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Adultery SASUR AUR BAHU KE KAMUK KISSE SHORT GIF (LUND TIGHT)
#21
**मम्मी:** "आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह! उफ़्फ़... दादाजी! ओह्ह्ह... मर गई... इतना बड़ा... इतना गहरा..."

*(मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह पीछे की ओर तन गया। उनका गला सूख चुका था और उनकी साँसें तेज़ चलने लगी थीं। दादाजी का वह मोटा और गर्म **लंड** उनकी **चूत** की दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा गर्भाशय के मुंह तक जा पहुँचा था। मम्मी को ऐसा लग रहा था जैसे कोई चीज़ उनके अंदर घुसकर उनके पूरे अस्तित्व को भर रही है।)*

**दादाजी:** *(मम्मी के कान के पास झुककर, गहरी और भारी आवाज़ में)* "क्या हुआ? बोल क्यों नहीं रही? अभी तो मैंने बस शुरुआत की है। 


**मम्मी:** "ओह्ह्ह... आह्ह्ह! पापा जी... रुकिए... नहीं... मत रोकिए! आपका **लंड**... मेरी **चूत** को अंदर से चीर रहा है... लेकिन मज़ा भी आ रहा है... आह्ह्ह!"

*(दादाजी ने मम्मी की इन मीठी शिकायतों को अनसुना कर दिया और अपनी गति और भी तेज कर दी। 

*(दादाजी ने मम्मी की उन मीठी सिसकियों को अपने जुनून में दबा लिया। उन्होंने अपना शरीर पूरी तरह से मम्मी के ऊपर झुका लिया और उनकी छाती पर अपना भार डाल दिया। उनके चेहरे पर वासना का साफ़ भाव था। उन्होंने झपटकर मम्मी के होंठों को अपने कब्ज़े में ले लिया और उन्हें बड़े ही बेरहमी और भूख के साथ चूसने लगे। मम्मी के मुँह से निकलने वाली आहें अब उनके चुंबन के बीच दबकर रह गईं।)*

**मम्मी:** "(गूँजती हुई आवाज़ में) उम्म्म... हम्म्म... आह्ह्ह..."


*(दादाजी के होंठों का दबाव बढ़ता जा रहा था। वे मम्मी के होठों को इतनी शिद्दत से चूस रहे थे कि मम्मी का पूरा शरीर थरथराने लगा। उस गहरे और गीले चुंबन के दौरान, दादाजी का निचला हिस्सा लगातार मम्मी की **चूत** के भीतर अपनी जगह बना रहा था। उनके भारी और सख्त **लंड** के हर धक्के के साथ मम्मी की योनि की दीवारें फटने जैसी महसूस हो रही थीं, लेकिन वह दर्द और आनंद का एक ऐसा मिश्रण था जिसे मम्मी चाहकर भी नहीं रोकना चाहती थीं।)*


*(जैसे-जैसे दादाजी का चुंबन गहरा होता गया, उनके हाथों ने भी सक्रियता दिखा दी। उन्होंने मम्मी की कमर को मजबूती से जकड़ लिया ताकि वह उनके धक्कों की रफ्तार को झेल सकें। उनके भारी और मांसल **लंड** का हर प्रहार मम्मी की **चूत** के सबसे संवेदनशील हिस्से को अंदर से छू रहा था। मम्मी के शरीर से पसीना बहने लगा था और उनकी सांसें उखड़ने लगी थीं।)*

**मम्मी:** "(सांस फूलते हुए और लड़खड़ाती आवाज में) आह्ह्ह... पापा जी... आप तो मुझे पागल कर देंगे... इतना जोर से... उफ्फ... मेरा शरीर कांप रहा है... आह्ह्ह!"


*(दादाजी ने मम्मी की बात सुनकर अपनी गति और भी बढ़ा दी। अब वे किसी जंगली जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर हावी हो चुके थे। उनके थपकी देने वाले धक्कों की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी— 'छपाक, छपाक'। मम्मी का पूरा शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। दादाजी ने अपना चेहरा मम्मी की गर्दन की ओर मोड़ा और उनकी गर्दन पर अपने दांतों से हल्का सा काट लिया, जिससे मम्मी के मुँह से एक तीखी चीख निकली।)*

**मम्मी:** "आह्ह्ह! पापा जी... वहाँ नहीं... उफ्फ! बहुत अच्छा लग रहा है... आह्ह्ह!"
*(दादाजी की वासना अब बेकाबू होती जा रही थी। उन्होंने मम्मी की गर्दन पर अपने दांतों से हल्के से काटते हुए अपना पूरा वजन उनके ऊपर डाल दिया। उनके भारी और गर्म **लंड** का हर धक्का अब और भी गहरा और हिंसक होता जा रहा था। मम्मी की **चूत** से निकलता हुआ सारा पानी और चिकनाहट अब बिस्तर की चादर को भिगो चुकी थी।)*

*(दादाजी ने अचानक मम्मी के दोनों हाथ पकड़कर उनके सिर के ऊपर बिस्तर से चिपका दिए, जिससे मम्मी पूरी तरह असहाय हो गईं। अब वे मम्मी की आँखों में आँखें डालकर, उनके चेहरे को देखते हुए अपनी लय को और भी तेज करने लगे।)*

**मम्मी:** "(सिसकते हुए और आंखों में नींद लिए) आह्ह्ह... पापा जी... अब और नहीं... सहन नहीं हो रहा... मेरा शरीर फट जाएगा..."
*(दादाजी ने मम्मी की तड़पती हुई आवाज़ सुनी, तो उनके मन में थोड़ी नरमी आई। उन्होंने मम्मी के हाथों को छोड़ दिया और उनके चेहरे को अपने दोनों हाथों के बीच प्यार से भर लिया। अब उनके धक्के हिंसक नहीं, बल्कि बेहद धीमे, गहरे और सुकून भरे थे। वे हर धक्के के साथ मम्मी की आँखों में देख रहे थे, जैसे उनके शरीर के साथ-साथ उनकी आत्मा को भी छूना चाहते हों।)*

*(उन्होंने मम्मी के माथे को चूमा और धीरे से उनके कान के पास फुसफुसाया। उनका भारी **लंड** अब मम्मी की **चूत** के भीतर बहुत आराम से और गहराई तक समा रहा था, जिससे मम्मी को दर्द की जगह एक रूहानी सुख मिलने लगा।)*

**दादाजी:** "(धीमी और गहरी आवाज़ में) घबराओ मत मेरी जान..."
*(दादाजी के उस प्यार भरे स्पर्श और धीमी गति ने मम्मी के पूरे शरीर को पिघला दिया। जो उत्तेजना पहले केवल शारीरिक थी, अब वह भावनाओं के समंदर में बदल गई थी। मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर दादाजी के कंधे पर टिका दिया। उनके शरीर की थरथराहट अब डर या दर्द की वजह से नहीं, बल्कि उस असीम सुख की वजह से थी जो उन्हें मिल रहा था।)*

*(दादाजी ने अपनी गति को थोड़ा बढ़ाया, लेकिन अभी भी उसमें वही कोमलता बनी हुई थी। वे मम्मी के शरीर के हर अंग को चूम रहे थे—उनके कंधों को, उनके सीने को और फिर धीरे से उनके होंठों को। 
*(दादाजी का लंड अब मम्मी की गीली और गरम चूत के भीतर रगड़ खाते हुए एक अलग ही आनंद दे रहा था। मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से ढीला पड़ चुका था, मानो वे दादाजी के प्यार और उस सुख के वश में आकर खुद को पूरी तरह सौंप चुकी हों।)*

*(धीरे-धीरे दादाजी की गति फिर से बढ़ने लगी, लेकिन इस बार इसमें एक लय थी, एक संगीत था। हर धक्के के साथ मम्मी के मुँह से एक दबी हुई आह निकल रही थी। दादाजी ने महसूस किया कि मम्मी की योनि की मांसपेशियां उनके लंड को कसकर जकड़ रही हैं, जो इस बात का संकेत था कि मम्मी भी चरम सुख (orgasm) के बहुत करीब पहुँच चुकी हैं।)*


*(मम्मी का शरीर अब धनुष की तरह तन गया था। उनके चेहरे पर परम सुख के भाव थे और उनकी आँखें आधी खुली रह गई थीं। दादाजी ने देखा कि मम्मी की चूत की दीवारें उनके लंड को इतनी जोर से भींच रही हैं कि उन्हें खुद भी चरम सीमा महसूस होने लगी है। उन्होंने मम्मी के कान के पास जाकर अपनी गरम साँसों से उन्हें सहलाया।)*

**दादाजी:** "(गहरी और भारी आवाज़ में) क्या हुआ मेरी रानी? तुम्हारी ये छोटी सी चूत मेरे मोटे लंड को ऐसे क्यों दबा रही है? क्या तुम्हें मज़ा आ रहा है?"

*(मम्मी ने अपनी आँखें खोल दीं, जो अब वासना और सुख के मिश्रण से धुंधली हो चुकी थीं। उन्होंने दादाजी के गले में अपनी बाहें कस लीं और उनके कान के पास अपना चेहरा ले गईं। उनकी आवाज़ में एक अजीब सी बेताबी और प्यास थी।)*

**मम्मी:** "(हाँफते हुए और दबी हुई आवाज़ में) हाँ... आह... बहुत मज़ा आ रहा है। आपका ये मोटा लंड जब अंदर जाता है ना, तो ऐसा लगता है जैसे मेरा पूरा शरीर जल रहा है। मुझे और ज़ोर से चाहिए... और गहराई तक मारिए!"
*(मम्मी की इन कामुक बातों ने दादाजी के अंदर की मर्दानगी को और भी भड़का दिया। उनकी नसों में खून तेज़ी से दौड़ने लगा और उनका **लंड** मम्मी की **चूत** के भीतर और भी सख्त और बड़ा महसूस होने लगा। दादाजी ने मम्मी की कमर को मजबूती से पकड़ा और अब वे पूरी ताकत के साथ अंदर-बाहर करने लगे।)*

*(हर झटके के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर टकरा रहा था और उनके मुँह से निकलने वाली सिसकियाँ कमरे की शांति को चीर रही थीं। दादाजी ने अपनी गति को एकदम बढ़ा दिया, अब वे रुक नहीं रहे थे, बस मम्मी के अंदर अपना सारा जुनून उतार रहे थे।)*

**दादाजी:** "(हाफते हुए और गुस्से भरी उत्तेजना में) तो तुझे इतना मज़ा आ रहा है?"
*(मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका था। दादाजी के उन झटकों से उनका पूरा बदन हवा में उछल रहा था। उनकी चूत से निकलने वाला गीलापन अब दादाजी के अंडकोषों को भिगो रहा था। मम्मी की सांसें उखड़ रही थीं और उनकी आवाज़ अब सिर्फ बेतहाशा आहें निकालने तक सीमित रह गई थी।)*

*(दादाजी ने मम्मी के पैरों को अपने कंधों पर चढ़ा लिया ताकि वे और भी गहराई तक जा सकें। अब उनका **लंड** सीधे मम्मी के गर्भाशय ग्रीवा (cervix) से टकरा रहा था, जिससे मम्मी को एक बिजली जैसा झटका महसूस हो रहा था।)*

**मम्मी:** "(चीखते हुए और पागलपन की हद तक उत्तेजित होकर) आह्ह्ह! हाँ... वहीं... बिल्कुल वहीं!"
*(मम्मी की उस तीखी चीख ने दादाजी के अंदर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया था। उन्होंने महसूस किया कि अब मम्मी को किसी और तरीके से चखाया जाना चाहिए। दादाजी ने अचानक अपनी गति रोकी और मम्मी के शरीर को पलटने के लिए मजबूर किया।)*

*(उन्होंने मम्मी को बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। मम्मी का शरीर थकावट और उत्तेजना से कांप रहा था, लेकिन जैसे ही दादाजी ने उनके कूल्हों को ऊपर उठाया, उनकी कामुक भूख फिर से जाग उठी। दादाजी अब उनके पीछे खड़ा था, और मम्मी का निचला हिस्सा पूरी तरह से खुला हुआ था।)*

**दादाजी:** "(मम्मी के नितंबों को ज़ोर से थपथपाते हुए) अब तू मेरी पीठ दिखाएगी... और मैं तेरे इस खुले हुए हिस्से में अपना सारा रस भरूँगा।"
*(दादाजी ने बिना इंतज़ार किए अपना सख्त और गर्म **लंड** मम्मी की भीगी हुई **चूत** के द्वार पर टिकाया। मम्मी ने अपने हाथों से बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया क्योंकि उन्हें पता था कि पीछे से लगने वाले झटके और भी गहरे होंगे। दादाजी ने एक जोरदार धक्का मारा और उनका पूरा **लंड** मम्मी के अंदर समा गया।)*

*(मम्मी का पूरा शरीर एक झटके में आगे की ओर झुक गया। पीछे से वार करने के कारण दादाजी का **लंड** सीधा उनकी सबसे संवेदनशील जगह से टकरा रहा था। कमरे में केवल मांस के आपस में टकराने की 'चप-चप' आवाज़ और मम्मी की दर्दभरी मगर सुखद सिसकियाँ गूँज रही थीं।)*

*(दादा जी अब पूरी तरह से उत्तेजना के चरम पर पहुँच चुके थे। उन्होंने मम्मी की कमर को इतनी जोर से पकड़ा कि उनके हाथों के निशान मम्मी की कोमल त्वचा पर पड़ने लगे। दादा जी ने अपनी गति तेज कर दी, अब वे रुक नहीं रहे थे, बल्कि पागलों की तरह अपने भारी लंड को मम्मी की गीली और तंग चूत के अंदर-बाहर करने लगे।)*

*(हर झटके के साथ मम्मी का शरीर आगे की ओर उछलता, और उनके बड़े-बड़े स्तन जमीन की ओर लटक जाते। चूत के अंदर दादा जी का लंड रगड़ खा रहा था, जिससे बहुत सारा चिकना तरल पदार्थ (lubrication) बाहर निकलकर उनके नितंबों पर बहने लगा था।)*

*(मम्मी अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुकी थीं। दादा जी के लगातार और गहरे प्रहारों से उनकी आँखें ऊपर चढ़ने लगी थीं और उनके मुँह से लार टपक रही थी। वह अपनी हथेलियों से बिस्तर को जोर-जोर से भींच रही थीं।)*

**मम्मी:** "(बेकाबू होकर चीखते हुए) आआह्ह्ह... पापा जी! बस कीजिये... आह्ह्ह! मेरा पेट... आपका लंड मेरे पेट तक लग रहा है! उफ्फ... कितनी गहराई से मार रहे हैं आप... आआह्ह्ह!"
*(दादा जी ने मम्मी की इस तड़प को देख कर अपनी रफ्तार और भी बढ़ा दी। अब वे रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने अपना पूरा वजन मम्मी के शरीर पर डाल दिया और अपने दोनों हाथों से उनके नितंबों को हवा में उठा लिया ताकि उनका लंड और भी गहराई तक जा सके। कमरे में सिर्फ चमत्कारी मांस के आपस में टकराने की आवाज़ "चप-चप" सुनाई दे रही थी।)*

*(मम्मी का शरीर अब बुरी तरह कांप रहा था। उन्हें महसूस हो रहा था कि दादा जी का मोटा लंड उनकी गर्भाशय ग्रीवा (cervix) से सीधे टकरा रहा है, जिससे उन्हें बिजली जैसा झटका महसूस हो रहा था।)*

**मम्मी:** "(सिसकते हुए और रोने जैसी आवाज़ निकालते हुए) आआह्ह्ह... पापा जी! मैं... मैं मरने वाली हूँ!"
*(दादा जी ने मम्मी की आँखों में देखा और उनकी बात समझ गए। उन्होंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, "जैसा तू चाहे, मेरी रानी।" उन्होंने मम्मी के शरीर को सहारा दिया और उन्हें धीरे से बेड पर सीधा लिटा दिया।)*

*(अब दादा जी पीछे की तरफ झुककर बैठ गए और मम्मी ने अपने घुटनों के बल उठकर उनके ऊपर अपनी जगह बना ली। मम्मी का पूरा भार अब दादा जी के मजबूत जांघों पर था। मम्मी ने अपने हाथों को दादा जी के चौड़े कंधों पर टिका दिया।)*

*(जैसे ही मम्मी ने खुद को नीचे झुकाया, दादा जी का गरम और सख्त लंड धीरे-धीरे उनकी गीली चूत के द्वार को फाड़ते हुए अंदर समाने लगा। मम्मी ने अपनी आँखें मूंद लीं और एक लंबी साँस ली।)*

*(मम्मी ने अपने दोनों हाथ दादा जी के कंधों पर मजबूती से जमा लिए। जैसे-जैसे उनका शरीर नीचे की ओर बढ़ रहा था, दादा जी का मोटा लंड उनकी तंग और भीगी हुई चूत को गहराई तक भेदता जा रहा था। मम्मी का पूरा निचला हिस्सा थरथरा रहा था और उनके चेहरे पर आनंद और हल्का सा तनाव साफ दिख रहा था।)*

**मम्मी:** "(एक लंबी और गहरी सिसकी लेते हुए) आआह्ह्ह... उफ्फ... पापा जी... आप कितने बड़े हैं... अह्ह्ह... बहुत गहरा जा रहा है..."
*(मम्मी ने अपनी कमर को थोड़ा पीछे की ओर झुकाया ताकि वह दादा जी के लंड की गहराई को पूरी तरह महसूस कर सके। दादा जी ने उनके कूल्हों को अपने हाथों से पकड़ लिया और उन्हें सहारा देते हुए धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया। अब मम्मी खुद लय (rhythm) बनाने लगी थी।)*

*(हर बार जब मम्मी नीचे आती, दादा जी का लंड उनकी गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को हल्के से छूता, जिससे मम्मी के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती। कमरे में सिर्फ मम्मी की भारी होती साँसों और उनके मांस के आपस में टकराने की 'चप-चप' वाली आवाज़ गूंज रही थी।)*

**मम्मी:** "(अपनी आँखें खोलकर दादा जी की आँखों में देखते हुए, उत्तेजना से भरी आवाज़ में) आह्ह्ह..."
*(दादा जी ने मम्मी की आँखों में वही बेइंतहा चाहत देखी और उन्होंने इशारा किया कि वे अब लेट जाना चाहते हैं। उन्होंने धीरे से खुद को पीछे की ओर झुकाया और बिस्तर पर सपाट लेट गए। उन्होंने अपने दोनों हाथ फैला दिए, मानो वे मम्मी को पूरी तरह से अपने वश में करने के लिए तैयार हों।)*

*(मम्मी ने बिना देर किए अपना संतुलन बनाया और दादा जी के ऊपर चढ़ गईं। अब वे सीधे उनके ऊपर बैठी थीं, उनके घुटने दादा जी की जांघों के बगल में टिके हुए थे। मम्मी ने अपने हाथों को दादा जी के सीने पर रखा और अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया।)*
*(मम्मी ने अपनी कमर के साथ खेलना शुरू किया, जिससे दादा जी का लंबा और सख्त लंड उनकी भीगी हुई चूत के भीतर गहराई तक धंसता जा रहा था। हर बार जब मम्मी नीचे की ओर झुकतीं, तो दादा जी का लंड उनके अंदरूनी हिस्सों को पूरी तरह भर देता।)*

*(मम्मी के स्तन हवा में झूल रहे थे और उनके हिलने के साथ ही दादा जी की नज़रें उन पर टिकी हुई थीं। दादा जी ने अपने दोनों हाथों को मम्मी की पतली कमर पर कस लिया और उन्हें अपनी ओर खींचते हुए जोर से ऊपर की तरफ झटका दिया। इससे मम्मी का शरीर अचानक से आगे की ओर झुक गया और उनका चेहरा दादा जी के चेहरे के बिल्कुल करीब आ गया।)*

**दादा जी:** "(गहरी और भारी आवाज़ में) हाँ... ऐसे ही..."
*(मम्मी ने दादा जी की आँखों में झाँकते हुए अपनी गति बढ़ा दी। अब वे रुक नहीं पा रही थीं। उनके शरीर की हरकत इतनी तेज हो गई थी कि उनके स्तनों के उभार और उनकी कमर की लयबद्ध हलचल देखने लायक थी। दादा जी ने अपनी पकड़ मम्मी की कमर पर और मजबूत कर ली, ताकि वे उन्हें पूरी तरह नियंत्रित कर सकें।)*

*(मम्मी के चेहरे पर पसीने की नन्हीं बूंदें चमक रही थीं और उनकी सांसें अब काबू से बाहर होकर तेज़ चलने लगी थीं। हर बार जब वे नीचे उतरतीं, तो दादा जी का लंड उनकी चूत की दीवारों को बुरी तरह रगड़ता हुआ जाता, जिससे मम्मी के मुँह से बेकाबू चीखें निकलने लगतीं।)*

*(मम्मी का शरीर एक जोरदार झटके के साथ अकड़ गया। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके मुँह से एक दबी हुई लेकिन तीखी चीख निकली। उनके अंदर एक ऐसा तूफान उठा जिसने उन्हें पूरी तरह सुन्न कर दिया। कुछ सेकंड तक वे बस वहीं जम गईं, उनकी चूत के भीतर दादा जी का लंड अभी भी गहराई में धंसा हुआ था, जो उनके चरम सुख (orgasm) की थरथराहट को महसूस कर सकता था।)*

*(जब मम्मी की साँसें थोड़ी सामान्य हुईं, तब दादा जी ने उनके कान के पास झुककर अपनी भारी और कामुक आवाज़ में कहा, "बेटा, मैं चाहता हूँ कि मेरी गरम मलाई तुम्हारे इस सुंदर चेहरे पर गिरे... क्या तुम मुझे इजाजत दोगी?")*"
*(यह सुनते ही मम्मी का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उन्होंने तुरंत अपनी नज़रें नीचे झुका लीं और अपनी पलकें झपकाने लगीं। उनके मन में एक अजीब सी कशमकश चल रही थी—एक तरफ संकोच था और दूसरी तरफ उस बात ने उनकी उत्तेजना को और भी ज़्यादा भड़का दिया था।)*

*(मम्मी ने धीरे से अपना सिर हिलाया, जैसे वे पूछ रही हों कि क्या वाकई वे ऐसा करना चाहते हैं। उनकी आवाज़ में एक हल्की सी हिचकिचाहट और शरारत दोनों थी।)*

**मम्मी:** "(धीमी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ में) पापा जी... आप... आप सच में? मेरा मतलब है... ये... ये थोड़ा अजीब नहीं होगा?"
*(दादा जी ने मम्मी की हिचकिचाहट को भांप लिया और उनके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई। उन्होंने अपना एक हाथ मम्मी के गाल पर फेरा और फिर दूसरे हाथ से उनकी ठुड्डी को धीरे से उठाकर उनकी आँखों में देखा। उनकी आँखों में एक ऐसी प्यास थी जिसे देखकर मम्मी का सारा संकोच पिघलने लगा।)*

*(दादा जी ने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया ताकि मम्मी को उनके लंड की कठोरता का एहसास हो सके और फिर अपनी आवाज़ को और भी धीमा और गहरा करते हुए बोले।)*

**दादा जी:** "अजीब क्यों होगा बहू? तुम्हारी ये मासूमियत और ये शर्म... यही तो मुझे पागल कर देती है। बस एक बार मान जाओ, फिर देखना तुम्हें कितना अच्छा लगता है।"
*(मम्मी ने दादा जी की आँखों में वो गहरी चाहत देखी और उनका दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उनके शरीर की सारी हिचकिचाहट अब एक अनजानी उत्तेजना में बदल चुकी थी। उन्होंने अपनी नज़रें ऊपर उठाईं और दादा जी के चेहरे को गौर से देखा, मानो वे खुद को इस नए अनुभव के लिए तैयार कर रही हों।)*

*(मम्मी ने बहुत धीरे से, लगभग फुसफुसाते हुए जवाब दिया, उनकी आवाज़ में समर्पण और शरम का मिश्रण था।)*

**मम्मी:** "(पलकें झुकाते हुए और धीमी आवाज़ में) ठीक है... जैसा आप चाहें। अगर आपको इससे खुशी मिलती है, तो मैं मना नहीं करूँगी।"
*(मम्मी की इस अनुमति ने दादा जी के अंदर जैसे आग लगा दी। उनकी आँखों में जीत की चमक आ गई और उन्होंने मम्मी की कमर को और कसकर जकड़ लिया। दादा जी ने मम्मी के शरीर को अपने ऊपर खींच लिया ताकि वे पूरी तरह से उनके नियंत्रण में रहें।)*

*(दादा जी ने अपनी गति को एकदम धीमा कर दिया, लेकिन अब वह और भी अधिक गहरे और शक्तिशाली तरीके से अंदर-बाहर करने लगे। हर धक्के के साथ मम्मी के शरीर में एक बिजली सी दौड़ जाती। दादा जी ने अपनी आवाज़ को और भी भारी बना लिया, जैसे वे अपनी अंतिम सीमा के करीब पहुँच रहे हों।)*

**दादा जी:** "बहुत अच्छी बहू तुम हो... बस अब थोडा और इंतज़ार करो। मेरी मलाई बस निकलने ही वाली है..."
*(जैसे ही दादा जी ने आखिरी और सबसे गहरा झटका लगाया, उनके पूरे शरीर में एक जबरदस्त कंपन हुआ। उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आया और उनके गले से एक गहरी, मर्दाना दहाड़ निकली। अगले ही पल, दादा जी का लंड मम्मी की चूत के भीतर जोर से स्पंदित होने लगा और उनकी गर्म, गाढ़ी सफेद मलाई एक धार के रूप में निकलकर सीधे मम्मी के चेहरे पर गिरने लगी।)*

*(मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और संतुष्टि भरी मुस्कान तैर रही थी। जैसे ही वो गरम तरल पदार्थ उनकी त्वचा, उनके गालों और उनके होंठों को छू रहा था, उन्हें एक अलग ही प्रकार का आनंद मिल रहा था। वे डर नहीं रही थीं, बल्कि उस क्षण को पूरी तरह से जी रही थीं।)*
*(दादा जी हाँफते हुए पीछे हटने लगे, उनका पूरा शरीर पसीने से तर-बतर था और उनकी साँसे अभी भी तेज़ चल रही थीं। उन्होंने अपनी छाती को चौड़ा किया और बड़े गर्व के साथ मम्मी के चेहरे को देखा, जो पूरी तरह से उनकी सफ़ेद मलाई से सना हुआ था।)*

*(मम्मी ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उनके चेहरे पर लगी हुई मलाई उनकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रही थी। उन्होंने अपनी उंगली से अपने होंठों पर लगी हुई उस गाढ़ी मलाई को चाटा और फिर दादा जी की ओर देखते हुए एक बेहद कामुक और शरारती मुस्कान दी।)*

**मम्मी:** "(धीमी और मदहोश आवाज़ में) इतनी जल्दी खत्म कर दी आपने? मुझे तो लगा था कि आज रात लंबी चलेगी..."
*(मम्मी की यह बात सुनकर दादा जी की आँखों में फिर से वही पुरानी चमक लौट आई। उन्होंने एक गहरी सांस ली और मुस्कुराते हुए मम्मी के पास वापस खिसक आए। उन्होंने मम्मी के चेहरे पर लगी हुई बची हुई मलाई को अपनी उंगलियों से धीरे से फैलाया और फिर उसे अपने मुँह में ले लिया।)*

*(दादा जी ने मम्मी की कमर को पकड़कर उन्हें फिर से अपनी ओर खींचा और उनके कान के पास झुककर अपनी भारी आवाज़ में कहा।)*

**दादा जी:** "अभी तो खेल शुरू हुआ है, बहू। तुमने तो अभी सिर्फ स्वाद चखा है, असली नशा तो अभी बाकी है। तुम्हारी ये मुस्कान देख कर मेरा मन फिर से भर रहा है।"
*(मम्मी ने हल्के से हंसते हुए अपना सिर हिलाया और दादा जी के कंधे से अपना हाथ हटा लिया। उनके चेहरे पर अब एक ऐसी सहजता थी जैसे कुछ देर पहले जो हुआ वो कोई सपना हो। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक किया और खड़े होते हुए अपने बिखरे हुए बालों को संवारा।)*

*(दादा जी बिस्तर पर ही टिक कर बैठ गए, उनकी आँखों में एक संतोष भरा भाव था, लेकिन मम्मी की बातों ने उन्हें थोड़ा हैरान भी कर दिया।)*

**मम्मी:** "(मुस्कुराते हुए और कमरे से बाहर जाते हुए) अरे नहीं-नहीं पापा जी, बस मैं तो मज़ाक कर रही थी! अब आप आराम कीजिये, मैं भी चलती हूँ... आपके बेटे जी आ रहे होंगे ऑफिस से। उन्हें पता चला तो क्या सोचेंगे!"
*(मम्मी कमरे से बाहर निकल गईं और रसोई की तरफ बढ़ गईं, ताकि आने वाले समय के लिए खुद को तैयार कर सकें। दादा जी वहीं बिस्तर पर पड़े-पड़े छत को ताकने लगे, उनके दिमाग में अभी भी मम्मी की वो शरारती मुस्कान घूम रही थी।)*

*(तभी घर के मुख्य दरवाजे पर ताले के खुलने की आवाज सुनाई दी। मम्मी ने तुरंत अपने चेहरे को पानी से धोया और आइने में देखकर खुद को संभाला। उन्होंने अपनी साड़ी को ठीक किया और एक सामान्य पत्नी के रूप में दरवाजे की तरफ बढ़ीं।)*

*(दरवाजा खोलते ही सामने उनके पति यानी दादा जी के बेटे खड़े थे। उनके चेहरे पर दिनभर की थकान साफ दिख रही थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने मम्मी को देखा, उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई।)*
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RE: SASUR AUR BAHU KE KAMUK KISSE SHORT GIF (LUND TIGHT) - by rajusethzee - 03-10-2026, 11:41 PM



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