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Adultery मीना बाजार - A innocent Mother and Daughter
#60
अब आगे.....

उस सामुहिक चुदाई से मम्मी की तबीयत काफी बिगड़ी चुकी थी मम्मी रिकवरी होने में एक सप्ताह से भी ज्यादा समय लग गया।
.................................................

हमारे मोहल्ले में एक गुंडा रहता है, वे तो छोटे मोटे केस में अंदर बाहर होता रहता है उसकी बहुत चलती है हमारे मोहल्ले में उसे सब डरते हैं मेरा बाप भी । उसका नाम हिडमा है , सब उसको हिडमा भाई के नाम से जानते हैं एक दम काला हाईट करीब 6 फिट से भी थोड़ा लंबा है। मेरी तो बड़ी फटती थी हिडमा से क्योंकि मैंने उसकी लड़ाईयां कई बार अपनी आंखों से देखी थी, हिडमा की उम्र करीब 30 -35 साल के करीब होगी ।

एक दिन अपने कॉलेज जाने वक्त मम्मी बोली पायल मैं भी मंदिर जा रही हूं साथ में चलती हूं, मम्मी ने अपना पूजा का सामान उठाया और हम दोनों निकल चलें मम्मी ने उस दिन लाल रंग की बहुत हल्की साड़ी पहन राखी थी और स्लीवलेस ब्लाउज। साड़ी इतनी हल्की थी कि मम्मी का पीला रंग अगर कोई ध्यान से देखे तो मम्मी का पेटीकोट भी साफ दिखाई देता था, खैर करीब घर से 5 मिनट की दूरी पर हमको बस मिलती थी, मैं और मम्मी बस में चढ़ गए , बस की सारी सीट भरी थी हम दोनों खड़े थे तभी अगला स्टॉप पे हिडमा भी बस मैं चढ़ गया उसके साथ उसके 2 चेले भी थे। वो एकदम हमारे आगे खड़ा था तभी उसकी नजर मेरी मम्मी पे पड़ी क्योंकि मैं भी हिडमा को देख रही थी तो मुझे साफ पता चल गया था कि वो क्या देख रहा है क्या कर रहा है, उसकी नजर मेरी मम्मी के शरीर से हटने का नाम नहीं ले रही थी, उसने पहली बार मम्मी को देखा था मम्मी एक हाथ से पूजा का सामान पकड़े हुए थी दूसरे हाथ से बस का डंडा।

मम्मी की नजर नीचे की तरफ थी, उन्होंने अभी तक हिडमा को नहीं देखी थी , मम्मी और मैं आमने सामने खड़ी थी , मुझे बहुत डर लग रहा था जिस तरह वह मेरी मम्मी को देख रहा था और मुस्कुरा रहा था और अपने साथियों से भी कुछ बात कर रहा था मम्मी की तरफ देख कर। मम्मी ने एक हाथ से बस का डंडा पकड़ रखा था तो मम्मी की गोरी गोरी बाहों साफ दिख रही थी मम्मी की बाहों में हल्के काले काले बाल बहुत प्यारे लग रही थी कभी कभी मेरी भी नजर मम्मी की बाहों पर जा रही थी ।

थोड़ी देर बाद मंदिर आ गया और मम्मी मुझे धीरे से अलविदा बोल कर उतर गई तभी मैंने देखी कि हिडमा भी मम्मी के पीछे पीछे नीचे उतर गया और मम्मी की गांड मटकते हुए देखकर आहे भर रहा था।

मैं ये देखकर सोच में पड़ गई , बस थोड़ी ही दूर चली होगी कि मैंने बस को रुखवा दिया और मैं भी उतर गई , और मंदिर की तरफ चली गई और चुपके से देखने लगी .

मम्मी मंदिर की सीढ़िया चढ़ रही थी और हिडमा भी मम्मी से 3-4 सीधी पीछे चल रहा था और मम्मी की फुटबॉल जैसी बाहर निकली हुई मटकती गांड को ऊपर नीचे होते हुए देख रहा था, मुझे उस समय बहुत गुस्सा आया कि मेरी मम्मी को कोई ऐसे कैसे देख सकता है।

हिडमा की जगह शायद कोई और ये हरकत करता है तो मैं उसकी ऐसी तैसी करने के बारे में सोच भी सकती थी लेकिन जो मेरी मम्मी की गांड को देख रहा था वो हिडमा था एक दम हटा काटा गुंडा ।

लेकिन गुस्सा बहुत आ रहा था, मम्मी मंदिर के अंदर जा चुकी थी, मैं भी सिडी़ चढ़कर मंदिर के अंदर पहुंची और साइड में चिपक के कोने से देखने लगी। हिडमा एक दम मम्मी के पीछे खड़ा था, मम्मी जल चढ़ाने के लिए जैसे छुकी , मम्मी का गोल गांड बाहर निकाला जिसे देखकर हिडमा एकदम पागल सा हो गया। मम्मी के चूतड़ चीख चीखकर कह रही थी हिडमा " मुझे बाहर आना है, मुझे बाहर आना है। " फिर मेरी नजर हिडमा पर पड़ी और मैं उसे देखकर शॉक हो गई । हिडमा मंदिर के अंदर ही मम्मी की गांड देखकर पेंट के ऊपर से अपना लंड रगड़ रहा था। मम्मी के पीछे इतना पागल हो गया था, जैसे वो मम्मी को अभी ही चोद देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वो वहां से चला गया। थोड़ी देर बाद मम्मी अपनी पुजा सम्पूर्ण करके घर वापस लौट गई ।

3 दिन बाद एक दिन वो हमारी पड़ोसन के घर किसी काम से आया था। मैं छत पर थी , तभी मम्मी भी छत पर कपड़े डालने आईं। मम्मी गीली थी और उनके बाल भी गीली थी। तभी हिडमा की नजर उस पड़ गई। वो बस मम्मी को ही देखता रह गया. फिर थोड़ी देर बाद वो वहां से चला गया।

एक दिन हमारे मोहल्ले में फंक्शन चल रहा था, मैं वहां गई हुई थी। वहां हिडमा भी आया हुआ था । तभी वह मेरे करीब आया और मुझे एक कोने में ले गया और बोला " मैंने जीवन में बहुत सारे गलत काम किया हुं , जो चीज अच्छी लगी , चाहे प्यार से मिली हो रख लिया अगर नहीं मिला तो छिन्न लिया , बहुत बार जेल की हवा खाई है , मैं ये सब छोड़ चुका था पर जब से तेरी मम्मी की जवानी पर नजर पड़ी है , एकदम पागल कर दी है। मुझे तेरी मम्मी चाहिये उसे अपना बनाना चाहता हूं।

मैं बोली " तुम्हारा दिमाग खराब है, वह शादीशुदा हैं । "

हिडमा बोला " मुझे अपना यार बनाना लेगी तो क्या हो जायेगा ? "

मैं बोली " मैं ऐसा नहीं कर सकती "।

हिडमा बोला " सुन , मुझे तेरी मम्मी यार बनाना है तु अपनी मम्मी को किसी तरह मन्ना , साली मुझे तेरी मम्मी की जवानी का रस पीना है, तुझे पैसे चाहिए तो बोल ना कितने पैसे चाहिए । "

मेरे के पास कोई ऑप्शन नहीं था। मैं बोली " ठीक है । मुझे पैसे नहीं चाहिए। मैं तुम्हारी बात के लिए तैयार हूं , लेकिन तुम्हें मेरा एक काम करना होगा।

हिडमा बोला " कैसा काम ?

मैं बोली ' मंडी बाज़ार थाने के बड़े साहब को मौत के घाट उतारना है

हिडमा " हो जाएगा, लेकिन पहले तेरे को मेरा काम करना होगा"

मैं बोली " अगर मैंने तेरा काम कर दिया , बाद में तुमने मेरा काम नहीं किया तो ?

हिडमा बोला " मैं एक बार जिसकी सुपारी लेता हूं तो काम पुरा करता हूं यह मेरा वादा है "

मैं बोली " तो ठीक है मैं तेरा काम करती हुं लेकिन बाद में किया हुआ वादा भुल मतजाना। "

फिर हिडमा चला गया और मैं फंक्शन खत्म होने के बाद घर चली आई।

मैं घर जाकर मम्मी को सारी बात बताई , मम्मी को यह जानकर काफी आश्चर्य हुआ।
..............…...........…..........

दुसरे दिन हिडमा हमारे घर आया । मम्मी ने दरवाजा खोला ।

मम्मी उससे देखकर गुस्से में बात करने लगी - क्यों बोल रहे हो आप ये सब, आपको शर्म आनी चाहिए..........

मगर हिडमा कुछ नहीं बोल रहा था सिर्फ सुनकर मुस्कुरा रहा था ।

जब हिडमा मेरे घर से जाने लगा तब उसने मम्मी से बोला -" जब से मैं तेरे को देखा हुं तेरा दिवाना हो गया हुं और मुझे किसी भी हालत में तुझे अपना बनाना है " और घर से चला गया।

अब वह सप्ताह में एक-दो बार हमारे घर पर आने लगा । जब भी वह घर पर आता मम्मी उसकी बात सुनकर बहुत गुस्से हो जाती और हिडमा के जाने के बाद बुरी बुरी गलिया देने लगती ।

एक दिन मम्मी और मेरे बीच किचन में काफ़ी बहस हुई।

मम्मी – मुझे तो इस संसार का एक ही उपाय नज़र आ रहा है। जिससे मैं उस गुंडा से पीछा छुड़ा सकूं

पायल – क्यों ना आप एकबार हिडमा से प्यार से बात करो . शायद आपको उससे कुछ फैदा हो ।

मम्मी - तुम्हारा मतलब क्या है? मैं उससे क्या बात करूंगी ? और मुझे उससे किया फैदा होगा ?

पायल – मेरा मतलब वो नहीं है मम्मी , मैं तो ये कहना चाह रही हूँ। अगर एक औरत चाहिए तो वो किसी भी मर्द को अपनी साड़ी के पलू से बांध सकती है। और अपने इशारों पर नचा सकती है क्योंकि ना अगर आप हिडमा को अपना आशिक बना लेती हो तो , आप बेड़ साहब से अपना बदला बड़ी आसानी से ले सकती हो हिडमा को अपने प्यार के जाल में फंसाकर।

मम्मी - ये क्या बोल रही हो तुम ?

पायल – मैं सही बोल रही हूं मम्मी और यही आखिरी रास्ता है आपके पास मम्मी , आप अगर शांति से सोचो तो आप उसे अपनी प्यार में फंसा लीजिए। मेरी यही राय है, बाकी आपको जो ठीक लगे वो करिए। उसके बाद मैं अपने कमरे में चली आई ।

मम्मी अब मेरी की बात सुनकर सोच में पड़ गई ।

दूसरे दिन जब मैं अपने कमरे से बाहर आई तभी मम्मी ने मुझे एक चिट्ठी दी और बोली इसे पढ़ो - मैंने वो चिट्ठी खोली और उसमें जो लिखा था वह मैं पढ़ने लगी - आपकी बीवी, आपकी बेगम, आपके जानेमन आपका इंतज़ार कर रही हूं।

मेरी चिट्ठी पढ़ने के बाद मम्मी बोली : ये चिट्ठी जाकर हिडमा को दे दो । और इसे बिल्कुल भी किसी और को मत दिखाना ।

मैं चिट्ठी लेकर हिडमा के घर पहुंची और हिडमा को चिट्ठी देकर मैं अपने घर वापस आ गया। जब मैं घर पहुंची तब हमारे घर का दरवाजा खुला हुआ था। मैं सीधा घर में घुसकर किचन में चली गई ।

मम्मी उस वक्त किचन में थी, और उन्होंने वही नई लाल रंग की साड़ी पेहनी हुई और बैकलेस ब्लाउज भी पहनी हुई थी । मम्मी ने बहुत सारा मेकअप भी किया था.. और हिडमा की दी हुई ज्वेलरी भी पहन ली थी। मम्मी के हाथों में चूड़ियाँ, गले में मंगल-सूत्र और मांग में सिन्दूर था। मम्मी बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह सजी हुई थी।

थोड़ी देर बाद जब हिडमा मेरे घर आया तब मम्मी की पीठ उनकी तरफ थी, और हिडमा उनकी पीठ देखते ही रह गया। मम्मी की गोरी पीठ, उनकी सुडौल गांड, उनकी सेक्सी कमर, ये सब देखकर हिडमा के मुँह से धीमी-धीमी सी आवाज निकली-

हिडमा: सस्सस! हुर्र्रह!

ये सुनकर मम्मी ने हल्के से अपना मुँह पीछे की तरफ घुमाया और हल्की सी मुस्कुरा दी। हिडमा ने अपना एक हाथ धीरे से अपने लंड पर रखा, और उसे सहलाने लगे। मम्मी एक दम पीछे मुड़कर हिडमा की तरफ देखने लगी। उनके हाथ में गिलास था जिसमें केसर दूध था।

मम्मी ने हिडमा को नीचे से ऊपर तक देखा, और एक हल्की सी मुस्कान दी। ये देखकर हिडमा से रहा नहीं गया, और उसने सीधा  मम्मी को कमर से पकड़कर अपनी तरफ खींचा।

अब हिडमा का लंड मम्मी की चूत से लग रहा था। मम्मी थोड़ी शरमायी हुई लग रही थी। फिर उन्हें अपने हाथ में पकड़ा हुआ केसर दूध हिडमा को पिलाना शुरू किया। हिडमा ने झट से वो पूरा दूध पी लिया, और गिलास को वही रख दिया, और बिना किसी देर के मम्मी को चूमना शुरू किया। मम्मी को इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए वो पहले तो थोड़ा चौंक गई। पर बाद में हिडमा का साथ देने लगी।

ओह मेरी आंखों के सामने क्या किसिंग चल रही थी , मेरी तो वही पानी निकलने वाली थी पर मैंने खुद पर कंट्रोल किया । हिडमा ने दोनों हाथो से मम्मी की कमर को कस के पकड़ा हुआ था, और मम्मी ने अपने दोनों हाथ हिडमा की छत पर रखे हुए थे। दोनों एक-दूसरे के मुंह में अपनी जिह्वा डाल-डाल कर एक-दूसरे को किस किये जा रहे थे। हिडमा की इस ज़बरदस्त किसिंग की वजह से मम्मी के होंठ और थुड्डी (चिन) हिडमा की थूक से पूरी तरह गीले हो चुके थे।

फिर हिडमा किस करते-करते धीरे-धीरे अपना लंड मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे। अब दोनो भी धीमी आवाज में सिस्कारियां लेने लगे। ऊपर से उनकी किसिंग भी से ज़बरदस्त आवाज़ आ रही थी। इतने में मम्मी अचानक रुक गई, और बोली-

मम्मी : आपने दरवाज़ा बंद किया या नहीं?

हिडमा: छोड़ो ना, क्या फर्क पड़ता है? [पहला किस करने लगे, लेकिन मम्मी ने फिर रोक लिया।]

मम्मी : नहीं, मैं देखती हूँ।

ऐसा बोलकर मम्मी दरवाजा बंद करने जाने लगी । लेकिन हिडमा से कंट्रोल ही नहीं हो रहा था, हिडमा ने झट से उनको पीछे से पकड़ा, और उनकी गोरी गोरी पीठ चाटने लगे।

हिडमा का ठरकी-पन संभालते हुए मम्मी ने जैसे-तैसे मुझे इशारा किया दरवाजा बंद करने को । फिर हिडमा ने मम्मी को बाजू वाली दीवार से लगाया, और पीछे से मम्मी की पीठ चाटते हुए अपना लंड धीरे-धीरे मम्मी की गांड पर रगड़ने लगे।

मैं जल्दी जाकर दरवाजा बंद कर आई। जब तक मैं वापस लौटी तब तक

हिडमा ने मम्मी की कमर पकड़ के उन्हें ज़ोर से अपनी तरफ घुमा लिया था। अब हिडमा की नज़र मम्मी की चुचियों पर थी जिस चुची का दुध पीकर मैं बड़ी हुई थी । उन्हें धीरे से अपने दोनों हाथ मम्मी की चुचियों पर रखा और उन्हें हल्के से दबाना शुरू किया।

फिर हिडमा मम्मी की आँखों में देखने लगे। मम्मी ने अपनी दोनो आँखें बंद कर ली थी। ये देखकर हिडमा ने अपना मुँह मम्मी की छत पर रखा, और उसे धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। मम्मी को भी अब मजा आने लगा था. उन्हें अपने दोनों हाथ हिडमा के सर पर रखे, और उनके बालों को सहलाने लगी।

इतने में हिडमा ने एक दम से मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से मम्मी की बाईं चूची को ज़ोर से दबाना शुरू किया। मम्मी धीरे से चिल्लायी-

मम्मी : सससस, आआह्ह्ह!

हिडमा एक-एक करके ब्लाउज के ऊपर से ही मम्मी की दोनों चूचियाँ ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था । मम्मी ने भी उनके बालों को कस के पकड़ा हुआ था। फ़िर हिडमा ने अपने मुँह को मम्मी के दोनों चूची के बीच रखा और अपने दोनों हाथों से मम्मी की गांड को जकड़कर मम्मी को उठा लिया। और मम्मी को बेडरूम पर ले गया और मम्मी को बिस्तर पर गिरा दिया और खुद अपने कपड़े उतारने लगे। ( इस दौरान उन दोनों ने कमरे का दरवाजा खुला रखा। )

हिडमा को अपने कपड़े उतारते देखकर मम्मी ने भी अपने कपड़े उतारना शुरू किया। जैसे ही मम्मी ने अपना ब्लाउज और ब्रा उतार कर अपनी चुचियां बाहर निकाली, हिडमा तो उन्हें देखते ही रह गए।

फ़िर मम्मी ने अपने बाल भी खोल दिये। मम्मी अब तक अपने अंडरवियर के अलावा (शर्म आ रही होगी) सब कुछ उतार चुकी थी। और मम्मी का ये सेक्सी लुक हिडमा निहारते रह गए। फिर हिडमा ने भी सारे कपड़े उतार दिये। हिडमा का पूरा शरीर काला और बालों से भरा हुआ था। लेकिन जैसे ही मेरी नज़र उनके लंड पर पड़ी, मैं तो दंग रह गयी।

इतना बड़ा लंड मैंने आज तक नहीं देखी थी । मम्मी को भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था, आख़िर किसी का इतना बड़ा लंड भी हो सकता है। हिडमा ने अब मम्मी की दोनों टांगों को ज़ोर से फैलाई और उनकी अंडरवियर उतारने लगा। मम्मी थोड़ी हिचकिचा रही थी और मेरी तरफ देखी मैंने मम्मी को आंखों से आंखों में इशारा किया। बाद में मम्मी ने हिडमा का साथ देकर अपना अंडरवियर भी उतार लिया ।

मम्मी अपनी दोनों तांगे फ़ैला कर बैठी हुई थी और हिडमा उनकी चूत देखते हुए अपना लंड मसल रहा था । अचानक हिडमा नीचे बैठे और अपनी जीब मम्मी की चूत पर लगाकर उसे ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगे। इससे मम्मी चिल्लाने लगी-

मम्मी : आह्ह्ह! सस्सस्स!

मम्मी ने फिर एक बार अपने दोनों हाथों से हिडमा के बाल पकड़ लिए, जो मम्मी की चूत चाटने में खो गए थे। काफ़ी देर तक चूत चाटने के बाद हिडमा फिर से खड़े हो गए और इस बार अपना लंड मम्मी के मुँह की तरफ बढ़ाने लगे। लेकिन मम्मी उसके मुँह में लेने को तैयार नहीं थी, वो बोली-

मम्मी: नहीं-नहीं, मुँह में नहीं! इसे बहुत तेज़ ख़राब बदबू आ रही है।
फिर हिडमा ने भी इग्नोर किया और फिर एक बार नीचे बैठ कर मम्मी की चुचियाँ चुसने लगा । उनकी थूक की वजह से मम्मी की चुचियां अब चमकने लगी थीं। हिडमा मम्मी की चुचियाँ एक-दम ज़ोर से चूसकर उन्हें तब तक खींचते, जब तक कि उनके मुँह से सिसकारियां निकल ना जाए। फिर अचानक हिडमा ने मम्मी को हल्का सा धक्का दिया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। फिर खुद भी उन पर लेट गया .

पहले तो दोनों ने एक-दूसरे को निहारा। फिर अचानक से उनकी किसिंग शुरू हुई। हिडमा अब किसिंग करते-करते ही मम्मी की चूत में उंगली डाल रहा था। थोड़ी देर बाद हिडमा धीरे-धीरे और तेज़ उंगलियाँ डालने लगा। फ़िर अचानक मम्मी ने ज़ोर से चिल्लायी : आह! हुह!

मम्मी के चूत अब पानी छोड़ चुका था । फिर मम्मी ने हिडमा को थोड़ा धक्का देकर अपने बगल में लिटाया और खुद उनके ऊपर जाकर लेट गयी। घड़ी में अभी दोपहर के 2:30 बजे थे, हिडमा आराम से अपनी आंखें बंदकर लीटा था । क्योंकि अब मम्मी की बारी थी. मम्मी ने सबसे पहले हिडमा के निपल्स चुसना शुरू किये, और एक हाथ से हिडमा का लंड हिलाने लगी।

जल्दी ही मम्मी ने लंड हिलाने की स्पीड एक-दम से बढ़ाई । ऐसा लग रहा था जैसे वो हिडमा का जल्दी से जल्दी पानी निकालना चाहती थी । लेकिन लगतार 10 मिनट तक ज़ोर-ज़ोर से हिलाने पर भी हिडमा का पानी नहीं निकल रहा था। आख़िरकार मम्मी ने हिडमा का लंड हिलाना बंद कर दिया, और ये देखकर हिडमा भी हँसने लगे और बोले- जानेमन, तुम फिकर मत करो। जब तक मैं तुम्हें जामकर पेल ना दूं, तब तक इसमें से पानी नहीं निकलने वाला।

फिर हिडमा ने मम्मी को धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दिया और ज़ोर से मम्मी की दोनों टांग फैलाकर अपना लंड मम्मी की चूत पर सेट किया। ( मम्मी यह बात जानती थी कि हिडमा का लंड उसकी हालत करने वाला था ) । इसलिए मम्मी ने अपने एक हाथ से बेडशीट पकड़ ली , ताकि हिडमा का झटका बर्दाश्त कर सकें।

फिर हिडमा ने धीरे-धीरे अपना लंड मम्मी की चूत में डालना शुरू किया। थोड़ा ज़ोर लगाने पर हिडमा के लंड का टोपा चूत में घुस गया, और मम्मी धीमी आवाज़ में चिल्लाई- इस्सस्स........ आआआआह्ह्ह......

मम्मी की सिसकारियां की आवाज सुनकर हिडमा ने एक बार फिर एक ज़ोर का धक्का दिया, जिसका उनका आधा लंड मम्मी के अंदर चला गया। लेकिन इस बार मम्मी थोड़ा ज़ोर से चिल्लायी- आ..आ..आ..आ..आ..आ..

दर्द के मारे मम्मी ने अपनी दोनों टैंगो से कैंची बनाकर हिडमा की कमर, और हाथों से हिडमा की गर्दन को कसकर पकड़ ली । अब तीसरे और आखिरी धक्के की बारी थी। हिडमा ने अपनी कमर ज हिलाया और अपनी पूरी ताकत लगाकर तीसरा और आखिरी धक्का दिया। इस बार उनका पूरा लंड मम्मी की चूत में चला गया। मम्मी ऐसे चिल्लाई जैसे किसी ने उन्हें शॉक दे दिया हो।

मम्मी : ऊ..ऊ..ऊ..ऊ..ह्ह्ह्ह्ह....

हिडमा भी शेर की तरह दहाड़े : हा..हा..हा..हा.... ह्रघ..

जैसे ही हिडमा का पूरा लंड मम्मी के अंदर घुसा, दर्द के मारे उनकी आँखें एक-दम बड़ी हो गई। अब हिडमा धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करने की कोशिश करने लगे, और सिस्कारियां लेने लगी। उस वक्त घड़ी में दोपहर के 3 बज चुके हैं। जैसे-जैसे हिडमा आगे-पीछे होकर अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगे, वैसे-वैसे मम्मी की चूत फैलती गई और हिडमा का लंड उसमें सेट होने लगा।

थोड़ी देर बाद सब कुछ एक-दम आसानी से होने लगा। हिडमा अब एक-दम ज़ोर-ज़ोर से और तेजी से अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था । मम्मी का दर्द के मारे हालत खराब हो रहा था । लेकिन मम्मी को उससे ज्यादा मजा भी आ रहा था। दोनों चुदाई के नशे में इतने खोए हुए थे, किसी को भी कंडोम के बारे में याद ही नहीं रहा।

मम्मी ने सिर्फ हिडमा को रोकने के लिए एक प्लान बनाया था। लेकिन मम्मी सब कुछ भूल गई थी। हिडमा एक-दम ज़ोर-ज़ोर से शॉट लगा रहा था।

मम्मी : आ...आ...आह्ह्ह! ज़रा धीरे।

थोड़ी देर जोरदार प्रदर्शन करने के बाद हिडमा ने अपना लंड बाहर निकाल कर मम्मी को डॉगी स्टाइल में आने को कहा। उनकी बात मानकर मम्मी ने भी ठीक वैसा ही किया। मम्मी अपनी गांड ऊपर करके कुतिया बन गयी।

हिडमा उनकी चूत में लंड डालने ही जा रहा था कि उनकी नज़र मम्मी की गांड के छेद पर पड़ी । अब वो अपना लंड मम्मी की गांड में डालना चाहता था , लेकिन उन्हें पता था कि मम्मी उन्हें ऐसा नहीं करने देगी। इसलिए उसने अपने मुँह में काफ़ी सारा थूक जमा करके मम्मी की गांड के छेद पर थूक दिया और थोड़ा अपने लंड पर लगा लिया।

इधर मम्मी को बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें अब ज़ोर का झटका लगने वाला था। हिडमा ने अपना लंड हाथ में पकड़ा, और मम्मी की गांड के छेद पर रख के बिना 1 सेकंड की देर के सीधा एक ज़ोर का धक्का मारा । जिससे एक ही बार में हिडमा का लंड मम्मी की गांड को चीरता हुआ अन्दर चला गया । इससे मम्मी को एक-दम ज़ोर का झटका लगा और वह तेज़ आवाज़ में चिल्लायी-

मम्मी : उह्ह्ह.....ऊह.... माँ!

हिडमा थोड़ी देर के लिए रूका रहा फिर धक्का मारना शुरू किया, मम्मी दर्द के मारे पेट के बल बिस्तर पर गिर गई, और हिडमा भी अपना लंड अंदर रखने के चक्कर में मम्मी के साथ गिर पड़ा ।
अब विस्तार पर मम्मी नीचे और हिडमा ऊपर से उनकी गांड में लंड डाल-डाल कर उन्हें चोद रहा था। मम्मी की चूतड़ की चर्बी झटका खाता देख मेरी चूत ने सोफे पर बैठे बैठे ही पानी छोड़ दिया । लेकिन हिडमा का सेकंड दर सेकंड स्पीड बढ़ता ही जा रहा था।

जब हिडमा मम्मी को लगातार चोद रहे थे तो कमरे में अजीब सी आवाज़  गूँजी रही थी जैसे ब्र्र..ब्र्र...ब्र्र... । ये आवाज हिडमा के कमर और मम्मी की चूतड़ टकराने की थी. हिडमा जैसे-जैसे शॉट लगा रहा था , वैसे-वैसे 3-4 बार ये आवाजें सुनायी दी ।

हिडमा ने अब और तेजी से मम्मी की चुदाई करने लगा । मम्मी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाती रही। घड़ी में अब दोपहर के 3:15 बज चुके थे। थोड़ी देर गांड़ चुदाई करने के बाद हिडमा ने मम्मी की गांड से अपना लंड बाहर निकाला और खुद नीचे सोकर मम्मी को अपने ऊपर ले लिया और मम्मी को कांधे से पकड़कर हिडमा ने आगे की तारीफ खींची और उसे चूमना शुरू किया।

मम्मी हिडमा के ऊपर बैठी थी और उनके चूची हिडमा की छती पर आराम से बैठा हुआ था । फ़िर हिडमा ने धीरे-धीरे अपना लंड मम्मी की चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा। वो क्या सीन था एक तरफ दोनों की जबरदस्त किसिंग और दूसरी तरफ जोरदार चुदाई देखकर मुझे मजा आ गया। काफ़ी देर तक हिडमा ने मम्मी को इस पोजीशन में चोदा।

फिर मम्मी की चूत में अपना लंड वैसे ही रखकर हिडमा ने मम्मी को अपनी बाहों में पकड़ा और रोल करके खुद को मम्मी के ऊपर लेट गया । अब वह दोनों  मिशनरी पोजीशन में चुदाई करने लगे।

हिडमा ने अपना पूरा दम लगाकर मम्मी की ठुकाई शुरू कर दी। मम्मी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी. हिडमा इतनी जल्दी आगे पीछे होकर मम्मी को चोद रहा था कि मैं क्या बताऊँ। इतनी ख़तरनाक चुदाई मैंने पोर्न में नहीं देखी थी। मम्मी ने फिर एक बार दर्द के मारे अपने दोनो हाथ जोड़कर हिडमा को कसके दबोच लिया । इधर हिडमा अपनी पूरी जान लगाकर मम्मी को चोद रहा था । एक बार ऐसा हुआ कि लंड से चूत पर झटका मारने के दौरान लंड चूत में नहीं जाकर बाहर ही रह गई । मैं सोफे से उठकर तुरंत कमरे के अंदर गई और हिडमा के लंड को पकड़कर मम्मी की चूत में डाली ।
इससे हिडमा और जोश में आकर ज़ोर से ठुकाई कर रहा था , थोड़ी देर बाद अचानक हिडमा ने थोड़ा ब्रेक लेकर तीन शॉट लगाए और ज़ोर से चिल्लाये-आआह्ह्ह्ह..... स्स्स्स......आआआहह!

हिडमा का पानी अब निकल चुका था , जो उसने मम्मी की चूत में ही डाल दिया था। और वह मम्मी के ऊपर गिर कर उनके होंठ और गाल चाटने लगे। दोनों का शरीर पसीने से एक-दम भीगा हुआ था। मम्मी को पता चल चुका था कि हिडमा ने उनकी चूत में ही अपना पानी डाल दिया है और काफ़ी देर तक हिडमा मम्मी के ऊपर लेटा रहा ।

इधर घड़ी में अब दोपहर 3:45 बजे चुका था । थोड़ी देर बाद मम्मी ने कपड़े पहनना शुरू किया। इतने में अचानक हिडमा ने उनको कहा- तुम्हें क्या लगता है, तुमने ये क्यों किया मुझे सब पता है? ये बात सुनकर मम्मी उनकी तरफ देखने लगी।

फिर हिडमा ने भी अपने कपड़े पहन लिये, और मम्मी के एकदम करीब जा कर बोले- " मैं उम्मीद करता हूं कि तुम आगे भी मेरा अच्छे से ख्याल रखोगी " ।

इतना बोलकर हिडमा ने फिर एकबार मम्मी को किस किया और वापस चला गया । मम्मी फिर बाथरूम चली गई कुछ देर बाद वापस आई  तो वह बहुत खुश थी ।

( एक सप्ताह बाद न्यूज़ से पता चलता कि मंडी बाज़ार के बड़े साहब अपने टिम के साथ कहीं कार्यवाही करने जा रहे थे। जिस वाहन पर सवार होकर जा रहे थे उस वाहन का रास्ते में एक्सीडेंट हो गया जिससे बड़े साहब और उसकी पुरी टिम मौत के मुंह में समा गए। )
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RE: मीना बाजार - दोबारा फिर - by Puja3567853 - 08-10-2026, 10:31 PM



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