पहला अध्याय...... अनुज दुबे
मेरा नाम अनुज दुबे , पूनम दुबे का लोकप्रिय बेटा । पहले भाग ' मदर सीक्रेट अफेयर ' में जबरदस्त प्यार दिया अब मैं भाग 3 में फिर एकबार मौजूद हुं आपके भरपूर प्यार के लिए। धन्यवाद
यह बात करीब 3 साल पहले की है.. मैं कॉलेज में पढ़ता था और छुट्टियों में जमशेदपुर अपने ननिहाल गया हुआ था।
मेरे ननिहाल में मेरे नानाजी.. मामाजी और मामी ( हेमा चौधरी ) थे। मैं करीब 20 साल का था.. नई-नई जवानी चढ़ी थी।
मेरे ननिहाल में सब मेरे आने पर बहुत खुश हुए।
मामाजी की शादी को पांच साल हुए थे। उनको एक बेटा एक साल का था। उन्होंने मामी को घर से भागकर और दूसरे जाति से किये थे। वे किसी फैक्ट्री में अच्छी जॉब करते थे।
दो-तीन दिन तो ऐसे ही ठीक-ठाक निकल गए।
एक दिन दोपहर को खाना खाकर मैं मामाजी के कमरे में बैठा टीवी देख रहा था, उनका बेटा मेरे पास ही सो रहा था… तभी अपने काम-धाम निपटा कर मामी ज़ी भी आ गईं और मेरे पास बिस्तर पर बैठ कर टीवी देखने लगीं।
उन्होंने गर्मी की वजह से नाईटी ही पहन रखी थी।
नाईटी के नीचे उन्होंने ब्रा और सलवार पहनी हुई थी।
उनके आने से मैं थोड़ा सीधा होकर बैठ गया।
तो वो बोलीं- अरे.. आराम से लेट जाओ.. उठ क्यों गए?
‘कोई बात नहीं मामी जी.. मैं ठीक हूँ..’ मैं बोला।
‘तुम ना.. मुझे मामीज़ी मत कहा करो.. हेमा कहा करो..’
वो मुझसे मुस्कुरा कर बोलीं।
‘अरे नहीं.. मामीज़ी हो तो मामीज़ी ही कहूँगा..’ मैं थोड़ा सकपकाया।
‘तो क्या हुआ.. अपनी उम्र में कोई ज़्यादा फ़र्क़ थोड़े ही है.. मैं तुमसे सिर्फ़ 10 साल ही तो बड़ी हूँ।’
मैं कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया।
‘आज गर्मी बहुत है.. यह कूलर भी ठंडी हवा नहीं दे रहा..’ मामी बोली।
‘हाँ.. ऐसी गर्मी में तो एसी होना चाहिए..’ मैंने कहा।
‘आज ही कहती हूँ तेरे मामा से.. कि एक एसी लगवा दो.. गर्मी से जान निकल जाती है.. एसी हो तो आराम से खुल्लम-खुल्ला हो कर लेट जाओ।’
‘खुल्लम-खुल्ला.. वो कैसे..?’ मैंने जानबूझ कर पूछा।
‘अरे बस.. बिना कपड़ों के..’ वो शरारत से मुस्कुरा कर बोलीं।
‘और अगर कोई आ जाए तो?’ मैंने मजा लेकर बात आगे बढ़ाई।
‘कौन आएगा.. जो भी आएगा.. घन्टी बजाकर आएगा.. नाईटी पास ही रखी होती है.. झट से पहनो और जाकर देख लो…’
‘हाँ.. ये ठीक है.. पर आज मेरे आने से आप खुल्लम-खुल्ला हो कर नहीं लेट सकतीं..’ मैंने चुटकी ली।
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‘हाँ.. ये तो है.. पर तू तो आराम से लेट जा.. ये कुर्ता-पजामा क्यों पहना है.. घर में भी इतने कपड़े पहनकर ही रहता है।’ वो मुस्कुरा कर बोलीं।
पर उनकी इस मुस्कुराहट में शरारत थी।
‘नहीं.. घर में तो बस बनियान में अपने कमरे में रहता हूँ..’ मैंने भी जानबूझ कर झूठ ही कह दिया।
‘तो उतार दे.. आराम से लेट..’
उसने थोड़ी और शरारत से कहा।
मेरे मन में आया कि पूछ लूँ कि अगर मैं खुल्लम-खुल्ला होकर लेटूंगा.. तो क्या वो भी खुल्लम-खुल्ला होंगी, पर इतना कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और चुप ही रहा।
टीवी पर प्रोग्राम चल रहा था.. पर मेरा उसमें कोई मन नहीं लग रहा था।
अब मेरा ध्यान सिर्फ़ मामी के गोरे-चिट्टे बदन पर था।
उनका गोल चेहरा.. भरा हुआ बदन.. मोटे-मोटे दो मम्मे और उससे भी बड़े दो चूतड़.. उनकी नाईटी का गला गहरा था तो उनका बड़ा सा क्लीवेज भी दिख रहा था, जो बार-बार मेरा ध्यान उधर खींच रहा था।
मामी को पता था कि मैं कहाँ देख रहा हूँ.. पर वो ऐसे शो कर रही थीं जैसे उनकी छातियाँ घूरने से उनको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा हो.. या ये तो आम बात है.. या अब इतने बड़े खरबूज़ों को छुपाऊँ तो कैसे छुपाऊँ।
मेरे मन में तूफान उठ रहा था कि आगे बढ़ूँ और मामी के दोनों चुचियों पकड़ कर दबा दूँ.. पर मेरी हिम्मत जवाब दे जाती थी।
पहले तो मामीज़ी बैठी थीं.. फिर वो भी लेट गईं और टीवी देखने लगीं।
वो मुझसे करीब 2-3 फीट की दूरी पर बाईं करवट लेकर लेटी थीं।
हम दोनों के बीच में ' आंसू ' ( मामी का बेटा ) सो रहा था। करवट के बल लेटने से उनका क्लीवेज उनके कंधे तक बन गया.. करीब 5 इंच का क्लीवेज मेरे हाथ की पहुँच में था.. पर मैं उसे छू नहीं सकता था।
दो बड़े-बड़े चुचियों.. उफ.. क्या क़यामत की दोपहर थी वो…
हम दोनों बीच-बीच में बातें भी कर रहे थे और मामी जी को पूरा पता था कि मेरी नज़रें सिर्फ़ उनके चुचियों पर ही टिकी थीं।
मैंने मन ही मन सोचा कि यार अगर मामी का दूध पीने को मिल जाए तो मज़े ले ले कर पियूँ और इसके चुचियों दबा-दबा के चूसूँ।
तभी सोते हुए आंसू डर के उठ गया और रोने लगा।
मामी ने उसे सीने से लगा लिया और चुप कराने लगीं.. पर वो रोता ही रहा और सीने से लगाने पर मामी के क्लीवेज में मुँह मारने लगा।
मेरी किस्मत देखिए.. बिल्कुल मेरे सामने.. मामी ने नाईटी ऊपर उठाई.. ब्रा ऊपर की और अपने बाएं चूची से आंसू को दूध पिलाने लगीं.. मगर मुझे ये समझ नहीं आया कि जब एक ही चूची से दूध पिलाना है तो दोनों बाहर क्यों निकाले।
अब मेरी नज़र सिर्फ़ मामी के गोरे और गोल चूची और उसके ऊपर हल्के भूरे निप्पल पर टिकी थी।
मामी भी देख रही थीं कि मैं क्या देख रहा हूँ।
मेरे मन में बार-बार ये ख्याल आता कि अनुज हिम्मत कर और मामी से पूछ ले ‘मैं भी दूध पीना चाहता हूँ.. पर पूछू कैसे..?’
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कभी दिल कर रहा था कि बस पकड़ कर दबा दूँ.. अगर बुरा भी मान गईं तो ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा एकाध चांटा ही तो मार देंगी..पर फिर भी.. हिम्मत नहीं हो रही थी।
मामी ने मुझे कई बार देखा.. पर अब मैं भी बेशर्मी से सिर्फ़ उनके चूची को ही घूर रहा था।
‘ओये.. क्या घूर रहा है?’ मामी बोलीं।
‘कुछ नहीं मामीज़ी..’ मैं थोड़ा डरा।
‘क्या चाहता है?’
जैसे उसने ऑफर दी हो।
‘दूध पीना चाहता हूँ..!’
मैं खुद नहीं समझ पाया कि मेरे मुँह से ये शब्द कैसे निकल गए।
वो मुस्कुराई और मेरे सर के पीछे हाथ रखा और मेरा सर खींच कर अपने चुचियों के पास ले गई और मैंने बड़े प्यार से उनका निप्पल अपने होंठों में पकड़ लिया और ज़ोर से चूस लिया।
मेरा मुँह उनके दूध से भर गया.. कोई स्वाद नहीं था.. पर 20 साल की उम्र में चूची चूसने का मेरा ये पहला अवसर था और इसी चीज़ का मैं मज़ा ले रहा था।
अब जब बात खुल ही गई थी, तो मैंने अपने आपको मामी के साथ चिपका लिया.. उनका अमृत-कलश बड़े प्यार से अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबाया और निप्पल मुँह में ले कर चूसने लगा।
मैं चूची चूसने और दबाने दोनों के मज़े ले रहा था।
मामी मेरे सर में हाथ फेर रही थीं.. उसने अपना बदन ढीला छोड़ रखा था और वो टीवी भी नहीं देख रही थीं।
मैंने मौक़ा देखकर एक हाथ उसके कूल्हे पर रखा और धीरे-धीरे हाथ उसकी पीठ पर से उसके ब्रा के हुक पर ले गया और धीरे से दबाकर हुक खोल दिया।
मामी ने मेरे सर पर हाथ मारा- शैतान.. ये क्या कर रहा है.. ब्रा क्यों खोली तुमने?
‘अरे मामीज़ी.. थोड़ा टाइट सा लग रहा था.. इसलिए और एक बात बताऊँ.. आज मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी की ब्रा खोली है.. जब मेरा हाथ आपकी ब्रा के हुक पर गया तो मैं ये अवसर छोड़ना नहीं चाहता था.. इसलिए हुक खोल दिया।’
मामी सिर्फ़ मुस्कुरा दीं और मैं बोला- थोड़ा और पी लूँ?
तो उसने कहा- क्यों भूखा है क्या? अभी तो खाना खाया था…
मैं बोला- वो तो कब का हज़म हो गया.. अब फिर से भूख लग गई है।
ये कह कर मैंने फिर से उसका चूची मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
मैंने देखा कि आंसू दूध पीकर सो गया है और निप्पल भी उसके मुँह से निकल गया है।
मैंने मामी से कहा- मामी ज़ी.. अब आप सीधी होकर लेट जाओ प्लीज़..
मामी ने आंसू को देखी.. वो सो चुका था।
मामी सीधी हो गईं.. तो मैंने उसकी ब्रा और नाईटी बिल्कुल ऊपर तक उठा दीं।
अब वो पेट से ले कर कंधों तक मेरे सामने नंगी थी।
मैंने उसके दोनों चुचियों अपने हाथों में पकड़ लिए और दबा-दबा कर उनसे खेलने लगा.. कभी ये चूची चूसता तो कभी वो.. कभी दबाता तो कभी चाट लेता…
मामी चुपचाप मुझे देख रही थीं। मैंने नज़र उठाकर मामी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे.. वो शांत चित्त होकर लेटी हुई थी।
मैं उसकी आँखों में और वो मेरी आँखों में देख रही थी।
मेरे मन का शैतान पूरी तरह से जाग चुका था.. मैं धीरे से आगे बढ़ा और मामी के होंठों पर हल्के से चूम लिया.. सिर्फ़ ये देखने के लिए कि कहीं वो बुरा तो नहीं मानती।
उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने दोबारा चूमा।
उसके बाद 5-6 बार चूमा और अपने हाथों से उसके चूची दबाता रहा।
उसके बाद तो मामी ने मेरा सर पकड़ा और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
मैंने उसका नीचे वाला होंठ मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
फिर होंठ छोड़ दोनों के मुँह आपस में जुड़ गए।
मामी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी.. मेरे लिए ये मजा भी नया था.. पर मज़ेदार था। मैंने भी साथ दिया.. फिर तो कभी मैं उसकी जीभ चूसता तो कभी वो मेरी जीभ चूसती।
अब मैंने आगे बढ़ने की सोची.. मैंने अपना बायाँ हाथ सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया, तो उसने और ज़ोर से मुझे अपने से भींच लिया।
मैंने अपना मुँह उसके मुँह से अलग किया और कहा- मामी ज़ी ये नाईटी उतार दो.. ये बीच में फँस रही है।
‘पहले तो तू मुझे ‘मामी ज़ी’ मत बोल, हेमा कह और अगर ब्रा खुद खोल सकता है.. तो नाईटी भी खुद ही उतार ले..’
मैंने बोला- हेमा से लगता है जैसे व्बॉय-फ्रेण्ड और गर्ल-फ्रेंड हों.. पर मैं तो इन्सेस्ट (रिश्तों में चुदाई) का मजा लेना चाहता हूँ।
‘इन्सेस्ट का मजा.. वो क्या होता है?’ उसने पूछा।
‘बाद में बताऊँगा.. पर अभी मुझे आपको मामी जी ही कहने दो..।’
यह कहकर मैंने उसकी नाईटी और ब्रा दोनों उतार दी।
आज पहली बार वो मेरे सामने अधनंगी हालत में बैठी थी।
मैंने छुप-छुप कर तो कई बार दूध पिलाते हुए उसके चूची देखे थे.. पर आज तो दोनों खुल्लम-खुल्ला मेरे सामने.. मेरे हाथों में थे।
मैंने अपना भी कुर्ता-पजामा और बनियान उतार दी। अब मेरे बदन पर सिर्फ़ चड्डी थी.. जिसमें से मेरा पूरी तरह से तना हुआ लण्ड दिख रहा था।
मामी ने मेरे लण्ड पर हाथ मार के कहा- इसको क्या हुआ?
और वो अश्लील भाव से हँस दी।
मैंने कहा- ये गुस्से से अकड़ गया है.. कहता है मुझे कोई प्यार नहीं करता।
ये कहकर मैंने मामी को कन्धों से पकड़कर बिस्तर पर लिटा दिया और बिल्कुल उसकी बगल में खुद भी लेट गया।
मैंने अपना दाहिना हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकाला.. उसके सर को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को अपने होंठों से पकड़ा और चूसने लगा।
उसकी मोटी गुदाज़ जाँघ को अपनी जांघों में जकड़ा ताकि मेरा लण्ड उसकी कमर पर घिस सकूँ।
अब मैंने अपना हाथ सीधे उसकी सलवार में डाल दिया और अपनी बीच वाली ऊँगली से उसकी चूत का दाना छेड़ने लगा।
उसकी चूत पूरी तरह से पानी से भीगी पड़ी थी। उसने भी अपना हाथ मेरी चड्डी में डाल दिया और मज़बूती से मेरा लंड पकड़कर हिलाने लगी।
‘मामीज़ी, मुझे आपकी चूत चाटनी है.. क्या मैं आपकी चूत चाट सकता हूँ..।’ मैंने उससे कहा।
‘छी:.. उसे चाटते थोड़े ही हैं..’ वो बोली।
मैं उठा और उठकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सरका कर उसकी सलवार नीचे उतार दी।
एक बेहद गोरी और शेव की हुई साफ़-सुथरी चिकनी चूत देखने को मिली।
मैंने 69 में घूमकर अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया और दोनों हाथों से उसकी टाँगें चौड़ी करके अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया।
पहले तो उसकी चूत के दाने को जीभ से चाटा… फिर मुँह नीचे ले गया और उसकी चूत में अपना सारा मुँह डाल दिया।
मैं यह कोशिश कर रहा था कि अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दूँ.. पर जीभ छोटी थी और चूत बहुत गहरी…
मैं मामी के ऊपर ही लेट गया और उसकी टाँगें मोड़ दीं.. जिससे उसकी चूत खुल कर सामने आ गई..
अब मैं ऊपर से लेकर नीचे तक उसकी चूत की सारी दरार में अपना मुँह फिरा रहा था और ऊपर से नीचे उसकी गाण्ड तक चाट रहा था।
मैंने अपने बाएं हाथ का अंगूठा उसकी चूत में डाल कर आगे-पीछे किया तो मामी तड़प उठी।
वो बार-बार कमर उचका रही थी।
मैंने अपना अंगूठा कभी उसकी चूत के अन्दर तो कभी उसकी गाण्ड के छेद में करता रहा और जब वो कमर उठाती तो मेरा अंगूठा उसकी गाण्ड में घुस जाता।
ऐसे ही करते-करते मैंने अपना पूरा अंगूठा उसकी गाण्ड में पेल दिया।
अब उसने भी मेरी चड्डी उतार दी और मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
मैं समझ गया था कि वो क्या चाहती है। मैं थोड़ा पीछे हटा तो मेरा लंड बिल्कुल उसके मुँह के ऊपर आ गया और उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।
वाह.. मेरे लंड के आस पास.. उसके नर्म होंठों का.. क्या मस्त अहसास था।
जब उसने लंड मुँह में लिया तो मैंने थोड़ा सा नीचे को ज़ोर लगाया और मेरे लंड का सुपारा उसके मुँह में खुल गया।
उसने मेरा पूरा लंड अपने मुँह की गहराई में समा लिया।
अब मैं नीचे उसकी चूत चाट रहा था और दूसरी तरफ उसका मुँह चोद रहा था।
कुछ देर ऐसे ही चलता रहा।
फिर मामी ऊपर आ गईं और उसने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी।
मैं चाटने लगा और वो मेरे मुँह पर बैठी अपनी कमर हिलाने लगी।
वो पूरे मज़े से चूत चटवाने का आनन्द ले रही थी।
‘अनुज .. मेरी गाण्ड चाट..’ वो बोली।
मैंने उसकी गाण्ड में भी जीभ फेरी तो वो अपनी कमर मेरे मुँह पर हिलाती रही।
उसकी चूत के पानी से मेरा सारा मुँह भीगा हुआ था और उसके चुचियों से टपकते दूध ने मेरे बदन और बिस्तर गीला कर दिया था।
वो झुकी और मेरे लंड पे टूट पड़ी।
मस्ती से चूसते हुए उसने कई बार मेरे लंड पर काट लिया।
‘अनुज सिर्फ़ चाट मत.. इसको दांतों से काट.. खा..’
जैसे ही मैंने काटा… तो उसको थोड़ा दर्द हुआ.. पर उसने मना नहीं किया, मैं कभी काटता तो कभी चाटता… वो बड़े ज़ोर से अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती रही और मेरे लंड को पागलों की तरह चूसती रही।
फिर जैसे बिजली गिरी हो.. वो एकदम से तड़प उठी.. उसने इतने ज़ोर से अपनी चूत से मेरा मुँह दबा दिया कि मेरा तो साँस ही बंद हो गया।
मेरा पूरा लंड उसके मुँह में था..
उसने बिल्कुल मेरे लंड की जड़ में जाकर ज़ोर से काटा..
मैं तो वहीं खल्लास हो गया..
मेरे लंड से उसके मुँह में पिचकारियाँ छूट गईं।
कुछ उसके मुँह के अन्दर चला गया और कुछ बाहर गिर गया।
मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा मुँह खट्टे-नमकीन पानी से भर गया हो..
उसकी गाण्ड के बोझ से दबा मैं हिल नहीं सकता था..
सो उस पानी को पी गया।
काफ़ी देर हम ऐसे ही निढाल होकर लेटे रहे।
फिर वो एक तरफ को लुढ़क गई।
मैंने उसको देखा एक गोरी-चिट्टी सुंदर पंजाबी लड़की मेरे सामने खल्लास होकर नंगी पड़ी थी।
करीब आधा घंटा हम लेटे हुए एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर मैंने कहा- मामीज़ी, मैं चुदाई करना चाहता हूँ..
‘और ये जो किया.. वो क्या था?’
‘नहीं ये तो ठीक है.. पर मैंने आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा है, प्लीज़ मेरा उद्घाटन करवा दीजिए।
मामी हँसी- तो तूने आज तक कभी नहीं किया ना.. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
‘नहीं.. बस अब तो आप ही हो.. जो भी हो..’
‘अच्छा.. पहले ये बता इन्सेस्ट क्या होता है?’
‘अपने रिश्तों में चुदाई करना.. जैसे माँ.. बाप.. भाई-बहन… बाप-बेटी.. माँ-बेटा.. मामी भांजा.. चाचा-भतीजी.. इसे रिश्तों में चुदाई कहते हैं.. समझ गई हेमा डार्लिंग!
‘ओये होये.. मर जावां गुड़ खा के… चल आजा..’
यह कहकर मामी ने अपनी टाँगें मेरी तरफ कर के खोल दीं, मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी।
मेरा भी शेर एक मिनट में ही खड़ा हो गया।
हेमा ने अपनी टाँगें उठाईं और मेरे लंड को अपने चूत के मुँह पर रख लिया।
मैंने धीरे से उसे उसकी चूत में उतार दिया.. अब मैं चुदाई करने लगा।
मामी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
मुझे नमकीन सा स्वाद आया,
‘आपके होंठ नमकीन हैं..’
‘और तेरे खट्टे हैं..’ ये कह कर वो हँस दी और बात समझकर मैं भी हँस दिया।
आज भी मैं अपनी ज़िंदगी की इस चुदाई अनुभव नहीं भूला हूँ।
मेरा नाम अनुज दुबे , पूनम दुबे का लोकप्रिय बेटा । पहले भाग ' मदर सीक्रेट अफेयर ' में जबरदस्त प्यार दिया अब मैं भाग 3 में फिर एकबार मौजूद हुं आपके भरपूर प्यार के लिए। धन्यवाद
यह बात करीब 3 साल पहले की है.. मैं कॉलेज में पढ़ता था और छुट्टियों में जमशेदपुर अपने ननिहाल गया हुआ था।
मेरे ननिहाल में मेरे नानाजी.. मामाजी और मामी ( हेमा चौधरी ) थे। मैं करीब 20 साल का था.. नई-नई जवानी चढ़ी थी।
मेरे ननिहाल में सब मेरे आने पर बहुत खुश हुए।
मामाजी की शादी को पांच साल हुए थे। उनको एक बेटा एक साल का था। उन्होंने मामी को घर से भागकर और दूसरे जाति से किये थे। वे किसी फैक्ट्री में अच्छी जॉब करते थे।
दो-तीन दिन तो ऐसे ही ठीक-ठाक निकल गए।
एक दिन दोपहर को खाना खाकर मैं मामाजी के कमरे में बैठा टीवी देख रहा था, उनका बेटा मेरे पास ही सो रहा था… तभी अपने काम-धाम निपटा कर मामी ज़ी भी आ गईं और मेरे पास बिस्तर पर बैठ कर टीवी देखने लगीं।
उन्होंने गर्मी की वजह से नाईटी ही पहन रखी थी।
नाईटी के नीचे उन्होंने ब्रा और सलवार पहनी हुई थी।
उनके आने से मैं थोड़ा सीधा होकर बैठ गया।
तो वो बोलीं- अरे.. आराम से लेट जाओ.. उठ क्यों गए?
‘कोई बात नहीं मामी जी.. मैं ठीक हूँ..’ मैं बोला।
‘तुम ना.. मुझे मामीज़ी मत कहा करो.. हेमा कहा करो..’
वो मुझसे मुस्कुरा कर बोलीं।
‘अरे नहीं.. मामीज़ी हो तो मामीज़ी ही कहूँगा..’ मैं थोड़ा सकपकाया।
‘तो क्या हुआ.. अपनी उम्र में कोई ज़्यादा फ़र्क़ थोड़े ही है.. मैं तुमसे सिर्फ़ 10 साल ही तो बड़ी हूँ।’
मैं कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया।
‘आज गर्मी बहुत है.. यह कूलर भी ठंडी हवा नहीं दे रहा..’ मामी बोली।
‘हाँ.. ऐसी गर्मी में तो एसी होना चाहिए..’ मैंने कहा।
‘आज ही कहती हूँ तेरे मामा से.. कि एक एसी लगवा दो.. गर्मी से जान निकल जाती है.. एसी हो तो आराम से खुल्लम-खुल्ला हो कर लेट जाओ।’
‘खुल्लम-खुल्ला.. वो कैसे..?’ मैंने जानबूझ कर पूछा।
‘अरे बस.. बिना कपड़ों के..’ वो शरारत से मुस्कुरा कर बोलीं।
‘और अगर कोई आ जाए तो?’ मैंने मजा लेकर बात आगे बढ़ाई।
‘कौन आएगा.. जो भी आएगा.. घन्टी बजाकर आएगा.. नाईटी पास ही रखी होती है.. झट से पहनो और जाकर देख लो…’
‘हाँ.. ये ठीक है.. पर आज मेरे आने से आप खुल्लम-खुल्ला हो कर नहीं लेट सकतीं..’ मैंने चुटकी ली।
![[Image: 1791852416817.jpg]](https://i.ibb.co/k2yGwYRJ/1791852416817.jpg)
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‘हाँ.. ये तो है.. पर तू तो आराम से लेट जा.. ये कुर्ता-पजामा क्यों पहना है.. घर में भी इतने कपड़े पहनकर ही रहता है।’ वो मुस्कुरा कर बोलीं।
पर उनकी इस मुस्कुराहट में शरारत थी।
‘नहीं.. घर में तो बस बनियान में अपने कमरे में रहता हूँ..’ मैंने भी जानबूझ कर झूठ ही कह दिया।
‘तो उतार दे.. आराम से लेट..’
उसने थोड़ी और शरारत से कहा।
मेरे मन में आया कि पूछ लूँ कि अगर मैं खुल्लम-खुल्ला होकर लेटूंगा.. तो क्या वो भी खुल्लम-खुल्ला होंगी, पर इतना कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और चुप ही रहा।
टीवी पर प्रोग्राम चल रहा था.. पर मेरा उसमें कोई मन नहीं लग रहा था।
अब मेरा ध्यान सिर्फ़ मामी के गोरे-चिट्टे बदन पर था।
उनका गोल चेहरा.. भरा हुआ बदन.. मोटे-मोटे दो मम्मे और उससे भी बड़े दो चूतड़.. उनकी नाईटी का गला गहरा था तो उनका बड़ा सा क्लीवेज भी दिख रहा था, जो बार-बार मेरा ध्यान उधर खींच रहा था।
मामी को पता था कि मैं कहाँ देख रहा हूँ.. पर वो ऐसे शो कर रही थीं जैसे उनकी छातियाँ घूरने से उनको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा हो.. या ये तो आम बात है.. या अब इतने बड़े खरबूज़ों को छुपाऊँ तो कैसे छुपाऊँ।
मेरे मन में तूफान उठ रहा था कि आगे बढ़ूँ और मामी के दोनों चुचियों पकड़ कर दबा दूँ.. पर मेरी हिम्मत जवाब दे जाती थी।
पहले तो मामीज़ी बैठी थीं.. फिर वो भी लेट गईं और टीवी देखने लगीं।
वो मुझसे करीब 2-3 फीट की दूरी पर बाईं करवट लेकर लेटी थीं।
हम दोनों के बीच में ' आंसू ' ( मामी का बेटा ) सो रहा था। करवट के बल लेटने से उनका क्लीवेज उनके कंधे तक बन गया.. करीब 5 इंच का क्लीवेज मेरे हाथ की पहुँच में था.. पर मैं उसे छू नहीं सकता था।
दो बड़े-बड़े चुचियों.. उफ.. क्या क़यामत की दोपहर थी वो…
हम दोनों बीच-बीच में बातें भी कर रहे थे और मामी जी को पूरा पता था कि मेरी नज़रें सिर्फ़ उनके चुचियों पर ही टिकी थीं।
मैंने मन ही मन सोचा कि यार अगर मामी का दूध पीने को मिल जाए तो मज़े ले ले कर पियूँ और इसके चुचियों दबा-दबा के चूसूँ।
तभी सोते हुए आंसू डर के उठ गया और रोने लगा।
मामी ने उसे सीने से लगा लिया और चुप कराने लगीं.. पर वो रोता ही रहा और सीने से लगाने पर मामी के क्लीवेज में मुँह मारने लगा।
मेरी किस्मत देखिए.. बिल्कुल मेरे सामने.. मामी ने नाईटी ऊपर उठाई.. ब्रा ऊपर की और अपने बाएं चूची से आंसू को दूध पिलाने लगीं.. मगर मुझे ये समझ नहीं आया कि जब एक ही चूची से दूध पिलाना है तो दोनों बाहर क्यों निकाले।
अब मेरी नज़र सिर्फ़ मामी के गोरे और गोल चूची और उसके ऊपर हल्के भूरे निप्पल पर टिकी थी।
मामी भी देख रही थीं कि मैं क्या देख रहा हूँ।
मेरे मन में बार-बार ये ख्याल आता कि अनुज हिम्मत कर और मामी से पूछ ले ‘मैं भी दूध पीना चाहता हूँ.. पर पूछू कैसे..?’
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कभी दिल कर रहा था कि बस पकड़ कर दबा दूँ.. अगर बुरा भी मान गईं तो ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा एकाध चांटा ही तो मार देंगी..पर फिर भी.. हिम्मत नहीं हो रही थी।
मामी ने मुझे कई बार देखा.. पर अब मैं भी बेशर्मी से सिर्फ़ उनके चूची को ही घूर रहा था।
‘ओये.. क्या घूर रहा है?’ मामी बोलीं।
‘कुछ नहीं मामीज़ी..’ मैं थोड़ा डरा।
‘क्या चाहता है?’
जैसे उसने ऑफर दी हो।
‘दूध पीना चाहता हूँ..!’
मैं खुद नहीं समझ पाया कि मेरे मुँह से ये शब्द कैसे निकल गए।
वो मुस्कुराई और मेरे सर के पीछे हाथ रखा और मेरा सर खींच कर अपने चुचियों के पास ले गई और मैंने बड़े प्यार से उनका निप्पल अपने होंठों में पकड़ लिया और ज़ोर से चूस लिया।
मेरा मुँह उनके दूध से भर गया.. कोई स्वाद नहीं था.. पर 20 साल की उम्र में चूची चूसने का मेरा ये पहला अवसर था और इसी चीज़ का मैं मज़ा ले रहा था।
अब जब बात खुल ही गई थी, तो मैंने अपने आपको मामी के साथ चिपका लिया.. उनका अमृत-कलश बड़े प्यार से अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबाया और निप्पल मुँह में ले कर चूसने लगा।
मैं चूची चूसने और दबाने दोनों के मज़े ले रहा था।
मामी मेरे सर में हाथ फेर रही थीं.. उसने अपना बदन ढीला छोड़ रखा था और वो टीवी भी नहीं देख रही थीं।
मैंने मौक़ा देखकर एक हाथ उसके कूल्हे पर रखा और धीरे-धीरे हाथ उसकी पीठ पर से उसके ब्रा के हुक पर ले गया और धीरे से दबाकर हुक खोल दिया।
मामी ने मेरे सर पर हाथ मारा- शैतान.. ये क्या कर रहा है.. ब्रा क्यों खोली तुमने?
‘अरे मामीज़ी.. थोड़ा टाइट सा लग रहा था.. इसलिए और एक बात बताऊँ.. आज मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी की ब्रा खोली है.. जब मेरा हाथ आपकी ब्रा के हुक पर गया तो मैं ये अवसर छोड़ना नहीं चाहता था.. इसलिए हुक खोल दिया।’
मामी सिर्फ़ मुस्कुरा दीं और मैं बोला- थोड़ा और पी लूँ?
तो उसने कहा- क्यों भूखा है क्या? अभी तो खाना खाया था…
मैं बोला- वो तो कब का हज़म हो गया.. अब फिर से भूख लग गई है।
ये कह कर मैंने फिर से उसका चूची मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
मैंने देखा कि आंसू दूध पीकर सो गया है और निप्पल भी उसके मुँह से निकल गया है।
मैंने मामी से कहा- मामी ज़ी.. अब आप सीधी होकर लेट जाओ प्लीज़..
मामी ने आंसू को देखी.. वो सो चुका था।
मामी सीधी हो गईं.. तो मैंने उसकी ब्रा और नाईटी बिल्कुल ऊपर तक उठा दीं।
अब वो पेट से ले कर कंधों तक मेरे सामने नंगी थी।
मैंने उसके दोनों चुचियों अपने हाथों में पकड़ लिए और दबा-दबा कर उनसे खेलने लगा.. कभी ये चूची चूसता तो कभी वो.. कभी दबाता तो कभी चाट लेता…
मामी चुपचाप मुझे देख रही थीं। मैंने नज़र उठाकर मामी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे.. वो शांत चित्त होकर लेटी हुई थी।
मैं उसकी आँखों में और वो मेरी आँखों में देख रही थी।
मेरे मन का शैतान पूरी तरह से जाग चुका था.. मैं धीरे से आगे बढ़ा और मामी के होंठों पर हल्के से चूम लिया.. सिर्फ़ ये देखने के लिए कि कहीं वो बुरा तो नहीं मानती।
उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने दोबारा चूमा।
उसके बाद 5-6 बार चूमा और अपने हाथों से उसके चूची दबाता रहा।
उसके बाद तो मामी ने मेरा सर पकड़ा और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
मैंने उसका नीचे वाला होंठ मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
फिर होंठ छोड़ दोनों के मुँह आपस में जुड़ गए।
मामी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी.. मेरे लिए ये मजा भी नया था.. पर मज़ेदार था। मैंने भी साथ दिया.. फिर तो कभी मैं उसकी जीभ चूसता तो कभी वो मेरी जीभ चूसती।
अब मैंने आगे बढ़ने की सोची.. मैंने अपना बायाँ हाथ सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया, तो उसने और ज़ोर से मुझे अपने से भींच लिया।
मैंने अपना मुँह उसके मुँह से अलग किया और कहा- मामी ज़ी ये नाईटी उतार दो.. ये बीच में फँस रही है।
‘पहले तो तू मुझे ‘मामी ज़ी’ मत बोल, हेमा कह और अगर ब्रा खुद खोल सकता है.. तो नाईटी भी खुद ही उतार ले..’
मैंने बोला- हेमा से लगता है जैसे व्बॉय-फ्रेण्ड और गर्ल-फ्रेंड हों.. पर मैं तो इन्सेस्ट (रिश्तों में चुदाई) का मजा लेना चाहता हूँ।
‘इन्सेस्ट का मजा.. वो क्या होता है?’ उसने पूछा।
‘बाद में बताऊँगा.. पर अभी मुझे आपको मामी जी ही कहने दो..।’
यह कहकर मैंने उसकी नाईटी और ब्रा दोनों उतार दी।
आज पहली बार वो मेरे सामने अधनंगी हालत में बैठी थी।
मैंने छुप-छुप कर तो कई बार दूध पिलाते हुए उसके चूची देखे थे.. पर आज तो दोनों खुल्लम-खुल्ला मेरे सामने.. मेरे हाथों में थे।
मैंने अपना भी कुर्ता-पजामा और बनियान उतार दी। अब मेरे बदन पर सिर्फ़ चड्डी थी.. जिसमें से मेरा पूरी तरह से तना हुआ लण्ड दिख रहा था।
मामी ने मेरे लण्ड पर हाथ मार के कहा- इसको क्या हुआ?
और वो अश्लील भाव से हँस दी।
मैंने कहा- ये गुस्से से अकड़ गया है.. कहता है मुझे कोई प्यार नहीं करता।
ये कहकर मैंने मामी को कन्धों से पकड़कर बिस्तर पर लिटा दिया और बिल्कुल उसकी बगल में खुद भी लेट गया।
मैंने अपना दाहिना हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकाला.. उसके सर को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को अपने होंठों से पकड़ा और चूसने लगा।
उसकी मोटी गुदाज़ जाँघ को अपनी जांघों में जकड़ा ताकि मेरा लण्ड उसकी कमर पर घिस सकूँ।
अब मैंने अपना हाथ सीधे उसकी सलवार में डाल दिया और अपनी बीच वाली ऊँगली से उसकी चूत का दाना छेड़ने लगा।
उसकी चूत पूरी तरह से पानी से भीगी पड़ी थी। उसने भी अपना हाथ मेरी चड्डी में डाल दिया और मज़बूती से मेरा लंड पकड़कर हिलाने लगी।
‘मामीज़ी, मुझे आपकी चूत चाटनी है.. क्या मैं आपकी चूत चाट सकता हूँ..।’ मैंने उससे कहा।
‘छी:.. उसे चाटते थोड़े ही हैं..’ वो बोली।
मैं उठा और उठकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सरका कर उसकी सलवार नीचे उतार दी।
एक बेहद गोरी और शेव की हुई साफ़-सुथरी चिकनी चूत देखने को मिली।
मैंने 69 में घूमकर अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया और दोनों हाथों से उसकी टाँगें चौड़ी करके अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया।
पहले तो उसकी चूत के दाने को जीभ से चाटा… फिर मुँह नीचे ले गया और उसकी चूत में अपना सारा मुँह डाल दिया।
मैं यह कोशिश कर रहा था कि अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दूँ.. पर जीभ छोटी थी और चूत बहुत गहरी…
मैं मामी के ऊपर ही लेट गया और उसकी टाँगें मोड़ दीं.. जिससे उसकी चूत खुल कर सामने आ गई..
अब मैं ऊपर से लेकर नीचे तक उसकी चूत की सारी दरार में अपना मुँह फिरा रहा था और ऊपर से नीचे उसकी गाण्ड तक चाट रहा था।
मैंने अपने बाएं हाथ का अंगूठा उसकी चूत में डाल कर आगे-पीछे किया तो मामी तड़प उठी।
वो बार-बार कमर उचका रही थी।
मैंने अपना अंगूठा कभी उसकी चूत के अन्दर तो कभी उसकी गाण्ड के छेद में करता रहा और जब वो कमर उठाती तो मेरा अंगूठा उसकी गाण्ड में घुस जाता।
ऐसे ही करते-करते मैंने अपना पूरा अंगूठा उसकी गाण्ड में पेल दिया।
अब उसने भी मेरी चड्डी उतार दी और मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
मैं समझ गया था कि वो क्या चाहती है। मैं थोड़ा पीछे हटा तो मेरा लंड बिल्कुल उसके मुँह के ऊपर आ गया और उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।
वाह.. मेरे लंड के आस पास.. उसके नर्म होंठों का.. क्या मस्त अहसास था।
जब उसने लंड मुँह में लिया तो मैंने थोड़ा सा नीचे को ज़ोर लगाया और मेरे लंड का सुपारा उसके मुँह में खुल गया।
उसने मेरा पूरा लंड अपने मुँह की गहराई में समा लिया।
अब मैं नीचे उसकी चूत चाट रहा था और दूसरी तरफ उसका मुँह चोद रहा था।
कुछ देर ऐसे ही चलता रहा।
फिर मामी ऊपर आ गईं और उसने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी।
मैं चाटने लगा और वो मेरे मुँह पर बैठी अपनी कमर हिलाने लगी।
वो पूरे मज़े से चूत चटवाने का आनन्द ले रही थी।
‘अनुज .. मेरी गाण्ड चाट..’ वो बोली।
मैंने उसकी गाण्ड में भी जीभ फेरी तो वो अपनी कमर मेरे मुँह पर हिलाती रही।
उसकी चूत के पानी से मेरा सारा मुँह भीगा हुआ था और उसके चुचियों से टपकते दूध ने मेरे बदन और बिस्तर गीला कर दिया था।
वो झुकी और मेरे लंड पे टूट पड़ी।
मस्ती से चूसते हुए उसने कई बार मेरे लंड पर काट लिया।
‘अनुज सिर्फ़ चाट मत.. इसको दांतों से काट.. खा..’
जैसे ही मैंने काटा… तो उसको थोड़ा दर्द हुआ.. पर उसने मना नहीं किया, मैं कभी काटता तो कभी चाटता… वो बड़े ज़ोर से अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती रही और मेरे लंड को पागलों की तरह चूसती रही।
फिर जैसे बिजली गिरी हो.. वो एकदम से तड़प उठी.. उसने इतने ज़ोर से अपनी चूत से मेरा मुँह दबा दिया कि मेरा तो साँस ही बंद हो गया।
मेरा पूरा लंड उसके मुँह में था..
उसने बिल्कुल मेरे लंड की जड़ में जाकर ज़ोर से काटा..
मैं तो वहीं खल्लास हो गया..
मेरे लंड से उसके मुँह में पिचकारियाँ छूट गईं।
कुछ उसके मुँह के अन्दर चला गया और कुछ बाहर गिर गया।
मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा मुँह खट्टे-नमकीन पानी से भर गया हो..
उसकी गाण्ड के बोझ से दबा मैं हिल नहीं सकता था..
सो उस पानी को पी गया।
काफ़ी देर हम ऐसे ही निढाल होकर लेटे रहे।
फिर वो एक तरफ को लुढ़क गई।
मैंने उसको देखा एक गोरी-चिट्टी सुंदर पंजाबी लड़की मेरे सामने खल्लास होकर नंगी पड़ी थी।
करीब आधा घंटा हम लेटे हुए एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर मैंने कहा- मामीज़ी, मैं चुदाई करना चाहता हूँ..
‘और ये जो किया.. वो क्या था?’
‘नहीं ये तो ठीक है.. पर मैंने आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा है, प्लीज़ मेरा उद्घाटन करवा दीजिए।
मामी हँसी- तो तूने आज तक कभी नहीं किया ना.. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
‘नहीं.. बस अब तो आप ही हो.. जो भी हो..’
‘अच्छा.. पहले ये बता इन्सेस्ट क्या होता है?’
‘अपने रिश्तों में चुदाई करना.. जैसे माँ.. बाप.. भाई-बहन… बाप-बेटी.. माँ-बेटा.. मामी भांजा.. चाचा-भतीजी.. इसे रिश्तों में चुदाई कहते हैं.. समझ गई हेमा डार्लिंग!
‘ओये होये.. मर जावां गुड़ खा के… चल आजा..’
यह कहकर मामी ने अपनी टाँगें मेरी तरफ कर के खोल दीं, मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी।
मेरा भी शेर एक मिनट में ही खड़ा हो गया।
हेमा ने अपनी टाँगें उठाईं और मेरे लंड को अपने चूत के मुँह पर रख लिया।
मैंने धीरे से उसे उसकी चूत में उतार दिया.. अब मैं चुदाई करने लगा।
मामी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
मुझे नमकीन सा स्वाद आया,
‘आपके होंठ नमकीन हैं..’
‘और तेरे खट्टे हैं..’ ये कह कर वो हँस दी और बात समझकर मैं भी हँस दिया।
आज भी मैं अपनी ज़िंदगी की इस चुदाई अनुभव नहीं भूला हूँ।


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