07-10-2026, 02:20 PM
जैसे ही पूजा अंदर आई, बाबाजी ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम अंदर जाओ पूजा… अपनी साड़ी पूरी उतार दो। ब्लाउज और ब्रा भी निकाल दो, पूरी नंगी हो जाओ। मैं बस अभी आया।” कह के वह बाहर चला गया।
पूजा ने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से हकार में सिर हिलाया। मन ही मन बोली, “कुछ तो मिलेगा…मेरी चूत और गांड को” और अंदर चली गई।
जब बाबाजी अंदर आए तो नजारा देखकर उनका लंड फिर से तनने लगा। पूजा अर्धनग्न अवस्था में उनके बिस्तर पर बैठी थी। सिर्फ पेटीकोट पहने हुए। उसके भारी, गोल, दूध जैसे बोबले हवा में लहरा रहे थे। निप्पल पहले से ही सख्त और खड़े हो चुके थे, जैसे बाबाजी का मुंह ढूंढ रहे हों।
बाबाजी आगे बढ़े। उन्होंने झुककर अपनी गर्म, नम जीभ से पूजा के दाएँ निप्पल को छुआ।
“अह्ह्ह्ह्ह्ह… स्स्स्स्स्स… बाबाजी जी…” पूजा की सिसकारी पूरे कमरे में एक संगीत की तरह गूंज गई। पूजा ने एक झटके में बाबाजी के बाल पकड़े और उनका सिर अपनी छाती पर जोर से दबा दिया। मैत्री पटेल की पेशकश।
बाबाजी का पूरा मुंह उसके नरम, गुदाज मम्मे पर धंस गया। उन्होंने मुँह खोलकर निप्पल को चूसना शुरू किया - पहले हल्के से, फिर जोर-जोर से। जीभ से घुमाते हुए, दाँतों से हल्का-हल्का काटते हुए। पूजा के निप्पल के चारों ओर बने ब्राउन एरियोला पर छोटे-छोटे दाने भी उनकी जीभ को महसूस हो रहे थे।
“ओह्ह्ह… पूजा… इतने मुलायम, स्वादिष्ट और भरे स्तन मैंने आज तक नहीं चखे…” बाबाजी ने चूसते हुए ही कहा, “पुच्च्छ्ह… कितने मस्त हैं ये… अह्ह्ह…”
पूजा को अपनी सुंदरता की तारीफ सुनकर बहुत मजा आ रहा था। वह मंद-मंद मुस्कुराती हुई बाबाजी का सिर दोनों मुम्मों के बीच घुमा रही थी। कभी दाएँ तो कभी बाएँ। आवेश में उसने बाबाजी के माथे, आँखों और गालों पर गीले चुंबनों की बौछार कर दी।
“अह्ह्ह बाबाजी जी… उम्म्म्म… चूसिए… और जोर से चूसिए… आपके होंठों की गर्मी मुझे दिन-रात याद रहती है… अह्ह्ह… चबा जाइए इन्हें… ये आपके ही हैं… पूरी तरह आपके…मेरे यह निपल कड़क हो ही जाते है आपके मुंह के लिए।”
पूजा ने जैसे अपने बोब्लोको बाबाजी को दान कर दिए थे। बाबाजी भी इस छूट का पूरा फायदा उठा रहे थे। एक बोबले को वे जोर-जोर से चूस रहे थे, दूसरे को हाथ से मसल रहे थे, निचोड़ रहे थे। कभी-कभी दोनों निप्पलों को एक साथ पकड़कर खींचते भी और छोड़ देते। वे निप्पलो को वापिस अपनी जगह जाते हुए देखते और मुस्कुराते।
पूजा अब और सहन नहीं कर पा रही थी। उसकी चूत बुरी तरह फड़क रही थी। उसने बाबाजी का हाथ पकड़ा और सीधे अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत पर रख दिया और जोर से दबाया।
“अह्ह्ह्ह बाबाजी जी… क्यों तड़पा रहे हो मुझे… आपकी यह दासी को.... देखो ना… मेरी चूत कितनी गर्म और भीगी हुई है… रात को जो करना है वो कर लेना… लेकिन अभी तो कुछ करो… नहीं तो मैं मर जाऊंगी… अह्ह्ह्ह… प्लीज… चूत में आग लगी है, उसे आपके डंडे से मारो.....प्लीज़ बाबाजी...”
उसकी आवाज में विनती और वासना दोनों थी।
लेकिन बाबाजी समझदार थे। वे जानते थे कि अगर अभी उसकी चूत या गांड को ज्यादा छुआ तो रात का पूरा प्लान बिगड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने जानबूझकर सिर्फ उसके स्तनों पर ही ध्यान दिया। चूसते रहे, काटते रहे, निचोड़ते रहे।
पूजा और कुछ बोल पाती, तभी... मैत्री पटेल का साहस।
दरवाजे पर जोर की दस्तक हुई।
“धड़-धड़-धड़!”
********************************************************.
आज के लिए यही तक दोस्तों।
अगला भाग आपके कोमेंट आने के बाद तुरंत।
तब तक के लिए मैत्री पटेल का जय भारत।।
“तुम अंदर जाओ पूजा… अपनी साड़ी पूरी उतार दो। ब्लाउज और ब्रा भी निकाल दो, पूरी नंगी हो जाओ। मैं बस अभी आया।” कह के वह बाहर चला गया।
पूजा ने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से हकार में सिर हिलाया। मन ही मन बोली, “कुछ तो मिलेगा…मेरी चूत और गांड को” और अंदर चली गई।
जब बाबाजी अंदर आए तो नजारा देखकर उनका लंड फिर से तनने लगा। पूजा अर्धनग्न अवस्था में उनके बिस्तर पर बैठी थी। सिर्फ पेटीकोट पहने हुए। उसके भारी, गोल, दूध जैसे बोबले हवा में लहरा रहे थे। निप्पल पहले से ही सख्त और खड़े हो चुके थे, जैसे बाबाजी का मुंह ढूंढ रहे हों।
बाबाजी आगे बढ़े। उन्होंने झुककर अपनी गर्म, नम जीभ से पूजा के दाएँ निप्पल को छुआ।
“अह्ह्ह्ह्ह्ह… स्स्स्स्स्स… बाबाजी जी…” पूजा की सिसकारी पूरे कमरे में एक संगीत की तरह गूंज गई। पूजा ने एक झटके में बाबाजी के बाल पकड़े और उनका सिर अपनी छाती पर जोर से दबा दिया। मैत्री पटेल की पेशकश।
बाबाजी का पूरा मुंह उसके नरम, गुदाज मम्मे पर धंस गया। उन्होंने मुँह खोलकर निप्पल को चूसना शुरू किया - पहले हल्के से, फिर जोर-जोर से। जीभ से घुमाते हुए, दाँतों से हल्का-हल्का काटते हुए। पूजा के निप्पल के चारों ओर बने ब्राउन एरियोला पर छोटे-छोटे दाने भी उनकी जीभ को महसूस हो रहे थे।
“ओह्ह्ह… पूजा… इतने मुलायम, स्वादिष्ट और भरे स्तन मैंने आज तक नहीं चखे…” बाबाजी ने चूसते हुए ही कहा, “पुच्च्छ्ह… कितने मस्त हैं ये… अह्ह्ह…”
पूजा को अपनी सुंदरता की तारीफ सुनकर बहुत मजा आ रहा था। वह मंद-मंद मुस्कुराती हुई बाबाजी का सिर दोनों मुम्मों के बीच घुमा रही थी। कभी दाएँ तो कभी बाएँ। आवेश में उसने बाबाजी के माथे, आँखों और गालों पर गीले चुंबनों की बौछार कर दी।
“अह्ह्ह बाबाजी जी… उम्म्म्म… चूसिए… और जोर से चूसिए… आपके होंठों की गर्मी मुझे दिन-रात याद रहती है… अह्ह्ह… चबा जाइए इन्हें… ये आपके ही हैं… पूरी तरह आपके…मेरे यह निपल कड़क हो ही जाते है आपके मुंह के लिए।”
पूजा ने जैसे अपने बोब्लोको बाबाजी को दान कर दिए थे। बाबाजी भी इस छूट का पूरा फायदा उठा रहे थे। एक बोबले को वे जोर-जोर से चूस रहे थे, दूसरे को हाथ से मसल रहे थे, निचोड़ रहे थे। कभी-कभी दोनों निप्पलों को एक साथ पकड़कर खींचते भी और छोड़ देते। वे निप्पलो को वापिस अपनी जगह जाते हुए देखते और मुस्कुराते।
पूजा अब और सहन नहीं कर पा रही थी। उसकी चूत बुरी तरह फड़क रही थी। उसने बाबाजी का हाथ पकड़ा और सीधे अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत पर रख दिया और जोर से दबाया।
“अह्ह्ह्ह बाबाजी जी… क्यों तड़पा रहे हो मुझे… आपकी यह दासी को.... देखो ना… मेरी चूत कितनी गर्म और भीगी हुई है… रात को जो करना है वो कर लेना… लेकिन अभी तो कुछ करो… नहीं तो मैं मर जाऊंगी… अह्ह्ह्ह… प्लीज… चूत में आग लगी है, उसे आपके डंडे से मारो.....प्लीज़ बाबाजी...”
उसकी आवाज में विनती और वासना दोनों थी।
लेकिन बाबाजी समझदार थे। वे जानते थे कि अगर अभी उसकी चूत या गांड को ज्यादा छुआ तो रात का पूरा प्लान बिगड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने जानबूझकर सिर्फ उसके स्तनों पर ही ध्यान दिया। चूसते रहे, काटते रहे, निचोड़ते रहे।
पूजा और कुछ बोल पाती, तभी... मैत्री पटेल का साहस।
दरवाजे पर जोर की दस्तक हुई।
“धड़-धड़-धड़!”
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आज के लिए यही तक दोस्तों।
अगला भाग आपके कोमेंट आने के बाद तुरंत।
तब तक के लिए मैत्री पटेल का जय भारत।।



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