Thread Rating:
  • 7 Vote(s) - 2.57 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery मीना बाजार - A innocent Mother and Daughter
#59
अब आगे....                 बड़े साहब 

अचानक एक दिन हमारे घर पर सिक्युरिटी की जीप आकर खड़ी हो गयी. फिर उसमें से दो सिक्युरिटी वाले निकले और पायल ( मेरी बेटी ) को गिरफ्तार करले गये. अब मैं उस सदमे से हैरान हो गयी थी. फिर मैं थोड़ी देर बाद सिक्युरिटी स्टेशन गयी , वहाँ गयी तो मैंने देखी कि वहाँ लॉकअप में सिक्युरिटी वाले मेरे फूल जैसे बेटी पायल को अर्धनंगा करके टोर्चर कर रहे थे. उधर पायल के पापा को हार्ट की बीमारी थी उन्होंने अगर यह सुचना मिली होती तो वो सहन नहीं कर पाते .

फिर मैं वहाँ जाकर मैंने बड़े साहब से पूछा कि मेरी बेटी ने ऐसा क्या अपराध किया है कि आप उसे यहाँ लाए हो? तब उनका जवाब सुनकर मेरे पैरो के नीचे से जमीन खिसक गयी. पायल ने जिस युनियन नेता के साथ शारीरिक संबंध बनाई थी और उस  युनियन नेता का मडर हो गया है और उस युनियन नेता के मोबाइल से आखिरी कॉल पायल को किया गया था ।

इसके चलते पायल को सिक्युरिटी स्टेशन में लाया गया था . अब वो बेहरहमी की तरह मेरे पायल को टोर्चर कर रहे थे. मैं अपनी बेटी के साथ टोर्चर होते देखकर मैं बड़े साहब के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाने लगी " भगवान के लिए मेरे बेटी को छोड़ दो, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी तू देखती जा तेरे बेटी की में कैसी हालत करता हूँ ?

अब यह रंंडी किसी के भी साथ शारिरिक संबंध बनाने लायक नहीं रहेगी रंडी . बड़े साहब के मुँह से यह शारीरिक संबंध और रंडी जैसी गाली सुनकर में दंग रह गई . बड़े साहब इतने गुस्से में थे कि उसे यह भी ख्याल नहीं रहा कि वो एक मां के सामने उसकी बेटी को गाली बोल रहा है. अब मैं थोड़ी डर सी गयी थी, मैं खूब गिडगिड़ाई, मैंने खूब विनती की बड़े साहब से छोड़ दें , लेकिन बड़े साहब नहीं माने .

इन सब चक्करों मैं मेरा साड़ी का पल्लू कब नीचे गिर गया था और मेरे चूची की दरार दिखने लगी थी, लेकिन मैं इससे अंजान होकर बड़े साहब से विनती कर रही थी और ऊपर से टेंशन के मारे मुझे काफ़ी पसीना भी आ रही थी .

थोड़ी देर बाद बड़े साहब की नजर मेरे ब्लाउज के ऊपर पड़ी और उसके अंदर का शैतान जाग उठा. फिर उसने सिपाही से कहा कि रुक जाओ और जेल लॉकअप से सभी सिपाही को बाहर निकाल का आदेश दिया। बड़े साहब मुझे अपने करीब आने को कहा और बोले " मैं एक शर्त पर पायल को छोड़ सकता हूँ. तब मैंने पूछा कि वो शर्त क्या है? और मैं आपकी सब शर्त मानने के लिए तैयार हूँ. तब वह मुझे देखकर हंसने लगे और बोले " आज पूरी रात मैं जैसा बोलू वैसा तुम्हें करना होगा " ।

जब बड़े साहब की शर्त मुझे समझ में नहीं आया तो मैंने पूछा कि क्या करना होगा? तो वह बोले कि तेरे बेटी ने जैसे युनियन नेता के साथ शारिरिक संबंध बनाए तो तुझे भी मुझसे शारिरिक संबंध बनाने पढ़ेंगे , वो भी यहाँ इन सबके सामने. बड़े साहब की यह बात सुनकार तो मैं दंग रह गयी. तब पायल चिल्लाने लगी थी कि नहीं मां ऐसा मत करना, अपनी इज़्जत मत देना , तुम उस कमीने की बात मत सुनना.

पायल की बात सुनकर बड़े साहब को गुस्सा आ गया और फिर उसने हुकुम किया कि " इस रंडी को नंगाकर दो और रस्सी से बाँधकर उल्टा लटका दो , अब मैं देखता हूँ यह रंंडी कब तक उल्टा लटका रहती है ? " फिर सिपाहियों ने मेरे सामने पायल को पूरा नंगाकर दिया और बाँधकर उल्टा लटका दिया. इससे पायल गुस्से में आकर बड़े साहब को गाली दे दी, तो बड़े साहब ने गुस्से में आकार पायल के चूतड़ पर डंडा मारे का आदेश दिया .

तो वह चिल्ला उठी , तो मुझसे पायल का दर्द सहा नहीं गया और मैंने हाथ जोड़ते हुए नजर झुकाकर कहा कि बड़े साहब जी पायल को मत मारिए, आप जो कहेंगे वो मैं करने के लिए तैयार हूँ. अब बड़े साहब और उसके सिपाहियों मुझपर हंसने लगे थे. फिर बड़े साहब बोले " चल ठीक है और फिर उन्होंने आदेश दिया कि चल एक-एक करके अपने पूरे कपड़े उतार दे. तब मैंने पहले अपनी साड़ी निकाल दी और उसके बाद में रुक गयी। तो वह बोले " कुतिया बाकि के कपड़े कौन निकालेगा ? "

तब मैंने शर्म से नीचे सिर झुकाकर कहा कि आपने कहा था सिर्फ़ आपसे चुदवाना पड़ेगा, आप अलग रूम में चलिए, मुझे इन लोगों के सामने शर्म आ रही है. तब बड़े साहब बोला कि रंडी जो करना है वो यहीं तुम्हारे बेटी और मेरे सिपाहियों के सामने ही करना है, अगर तुम्हें मंजूर नहीं है तो तू घर जा सकती है और मैं वापस इन लोगों की सेवा तेरी बेटी के लिए शुरू करवा दुंगा . तब उतने में पायल बोली " मां नहीं इन कमीनों की बात मत मानना "

तब बड़े साहब ने पायल के मुँह पर टेप बाँधवा दी, ताकि वो कुछ बोल ना सके और फिर बाद में बड़े साहब ने मुझसे कहा कि चल जल्दी से अपने कपड़े उतार. तब मैं अपना सिर झुकाकर अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगी और एक-एक करके मैंने अपने ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए और अपना ब्लाउज अपने शरीर से अलग कर दिया. अब मेरी टाईट ब्रा में बँधे हुए मेरे चूची बाहर आने के लिए बेताब थे, क्योंकि में ब्रा की साईज़ 36 की पहनती हूँ और मेरे चूची 38 की साईज के है और फिर बाद में मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, तो वो झट से सरकता हुआ नीचे गिर गया था.

अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी. अब मुझे अपने आप पर बहुत शर्म आ रही थी और घिन भी आ रही थी और मुझे ऐसे ब्रा पेंटी में देखकर उन सब सिपाहियों की आँखों में चमक आ गयी थी.वहाँ करीब 6 सिपाही और 1 बड़े साहब। फिर बाद मैंने धीरे से अपनी ब्रा का हुक पीछे से निकाला और अपनी ब्रा निकालकर बाजू में रख दी. अब मैं उनके सामने आधी नंगी खड़ी थी. मेरे बड़े-बड़े चूची उनके सामने पूरे नंगे थे. मैं अपने दोनों हाथों से अपने चूचियों को छुपा रही थी, क्योंकि पराएं 6 मर्दो के सामने मुझे बहुत शर्म आ रही थी. मुझे आंधी नंगी देखकर बड़े साहब मेरे पास आये और  मेरी पेंटी पकड़कर फाड़ डाली.

अब मेरी चूत जो कि सिपाहियों की तरफ थी और गांड मेरी बेटी की तरफ थी. मैं अपने हाथ से अपनी चूत और चूचियों को छुपाने की नाकामयाब कोशिश किए जा रही थी, लेकिन कुछ फ़र्क नहीं पड़ रहा था. अब मेरी यह हालत देखकर मेरे बेटी की आँखों से आँसू निकल रहे थे. फिर उस बड़े साहब ने सबको सिपाहियों को आर्डर दिया कि सब अपने-अपने कपड़े निकालो और नंगे हो जाओ, तुम सब मिलकार इस रंडी का गैंगबैंग करेंगे, आज इसके बेटी को दिखाते है सामूहिक चुदाई क्या होता है?

उनकी बात सुनकर डर गयी थी. फिर मैंने कहा कि नहीं-नहीं आपने सिर्फ़ कहा था कि आपसे चुदवाना पड़ेगा, इन लोगों से नहीं. लेकिन मेरी बात सुनकर वो सब के सब हंसने लगे. मैं समझ गयी कि बड़े साहब ने मेरे साथ धोका किया है . तब मैं अपने कपड़े वापस से पहनने लगी, तो तभी 2 सिपाहियों ने मेरे कपड़े ले लिए और मेरे सारे कपड़े जला डालें .

तभी एक सिपाही ने अपना काला लंबा और गंदा लंड मेरे मुँह के सामने रखा और कहा " चल कुत्तियाँ इसे अपने मुँह में ले." मैंने मना किया मैं ये सब नहीं कर सकती. तभी एक सिपाही ने एक बड़ा सा चिमटा लाया और पायल की लटकती चूची के निप्पल पर लगा दिया जिससे पायल दर्द से छटपटाने लगी . इससे मैं समझ गयी थी कि यह लोग मुझे बगैर चोदे नहीं जाने देंगे. मैंने समाधान निकाला और उसका लंड चूसने लगी थी. यह देखकर उस सिपाही ने निप्पल पर से चिमटा हटा लिया।

मैंने एक सिपाही का लंड चूसते-चूसते महसूस किया कि एक लंड मेरी गांड की दरार पर है. अब कोई मेरी गांड की दरार पर अपना लंड रगड़ रहा था. तभी इतने में मैंने आजू बाजू नजर घुमाई तो मैंने देखा कि बाकि के सिपाही ने भी लंड बाहर निकाला हुआ है और काफ़ी बड़े-बड़े थे और वो सब मुझे देखकर मुठ मार रहे थे. फिर थोड़ी देर तक मैंने उसके गंदे बदबू मारते हुए लंड को चूसा और अब मुझे उल्टी जैसी होने लगी, लेकिन उसने सिपाही ने ऑर्डर दिया कि अगर उसका पानी निकले बिना लंड मुँह में से बाहर निकाला, तो तेरी बेटी को भी इस चुदाई में शामिल कर लिया जाएगा।

अब उनकी बात सुनकर में डर गयी थी और बेटी की चुदाई अपने सामने ' मन में सोचकर ' ही डर गयी गई. अब में ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी थी. फिर थोड़ी देर तक लंड चूसने के बाद उसने अपना गन्दा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया और मुझे जबरदस्ती उसे पीना पड़ा. उसके बाद उन लोगों ने मुझे वहाँ टेबल पर लेटाया, जिससे मेरी चूत मेरी बेटी के एकदम सामने आ गयी थी. अब मैं शर्म से मरी जा रही थी.

तभी इतने में उन्होंने मेरे दोनों पैर फैलाए और मेरी चूत में अपनी उंगली घुसा दी, पहले एक और उसके बाद में 2 और फिर उसके बाद में 3 उंगलियाँ और फिर वो लोग अंदर बाहर करने लगे. अब उसमें से एक सिपाही ने मेरे चूची को ज़ोर-ज़ोर से निचोड़ रहा था और एक ने वापस अपना लंड मेरे मुँह में ढाल दिया था. फिर एक ने मेरा हाथ पकड़कर उसके लंड पर रख दिया और इशारा कर रहा था कि मैं उसे मुठ मार दूँ.

अब करीब 5 सिपाही लोग मेरे बदन से खेल रहे थे. तभी एक ने अपना लंड निकाला और मेरी चूत के छेद पर रखा और इतना जोर से धक्का मारा कि उसका आधे से भी ज़्यादा लंड मेरी चूत में घुस गया था, लेकिन मैं चीख नहीं पाई, क्योंकि एक और लंड मेरे मुँह में था. अब मेरी आंखों में से आँसू निकलने लगे थे. अब वो सिपाही ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूत को चोद रहा था और दो का लंड मेरे मुँह को चोद रहा था और एक मेरे चूची के साथ में खेल रहा था और उनको चूस रहा था.

फिर मैंने अपनी नजर घुमाकर देखी तो मेरे बेटी अपनी आँखे बंद करके रोने लगी थी और अब जो सिपाही मेरी चूत को चोद रहा था, उसने मेरी चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया था और उसके साथ-साथ मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया था. लेकिन अब मुझे इन सबसे घिन्न आने लगी थी , लेकिन अब में कुछ कर भी नहीं सकती थी, क्योंकि मैं उन सब के चुंगल में फस चुकी थी .

फिर उनलोगों ने मुझे कुत्तिया बनाकर बैठा दिया, जिससे उसका लंड आराम से मेरी चूत में जा सके और मेरी गांड के छेद पर भी थोड़ा तेल लगाया , तो मैं समझ गई कि यह लोग मेरी चूत के साथ गांड़ भी मारना चाहता है। तो मैं चीखी हुई बोली " नहीं गांड में नहीं, जो करना हो मेरी चूत में करे,"  लेकिन वो लोग नहीं माने और अपने लंड पर और मेरी गांड पर तेल लगा रहा था. फिर उसमें से एक ने ज़ोर से मेरी गांड के छेद पर एक धक्का लगाया तो उसके लंड का सुपाड़ा अंदर घुस गया.

अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था, क्योंकि मैंने कभी भी पहले अपनी गांड नहीं मरवाई थी. अब मेरे मुँह से चीख निकल रही थी, क्योंकि जिसने भी मेरी गांड में अपना लंड डाला था, उसका लंड काफ़ी बड़ा था और मेरी चूत में जिसने अपना लंड डाला था, उसका भी लंड काफी बड़ा था, शायद मेरे पति से दुगुना लंबा और मोटा था. अब मेरी चूत से और गांड से खून बहने लगा था, लेकिन उन लोगों को कुछ फ़िक्र नहीं थी. अब वो लोग आज मुझे रंडी बनाने की तैयारी में थे. तभी एक ने मेरे सामने आकर मेरे मुँह में अपना लंड डाल लिया.

अब मैं अपनी गांड , चूत और मुँह से चुद रही थी । थोड़ी देर बाद  गांड वाले ने अपना लंड बाहर निकाला. तब मुझे दर्द से थोड़ी राहत महसूस हुई, लेकिन मैंने यह क्या महसूस किया ? जिस सिपाही ने गांड़ से लंड निकाल उसने फिर अपना लंड , दूसरे वाले के साथ मेरी चूत में डाला. अब मैं दर्द से और तड़पने लगी थी, मेरी चूत में बहुत जोर का दर्द हो रहा था क्योंकि पहले मेरे चूत में एक लंड था और अब दो लंड से मेरी चुदाई हो रही थी और काफ़ी खून भी बह रहा था. फिर जाने कब में बेहोश हो गयी? मुझे पता ही नहीं चला.

फिर जब मैं होश में आई तो मैंने देखी कि मेरी चूत एकदम सूजी हुई थी. अब मेरी बेटी मुझे दयाभरी नजर से देख रही थी . अब मैं जहाँ बेहोश पड़ी थी वहाँ मैंने देखी वहां काफी खून फैला हुआ था, उस खून के साथ उन सभी सिपाहियों का वीर्य भी था. अब मेरी चूत , गांड और होंठ भी फटे हुए थे और मेरे होंठो से भी खून निकल रहा था. उन लोगों ने बहुत ही जालिम की तरह मुझे नोचा कर चोदा था.

फिर मैं खड़े होने की कोशिश की, लेकिन मुझसे नहीं उठा गया. तब उन लोगों को पता चला कि मैं होश में आ गयी हूँ. तो  उन सब ने वापस से मुझे चोदना चाहा, लेकिन मैं रो पड़ी और डर के मारे मुझसे वहाँ सोते-सोते ही पेशाब निकल गया. अब वो सब समझ गये थे कि मैं डर गयी हूँ. तभी उनमें से एक सिपाही बोला कि अरे यार अब उसकी चूत का तो भोसड़ा बन गयी है और गांड का छेद भी का भी भोसड़ा बना गया है, अब इसे चोदने में कोई भी मज़ा नहीं आयेगा।

फिर मैंने अपनी बॉडी को ठीक तरह से देखा तो मेरे चूची पर काफ़ी जगह काटने के निशान थे और मेरे निप्पल भी फूलकर सूज गये थे और कई जगह पर काले और हरे धब्बे पड़ गये थे, मेरा सारा शरीर खून वाला और वीर्य से चिपचिपा था. फिर मैंने कहा कि प्लीज मुझे यहाँ से उठाए तो उन लोगों ने मुझे वहाँ बैठाया और वापस अपना अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगे. फिर मैंने घड़ी की तरफ देखा तो सुबह के 4 बज रहे थे, उन दरिंदो ने पूरी रात मुझे नोचा था.

अब अभी उनका मन नहीं भर रहा था, उन्होंने अभी भी मेरी बेटी को नंगा ही बांधा हुआ रखा था फिर उस सिक्युरिटीवालों ने कैमरे से मेरी नंगी तस्वीरे ली और मेरी चूत गांड के फोटो लिए. मुझसे तो खड़ा भी नहीं हो पा रही थी फिर उसके बाद उन लोगों ने मुझसे कहा कि अब तुम जा सकती हो. तब मैंने कहा "  मेरे कपड़े " । तो वो लोग बोले कि तुम्हें ऐसे ही जाना होगा और हंसने लगे. अब मेरे ऊपर तो मानों आसमान टूट पड़ा था और मैंने मना कर दिया घर जाने से तो 2 सिक्युरिटीवालों ने मुझे उठाकर नंगा ही थाने के बाहर फेंक दिया। मैं पूरी तरह नंगी, खून, वीर्य  से खराब हुई मेरी बॉडी को लेकर में जैसे तैसे अपनी बेटी के साथ घर पहुँची ।
Like Reply


Messages In This Thread
RE: मीना बाजार - दोबारा फिर - by Puja3567853 - 04-10-2026, 09:29 PM



Users browsing this thread: 1 Guest(s)