13-10-2026, 04:41 PM
रात के लगभग साढ़े बारह बज रहे थे।
अमन अभी तक सो नहीं पाया था। शरीर थका हुआ था, लेकिन दिमाग अभी भी बगीचे वाली दोपहर में उलझा हुआ था। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया और सिटकिनी लगा दी।
अमन उठकर बैठ गया। रेणु बिस्तर के किनारे बैठ गईं। उन्होंने अमन का चेहरा देखा और समझ गईं कि आज कुछ बड़ा हुआ है।
“बताओ,” उन्होंने सीधी आवाज में कहा। “पूरा बताना।”
अमन ने गहरी साँस ली। “दीदी… आज रुक्साना के साथ हो गया।”
रेणु की आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं। “पूरा बताओ। कैसे शुरू हुआ, कहाँ हुआ, क्या-क्या हुआ।”
अमन ने विस्तार से सब सुनाया। कैसे वह दो बजे बगीचे पहुँचा, कैसे रुक्साना लाल सूट में इंतजार कर रही थीं, कैसे बातों-बातों में छूने की नौबत आई। फिर पेड़ों के बीच ले जाना, उनके कपड़े उतरना, अमन का उनका मुँह लगाना, और उसके बाद की लंबी चुदाई। अमन ने दोनों पोजीशन, गाँड वाली बात, और रुक्साना की गालियाँ तक बता दीं। कोई बात नहीं छुपाई।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। उनके चेहरे पर न गुस्सा था, न हैरानी। बस एक गंभीर भाव था। जब अमन खत्म हुआ तो उन्होंने धीमे स्वर में पूछा, “दर्द तो नहीं हुआ तुझे?”
“हल्का सा… लंड में,” अमन ने जवाब दिया। “लेकिन अब ठीक है।”
रेणु ने सिर हिलाया। “रुक्साना ने क्या कहा बाद में?”
“बोल रही थीं कि अब मैं सिर्फ बाबूजी का बेटा नहीं रहा उनके लिए। और… फिर आने को कहा।”
रेणु कुछ पल चुप रहीं। फिर अमन का हाथ पकड़ लिया। “सुन, अब से और सावधान रहना। रुक्साना राजिया की माँ है। अगर राजिया को जरा भी अंदाजा लग गया तो उलझन बढ़ जाएगी। तूने आज जो किया वह छुपाना आसान नहीं होगा।”
अमन ने सिर हिलाया। “समझ गया दीदी।”
रेणु ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। आँखों में आँखें डालकर बोलीं, “तुम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हो अमन। कमला चाची, राजिया, अब रुक्साना… सब तुम्हारे हाथ लग रही हैं। लेकिन याद रखना—हर नया संबंध एक नया खतरा लेकर आता है।”
अमन ने रेणु के हाथों पर अपना हाथ रखा। “दीदी… आप बार-बार सावधान करती हो। लेकिन आप खुद कब तक बचोगी मुझसे?”
रेणु का चेहरा हल्का लाल हो गया। उन्होंने अमन का हाथ छुड़ाया लेकिन मुस्कान रोक नहीं पाईं। “आज फिर वही बात शुरू कर दी तूने।”
“सच पूछो तो,” अमन ने धीमे स्वर में कहा, “आज रुक्साना के साथ होते हुए भी दिमाग में आप आ रही थीं। सोच रहा था… काश आप होतीं।”
रेणु ने उसकी तरफ देखा। कुछ पल की चुप्पी के बाद वे झुकीं और अमन के होंठों पर एक नरम चुंबन कर दिया। चुंबन गहरा नहीं था, लेकिन उसमें एक अजीब सी मिठास थी। जब वे पीछे हटीं तो उनकी आवाज बहुत धीमी थी।
“थोड़े दिन और सब्र रख। मैं वादा करती हूँ… जल्द ही वह रात आएगी।”
अमन ने उनका हाथ फिर से पकड़ लिया। “सच दीदी?”
“सच।” रेणु ने उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। “अब सो जा। आज काफी हो गया।”
वे उठ खड़ी हुईं। लालटेन उठाई। दरवाजे तक जाकर एक बार मुड़ीं। “और हाँ… रुक्साना से अगली मुलाकात से पहले मुझे जरूर बताना। समझे?”
अमन ने सिर हिलाया। “जैसी आज्ञा दीदी।”
रेणु मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं। दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
अमन बिस्तर पर लेट गया। रेणु के चुंबन की गर्माहट अभी भी होंठों पर थी। साथ में रुक्साना की चीखें और उसका शरीर भी दिमाग में घूम रहा था।
आज का दिन बहुत लंबा और घटनापूर्ण रहा था। बहनों के साथ शहर, कॉफी शॉप वाली सोनाल का गुस्सा, फिर रुक्साना के साथ बगीचे वाली दोपहर, और अब रेणु का वादा।
वह करवट लेकर लेटा। आँखें बंद करते ही नींद आने लगी।
रात फिर से शांत हो गई। लेकिन अमन के जीवन में अब एक और महिला जुड़ चुकी थी—रुक्साना।
रेणु के जाने के बाद अमन अँधेरे में लेटा रहा। नींद आने ही वाली थी कि अचानक उसके दिमाग में एक बात कौंध गई।
रुक्साना ने बगीचे में कहा था—“राजिया ने सही कहा था…”
अमन की आँखें खुल गईं। उसने छत की तरफ देखा। दिमाग तेजी से चलने लगा।
राजिया ने अपनी माँ को सब बता रखा है।
कल रात वाली बात हो या उससे पहले की… रुक्साना जानती थी। इसलिए वह इतनी बेशर्मी से अमन के पीछे पड़ी थी। माँ-बेटी दोनों एक-दूसरे की बातें जानती थीं।
अमन के होंठों पर धीमी सी मुस्कान तैर गई। उसने करवट ली और धीमे से अपने आप से कहा,
“कोई बात नहीं… अगली बार दोनों को साथ पकड़ूँगा। माँ-बेटी को एक साथ चोदूँगा।”
यह ख्याल उसके दिमाग में गूंजता रहा। रुक्साना की मोटी गाँड और राजिया का जवान शरीर… दोनों एक साथ। ख्याल ही इतना उत्तेजक था कि लंड हल्का सा तन गया, लेकिन थकान ने जल्दी ही उस पर काबू पा लिया।
अमन ने आँखें बंद कीं। मुस्कान अभी भी चेहरे पर थी।
थोड़ी देर में उसकी साँसें नियमित हो गईं। वह गहरी नींद में सो गया।
रात पूरी तरह शांत हो गई।
लेकिन अमन के मन में एक नया, खतरनाक ख्याल जन्म ले चुका था।
अमन अभी तक सो नहीं पाया था। शरीर थका हुआ था, लेकिन दिमाग अभी भी बगीचे वाली दोपहर में उलझा हुआ था। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया और सिटकिनी लगा दी।
अमन उठकर बैठ गया। रेणु बिस्तर के किनारे बैठ गईं। उन्होंने अमन का चेहरा देखा और समझ गईं कि आज कुछ बड़ा हुआ है।
“बताओ,” उन्होंने सीधी आवाज में कहा। “पूरा बताना।”
अमन ने गहरी साँस ली। “दीदी… आज रुक्साना के साथ हो गया।”
रेणु की आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं। “पूरा बताओ। कैसे शुरू हुआ, कहाँ हुआ, क्या-क्या हुआ।”
अमन ने विस्तार से सब सुनाया। कैसे वह दो बजे बगीचे पहुँचा, कैसे रुक्साना लाल सूट में इंतजार कर रही थीं, कैसे बातों-बातों में छूने की नौबत आई। फिर पेड़ों के बीच ले जाना, उनके कपड़े उतरना, अमन का उनका मुँह लगाना, और उसके बाद की लंबी चुदाई। अमन ने दोनों पोजीशन, गाँड वाली बात, और रुक्साना की गालियाँ तक बता दीं। कोई बात नहीं छुपाई।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। उनके चेहरे पर न गुस्सा था, न हैरानी। बस एक गंभीर भाव था। जब अमन खत्म हुआ तो उन्होंने धीमे स्वर में पूछा, “दर्द तो नहीं हुआ तुझे?”
“हल्का सा… लंड में,” अमन ने जवाब दिया। “लेकिन अब ठीक है।”
रेणु ने सिर हिलाया। “रुक्साना ने क्या कहा बाद में?”
“बोल रही थीं कि अब मैं सिर्फ बाबूजी का बेटा नहीं रहा उनके लिए। और… फिर आने को कहा।”
रेणु कुछ पल चुप रहीं। फिर अमन का हाथ पकड़ लिया। “सुन, अब से और सावधान रहना। रुक्साना राजिया की माँ है। अगर राजिया को जरा भी अंदाजा लग गया तो उलझन बढ़ जाएगी। तूने आज जो किया वह छुपाना आसान नहीं होगा।”
अमन ने सिर हिलाया। “समझ गया दीदी।”
रेणु ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। आँखों में आँखें डालकर बोलीं, “तुम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हो अमन। कमला चाची, राजिया, अब रुक्साना… सब तुम्हारे हाथ लग रही हैं। लेकिन याद रखना—हर नया संबंध एक नया खतरा लेकर आता है।”
अमन ने रेणु के हाथों पर अपना हाथ रखा। “दीदी… आप बार-बार सावधान करती हो। लेकिन आप खुद कब तक बचोगी मुझसे?”
रेणु का चेहरा हल्का लाल हो गया। उन्होंने अमन का हाथ छुड़ाया लेकिन मुस्कान रोक नहीं पाईं। “आज फिर वही बात शुरू कर दी तूने।”
“सच पूछो तो,” अमन ने धीमे स्वर में कहा, “आज रुक्साना के साथ होते हुए भी दिमाग में आप आ रही थीं। सोच रहा था… काश आप होतीं।”
रेणु ने उसकी तरफ देखा। कुछ पल की चुप्पी के बाद वे झुकीं और अमन के होंठों पर एक नरम चुंबन कर दिया। चुंबन गहरा नहीं था, लेकिन उसमें एक अजीब सी मिठास थी। जब वे पीछे हटीं तो उनकी आवाज बहुत धीमी थी।
“थोड़े दिन और सब्र रख। मैं वादा करती हूँ… जल्द ही वह रात आएगी।”
अमन ने उनका हाथ फिर से पकड़ लिया। “सच दीदी?”
“सच।” रेणु ने उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। “अब सो जा। आज काफी हो गया।”
वे उठ खड़ी हुईं। लालटेन उठाई। दरवाजे तक जाकर एक बार मुड़ीं। “और हाँ… रुक्साना से अगली मुलाकात से पहले मुझे जरूर बताना। समझे?”
अमन ने सिर हिलाया। “जैसी आज्ञा दीदी।”
रेणु मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं। दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
अमन बिस्तर पर लेट गया। रेणु के चुंबन की गर्माहट अभी भी होंठों पर थी। साथ में रुक्साना की चीखें और उसका शरीर भी दिमाग में घूम रहा था।
आज का दिन बहुत लंबा और घटनापूर्ण रहा था। बहनों के साथ शहर, कॉफी शॉप वाली सोनाल का गुस्सा, फिर रुक्साना के साथ बगीचे वाली दोपहर, और अब रेणु का वादा।
वह करवट लेकर लेटा। आँखें बंद करते ही नींद आने लगी।
रात फिर से शांत हो गई। लेकिन अमन के जीवन में अब एक और महिला जुड़ चुकी थी—रुक्साना।
रेणु के जाने के बाद अमन अँधेरे में लेटा रहा। नींद आने ही वाली थी कि अचानक उसके दिमाग में एक बात कौंध गई।
रुक्साना ने बगीचे में कहा था—“राजिया ने सही कहा था…”
अमन की आँखें खुल गईं। उसने छत की तरफ देखा। दिमाग तेजी से चलने लगा।
राजिया ने अपनी माँ को सब बता रखा है।
कल रात वाली बात हो या उससे पहले की… रुक्साना जानती थी। इसलिए वह इतनी बेशर्मी से अमन के पीछे पड़ी थी। माँ-बेटी दोनों एक-दूसरे की बातें जानती थीं।
अमन के होंठों पर धीमी सी मुस्कान तैर गई। उसने करवट ली और धीमे से अपने आप से कहा,
“कोई बात नहीं… अगली बार दोनों को साथ पकड़ूँगा। माँ-बेटी को एक साथ चोदूँगा।”
यह ख्याल उसके दिमाग में गूंजता रहा। रुक्साना की मोटी गाँड और राजिया का जवान शरीर… दोनों एक साथ। ख्याल ही इतना उत्तेजक था कि लंड हल्का सा तन गया, लेकिन थकान ने जल्दी ही उस पर काबू पा लिया।
अमन ने आँखें बंद कीं। मुस्कान अभी भी चेहरे पर थी।
थोड़ी देर में उसकी साँसें नियमित हो गईं। वह गहरी नींद में सो गया।
रात पूरी तरह शांत हो गई।
लेकिन अमन के मन में एक नया, खतरनाक ख्याल जन्म ले चुका था।
Fuckuguy
albertprince547;
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