02-10-2026, 11:07 PM
*(दादाजी की उंगलियां अब मम्मी की **चूत** के बिल्कुल केंद्र में थीं। उन्होंने महसूस किया कि मम्मी की **चूत** पूरी तरह से पानी की तरह गीली हो चुकी थी। दादाजी ने अपनी दो उंगलियों को मम्मी की **चूत** के उस मांसल और उभरे हुए हिस्से पर रखा और उसे गोल-गोल घुमाते हुए जोर से रगड़ना शुरू कर दिया।)*
*(जैसे ही उन्होंने उंगलियों से मम्मी की **चूत** के द्वार को थोड़ा फैलाया और अंदरूनी हिस्से को सहलाना शुरू किया, मम्मी का पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह कांप उठा। दादाजी की उंगलियां अब मम्मी की **चूत** के भीतर गहराई तक जाने लगी थीं, जिससे मम्मी के शरीर से निकलने वाला रस और भी ज्यादा बहने लगा।)*
*(मम्मी की **चूत** से निकलने वाला गीलापन अब दादाजी की उंगलियों को पूरी तरह भिगो चुका था। दादाजी ने अपनी उंगलियों को मम्मी की **चूत** के अंदर तेज़ी से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, जिससे एक 'छप-छप' की आवाज़ पूरे शांत कमरे में गूँजने लगी।)*
*(मम्मी का पूरा बदन पसीने और उत्तेजना से तर-बतर हो गया था। उनकी आँखें आधी खुली रह गई थीं और वे बेकाबू होकर बिस्तर पर छटपटा रही थीं। दादाजी ने अपनी उंगलियों की गति और बढ़ा दी, जिससे मम्मी की **चूत** के अंदरूनी दीवारों पर ज़ोरदार दबाव पड़ रहा था।)*
*(उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। दादाजी ने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं और मम्मी की **चूत** से चिपके हुए उस गाढ़े और मीठे रस को देखा। फिर बिना एक पल गंवाए, उन्होंने अपना चेहरा मम्मी के पैरों के बीच ले जाकर उनकी **चूत** पर अपनी जीभ रख दी।)*
*(जैसे ही दादाजी की गरम और खुरदरी जीभ ने मम्मी की **चूत** के उस नाजुक हिस्से को चाटना शुरू किया, मम्मी के मुँह से एक बहुत तेज़ और गहरी कराह निकली। दादाजी अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के छेद के अंदर घुसा रहे थे और फिर बाहर निकालकर उसके ऊपर के मांसल हिस्से को बार-बार चाट रहे थे।)*
*(दादाजी की जीभ की हरकत इतनी तेज़ और सटीक थी कि मम्मी का दिमाग सुन्न होने लगा। वे अपनी कमर को हवा में ऊपर उठाने लगीं ताकि दादाजी उनकी **चूत** को और बेहतर तरीके से चाट सकें। दादाजी ने इस बार अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के उस छोटे से उभार (clitoris) पर टिका दिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।)*
*(मम्मी के शरीर से निकलने वाला तरल पदार्थ अब दादाजी के चेहरे पर लग रहा था। दादाजी ने अपनी नाक को भी मम्मी की **चूत** के करीब ले जाकर उसकी सोंधी और उत्तेजक खुशबू को गहराई से महसूस किया। वे अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के अंदर गहरे तक ले जा रहे थे
*(मम्मी का पूरा शरीर अब थरथराने लगा था। दादाजी की जीभ की रफ़्तार इतनी बढ़ गई थी कि मम्मी की **चूत** से निकलने वाला रस अब एक धार बनकर बहने लगा था। दादाजी ने अपनी दोनों हथेलियों से मम्मी के नितंबों (buttocks) को पकड़ लिया और उन्हें ऊपर की ओर खींच दिया ताकि उनकी **चूत** का हर हिस्सा दादाजी की जीभ के लिए पूरी तरह खुल जाए।)*
*(दादाजी अब अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के छेद के अंदर किसी मशीन की तरह लगातार अंदर-बाहर कर रहे थे, जिससे एक अजीब सी लसलसी आवाज़ आ रही थी। मम्मी का दम घुटने लगा था और वे बस पागलों की तरह बेड की चादर को अपने हाथों से जकड़े हुए थीं।)*
*(मम्मी की सांसें अब उखड़ने लगी थीं। उनके होंठ सूखे जा रहे थे और आँखों में केवल वासना का समंदर तैर रहा था। दादाजी ने अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के अंदर और गहरा घुसाया और फिर धीरे से सिर उठाकर मम्मी की आँखों में देखा।)*
**दादाजी:** "आह... तुम्हारी **चूत** कितनी स्वादिष्ट है... इतना मीठा रस निकल रहा है जैसे मैं शहद पी रहा हूँ। आज तो तुम्हें यहीं खत्म कर दूँगा।"
*(मम्मी ने दर्द और सुख के मिले-जुले अहसास के साथ अपनी कमर को दादाजी के चेहरे की तरफ और ज़ोर से धकेला।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... दादाजी... और ज़ोर से... मेरी **चूत** पागल हो रही है। आपकी जीभ मुझे मार डालेगी..."
*(मम्मी की आवाज़ अब एक बेकाबू चीख में बदल चुकी थी। उनका पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो चुका था और उनकी आँखें कामवासना के मारे आधी बंद हो गई थीं। दादाजी ने जब उनकी **चूत** के किनारों को अपनी उंगलियों से खींचा, तो मम्मी का पूरा निचला हिस्सा बिजली के झटके की तरह कांप उठा।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह्ह! दादाजी... रुकिए मत... प्लीज! मेरी **चूत** फट जाएगी... आह्ह्ह... मैं... मैं बस गिरने वाली हूँ!"
*(दादाजी ने मम्मी की इस तड़प को देखकर एक शरारती मुस्कान बिखेरी
*(दादाजी ने अपनी दो उंगलियों को मम्मी की **चूत** के गीले छेद के अंदर पूरी ताकत से घुसा दिया। मम्मी का शरीर एक जोरदार झटका खाकर ऊपर उठ गया। दादाजी अपनी उंगलियों को मम्मी की **चूत** के अंदर तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे, जिससे एक गंदी और लसलसी 'स्प्लैश-स्प्लैश' की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगी।)*
**दादाजी:** "देखो... तुम्हारी **चूत** मेरी उंगलियों को कितनी कसकर जकड़ रही है! तुम कितनी हवस भरी हो रही हो, मेरी जान!"
*(दादाजी की उंगलियां मम्मी की **चूत** के अंदर इतनी तेज़ गति से चल रही थीं कि मम्मी का पूरा शरीर थरथराने लगा। उनकी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुँच गई थी और उनकी **चूत** से निकलने वाला गाढ़ा और गरम पानी (योनि रस) दादाजी की उंगलियों और पेट पर बहने लगा था। मम्मी की आँखों में एक अजीब सी मदहोशी छा गई थी और वे बार-बार अपने शरीर को ऊपर की ओर उछाल रही थीं।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह्ह! दादाजी... आह्... मैं... मैं होने वाली हूँ! मेरा सारा पानी निकल रहा है... आह्ह्ह!"
*(मम्मी का शरीर जोर से कांप उठा और उनकी **चूत** से गरम पानी की धार फूट पड़ी, जो दादाजी के हाथों और बिस्तर को भिगो रही थी। मम्मी बुरी तरह हाँफ रही थीं और उनकी आँखें पूरी तरह खुल गईं, जिनमें अब सिर्फ और सिर्फ हवस दिख रही थी। दादाजी ने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं, जो पूरी तरह से मम्मी के रस से सनी हुई थीं। उन्होंने अपनी पैंट खोलकर अपना विशाल और सख्त **लंड** बाहर निकाला और मम्मी के चेहरे के ठीक सामने लाकर रख दिया।)*
**दादाजी:** "देखा? तुम्हारी **चूत** ने तो बाढ़ ही ला दी! अब बहुत हुआ... अब मेरी बारी है। बहू, जल्दी करो... मेरा **लंड** चूसो! इसे ऐसे चाटो कि मेरी सारी हवस निकल जाए!"
*(मम्मी ने दादाजी की बात सुनते ही एक भूखी शेरनी की तरह अपना मुँह खोला। उनकी आँखों में अब शर्म का नामोनिशान नहीं था, बस अपने ससुर के उस विशालकाय **लंड** को पाने की तीव्र इच्छा थी। उन्होंने बिना देर किए दादाजी के सख्त और नसों वाले **लंड** को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे अपने मुँह के करीब लाईं।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... यह कितना बड़ा और कड़क है... मैं इसे अभी चखना चाहती हूँ।"
*(मम्मी ने अपना मुँह खोलकर दादाजी के **लंड** के ऊपरी हिस्से यानी उसके सुलगते हुए 'मुंड' को अपनी जीभ से सहलाया। दादाजी के मुँह से एक गहरी और भारी आवाज़ निकली।)*
*(दादाजी के मुँह से एक गहरी और भारी आवाज़ निकली, जैसे कोई जंगली जानवर दहाड़ रहा हो। उनके शरीर की नसें तन गईं जब मम्मी की गर्म और गीली जीभ ने उनके **लंड** के संवेदनशील हिस्से को छुआ।)*
**दादाजी:** "उफ़्फ़्फ़! आह्ह्ह... बहू! तू तो कमाल कर रही है! तेरी जीभ कितनी गर्म और मुलायम है... बिल्कुल किसी जादू की तरह!"
*(मम्मी ने अब और भी हिम्मत दिखाई। उन्होंने दादाजी के मोटे **लंड** को अपने होंठों के बीच दबा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने गले के अंदर उतारना शुरू किया। जैसे-जैसे वो गहराई तक जा रही थीं, दादाजी का शरीर झटके खाने लगा।
*(मम्मी ने अब पूरी ताकत लगाकर दादाजी के लंबे **लंड** को अपने गले की गहराई तक खींचना शुरू कर दिया। उनका मुँह पूरी तरह से भर चुका था और दादाजी का मोटा सिरा उनके गले के पिछले हिस्से को छू रहा था। मम्मी की आँखों में आँसू आ गए थे क्योंकि इतना बड़ा हिस्सा गले में जाने से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन उनकी हवस इस दर्द से कहीं ज्यादा बड़ी थी।)*
*(दादाजी का पूरा शरीर उत्तेजना से कांप रहा था। उन्होंने मम्मी के सिर को मजबूती से पकड़ा और उनके बालों में उंगलियां फंसा लीं ताकि वे और भी गहराई तक उन्हें खींच सकें।)*
**दादाजी:** "आह्ह्ह्ह! हाँ... ऐसे ही बहू! मेरे पूरे **लंड** को अपने हलक में उतार ले!"
*(दादाजी ने बहुत ही प्यार और नरमी से मम्मी के मुँह से अपना **लंड** बाहर निकाला। मम्मी की आँखें आधी खुली थीं और उनकी जुबान अभी भी उस स्वाद को महसूस कर रही थी। दादाजी ने धीरे से उन्हें बेड पर लिटाया और उनके दोनों पैरों को उठाकर हवा में फैला दिया। मम्मी की गुलाबी और बेहद गीली **चूत** अब पूरी तरह से दादाजी के सामने बेपर्दा थी।)*
*(दादाजी ने अपना वह सख्त और गर्म **लंड** सीधे मम्मी की **चूत** के छेद पर रखा और बिना अंदर डाले, उसे बाहर-बाहर रगड़ने लगे। **लंड** की रगड़ से मम्मी की **चूत** के होंठ (labia) खिंच रहे थे और सारा योनि-रस चारों तरफ फैल रहा था।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... दादाजी... क्या कर रहे हैं आप? मज़ा आ रहा है... आपके **लंड** की गर्मी मेरी **चूत** को जला रही है... प्लीज, इसे अंदर डाल दीजिये ना!"
*(मम्मी की आवाज़ कामुकता और प्यास से भरी हुई थी। उनके कूल्हे खुद-ब-खुद ऊपर उठ रहे थे ताकि दादाजी का **लंड** और बेहतर तरीके से उनकी **चूत** से रगड़ खा सके। दादाजी ने मम्मी की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ वासना और समर्पण दिख रहा था।)*
**दादाजी:** "बस थोड़ा और इंतज़ार मेरी जान... तेरी ये भीगी हुई **चूत** देख कर मेरा **लंड** पागल हो रहा है। मैं चाहता हूँ कि तेरा रोम-रोम मेरे इस बड़े **लंड** को महसूस करे।"
*(दादाजी की बात सुनकर मम्मी की उत्तेजना चरम पर पहुँच गई। उनके शरीर से पसीना टपक रहा था और उनकी सोंधी महक कमरे में फैल गई थी। दादाजी ने मम्मी के दोनों घुटनों को पकड़कर उनके कंधों तक खींच लिया, जिससे उनकी **चूत** का द्वार एकदम खुला हुआ और गहरा दिखने लगा।)*
**मम्मी:** "उफ़्फ़... आह्ह्ह! दादाजी, अब और बर्दाश्त नहीं होता... मेरा पूरा निचला हिस्सा फट रहा है... जल्दी कीजिये ना, अपने इस मोटे **लंड** को मेरी **चूत** के अंदर उतार दीजिये... मुझे आपकी ज़रूरत है!"
*(मम्मी की छटपटाहट देखकर दादाजी की भूख और बढ़ गई। उन्होंने मम्मी की कमर को मजबूती से जकड़ा और अपना वह तप्त, नसों वाला मोटा **लंड** सीधे उनकी **चूत** के प्रवेश द्वार पर जमा दिया।)*
**दादाजी:** "तो फिर ले... आज तुझे बता देता हूँ कि मेरा **लंड** कितना ताकतवर है! तैयार रह, क्योंकि जब मैं इसे अंदर उतारूँगा तो तू बस मेरा नाम पुकारेगी!"
*(दादाजी ने एक झटके के साथ अपना पूरा **लंड** मम्मी की संकरी और भीगी हुई **चूत** के अंदर गहराई तक धंसा दिया। मम्मी की आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके मुँह से एक लंबी, गूँजती हुई चीख निकली।)*
*(जैसे ही उन्होंने उंगलियों से मम्मी की **चूत** के द्वार को थोड़ा फैलाया और अंदरूनी हिस्से को सहलाना शुरू किया, मम्मी का पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह कांप उठा। दादाजी की उंगलियां अब मम्मी की **चूत** के भीतर गहराई तक जाने लगी थीं, जिससे मम्मी के शरीर से निकलने वाला रस और भी ज्यादा बहने लगा।)*
*(मम्मी की **चूत** से निकलने वाला गीलापन अब दादाजी की उंगलियों को पूरी तरह भिगो चुका था। दादाजी ने अपनी उंगलियों को मम्मी की **चूत** के अंदर तेज़ी से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, जिससे एक 'छप-छप' की आवाज़ पूरे शांत कमरे में गूँजने लगी।)*
*(मम्मी का पूरा बदन पसीने और उत्तेजना से तर-बतर हो गया था। उनकी आँखें आधी खुली रह गई थीं और वे बेकाबू होकर बिस्तर पर छटपटा रही थीं। दादाजी ने अपनी उंगलियों की गति और बढ़ा दी, जिससे मम्मी की **चूत** के अंदरूनी दीवारों पर ज़ोरदार दबाव पड़ रहा था।)*
*(उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। दादाजी ने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं और मम्मी की **चूत** से चिपके हुए उस गाढ़े और मीठे रस को देखा। फिर बिना एक पल गंवाए, उन्होंने अपना चेहरा मम्मी के पैरों के बीच ले जाकर उनकी **चूत** पर अपनी जीभ रख दी।)*
*(जैसे ही दादाजी की गरम और खुरदरी जीभ ने मम्मी की **चूत** के उस नाजुक हिस्से को चाटना शुरू किया, मम्मी के मुँह से एक बहुत तेज़ और गहरी कराह निकली। दादाजी अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के छेद के अंदर घुसा रहे थे और फिर बाहर निकालकर उसके ऊपर के मांसल हिस्से को बार-बार चाट रहे थे।)*
*(दादाजी की जीभ की हरकत इतनी तेज़ और सटीक थी कि मम्मी का दिमाग सुन्न होने लगा। वे अपनी कमर को हवा में ऊपर उठाने लगीं ताकि दादाजी उनकी **चूत** को और बेहतर तरीके से चाट सकें। दादाजी ने इस बार अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के उस छोटे से उभार (clitoris) पर टिका दिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।)*
*(मम्मी के शरीर से निकलने वाला तरल पदार्थ अब दादाजी के चेहरे पर लग रहा था। दादाजी ने अपनी नाक को भी मम्मी की **चूत** के करीब ले जाकर उसकी सोंधी और उत्तेजक खुशबू को गहराई से महसूस किया। वे अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के अंदर गहरे तक ले जा रहे थे
*(मम्मी का पूरा शरीर अब थरथराने लगा था। दादाजी की जीभ की रफ़्तार इतनी बढ़ गई थी कि मम्मी की **चूत** से निकलने वाला रस अब एक धार बनकर बहने लगा था। दादाजी ने अपनी दोनों हथेलियों से मम्मी के नितंबों (buttocks) को पकड़ लिया और उन्हें ऊपर की ओर खींच दिया ताकि उनकी **चूत** का हर हिस्सा दादाजी की जीभ के लिए पूरी तरह खुल जाए।)*
*(दादाजी अब अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के छेद के अंदर किसी मशीन की तरह लगातार अंदर-बाहर कर रहे थे, जिससे एक अजीब सी लसलसी आवाज़ आ रही थी। मम्मी का दम घुटने लगा था और वे बस पागलों की तरह बेड की चादर को अपने हाथों से जकड़े हुए थीं।)*
*(मम्मी की सांसें अब उखड़ने लगी थीं। उनके होंठ सूखे जा रहे थे और आँखों में केवल वासना का समंदर तैर रहा था। दादाजी ने अपनी जीभ को मम्मी की **चूत** के अंदर और गहरा घुसाया और फिर धीरे से सिर उठाकर मम्मी की आँखों में देखा।)*
**दादाजी:** "आह... तुम्हारी **चूत** कितनी स्वादिष्ट है... इतना मीठा रस निकल रहा है जैसे मैं शहद पी रहा हूँ। आज तो तुम्हें यहीं खत्म कर दूँगा।"
*(मम्मी ने दर्द और सुख के मिले-जुले अहसास के साथ अपनी कमर को दादाजी के चेहरे की तरफ और ज़ोर से धकेला।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... दादाजी... और ज़ोर से... मेरी **चूत** पागल हो रही है। आपकी जीभ मुझे मार डालेगी..."
*(मम्मी की आवाज़ अब एक बेकाबू चीख में बदल चुकी थी। उनका पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो चुका था और उनकी आँखें कामवासना के मारे आधी बंद हो गई थीं। दादाजी ने जब उनकी **चूत** के किनारों को अपनी उंगलियों से खींचा, तो मम्मी का पूरा निचला हिस्सा बिजली के झटके की तरह कांप उठा।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह्ह! दादाजी... रुकिए मत... प्लीज! मेरी **चूत** फट जाएगी... आह्ह्ह... मैं... मैं बस गिरने वाली हूँ!"
*(दादाजी ने मम्मी की इस तड़प को देखकर एक शरारती मुस्कान बिखेरी
*(दादाजी ने अपनी दो उंगलियों को मम्मी की **चूत** के गीले छेद के अंदर पूरी ताकत से घुसा दिया। मम्मी का शरीर एक जोरदार झटका खाकर ऊपर उठ गया। दादाजी अपनी उंगलियों को मम्मी की **चूत** के अंदर तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे, जिससे एक गंदी और लसलसी 'स्प्लैश-स्प्लैश' की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगी।)*
**दादाजी:** "देखो... तुम्हारी **चूत** मेरी उंगलियों को कितनी कसकर जकड़ रही है! तुम कितनी हवस भरी हो रही हो, मेरी जान!"
*(दादाजी की उंगलियां मम्मी की **चूत** के अंदर इतनी तेज़ गति से चल रही थीं कि मम्मी का पूरा शरीर थरथराने लगा। उनकी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुँच गई थी और उनकी **चूत** से निकलने वाला गाढ़ा और गरम पानी (योनि रस) दादाजी की उंगलियों और पेट पर बहने लगा था। मम्मी की आँखों में एक अजीब सी मदहोशी छा गई थी और वे बार-बार अपने शरीर को ऊपर की ओर उछाल रही थीं।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह्ह! दादाजी... आह्... मैं... मैं होने वाली हूँ! मेरा सारा पानी निकल रहा है... आह्ह्ह!"
*(मम्मी का शरीर जोर से कांप उठा और उनकी **चूत** से गरम पानी की धार फूट पड़ी, जो दादाजी के हाथों और बिस्तर को भिगो रही थी। मम्मी बुरी तरह हाँफ रही थीं और उनकी आँखें पूरी तरह खुल गईं, जिनमें अब सिर्फ और सिर्फ हवस दिख रही थी। दादाजी ने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं, जो पूरी तरह से मम्मी के रस से सनी हुई थीं। उन्होंने अपनी पैंट खोलकर अपना विशाल और सख्त **लंड** बाहर निकाला और मम्मी के चेहरे के ठीक सामने लाकर रख दिया।)*
**दादाजी:** "देखा? तुम्हारी **चूत** ने तो बाढ़ ही ला दी! अब बहुत हुआ... अब मेरी बारी है। बहू, जल्दी करो... मेरा **लंड** चूसो! इसे ऐसे चाटो कि मेरी सारी हवस निकल जाए!"
*(मम्मी ने दादाजी की बात सुनते ही एक भूखी शेरनी की तरह अपना मुँह खोला। उनकी आँखों में अब शर्म का नामोनिशान नहीं था, बस अपने ससुर के उस विशालकाय **लंड** को पाने की तीव्र इच्छा थी। उन्होंने बिना देर किए दादाजी के सख्त और नसों वाले **लंड** को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे अपने मुँह के करीब लाईं।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... यह कितना बड़ा और कड़क है... मैं इसे अभी चखना चाहती हूँ।"
*(मम्मी ने अपना मुँह खोलकर दादाजी के **लंड** के ऊपरी हिस्से यानी उसके सुलगते हुए 'मुंड' को अपनी जीभ से सहलाया। दादाजी के मुँह से एक गहरी और भारी आवाज़ निकली।)*
*(दादाजी के मुँह से एक गहरी और भारी आवाज़ निकली, जैसे कोई जंगली जानवर दहाड़ रहा हो। उनके शरीर की नसें तन गईं जब मम्मी की गर्म और गीली जीभ ने उनके **लंड** के संवेदनशील हिस्से को छुआ।)*
**दादाजी:** "उफ़्फ़्फ़! आह्ह्ह... बहू! तू तो कमाल कर रही है! तेरी जीभ कितनी गर्म और मुलायम है... बिल्कुल किसी जादू की तरह!"
*(मम्मी ने अब और भी हिम्मत दिखाई। उन्होंने दादाजी के मोटे **लंड** को अपने होंठों के बीच दबा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने गले के अंदर उतारना शुरू किया। जैसे-जैसे वो गहराई तक जा रही थीं, दादाजी का शरीर झटके खाने लगा।
*(मम्मी ने अब पूरी ताकत लगाकर दादाजी के लंबे **लंड** को अपने गले की गहराई तक खींचना शुरू कर दिया। उनका मुँह पूरी तरह से भर चुका था और दादाजी का मोटा सिरा उनके गले के पिछले हिस्से को छू रहा था। मम्मी की आँखों में आँसू आ गए थे क्योंकि इतना बड़ा हिस्सा गले में जाने से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन उनकी हवस इस दर्द से कहीं ज्यादा बड़ी थी।)*
*(दादाजी का पूरा शरीर उत्तेजना से कांप रहा था। उन्होंने मम्मी के सिर को मजबूती से पकड़ा और उनके बालों में उंगलियां फंसा लीं ताकि वे और भी गहराई तक उन्हें खींच सकें।)*
**दादाजी:** "आह्ह्ह्ह! हाँ... ऐसे ही बहू! मेरे पूरे **लंड** को अपने हलक में उतार ले!"
*(दादाजी ने बहुत ही प्यार और नरमी से मम्मी के मुँह से अपना **लंड** बाहर निकाला। मम्मी की आँखें आधी खुली थीं और उनकी जुबान अभी भी उस स्वाद को महसूस कर रही थी। दादाजी ने धीरे से उन्हें बेड पर लिटाया और उनके दोनों पैरों को उठाकर हवा में फैला दिया। मम्मी की गुलाबी और बेहद गीली **चूत** अब पूरी तरह से दादाजी के सामने बेपर्दा थी।)*
*(दादाजी ने अपना वह सख्त और गर्म **लंड** सीधे मम्मी की **चूत** के छेद पर रखा और बिना अंदर डाले, उसे बाहर-बाहर रगड़ने लगे। **लंड** की रगड़ से मम्मी की **चूत** के होंठ (labia) खिंच रहे थे और सारा योनि-रस चारों तरफ फैल रहा था।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... दादाजी... क्या कर रहे हैं आप? मज़ा आ रहा है... आपके **लंड** की गर्मी मेरी **चूत** को जला रही है... प्लीज, इसे अंदर डाल दीजिये ना!"
*(मम्मी की आवाज़ कामुकता और प्यास से भरी हुई थी। उनके कूल्हे खुद-ब-खुद ऊपर उठ रहे थे ताकि दादाजी का **लंड** और बेहतर तरीके से उनकी **चूत** से रगड़ खा सके। दादाजी ने मम्मी की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ वासना और समर्पण दिख रहा था।)*
**दादाजी:** "बस थोड़ा और इंतज़ार मेरी जान... तेरी ये भीगी हुई **चूत** देख कर मेरा **लंड** पागल हो रहा है। मैं चाहता हूँ कि तेरा रोम-रोम मेरे इस बड़े **लंड** को महसूस करे।"
*(दादाजी की बात सुनकर मम्मी की उत्तेजना चरम पर पहुँच गई। उनके शरीर से पसीना टपक रहा था और उनकी सोंधी महक कमरे में फैल गई थी। दादाजी ने मम्मी के दोनों घुटनों को पकड़कर उनके कंधों तक खींच लिया, जिससे उनकी **चूत** का द्वार एकदम खुला हुआ और गहरा दिखने लगा।)*
**मम्मी:** "उफ़्फ़... आह्ह्ह! दादाजी, अब और बर्दाश्त नहीं होता... मेरा पूरा निचला हिस्सा फट रहा है... जल्दी कीजिये ना, अपने इस मोटे **लंड** को मेरी **चूत** के अंदर उतार दीजिये... मुझे आपकी ज़रूरत है!"
*(मम्मी की छटपटाहट देखकर दादाजी की भूख और बढ़ गई। उन्होंने मम्मी की कमर को मजबूती से जकड़ा और अपना वह तप्त, नसों वाला मोटा **लंड** सीधे उनकी **चूत** के प्रवेश द्वार पर जमा दिया।)*
**दादाजी:** "तो फिर ले... आज तुझे बता देता हूँ कि मेरा **लंड** कितना ताकतवर है! तैयार रह, क्योंकि जब मैं इसे अंदर उतारूँगा तो तू बस मेरा नाम पुकारेगी!"
*(दादाजी ने एक झटके के साथ अपना पूरा **लंड** मम्मी की संकरी और भीगी हुई **चूत** के अंदर गहराई तक धंसा दिया। मम्मी की आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके मुँह से एक लंबी, गूँजती हुई चीख निकली।)*


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