी अब इतनी तीव्र हो चुकी थी कि पूरे बिस्तर की चरमराहट सुनाई देने लगी थी। कल्लू के चेहरे पर एक जंगली मुस्कान थी, वह बस अपनी आँखों से मम्मी के इस रूप को निहार रहा था। मम्मी का पूरा शरीर पसीने से तर-बतर था और उनकी सांसें किसी तूफान की तरह चल रही थीं।)*
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*(तभी कल्लू ने अपनी पकड़ मम्मी की पतली कमर पर और मजबूत कर ली। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया ताकि मम्मी का निचला हिस्सा उसके अंग को और भी ज़ोर से जकड़ ले।)*
"मालकिन... आप तो आज बिल्कुल जंगली हो गई हैं... क्या इसी दिन का इंतज़ार कर रही थीं आप?"
![[Image: 37984]](https://cdn.porngifs.com/img/37984)
*(कल्लू ने शरारत और कामुकता भरे लहजे में पूछा, जबकि उसकी आवाज़ भारी और दबी हुई थी।)*
*(मम्मी ने कल्लू की बात सुनकर अपनी गर्दन पीछे झुका दी। उनके खुले बाल कल्लू के चेहरे पर बिखर गए। उनकी आँखों में वासना की ऐसी चमक थी जिसे देखकर कोई भी पुरुष अपना होश खो दे।)*
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"हाँ... हाँ कल्लू! मैं कब से इस प्यास में जल रही थी... तूने आज मुझे आग लगा दी है... आह्ह्ह!"
*(मम्मी ने चिल्लाते हुए अपनी कमर को और भी तेज़ी से कल्लू के ऊपर पटकना शुरू कर दिया। अब उनकी गति इतनी तेज़ थी कि कल्लू का शरीर भी थरथराने लगा। हर बार जब मम्मी नीचे बैठतीं, कल्लू का अंग उनके गर्भाशय के द्वार को छूकर गुज़रता, जिससे मम्मी के मुँह से बेकाबू होकर आवाज़ें निकलने लगतीं।)*
"आह्ह्ह..."
*(कमरे का तापमान बढ़ चुका था। मम्मी की सवारी अब नियंत्रण से बाहर हो रही थी। वे कल्लू के ऊपर पागलों की तरह चढ़ी हुई थीं, मानो उन्हें किसी चीज़ की तलाश हो या वे बस इस चरम सुख को पाना चाहती हों। कल्लू का अंग उनके भीतर इतना गहरा उतर रहा था कि मम्मी का पूरा शरीर कांप उठता था।)*
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![[Image: 36149]](https://cdn.porngifs.com/img/36149)
*(कल्लू ने देखा कि मम्मी अब चरम सीमा (climax) के बेहद करीब हैं। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं और उनके होंठ फड़फड़ा रहे थे। कल्लू ने अपनी दोनों हथेलियों से मम्मी के उभरे हुए नितंबों (hips) को जोर से दबाया और उन्हें अपनी ओर खींचा।)*
"मालकिन... बस थोड़े और... आप बस पहुँचने वाली हैं... मेरी जान निकाल लेंगी आप आज!"
*(मम्मी ने कल्लू की बात का जवाब नहीं दिया, बल्कि उनकी उत्तेजना ने उन्हें पूरी तरह पागल कर दिया था। उन्होंने कल्लू के कंधों को कसकर जकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत लगाकर अंतिम प्रहार करना शुरू किया। उनकी रफ़्तार अब बिजली की तरह तेज़ हो चुकी थी।)*
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"आह्ह्ह... कल्लू... मैं... मैं अब और नहीं सह सकती... आााह्ह्ह!"
*(मम्मी के शरीर में एक जोरदार झटका लगा। उनकी योनि की मांसपेशियां कल्लू के अंग को इतनी जोर से भींचने लगीं कि कल्लू की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वे कल्लू के सीने पर गिर पड़ीं, उनकी सांसें उखड़ रही थीं और शरीर थरथरा रहा था।)*
*(मम्मी अभी भी कल्लू के ऊपर ही ढे़र थीं, उनका गर्म और पसीने से भरा शरीर कल्लू के सीने से चिपका हुआ था। उनकी धड़कनें कल्लू को अपने शरीर पर महसूस हो रही थीं। लेकिन यह अंत नहीं था, क्योंकि मम्मी का चरम सुख अभी शांत नहीं हुआ था।)*
![[Image: 38501]](https://cdn.porngifs.com/img/38501)
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*(मम्मी ने धीरे से अपना सिर उठाया। उनकी आँखों में अभी भी वही मदहोशी थी। उन्होंने कल्लू की आँखों में सीधे देखते हुए एक गहरी और गीली साँस ली।)*
"अभी... अभी खत्म नहीं हुआ कल्लू... तूने तो अभी शुरुआत की है..."
*(मम्मी के इन शब्दों ने कल्लू के अंदर सोए हुए जानवर को फिर से जगा दिया। कल्लू ने एक गहरी और भारी सांस ली, उसकी आँखों में अब केवल भूख और जुनून था। उसने मम्मी की कमर से अपने हाथ हटाए और उन्हें झटके से पकड़कर बिस्तर पर सीधा लिटा दिया।)*
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*(अब स्थिति बदल चुकी थी। मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई थीं और कल्लू उनके ऊपर हावी हो रहा था। कल्लू ने उनके दोनों पैरों को फैलाकर अपने कंधों पर रख लिया, जिससे मम्मी का सबसे निजी और नाजुक हिस्सा पूरी तरह से कल्लू के सामने खुल गया।)*
"अगर मालकिन को अभी और चाहिए... तो तैयार रहिये... क्योंकि अब मैं रुकने वाला नहीं हूँ!"
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"तो आपको अच्छा लग रहा है मालकिन? बताइए ना... कैसा लग रहा है जब मैं आपके अंदर ये कर रहा हूँ?"
*(कल्लू ने हाँफते हुए और उत्तेजना से भरे स्वर में पूछा। उसके पसीने की बूंदें मम्मी की पीठ पर गिर रही थीं।)*
"उफ़्फ़... आह्ह्ह... हाँ... ऐसे ही... रुकना मत... और तेज़ कर... मुझे पागल कर देगा तू... आह््ह!"
*(कल्लू ने अचानक अपनी गति बदली। उसने मम्मी की कमर को मजबूती से पकड़ा और उन्हें ऊपर उठाकर अपने ऊपर बिठा लिया। अब मम्मी कल्लू के ऊपर सवार थीं और उनका भारी, नंगा बदन कल्लू के सख्त शरीर से टकरा रहा था।)*
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*(मम्मी ने खुद को संभालते हुए कल्लू के कंधों पर हाथ रखा। जैसे ही वे नीचे बैठीं, कल्लू का मोटा अंग उनके भीतर पूरी गहराई तक समा गया। मम्मी के मुंह से एक लंबी और मदहोश कर देने वाली चीख निकली।)*
"ओह्ह्ह खुदा... कल्लू... तू तो मेरे अंदर पूरा समा गया... आह्ह्ह!"
*(मम्मी अब कल्लू के ऊपर बैठकर लय बनाने लगीं। वे अपनी कमर को ऊपर-नीचे और आगे-पीछे घुमा रही थीं, जिससे कल्लू का अंग उनके भीतर हर तरफ रगड़ खा रहा था। कल्लू नीचे लेटे हुए उनकी सुडौल देह और ऊपर-नीचे होते उनके उभारों को देख रहा था, जो उसे लगभग बेकाबू कर रहे थे।)*
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"आह्ह्ह... कल्लू... तेरा ये अंग... कितना गरम और सख्त है... मेरा रोम-रोम पिघल रहा है..."
*(मम्मी ने हांफते हुए कहा, उनकी आँखें आधी बंद थीं और चेहरा वासना से लाल हो चुका था। उन्होंने कल्लू के सीने पर अपने नाखून गड़ा दिए और अपनी सवारी और भी तेज़ कर दी।)*
*(मम्मी की सवारी अब इतनी तीव्र हो चुकी थी कि पूरे बिस्तर की चरमराहट सुनाई देने लगी थी। कल्लू के चेहरे पर एक जंगली मुस्कान थी, वह बस अपनी आँखों से मम्मी के इस रूप को निहार रहा था। मम्मी का पूरा शरीर पसीने से तर-बतर था और उनकी सांसें किसी तूफान की तरह चल रही थीं।)*
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*(तभी कल्लू ने अपनी पकड़ मम्मी की पतली कमर पर और मजबूत कर ली। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया ताकि मम्मी का निचला हिस्सा उसके अंग को और भी ज़ोर से जकड़ ले।)*
"मालकिन... आप तो आज बिल्कुल जंगली हो गई हैं... क्या इसी दिन का इंतज़ार कर रही थीं आप?"
*(कल्लू ने शरारत और कामुकता भरे लहजे में पूछा, जबकि उसकी आवाज़ भारी और दबी हुई थी।)*
*(मम्मी ने कल्लू की बात सुनकर अपनी गर्दन पीछे झुका दी। उनके खुले बाल कल्लू के चेहरे पर बिखर गए। उनकी आँखों में वासना की ऐसी चमक थी जिसे देखकर कोई भी पुरुष अपना होश खो दे।)*
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"हाँ... हाँ कल्लू! मैं कब से इस प्यास में जल रही थी... तूने आज मुझे आग लगा दी है... आह्ह्ह!"
*(मम्मी ने चिल्लाते हुए अपनी कमर को और भी तेज़ी से कल्लू के ऊपर पटकना शुरू कर दिया। अब उनकी गति इतनी तेज़ थी कि कल्लू का शरीर भी थरथराने लगा। हर बार जब मम्मी नीचे बैठतीं, कल्लू का अंग उनके गर्भाशय के द्वार को छूकर गुज़रता, जिससे मम्मी के मुँह से बेकाबू होकर आवाज़ें निकलने लगतीं।)*
"आह्ह्ह..."
*(कमरे का तापमान बढ़ चुका था। मम्मी की सवारी अब नियंत्रण से बाहर हो रही थी। वे कल्लू के ऊपर पागलों की तरह चढ़ी हुई थीं, मानो उन्हें किसी चीज़ की तलाश हो या वे बस इस चरम सुख को पाना चाहती हों। कल्लू का अंग उनके भीतर इतना गहरा उतर रहा था कि मम्मी का पूरा शरीर कांप उठता था।)*
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*(कल्लू ने देखा कि मम्मी अब चरम सीमा (climax) के बेहद करीब हैं। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं और उनके होंठ फड़फड़ा रहे थे। कल्लू ने अपनी दोनों हथेलियों से मम्मी के उभरे हुए नितंबों (hips) को जोर से दबाया और उन्हें अपनी ओर खींचा।)*
"मालकिन... बस थोड़े और... आप बस पहुँचने वाली हैं... मेरी जान निकाल लेंगी आप आज!"
*(मम्मी ने कल्लू की बात का जवाब नहीं दिया, बल्कि उनकी उत्तेजना ने उन्हें पूरी तरह पागल कर दिया था। उन्होंने कल्लू के कंधों को कसकर जकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत लगाकर अंतिम प्रहार करना शुरू किया। उनकी रफ़्तार अब बिजली की तरह तेज़ हो चुकी थी।)*
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"आह्ह्ह... कल्लू... मैं... मैं अब और नहीं सह सकती... आााह्ह्ह!"
*(मम्मी के शरीर में एक जोरदार झटका लगा। उनकी योनि की मांसपेशियां कल्लू के अंग को इतनी जोर से भींचने लगीं कि कल्लू की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वे कल्लू के सीने पर गिर पड़ीं, उनकी सांसें उखड़ रही थीं और शरीर थरथरा रहा था।)*
*(मम्मी अभी भी कल्लू के ऊपर ही ढे़र थीं, उनका गर्म और पसीने से भरा शरीर कल्लू के सीने से चिपका हुआ था। उनकी धड़कनें कल्लू को अपने शरीर पर महसूस हो रही थीं। लेकिन यह अंत नहीं था, क्योंकि मम्मी का चरम सुख अभी शांत नहीं हुआ था।)*
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*(मम्मी ने धीरे से अपना सिर उठाया। उनकी आँखों में अभी भी वही मदहोशी थी। उन्होंने कल्लू की आँखों में सीधे देखते हुए एक गहरी और गीली साँस ली।)*
"अभी... अभी खत्म नहीं हुआ कल्लू... तूने तो अभी शुरुआत की है..."
*(मम्मी के इन शब्दों ने कल्लू के अंदर सोए हुए जानवर को फिर से जगा दिया। कल्लू ने एक गहरी और भारी सांस ली, उसकी आँखों में अब केवल भूख और जुनून था। उसने मम्मी की कमर से अपने हाथ हटाए और उन्हें झटके से पकड़कर बिस्तर पर सीधा लिटा दिया।)*
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*(अब स्थिति बदल चुकी थी। मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई थीं और कल्लू उनके ऊपर हावी हो रहा था। कल्लू ने उनके दोनों पैरों को फैलाकर अपने कंधों पर रख लिया, जिससे मम्मी का सबसे निजी और नाजुक हिस्सा पूरी तरह से कल्लू के सामने खुल गया।)*
"अगर मालकिन को अभी और चाहिए... तो तैयार रहिये... क्योंकि अब मैं रुकने वाला नहीं हूँ!"


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