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Incest परिवार के गंदे राज़
#66
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रात के लगभग बारह बज रहे थे।
अमन अपने कमरे में बिस्तर पर बैठा था। दिमाग में राजिया की निगाहें, उसका पीछा, और भाई वाला नोट बार-बार घूम रहा था। वह समझ चुका था कि राजिया अब सिर्फ शक नहीं कर रही। वह सच जानने के बहुत करीब पहुँच चुकी है। अगर वह खुद नहीं बताया तो कोई और तरीका निकाल लेगी—और तब स्थिति और खराब हो सकती है।
दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन ने सीधा कहा, “दीदी… मुझे राजिया को सच बताना होगा।”
रेणु की आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं। उन्होंने अमन का चेहरा ध्यान से देखा। “तुमने सोचा-समझा?”
“हाँ,” अमन ने सिर हिलाया। “वह अब बहुत करीब आ चुकी है। अगर मैंने खुद नहीं बताया तो वह कोई गलत नतीजा निकाल लेगी। फिर न सिर्फ मेरा, राधा का भी नुकसान हो सकता है।”
रेणु कुछ पल चुप रही। फिर धीमे स्वर में बोलीं, “अगर बताना ही है… तो ठीक से बताना। झटके में नहीं। उसे इतना झटका मत लगने देना कि वह टूट जाए या कोई गलत कदम उठा ले।”
अमन ने उनकी तरफ देखा। “तो कैसे बताऊँ?”
रेणु ने उसका हाथ पकड़ा। “पहले उससे कहो कि तुम उसे अकेले में पूरी सच्चाई बताना चाहते हो। घर पर नहीं—कहीं ऐसा जगह जहाँ वह सुरक्षित महसूस करे। उसकी अपनी जगह सबसे अच्छी रहेगी। रात को। जब माँ सो चुकी हों।”
अमन ने सिर हिलाया।
“और जब बताओ,” रेणु ने आगे कहा, “तो साफ बताना। कि उसके भाई ने जानबूझकर तुम्हें कुचलने की कोशिश की थी क्योंकि वह राधा को चाहता था। तुम्हारी उससे कोई दुश्मनी नहीं थी। तुमने कुछ नहीं किया। वह खुद नियंत्रण खोकर खाई में गिर गया। सच्चाई इतनी ही है।”
अमन चुपचाप सुन रहा था।
“अगर वह न माने,” रेणु ने आँखों में आँखें डालकर कहा, “तो उससे पूछना—क्या उसने कभी तुम्हें उसके भाई के साथ झगड़ते देखा? क्या तुमने कभी उसके भाई को धमकी दी? तुम तो उसे ठीक से जानते भी नहीं थे। सवालों से उसे खुद सोचने दो।”
अमन ने गहरी साँस ली। “और अगर वह रोने लगे?”
रेणु की आवाज थोड़ी नरम हो गई। “तो उसे रोने दो। रोकना मत। बस पास रहना। और… सावधान रहना। भावनाओं के उस पल में कुछ भी हो सकता है। नियंत्रण मत खोना।”
अमन ने सिर हिलाया। रेणु ने उसके माथे पर हल्का हाथ फेरा।
“कल कॉलेज में उसे कह देना। बाकी वह खुद तय करेगी।”
रेणु चली गईं। अमन अकेला रह गया। कमरे में अँधेरा था। पहली बार उसने महसूस किया कि सच छुपाने से ज्यादा मुश्किल सच बताना होता है।
अगली सुबह कॉलेज में अमन ने मौका तलाशा। ब्रेक के समय जब राजिया अकेली पानी की टंकी के पास खड़ी थी, तब वह उसके पास गया।
“राजिया,” उसने धीमे स्वर में कहा।
राजिया मुड़ी। आँखों में वही ठंडी चमक थी।
“मुझे तुमसे एक बात कहनी है,” अमन ने जारी रखा। “पूरी सच्चाई। लेकिन अकेले में। अगर तुम चाहो तो… आज रात तुम्हारे घर आ सकता हूँ। जब तुम्हारी माँ सो जाएँ।”
राजिया की आँखें एक पल के लिए चौड़ी हुईं। फिर उसने धीरे से सिर हिलाया।
“ठीक है। ग्यारह बजे के बाद। पिछवाड़े वाले दरवाजे से आना। मैं खुला रखूँगी।”
अमन ने सिर हिलाया और वहाँ से हट गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पहली बार उसने खुद राजिया को बुलावा दिया था—सच बताने के लिए।
रात के ग्यारह बजने में अभी देर थी। लेकिन अमन जानता था कि आज की रात सब कुछ बदलने वाली है।


रात के ग्यारह बज चुके थे।
अमन ने काले रंग की सादी कमीज और पैंट पहन ली थी। चेहरे पर कोई टोपी या छुपाने वाली चीज नहीं थी। आज वह सच बताने जा रहा था, छुपने नहीं। घर से निकलते समय उसने खिड़की से बाहर देखा। हवेली शांत थी। रेणु की सलाह उसके कानों में गूँज रही थी—“ठीक से बताना… झटका मत लगने देना।”
गाँव की गलियाँ सुनसान थीं। कुत्तों की कभी-कभी आने वाली आवाज के अलावा सन्नाटा था। अमन ने राजिया के घर का पिछवाड़ा पहचाना। छोटा सा मिट्टी का मकान। पिछवाड़े वाला दरवाजा अधखुला था, ठीक जैसे राजिया ने कहा था।
उसने धीरे से दरवाजा धकेला। अंदर हल्की सी दीये की रोशनी थी। राजिया दरवाजे के पास ही खड़ी थी। काले रंग का ही सूट पहने हुए। बाल खुले थे। आँखों में नींद नहीं, बल्कि एक अजीब सी तैयारी थी।
“आ गए,” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा।
अमन ने सिर हिलाया। “माँ सो गईं?”
“हाँ। काफी देर हो गई।” राजिया ने दरवाजा बंद किया और सिटकिनी लगा दी। “अंदर आओ।”
दोनों छोटे से कमरे में दाखिल हुए। भाई की खाली चारपाई अभी भी कोने में खड़ी थी। तकिया वैसा ही पड़ा था। दीये की लौ दीवार पर दोनों की छायाएँ बना रही थी। राजिया ने अमन की तरफ देखा।
“बैठो,” उसने कहा।
अमन चारपाई के किनारे बैठ गया। राजिया उसके सामने खड़ी रही। कुछ पल तक दोनों चुप रहे। फिर अमन ने बात शुरू की। आवाज शांत लेकिन साफ थी।
“राजिया… जो कुछ मैं बताने वाला हूँ, वह सुनने में भारी लगेगा। लेकिन सच यही है।”
राजिया की साँस थोड़ी तेज हो गई। उसने कुछ नहीं कहा। बस खड़ी रही।
अमन ने आँखें उठाकर उसकी तरफ देखा। “तुम्हारे भाई की मौत… एक्सीडेंट थी। लेकिन वह साधारण एक्सीडेंट नहीं थी।”
राजिया की उंगलियाँ मुट्ठी में भींच गईं।
“उस दिन… मैं और राधा शहर से लौट रहे थे। मूवी देखने गए थे। वापस आते समय तुम्हारे भाई ने मोटरसाइकिल से मुझे कुचलने की कोशिश की। जानबूझकर। पूरी रफ्तार से।”
राजिया का चेहरा सख्त हो गया। “झूठ बोल रहे हो।”
“नहीं,” अमन ने सिर हिलाया। आवाज में कोई बचाव नहीं था। सिर्फ सच्चाई। “मैंने राधा को एक तरफ धकेला। खुद भी साइड में कूदा। तुम्हारे भाई का नियंत्रण हाथ से निकल गया। मोटरसाइकिल खाई में चली गई। वह… उठ नहीं पाया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया। दीये की लौ काँप रही थी। राजिया की साँसें अब साफ सुनाई दे रही थीं।
“क्यों?” उसने कठोर स्वर में पूछा। “मेरे भाई को तुमसे क्या दुश्मनी थी?”
अमन ने धीमे स्वर में जवाब दिया, “दुश्मनी नहीं थी। वह राधा को चाहता था। काफी दिनों से। चुपके-चुपके देखा करता था। जब उसने हमें साथ देखा… तो बर्दाश्त नहीं कर पाया।”
राजिया पीछे हटी। चारपाई के किनारे जाकर बैठ गई। उसके हाथ काँप रहे थे।
“तुम झूठ बोल रहे हो,” उसने दोबारा कहा। लेकिन आवाज में पहले जैसी मजबूती नहीं रह गई थी। “मेरा भाई… वह ऐसा नहीं कर सकता।”
अमन ने उसकी तरफ देखा। आँखों में आँखें डालकर बोला, “राजिया… क्या तुमने कभी मुझे तुम्हारे भाई से झगड़ते देखा? क्या मैंने कभी उसे धमकी दी? मैं तो उसे ठीक से जानता भी नहीं था। कॉलेज में भी मुश्किल से दो-चार बार बात हुई होगी। फिर मैं क्यों मारता उसे?”
राजिया चुप हो गई। उसकी निगाहें फर्श पर टिक गईं। दिमाग में पुरानी बातें घूमने लगीं—भाई का राधा के बारे में चुप रहना, उसकी जलन भरी निगाहें, और वह रात जब वह अमन और राधा की योजना सुनकर गुस्से में था।
अमन ने आगे कहा, आवाज और धीमी हो गई, “मैंने कुछ नहीं किया राजिया। सिर्फ अपनी और राधा की जान बचाई। बाकी… वह खुद गिर गया।”
राजिया ने आँखें बंद कर लीं। उसके होंठ काँप रहे थे। कुछ पल तक वह बिल्कुल शांत रही। फिर धीरे से बोली,
“मेरा भाई… राधा के पीछे पड़ा था…?”
अमन ने सिर हिलाया। “हाँ।”
राजिया का चेहरा बिखर गया। उसने दोनों हाथों से मुँह ढक लिया। आवाज टूटते हुए निकली, “वह… वह मुझसे कुछ नहीं बोला… कभी नहीं…”
फिर वह अचानक चारपाई पर झुक गई। तकिये में मुँह गड़ा दिया और रोने लगी। पहले दबी हुई सिसकियाँ, फिर जोर-जोर से। कंधे काँप रहे थे। आँसू तकिये को गीला करने लगे।
अमन उठकर उसके पास गया। वह चारपाई के किनारे बैठ गया। कुछ पल तक बस बैठा रहा। फिर धीरे से उसका नाम लिया,
“राजिया…”
वह रोती रही। अमन ने उसका कंधा हल्के से पकड़ा। “चुप हो जाओ… कृपया।”
राजिया ने सिर नहीं उठाया। आँसू रुक नहीं रहे थे। अमन ने और करीब खिसककर उसके बालों में हाथ फेरा। बहुत धीरे। फिर अपना चेहरा उसके करीब ले गया। दोनों के चेहरे अब बहुत नजदीक थे। राजिया की सिसकियाँ उसकी साँसों से मिल रही थीं।
अमन ने बहुत धीमी आवाज में कहा, “इस खूबसूरत चेहरे पर ये आँसू… सूट नहीं करते।”
फिर उसने अपना चेहरा और करीब किया। होंठों से उसके गाल पर बहते आँसू को छुआ। धीरे-धीरे चाटा। एक आँसू, फिर दूसरा। राजिया की साँस अटक गई। उसने आँखें खोलीं। अमन का चेहरा उसके बिलकुल सामने था। इतना करीब कि उसकी साँस महसूस हो रही थी।
राजिया कुछ नहीं बोली। बस देखती रही।
अमन ने उसके माथे से बाल हटाए। फिर बहुत धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहला स्पर्श बहुत हल्का था। जैसे पूछ रहा हो। राजिया ने जवाब नहीं दिया। लेकिन पीछे भी नहीं हटी।
अमन ने थोड़ा और दबाव दिया। होंठों को धीरे से चूसा। राजिया की साँस तेज हो गई। उसके हाथ अभी भी तकिये पर थे। अमन ने एक हाथ उसके गाल पर रखा और चुंबन को थोड़ा गहरा किया।
कुछ पल बाद राजिया के होंठ हल्के से हिले। बहुत धीरे। जैसे कोई हिचकिचाहट टूट रही हो। अमन ने महसूस किया और चुंबन को और गहरा कर दिया। अब जीभ का स्पर्श हुआ। पहले हल्का, फिर थोड़ा और।
राजिया की आँखें बंद हो गईं। उसका एक हाथ धीरे से अमन की कमीज पर आ गया। चुंबन अब लंबा होता जा रहा था। दोनों की साँसें एक-दूसरे के मुँह में मिल रही थीं। अमन ने उसका निचला होंठ हल्के से दाँतों से पकड़ा, फिर जीभ से सहलाया। राजिया की सिसकारी चुंबन के बीच में दबी हुई निकल गई।
अमन का दूसरा हाथ उसकी कमर पर चला गया। उसने उसे और करीब खींच लिया। दोनों के शरीर अब एक-दूसरे से सट चुके थे। चुंबन और गहरा, और गीला होता जा रहा था। जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। कभी अमन चूस रहा था, कभी राजिया जवाब दे रही थी।
कमरे में सिर्फ उनके चुंबन की हल्की आवाज और साँसें गूँज रही थीं। दीये की लौ काँप रही थी। और बाहर रात गहरी होती जा रही थी।



चुंबन अभी भी गहरा चल रहा था। दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुँह में उलझी हुई थीं। अमन का एक हाथ राजिया की कमर पर था, दूसरा उसके गाल पर। राजिया की साँसें तेज हो चुकी थीं। उसका शरीर हल्के-हल्के अमन की तरफ झुक रहा था।
अमन ने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर से सरकाया। उंगलियाँ ऊपर की तरफ बढ़ीं। पहले पसलियों को छुआ, फिर और ऊपर। साड़ी नहीं, सूट था। टाइट काला सूट। अमन की हथेली ने सीधे उसके बाएँ स्तन को कपड़ों के ऊपर से दबाया।
राजिया की लंबी, दबी हुई सिसकारी चुंबन के बीच में निकल गई। “उम्मhh…”
अमन ने चुंबन तोड़े बिना उसका स्तन हल्के से मसला। गोलाई को महसूस किया। निप्पल कपड़े के नीचे सख्त हो रहा था। उसने अंगूठे से गोला बनाते हुए दबाया। राजिया की कमर काँप गई। उसका हाथ अमन की कमीज पर और कस गया।
अमन ने दूसरा हाथ भी उसके दाएँ स्तन पर रख दिया। अब दोनों हाथों से कपड़ों के ऊपर से उसके भारी स्तनों को दबा रहा था, सहला रहा था, निप्पलों को उंगलियों के बीच लेकर हल्के-हल्के मरोड़ रहा था। राजिया की सिसकारियाँ तेज होने लगीं। चुंबन के बीच-बीच में उसकी आवाज निकल रही थी—
“आह्ह… अमन…”
अमन ने अचानक चुंबन तोड़ दिया। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। राजिया की आँखें अधखुली थीं। होंठ सूजे हुए और चमक रहे थे। अमन ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। फिर धीरे से उसका सिर एक तरफ झुकाया और अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए।
पहले हल्का सा चुंबन। फिर थोड़ा और दबाकर। जीभ से चाटा। राजिया की गर्दन में सिहरन दौड़ गई। उसने आँखें बंद कर लीं। अमन ने उसके कान के नीचे वाले हिस्से को होंठों में लेकर हल्के से चूसा। राजिया की सिसकारी और साफ निकल गई।
“अमन… धीरे…”
अमन ने जवाब में और गहराई से उसकी गर्दन चूमनी शुरू कर दी। कभी दाँतों से हल्के निशान बनाए, कभी जीभ से सहलाया। उसी समय उसका एक हाथ राजिया के सूट के गले के पास पहुँचा। उंगलियाँ अंदर सरक गईं। पहले गर्दन के पास की गर्माहट महसूस हुई, फिर और नीचे।
सूट के अंदर कोई ब्रा नहीं थी। अमन की हथेली सीधे उसके नंगे, गर्म स्तन पर पड़ गई। राजिया की शरीर में एक तेज झटका सा चला। उसकी लंबी सिसकारी निकल गई—
“आह्ह्ह… अमन…!”
अमन ने पूरा स्तन मुट्ठी में भर लिया। नरम, भारी और गर्म। निप्पल उसकी हथेली में सख्त चुभ रहा था। उसने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। कभी हल्का, कभी थोड़ा जोर से। निप्पल को दो उंगलियों के बीच लेकर घुमाया, दबाया।
राजिया का सिर पीछे की तरफ झुक गया। उसकी साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं। दोनों हाथ अमन की पीठ पर चले गए थे। नाखून हल्के-हल्के गड़ रहे थे।
अमन ने दूसरा हाथ भी सूट के अंदर ले लिया। अब दोनों नंगे स्तन उसकी मुट्ठियों में थे। वह उन्हें दबा रहा था, ऊपर उठा रहा था, निप्पलों को मरोड़ रहा था। साथ में गर्दन पर उसके होंठ और जीभ रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
राजिया की आवाज अब काँप रही थी। “अमन… बहुत… आह्ह… धीरे… नहीं… जोर से मत…”
लेकिन उसके शरीर ने अलग कहानी कह रही थी। वह अमन की तरफ और सट रही थी। स्तन उसके हाथों में और अधिक दबाव माँग रहे थे। अमन ने एक निप्पल को हल्के से खींचा। राजिया की कमर उठ गई। एक और तेज सिसकारी निकली।
कमरे में दीये की लौ काँप रही थी। बाहर सन्नाटा था। और अंदर दो शरीर धीरे-धीरे एक-दूसरे की गर्माहट में खोते जा रहे थे।


अमन ने राजिया को दोनों हाथों से कमर से पकड़ा और धीरे से उठा लिया। राजिया की आँखें खुली रहीं। वह कुछ बोल नहीं पाई। अमन ने उसे चारपाई पर लिटा दिया। फिर उसके सूट के निचले किनारे को पकड़ा।
“हाथ ऊपर करो,” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा।
राजिया ने धीरे से दोनों हाथ ऊपर कर दिए। अमन ने सूट को नीचे से ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। काला कपड़ा उसके शरीर से सरकता गया। पहले पेट entblößt हुआ, फिर पसलियाँ, फिर भारी स्तन। सूट उसके सिर के ऊपर से निकल गया। राजिया अब सिर्फ पैंटी में थी। उसके गोरे, गोल स्तन दीये की रोशनी में काँप रहे थे। निप्पल सख्त और गाढ़े रंग के थे।
अमन ने उसके पैरों की तरफ देखा। सलवार अभी भी पहनी हुई थी। उसने दोनों हाथों से उसका नाड़ा खोला और सलवार को धीरे-धीरे नीचे खींच लिया। राजिया ने खुद ही कमर थोड़ी उठाई ताकि कपड़ा आसानी से निकल जाए। सलवार उसके पैरों से अलग हो गई। अब वह सिर्फ काली पैंटी में लेटी थी।
अमन खड़ा हो गया। उसने अपनी कमीज के बटन खोले और उतार दी। फिर पैंट का नाड़ा खोला। पैंट नीचे गिर गई। अब वह सिर्फ अंडरवियर में रह गया था। उसका लंड कपड़े के अंदर पूरी तरह तना हुआ साफ दिख रहा था।
वह फिर से चारपाई पर चढ़ गया। राजिया के ऊपर आ गया। दोनों के शरीर की गर्माहट एक-दूसरे से टकरा रही थी। अमन ने झुककर उसके बाएँ स्तन को मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ निप्पल को होंठों में दबाया, फिर पूरा मुँह भर लिया और जोर से चूसने लगा।
“आआआह्ह्ह्ह… अमन…” राजिया की लंबी सिसकारी निकली। उसका हाथ अमन के बालों में चला गया।
अमन ने निप्पल को जीभ से घुमाया, हल्के से दाँतों से काटा, फिर फिर से जोर से चूसा। दूसरा स्तन भी उसी हालत में था। वह बारी-बारी से दोनों को मुँह में ले रहा था। राजिया की कमर हिलने लगी थी।
“ओоооह्ह्ह्ह… अमन… उउउउम्मम्म…” उसकी आवाज अब अनियंत्रित हो रही थी।
अमन ने स्तनों से होंठ हटाए और नीचे की तरफ बढ़ा। उसकी जीभ राजिया की पसलियों पर फिसली, फिर पेट पर। धीरे-धीरे नाभि के पास पहुँची। उसने नाभि के चारों तरफ गोला बनाया, फिर जीभ को अंदर डालकर चाटा।
राजिया का शरीर अचानक मचल उठा। “आआआह्ह्ह… नहीं… वहाँ… अमन…” उसकी जाँघें काँपने लगीं। कमर बिस्तर से उठ गई।
अमन ने उसकी नाभि को फिर से चूमा, जीभ से सहलाया। राजिया के नाखून अब अमन की पीठ पर हल्के गड़ रहे थे। वह सिर इधर-उधर हिला रही थी।
अमन फिर से ऊपर आया। एक स्तन को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। उसी समय उसका दाहिना हाथ नीचे की तरफ सरक गया। उंगलियाँ राजिया की जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर फिसलीं। फिर पैंटी के किनारे तक पहुँचीं। उसने पैंटी को एक तरफ सरकाया। उंगलियाँ सीधे उसकी गर्म, गीली चूत पर पड़ गईं।
राजिया की शरीर में एक तेज झटका सा चला। उसकी आवाज और तेज हो गई—
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन… उउउम्मम्म… वहाँ… मत…”
अमन ने उंगलियों से धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाना शुरू किया। बीच वाली घुंडी पर गोला बनाया। राजिया की जाँघें अपने आप खुलने लगीं। उसकी सिसकारियाँ अब कमरे में गूँज रही थीं। अमन एक स्तन चूस रहा था और नीचे उंगलियों से उसकी गीली चूत को सहला रहा था।
राजिया का पूरा शरीर काँप रहा था। आँखें बंद थीं। होंठ खुले हुए थे। आवाज टूट-टूटकर निकल रही थी—
“अमन… आआह्ह… ओооह्ह… और… धीरे… नहीं… जोर से…”
अमन ने पैंटी को और साइड में किया। एक उंगली हल्के से उसके अंदर चली गई। राजिया की कमर जोर से उठी। एक लंबी, काँपती हुई सिसकारी निकली।
कमरे में दीये की लौ अभी भी काँप रही थी। बाहर रात गहरी थी। और चारपाई पर दो शरीर अब पूरी तरह एक-दूसरे की आग में जल रहे थे।



अमन ने राजिया के स्तनों से होंठ हटाए। उसकी साँसें तेज चल रही थीं। उसने धीरे से नीचे की तरफ सरकना शुरू किया। जीभ राजिया के पेट पर फिसली, नाभि को फिर से चूमा, फिर और नीचे।
राजिया की पैंटी अभी भी एक तरफ सरकी हुई थी। उसकी चूत पूरी तरह खुली और चमक रही थी—गीली, गुलाबी और उत्तेजना से सूजी हुई। अमन ने दोनों हाथों से उसकी जाँघें और फैलाईं। फिर अपना चेहरा उसके बीच ले गया।
पहले उसने नाक से उसकी गंध ली। फिर जीभ बाहर निकाली और नीचे से ऊपर तक एक लंबा चाटा मारा।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!” राजिया की कमर बिस्तर से जोर से उठ गई।
अमन ने रुके बिना फिर से चाटा। इस बार बीच वाली घुंडी पर जीभ को गोल-गोल घुमाया। राजिया की जाँघें काँपने लगीं। उसने दोनों हाथों से अमन का सिर पकड़ लिया और अपनी चूत पर और जोर से दबा दिया।
“ओоооह्ह्ह्ह… हाँ… वहीं… अमन…”
अमन ने जीभ को उसकी चूत के अंदर डाल दिया। गर्म, तंग और गीला अंदर। वह जीभ को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। साथ में ऊपर वाली घुंडी को भी होंठों से चूस रहा था। राजिया अब पागलों की तरह सिसकारियाँ ले रही थी।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्ह्ह… अमन… और तेज… जीभ अंदर… आह्ह्ह…!”
उसके नाखून अमन के बालों में गड़ गए। वह अमन का सिर अपनी चूत में और दबाने लगी। कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। अमन ने उसकी दोनों जाँघों को अपने कंधों पर चढ़ा लिया और और गहराई तक जीभ घुसेड़ दी।
“आआआआह्ह्ह्ह… ओоооह्ह्हह्ह… तेज… और तेज चूसो अमन… उउउम्मम्म…!”
राजिया की आवाज अब पूरी तरह टूट चुकी थी। उसका शरीर काँप रहा था। अमन की जीभ उसकी चूत के अंदर घूम रही थी, चूस रही थी, चाट रही थी। कभी घुंडी को जोर से चूसता, कभी जीभ अंदर तक डालकर हिलाता।
“अमन… मैं… आआह्ह… ओооह्ह… मैं जा रही हूँ… आह्ह्ह… माаааа…!”
राजिया की जाँघें अमन के सिर को जकड़ने लगीं। उसका पूरा शरीर अकड़ गया। कमर जोर से उठी और एक लंबी, काँपती हुई चीख निकलते हुए उसका पहला पानी अमन के मुँह और ठुड्डी पर छूट गया। वह बार-बार काँपती रही। अमन ने जीभ नहीं हटाई। वह धीरे-धीरे चाटता रहा जब तक राजिया की काँपने की गति कम नहीं हो गई।
राजिया का शरीर ढीला पड़ गया। साँसें तेज चल रही थीं। छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आँखें बंद थीं। माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। अमन धीरे से ऊपर आया। उसके होंठ और ठुड्डी चमक रहे थे। उसने राजिया के चेहरे को देखा।
राजिया ने आँखें खोलीं। आँखों में अभी भी उत्तेजना और थकान दोनों थे। अमन ने उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। दोनों की साँसें अभी भी एक-दूसरे से मिल रही थीं।
कमरे में दीये की लौ शांत हो चुकी थी। बाहर रात अपनी गहराई में डूबी हुई थी। और चारपाई पर राजिया अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थी—अपने पहले पानी के बाद।



अमन ने राजिया के होंठों पर फिर से चुंबन किया। इस बार धीमा और गहरा। राजिया ने भी जवाब दिया। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। अमन ने अपना अंडरवियर नीचे सरकाया। उसका लंड पूरी तरह तना हुआ बाहर आ गया—मोटा, नसों वाला और चमकता हुआ।
उसने राजिया की पैंटी को पूरी तरह खींचकर एक तरफ फेंक दिया। फिर उसके दोनों पैरों को फैलाया और अपने आप को उसके बीच में लाया। लंड का सिर उसकी गीली चूत पर छू गया। राजिया की साँस अटक गई।
“अमन…” उसने फुसफुसाकर कहा। आवाज में डर और इच्छा दोनों थे।
अमन ने उसके माथे पर चुंबन किया। “दर्द होगा तो बताना।”
फिर उसने धीरे-धीरे कमर आगे बढ़ाई। लंड का सिर अंदर घुसने लगा। राजिया की चूत टाइट थी। वह धीरे-धीरे फैल रही थी। अमन ने और दबाव दिया। आधा लंड अंदर चला गया।
“आआआह्ह्ह… अमन… धीरे… बहुत मोटा…!” राजिया की लंबी सिसकारी निकली। उसके नाखून अमन की पीठ पर गड़ गए।
अमन रुक गया। उसने उसके होंठ चूमे। “सह लो… बस थोड़ा और…”
फिर उसने एक और धीमा धक्का मारा। पूरा लंड अंदर तक धंस गया। दोनों की साँसें एक साथ रुक गईं। राजिया की आँखें बंद थीं। माथा अमन के माथे से सटा हुआ था।
कुछ पल तक अमन अंदर ही रुका रहा। फिर उसने धीरे-धीरे बाहर खींचा और फिर अंदर धकेला। हर धक्का गहरा और नियंत्रित था। राजिया की सिसकारियाँ हर धक्के के साथ निकल रही थीं।
“आह्ह… ओооह… अमन… हाँ… ऐसे…!”
अमन ने गति थोड़ी बढ़ा दी। अब वह उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए चोद रहा था। निप्पलों को मरोड़ते हुए। राजिया की कमर मिलकर हिलने लगी। थोड़ी देर में उसका शरीर फिर से अकड़ने लगा।
“अमन… मैं… फिर से… आआह्ह्ह…!”
उसका दूसरा पानी अमन के लंड पर छूट गया। वह काँपती रही। अमन रुका नहीं। उसने उसके पैरों को अपने कंधों पर चढ़ा लिया और और गहराई तक जाने लगा।
“ले… और ले… राजिया…” उसने फुसफुसाकर कहा।
राजिया की आवाज अब चीख में बदल रही थी। “आआआह्ह्ह… ओоооह्ह… बहुत गहरा… अमन…!”
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। राजिया कराह उठी। उसने उसे पलट दिया। अब राजिया घुटनों और हाथों के बल थी। उसकी गोरी गाँड दीये की रोशनी में चमक रही थी। अमन ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में फिर से लंड चूत में धंसा दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह…!” राजिया की चीख निकली।
अमन ने डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ राजिया की गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। थप्पड़ की हल्की आवाज भी आने लगी। अमन एक हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींच रहा था।
“आह्ह… अमन… जोर से… हाँ… चोदो…!” राजिया बेलगाम हो चुकी थी।
अमन की गति तेज हो गई। बिस्तर चरमरा रहा था। राजिया की सिसकारियाँ और चीखें कमरे में गूँज रही थीं। थोड़ी देर में उसका तीसरा पानी भी निकल गया। वह बिस्तर पर मुँह गड़ाकर काँपने लगी।
अमन ने लंड निकाला। राजिया को फिर से पलटा। इस बार उसने उसे अपनी गोद में बैठा लिया। राजिया की दोनों टाँगें उसकी कमर के दोनों तरफ थीं। अमन ने नीचे से लंड उसकी चूत में डाला और उसकी कमर पकड़कर उसे ऊपर-नीचे करने लगा।
“आआह्ह… ओооह… अमन… इतना गहरा…!” राजिया ने उसके गले में हाथ डाल दिए। स्तन उसके चेहरे के सामने ऊपर-नीचे हो रहे थे। अमन ने एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
राजिया खुद हिलने लगी। उसकी गति तेज होती गई। चौथा पानी भी उसी पोजीशन में निकल गया। वह अमन के गले से चिपक गई और काँपती रही।
अमन ने उसे फिर से बिस्तर पर लिटा दिया। इस बार आमने-सामने। उसने उसके दोनों पैर फैलाए और जोर-जोर से चोदने लगा। एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था, दूसरे से उसकी कमर। राजिया की आँखें अब उल्टी होने लगी थीं। मुँह से सिर्फ अस्पष्ट आवाजें निकल रही थीं—
“आआआह्ह… ओоооह… अमन… और… मत रोक… चोदो…!”
अमन की साँसें भी तेज हो चुकी थीं। वह अब अपनी सीमा के करीब था। लेकिन उसने राजिया को और एक बार पहुँचाने का फैसला किया। उसने गति और तेज कर दी। राजिया की चीखें तेज होती गईं। पाँचवाँ पानी निकलते ही अमन ने भी खुद को रोकना बंद कर दिया। गरम पानी की धार उसने उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए काँपते रहे।
बहुत देर तक कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें गूँजती रहीं। दीये की लौ अब बहुत छोटी रह गई थी। राजिया अमन के सीने पर लेटी हुई थी। आँखें बंद थीं। शरीर में पसीना चमक रहा था। अमन उसके बालों में हाथ फेर रहा था।
दोनों जानते थे कि आज की रात के बाद बहुत कुछ बदलने वाला है। लेकिन अभी… अभी सिर्फ यह गर्माहट बाकी थी।





अमन धीरे से राजिया के ऊपर से हटा। दोनों अभी भी पसीने से तर थे। उसने राजिया के बालों को चेहरे से हटाया और उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। फिर चारपाई पर बैठ गया।
उसका लंड अभी भी आधा सख्त था। उस पर राजिया का पानी और उसका अपना वीर्य मिला हुआ चमक रहा था। अमन ने राजिया की तरफ देखा।
“साफ कर दो,” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा।
राजिया ने आँखें खोलीं। थोड़ी देर तक उसे देखा। फिर धीरे से उठकर बैठ गई। उसने अमन के लंड को दोनों हाथों में लिया और मुँह के करीब ले गई। पहले जीभ से सिर को चाटा। फिर पूरे लंड को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे, गहराई से चूसने लगी। अमन की साँस तेज हो गई। उसने राजिया के बालों में हाथ रखा लेकिन जोर नहीं लगाया। बस महसूस करता रहा।
राजिया ने लंड को अच्छी तरह साफ किया। जीभ से चारों तरफ चाटा, मुँह से चूसा, जब तक वह साफ और चमकदार नहीं हो गया। फिर उसने होंठ हटाए और अमन की तरफ देखा।
अमन ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। “कैसा लगा तुम्हें?”
राजिया कुछ पल चुप रही। फिर बहुत धीमी आवाज में बोली, “तुमने… मुझे ठीक कर दिया। वरना मैं अपने दर्द में पागल हो जाती।”
अमन ने उसके माथे से बाल हटाए। “अब ठीक हो न?”
राजिया ने सिर हिलाया। आँखों में अभी भी नमी थी, लेकिन गुस्सा और शक अब नहीं रह गया था। उसकी जगह एक थकी हुई शांति थी।
उसी समय घर के दूसरे छोटे कमरे में रुक्साना की आँखें खुल चुकी थीं।
बेटी की आवाजें—सिसकारियाँ, चीखें, अमन का नाम—सब उसने सुन लिया था। पहले तो वह समझी कि फिर कोई कॉलेज वाला लड़का है। पहले भी कई बार उसने राजिया को घर में लड़कों को बुलाकर चोदते देखा था। लेकिन आज की आवाजें अलग थीं। इतनी गहरी, इतनी लंबी, इतनी बेकाबू। रुक्साना चुपके से बिस्तर से उठीं। दरवाजे की दरार से झाँका।
दीये की हल्की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था। अमन राजिया के ऊपर था। उसकी बेटी की टाँगें फैली हुई थीं। अमन जोर-जोर से धक्के मार रहा था। राजिया की चीखें और सिसकारियाँ निकल रही थीं। फिर पोजीशन बदली। डॉगी स्टाइल। फिर गोद में लेकर। हर बार राजिया का पानी निकलता दिख रहा था।
रुक्साना की साँसें तेज हो गईं। उनकी अपनी जाँघों के बीच गर्माहट बढ़ने लगी। उन्होंने अपना हाथ साड़ी के अंदर ले जाकर अपनी चूत पर रखा। उंगलियाँ गीली हो चुकी थीं। वे दरार से देखती रहीं—अमन का मोटा लंड उनकी बेटी की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। राजिया की गाँड लाल हो चुकी थी। स्तन हवा में झूल रहे थे।
जब अमन ने आखिर में राजिया के अंदर पानी छोड़ा तो रुक्साना की भी उंगलियाँ तेज हो गईं। वे अपने मुँह पर दूसरा हाथ रखकर सिसकारी दबाती रहीं। उनका पानी उनकी उंगलियों पर छूट गया। शरीर काँपने लगा। आँखों में एक अजीब सी भूख जाग गई।
“इस लंड को… मैं अपने भोसड़े में डालवा के रहूँगी,” उन्होंने मन ही मन कसम खाई। “इतनी चुदाई… मेरी बेटी ने आज तक किसी से नहीं करवाई।”
वे चुपके से अपने बिस्तर पर लौट गईं। दिल अभी भी जोर से धड़क रहा था।
दूसरी तरफ कमरे में अमन ने अपने कपड़े पहन लिए। राजिया अभी भी चारपाई पर लेटी थी। चादर आधी शरीर पर डाले हुए। अमन उसके पास बैठा। उसने राजिया का चेहरा दोनों हाथों में लिया और एक लंबा, धीमा चुंबन दिया। जीभ नहीं थी। सिर्फ होंठों का गहरा, भावनात्मक स्पर्श। राजिया ने आँखें बंद करके जवाब दिया।
जब चुंबन टूटा तो अमन ने उसके माथे पर हल्का सा होंठ रखा। “सो जाओ। अब ठीक है सब।”
राजिया ने धीमे स्वर में कहा, “जाओ… संभल के।”
अमन ने सिर हिलाया। पिछवाड़े वाले दरवाजे से निकल गया। गलियाँ अभी भी सुनसान थीं। वह चुपचाप हवेली पहुँचा। अंदर सब सो चुके थे। रेणु का कमरा भी शांत था। अमन अपने कमरे में गया। कपड़े बदले। बिस्तर पर लेट गया।
आज की रात का वजन उसके सीने पर था—सच्चाई, आँसू, फिर वह लंबी चुदाई। लेकिन थकान ने जल्दी ही उसे अपनी चपेट में ले लिया। आँखें बंद होते ही नींद आ गई।
और गाँव के किनारे वाले छोटे घर में रुक्साना अँधेरे में लेटी हुई थीं। आँखें खुली हुईं। मन में सिर्फ एक ही चेहरा और एक ही लंड घूम रहा था।
रात गहरी थी। लेकिन कई साँसें अभी भी शांत नहीं हुई थीं।
Fuckuguy
albertprince547;
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RE: परिवार के गंदे राज़ - by Fuckuguy - 10-10-2026, 08:36 PM



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