11-10-2026, 09:56 PM
*कैरेक्टर्स*
1) हर्ष।
मेरी उम्र 18 साल है। मैंने 12वीं पूरी की है। मेरा लंड लंबा तो है ही, लेकिन मोटा ज्यादा है। मोटाई दूसरों से थोड़ी ज्यादा है। इस कहानी में जितने भी लंड आएंगे वो मोटाई में मेरे से कम ही होंगे और लंबाई भी मेरे लंड जितनी या उससे कम ही होगी। एग्जैक्ट साइज किसी का नहीं लिखूँगा, आपको जो अच्छा लगे इमेजिन कर लेना।
2) पीनल। हर्ष की सगी बहन पीनल हर्ष से 7 साल बड़ी है। हर्ष उनकी बहुत रिस्पेक्ट करता हूँ। 2 साल पहले उनकी शादी हुई और वो शादी के बाद अपने पति के साथ दूसरे शहर में रहती हैं। हर्षसे 7 साल बड़ी होने के कारण उन्होंने एक माँ की तरह हर्ष की देखभाल की है। हर्ष के दिल में उनके लिए बहुत रिस्पेक्ट है और हर्ष उनके लिए कुछ भी कर सकता हूँ। हर्ष अपनी दीदी को कभी उदास नहीं देख सकता।
3) राहुल। पीनल के पति बहुत हैंडसम और खुले विचारों वाले हैं और पीनल से बहुत प्यार करते हैं। वो भी हर्ष की तरह दीदी को कभी उदास नहीं देख सकते और पीनल के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वो एक कंपनी में जॉब करते हैं।
और भी कैरेक्टर्स हैं लेकिन उनके बारे में अभी ठीक से सोचा नहीं है। जैसे-जैसे आएंगे बताता जाऊँगा।
और हाँ, मैं फालतू की बातें ज्यादा नहीं लिखूँगा। आपको शायद यह कहानी कभी-कभी फास्ट फॉरवर्ड में जाते हुए लगेगी।
---
**अपडेट 1**
हर्ष..........
मैंने 12वीं पूरी कर ली और अब मैं आगे की पढ़ाई अपनी दीदी के शहर में करने वाला हूँ। मेरा एडमिशन उनके शहर में हुआ है। दीदी को कॉल करके पहले ही बता दिया था।
जब मैं दीदी के घर पहुँचा तो दीदी और जीजू मुझे देखकर बहुत खुश हो गए। जीजू ने मुझे गले लगा लिया। वैसे भी मेरी जीजू से अच्छी बनती थी।
वैसे मैं बता दूँ कि जीजू मुझसे 4 साल बड़े हैं और दीदी से 3 साल छोटे। जीजू ने दीदी को हमारे एक कॉमन रिलेटिव की शादी में देखा और दीदी उनको इतनी पसंद आ गई कि कैसे भी करके दीदी के साथ उनकी शादी हो गई।
तो मैं बता रहा था कि जीजू ने मुझे गले लगा लिया और बहुत खुश लग रहे थे। दीदी भी बहुत खुश थीं लेकिन हमारा रिश्ता ऐसा था कि हम एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हुए भी कभी एक-दूसरे को गले नहीं लगाते थे। लेकिन जीजू ने दीदी से कहा – “ये क्या पीनल, तुम्हारा सगा भाई आया है और तुम खुश नहीं?”
दीदी: अरे किसने कहा मैं खुश नहीं। मैं बहुत खुश हूँ, अब कैसे बताऊँ कि मैं कितनी खुश हूँ...
जीजू: अरे तो कम से कम अपने भाई को गले तो मिलो...
दीदी यह सुनकर थोड़ी शर्माने लगीं और मुझे भी थोड़ी शर्म आ रही थी... हमारे बीच प्यार बहुत था लेकिन ऐसे कभी दिखाया नहीं था...
जीजू: अरे ऐसे खड़ी क्यों हो, चलो जल्दी से गले लगो...
और जीजू ने दीदी को पकड़ के मेरे गले लगा दिया। दीदी भी मेरे गले लग गईं...
मैंने भी दीदी को गले लगाया। हम भाई-बहन आराम से एक-दूसरे से गले मिल रहे थे, इतने में जीजू ने कहा – “ऐसे नहीं, कस के गले मिलो। तुम सगे भाई-बहन हो, कोई गैर नहीं...” और इतना बोलकर जीजू दीदी को पीछे से हग करने लगे लेकिन उनके हाथ मेरे पीछे लपेट लिए... दीदी हम दोनों के बीच में थीं...
आज पहली बार मैं दीदी को ऐसे गले मिल रहा था और वो भी इतना कसके। दीदी ने भी मुझे कसके गले लगाया... मुझे कुछ सूझा नहीं तो मैंने भी दीदी को कसके गले लगाया और मेरे हाथ जीजू के पीछे ले गया। ऐसा लग रहा था जैसे मैं और जीजू गले लग रहे हों...
दीदी ने अपना सर मेरे कंधे पे रख दिया और मैंने अपना सर दीदी के कंधे पे...
दीदी पता नहीं अभी-अभी नहाकर आई थीं या और कुछ था, लेकिन दीदी के शरीर से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। दीदी के स्तन मुझे अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे। यह पहली बार था कि मैं दीदी के स्तनों को इस तरह महसूस कर रहा था। हाँ, मेरे दिमाग में कोई गलत विचार नहीं था लेकिन दीदी की चूचियाँ अच्छे से महसूस हो रही थीं। दीदी के दोनों बूब्स बड़े-बड़े थे और सख्त भी थे... हम तीनों कुछ देर ऐसे ही गले लगे रहे...
फिर जीजू अलग हुए और कहा – “चलो भाई, अभी-अभी क्या सारा प्यार अपने भाई को दे दोगी। कुछ बाद के लिए भी बचा कर रखो।”
दीदी: भाई के लिए बहन का प्यार कभी खत्म नहीं होता, चाहे जितना प्यार वो अपने भाई पर लुटाए...
जीजू: अरे मैं तो मजाक कर रहा था। वो अभी आया है, उसे भूख लगी होगी, उसकी पसंद का कुछ बनाओ... मैं भाई-बहन के बीच में कैसे आ सकता हूँ। तुम चाहो तो पूरा दिन और रात अपने भाई के गले लगी रहो...
दीदी: हाँ हाँ, मेरा भाई है, मैं उसे दिन-रात गले लगाऊँगी, उसमें क्या...
मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ...
जीजू: मेरा कुछ काम है, हर्ष तुम फ्रेश हो जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ फिर साथ में खाएँगे...
और जीजू घर से निकल गए... और दीदी भी किचन में चली गईं...
मैं फ्रेश होकर सोफे पे बैठा था और मोबाइल देख रहा था। मेरा नेट स्लो था तो मैंने दीदी से हॉटस्पॉट करने को कहा। दीदी ने कहा – “मैं खाना बना रही हूँ, तू खुद ही कर ले।” मैं किचन में गया और दीदी का मोबाइल लेकर आया। दीदी ने मुझे पैटर्न बताई तो मैंने अनलॉक किया और हॉटस्पॉट किया।
तभी मुझे याद आया कि मैंने एक ऐप बनाई थी और उसका टेस्टिंग करना था, तो क्यों न दीदी के मोबाइल में ही टेस्टिंग करूँ। मैंने अपने फोन से ऐप शेयर की और दीदी के मोबाइल में इंस्टॉल कर दी।
वो ऐप ऐसी थी कि आप किसी की भी कॉल सुन सकते थे और माइक्रोफोन से आसपास की बातें भी सुन सकते थे। वो ऐप इंस्टॉल होने के बाद हाइड हो जाती और किसी को पता भी नहीं चलता...
मैं दीदी का फोन वापस दे आया। थोड़ी देर में जीजू भी आ गए। हमने साथ खाना खाया और बैठकर बातें करने लगे। दीदी खुश तो बहुत थीं लेकिन शायद उनके कपड़े उनको अनकंफर्टेबल लग रहे थे। दीदी ने सलवार-कुर्ता पहने थे लेकिन वो बार-बार उन्हें सही कर रही थीं। जीजू ने भी यह नोटिस किया लेकिन कुछ कहा नहीं।
फिर हम अपने-अपने रूम में चले गए। उनके बेडरूम के बगल वाले रूम मुझे दिया था। रूम के अंदर जाके मैं बेड पर लेट गया और दीदी ने जब गले लगाया था उसके बारे में सोचने लगा।
कितना अच्छा लगा था मुझे जब दीदी के गले लगा था। मुझे लगा मैं दीदी के और करीब आ गया हूँ और हमारा रिश्ता और मजबूत हो गया है। वैसे दीदी के दोनों बड़े-बड़े स्तन मुझे अब भी महसूस हो रहे थे लेकिन मुझे उसमें कुछ गलत नहीं लगा। अगर दो लोग गले मिलेंगे तो उनके अंग एक-दूसरे को महसूस तो होंगे ही, चाहे वो भाई-बहन ही क्यों न हों और इसमें गलत भी क्या है। उल्टा अब मुझे दीदी पर ज्यादा ही प्यार आने लगा था। ऐसा लग रहा था दीदी ही मेरा सब कुछ है। और ऐसे सोचते-सोचते मैं सो गया।
शाम को हम फ्रेश होकर हॉल में बैठे थे। दीदी चाय बनाने किचन में गईं और जीजू भी पीछे-पीछे गए। मैंने मोबाइल निकाला और तभी मुझे ख्याल आया कि चलो ऐप की टेस्टिंग करते हैं। वैसे जीजू और दीदी की बातें ऐसे सुनना मुझे ठीक नहीं लगा, फिर सोचा आखिर क्या ही बातें करेंगे, सुन लेता हूँ। मैंने इयरफोन लगाए और सुनने लगा...
जीजू: सुनो ना।
दीदी: क्या है।
जीजू: तुम्हारा भाई आया है तो मैं सोच रहा था कि हम रात को थोड़ी पार्टी कर लें...
दीदी: पार्टी मेरे भाई के साथ? वो पार्टी नहीं करता।
जीजू: तुम्हे कैसे पता तुम्हारा भाई पार्टी नहीं करता। बियर तो पक्का पीता होगा...
दीदी: नहीं, वो बियर भी नहीं पीता।
जीजू: तुम उसे बच्चा समझना बंद करो जानू। वो 18 साल का हो गया है और वो पक्का दोस्तों के साथ पार्टी करता होगा और उसकी कोई गर्लफ्रेंड भी होगी और हो सकता है तुम्हारे भाई ने उसे चोदा भी होगा...
(यह सुनके मुझे अजीब सा रोमांच हुआ। मैं पहली बार पति-पत्नी की बातें ऐसे सुन रहा था और पत्नी मेरी सगी बहन थी)
दीदी: मेरा भाई ऐसा नहीं है, मैं उसे जानती हूँ। और मेरे भाई के बारे में ऐसा मत बोलो।
जीजू: ओके सॉरी बाबा, लेकिन तुम्हे अपनी सोच बदलनी होगी। तुम उसे छोटे बच्चे जैसे हर वक्त ट्रीट नहीं कर सकतीं। हाँ, तुम थोड़ी देर उसे लाड़-प्यार करो वो ठीक है। लेकिन तुम्हे उसे उसकी उम्र और बॉडी के अनुसार समझना होगा। वो दिखने में मुझसे भी बड़ा लगता है, भले ही मुझसे 4 साल छोटा हो। अगर तुम ऐसे ही करती रही तो वो तुमसे दूर होता जाएगा।
थोड़ी देर कोई कुछ नहीं बोला और थोड़ी देर बाद...
दीदी: हाँ बाबू, तुम सही हो लेकिन क्या करूँ। वो मेरे सामने छोटे से बड़ा हुआ है। मैंने उसे अपना दूध न पिलाया हो लेकिन एक माँ के जैसे सँभाला है। कुछ भी होता तो वो मम्मी-पापा के पास नहीं जाता बल्कि मेरे पास आता। लेकिन तुम सही हो। मुझे उसे छोटे बच्चे जैसे ट्रीट नहीं करना चाहिए।
जीजू: थैंक गॉड तुम समझ गईं। मैं उसे पार्टी के बारे में पूछूँगा, अगर वो ना कहेगा तो मैं फोर्स नहीं करूँगा। ठीक है।
दीदी: ठीक है, लेकिन तुम दोनों पार्टी करोगे तो मैं क्या करूँगी।
जीजू: हम तीनों मिलकर पार्टी करेंगे और क्या...
दीदी: पागल, मैं अपने भाई के साथ कैसे पार्टी करूँ।
(वैसे यह सुनकर मुझे सरप्राइज हुआ कि दीदी भी पार्टी करती हैं। लेकिन अच्छा भी लगा कि दीदी अपनी मर्जी से जीती हैं और अपनी लाइफ खुलकर एंजॉय करती हैं। दीदी की बातें सुनकर मुझे दीदी के लिए बहुत अच्छा लग रहा था। बस ऐसे ही दीदी खुश रहें और खुलकर एंजॉय करें।)
जीजू: अब तुम्हे अपने भाई के लिए हमें तो छूट देनी होगी। इतना तो करना ही होगा...
दीदी: कोई नहीं। मेरे भाई के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ। लेकिन अगर वो मना करे तो उसे फोर्स मत करना।
जीजू: फोर्स नहीं करूँगा बाबा। तुम मुझे नहीं जानती क्या।
और फिर किसिंग की आवाज़ आने लगी।
दीदी: क्या कर रहे हो। मेरा भाई हॉल में है।
जीजू: अरे तो क्या हुआ। उसे क्या नहीं पता होगा कि रोज रात को मैं उसकी बहन की चुदाई करता हूँगा।
दीदी: तो क्या मेरे भाई के सामने मुझे चोदोगे।
जीजू: अरे किस तो कर सकता हूँ ना।
दीदी: नहीं, भाई के सामने कोई किस नहीं।
जीजू: ठीक है बाबा, जैसा तुम कहो।
(जीजू और दीदी की बातें सुनके मेरा मूड बन गया था। पता नहीं क्यों मुझे अच्छा लग रहा था और मैं खुश था। मैं खुश था मेरी प्यारी दीदी के लिए। लेकिन मैं सोचने लगा कि दीदी शादी के बाद बोल्ड हो गई हैं। लेकिन वो खुश थीं और मैं उनके लिए खुश था। और आखिर पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा ही होना चाहिए। वो मेरी दीदी थीं लेकिन जीजू की बीवी थीं। वैसे जीजू उनसे तीन साल छोटे थे।)
थोड़ी देर बाद जीजू बाहर आए और दीदी भी चाय लेकर आईं। हमने चाय पी और इधर-उधर की बातें करने लगे।
1) हर्ष।
मेरी उम्र 18 साल है। मैंने 12वीं पूरी की है। मेरा लंड लंबा तो है ही, लेकिन मोटा ज्यादा है। मोटाई दूसरों से थोड़ी ज्यादा है। इस कहानी में जितने भी लंड आएंगे वो मोटाई में मेरे से कम ही होंगे और लंबाई भी मेरे लंड जितनी या उससे कम ही होगी। एग्जैक्ट साइज किसी का नहीं लिखूँगा, आपको जो अच्छा लगे इमेजिन कर लेना।
2) पीनल। हर्ष की सगी बहन पीनल हर्ष से 7 साल बड़ी है। हर्ष उनकी बहुत रिस्पेक्ट करता हूँ। 2 साल पहले उनकी शादी हुई और वो शादी के बाद अपने पति के साथ दूसरे शहर में रहती हैं। हर्षसे 7 साल बड़ी होने के कारण उन्होंने एक माँ की तरह हर्ष की देखभाल की है। हर्ष के दिल में उनके लिए बहुत रिस्पेक्ट है और हर्ष उनके लिए कुछ भी कर सकता हूँ। हर्ष अपनी दीदी को कभी उदास नहीं देख सकता।
3) राहुल। पीनल के पति बहुत हैंडसम और खुले विचारों वाले हैं और पीनल से बहुत प्यार करते हैं। वो भी हर्ष की तरह दीदी को कभी उदास नहीं देख सकते और पीनल के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वो एक कंपनी में जॉब करते हैं।
और भी कैरेक्टर्स हैं लेकिन उनके बारे में अभी ठीक से सोचा नहीं है। जैसे-जैसे आएंगे बताता जाऊँगा।
और हाँ, मैं फालतू की बातें ज्यादा नहीं लिखूँगा। आपको शायद यह कहानी कभी-कभी फास्ट फॉरवर्ड में जाते हुए लगेगी।
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**अपडेट 1**
हर्ष..........
मैंने 12वीं पूरी कर ली और अब मैं आगे की पढ़ाई अपनी दीदी के शहर में करने वाला हूँ। मेरा एडमिशन उनके शहर में हुआ है। दीदी को कॉल करके पहले ही बता दिया था।
जब मैं दीदी के घर पहुँचा तो दीदी और जीजू मुझे देखकर बहुत खुश हो गए। जीजू ने मुझे गले लगा लिया। वैसे भी मेरी जीजू से अच्छी बनती थी।
वैसे मैं बता दूँ कि जीजू मुझसे 4 साल बड़े हैं और दीदी से 3 साल छोटे। जीजू ने दीदी को हमारे एक कॉमन रिलेटिव की शादी में देखा और दीदी उनको इतनी पसंद आ गई कि कैसे भी करके दीदी के साथ उनकी शादी हो गई।
तो मैं बता रहा था कि जीजू ने मुझे गले लगा लिया और बहुत खुश लग रहे थे। दीदी भी बहुत खुश थीं लेकिन हमारा रिश्ता ऐसा था कि हम एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हुए भी कभी एक-दूसरे को गले नहीं लगाते थे। लेकिन जीजू ने दीदी से कहा – “ये क्या पीनल, तुम्हारा सगा भाई आया है और तुम खुश नहीं?”
दीदी: अरे किसने कहा मैं खुश नहीं। मैं बहुत खुश हूँ, अब कैसे बताऊँ कि मैं कितनी खुश हूँ...
जीजू: अरे तो कम से कम अपने भाई को गले तो मिलो...
दीदी यह सुनकर थोड़ी शर्माने लगीं और मुझे भी थोड़ी शर्म आ रही थी... हमारे बीच प्यार बहुत था लेकिन ऐसे कभी दिखाया नहीं था...
जीजू: अरे ऐसे खड़ी क्यों हो, चलो जल्दी से गले लगो...
और जीजू ने दीदी को पकड़ के मेरे गले लगा दिया। दीदी भी मेरे गले लग गईं...
मैंने भी दीदी को गले लगाया। हम भाई-बहन आराम से एक-दूसरे से गले मिल रहे थे, इतने में जीजू ने कहा – “ऐसे नहीं, कस के गले मिलो। तुम सगे भाई-बहन हो, कोई गैर नहीं...” और इतना बोलकर जीजू दीदी को पीछे से हग करने लगे लेकिन उनके हाथ मेरे पीछे लपेट लिए... दीदी हम दोनों के बीच में थीं...
आज पहली बार मैं दीदी को ऐसे गले मिल रहा था और वो भी इतना कसके। दीदी ने भी मुझे कसके गले लगाया... मुझे कुछ सूझा नहीं तो मैंने भी दीदी को कसके गले लगाया और मेरे हाथ जीजू के पीछे ले गया। ऐसा लग रहा था जैसे मैं और जीजू गले लग रहे हों...
दीदी ने अपना सर मेरे कंधे पे रख दिया और मैंने अपना सर दीदी के कंधे पे...
दीदी पता नहीं अभी-अभी नहाकर आई थीं या और कुछ था, लेकिन दीदी के शरीर से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। दीदी के स्तन मुझे अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे। यह पहली बार था कि मैं दीदी के स्तनों को इस तरह महसूस कर रहा था। हाँ, मेरे दिमाग में कोई गलत विचार नहीं था लेकिन दीदी की चूचियाँ अच्छे से महसूस हो रही थीं। दीदी के दोनों बूब्स बड़े-बड़े थे और सख्त भी थे... हम तीनों कुछ देर ऐसे ही गले लगे रहे...
फिर जीजू अलग हुए और कहा – “चलो भाई, अभी-अभी क्या सारा प्यार अपने भाई को दे दोगी। कुछ बाद के लिए भी बचा कर रखो।”
दीदी: भाई के लिए बहन का प्यार कभी खत्म नहीं होता, चाहे जितना प्यार वो अपने भाई पर लुटाए...
जीजू: अरे मैं तो मजाक कर रहा था। वो अभी आया है, उसे भूख लगी होगी, उसकी पसंद का कुछ बनाओ... मैं भाई-बहन के बीच में कैसे आ सकता हूँ। तुम चाहो तो पूरा दिन और रात अपने भाई के गले लगी रहो...
दीदी: हाँ हाँ, मेरा भाई है, मैं उसे दिन-रात गले लगाऊँगी, उसमें क्या...
मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ...
जीजू: मेरा कुछ काम है, हर्ष तुम फ्रेश हो जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ फिर साथ में खाएँगे...
और जीजू घर से निकल गए... और दीदी भी किचन में चली गईं...
मैं फ्रेश होकर सोफे पे बैठा था और मोबाइल देख रहा था। मेरा नेट स्लो था तो मैंने दीदी से हॉटस्पॉट करने को कहा। दीदी ने कहा – “मैं खाना बना रही हूँ, तू खुद ही कर ले।” मैं किचन में गया और दीदी का मोबाइल लेकर आया। दीदी ने मुझे पैटर्न बताई तो मैंने अनलॉक किया और हॉटस्पॉट किया।
तभी मुझे याद आया कि मैंने एक ऐप बनाई थी और उसका टेस्टिंग करना था, तो क्यों न दीदी के मोबाइल में ही टेस्टिंग करूँ। मैंने अपने फोन से ऐप शेयर की और दीदी के मोबाइल में इंस्टॉल कर दी।
वो ऐप ऐसी थी कि आप किसी की भी कॉल सुन सकते थे और माइक्रोफोन से आसपास की बातें भी सुन सकते थे। वो ऐप इंस्टॉल होने के बाद हाइड हो जाती और किसी को पता भी नहीं चलता...
मैं दीदी का फोन वापस दे आया। थोड़ी देर में जीजू भी आ गए। हमने साथ खाना खाया और बैठकर बातें करने लगे। दीदी खुश तो बहुत थीं लेकिन शायद उनके कपड़े उनको अनकंफर्टेबल लग रहे थे। दीदी ने सलवार-कुर्ता पहने थे लेकिन वो बार-बार उन्हें सही कर रही थीं। जीजू ने भी यह नोटिस किया लेकिन कुछ कहा नहीं।
फिर हम अपने-अपने रूम में चले गए। उनके बेडरूम के बगल वाले रूम मुझे दिया था। रूम के अंदर जाके मैं बेड पर लेट गया और दीदी ने जब गले लगाया था उसके बारे में सोचने लगा।
कितना अच्छा लगा था मुझे जब दीदी के गले लगा था। मुझे लगा मैं दीदी के और करीब आ गया हूँ और हमारा रिश्ता और मजबूत हो गया है। वैसे दीदी के दोनों बड़े-बड़े स्तन मुझे अब भी महसूस हो रहे थे लेकिन मुझे उसमें कुछ गलत नहीं लगा। अगर दो लोग गले मिलेंगे तो उनके अंग एक-दूसरे को महसूस तो होंगे ही, चाहे वो भाई-बहन ही क्यों न हों और इसमें गलत भी क्या है। उल्टा अब मुझे दीदी पर ज्यादा ही प्यार आने लगा था। ऐसा लग रहा था दीदी ही मेरा सब कुछ है। और ऐसे सोचते-सोचते मैं सो गया।
शाम को हम फ्रेश होकर हॉल में बैठे थे। दीदी चाय बनाने किचन में गईं और जीजू भी पीछे-पीछे गए। मैंने मोबाइल निकाला और तभी मुझे ख्याल आया कि चलो ऐप की टेस्टिंग करते हैं। वैसे जीजू और दीदी की बातें ऐसे सुनना मुझे ठीक नहीं लगा, फिर सोचा आखिर क्या ही बातें करेंगे, सुन लेता हूँ। मैंने इयरफोन लगाए और सुनने लगा...
जीजू: सुनो ना।
दीदी: क्या है।
जीजू: तुम्हारा भाई आया है तो मैं सोच रहा था कि हम रात को थोड़ी पार्टी कर लें...
दीदी: पार्टी मेरे भाई के साथ? वो पार्टी नहीं करता।
जीजू: तुम्हे कैसे पता तुम्हारा भाई पार्टी नहीं करता। बियर तो पक्का पीता होगा...
दीदी: नहीं, वो बियर भी नहीं पीता।
जीजू: तुम उसे बच्चा समझना बंद करो जानू। वो 18 साल का हो गया है और वो पक्का दोस्तों के साथ पार्टी करता होगा और उसकी कोई गर्लफ्रेंड भी होगी और हो सकता है तुम्हारे भाई ने उसे चोदा भी होगा...
(यह सुनके मुझे अजीब सा रोमांच हुआ। मैं पहली बार पति-पत्नी की बातें ऐसे सुन रहा था और पत्नी मेरी सगी बहन थी)
दीदी: मेरा भाई ऐसा नहीं है, मैं उसे जानती हूँ। और मेरे भाई के बारे में ऐसा मत बोलो।
जीजू: ओके सॉरी बाबा, लेकिन तुम्हे अपनी सोच बदलनी होगी। तुम उसे छोटे बच्चे जैसे हर वक्त ट्रीट नहीं कर सकतीं। हाँ, तुम थोड़ी देर उसे लाड़-प्यार करो वो ठीक है। लेकिन तुम्हे उसे उसकी उम्र और बॉडी के अनुसार समझना होगा। वो दिखने में मुझसे भी बड़ा लगता है, भले ही मुझसे 4 साल छोटा हो। अगर तुम ऐसे ही करती रही तो वो तुमसे दूर होता जाएगा।
थोड़ी देर कोई कुछ नहीं बोला और थोड़ी देर बाद...
दीदी: हाँ बाबू, तुम सही हो लेकिन क्या करूँ। वो मेरे सामने छोटे से बड़ा हुआ है। मैंने उसे अपना दूध न पिलाया हो लेकिन एक माँ के जैसे सँभाला है। कुछ भी होता तो वो मम्मी-पापा के पास नहीं जाता बल्कि मेरे पास आता। लेकिन तुम सही हो। मुझे उसे छोटे बच्चे जैसे ट्रीट नहीं करना चाहिए।
जीजू: थैंक गॉड तुम समझ गईं। मैं उसे पार्टी के बारे में पूछूँगा, अगर वो ना कहेगा तो मैं फोर्स नहीं करूँगा। ठीक है।
दीदी: ठीक है, लेकिन तुम दोनों पार्टी करोगे तो मैं क्या करूँगी।
जीजू: हम तीनों मिलकर पार्टी करेंगे और क्या...
दीदी: पागल, मैं अपने भाई के साथ कैसे पार्टी करूँ।
(वैसे यह सुनकर मुझे सरप्राइज हुआ कि दीदी भी पार्टी करती हैं। लेकिन अच्छा भी लगा कि दीदी अपनी मर्जी से जीती हैं और अपनी लाइफ खुलकर एंजॉय करती हैं। दीदी की बातें सुनकर मुझे दीदी के लिए बहुत अच्छा लग रहा था। बस ऐसे ही दीदी खुश रहें और खुलकर एंजॉय करें।)
जीजू: अब तुम्हे अपने भाई के लिए हमें तो छूट देनी होगी। इतना तो करना ही होगा...
दीदी: कोई नहीं। मेरे भाई के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ। लेकिन अगर वो मना करे तो उसे फोर्स मत करना।
जीजू: फोर्स नहीं करूँगा बाबा। तुम मुझे नहीं जानती क्या।
और फिर किसिंग की आवाज़ आने लगी।
दीदी: क्या कर रहे हो। मेरा भाई हॉल में है।
जीजू: अरे तो क्या हुआ। उसे क्या नहीं पता होगा कि रोज रात को मैं उसकी बहन की चुदाई करता हूँगा।
दीदी: तो क्या मेरे भाई के सामने मुझे चोदोगे।
जीजू: अरे किस तो कर सकता हूँ ना।
दीदी: नहीं, भाई के सामने कोई किस नहीं।
जीजू: ठीक है बाबा, जैसा तुम कहो।
(जीजू और दीदी की बातें सुनके मेरा मूड बन गया था। पता नहीं क्यों मुझे अच्छा लग रहा था और मैं खुश था। मैं खुश था मेरी प्यारी दीदी के लिए। लेकिन मैं सोचने लगा कि दीदी शादी के बाद बोल्ड हो गई हैं। लेकिन वो खुश थीं और मैं उनके लिए खुश था। और आखिर पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा ही होना चाहिए। वो मेरी दीदी थीं लेकिन जीजू की बीवी थीं। वैसे जीजू उनसे तीन साल छोटे थे।)
थोड़ी देर बाद जीजू बाहर आए और दीदी भी चाय लेकर आईं। हमने चाय पी और इधर-उधर की बातें करने लगे।


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