12-10-2026, 02:14 PM
अमन ने धीरे-धीरे अपनी उंगली कमला चाची की गाँड से बाहर खींची। उंगली चमक रही थी और उससे तेल और उनकी गरमाई चिपकी हुई थी। कमला चाची ने एक लंबी, काँपती साँस ली। उनका शरीर अभी भी हल्की-हल्की लहरों में काँप रहा था।
अमन ने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ी और एक ही झटके में उन्हें चित कर दिया। कमला चाची अब बिस्तर पर फैली हुई थीं। उनके विशाल स्तन तेल की वजह से दीये की रोशनी में चमक रहे थे। निप्पल पूरी तरह खड़े और गाढ़े लाल हो चुके थे। अमन एक पल के लिए बस उन्हें निहारता रहा। फिर झुक गया।
उसने बाएँ स्तन को दोनों हथेलियों से दबाया और मुँह में भर लिया। इतनी जोर से चूसा कि कमला चाची की कमर बिस्तर से उठ गई और एक गहरी सिसकारी निकल गई।
“आआआह्ह्ह… अमन… हाँ… जोर से चूस… मेरे दूध को पी जा…”
अमन ने निप्पल को जीभ से तेज-तेज फटकारा, फिर दाँतों के बीच हल्के से दबाकर खींचा। दूसरा स्तन भी नहीं छोड़ा। एक हाथ से उसे मसलते हुए मुँह से दूसरे को जोर-जोर से चूसने लगा। कमला चाची के नाखून उसकी पीठ पर गड़ गए। उनकी साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं।
उसी समय अमन का दाहिना हाथ नीचे की तरफ बढ़ गया। उंगलियाँ उनकी गर्म जाँघों के बीच पहुँचीं। चूत पहले से ही पूरी तरह भीगी हुई थी। पानी जाँघों की अंदरूनी सतह पर चमक रहा था। अमन ने दो उंगलियाँ एक साथ अंदर धंसा दीं।
“आआआआह्ह्ह्ह…!” कमला चाची की चीख निकल गई। उनका शरीर मचल उठा।
अमन स्तन चूसते हुए उंगलियों को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। कभी उंगलियों को मोड़कर अंदर की दीवार को सहलाता, कभी अंगूठे से ऊपर वाली घुंडी को जोर से रगड़ता। कमला चाची का सिर बार-बार तकिये पर इधर-उधर हो रहा था। उनके स्तन अमन के मुँह और हाथों में दब-दबकर और भी लाल और संवेदनशील हो गए थे।
“आह्ह्ह… चूस मुझे… और उंगली… और तेज कर… आआह्ह… मेरी चूत पूरी गिली हो गई है तेरे लिए…”
थोड़ी देर बाद कमला चाची ने खुद अमन का हाथ पकड़कर ऊपर खींचा। उनकी आँखें कामुकता से भारी थीं। उन्होंने अमन के अंडरवियर के इलास्टिक में उंगलियाँ डाल दीं और एक झटके में उसे नीचे खींच दिया। अमन का मोटा, नसों से भरा, पूरी तरह खड़ा लंड झटके से बाहर निकल आया। सिर चमक रहा था और हल्का सा पानी टपक रहा था।
कमला चाची ने उसे दोनों हाथों में ले लिया। आँखें फैल गईं। उन्होंने लंड को धीरे-धीरे जड़ से लेकर सिर तक सहलाया।
“बाप रे… कितना मोटा और भारी हो गया है तू…,” उन्होंने हांफते हुए कहा। आवाज में हवस साफ थी। “इतना गरम… इतना सख्त… आज तो ये लंड मेरी चूत फाड़ देगा। कितना रसीला लग रहा है… मुँह में ले लूँ क्या?”
अमन ने कुछ नहीं कहा। बस उनकी जाँघें और चौड़ी कर दीं। खुद धीरे-धीरे नीचे सरक गया। कमला चाची के दोनों पैर उसके कंधों पर रख दिए। फिर अपना चेहरा उनकी पूरी खुली, चमकती और पानी से लथ-पथ चूत के सामने ले गया।
पहले उसने गहरी साँस में उनकी गंध ली। फिर जीभ निकालकर सबसे नीचे से लेकर ऊपर तक एक बहुत धीमा और लंबा चाटा मारा। कमला चाची की कमर जोर से उछल गई।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!”
अमन ने रुके बिना दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड पकड़ ली और अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर धंसा दी। तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। कभी ऊपर वाली घुंडी को जोर से चूसता, कभी जीभ को पूरा अंदर डालकर घुमाता, कभी नीचे की तरफ जाकर छोटी छेद को भी चाट जाता। चूसने और पानी की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं।
कमला चाची अब पूरी तरह नियंत्रण खो चुकी थीं। दोनों हाथों से अमन का सिर पकड़कर अपनी चूत में और जोर से दबाने लगीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्हह्ह… हाँ… ऐसे ही… मेरी रसीली चूत चूस… जीभ अंदर तक ले जा… आआह्ह… और तेज… अमन… मैं… मैं जाने को हुई… आआआह्ह्ह… माँаааа…!”
उनका शरीर अचानक बहुत तेज अकड़ गया। जाँघें अमन के सिर को जकड़ गईं। एक लंबी, काँपती और दबी हुई चीख निकलते हुए उनका पहला पानी अमन के मुँह, नाक और ठुड्डी पर छूट गया। अमन ने जीभ नहीं हटाई। वह उनकी चूत को धीरे-धीरे चाटता और चूसता रहा जब तक उनकी शरीर की लहरें पूरी तरह शांत नहीं हो गईं।
कमला चाची बिस्तर पर पूरी तरह ढीली पड़ी थीं। छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था। आँखें अधखुली थीं और होंठ हल्के-हल्के काँप रहे थे।
अमन धीरे से ऊपर उठा। उसके होंठ और ठुड्डी उनके पानी से चमक रहे थे। उसने कमला चाची के कान के पास होंठ ले जाकर बहुत धीमी लेकिन भारी आवाज में कहा,
“अब बाकी की प्यास भी बुझाऊँ चाची?”
कमला चाची ने हांफते हुए आँखें खोलीं। आवाज में सिर्फ हवस बची थी।
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अमन ने कमला चाची के कान के पास से होंठ हटाए। उनके चेहरे पर अभी भी पहला पानी छोड़ने के बाद की थकी हुई कामुकता तैर रही थी। अमन उठकर उनके सीने के सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसका मोटा, चमकता हुआ लंड सीधे उनके चेहरे के सामने झूल रहा था। सिर से हल्का सा पानी टपक रहा था।
कमला चाची ने आँखें खोलीं। उनकी निगाह लंड पर जाकर ठहर गई। उन्होंने दोनों हाथों से उसे जड़ से पकड़ लिया। हथेलियों में उसका वजन और गर्माहट महसूस करके उनकी साँसें फिर तेज हो गईं।
“इतना मोटा… इतना गरम…,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “आज तो मेरा मुँह भी फाड़ देगा ये।”
उन्होंने जीभ निकालकर लंड के सिर को धीरे-धीरे चाटा। चारों तरफ घुमाया। फिर आँखें अमन पर टिकाए हुए पूरा सिर मुँह में ले लिया। गहरी साँस के साथ नीचे की तरफ जाने लगीं। आधा लंड उनके मुँह में समा गया। गले तक।
“उम्मम्म… गह्ह्ह…” उनकी नाक से आवाज निकली।
अमन ने उनके बालों में उंगलियाँ फँसा लीं। लेकिन जोर नहीं लगाया। बस महसूस करता रहा। कमला चाची ने लंड को मुँह से बाहर निकाला। लार की लंबी डोर लटक रही थी। फिर से मुँह में लिया। इस बार और गहरा। उनकी गर्दन की मांसपेशियाँ तन गईं। वे जोर-जोर से चूसने लगीं—कभी सिर्फ सिर को चाटतीं, कभी पूरा अंदर ले जाकर गले तक ठेलतीं। आवाजें गंदी और गीली हो रही थीं।
“चाची… बहुत गहरा ले रही हो…,” अमन की आवाज भारी हो गई।
कमला चाची ने लंड मुँह से निकाला। हांफते हुए बोलीं, “तेरा लंड ही ऐसा है… मुँह में लेते ही चूत और भी गिली हो जाती है।” उन्होंने फिर से उसे मुँह में ठूंस लिया। दोनों हाथों से जड़ को मसलती रहीं। अमन की कमर हल्की-हल्की हिलने लगी।
थोड़ी देर बाद अमन ने उनका सिर पीछे खींचा। लंड उनके होंठों से छूटते ही एक पतली लार की लकीर टूटी। अमन ने उन्हें फिर से उल्टा कर दिया। कमला चाची अब घुटनों और हाथों के बल थीं। उनकी विशाल गाँड अमन के बिल्कुल सामने थी—गोल, चमकदार और थपथपाई हुई।
अमन ने दोनों हाथों से उनकी गाँड के भाग फैलाए। बीच में छोटी सी गुलाबी छेद तन गई। उसने झुककर पहले हल्की साँस फूँकी। फिर जीभ निकालकर सीधे उस छेद पर लगा दी।
“आआआह्ह्ह… अमन… वहाँ…!” कमला चाची की कमर झटके से आगे को चली गई।
अमन ने रुके बिना जीभ से उनकी गाँड की छेद को चाटना शुरू कर दिया। कभी गोला बनाता, कभी नोक अंदर धंसाता, कभी पूरे हिस्से को चूस लेता। कमला चाची की सिसकारियाँ अब तकिये में दब रही थीं। उनका शरीर बार-बार मचल रहा था।
“आह्ह्ह… ओоооह… जीभ… अंदर… आआह्ह… गंदी हरकत… लेकिन… मत रोक…!”
अमन ने उनकी गाँड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और जीभ और गहराई तक घुसेड़ दी। कमला चाची की जाँघें काँपने लगीं। पानी उनकी चूत से नीचे की तरफ रिस रहा था।
जब कमला चाची लगभग फिर से झड़ने के करीब पहुँचीं तो अमन ने अचानक पीछे हटा। उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। अपने लंड का सिर उनकी भीगी चूत पर लगाया। सिर्फ सिर। धीरे-धीरे अंदर धकेला और फिर बाहर निकाल लिया। फिर से सिर्फ सिर अंदर किया। बार-बार। पूरा नहीं डाला।
“आआआह्ह्ह… अमन… मत तड़पा… पूरा डाल…!” कमला चाची ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में याचना थी।
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। फिर से सिर्फ सिर अंदर-बाहर करने लगा। चूत की गीली आवाज आने लगी। कमला चाची खुद पीछे की तरफ धक्का देने लगीं, लेकिन अमन हर बार उन्हें रोक लेता।
“पूरा दे… रंडी की तरह चोद मुझे… आआह्ह… कितना तड़पा रहा है… डाल दे अंदर… पूरा…!” कमला चाची की आवाज अब टूट रही थी। गालियाँ और मिन्नतें एक साथ निकल रही थीं। “मेरी चूत फाड़ दे… आज मुझे अपनी रंडी बना ले… अमन… डाल…!”
अमन ने उनकी गाँड पर एक और थप्पड़ मारा। फिर कमर पकड़ी। और एक ही गहरे, जोरदार धक्के में अपना पूरा लंड उनकी चूत में जड़ तक धंसा दिया।
“आआआआआह्ह्ह्हह्ह…!”
कमला चाची की लंबी चीख कमरे में गूँज उठी। उनका शरीर आगे को झुक गया। अमन अंदर तक धंसा हुआ रुका रहा। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं।
अब असली चुदाई शुरू होने वाली थी।
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अमन का पूरा लंड कमला चाची की चूत में जड़ तक धंसा हुआ था। उनकी दीवारें उसके लंड को जोर से जकड़ रही थीं। दोनों एक पल के लिए थम गए। सिर्फ भारी साँसें चल रही थीं। फिर अमन ने कमला चाची की कमर दोनों हाथों से कसकर पकड़ी।
पहले धीमा धक्का। बाहर निकाला… और फिर एक ही झटके में पूरा अंदर तक धंसा दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की चीख निकली। उनके नाखून चादर में गड़ गए।
अमन ने अब रुकना बंद कर दिया। दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ उनकी गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। थप्पड़-थप्पड़ की आवाज कमरे में गूँजने लगी। लंड की घुसने-निकलने की गीली आवाज साफ सुनाई दे रही थी—छप-छप, छप-छप।
“ले… ले रंडी… इतनी गिली चूत… कितना पानी छोड़ रही है तू…!” अमन की आवाज भारी और गंदी हो गई थी।
“आआह्ह… ओоооह… हाँ… चोद… जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… आआह्ह…!” कमला चाची तकिये में मुँह गड़ाए चीख रही थीं। हर धक्के के साथ उनका शरीर आगे को झपटता। स्तन बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे।
अमन ने अचानक उनका बालों का जूड़ा पकड़कर सिर पीछे खींच लिया। उनकी कमर और ज्यादा मुड़ गई। अब धक्के और गहरे और तेज हो गए। कमला चाची की चीखें तेज हो गईं।
“आआआह्ह्ह… बाल खींच… और जोर से… आआह्ह… मेरी चूत में आग लग गई… अमन…!”
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। कमला चाची कराह उठीं। उन्होंने उन्हें चित कर दिया। दोनों पैरों को फैलाकर अपने कंधों पर रख लिया। फिर एक ही धक्के में पूरा लंड फिर से उनकी चूत में उतार दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… इतना गहरा…!”
अब अमन उनके ऊपर था। एक हाथ से उनका दाहिना स्तन जोर से मसल रहा था, दूसरे से उनकी कमर दबाए हुए था। धक्के इतने जोर के थे कि बिस्तर की चरमराने की आवाज भी आने लगी। कमला चाची के स्तन हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। निप्पल अमन की उंगलियों में दब-दबकर लाल हो चुके थे।
“चाची… तेरी चूत कितनी टाइट है… घुट रही है मेरे लंड को…!” अमन हांफते हुए बोला।
“आह्ह… क्योंकि तेरा लंड बहुत मोटा है… आआह्ह… और तेज… मत रोक… आज पूरी रात चोद…!”
अमन ने दोनों स्तनों को एक साथ मुट्ठी में भर लिया और निप्पलों को मरोड़ते हुए धक्के और तेज कर दिए। कमला चाची की आँखें उल्टी होने लगीं। उनका मुँह खुला रह गया। सिर्फ अस्पष्ट आवाजें निकल रही थीं—
“आआआह्ह… ओоооह… उउउम्म… अमन… मैं… फिर से… आआह्ह… जा रही हूँ…!”
उनका शरीर अकड़ गया। जाँघें अमन की कमर को जकड़ गईं। एक लंबी, काँपती चीख के साथ उनका दूसरा पानी अमन के लंड और जाँघों पर छूट गया। अमन रुका नहीं। वह उसी तेज गति से चोदता रहा। पानी की आवाज और भी तेज हो गई।
जब कमला चाची की काँपने की लहरें थोड़ी कम हुईं तो अमन ने उनके पैरों को अपने कंधों से उतारा। खुद पीछे हटा। कमला चाची हांफते हुए बिस्तर पर पड़ी थीं। चूत से पानी रिस रहा था। अमन ने उन्हें फिर से पलट दिया। इस बार गाँड और ऊँची करवाई। तकिया उनके पेट के नीचे रख दिया।
अब उनकी गाँड पूरी तरह उठ गई थी। अमन ने लंड का सिर उनकी चूत पर लगाया और एक ही झटके में जड़ तक धंसा दिया। फिर से डॉगी स्टाइल। लेकिन इस बार और गहराई वाला एंगल।
“आआआआह्ह्ह्ह… बाप रे… अब तो गर्भ तक जा रहा है…!” कमला चाची चिल्लाईं।
अमन ने उनकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। धक्के इतने जोर के थे कि कमला चाची का पूरा शरीर हर बार आगे को खिसक जाता। वे तकिये को मुँह से पकड़कर चीख रही थीं।
“ले रंडी… ले अपने भतीजे का लंड… इतनी चुदाई कभी किसी ने दी क्या तुझे…?”
“नहीं… आआह्ह… कभी नहीं… तेरा लंड सबसे अलग है… आआह्ह… चोद… मेरी गाँड भी लाल कर दे…!”
अमन ने एक हाथ उनकी गाँड की छेद पर रखा। उंगली गीली करके अंदर धंसा दी। अब एक साथ चूत में लंड और गाँड में उंगली चल रही थी। कमला चाची पागल हो गईं।
“आआआआह्ह्ह… दोनों जगह… आआह्ह… मैं मर जाऊँगी… अमन… बहुत हो गया… आआह्ह…!”
उनका तीसरा पानी भी उसी पोजीशन में निकल गया। शरीर इतना काँपा कि अमन को उनकी कमर कसकर पकड़नी पड़ी। अमन ने उंगली निकाल दी लेकिन लंड अंदर ही रखा। धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए उनकी पीठ पर झुक गया। कान के पास गंदी बातें करता रहा।
“अभी तो शुरू की है चाची… रात लंबी है… अभी तेरी दोनों छेद भरूँगा…”
कमला चाची हांफते हुए बस इतना कह पाईं, “भर… आज जितना चाहे भर दे… मैं तेरी रंडी हूँ…”
अमन ने मुस्कुराते हुए फिर से जोरदार धक्के शुरू कर दिए। बिस्तर की चरमराहट, मांस की थपथपाहट, गीली आवाजें और कमला चाची की बेकाबू चीखें—सब मिलकर कमरे को एक गंदे, गर्म जंगल में बदल चुके थे।
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अमन ने कमला चाची की कमर और कसकर पकड़ी। अब उसमें कोई रहम नहीं बचा था। उसने डॉगी स्टाइल में ही धक्के की रफ्तार अचानक दोगुनी कर दी। लंड उनकी चूत में इतनी तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था कि मांस की थपथपाहट और पानी की छप-छप की आवाज एक हो गई थी।
“आआआआह्ह्ह… अमन… धीरे… बहुत जोर से… आआह्ह… रुक…!” कमला चाची चिल्लाईं। उनका शरीर हर धक्के के साथ आगे को खिसक रहा था।
लेकिन अमन ने सुना ही नहीं। उसने उनके बालों को मुट्ठी में भरकर और पीछे खींच लिया। कमर झुका दी। अब हर धक्का गर्भ की गहराई तक जा रहा था। कमला चाची की चीखें और तेज हो गईं।
“आआआह्ह… चुतिया… इतना जोर से मत चोद… मेरी चूत फट जाएगी… आआह्ह…!”
अमन ने उनकी गाँड पर दो जोरदार थप्पड़ मारे। “चुप रख रंडी… तू तो इसलिए लेटी है कि मैं तुझे जानवर की तरह चोदूँ… ले अब…!”
वह और बेतहाशा हो गया। दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड को फैलाए हुए इतनी ताकत से धक्के मार रहा था कि कमला चाची का पूरा शरीर काँप रहा था। बिस्तर की चरमराने की आवाज तेज हो गई। कमला चाची अब गालियाँ बकने लगीं—बहुत गंदी।
“आआह्ह… साले… भतीजे का लंड… मेरी चूत में… आआह्ह… रंडी बना दी तूने मुझे… चोद… और चोद… हरामी… आआह्ह… मेरी चूत का पानी निकाल…!”
अमन ने अचानक लंड बाहर निकाला। कमला चाची कराह उठीं। उसने उन्हें फिर से चित किया। दोनों पैरों को फैलाकर लगभग कंधों तक मोड़ दिया। फिर एक ही झटके में पूरा लंड फिर से उनकी चूत में उतार दिया। अब मिशनरी में भी वही जानवर वाली ताकत थी।
“आआआआह्ह्ह्ह… बापू… इतना गहरा…!”
अमन उनके ऊपर लेट गया। एक हाथ से उनका गला हल्के से दबाए हुए था, दूसरे से स्तन मसल रहा था। धक्के इतने भारी थे कि कमला चाची की साँसें अटकने लगीं। वे अमन की पीठ पर नाखून चला रही थीं। खून की हल्की लकीरें निकल आईं।
“साले… जानवर… मेरी चूत फाड़ रहा है… आआह्ह… चोद… और तेज… रंडी की औलाद… आआह्ह…!”
अमन ने उनका गला छोड़कर दोनों स्तनों को मुट्ठी में भर लिया। निप्पलों को मरोड़ते हुए धक्के और तेज कर दिए। कमला चाची की आँखें अब पूरी तरह उल्टी हो चुकी थीं। मुँह से लार बह रही थी। वे सिर्फ गालियाँ और चीखें निकाल पा रही थीं।
“आआह्ह… चुदाई के प्यासे कुत्ते… मेरी चूत चोद… आआह्ह… पानी… फिर से पानी आ रहा है… आआआह्ह्ह…!”
उनका चौथा पानी इतनी जोर से छूटा कि अमन के पेट और जाँघों तक भीग गया। लेकिन अमन रुका नहीं। वह उसी रफ्तार से चोदता रहा। कमला चाची का शरीर अब बेकाबू काँप रहा था। वे लगभग बेहोश जैसी हो गई थीं, लेकिन गालियाँ अभी भी मुँह से निकल रही थीं।
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। कमला चाची हांफते हुए बिस्तर पर पड़ी थीं। चूत पूरी तरह खुली और लाल हो चुकी थी। पानी लगातार रिस रहा था। अमन ने उन्हें फिर से उल्टा किया। गाँड ऊपर की। इस बार उसने लंड का सिर उनकी गाँड की छोटी छेद पर लगाया।
कमला चाची ने महसूस करते ही आँखें फाड़ दीं। “नहीं… अमन… वहाँ नहीं… बहुत मोटा है… फट जाएगी… आआह्ह…!”
अमन ने कुछ नहीं सुना। उसने दोनों हाथों से उनकी गाँड फैलाई और धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाव डालते हुए लंड का सिर अंदर धकेला। कमला चाची की चीख निकल गई।
“आआआआआह्ह्ह्ह… माँ… निकाल… बहुत दर्द… आआह्ह…!”
अमन रुक गया। बस सिर अंदर था। फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेलने लगा। आधा… फिर और… जब पूरा लंड उनकी गाँड में समा गया तो दोनों थम गए। कमला चाची के शरीर में पसीना छूट रहा था। आँखों से आँसू निकल आए थे।
“आह्ह… साले… गाँड फाड़ दी… आआह्ह… हरामी…!”
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। पहले बहुत धीमे धक्के लगाए। फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। जब कमला चाची की गाँड थोड़ी ढीली पड़ी तो उसने जोरदार धक्के शुरू कर दिए। अब गाँड की चुदाई भी उतनी ही जानवर जैसी हो गई थी जितनी चूत की थी।
“आआआह्ह… ओоооह… गाँड… फट रही है… आआह्ह… चोद… साले… मेरी गाँड चोद… रंडी बना दी तूने… आआह्ह…!”
अमन ने एक हाथ उनकी चूत पर रखा। उंगलियों से घुंडी को रगड़ते हुए गाँड में जोर-जोर से लंड ठेलने लगा। कमला चाची पागल हो गईं। वे तकिये को दाँतों से पकड़कर चीख रही थीं और गालियाँ बक रही थीं।
“आआह्ह… भोसड़ीके… गाँड में लंड… चूत में उंगली… आआह्ह… मैं मर गई… चोद… और चोद… हरामी जानवर… आआआह्ह्ह…!”
अमन की साँसें भी अब उखड़ने लगी थीं। उसने उनकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारे। लाल निशान और गहरे हो गए। धक्के इतने भारी हो गए कि कमला चाची का पूरा शरीर हर बार बिस्तर में धँस जाता। आखिरकार अमन ने कुछ गहरे, भारी धक्के लगाए और उनकी गाँड के अंदर ही अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गरम धाराएँ उनकी आँतों में भर गईं।
“आआआह्ह… भर दी… साले… गाँड में भर दी… आआह्ह…!” कमला चाची की आखिरी चीख निकली। उनका शरीर एक लंबी काँप के साथ ढीला पड़ गया।
अमन कुछ देर तक अंदर ही पड़ा रहा। दोनों के शरीर पसीने से पूरी तरह नहाए हुए थे। कमरे में सिर्फ भारी साँसों की आवाज बची थी। दीये की लौ लगभग बुझने के करीब थी।
अमन ने धीरे से लंड बाहर निकाला। कमला चाची की गाँड से उसका पानी रिसने लगा। वे बिस्तर पर बेहोश जैसी पड़ी थीं। शरीर पर थप्पड़ों और नाखूनों के निशान थे। चूत और गाँड दोनों लाल और सूजे हुए थे।
अमन उनके पास लेट गया। उनके बालों को चेहरे से हटाया। कमला चाची ने आँखें थोड़ी सी खोलीं। आवाज पूरी तरह बैठ चुकी थी।
“जानवर…,” उन्होंने हांफते हुए फुसफुसाया। “आज… सच में रंडी बना दिया तूने…”
अमन ने उनके माथे पर हल्का चुंबन किया। दोनों थककर एक-दूसरे के पास पड़े रहे। रात अब अपनी अंतिम गहराई में डूब रही थी।
अमन और कमला चाची दोनों इतने थक चुके थे कि न तो अमन अपने कमरे जा सका, न कमला चाची कुछ बोल पाईं। वे उसी बिस्तर पर, एक-दूसरे के पास ही सो गए। कमला चाची का सिर अमन की छाती पर था। अमन का एक हाथ उनकी कमर पर पड़ा रह गया। दीये की लौ धीरे-धीरे बुझ गई। कमरे में सिर्फ उनकी भारी लेकिन नियमित साँसें रह गईं।
सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब कमला चाची पहले उठीं। शरीर में दर्द था—खासकर जाँघों और निचले हिस्से में। वे थोड़ा लंगड़ाते हुए उठीं, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी शांत खुशी थी। उन्होंने अमन को हल्के से जगाया।
“अमन… उठो बेटा। अब अपने कमरे चले जाओ। कोई उठने वाला है।”
अमन नींद भरी आँखों से उठा। शरीर भारी लग रहा था। लंड में भी हल्का दर्द हो रहा था। कमला चाची ने उसके कपड़े उठाकर दिए। अमन ने चुपचाप पहन लिए। कमला चाची पहले ही नहा चुकी थीं। बाल गीले थे, चेहरा साफ था। साड़ी भी नई पहनी हुई थी। देखने से बिलकुल नहीं लग रहा था कि कल रात यही औरत इतनी बेकाबू होकर चुदी थी कि चलने लायक भी न रहे। बस थोड़ा धीरे चल रही थीं और आँखों में हल्की सी चमक बाकी थी।
अमन ने दरवाजा धीरे से खोला और अपने कमरे की तरफ चल दिया। गलियारा अभी भी शांत था। वह अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया। शरीर इतना थका हुआ था कि आँखें तुरंत बंद हो गईं। आज कॉलेज जाने का कोई इरादा नहीं था। लंड में दर्द हो रहा था और पूरी रात की थकान हड्डियों में बस गई थी। वह दिन भर आराम करने वाला था।
रात का समय हुआ। घर फिर से शांत हो चुका था। अमन अभी भी अपने कमरे में लेटा हुआ था कि दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन ने इस बार विस्तार से सब बता दिया। कैसे उसने कमला चाची को ठीक वैसा ही चोदा जैसा रेणु ने कहा था—जानवर की तरह, बिना रहम के, दोनों छेदों में। कैसे कमला चाची गालियाँ बकती रहीं और कैसे आखिर में गाँड भी फाड़ दी। फिर उसने अपने लंड के दर्द के बारे में भी बताया।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। जब अमन खत्म हुआ तो उन्होंने हल्की मुस्कान दी।
“अच्छा किया। उन्हें वैसी ही चाहिए थी।” फिर उनकी आवाज थोड़ी गंभीर हो गई। “लंड में दर्द हो रहा है न?”
अमन ने सिर हिलाया।
रेणु ने कहा, “कल कॉलेज से लौटते समय शहर से एक ट्यूब ले आना। मैं नाम लिखकर दे देती हूँ। उसे लगा लेना। आराम हो जाएगा। और हाँ… अब कुछ दिनों तक कोई चुदाई नहीं। शरीर को आराम चाहिए।”
अमन ने रेणु का हाथ पकड़ लिया। आँखों में आँखें डालकर बोला, “दीदी… लेकिन मैं आपको ऐसे कभी नहीं चोदूँगा। मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ। अगर आप मेरी बहन नहीं होती… तो आपसे ही शादी कर लेता।”
रेणु का चेहरा हल्का सा लाल हो गया। वे शर्मा गईं। उन्होंने अमन की तरफ देखा और धीमे स्वर में कहा, “बहुत बातें बनाने लगा है तू nowadays।”
फिर उन्होंने अमन के माथे पर बहुत हल्का और लंबा चुंबन किया। होंठ कुछ पल तक वहीं रुके रहे। उसके बाद वे उठ खड़ी हुईं।
“सो जाओ। आराम करो।”
रेणु मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं। दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
अमन अकेला रह गया। छत की तरफ देखते हुए लेटा रहा। शरीर थका हुआ था, लंड में दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सी शांति थी। कमला चाची वाली रात खत्म हो चुकी थी। अब कुछ दिन आराम। और रेणु का वह हल्का शर्माना… उसके दिमाग में बार-बार घूम रहा था।
वह करवट लेकर सो गया।
रात फिर शांत हो गई।
अमन ने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ी और एक ही झटके में उन्हें चित कर दिया। कमला चाची अब बिस्तर पर फैली हुई थीं। उनके विशाल स्तन तेल की वजह से दीये की रोशनी में चमक रहे थे। निप्पल पूरी तरह खड़े और गाढ़े लाल हो चुके थे। अमन एक पल के लिए बस उन्हें निहारता रहा। फिर झुक गया।
उसने बाएँ स्तन को दोनों हथेलियों से दबाया और मुँह में भर लिया। इतनी जोर से चूसा कि कमला चाची की कमर बिस्तर से उठ गई और एक गहरी सिसकारी निकल गई।
“आआआह्ह्ह… अमन… हाँ… जोर से चूस… मेरे दूध को पी जा…”
अमन ने निप्पल को जीभ से तेज-तेज फटकारा, फिर दाँतों के बीच हल्के से दबाकर खींचा। दूसरा स्तन भी नहीं छोड़ा। एक हाथ से उसे मसलते हुए मुँह से दूसरे को जोर-जोर से चूसने लगा। कमला चाची के नाखून उसकी पीठ पर गड़ गए। उनकी साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं।
उसी समय अमन का दाहिना हाथ नीचे की तरफ बढ़ गया। उंगलियाँ उनकी गर्म जाँघों के बीच पहुँचीं। चूत पहले से ही पूरी तरह भीगी हुई थी। पानी जाँघों की अंदरूनी सतह पर चमक रहा था। अमन ने दो उंगलियाँ एक साथ अंदर धंसा दीं।
“आआआआह्ह्ह्ह…!” कमला चाची की चीख निकल गई। उनका शरीर मचल उठा।
अमन स्तन चूसते हुए उंगलियों को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। कभी उंगलियों को मोड़कर अंदर की दीवार को सहलाता, कभी अंगूठे से ऊपर वाली घुंडी को जोर से रगड़ता। कमला चाची का सिर बार-बार तकिये पर इधर-उधर हो रहा था। उनके स्तन अमन के मुँह और हाथों में दब-दबकर और भी लाल और संवेदनशील हो गए थे।
“आह्ह्ह… चूस मुझे… और उंगली… और तेज कर… आआह्ह… मेरी चूत पूरी गिली हो गई है तेरे लिए…”
थोड़ी देर बाद कमला चाची ने खुद अमन का हाथ पकड़कर ऊपर खींचा। उनकी आँखें कामुकता से भारी थीं। उन्होंने अमन के अंडरवियर के इलास्टिक में उंगलियाँ डाल दीं और एक झटके में उसे नीचे खींच दिया। अमन का मोटा, नसों से भरा, पूरी तरह खड़ा लंड झटके से बाहर निकल आया। सिर चमक रहा था और हल्का सा पानी टपक रहा था।
कमला चाची ने उसे दोनों हाथों में ले लिया। आँखें फैल गईं। उन्होंने लंड को धीरे-धीरे जड़ से लेकर सिर तक सहलाया।
“बाप रे… कितना मोटा और भारी हो गया है तू…,” उन्होंने हांफते हुए कहा। आवाज में हवस साफ थी। “इतना गरम… इतना सख्त… आज तो ये लंड मेरी चूत फाड़ देगा। कितना रसीला लग रहा है… मुँह में ले लूँ क्या?”
अमन ने कुछ नहीं कहा। बस उनकी जाँघें और चौड़ी कर दीं। खुद धीरे-धीरे नीचे सरक गया। कमला चाची के दोनों पैर उसके कंधों पर रख दिए। फिर अपना चेहरा उनकी पूरी खुली, चमकती और पानी से लथ-पथ चूत के सामने ले गया।
पहले उसने गहरी साँस में उनकी गंध ली। फिर जीभ निकालकर सबसे नीचे से लेकर ऊपर तक एक बहुत धीमा और लंबा चाटा मारा। कमला चाची की कमर जोर से उछल गई।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!”
अमन ने रुके बिना दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड पकड़ ली और अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर धंसा दी। तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। कभी ऊपर वाली घुंडी को जोर से चूसता, कभी जीभ को पूरा अंदर डालकर घुमाता, कभी नीचे की तरफ जाकर छोटी छेद को भी चाट जाता। चूसने और पानी की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं।
कमला चाची अब पूरी तरह नियंत्रण खो चुकी थीं। दोनों हाथों से अमन का सिर पकड़कर अपनी चूत में और जोर से दबाने लगीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्हह्ह… हाँ… ऐसे ही… मेरी रसीली चूत चूस… जीभ अंदर तक ले जा… आआह्ह… और तेज… अमन… मैं… मैं जाने को हुई… आआआह्ह्ह… माँаааа…!”
उनका शरीर अचानक बहुत तेज अकड़ गया। जाँघें अमन के सिर को जकड़ गईं। एक लंबी, काँपती और दबी हुई चीख निकलते हुए उनका पहला पानी अमन के मुँह, नाक और ठुड्डी पर छूट गया। अमन ने जीभ नहीं हटाई। वह उनकी चूत को धीरे-धीरे चाटता और चूसता रहा जब तक उनकी शरीर की लहरें पूरी तरह शांत नहीं हो गईं।
कमला चाची बिस्तर पर पूरी तरह ढीली पड़ी थीं। छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था। आँखें अधखुली थीं और होंठ हल्के-हल्के काँप रहे थे।
अमन धीरे से ऊपर उठा। उसके होंठ और ठुड्डी उनके पानी से चमक रहे थे। उसने कमला चाची के कान के पास होंठ ले जाकर बहुत धीमी लेकिन भारी आवाज में कहा,
“अब बाकी की प्यास भी बुझाऊँ चाची?”
कमला चाची ने हांफते हुए आँखें खोलीं। आवाज में सिर्फ हवस बची थी।
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[/img]अमन ने कमला चाची के कान के पास से होंठ हटाए। उनके चेहरे पर अभी भी पहला पानी छोड़ने के बाद की थकी हुई कामुकता तैर रही थी। अमन उठकर उनके सीने के सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसका मोटा, चमकता हुआ लंड सीधे उनके चेहरे के सामने झूल रहा था। सिर से हल्का सा पानी टपक रहा था।
कमला चाची ने आँखें खोलीं। उनकी निगाह लंड पर जाकर ठहर गई। उन्होंने दोनों हाथों से उसे जड़ से पकड़ लिया। हथेलियों में उसका वजन और गर्माहट महसूस करके उनकी साँसें फिर तेज हो गईं।
“इतना मोटा… इतना गरम…,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “आज तो मेरा मुँह भी फाड़ देगा ये।”
उन्होंने जीभ निकालकर लंड के सिर को धीरे-धीरे चाटा। चारों तरफ घुमाया। फिर आँखें अमन पर टिकाए हुए पूरा सिर मुँह में ले लिया। गहरी साँस के साथ नीचे की तरफ जाने लगीं। आधा लंड उनके मुँह में समा गया। गले तक।
“उम्मम्म… गह्ह्ह…” उनकी नाक से आवाज निकली।
अमन ने उनके बालों में उंगलियाँ फँसा लीं। लेकिन जोर नहीं लगाया। बस महसूस करता रहा। कमला चाची ने लंड को मुँह से बाहर निकाला। लार की लंबी डोर लटक रही थी। फिर से मुँह में लिया। इस बार और गहरा। उनकी गर्दन की मांसपेशियाँ तन गईं। वे जोर-जोर से चूसने लगीं—कभी सिर्फ सिर को चाटतीं, कभी पूरा अंदर ले जाकर गले तक ठेलतीं। आवाजें गंदी और गीली हो रही थीं।
“चाची… बहुत गहरा ले रही हो…,” अमन की आवाज भारी हो गई।
कमला चाची ने लंड मुँह से निकाला। हांफते हुए बोलीं, “तेरा लंड ही ऐसा है… मुँह में लेते ही चूत और भी गिली हो जाती है।” उन्होंने फिर से उसे मुँह में ठूंस लिया। दोनों हाथों से जड़ को मसलती रहीं। अमन की कमर हल्की-हल्की हिलने लगी।
थोड़ी देर बाद अमन ने उनका सिर पीछे खींचा। लंड उनके होंठों से छूटते ही एक पतली लार की लकीर टूटी। अमन ने उन्हें फिर से उल्टा कर दिया। कमला चाची अब घुटनों और हाथों के बल थीं। उनकी विशाल गाँड अमन के बिल्कुल सामने थी—गोल, चमकदार और थपथपाई हुई।
अमन ने दोनों हाथों से उनकी गाँड के भाग फैलाए। बीच में छोटी सी गुलाबी छेद तन गई। उसने झुककर पहले हल्की साँस फूँकी। फिर जीभ निकालकर सीधे उस छेद पर लगा दी।
“आआआह्ह्ह… अमन… वहाँ…!” कमला चाची की कमर झटके से आगे को चली गई।
अमन ने रुके बिना जीभ से उनकी गाँड की छेद को चाटना शुरू कर दिया। कभी गोला बनाता, कभी नोक अंदर धंसाता, कभी पूरे हिस्से को चूस लेता। कमला चाची की सिसकारियाँ अब तकिये में दब रही थीं। उनका शरीर बार-बार मचल रहा था।
“आह्ह्ह… ओоооह… जीभ… अंदर… आआह्ह… गंदी हरकत… लेकिन… मत रोक…!”
अमन ने उनकी गाँड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और जीभ और गहराई तक घुसेड़ दी। कमला चाची की जाँघें काँपने लगीं। पानी उनकी चूत से नीचे की तरफ रिस रहा था।
जब कमला चाची लगभग फिर से झड़ने के करीब पहुँचीं तो अमन ने अचानक पीछे हटा। उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। अपने लंड का सिर उनकी भीगी चूत पर लगाया। सिर्फ सिर। धीरे-धीरे अंदर धकेला और फिर बाहर निकाल लिया। फिर से सिर्फ सिर अंदर किया। बार-बार। पूरा नहीं डाला।
“आआआह्ह्ह… अमन… मत तड़पा… पूरा डाल…!” कमला चाची ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में याचना थी।
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। फिर से सिर्फ सिर अंदर-बाहर करने लगा। चूत की गीली आवाज आने लगी। कमला चाची खुद पीछे की तरफ धक्का देने लगीं, लेकिन अमन हर बार उन्हें रोक लेता।
“पूरा दे… रंडी की तरह चोद मुझे… आआह्ह… कितना तड़पा रहा है… डाल दे अंदर… पूरा…!” कमला चाची की आवाज अब टूट रही थी। गालियाँ और मिन्नतें एक साथ निकल रही थीं। “मेरी चूत फाड़ दे… आज मुझे अपनी रंडी बना ले… अमन… डाल…!”
अमन ने उनकी गाँड पर एक और थप्पड़ मारा। फिर कमर पकड़ी। और एक ही गहरे, जोरदार धक्के में अपना पूरा लंड उनकी चूत में जड़ तक धंसा दिया।
“आआआआआह्ह्ह्हह्ह…!”
कमला चाची की लंबी चीख कमरे में गूँज उठी। उनका शरीर आगे को झुक गया। अमन अंदर तक धंसा हुआ रुका रहा। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं।
अब असली चुदाई शुरू होने वाली थी।
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[/img]अमन का पूरा लंड कमला चाची की चूत में जड़ तक धंसा हुआ था। उनकी दीवारें उसके लंड को जोर से जकड़ रही थीं। दोनों एक पल के लिए थम गए। सिर्फ भारी साँसें चल रही थीं। फिर अमन ने कमला चाची की कमर दोनों हाथों से कसकर पकड़ी।
पहले धीमा धक्का। बाहर निकाला… और फिर एक ही झटके में पूरा अंदर तक धंसा दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की चीख निकली। उनके नाखून चादर में गड़ गए।
अमन ने अब रुकना बंद कर दिया। दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ उनकी गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। थप्पड़-थप्पड़ की आवाज कमरे में गूँजने लगी। लंड की घुसने-निकलने की गीली आवाज साफ सुनाई दे रही थी—छप-छप, छप-छप।
“ले… ले रंडी… इतनी गिली चूत… कितना पानी छोड़ रही है तू…!” अमन की आवाज भारी और गंदी हो गई थी।
“आआह्ह… ओоооह… हाँ… चोद… जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… आआह्ह…!” कमला चाची तकिये में मुँह गड़ाए चीख रही थीं। हर धक्के के साथ उनका शरीर आगे को झपटता। स्तन बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे।
अमन ने अचानक उनका बालों का जूड़ा पकड़कर सिर पीछे खींच लिया। उनकी कमर और ज्यादा मुड़ गई। अब धक्के और गहरे और तेज हो गए। कमला चाची की चीखें तेज हो गईं।
“आआआह्ह्ह… बाल खींच… और जोर से… आआह्ह… मेरी चूत में आग लग गई… अमन…!”
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। कमला चाची कराह उठीं। उन्होंने उन्हें चित कर दिया। दोनों पैरों को फैलाकर अपने कंधों पर रख लिया। फिर एक ही धक्के में पूरा लंड फिर से उनकी चूत में उतार दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… इतना गहरा…!”
अब अमन उनके ऊपर था। एक हाथ से उनका दाहिना स्तन जोर से मसल रहा था, दूसरे से उनकी कमर दबाए हुए था। धक्के इतने जोर के थे कि बिस्तर की चरमराने की आवाज भी आने लगी। कमला चाची के स्तन हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। निप्पल अमन की उंगलियों में दब-दबकर लाल हो चुके थे।
“चाची… तेरी चूत कितनी टाइट है… घुट रही है मेरे लंड को…!” अमन हांफते हुए बोला।
“आह्ह… क्योंकि तेरा लंड बहुत मोटा है… आआह्ह… और तेज… मत रोक… आज पूरी रात चोद…!”
अमन ने दोनों स्तनों को एक साथ मुट्ठी में भर लिया और निप्पलों को मरोड़ते हुए धक्के और तेज कर दिए। कमला चाची की आँखें उल्टी होने लगीं। उनका मुँह खुला रह गया। सिर्फ अस्पष्ट आवाजें निकल रही थीं—
“आआआह्ह… ओоооह… उउउम्म… अमन… मैं… फिर से… आआह्ह… जा रही हूँ…!”
उनका शरीर अकड़ गया। जाँघें अमन की कमर को जकड़ गईं। एक लंबी, काँपती चीख के साथ उनका दूसरा पानी अमन के लंड और जाँघों पर छूट गया। अमन रुका नहीं। वह उसी तेज गति से चोदता रहा। पानी की आवाज और भी तेज हो गई।
जब कमला चाची की काँपने की लहरें थोड़ी कम हुईं तो अमन ने उनके पैरों को अपने कंधों से उतारा। खुद पीछे हटा। कमला चाची हांफते हुए बिस्तर पर पड़ी थीं। चूत से पानी रिस रहा था। अमन ने उन्हें फिर से पलट दिया। इस बार गाँड और ऊँची करवाई। तकिया उनके पेट के नीचे रख दिया।
अब उनकी गाँड पूरी तरह उठ गई थी। अमन ने लंड का सिर उनकी चूत पर लगाया और एक ही झटके में जड़ तक धंसा दिया। फिर से डॉगी स्टाइल। लेकिन इस बार और गहराई वाला एंगल।
“आआआआह्ह्ह्ह… बाप रे… अब तो गर्भ तक जा रहा है…!” कमला चाची चिल्लाईं।
अमन ने उनकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। धक्के इतने जोर के थे कि कमला चाची का पूरा शरीर हर बार आगे को खिसक जाता। वे तकिये को मुँह से पकड़कर चीख रही थीं।
“ले रंडी… ले अपने भतीजे का लंड… इतनी चुदाई कभी किसी ने दी क्या तुझे…?”
“नहीं… आआह्ह… कभी नहीं… तेरा लंड सबसे अलग है… आआह्ह… चोद… मेरी गाँड भी लाल कर दे…!”
अमन ने एक हाथ उनकी गाँड की छेद पर रखा। उंगली गीली करके अंदर धंसा दी। अब एक साथ चूत में लंड और गाँड में उंगली चल रही थी। कमला चाची पागल हो गईं।
“आआआआह्ह्ह… दोनों जगह… आआह्ह… मैं मर जाऊँगी… अमन… बहुत हो गया… आआह्ह…!”
उनका तीसरा पानी भी उसी पोजीशन में निकल गया। शरीर इतना काँपा कि अमन को उनकी कमर कसकर पकड़नी पड़ी। अमन ने उंगली निकाल दी लेकिन लंड अंदर ही रखा। धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए उनकी पीठ पर झुक गया। कान के पास गंदी बातें करता रहा।
“अभी तो शुरू की है चाची… रात लंबी है… अभी तेरी दोनों छेद भरूँगा…”
कमला चाची हांफते हुए बस इतना कह पाईं, “भर… आज जितना चाहे भर दे… मैं तेरी रंडी हूँ…”
अमन ने मुस्कुराते हुए फिर से जोरदार धक्के शुरू कर दिए। बिस्तर की चरमराहट, मांस की थपथपाहट, गीली आवाजें और कमला चाची की बेकाबू चीखें—सब मिलकर कमरे को एक गंदे, गर्म जंगल में बदल चुके थे।
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[/img]अमन ने कमला चाची की कमर और कसकर पकड़ी। अब उसमें कोई रहम नहीं बचा था। उसने डॉगी स्टाइल में ही धक्के की रफ्तार अचानक दोगुनी कर दी। लंड उनकी चूत में इतनी तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था कि मांस की थपथपाहट और पानी की छप-छप की आवाज एक हो गई थी।
“आआआआह्ह्ह… अमन… धीरे… बहुत जोर से… आआह्ह… रुक…!” कमला चाची चिल्लाईं। उनका शरीर हर धक्के के साथ आगे को खिसक रहा था।
लेकिन अमन ने सुना ही नहीं। उसने उनके बालों को मुट्ठी में भरकर और पीछे खींच लिया। कमर झुका दी। अब हर धक्का गर्भ की गहराई तक जा रहा था। कमला चाची की चीखें और तेज हो गईं।
“आआआह्ह… चुतिया… इतना जोर से मत चोद… मेरी चूत फट जाएगी… आआह्ह…!”
अमन ने उनकी गाँड पर दो जोरदार थप्पड़ मारे। “चुप रख रंडी… तू तो इसलिए लेटी है कि मैं तुझे जानवर की तरह चोदूँ… ले अब…!”
वह और बेतहाशा हो गया। दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड को फैलाए हुए इतनी ताकत से धक्के मार रहा था कि कमला चाची का पूरा शरीर काँप रहा था। बिस्तर की चरमराने की आवाज तेज हो गई। कमला चाची अब गालियाँ बकने लगीं—बहुत गंदी।
“आआह्ह… साले… भतीजे का लंड… मेरी चूत में… आआह्ह… रंडी बना दी तूने मुझे… चोद… और चोद… हरामी… आआह्ह… मेरी चूत का पानी निकाल…!”
अमन ने अचानक लंड बाहर निकाला। कमला चाची कराह उठीं। उसने उन्हें फिर से चित किया। दोनों पैरों को फैलाकर लगभग कंधों तक मोड़ दिया। फिर एक ही झटके में पूरा लंड फिर से उनकी चूत में उतार दिया। अब मिशनरी में भी वही जानवर वाली ताकत थी।
“आआआआह्ह्ह्ह… बापू… इतना गहरा…!”
अमन उनके ऊपर लेट गया। एक हाथ से उनका गला हल्के से दबाए हुए था, दूसरे से स्तन मसल रहा था। धक्के इतने भारी थे कि कमला चाची की साँसें अटकने लगीं। वे अमन की पीठ पर नाखून चला रही थीं। खून की हल्की लकीरें निकल आईं।
“साले… जानवर… मेरी चूत फाड़ रहा है… आआह्ह… चोद… और तेज… रंडी की औलाद… आआह्ह…!”
अमन ने उनका गला छोड़कर दोनों स्तनों को मुट्ठी में भर लिया। निप्पलों को मरोड़ते हुए धक्के और तेज कर दिए। कमला चाची की आँखें अब पूरी तरह उल्टी हो चुकी थीं। मुँह से लार बह रही थी। वे सिर्फ गालियाँ और चीखें निकाल पा रही थीं।
“आआह्ह… चुदाई के प्यासे कुत्ते… मेरी चूत चोद… आआह्ह… पानी… फिर से पानी आ रहा है… आआआह्ह्ह…!”
उनका चौथा पानी इतनी जोर से छूटा कि अमन के पेट और जाँघों तक भीग गया। लेकिन अमन रुका नहीं। वह उसी रफ्तार से चोदता रहा। कमला चाची का शरीर अब बेकाबू काँप रहा था। वे लगभग बेहोश जैसी हो गई थीं, लेकिन गालियाँ अभी भी मुँह से निकल रही थीं।
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। कमला चाची हांफते हुए बिस्तर पर पड़ी थीं। चूत पूरी तरह खुली और लाल हो चुकी थी। पानी लगातार रिस रहा था। अमन ने उन्हें फिर से उल्टा किया। गाँड ऊपर की। इस बार उसने लंड का सिर उनकी गाँड की छोटी छेद पर लगाया।
कमला चाची ने महसूस करते ही आँखें फाड़ दीं। “नहीं… अमन… वहाँ नहीं… बहुत मोटा है… फट जाएगी… आआह्ह…!”
अमन ने कुछ नहीं सुना। उसने दोनों हाथों से उनकी गाँड फैलाई और धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाव डालते हुए लंड का सिर अंदर धकेला। कमला चाची की चीख निकल गई।
“आआआआआह्ह्ह्ह… माँ… निकाल… बहुत दर्द… आआह्ह…!”
अमन रुक गया। बस सिर अंदर था। फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेलने लगा। आधा… फिर और… जब पूरा लंड उनकी गाँड में समा गया तो दोनों थम गए। कमला चाची के शरीर में पसीना छूट रहा था। आँखों से आँसू निकल आए थे।
“आह्ह… साले… गाँड फाड़ दी… आआह्ह… हरामी…!”
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। पहले बहुत धीमे धक्के लगाए। फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। जब कमला चाची की गाँड थोड़ी ढीली पड़ी तो उसने जोरदार धक्के शुरू कर दिए। अब गाँड की चुदाई भी उतनी ही जानवर जैसी हो गई थी जितनी चूत की थी।
“आआआह्ह… ओоооह… गाँड… फट रही है… आआह्ह… चोद… साले… मेरी गाँड चोद… रंडी बना दी तूने… आआह्ह…!”
अमन ने एक हाथ उनकी चूत पर रखा। उंगलियों से घुंडी को रगड़ते हुए गाँड में जोर-जोर से लंड ठेलने लगा। कमला चाची पागल हो गईं। वे तकिये को दाँतों से पकड़कर चीख रही थीं और गालियाँ बक रही थीं।
“आआह्ह… भोसड़ीके… गाँड में लंड… चूत में उंगली… आआह्ह… मैं मर गई… चोद… और चोद… हरामी जानवर… आआआह्ह्ह…!”
अमन की साँसें भी अब उखड़ने लगी थीं। उसने उनकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारे। लाल निशान और गहरे हो गए। धक्के इतने भारी हो गए कि कमला चाची का पूरा शरीर हर बार बिस्तर में धँस जाता। आखिरकार अमन ने कुछ गहरे, भारी धक्के लगाए और उनकी गाँड के अंदर ही अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गरम धाराएँ उनकी आँतों में भर गईं।
“आआआह्ह… भर दी… साले… गाँड में भर दी… आआह्ह…!” कमला चाची की आखिरी चीख निकली। उनका शरीर एक लंबी काँप के साथ ढीला पड़ गया।
अमन कुछ देर तक अंदर ही पड़ा रहा। दोनों के शरीर पसीने से पूरी तरह नहाए हुए थे। कमरे में सिर्फ भारी साँसों की आवाज बची थी। दीये की लौ लगभग बुझने के करीब थी।
अमन ने धीरे से लंड बाहर निकाला। कमला चाची की गाँड से उसका पानी रिसने लगा। वे बिस्तर पर बेहोश जैसी पड़ी थीं। शरीर पर थप्पड़ों और नाखूनों के निशान थे। चूत और गाँड दोनों लाल और सूजे हुए थे।
अमन उनके पास लेट गया। उनके बालों को चेहरे से हटाया। कमला चाची ने आँखें थोड़ी सी खोलीं। आवाज पूरी तरह बैठ चुकी थी।
“जानवर…,” उन्होंने हांफते हुए फुसफुसाया। “आज… सच में रंडी बना दिया तूने…”
अमन ने उनके माथे पर हल्का चुंबन किया। दोनों थककर एक-दूसरे के पास पड़े रहे। रात अब अपनी अंतिम गहराई में डूब रही थी।
अमन और कमला चाची दोनों इतने थक चुके थे कि न तो अमन अपने कमरे जा सका, न कमला चाची कुछ बोल पाईं। वे उसी बिस्तर पर, एक-दूसरे के पास ही सो गए। कमला चाची का सिर अमन की छाती पर था। अमन का एक हाथ उनकी कमर पर पड़ा रह गया। दीये की लौ धीरे-धीरे बुझ गई। कमरे में सिर्फ उनकी भारी लेकिन नियमित साँसें रह गईं।
सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब कमला चाची पहले उठीं। शरीर में दर्द था—खासकर जाँघों और निचले हिस्से में। वे थोड़ा लंगड़ाते हुए उठीं, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी शांत खुशी थी। उन्होंने अमन को हल्के से जगाया।
“अमन… उठो बेटा। अब अपने कमरे चले जाओ। कोई उठने वाला है।”
अमन नींद भरी आँखों से उठा। शरीर भारी लग रहा था। लंड में भी हल्का दर्द हो रहा था। कमला चाची ने उसके कपड़े उठाकर दिए। अमन ने चुपचाप पहन लिए। कमला चाची पहले ही नहा चुकी थीं। बाल गीले थे, चेहरा साफ था। साड़ी भी नई पहनी हुई थी। देखने से बिलकुल नहीं लग रहा था कि कल रात यही औरत इतनी बेकाबू होकर चुदी थी कि चलने लायक भी न रहे। बस थोड़ा धीरे चल रही थीं और आँखों में हल्की सी चमक बाकी थी।
अमन ने दरवाजा धीरे से खोला और अपने कमरे की तरफ चल दिया। गलियारा अभी भी शांत था। वह अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया। शरीर इतना थका हुआ था कि आँखें तुरंत बंद हो गईं। आज कॉलेज जाने का कोई इरादा नहीं था। लंड में दर्द हो रहा था और पूरी रात की थकान हड्डियों में बस गई थी। वह दिन भर आराम करने वाला था।
रात का समय हुआ। घर फिर से शांत हो चुका था। अमन अभी भी अपने कमरे में लेटा हुआ था कि दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन ने इस बार विस्तार से सब बता दिया। कैसे उसने कमला चाची को ठीक वैसा ही चोदा जैसा रेणु ने कहा था—जानवर की तरह, बिना रहम के, दोनों छेदों में। कैसे कमला चाची गालियाँ बकती रहीं और कैसे आखिर में गाँड भी फाड़ दी। फिर उसने अपने लंड के दर्द के बारे में भी बताया।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। जब अमन खत्म हुआ तो उन्होंने हल्की मुस्कान दी।
“अच्छा किया। उन्हें वैसी ही चाहिए थी।” फिर उनकी आवाज थोड़ी गंभीर हो गई। “लंड में दर्द हो रहा है न?”
अमन ने सिर हिलाया।
रेणु ने कहा, “कल कॉलेज से लौटते समय शहर से एक ट्यूब ले आना। मैं नाम लिखकर दे देती हूँ। उसे लगा लेना। आराम हो जाएगा। और हाँ… अब कुछ दिनों तक कोई चुदाई नहीं। शरीर को आराम चाहिए।”
अमन ने रेणु का हाथ पकड़ लिया। आँखों में आँखें डालकर बोला, “दीदी… लेकिन मैं आपको ऐसे कभी नहीं चोदूँगा। मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ। अगर आप मेरी बहन नहीं होती… तो आपसे ही शादी कर लेता।”
रेणु का चेहरा हल्का सा लाल हो गया। वे शर्मा गईं। उन्होंने अमन की तरफ देखा और धीमे स्वर में कहा, “बहुत बातें बनाने लगा है तू nowadays।”
फिर उन्होंने अमन के माथे पर बहुत हल्का और लंबा चुंबन किया। होंठ कुछ पल तक वहीं रुके रहे। उसके बाद वे उठ खड़ी हुईं।
“सो जाओ। आराम करो।”
रेणु मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं। दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
अमन अकेला रह गया। छत की तरफ देखते हुए लेटा रहा। शरीर थका हुआ था, लंड में दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सी शांति थी। कमला चाची वाली रात खत्म हो चुकी थी। अब कुछ दिन आराम। और रेणु का वह हल्का शर्माना… उसके दिमाग में बार-बार घूम रहा था।
वह करवट लेकर सो गया।
रात फिर शांत हो गई।
Fuckuguy
albertprince547;
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