07-10-2026, 02:16 PM
रात के साढ़े आठ बजे पूजा ने नहा लिया। साड़ी नहीं पहनी। साधारण सलवार-कमीज में थी, लेकिन अंदर कुछ भी नहीं। सिर्फ एक पतली नाइटी जैसा कुछ, जो आसानी से निकल जाए। बाल खुले रखे, हल्का सा सिंदूर और बिंदी लगाई, बस इतना कि माँ को लगे कि वह सचमुच पूजा के लिए जा रही है।
माँ दरवाजे तक आईं। कहानीकार मैत्री पटेल और सौनी पटेल।
“बेटा… अगर कुछ गलत या फिर गड़बड़ जैसा लगे तो तुरंत घर वापिस आ जाना। मुझे पता है बाबाजी साधु हैं, लेकिन दुनिया बड़ी विशाल और विचित्र है। बेटी। और हां बेटी, जो भी पूजा और जैसी भी पूजा हो उसमे अपना तन और मन लगा के, पुरे मन और एकाग्रता रख के पूजा करना। बाबाजी को पूरा साथ देना।” मम्मी मन ही मन मुस्कुराई। उसे एक अंदाजा था की कौनसी पूजा होनेवाली है। “शायद पूजा की पूजा।“
पूजा ने सिर हिलाया, मुस्कुराई और निकल गई। गली के मोड़ पर पहुँचते ही उसकी चाल बदल गई। पहले वाली निराशा वाली चाल गायब। अब कदमों में एक अलग तरह की बेचैनी थी, वह बेचैनी जो सिर्फ बाबाजी के लंड की याद से पैदा होती है। उसके मन में अब यही सोच चल रही थी की बाबाजी अब कौन से नए तरीके से उसकी चुदाई करेंगे। किस तरह से वह मेरे छेदों को फाड़ डालेंगे। उसकी चाल में एक उत्तेजना और उत्सुकता दोनों झलक रही थी। वही माँ ने भी देख लिया की उसकी चाल एक मदहोश हिरनी की तरह हो चली है। उनका शक अब धीरे-धीरे यकीं में बदलता जा रहा था। मन ही मन उन्हों ने पूजा को आशीर्वाद दिया; “खुश रह बेटी, जी भर के अपने छेदों को शांत कर ले। भगवान् तुझे बुरी आत्माओं से बचा ले।“
पूजा रात के ठीक 9 बजे मंदिर के पीछे वाले दरवाजे से अंदर घुसी। रास्ते भर उसके मन में सिर्फ एक ही विचार घूम रहा था - आज बाबाजी क्या नया करने वाले हैं? क्या मेरी चूत को फाड़कर रख देंगे? या फिर मेरी गांड मारेंगे? गांड को मार-मार के बड़ा छेड़ में तब्दील कर देंगे? चलने में फिर तकलीफ हो सकती है। जो होगा वह देखा जायेगा चल नहीं पाऊँगी तो क्या मजा भी तो दुगुना मिलेगा। ऐसा होता है तो बेढंग चाल का कोई प्रॉब्लम नहीं है। वैसे भी घर में तो माँ-पिता सो जायेंगे तभी घुसना है। वैसे भी बाबाजी एक-दो बार में उनका पेट नहीं भरता। पुर्री रात चोदेंगे... रात के अंधेरे में, पूरी तरह नंगी होकर, लंबे समय तक...
इन वासनामयी ख्यालों से उसकी चूत रास्ते में ही इतनी गीली हो गई कि उसके रस ने पेटीकोट तक भिगो दिया। चलते-चलते ही उसने एक हाथ अपनी चूत पर रखा, गर्म रस को अपनी उँगलियों पर लिया और पीछे ले जाकर अपनी गांड के छेद पर मल दिया। पूजा का दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था, मन ही मन मुस्कुराती हुई बोली; शांत रहो, मैं आज तुम्हें एक नए तरीके से मरवाउंगी। चूत का पानी पियो और शांत रहो। तुम्हें पता है कि एक बार बाबाजी का लंड खड़ा हो जाता है, तो वह पीछे या आगे नहीं देखता, वह सीधे मेरी तरफ़ चला जाता है। और जो छेद मिला मारना शुरू कर देते है।
मन ही मन फुसफुसाई,
“अरे मेरी प्यारी गांड… तू भी चिकनी हो जा… आज तेरा भी बाजा बज सकता है।”
उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वह पिछले दरवाजे से अन्दर घुस गयी। बाबाजी को देख मुस्कुराई और अपनी साडी थोड़ी ढीली कर दी। संपादिका फनलवर।
बाबाजी कुछ देर पहले ही झड़ चुके थे, इसलिए उनके मन में कोई जल्दबाजी नहीं थी। लेकिन पूजा के तने हुए, भरे बोब्लो को देखकर उनका मन उन्हें रौंदने और चूसने का हो रहा था।
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जुड़े रहिये............................
मैत्री पटेल का निर्माण।
माँ दरवाजे तक आईं। कहानीकार मैत्री पटेल और सौनी पटेल।
“बेटा… अगर कुछ गलत या फिर गड़बड़ जैसा लगे तो तुरंत घर वापिस आ जाना। मुझे पता है बाबाजी साधु हैं, लेकिन दुनिया बड़ी विशाल और विचित्र है। बेटी। और हां बेटी, जो भी पूजा और जैसी भी पूजा हो उसमे अपना तन और मन लगा के, पुरे मन और एकाग्रता रख के पूजा करना। बाबाजी को पूरा साथ देना।” मम्मी मन ही मन मुस्कुराई। उसे एक अंदाजा था की कौनसी पूजा होनेवाली है। “शायद पूजा की पूजा।“
पूजा ने सिर हिलाया, मुस्कुराई और निकल गई। गली के मोड़ पर पहुँचते ही उसकी चाल बदल गई। पहले वाली निराशा वाली चाल गायब। अब कदमों में एक अलग तरह की बेचैनी थी, वह बेचैनी जो सिर्फ बाबाजी के लंड की याद से पैदा होती है। उसके मन में अब यही सोच चल रही थी की बाबाजी अब कौन से नए तरीके से उसकी चुदाई करेंगे। किस तरह से वह मेरे छेदों को फाड़ डालेंगे। उसकी चाल में एक उत्तेजना और उत्सुकता दोनों झलक रही थी। वही माँ ने भी देख लिया की उसकी चाल एक मदहोश हिरनी की तरह हो चली है। उनका शक अब धीरे-धीरे यकीं में बदलता जा रहा था। मन ही मन उन्हों ने पूजा को आशीर्वाद दिया; “खुश रह बेटी, जी भर के अपने छेदों को शांत कर ले। भगवान् तुझे बुरी आत्माओं से बचा ले।“
पूजा रात के ठीक 9 बजे मंदिर के पीछे वाले दरवाजे से अंदर घुसी। रास्ते भर उसके मन में सिर्फ एक ही विचार घूम रहा था - आज बाबाजी क्या नया करने वाले हैं? क्या मेरी चूत को फाड़कर रख देंगे? या फिर मेरी गांड मारेंगे? गांड को मार-मार के बड़ा छेड़ में तब्दील कर देंगे? चलने में फिर तकलीफ हो सकती है। जो होगा वह देखा जायेगा चल नहीं पाऊँगी तो क्या मजा भी तो दुगुना मिलेगा। ऐसा होता है तो बेढंग चाल का कोई प्रॉब्लम नहीं है। वैसे भी घर में तो माँ-पिता सो जायेंगे तभी घुसना है। वैसे भी बाबाजी एक-दो बार में उनका पेट नहीं भरता। पुर्री रात चोदेंगे... रात के अंधेरे में, पूरी तरह नंगी होकर, लंबे समय तक...
इन वासनामयी ख्यालों से उसकी चूत रास्ते में ही इतनी गीली हो गई कि उसके रस ने पेटीकोट तक भिगो दिया। चलते-चलते ही उसने एक हाथ अपनी चूत पर रखा, गर्म रस को अपनी उँगलियों पर लिया और पीछे ले जाकर अपनी गांड के छेद पर मल दिया। पूजा का दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था, मन ही मन मुस्कुराती हुई बोली; शांत रहो, मैं आज तुम्हें एक नए तरीके से मरवाउंगी। चूत का पानी पियो और शांत रहो। तुम्हें पता है कि एक बार बाबाजी का लंड खड़ा हो जाता है, तो वह पीछे या आगे नहीं देखता, वह सीधे मेरी तरफ़ चला जाता है। और जो छेद मिला मारना शुरू कर देते है।
मन ही मन फुसफुसाई,
“अरे मेरी प्यारी गांड… तू भी चिकनी हो जा… आज तेरा भी बाजा बज सकता है।”
उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वह पिछले दरवाजे से अन्दर घुस गयी। बाबाजी को देख मुस्कुराई और अपनी साडी थोड़ी ढीली कर दी। संपादिका फनलवर।
बाबाजी कुछ देर पहले ही झड़ चुके थे, इसलिए उनके मन में कोई जल्दबाजी नहीं थी। लेकिन पूजा के तने हुए, भरे बोब्लो को देखकर उनका मन उन्हें रौंदने और चूसने का हो रहा था।
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मैत्री पटेल का निर्माण।



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