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बहन का खुला आसमान और भाई का साथ
#3
Update 2

हर्ष.............

शाम को मैं और जीजू बगीचे में घूमने गए। वहाँ एक जगह बैठकर हम बातें करने लगे।

जीजू: और बताओ हर्ष, क्या चल रहा है?  
मैं: कुछ नहीं जीजू, सब बढ़िया।  
जीजू: कोई लड़की पटाई की नहीं?  
मैं: कहाँ जीजू, अभी तक कोई नहीं पटी।  
जीजू: अरे क्या बात कर रहे हो? यानी कि अभी तक चूत देखी भी नहीं?  
मैं: हाँ जीजू।  
जीजू: मैंने तेरी उम्र में तो चोद भी लिया था।  
मैं: वाओ जीजू, कौन थी?  
जीजू: मेरे एक दोस्त की बहन थी।  
मैं: लेकिन दोस्त की बहन हमारी भी बहन जैसी होती है। दोस्त की बहन चोदना गलत नहीं?  
जीजू: देख हर्ष, जब लड़की चुदवाना चाहती हो तो वो किसी से भी चुदवा कर ही रहती है। अगर मैं उसे नहीं चोदता तो वो किसी और से चुदवाने लगती। बेहतर था कि मैं ही उसे चोदूँ। उसकी सेफ़्टी तो रहेगी। और वैसे भी मैंने मेरे दोस्त को बता दिया था कि उसकी बहन मुझसे चुदवाना चाहती थी और मैं उसे चोदता हूँ।  
मैं: फिर आपके दोस्त ने क्या कहा?  
जीजू: उसे भी ठीक लगा। किसी अनजान से चुदवाने से बेहतर है मैं ही उसे चोदूँ। किसी गैर पे भरोसा नहीं कर सकते। क्या पता बाद में वो उसे ब्लैकमेल करे या अपने दोस्तों से भी चुदवाए या फिर उसकी वीडियो इंटरनेट पे डाल दे।  
मैं: हाँ ये बात तो सही है। एक बार इज्जत चली गई फिर वापस नहीं आती।  
जीजू: हाँ भाई, क्या करें, हमने लड़की की इज्जत को उसकी चूत के अंदर क़ैद कर लिया है। अगर किसी लड़की की चूत में लंड चला गया मतलब उसकी इज्जत चली गई। और लड़का चाहे कुछ भी करे।  
मैं: हाँ जीजू, लेकिन क्या करें, हमारी सोसाइटी ऐसे ही चलती है। सबके लिए अलग नियम हैं।  
जीजू: अच्छा चल, वो सब जाने दे। एक बात बता, तू दारू पीता है कि नहीं?

(मुझे पता था जीजू क्यों पूछ रहे हैं, लेकिन मैं क्या बोलता। जीजू से मैं झूठ बोलना नहीं चाहता था और सच बोलता तो दीदी का भरोसा टूट जाता। आख़िरकार मैंने सच बोला।)

मैं: हाँ जीजू, पीता हूँ।  
जीजू: अरे तो इतना सोच क्यों रहे हो। ये तो नॉर्मल है और तुम कोई गलत काम तो नहीं कर रहे। चल आज रात को थोड़ी पार्टी कर लें।  
मैं: नहीं जीजू, दीदी क्या सोचेंगी।  
जीजू: देख हर्ष, जिनसे हम दिल से प्यार करते हैं उनके सामने कुछ छुपाना नहीं चाहिए और ऐसी दोहरी ज़िंदगी नहीं जीनी चाहिए। दुनिया के सामने हम ये सब छुपाने को मजबूर हैं लेकिन अपनों के साथ खुलकर जीना चाहिए। हो सकता है तुम्हारी दीदी को ये जानकर शॉक लगे लेकिन अगर बाद में पता चला कि तुमने झूठ बोला है तो उसे शॉक नहीं लगेगा बल्कि दुख होगा। और मैं पिनल को दुखी नहीं देख सकता। इसलिए बेहतर है कि तुम अपनी दीदी से कुछ न छुपाओ। और उसे उतना भी शॉक नहीं लगेगा जैसा तुम सोच रहे हो।  
मैं: वो कैसे?  
जीजू: वो रात को पार्टी करते वक्त बताऊँगा।  
मैं: ठीक है जीजू।  
जीजू: फिर पार्टी करते हैं रात को।  
मैं: हाँ जीजू, करते हैं।  
जीजू: अच्छा तुम सिर्फ़ बीयर पीते हो या सब कुछ?  
मैं: कुछ भी चलेगा जीजू।  
जीजू: ये हुई ना बात।

फिर हम घर आ गए।

घर आकर जीजू दीदी को अपने कमरे में ले गए। मेरे मन में ख्याल आया कि वह दोनों क्या बातें कर रहे होंगे और जीजू अचानक दीदी को अपने कमरे में क्यों ले गए। मैंने ईयरफ़ोन लगाए और दोनों की बातें सुनने लगा।

जीजू: आज मैं और तुम्हारा भाई पार्टी करने वाले हैं।  
दीदी: क्या, इसका मतलब मेरा छोटा भाई शराब पीता है।  
जीजू: अरे तुम इतना ओवररिएक्ट क्यों कर रही हो। वो छोटा बच्चा नहीं है। तुम्हीं उसे छोटा बच्चा समझ रही हो।  
दीदी: हाँ शायद मैं उसे आज भी बहुत छोटा समझ रही हूँ लेकिन वह बड़ा हो गया है। मुझे समझना चाहिए था।  
जीजू: अच्छा हम ऊपर वाले कमरे में जाकर पार्टी करते हैं और बाद में आकर सब साथ में खाना खाएँगे।

जीजू बाहर आए और मुझे ऊपर वाले कमरे में ले गए। फिर हम दोनों पार्टी करने बैठे। जीजू ने पेग बनाए और हम दारू पीने लगे।

मैं: अच्छा जीजू, आप बता रहे थे कि दीदी को शॉक नहीं लगेगा तो क्या बात थी।  
जीजू: वैसे तो मुझे यह बात तुम्हें नहीं करनी चाहिए लेकिन फिर भी बताता हूँ। तुम्हारी दीदी भी दारू पीती है।

मेरा मुँह खुला रह गया।

मैं: क्या सच में?  
जीजू: हाँ भाई, तुम्हारी दीदी को बीयर और वाइन बहुत पसंद है। वैसे वह सब कुछ पीती है। लेकिन तुम अपनी दीदी को जज मत करो। सबको अपनी लाइफ़ खुलकर जीने का पूरा अधिकार है। और मैंने तुम्हारी बहन को पूरी छूट दे रखी है। वह जैसे चाहे अपनी लाइफ़ जी सकती है।  
मैं: नहीं जीजू, मैं दीदी को जज नहीं कर रहा हूँ लेकिन मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, बस इतनी-सी बात है।  
जीजू: तुम दोनों भाई-बहन एक जैसे हो। खुद तो सब कुछ करना चाहते हो और करते भी हो लेकिन सोचते हो कि दूसरा यह न करे।  
मैं: नहीं नहीं जीजू, ऐसी बात नहीं है। दीदी कुछ भी करें, अगर दीदी खुश हैं तो मैं भी खुश हूँ।  
अच्छा जीजू, और भी कुछ बताओ न दीदी के बारे में।  
जीजू: नहीं हर्ष, और मैं कुछ नहीं बताऊँगा। ये तुम्हारी दीदी की पर्सनल लाइफ़ है। जितना तुम्हारी दीदी तुम्हें बताना चाहेंगी वो खुद बताएँगी। दारू वाली बात कोई बड़ी बात नहीं और तुम थोड़ा कंफ़र्टेबल हो इसलिए बताई।  
मैं: हाँ जीजू, मुझे पूछना भी नहीं चाहिए था।

हमें ठीक-ठीक नशा हो गया था।

जीजू: एक और बात है।  
मैं: क्या बात है?  
जीजू: तुम्हारी दीदी ने आज तुम आने वाले थे इसीलिए सलवार-कुर्ता पहना है।  
मैं: ऐसा क्यों जीजू?  
जीजू: तुम्हारी दीदी को सलवार-कुर्ता पहनने की आदत नहीं। वो घर में हल्के-फुल्के कपड़े ही पहनती हैं। लेकिन उन्हें तुम्हारे सामने शर्म आ रही थी इसीलिए सलवार-कुर्ता पहना है।  
मैं: अरे मुझसे कैसा शर्माना। मैं तो सगा भाई हूँ, वो भी सात साल छोटा। दीदी कुछ भी पहनें मैं जज नहीं करूँगा, आप दीदी को बता देना। वैसे मुझे लग रहा था कि दीदी कंफ़र्टेबल नहीं हैं कपड़ों में।  
जीजू: ऐसा करते हैं, कल तुम्हारी दीदी के लिए नए कपड़े लेने चलते हैं। तुम ही पसंद करना अपनी दीदी के कपड़े।  
मैं: अरे लेकिन मैं कैसे पसंद करूँ? मुझे तो कुछ समझ नहीं आएगा। और दीदी के पास घर में पहनने के कपड़े तो होंगे ही।  
जीजू: कपड़े तो हैं लेकिन वो कुछ ज़्यादा ही छोटे हैं। तुम्हारी दीदी अकेली थीं तो पहनती थीं लेकिन तुम्हारे सामने उन्हें शर्म आएगी। और हम तीनों चलेंगे साथ में और मिलकर पसंद करेंगे।  
मैं: ठीक है जीजू।

फिर हम खाना खाने नीचे आए। दीदी हमारा इंतज़ार कर रही थीं। मैं और जीजू थोड़े नशे में थे लेकिन ज़्यादा नहीं। दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं और खा रही थीं। वैसे दीदी बहुत प्यारी लग रही थीं। मेरा मन दीदी को फिर से गले लगाने का हो रहा था।

हमने खाना खाया और थोड़ी देर बैठकर बातें कीं फिर गुड नाइट बोलकर अपने-अपने कमरों में जाने लगे। लेकिन जीजू ने रोक लिया।

जीजू: अरे ऐसे कोई गुड नाइट बोलता है। एक-दूसरे से गले मिलो और अच्छे से गुड नाइट बोलो।

इस बार दीदी ने कुछ नहीं कहा और मेरी ओर आने लगीं। मैं भी थोड़ा नशे में था। दीदी के पास आते ही मैंने दीदी को बाँहों में भर लिया। दीदी ने भी मुझे गले लगा लिया। फिर से दीदी के कठोर स्तन मुझे महसूस होने लगे। थोड़ी देर बाद दीदी ने गुड नाइट कहा और मैंने भी, और हमने एक-दूसरे को छोड़ा। हम अपने-अपने कमरों में चले गए। कमरे में आते ही मैं ईयरफ़ोन लगाकर दीदी और जीजू की बातें सुनने लगा।

जीजू: अरे क्या कर रही हो। आओ ना।  
दीदी: पहले ये सलवार-कुर्ता निकाल दूँ।  
जीजू: मैं निकाल दूँगा।  
दीदी: नहीं, मैं अभी निकाल देती हूँ। बहुत अनकंफ़र्टेबल लग रहा है।

थोड़ी देर बाद दीदी फिर से: हाँ अब ठीक लग रहा है। पता नहीं रोज़-रोज़ मैं कैसे पहनूँगी।  
जीजू: फ़िकर मत करो, कल से पहनने की ज़रूरत नहीं।  
दीदी: क्यों? हर्ष का क्या?  
जीजू: मेरी हर्ष से बात हो गई है। उसने कहा कि दीदी कुछ भी पहनें मैं जज नहीं करूँगा।  
दीदी: क्या, हर्ष ने ऐसा कहा? मैं नहीं मानती। मतलब मैं कुछ भी पहनूँगी तो उसे चलेगा। मेरा भाई मेरी कितनी रिस्पेक्ट करता है, वो ऐसा कह ही नहीं सकता।  
जीजू: तुम्हारी कसम जानू।

(दीदी इमोशनल हो गईं)

दीदी: अरे इतनी-सी बात में तुमने कसम खाई, मुझे तुमपे पूरा यकीन है। मैं जानती हूँ तुम मुझसे कितना प्यार करते हो। मैंने तो ऐसे ही बोल दिया।

(सच तो था कि मैंने ऐसा कहा था लेकिन मैंने जिस तरह से कहा था और दीदी जिस तरह समझ रही थीं वो अलग था। मेरा मतलब था दीदी सलवार-कुर्ते के अलावा और कुछ भी पहन सकती हैं और दीदी समझ रही थीं कि कुछ भी मतलब कुछ भी पहनना। वैसे जीजू ने कसम झूठी नहीं खाई थी।)

दीदी: लेकिन कुछ भी मतलब क्या पहनूँ? मेरे पास जो है उसे तो बिल्कुल नहीं पहन सकती।  
जीजू: क्यों?  
दीदी: अरे वो कपड़े कैसे हैं तुम्हें पता है ना। नीचे बस मेरी गाँड़ कवर होगी बाकी सब खुला रहेगा और चलते-फिरते मेरी चड्डी दिखाई देगी। ऊपर भी आधे से ज़्यादा बूब्स बाहर रहते हैं।  
जीजू: तो फिर ऐसा करते हैं, हर्ष को कहीं आसपास एक कमरा किराए पर ले देते हैं।  
दीदी (गुस्से होकर): देखो आज तुमने कहा सो कहा, आज के बाद कभी ऐसी बात मत करना। चाहे कुछ भी हो, मेरा भाई मेरे साथ ही रहेगा। मैं इस अनजान शहर में उसे मुझसे जुदा नहीं रखूँगी। और मैं कितनी खुश हूँ कि मेरे भाई के साथ रहने का मुझे मौका मिला है, वो भी शादी के बाद। और तुम उसे मुझसे दूर करने की बात कर रहे हो।  
जीजू (हँसते हुए): अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था। मेरी हर्ष से बात हुई है। कल हम तीनों तुम्हारे लिए कपड़े लेने जाएँगे और तुम्हारा भाई खुद तुम्हारे लिए कपड़े पसंद करेगा। फिर तो कोई दिक्कत नहीं है ना। वो तो तुम भाई के सामने पहन सकती हो क्योंकि उसकी पसंद के ही कपड़े होंगे तो तुम्हें शर्म भी नहीं आएगी।  
दीदी: हाँ ये ठीक है। लेकिन उसे मेरे कपड़ों की समझ नहीं होगी।  
जीजू: फ़िकर मत करो, उसे सब समझ आती होगी और हम भी तो साथ होंगे। चलो अब आ भी जाओ।

फिर किसिंग की आवाज़ आने लगी। शायद अब उनकी चुदाई शुरू होने वाली थी। वैसे तो अब मुझे नहीं सुनना चाहिए था लेकिन मैं सुनता रहा। दीदी आह… ओह… धीरे… जानू… धीरे… करती रहीं। दीदी की आवाज़ें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने लंड शॉर्ट और जांघिए से बाहर निकाला और सहलाने लगा। दीदी की कामुक आवाज़ें सुनकर लंड सहलाना बहुत अच्छा लग रहा था। दीदी की आवाज़ पतली थी और दीदी की सिसकारियाँ बहुत मादक लग रही थीं। वैसे दीदी को लेकर मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं था। मैं बस दीदी की सिसकारियाँ सुनके लंड हिला रहा था। दीदी भी चाटो जानू… अंदर जीभ डालके चाटो… आह… ओह… ऐसा कर रही थीं। शायद जीजू दीदी की चूत चाट रहे थे। थोड़ी देर बाद थप… थप… की आवाज़ें आने लगीं। शायद जीजू दीदी को चोद रहे थे। मेरा लंड पूरा तन गया था।

थोड़ी देर बाद दीदी को चोदते हुए जीजू ने कहा:

जीजू: जानू तुम हर्ष की फ़िक्र मत करना। मैं तुम्हें कभी तुम्हारे भाई से जुदा नहीं करूँगा। मैं भी उसे अपना छोटा भाई मानता हूँ।  
दीदी: आह… अच्छा… हर्ष तुम्हारा छोटा भाई… तो फिर मैं भी तुम्हारी बड़ी बहन हो गई। आह… क्योंकि तुम मुझसे छोटे हो।  
जीजू: हाँ ये तो हुआ।  
दीदी: तो क्या तुम अभी अपनी दीदी को चोद रहे हो। बोलना बहन चोद। बोलता क्यों नहीं।  
जीजू: हाँ मैं अपनी दीदी को चोद रहा हूँ। तुम मेरी बहन हो और मैं तुम्हारा भाई हूँ और मेरा लंड मेरी बहन की चूत में है। आह… कितना मज़ा आता है बहन को चोदने में।

उनकी बातें सुनकर मेरी हालत खराब हो गई थी। यह जीजू और दीदी क्या बातें कर रहे हैं। जीजू दीदी को अपनी बहन बोल रहे हैं और दीदी जीजू को अपना भाई बोल रही हैं और भाई-बहन बोलकर मज़े से चुदाई कर रहे हैं। वैसे ये बातें सुनकर मेरा पानी निकलने को हो गया था।

दीदी: चोदना भाई अपनी बहन को। देख तुम्हारी बहन कैसे तड़प रही है तुम्हारा लंड लेने के लिए। मज़ा आ रहा है ना अपनी बहन को चोदने में। बोलना बहन चोद, कैसा लग रहा है अपनी बहन को चोदते हुए।  
जीजू: हाँ दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है अपनी बहन को चोदने में। क्या चूत है तुम्हारी, ऐसा लगता है कि रात-दिन तुम्हें चोदता रहूँ।  
दीदी: हाँ भाई, चोद अपनी बहन को। तुम्हारी बहन बहुत चुदक्कड़ है। उसे हर वक्त लंड चाहिए। खूब चोद अपनी बहन को और उसकी चूत की खुजली मिटा दे। आह… चोद बहनचोद… और तू नहीं चोद सकता तो किसी और को बुला ले, जो तुम्हारी बहन को तुम्हारे ही सामने चोदे।  
जीजू: हाँ दीदी, मैं भी चोदूँगा और किसी बड़े और मोटे लंड वाले से चुदवाऊँगा। जो चोद-चोद कर तुम्हारी चूत फाड़ दे।  
दीदी: हाँ भाई, मुझे तुम्हारे सामने चुदवाने में बहुत मज़ा आएगा। खूब चुदवाना अपनी बहन को और तू भी चोदना।  
जीजू: हाँ दीदी, खूब चोदूँगा तुम्हें और बड़े-बड़े लंड से चुदवाऊँगा दीदी। खूब चुदवाऊँगा तुम्हें। आह… दीदी मेरा निकलने वाला है। दीदी… मेरा निकलने वाला है।  
दीदी: आह… भाई निकाल दे अपना सारा पानी अपनी बहन की चूत के अंदर। भर दे अपने पानी से अपनी बहन की चूत।

फिर जीजू दीदी को बहुत तेज़-तेज़ चोदने लगे। शायद उनका निकलने वाला था। यहाँ मेरे लंड ने पिचकारियाँ छोड़ना शुरू कर दीं और वहाँ जीजू भी ज़ोर से चिल्लाए—आह… दीदी… दीदी मेरा निकल रहा है।

थोड़ी देर बिल्कुल शांति रही। थोड़ी देर बाद जीजू बोले…

जीजू: कैसा लगा जानू?  
दीदी: बहुत मज़ा आया।  
जीजू: याद है तुम्हें जब हम पहले भाई-बहन वाला रोल प्ले करते थे तब तुम कैसे गुस्से हो जाती थीं।  
दीदी: हाँ बाबू, याद है। लेकिन उस वक्त जब तुम मेरी चूत में लंड डालकर मुझे चोदते थे और मुझे दीदी-दीदी बोलते थे तब मेरे सामने मेरे भाई का चेहरा आ जाता था और मुझे लगता था कि मैं अपने सगे भाई से चुदवा रही हूँ और मेरा सगा भाई मुझे चोद रहा है। इसीलिए मैं गुस्सा हो जाती थी। क्योंकि अपने भाई से चुदवाना कैसा अजीब लगता है तुम समझ सकते हो। और मेरा भाई तो मेरे बारे में ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता।  
लेकिन बाद में मुझे समझ आया कि मुझे तुम्हें ही भाई के रूप में इमेजिन करना है, ना कि अपने सगे भाई को।

(अब मेरे भी समझ में आ गया कि वह दोनों रोल प्ले कर रहे थे। यह भाई-बहन वाला रोल प्ले मैंने सुन रखा था लेकिन आज अपनी सगी बहन को भाई-बहन वाला रोल प्ले करते सुनके थोड़ा अजीब लगा था। लेकिन थोड़ी ही देर में मेरे लंड का पानी निकाल दिया था, वरना इतना जल्दी मेरा पानी नहीं निकलता। अब मुझे नींद आने लगी थी और शायद दीदी और जीजू भी सो गए थे। फिर पता नहीं मैं कब सो गया।)
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RE: बहन का खुला आसमान और भाई का साथ - by Rahulraj306 - 12-10-2026, 10:51 PM



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