11-10-2026, 05:26 PM
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सुबह की हल्की सुनहरी रोशनी खिड़की से कमरे में फैल रही थी। अमन अभी गहरी नींद में था। चादर कमर तक खिसकी हुई थी। तभी दरवाजा बहुत धीरे से खुला। कमला चाची अंदर आ गईं। उन्होंने दरवाजा बंद किया लेकिन सिटकिनी नहीं लगाई। उनके कदम फर्श पर कोई आवाज नहीं कर रहे थे।
वे बिस्तर के पास आकर रुकीं। अमन की साँसें नियमित थीं। कमला चाची ने झुककर उसके माथे पर बहुत हल्का सा चुंबन किया। फिर गाल पर। अमन की पलकें फड़कने लगीं। आँखें धीरे-धीरे खुलीं।
कमला चाची उसके बहुत करीब थीं। उनके खुले बाल अमन के चेहरे को छू रहे थे। साड़ी का पल्लू आगे की तरफ झुका हुआ था। अमन नींद भरी आँखों से उन्हें देखता रहा।
“अब तो उठ जाओ बेटा,” कमला चाची ने बहुत धीमी और गरमाई भरी आवाज में कहा। उंगलियाँ उसके बालों में फेरने लगीं। “धूप निकल आई है… और मैं भी।”
अमन ने करवट ली। चादर और खिसक गई। कमला चाची की निगाह सीधे उसके आधे सख्त लंड पर टिक गई। उन्होंने हल्की सी मुस्कान दी और दो उंगलियों से चादर को और नीचे सरका दिया। फिर बहुत हल्के हाथों से उसके लंड का आकार महसूस किया।
“आज तो बहुत जोश में हो लगते हो,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। आवाज में हल्की सी साँस फूली हुई थी। “रात अच्छी रही क्या? या सुबह वाली भूख ज्यादा है?”
अमन की आँखें पूरी तरह खुल गईं। उसने कमला चाची का हाथ पकड़ लिया। “चाची… सुबह-सुबह ऐसा करती हैं तो…”
कमला चाची और झुक गईं। उनके भारी स्तन अमन के चेहरे के बिलकुल करीब आ गए। साड़ी के गले से उनकी गहरी दरार साफ दिख रही थी। उन्होंने अमन के कान के पास होंठ ले जाकर फुसफुसाया, “सुबह ही तो असली मजा है। रात वाले थक जाते हैं… सुबह वाले भूखे और ताजे रहते हैं।”
अमन ने उनका हाथ अपनी छाती पर रखा। उंगलियाँ उनकी नरम हथेली को महसूस कर रही थीं। “आज कॉलेज जाना है चाची। देर हो जाएगी।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। उन्होंने अमन के लंड पर एक बार फिर हल्का सा हाथ फेरा—जड़ से लेकर सिर तक। फिर धीरे से उठ खड़ी हुईं। “तो जाओ। लेकिन याद रखना… रात को मेरे कमरे में आना। पैरों में दर्द है। दबाना पड़ेगा।”
अमन की निगाह उनकी पीठ और गाँड पर टिक गई जब वे दरवाजे की तरफ मुड़ीं। साड़ी के नीचे उनका लचकीला, गदराया शरीर हिल रहा था। कमला चाची ने दरवाजे पर खड़े होकर एक बार पीछे मुड़कर देखा। आँखों में वह पुरानी, भूखी शरारत साफ जल रही थी। “और हाँ… पैर ही दबाने हैं या कुछ और भी… सोच लेना।”
वे मुस्कुराते हुए निकल गईं। अमन बिस्तर पर बैठा रह गया। शरीर में एक गहरी बेचैनी फैल गई थी। लंड अब पूरी तरह सख्त हो चुका था। उसने गहरी साँस ली और उठकर तैयार होने लगा।
नहा-धोकर, सादी कमीज और पैंट पहनकर जब वह घर से निकला तो गली के मोड़ पर रुक्साना खड़ी मिलीं। काले रंग का टाइट सूट पहने हुए। बाल खुले थे और हवा में हल्के-हल्के उड़ रहे थे। उन्होंने अमन को देखते ही आँखों में मुस्कान भर ली।
“बाबूजी के बेटे,” उन्होंने आवाज लगाई। आवाज में हल्की सी गरमाई थी। “आज इतनी सुबह कॉलेज? कल रात सोए नहीं लगते हो।”
अमन पास गया। “काकी, नमस्ते। थोड़ी थकान है बस।”
रुक्साना ने एक कदम और करीब लिया। अब दोनों की दूरी बहुत कम रह गई थी। उनकी आँखों में एक साफ चमक थी। “थकान आँखों में दिख रही है। रात को देर तक जागे थे क्या? या कोई और वजह है?”
अमन ने सामान्य स्वर में जवाब दिया, “बस पढ़ाई का दबाव है काकी।”
रुक्साना हल्की हँसीं। उन्होंने अपना पल्लू ठीक करते हुए कहा, “पढ़ाई की थकान मिटाने के भी तरीके होते हैं। कभी हमारे बगीचे में आना। आम तो अब पूरी तरह पक चुके हैं… और कुछ चीजें तो पकते-पकते और भी ज्यादा मीठी और रसभरी हो जाती हैं।”
अमन ने उनकी आँखों में देखा। रुक्साना की निगाह साफ कह रही थी कि बात सिर्फ आम की नहीं है। उसने हल्की मुस्कान दी। “समय मिलने पर जरूर आऊँगा काकी।”
रुक्साना ने उसका हाथ हल्के से पकड़ लिया। उंगलियाँ उसकी कलाई पर घूमने लगीं। “समय निकालना बेटा। ज्यादा देर मत करना। कुछ चीजें ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करतीं।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है काकी।”
रुक्साना ने उसका हाथ छोड़ दिया लेकिन निगाहें उसकी पीठ पर तब तक टिकी रहीं जब तक वह गली के मोड़ से गायब नहीं हो गया। अमन के मन में एक अजीब सा ख्याल आया—घर के अंदर कमला चाची की आग, बाहर रुक्साना की भूख। दोनों तरफ से घेरा जा रहा था।
कॉलेज पहुँचते ही उसकी नजर राधा पर पड़ी। राजिया की जगह खाली थी। अमन समझ गया कि कल रात की थकान अभी बाकी होगी। वह सीधे राधा के पास गया।
“राधा,” उसने बहुत धीमे स्वर में कहा।
राधा ने सिर उठाया। आँखों में हल्की नाराजगी और थकान दोनों बाकी थीं। “हाँ?”
अमन ने चारों तरफ देखा। फिर धीरे से उसका हाथ पकड़कर उसे साइड में, पुरानी दीवार के कोने में ले गया जहाँ कोई आसानी से देख न सके। “राधा… कुछ दिनों से हमारे बीच दूरी बढ़ गई है। मैं जानता हूँ। मेरी गलती है।”
राधा चुप रही। उसकी निगाह अमन के चेहरे पर थी।
अमन ने दोनों हाथों से उसका हाथ पकड़ लिया। “माफ कर दो। सच में। तुम्हारे बिना सब अधूरा लग रहा है। मैंने तुम्हें समय नहीं दिया… ध्यान नहीं दिया। अब से रखूँगा। वादा।”
राधा की आँखें थोड़ी नरम पड़ीं। अमन ने और करीब आकर बहुत धीमे स्वर में कहा, “अब मूड ठीक करो।”
फिर उसने चारों तरफ एक नजर डाली और राधा के होंठों पर हल्का लेकिन गहरा चुंबन कर दिया। राधा पहले सहम गई। उसका शरीर थोड़ा तन गया। लेकिन अमन ने चुंबन तोड़ा नहीं। धीरे-धीरे राधा के होंठ नरम पड़ने लगे। उसने भी हल्के से जवाब देना शुरू कर दिया। चुंबन छोटा था, लेकिन उसमें वह पुरानी गर्माहट और प्यार दोनों लौट आए थे।
जब होंठ अलग हुए तो राधा के गाल लाल थे। साँसें थोड़ी तेज थीं। अमन ने उसके माथे पर हल्का सा होंठ रखा। “अब ठीक है?”
राधा ने हल्के से सिर हिलाया। आँखों में मुस्कान लौट आई थी। “थोड़ा-थोड़ा… अब बेहतर है।”
दोनों मुस्कुराए। पहली बार कई दिनों बाद उनके बीच की दीवार थोड़ी कम हुई थी। अमन ने उसका हाथ दबाया और दोनों अपनी-अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।
शाम का समय हो चला था जब अमन कॉलेज से घर लौटा। आँगन में माँ सुशीला चूल्हे के पास बैठी थीं। उन्होंने अमन को देखते ही आवाज लगाई।
“अमन, इधर आ।”
अमन पास गया। माँ ने उसके बैग की तरफ इशारा करते हुए कहा, “रखा दो बैग। तुम्हारी कमला चाची के पैरों में बहुत दर्द है। वे खुद बोल रही थीं कि रात को तुम थोड़ी देर दबा देना। तुम्हारे हाथ अच्छे हैं न।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है माँ। दबा दूँगा।”
माँ मुस्कुरा दीं और फिर से अपने काम में लग गईं। अमन अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। मन ही मन एक शरारत भरी मुस्कान तैर गई।
“पैरों में दर्द…?” उसने अपने आप से कहा। “पैर नहीं, चूत में खुजली होगी। आज मिटा ही देता हूँ उनकी खुजली।”
रात का खाना परिवार के साथ बैठकर खाया। कमला चाची मेज के दूसरी तरफ बैठी थीं। बीच-बीच में उनकी निगाहें अमन से मिल जातीं। हर बार उनकी आँखों में वही चुपचाप बुलावा होता था। अमन सामान्य व्यवहार बनाए रखता। खाना खत्म होने के बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए।
लगभग बारह बजने वाले थे जब दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन इस बार सीधे मुड़े। “दीदी, आज सब कुछ बताना है।”
रेणु ने सिर हिलाया। “बताओ।”
अमन ने शुरू से अंत तक सब कह दिया। कैसे उसने राजिया को सच बताया, कैसे वह रोई, कैसे दोनों के बीच दीवार टूटी, और फिर जो शारीरिक संबंध बने। कोई बात नहीं छुपाई। रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। उनके चेहरे पर कोई हैरानी नहीं थी। बल्कि एक शांत संतुष्टि थी।
जब अमन खत्म हुआ तो रेणु ने धीरे से कहा, “अब तुम खुद सब कुछ संभालने लगे हो। मुझे सच में खुशी है। तुमने सबका दिल जीत लिया है अमन। कमला चाची, राजिया, रुक्साना… सब तुम्हारी गुलाम बनती जा रही हैं।”
अमन ने उनका हाथ पकड़ लिया। उंगलियाँ उनकी नरम हथेली में फँस गईं। “आप कब बनेंगी दीदी? मुझे आपके साथ सुहागरात मनानी है।”
रेणु हल्की मुस्कुराईं। उन्होंने अमन का चेहरा दोनों हाथों में लिया। आँखों में वह पुरानी चमक थी। “जल्दी ही। सब्र रखो। समय आने पर सब होगा।”
फिर उन्होंने अमन के होंठों पर गहरा चुंबन कर दिया। जीभ अंदर तक चली गई। दोनों की साँसें तेज हो गईं। चुंबन लंबा और गीला था। जब होंठ अलग हुए तो रेणु ने अमन के कान के पास होंठ ले जाकर फुसफुसाया,
“आज जाकर कमला चाची की खुजली मिटा देना। एकदम रंडी की तरह चोदना। क्योंकि उन्हें वैसी ही चुदाई पसंद है—जोर की, गंदी, और पूरी तरह बेकाबू।”
अमन की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। “आपको कैसे पता दीदी?”
रेणु ने उसके होंठों पर फिर से हल्का चुंबन किया। मुस्कान में रहस्य था। “समय आने पर बताऊँगी। अभी के लिए इतना काफी है। जाओ। वे इंतजार कर रही होंगी।”
रेणु उठकर खड़ी हो गईं। दरवाजे तक जाकर एक बार मुड़ीं। आँखों में हल्की सी चेतावनी और प्रोत्साहन दोनों थे। “संभल के। और मजा लेना।”
वे निकल गईं। कमरे में अँधेरा और अमन की तेज धड़कनें रह गईं।
अमन कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा। रेणु की बातें उसके दिमाग में घूम रही थीं—“रंडी की तरह चोदना… उन्हें वैसी ही पसंद है।” फिर वह उठा। गलियारे की तरफ बढ़ा। कमला चाची के कमरे से हल्की सी रोशनी आ रही थी।
उसने दरवाजे पर हल्के से दस्तक दी।
अंदर से कमला चाची की धीमी, गरमाई भरी आवाज आई, “आ जाओ…”
अमन ने दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। रात अब सच में शुरू होने वाली थी
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अमन ने दरवाजा धीरे से धकेला और अंदर कदम रखा।
और फिर वह देखकर बस ठहरा रह गया।
कमला चाची बिस्तर पर लेटी हुई थीं। हरे रंग की साड़ी पहने हुए। साड़ी का पल्लू एक तरफ गिरा हुआ था। लाल लिपस्टिक उनके होंठों पर चढ़ाई हुई थी। चेहरे पर हल्का मेकअप था और माथे पर एक छोटी सी लाल बिंदी, जो उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा रही थी। उनके बड़े-बड़े स्तन साड़ी के नीचे से उभर रहे थे और मोटी, गोल गाँड बिस्तर पर लचकीली फैली हुई थी। दीये की हल्की रोशनी में वे एकदम आइटम बम लग रही थीं।
अमन की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। वह धीरे-धीरे उनके पास गया।
“चाची… क्या बात है आज?” उसकी आवाज में हल्की हैरानी और उत्तेजना दोनों थे। “आज तो बहुत सेक्सी लग रही हो।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। उनकी आँखों में शरारत चमक रही थी। “ऐसा कुछ नहीं है बेटा। बस… आज स्पेशल नाइट है न। इसलिए थोड़ा सँवर लिया।”
अमन उनके बिस्तर के किनारे बैठ गया। कमला चाची ने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा।
“क्या तुम मेरी मसाज करोगे?” उन्होंने धीमी आवाज में पूछा।
अमन ने सिर हिलाया। “बिल्कुल चाची।”
कमला चाची ने धीरे से अपनी साड़ी को एक तरफ फेंक दिया। अब वे सिर्फ लाल ब्लाउज और साये में बिस्तर पर लेट गईं। उनके शरीर की नक्काशी दीये की रोशनी में और भी साफ दिखने लगी। अमन भी खड़ा हुआ। उसने अपनी कमीज उतारी, फिर पैंट। अब वह सिर्फ अंडरवियर में रह गया था। उसका लंड कपड़े के अंदर पहले से ही तना हुआ था।
वह फिर से बिस्तर पर चढ़ गया। पहले उसने कमला चाची के पैरों को अपने हाथों में लिया। तलवों को धीरे-धीरे दबाने लगा। उंगलियों से एड़ी और उंगलियों के बीच दबाव देता रहा। कमला चाची की आँखें आराम से बंद हो गईं। हल्की सिसकारी निकली।
अमन धीरे-धीरे ऊपर बढ़ने लगा। पिंडलियों को मसला, फिर जाँघों को। दोनों हाथों से उनकी मोटी जाँघों को दबाते हुए ऊपर की तरफ सरकता गया। जब उसके हाथ साये के किनारे तक पहुँचे तो उसने उंगलियों को अंदर सरका दिया। सीधे उनकी चूत पर स्पर्श किया।
“आह्ह्ह…” कमला चाची की कमर हल्की सी उठ गई।
अमन मुस्कुराया। वह और ऊपर आया। कमला चाची की नाभि पर थोड़ा तेल डाला। फिर दोनों अंगूठों से नाभि के चारों तरफ गोला बनाते हुए मसाज करने लगा। कमला चाची मचलने लगीं। उनकी साँसें तेज हो गईं।
“अमन… वहाँ… आह्ह…”
अमन ने और आगे बढ़ने का फैसला किया। उसने कमला चाची के ब्लाउज के बटन खोले। एक-एक करके। फिर ब्लाउज के दोनों भाग अलग किए। उनके विशाल, भारी स्तन बाहर आ गए। अमन की आँखें फटी की फटी रह गईं। इतने बड़े और रसीले संतरे उसने आज तक लाइव नहीं देखे थे। निप्पल गाढ़े रंग के और सख्त थे।
“चाची…” अमन की आवाज में हल्की हैरानी थी। “आपके संतरे तो बहुत बड़े और रसीले लग रहे हैं।”
कमला चाची ने आँखें खोलीं। हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, “तो फिर रस निकाल लेना आज। जितना चाहे।”
अमन ने दोनों हाथों में तेल लिया और उनके विशाल स्तनों पर लगा दिया। फिर दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। कभी ऊपर से नीचे, कभी गोलाकार। निप्पलों को उंगलियों के बीच लेकर हल्के-हल्के मरोड़ने लगा। कमला चाची की सिसकारियाँ तेज होने लगीं।
“आह्ह्ह… अमन… हाँ… ऐसे… और जोर से दबा…”
अमन उनके स्तनों को दबाता रहा, मसलता रहा। कभी झुककर निप्पल को जीभ से चाट भी लेता। कमला चाची की कमर अब बार-बार हिल रही थी।
थोड़ी देर बाद अमन बोला, “चाची… पलट जाइए।”
कमला चाची धीरे से उल्टी लेट गईं। उनका चेहरा तकिये पर था। अमन ने उनका ब्लाउज पूरी तरह उतारकर एक तरफ फेंक दिया। फिर उनकी पीठ पर तेल डालकर मसाज करने लगा। कंधों से लेकर कमर तक। उंगलियाँ उनकी रीढ़ की हड्डी पर घूम रही थीं। कमला चाची सुकून भरी सिसकारियाँ ले रही थीं।
फिर अमन और नीचे गया। उसकी निगाहें उनकी विशाल, गोल गाँड पर टिक गईं। इतनी मस्त और खूबसूरत गाँड। उसने दोनों हाथों से उनकी गाँड को मसलना शुरू कर दिया। कभी दबाता, कभी फैलाता। फिर एक हल्का थप्पड़ मारा।
“थप्प!”
कमला चाची की गाँड हिल गई। “आह्ह… शैतान…”
अमन मुस्कुराया। उसने और थप्पड़ मारे—कभी बाएँ, कभी दाएँ। गाँड लाल होने लगी। फिर उसने उनका साया भी धीरे-धीरे नीचे खींच लिया। अब कमला चाची पूरी तरह नंगी थीं।
अमन ने उनकी गाँड के दोनों भाग फैलाए। बीच में छोटी सी गुलाबी छेद दिख रही थी। उसने उंगली पर तेल लगाया और धीरे से उस छेद पर लगाया। फिर हल्के दबाव के साथ अंदर घुसेड़ दिया।
“आआआह्ह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की लंबी सिसकारी निकली। उनका शरीर मचल उठा।
अमन ने उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। कभी एक उंगली, कभी दो। कमला चाची की गाँड ऊपर उठने लगी। उनकी सिसकारियाँ अब तेज और बेकाबू हो रही थीं।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्ह्ह… अमन… उउउम्मम्म… और तेज… आआह्ह… माаааа…!”
अमन की उंगली उनकी गाँड के छेद में तेजी से चल रही थी। कमला चाची तकिये में मुँह गड़ाए जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थीं। उनका पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था।
अमन ने झुककर उनकी गाँड पर एक और थप्पड़ मारा और उंगली और गहराई तक घुसेड़ दी।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन… बहुत… ओоооह्ह…!”
कमला चाची अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। और रात अभी शुरू ही हुई थी।
वे बिस्तर के पास आकर रुकीं। अमन की साँसें नियमित थीं। कमला चाची ने झुककर उसके माथे पर बहुत हल्का सा चुंबन किया। फिर गाल पर। अमन की पलकें फड़कने लगीं। आँखें धीरे-धीरे खुलीं।
कमला चाची उसके बहुत करीब थीं। उनके खुले बाल अमन के चेहरे को छू रहे थे। साड़ी का पल्लू आगे की तरफ झुका हुआ था। अमन नींद भरी आँखों से उन्हें देखता रहा।
“अब तो उठ जाओ बेटा,” कमला चाची ने बहुत धीमी और गरमाई भरी आवाज में कहा। उंगलियाँ उसके बालों में फेरने लगीं। “धूप निकल आई है… और मैं भी।”
अमन ने करवट ली। चादर और खिसक गई। कमला चाची की निगाह सीधे उसके आधे सख्त लंड पर टिक गई। उन्होंने हल्की सी मुस्कान दी और दो उंगलियों से चादर को और नीचे सरका दिया। फिर बहुत हल्के हाथों से उसके लंड का आकार महसूस किया।
“आज तो बहुत जोश में हो लगते हो,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। आवाज में हल्की सी साँस फूली हुई थी। “रात अच्छी रही क्या? या सुबह वाली भूख ज्यादा है?”
अमन की आँखें पूरी तरह खुल गईं। उसने कमला चाची का हाथ पकड़ लिया। “चाची… सुबह-सुबह ऐसा करती हैं तो…”
कमला चाची और झुक गईं। उनके भारी स्तन अमन के चेहरे के बिलकुल करीब आ गए। साड़ी के गले से उनकी गहरी दरार साफ दिख रही थी। उन्होंने अमन के कान के पास होंठ ले जाकर फुसफुसाया, “सुबह ही तो असली मजा है। रात वाले थक जाते हैं… सुबह वाले भूखे और ताजे रहते हैं।”
अमन ने उनका हाथ अपनी छाती पर रखा। उंगलियाँ उनकी नरम हथेली को महसूस कर रही थीं। “आज कॉलेज जाना है चाची। देर हो जाएगी।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। उन्होंने अमन के लंड पर एक बार फिर हल्का सा हाथ फेरा—जड़ से लेकर सिर तक। फिर धीरे से उठ खड़ी हुईं। “तो जाओ। लेकिन याद रखना… रात को मेरे कमरे में आना। पैरों में दर्द है। दबाना पड़ेगा।”
अमन की निगाह उनकी पीठ और गाँड पर टिक गई जब वे दरवाजे की तरफ मुड़ीं। साड़ी के नीचे उनका लचकीला, गदराया शरीर हिल रहा था। कमला चाची ने दरवाजे पर खड़े होकर एक बार पीछे मुड़कर देखा। आँखों में वह पुरानी, भूखी शरारत साफ जल रही थी। “और हाँ… पैर ही दबाने हैं या कुछ और भी… सोच लेना।”
वे मुस्कुराते हुए निकल गईं। अमन बिस्तर पर बैठा रह गया। शरीर में एक गहरी बेचैनी फैल गई थी। लंड अब पूरी तरह सख्त हो चुका था। उसने गहरी साँस ली और उठकर तैयार होने लगा।
नहा-धोकर, सादी कमीज और पैंट पहनकर जब वह घर से निकला तो गली के मोड़ पर रुक्साना खड़ी मिलीं। काले रंग का टाइट सूट पहने हुए। बाल खुले थे और हवा में हल्के-हल्के उड़ रहे थे। उन्होंने अमन को देखते ही आँखों में मुस्कान भर ली।
“बाबूजी के बेटे,” उन्होंने आवाज लगाई। आवाज में हल्की सी गरमाई थी। “आज इतनी सुबह कॉलेज? कल रात सोए नहीं लगते हो।”
अमन पास गया। “काकी, नमस्ते। थोड़ी थकान है बस।”
रुक्साना ने एक कदम और करीब लिया। अब दोनों की दूरी बहुत कम रह गई थी। उनकी आँखों में एक साफ चमक थी। “थकान आँखों में दिख रही है। रात को देर तक जागे थे क्या? या कोई और वजह है?”
अमन ने सामान्य स्वर में जवाब दिया, “बस पढ़ाई का दबाव है काकी।”
रुक्साना हल्की हँसीं। उन्होंने अपना पल्लू ठीक करते हुए कहा, “पढ़ाई की थकान मिटाने के भी तरीके होते हैं। कभी हमारे बगीचे में आना। आम तो अब पूरी तरह पक चुके हैं… और कुछ चीजें तो पकते-पकते और भी ज्यादा मीठी और रसभरी हो जाती हैं।”
अमन ने उनकी आँखों में देखा। रुक्साना की निगाह साफ कह रही थी कि बात सिर्फ आम की नहीं है। उसने हल्की मुस्कान दी। “समय मिलने पर जरूर आऊँगा काकी।”
रुक्साना ने उसका हाथ हल्के से पकड़ लिया। उंगलियाँ उसकी कलाई पर घूमने लगीं। “समय निकालना बेटा। ज्यादा देर मत करना। कुछ चीजें ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करतीं।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है काकी।”
रुक्साना ने उसका हाथ छोड़ दिया लेकिन निगाहें उसकी पीठ पर तब तक टिकी रहीं जब तक वह गली के मोड़ से गायब नहीं हो गया। अमन के मन में एक अजीब सा ख्याल आया—घर के अंदर कमला चाची की आग, बाहर रुक्साना की भूख। दोनों तरफ से घेरा जा रहा था।
कॉलेज पहुँचते ही उसकी नजर राधा पर पड़ी। राजिया की जगह खाली थी। अमन समझ गया कि कल रात की थकान अभी बाकी होगी। वह सीधे राधा के पास गया।
“राधा,” उसने बहुत धीमे स्वर में कहा।
राधा ने सिर उठाया। आँखों में हल्की नाराजगी और थकान दोनों बाकी थीं। “हाँ?”
अमन ने चारों तरफ देखा। फिर धीरे से उसका हाथ पकड़कर उसे साइड में, पुरानी दीवार के कोने में ले गया जहाँ कोई आसानी से देख न सके। “राधा… कुछ दिनों से हमारे बीच दूरी बढ़ गई है। मैं जानता हूँ। मेरी गलती है।”
राधा चुप रही। उसकी निगाह अमन के चेहरे पर थी।
अमन ने दोनों हाथों से उसका हाथ पकड़ लिया। “माफ कर दो। सच में। तुम्हारे बिना सब अधूरा लग रहा है। मैंने तुम्हें समय नहीं दिया… ध्यान नहीं दिया। अब से रखूँगा। वादा।”
राधा की आँखें थोड़ी नरम पड़ीं। अमन ने और करीब आकर बहुत धीमे स्वर में कहा, “अब मूड ठीक करो।”
फिर उसने चारों तरफ एक नजर डाली और राधा के होंठों पर हल्का लेकिन गहरा चुंबन कर दिया। राधा पहले सहम गई। उसका शरीर थोड़ा तन गया। लेकिन अमन ने चुंबन तोड़ा नहीं। धीरे-धीरे राधा के होंठ नरम पड़ने लगे। उसने भी हल्के से जवाब देना शुरू कर दिया। चुंबन छोटा था, लेकिन उसमें वह पुरानी गर्माहट और प्यार दोनों लौट आए थे।
जब होंठ अलग हुए तो राधा के गाल लाल थे। साँसें थोड़ी तेज थीं। अमन ने उसके माथे पर हल्का सा होंठ रखा। “अब ठीक है?”
राधा ने हल्के से सिर हिलाया। आँखों में मुस्कान लौट आई थी। “थोड़ा-थोड़ा… अब बेहतर है।”
दोनों मुस्कुराए। पहली बार कई दिनों बाद उनके बीच की दीवार थोड़ी कम हुई थी। अमन ने उसका हाथ दबाया और दोनों अपनी-अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।
शाम का समय हो चला था जब अमन कॉलेज से घर लौटा। आँगन में माँ सुशीला चूल्हे के पास बैठी थीं। उन्होंने अमन को देखते ही आवाज लगाई।
“अमन, इधर आ।”
अमन पास गया। माँ ने उसके बैग की तरफ इशारा करते हुए कहा, “रखा दो बैग। तुम्हारी कमला चाची के पैरों में बहुत दर्द है। वे खुद बोल रही थीं कि रात को तुम थोड़ी देर दबा देना। तुम्हारे हाथ अच्छे हैं न।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है माँ। दबा दूँगा।”
माँ मुस्कुरा दीं और फिर से अपने काम में लग गईं। अमन अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। मन ही मन एक शरारत भरी मुस्कान तैर गई।
“पैरों में दर्द…?” उसने अपने आप से कहा। “पैर नहीं, चूत में खुजली होगी। आज मिटा ही देता हूँ उनकी खुजली।”
रात का खाना परिवार के साथ बैठकर खाया। कमला चाची मेज के दूसरी तरफ बैठी थीं। बीच-बीच में उनकी निगाहें अमन से मिल जातीं। हर बार उनकी आँखों में वही चुपचाप बुलावा होता था। अमन सामान्य व्यवहार बनाए रखता। खाना खत्म होने के बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए।
लगभग बारह बजने वाले थे जब दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन इस बार सीधे मुड़े। “दीदी, आज सब कुछ बताना है।”
रेणु ने सिर हिलाया। “बताओ।”
अमन ने शुरू से अंत तक सब कह दिया। कैसे उसने राजिया को सच बताया, कैसे वह रोई, कैसे दोनों के बीच दीवार टूटी, और फिर जो शारीरिक संबंध बने। कोई बात नहीं छुपाई। रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। उनके चेहरे पर कोई हैरानी नहीं थी। बल्कि एक शांत संतुष्टि थी।
जब अमन खत्म हुआ तो रेणु ने धीरे से कहा, “अब तुम खुद सब कुछ संभालने लगे हो। मुझे सच में खुशी है। तुमने सबका दिल जीत लिया है अमन। कमला चाची, राजिया, रुक्साना… सब तुम्हारी गुलाम बनती जा रही हैं।”
अमन ने उनका हाथ पकड़ लिया। उंगलियाँ उनकी नरम हथेली में फँस गईं। “आप कब बनेंगी दीदी? मुझे आपके साथ सुहागरात मनानी है।”
रेणु हल्की मुस्कुराईं। उन्होंने अमन का चेहरा दोनों हाथों में लिया। आँखों में वह पुरानी चमक थी। “जल्दी ही। सब्र रखो। समय आने पर सब होगा।”
फिर उन्होंने अमन के होंठों पर गहरा चुंबन कर दिया। जीभ अंदर तक चली गई। दोनों की साँसें तेज हो गईं। चुंबन लंबा और गीला था। जब होंठ अलग हुए तो रेणु ने अमन के कान के पास होंठ ले जाकर फुसफुसाया,
“आज जाकर कमला चाची की खुजली मिटा देना। एकदम रंडी की तरह चोदना। क्योंकि उन्हें वैसी ही चुदाई पसंद है—जोर की, गंदी, और पूरी तरह बेकाबू।”
अमन की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। “आपको कैसे पता दीदी?”
रेणु ने उसके होंठों पर फिर से हल्का चुंबन किया। मुस्कान में रहस्य था। “समय आने पर बताऊँगी। अभी के लिए इतना काफी है। जाओ। वे इंतजार कर रही होंगी।”
रेणु उठकर खड़ी हो गईं। दरवाजे तक जाकर एक बार मुड़ीं। आँखों में हल्की सी चेतावनी और प्रोत्साहन दोनों थे। “संभल के। और मजा लेना।”
वे निकल गईं। कमरे में अँधेरा और अमन की तेज धड़कनें रह गईं।
अमन कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा। रेणु की बातें उसके दिमाग में घूम रही थीं—“रंडी की तरह चोदना… उन्हें वैसी ही पसंद है।” फिर वह उठा। गलियारे की तरफ बढ़ा। कमला चाची के कमरे से हल्की सी रोशनी आ रही थी।
उसने दरवाजे पर हल्के से दस्तक दी।
अंदर से कमला चाची की धीमी, गरमाई भरी आवाज आई, “आ जाओ…”
अमन ने दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। रात अब सच में शुरू होने वाली थी
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[/img]अमन ने दरवाजा धीरे से धकेला और अंदर कदम रखा।
और फिर वह देखकर बस ठहरा रह गया।
कमला चाची बिस्तर पर लेटी हुई थीं। हरे रंग की साड़ी पहने हुए। साड़ी का पल्लू एक तरफ गिरा हुआ था। लाल लिपस्टिक उनके होंठों पर चढ़ाई हुई थी। चेहरे पर हल्का मेकअप था और माथे पर एक छोटी सी लाल बिंदी, जो उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा रही थी। उनके बड़े-बड़े स्तन साड़ी के नीचे से उभर रहे थे और मोटी, गोल गाँड बिस्तर पर लचकीली फैली हुई थी। दीये की हल्की रोशनी में वे एकदम आइटम बम लग रही थीं।
अमन की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। वह धीरे-धीरे उनके पास गया।
“चाची… क्या बात है आज?” उसकी आवाज में हल्की हैरानी और उत्तेजना दोनों थे। “आज तो बहुत सेक्सी लग रही हो।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। उनकी आँखों में शरारत चमक रही थी। “ऐसा कुछ नहीं है बेटा। बस… आज स्पेशल नाइट है न। इसलिए थोड़ा सँवर लिया।”
अमन उनके बिस्तर के किनारे बैठ गया। कमला चाची ने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा।
“क्या तुम मेरी मसाज करोगे?” उन्होंने धीमी आवाज में पूछा।
अमन ने सिर हिलाया। “बिल्कुल चाची।”
कमला चाची ने धीरे से अपनी साड़ी को एक तरफ फेंक दिया। अब वे सिर्फ लाल ब्लाउज और साये में बिस्तर पर लेट गईं। उनके शरीर की नक्काशी दीये की रोशनी में और भी साफ दिखने लगी। अमन भी खड़ा हुआ। उसने अपनी कमीज उतारी, फिर पैंट। अब वह सिर्फ अंडरवियर में रह गया था। उसका लंड कपड़े के अंदर पहले से ही तना हुआ था।
वह फिर से बिस्तर पर चढ़ गया। पहले उसने कमला चाची के पैरों को अपने हाथों में लिया। तलवों को धीरे-धीरे दबाने लगा। उंगलियों से एड़ी और उंगलियों के बीच दबाव देता रहा। कमला चाची की आँखें आराम से बंद हो गईं। हल्की सिसकारी निकली।
अमन धीरे-धीरे ऊपर बढ़ने लगा। पिंडलियों को मसला, फिर जाँघों को। दोनों हाथों से उनकी मोटी जाँघों को दबाते हुए ऊपर की तरफ सरकता गया। जब उसके हाथ साये के किनारे तक पहुँचे तो उसने उंगलियों को अंदर सरका दिया। सीधे उनकी चूत पर स्पर्श किया।
“आह्ह्ह…” कमला चाची की कमर हल्की सी उठ गई।
अमन मुस्कुराया। वह और ऊपर आया। कमला चाची की नाभि पर थोड़ा तेल डाला। फिर दोनों अंगूठों से नाभि के चारों तरफ गोला बनाते हुए मसाज करने लगा। कमला चाची मचलने लगीं। उनकी साँसें तेज हो गईं।
“अमन… वहाँ… आह्ह…”
अमन ने और आगे बढ़ने का फैसला किया। उसने कमला चाची के ब्लाउज के बटन खोले। एक-एक करके। फिर ब्लाउज के दोनों भाग अलग किए। उनके विशाल, भारी स्तन बाहर आ गए। अमन की आँखें फटी की फटी रह गईं। इतने बड़े और रसीले संतरे उसने आज तक लाइव नहीं देखे थे। निप्पल गाढ़े रंग के और सख्त थे।
“चाची…” अमन की आवाज में हल्की हैरानी थी। “आपके संतरे तो बहुत बड़े और रसीले लग रहे हैं।”
कमला चाची ने आँखें खोलीं। हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, “तो फिर रस निकाल लेना आज। जितना चाहे।”
अमन ने दोनों हाथों में तेल लिया और उनके विशाल स्तनों पर लगा दिया। फिर दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। कभी ऊपर से नीचे, कभी गोलाकार। निप्पलों को उंगलियों के बीच लेकर हल्के-हल्के मरोड़ने लगा। कमला चाची की सिसकारियाँ तेज होने लगीं।
“आह्ह्ह… अमन… हाँ… ऐसे… और जोर से दबा…”
अमन उनके स्तनों को दबाता रहा, मसलता रहा। कभी झुककर निप्पल को जीभ से चाट भी लेता। कमला चाची की कमर अब बार-बार हिल रही थी।
थोड़ी देर बाद अमन बोला, “चाची… पलट जाइए।”
कमला चाची धीरे से उल्टी लेट गईं। उनका चेहरा तकिये पर था। अमन ने उनका ब्लाउज पूरी तरह उतारकर एक तरफ फेंक दिया। फिर उनकी पीठ पर तेल डालकर मसाज करने लगा। कंधों से लेकर कमर तक। उंगलियाँ उनकी रीढ़ की हड्डी पर घूम रही थीं। कमला चाची सुकून भरी सिसकारियाँ ले रही थीं।
फिर अमन और नीचे गया। उसकी निगाहें उनकी विशाल, गोल गाँड पर टिक गईं। इतनी मस्त और खूबसूरत गाँड। उसने दोनों हाथों से उनकी गाँड को मसलना शुरू कर दिया। कभी दबाता, कभी फैलाता। फिर एक हल्का थप्पड़ मारा।
“थप्प!”
कमला चाची की गाँड हिल गई। “आह्ह… शैतान…”
अमन मुस्कुराया। उसने और थप्पड़ मारे—कभी बाएँ, कभी दाएँ। गाँड लाल होने लगी। फिर उसने उनका साया भी धीरे-धीरे नीचे खींच लिया। अब कमला चाची पूरी तरह नंगी थीं।
अमन ने उनकी गाँड के दोनों भाग फैलाए। बीच में छोटी सी गुलाबी छेद दिख रही थी। उसने उंगली पर तेल लगाया और धीरे से उस छेद पर लगाया। फिर हल्के दबाव के साथ अंदर घुसेड़ दिया।
“आआआह्ह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की लंबी सिसकारी निकली। उनका शरीर मचल उठा।
अमन ने उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। कभी एक उंगली, कभी दो। कमला चाची की गाँड ऊपर उठने लगी। उनकी सिसकारियाँ अब तेज और बेकाबू हो रही थीं।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्ह्ह… अमन… उउउम्मम्म… और तेज… आआह्ह… माаааа…!”
अमन की उंगली उनकी गाँड के छेद में तेजी से चल रही थी। कमला चाची तकिये में मुँह गड़ाए जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थीं। उनका पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था।
अमन ने झुककर उनकी गाँड पर एक और थप्पड़ मारा और उंगली और गहराई तक घुसेड़ दी।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन… बहुत… ओоооह्ह…!”
कमला चाची अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। और रात अभी शुरू ही हुई थी।
Fuckuguy
albertprince547;
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