04-10-2026, 06:12 PM
पूजा तो छोटी उम्र में विधवा हो गई। इतनी जवानी में पति चला गया। शरीर की गर्मी कौन उतारेगा? आखिर उसका भी शरीर है। चूत भी तरसती होगी, निप्पल्स भी सख्त होते होंगे, रात को अकेली लेटकर उंगलियों से ही काम चलाना पड़ता होगा। अगर बाबाजी उसे एक-दो बार चोद भी लें… तो क्या हुआ? आखिर संभोग की तलाश तो स्वाभाविक है। बाबाजी साधु हैं, लेकिन साधु भी आदमी ही हैं। और पूजा… पूजा तो जवान है, खूबसूरत है, विधवा है। कोई दूसरा लड़का पकड़ लेता तो बदनामी होती। बाबाजी के यहाँ तो कम से कम छुपा रहता है। लेकिन उसके जेहन में अभी तक बाबाजी कैसे पूजा को चोदते हिंगे बस यही घूम रहा था।
माँ ने गहरी साँस ली। मन ही मन फैसला कर लिया।
जब तक कोई परेशानी नहीं आती… या पूजा बाबाजी के लंड से प्रेग्नेंट नहीं हो जाती… तब तक मुझे पूजा और बाबाजी की चुदाई में दखल नहीं देनी चाहिए।
वह सोचती रही, बेटी चुदवाए, मजे ले, शरीर की आग बुझाए। बस सावधानी रहे। पेट न फूले। कोई देख न ले। बदनामी न हो। बाकी… बाकी तो शरीर का हक है। माँ ने आटा फिर से गूँधना शुरू किया। हाथ चल रहे थे, लेकिन दिमाग अभी भी मंदिर के उस कमरे में था, जहाँ उसकी बेटी शायद अभी नंगी लेटी होगी, और बाबाजी उसका रस पी रहे होंगे।
माँ की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। शंका तो थी… लेकिन अब वह शंका सिर्फ चिंता नहीं रह गई थी। वह एक छुपी हुई, गंदी और गरम कल्पना बन चुकी थी। लेकिन एक मन कहता था की उसे तपास तो करनी चाहिए। असल में क्या हो रहा है। दूसरा यह भी था की अब पूजा अगर चुदवा भी रही है तो जान कर क्या करुँगी? उसे रिकना तो वैसे भी नहीं है। मैत्री और सौनी की संयुक्त रचना।
बाबाजी को मिल कर उनसे बाते कर के यह तो जान लू की वह आदमी है कैसा? ऐसा तो नहीं की वह सिर्फ चोदना चाहता है लेकिन सबंध में नहीं आना चाहता।
अगर ऐसा है भी तो अच्छा ही है पूजा को भी तो सिर्फ उसके लंड से मतलब होना चाहए। चूत गांड और मुंह भर के आनंद कर के घर पर चले आना क्या खराबी है। लकिन अगर बाबाजी ने उसके पेट में हवा भर दी तो?? बाबाजी के लंड से निकला वीर्य ने उसका कमाल कर दिया तो?
ऐसा तुम सोचती हो, क्यों की तुम एक माँ हो लेकिन वह दोनों भी तो सोचेंगे न की बच्चा होना कितना घटक साबित हो सकता है। मर्दों को तो वैसे भी चूत और गांड के छेद से मतलब होता है’। लंड खाली हो गया बाद में किसी की परवाह नहीं होती। मुझे पूजा को सीधे तौर पर तो नहीं पर कुछ करके ऐसा तो जुरूर जताना पड़ेगा की वह अपनी चूत को लंड के माल से थोडा दुरी बनाये रखे या फिर पिल्स लिया करे।
इतने घमासान मानसिक युद्ध के बाद माँ ने यही तक किया की पूजा को जितना चुदवाना है चुद्वाती रहे और कोई परेशानी अगर आ भी जाती है तो मैं पूजा की हर तरीके से मदद करुँगी। बच्चा गिरवा भी सकते है।
और फिर बाद में उन्हों ने सब बेकार के विचार दिमांग से निकाल दिए और बस बेटी की चुदाई हो रही हो तो होने देना है और अपनी आँख कान मुंह बंद रखना है। माँ ने फिर से सोचा की पूजा के शरीर में काफी बदलाव तो आये है उसकी गांड धीरे-धीरे भरती ही जा रही है। कभी कभी टेडी-मेडी भी चलती है। माँ हूँ मुझे सब पता है , मैं भी तो मरवाने के बाद ऐसे ही चला करती थी। मन ही मन खुश हुई माँ, चलो अच्छा है एक औजार तो है जिस से पूजा अपने छेदों को शांत करवाती है। भले जैसे भी पूजा की मारता हो पर अगर मेरी बेटी खुश है तो वह लंड मेरे लिए अच्छा है।
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आज के लिए यही तक दोस्तों।
अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद तुरंत।
तब तक के लिए Maitri Patel का जय भारत।।
माँ ने गहरी साँस ली। मन ही मन फैसला कर लिया।
जब तक कोई परेशानी नहीं आती… या पूजा बाबाजी के लंड से प्रेग्नेंट नहीं हो जाती… तब तक मुझे पूजा और बाबाजी की चुदाई में दखल नहीं देनी चाहिए।
वह सोचती रही, बेटी चुदवाए, मजे ले, शरीर की आग बुझाए। बस सावधानी रहे। पेट न फूले। कोई देख न ले। बदनामी न हो। बाकी… बाकी तो शरीर का हक है। माँ ने आटा फिर से गूँधना शुरू किया। हाथ चल रहे थे, लेकिन दिमाग अभी भी मंदिर के उस कमरे में था, जहाँ उसकी बेटी शायद अभी नंगी लेटी होगी, और बाबाजी उसका रस पी रहे होंगे।
माँ की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। शंका तो थी… लेकिन अब वह शंका सिर्फ चिंता नहीं रह गई थी। वह एक छुपी हुई, गंदी और गरम कल्पना बन चुकी थी। लेकिन एक मन कहता था की उसे तपास तो करनी चाहिए। असल में क्या हो रहा है। दूसरा यह भी था की अब पूजा अगर चुदवा भी रही है तो जान कर क्या करुँगी? उसे रिकना तो वैसे भी नहीं है। मैत्री और सौनी की संयुक्त रचना।
बाबाजी को मिल कर उनसे बाते कर के यह तो जान लू की वह आदमी है कैसा? ऐसा तो नहीं की वह सिर्फ चोदना चाहता है लेकिन सबंध में नहीं आना चाहता।
अगर ऐसा है भी तो अच्छा ही है पूजा को भी तो सिर्फ उसके लंड से मतलब होना चाहए। चूत गांड और मुंह भर के आनंद कर के घर पर चले आना क्या खराबी है। लकिन अगर बाबाजी ने उसके पेट में हवा भर दी तो?? बाबाजी के लंड से निकला वीर्य ने उसका कमाल कर दिया तो?
ऐसा तुम सोचती हो, क्यों की तुम एक माँ हो लेकिन वह दोनों भी तो सोचेंगे न की बच्चा होना कितना घटक साबित हो सकता है। मर्दों को तो वैसे भी चूत और गांड के छेद से मतलब होता है’। लंड खाली हो गया बाद में किसी की परवाह नहीं होती। मुझे पूजा को सीधे तौर पर तो नहीं पर कुछ करके ऐसा तो जुरूर जताना पड़ेगा की वह अपनी चूत को लंड के माल से थोडा दुरी बनाये रखे या फिर पिल्स लिया करे।
इतने घमासान मानसिक युद्ध के बाद माँ ने यही तक किया की पूजा को जितना चुदवाना है चुद्वाती रहे और कोई परेशानी अगर आ भी जाती है तो मैं पूजा की हर तरीके से मदद करुँगी। बच्चा गिरवा भी सकते है।
और फिर बाद में उन्हों ने सब बेकार के विचार दिमांग से निकाल दिए और बस बेटी की चुदाई हो रही हो तो होने देना है और अपनी आँख कान मुंह बंद रखना है। माँ ने फिर से सोचा की पूजा के शरीर में काफी बदलाव तो आये है उसकी गांड धीरे-धीरे भरती ही जा रही है। कभी कभी टेडी-मेडी भी चलती है। माँ हूँ मुझे सब पता है , मैं भी तो मरवाने के बाद ऐसे ही चला करती थी। मन ही मन खुश हुई माँ, चलो अच्छा है एक औजार तो है जिस से पूजा अपने छेदों को शांत करवाती है। भले जैसे भी पूजा की मारता हो पर अगर मेरी बेटी खुश है तो वह लंड मेरे लिए अच्छा है।
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तब तक के लिए Maitri Patel का जय भारत।।



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