Thread Rating:
  • 5 Vote(s) - 2 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery SASUR AUR BAHU KE KAMUK KISSE SHORT GIF (LUND TIGHT)
#15
3333333333333333***************************************************************

*(मम्मी ने पापा जी की बात मान ली। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और पूरी तरह से उस अहसास में डूब गईं। उन्होंने अपना मुँह थोड़ा खोला और उस मोटे, मांसल लंड के सिरे को अपने होंठों के बीच दबा लिया। जैसे ही उनका मुँह उस गरम और चिकनी सुध के संपर्क में आया, उनके गले से एक दबी हुई आवाज़ निकली।)*

**मम्मी:** (मुँह में लंड दबाए हुए, अस्पष्ट स्वर में) "म्म्म... म्म्म्म..."

*(मम्मी के मुँह के भीतर उस गर्म और सख्त लंड के अहसास ने उन्हें पूरी तरह से मदहोश कर दिया था। उन्होंने धीरे-धीरे अपना मुँह खोलना शुरू किया और उस मोटे लंड को अपने होंठों के बीच गहराई तक लेना चाहा। जैसे-जैसे वह लंड उनके मुँह के अंदर जा रहा था, पापा जी की आँखों में वासना की चमक और बढ़ गई।)*

**पापा जी:** (एक गहरी और भारी आह भरते हुए) "आह्ह्ह... हाँ बहू... इसी तरह... और गहरा ले इसे... पूरा निगल ले मेरा लंड!"

*(मम्मी ने जैसे ही लंड को अपने मुँह के अंदर और गहराई तक खींचा, उनके गले के पिछले हिस्से में एक दबाव महसूस हुआ। वह इतना मोटा था कि उनके मुँह के कोने से लार टपकने लगी। पापा जी का आनंद चरम पर पहुँच रहा था, उन्होंने मम्मी के बालों को मजबूती से पकड़ लिया ताकि वह और गहराई तक उसे चूस सकें।)*

**पापा जी:** (दाँत पीसते हुए और अपनी कमर को हल्का सा हिलाते हुए) "आह्ह्ह... शाबाश बहू! एकदम सही तरीके से पकड़ रही है। तेरा ये छोटा सा मुँह मेरे इस बड़े लंड को कैसे संभाल रहा है, देख के ही मेरा मन मचला रहा है। और गहरा... और गहरा ले इसे!"

*(मम्मी के गले में अब काफी बेचैनी होने लगी थी क्योंकि लंड उनके गले के द्वार तक पहुँच चुका था। लेकिन पापा जी के हाथों की पकड़ और उनकी उत्तेजित आवाज़ सुनकर उनमें भी एक अजीब सी प्यास जाग उठी थी। उन्होंने अपनी दोनों हथेलियों से पापा जी के अंडकोषों को सहलाया और फिर अपना मुँह और भी ज़्यादा खोलकर उस मोटे लंड को अंदर खींच लिया।)*
[Image: porngif-5f3d15c34756411fd5448f5729ea2456.gif]
**मम्मी:** (गले के अंदर लंड फँसे होने के कारण उनकी आवाज़ पूरी तरह दब गई थी) "ग्ग्लु... घ्ल्ल्ल्... म्म्म्म..."

*(मम्मी ने अब अपनी जीभ से लंड के निचले हिस्से को ऊपर की ओर रगड़ना शुरू कर दिया, जिससे पापा जी की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।)*

*(मम्मी की जीभ की वो रगड़ और उनके मुँह की गरमाहट ने पापा जी को पागल कर दिया। उनके शरीर की नसें तन गईं और पसीने की बूंदें उनके माथे पर उभर आईं। उन्होंने मम्मी के सिर को कसकर जकड़ लिया, मानो वो खुद को रोक नहीं पा रहे हों।)*

**पापा जी:** (बड़ी मुश्किल से शब्द निकालते हुए, भारी सांसों के साथ) "आह्ह्ह... बहू... रुक मत! बस ऐसे ही... मेरी जान निकाल देगी तू आज! थूक के साथ इसे और फिसलाना... आह््ह्ह!"

*(मम्मी ने अब समझ लिया था कि पापा जी को किस चीज़ से सबसे ज्यादा मजा आ रहा है। उन्होंने अपने मुँह के अंदर जमा हुई लार और थूक को उस मोटे लंड के चारों ओर फैलाना शुरू कर दिया। अब वह लंड उनके मुँह के अंदर मक्खन की तरह फिसल रहा था। मम्मी ने अपनी जीभ को लंड की नसों के ऊपर तेज़ी से चलाना शुरू किया और फिर झटके से उसे अंदर-बाहर करना शुरू किया।)*

**पापा जी:** (अपनी आँखें बंद करके पीछे की ओर झुकते हुए) "ओह्ह्ह... आह््ह्ह! ये थूक... ये कितना चिकना है! बहू, तू तो कमाल कर रही है... ऐसा लग रहा है जैसे कोई मशीन काम कर रही हो। बस... बस ऐसे ही करती रह!"

*(मम्मी की यह हरकत देखकर पापा जी का संयम जवाब देने लगा था। उनके लंड की मोटाई और गर्मी मम्मी के गले में महसूस हो रही थी। मम्मी ने अब अपनी आँखों को थोड़ा खोलकर पापा जी के चेहरे की ओर देखा, जहाँ वासना और दर्द का एक मिला-जुला भाव था। उन्होंने अपनी जीभ को लंड के ठीक नीचे वाले हिस्से पर जोर से चलाया और फिर अचानक से लंड को अपने मुँह के अंदर और भी तेजी से खींचना शुरू कर दिया।)*

**पापा जी:** (अपने हाथ से बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ते हुए और अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका देते हुए) "आह्ह्ह! ओ तेरी... बहू! ये क्या कर रही है? तू तो मुझे अभी इसी वक्त खत्म कर देगी! इतनी तेज... इतनी गहराई में... आह््ह्ह!"


*(दादाजी की उम्र के बावजूद, उनका शरीर अभी भी काफी मजबूत था, लेकिन मम्मी की इस बेतहाशा भूख ने उन्हें हिला कर रख दिया था। जब मम्मी ने लंड को गहराई तक खींचा, तो दादाजी के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उनकी पकड़ मम्मी के बालों पर और भी सख्त हो गई।)*

**दादाजी:** (भारी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ में, दांत पीसते हुए) "उफ़्फ़... बहू! तू तो पागल कर देगी मुझे! इतनी ताकत... इतना जोश... मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तू मेरे साथ ऐसा करेगी। आह्ह्ह!"

*(दादाजी की उत्तेजना अब चरम सीमा पर पहुँच रही थी। मम्मी की जीभ की हर हरकत और उनके मुँह की गर्माहट दादाजी के दिमाग पर हावी हो रही थी। उन्होंने महसूस किया कि मम्मी अब सिर्फ चूस नहीं रही थीं, बल्कि बहुत ही कुशलता से उनके लंड के ऊपरी हिस्से को अपनी जीभ से सहला रही थीं। दादाजी का पूरा शरीर थरथराने लगा और उनकी साँसें बहुत भारी हो गईं।)*

**दादाजी:** (अपना सिर पीछे की ओर झुकाते हुए और अपनी आँखें सिकोड़ते हुए) "आह्ह्ह... बहू! तू... तू तो जादूगरनी निकली! तेरे मुँह की ये गर्मी... ये नमी... मेरा बुरा हाल कर रही है। बस... बस थोड़ी देर और... मैं बस निकलने ही वाला हूँ! आह््ह्ह!"

*(जैसे ही दादाजी को लगा कि वो बस गिरने ही वाले हैं, उन्होंने खुद को संभाला। उन्होंने धीरे से अपना लंड मम्मी के मुँह से बाहर निकाला, जिससे एक गीली 'पॉप' जैसी आवाज़ आई। दादाजी की आँखों में अब केवल वासना की चमक थी। उन्होंने मम्मी के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनकी आँखों में देखते हुए बोले।)*

**दादाजी:** (अपनी भारी और थकी हुई आवाज़ में, लेकिन आँखों में एक अजीब सी प्यास लिए) "बस... रुक जा बहू! अभी नहीं... अभी तो खेल शुरू हुआ है। तूने तो मेरा आधा दम निकाल दिया, लेकिन अब मुझे तुझे पूरी तरह से देखना है।"

*(दादाजी की बातों में एक अधिकार और एक गहरी भूख झलक रही थी। उन्होंने बेड के पास रखे छोटे लैंप को जलाया, जिसकी हल्की पीली रोशनी कमरे में फैल गई। दादाजी ने धीरे-धीरे मम्मी के बचे हुए कपड़ों को उनके शरीर से अलग करना शुरू किया। जैसे-जैसे कपड़े हट रहे थे, मम्मी का सुडौल और चमकदार बदन रोशनी में और भी खिल उठा।)*

**दादाजी:** (मम्मी के बदन को निहारते हुए, जिनकी नज़रें उनके अंगों पर टिकी हुई थीं) "वाह बहू... तू तो बिल्कुल किसी अप्सरा जैसी लग रही है। इतने सालों बाद आज मेरी आँखों ने ऐसा नज़ारा देखा है। अब इधर लेट जा..."

*(दादाजी की आवाज़ में एक आदेश था जिसे टाला नहीं जा सकता था। उन्होंने हल्के हाथों से मम्मी को इशारा किया कि वे बेड के बीचों-बीच लेट जाएँ। मम्मी, जो पहले से ही कामुकता के नशे में चूर थीं, बिना किसी हिचकिचाहट के बेड पर लेट गईं। उनकी खुली हुई देह उस मद्धम रोशनी में और भी आकर्षक लग रही थी। दादाजी धीरे-धीरे उनके पास आए और उनके बगल में बैठ गए।)*

**दादाजी:** (मम्मी के उभरे हुए स्तनों को घूरते हुए और अपनी उंगलियों को उनके पेट पर फेरते हुए) "इतना सुंदर बदन... और इतनी शरारती आँखें। बता बहू, क्या तू हमेशा से ऐसी ही थी, या आज मेरे लिए खास तैयार हुई है?"

*(मम्मी ने अपनी पलकें झपकाईं और एक शरारती मुस्कान के साथ दादाजी की तरफ देखा। उनकी साँसें अभी भी तेज चल रही थीं और उनके शरीर की गर्मी कमरे के तापमान को बढ़ा रही थी। उन्होंने धीरे से अपना हाथ दादाजी के घुटने पर रखा और अपनी उंगलियों से उसे सहलाने लगीं।)*

**मम्मी:** (धीमी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में) "मैं कैसी भी रहूँ... लेकिन आज रात मैं सिर्फ आपकी हूँ। आप जैसा चाहेंगे, मैं वैसा ही करूँगी। आखिर आपको खुश रखना ही तो मेरा मकसद है ना?"

*(मम्मी ने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया, जिससे उनके नितंब बेड पर उभर आए। दादाजी की नज़रें अब उनके शरीर के निचले हिस्सों पर टिक गई थीं।)*
*(दादाजी की आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ एक भूखे शिकारी की चमक थी। उन्होंने मम्मी के सुडौल बदन को ऊपर से नीचे तक ऐसे देखा जैसे वे उसकी एक-एक इंच की नुमाइश कर रहे हों। उन्होंने अपना हाथ मम्मी की जाँघों के बीच ले जाते हुए सीधे उनकी गीली जगह की ओर बढ़ाया।)*

**दादाजी:** (एक गंदी और गहरी हंसी हंसते हुए) "देख बहू, तेरी ये जो गीली चूत है ना... ये कितनी ज्यादा पानी छोड़ रही है। तेरा लंड तो अभी मेरे मुँह में था, लेकिन अब मुझे तेरी इस चूत के अंदर अपना मोटा लंड उतारना है। देख कैसे फड़क रही है तेरी योनि!"

*(दादाजी की इन अश्लील और सीधी बातों को सुनकर मम्मी का चेहरा एकदम लाल हो गया। उन्होंने झेंपते हुए अपनी आँखें झुका लीं और अपना हाथ अपने चेहरे पर रख लिया, जैसे वह शर्म से छिपना चाहती हों। लेकिन उनकी यह शर्मीली अदा दादाजी के भीतर की वासना को और भड़का रही थी।)*

**मम्मी:** (धीमी और लड़खड़ाती आवाज़ में, शर्म से डूबी हुई) "अरे... आप भी ना... क्या बोल रहे हैं... इतनी गंदी बातें... कोई सुन लेगा तो क्या सोचेगा..."

*(मम्मी ने अपनी चादर से खुद को ढंकने की कोशिश की, लेकिन दादाजी ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोक दिया।)*

*(दादाजी ने मम्मी के हाथ को जोर से पकड़ लिया और उन्हें चादर के नीचे से खींचकर बाहर निकाल दिया। उनकी आँखों में एक जंगलीपन था, जैसे उन्हें मम्मी की यह शर्मिंदगी और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रही हो। उन्होंने मम्मी के कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं।)*

**दादाजी:** (एक कड़क और भारी आवाज़ में) "कोई नहीं सुनेगा बहू! इस बंद कमरे में सिर्फ मैं हूँ और तू है। और तुझे पता है? जब तू ऐसे शर्माती है ना, तो तेरी ये गुलाबी चूत और भी ज्यादा रसीली लगने लगती है। मुझे तेरी ये शर्म बहुत पसंद आ रही है, इसे मिटाने में मुझे बड़ा मजा आएगा।"

उनकी नसों में खून तेज़ी से दौड़ रहा था। उन्होंने मम्मी के ऊपर चढ़ते हुए उनके दोनों पैरों को फैला दिया और अपने भारी शरीर का भार उन पर डाल दिया। मम्मी की हल्की सी सिसकारी निकली क्योंकि दादाजी का वजन उन्हें दबा रहा था, लेकिन उनकी उत्तेजना इस दबाव से कम होने के बजाय बढ़ रही थी।)*

*(दादाजी ने अपना लंड मम्मी की गीली और तंग चूत के बिल्कुल छेद पर टिका दिया। लंड की गरमाहट और नमी महसूस करते ही मम्मी का पूरा बदन थरथरा उठा।)*

**दादाजी:** (साँस फूलते हुए और मम्मी की गर्दन पर दांतों से हल्का सा काटते हुए) "आह..."

*(दादाजी ने अपना लंड मम्मी की चूत के द्वार पर रगड़ना शुरू कर दिया। लंड की चिकनाई और मम्मी की प्राकृतिक गीलापन की वजह से वह फिसल रहा था, लेकिन उसका दबाव इतना गहरा था कि मम्मी की चीख निकल गई। दादाजी ने अपने दोनों हाथों से मम्मी की कमर को कसकर जकड़ लिया ताकि वे हिल न सकें।)*

**मम्मी:** (दर्द और सुख के मिले-जुले अहसास के साथ चिल्लाते हुए) "आह्ह! दादाजी... रुको... बहुत बड़ा है... ऐसा लग रहा है जैसे फट जाएगी मेरी चूत... आह्ह!"

*(मम्मी की दर्द भरी सिसकारी ने दादाजी की वासना को चरम पर पहुँचा दिया। उन्होंने मम्मी के चेहरे की लाली और उनकी आंखों में आंसू देखे, जिससे उन्हें और भी ज़्यादा जोश आया। उन्होंने मम्मी की कमर को और मजबूती से पकड़ा और अपने कूल्हों को पीछे खींचा, फिर पूरी ताकत लगाकर अपना मोटा लंड मम्मी की तंग चूत के अंदर धंसा दिया।)*

*(जैसे ही लंड पूरी तरह अंदर गया, मम्मी का बदन धनुष की तरह तन गया और उनकी एक लंबी, तीखी चीख कमरे की दीवारों से टकरा गई।)*

**मम्मी:** (चीखते हुए और अपनी उंगलियां दादाजी की पीठ में गाड़ते हुए) "आआआह्ह्ह! दादाजी... मर गई... बहुत दर्द हो रहा है... उफ़्फ़! आपने तो पूरा अंदर भर दिया..."

*(लंड के अंदर जाने के बाद जो खिंचाव और भरा हुआ अहसास मम्मी को हुआ, उसने उन्हें सुन्न कर दिया। दादाजी ने रुकने के बजाय, धीरे-धीरे अपने कूल्हों को आगे बढ़ाना शुरू किया। हर बार जब वो अंदर जाते, मम्मी का निचला हिस्सा बिस्तर पर जोर से टकराता। दादाजी की सांसें अब बेकाबू हो चुकी थीं और उनकी छाती मम्मी के स्तनों से रगड़ खा रही थी।)*

**दादाजी:** (भारी और हाँफती हुई आवाज़ में, मम्मी के कान के पास फुसफुसाते हुए) "देख... कितना टाइट है तू... मेरा लंड तेरी चूत में फँस गया है... आहhh... कितनी गर्मी है यहाँ अंदर..."

*(मम्मी की आवाज़ में अब डर कम और समर्पण ज़्यादा झलक रहा था। दादाजी की रफ़्तार इतनी तेज़ हो गई थी कि मम्मी का पूरा शरीर झटकों के साथ हिल रहा था। उनके होंठों से निकलने वाली आवाज़ें अब सिर्फ सिसकारियाँ नहीं, बल्कि एक अजीब सी पुकार बन गई थीं।)*

*(दादाजी ने जब मम्मी के कान के पास अपनी गरम साँसें छोड़ीं, तो मम्मी का शरीर थरथरा उठा। उन्होंने अपनी आँखों से आँसू पोंछते हुए, लड़खड़ाती आवाज़ में कहा...)*

**मम्मी:** (अपनी आँखें मूँदते हुए और पूरी तरह दादाजी के वश में होते हुए) "आह्ह... पापा जी... ओहो... पापा जी... आप... आप मुझे मार डालेंगे... आह्ह! बहुत ज़ोर से..."
[Image: porngif-5ff5fc0fae108dbbfe12f2d56086c65d.gif]
*(पापा जी यानी दादाजी ने जैसे ही मम्मी के मुँह से 'पापा जी' शब्द सुना, उनकी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुँच गई। बहू के मुँह से ये शब्द सुनकर उनके भीतर की दबी हुई कामुकता जाग उठी। उन्होंने मम्मी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया ताकि वो इधर-उधर न हिल सकें और अपनी रफ़्तार को और भी हिंसक बना दिया।)*

*(अब तक जो क्रिया धीमी लग रही थी, वह एकदम से उन्मत्त हो गई। दादाजी का भारी शरीर मम्मी के छोटे से शरीर पर हावी हो रहा था। हर प्रहार के साथ मम्मी का चेहरा बिस्तर के तकिए में दब रहा था और उनके स्तन हवा में बुरी तरह उछल रहे थे।)*


*(दादाजी ने मम्मी की टांगों को और ज्यादा फैला दिया और उसकी गहराई वाले चूत को अपनी उँगलियों से सहलाया। मम्मी की सांसें तेज हो गईं।)*

**दादाजी:** (मुहंमरी आवाज में) "हाँ, यही है... यही है मेरा स्वर्ग... तेरी यह गहराई वाली चूत... मैं इसे भर दूँगा... भर दूँगा अपने लंड से।"

*(दादाजी ने अपने लंड को मम्मी के गीले चूत के बाहर से रगड़ा और फिर धीरे-धीरे उसे अंदर ठूंसा। मम्मी की सांसे रुक गईं।)*

*(जैसे ही दादाजी का मोटा लंड पूरी तरह मम्मी की तंग और गीली चूत के अंदर गया, मम्मी के मुँह से एक दबी हुई चीख निकली। उसका शरीर थरथरा उठा और उसने अनजाने में ही दादाजी के कंधों को कसकर पकड़ लिया।)*

**मम्मी:** (हाँफते हुए और दर्द व मजे के मिले-जुले अहसास के साथ) "आह्ह्ह... पापाजी... ये... ये बहुत बड़ा है... आह्ह्ह! बहुत दर्द हो रहा है... पर... आह्ह्ह!"

*(दादाजी ने उसकी आँखों में आँखें डालकर एक कुटिल मुस्कान दी। उसने मम्मी के चेहरे को अपने करीब खींचा और उसके कान के पास फुसफुसाया।)*


*(दादाजी ने अब पूरी ताकत से वार करना शुरू कर दिया। उनके हर झटके के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर टकरा रहा था। कमरे में केवल उनके शरीर के टकराने की आवाज़ और मम्मी की बेकाबू होती सिसकियाँ गूँज रही थीं।)*

**मम्मी:** (पागलपन की हद तक हाँफते हुए और सिर पीछे की ओर झुकाते हुए) "आह्ह्ह! पापाजी... आह्ह्ह! मेरी जान निकल जाएगी... इतना गहरा... आह्ह्ह! मुझे... मुझे बहुत मज़ा आ रहा है... आह्ह्ह!"

*(मम्मी की उंगलियां चादर को इतनी जोर से जकड़ चुकी थीं कि उसके नाखून सफेद पड़ गए थे। दादाजी ने देखा कि मम्मी का चेहरा कामुकता से लाल हो चुका था और उसकी आँखें आधी खुली रह गई थीं।)*

*(दादाजी ने मम्मी की इस हालत को देखकर अपनी रफ्तार और भी बढ़ा दी। अब वे बिना रुके, पागलों की तरह उसके अंदर अपने लंड को उतार-चढ़ा रहे थे। हर प्रहार के साथ मम्मी का शरीर हवा में उछल रहा था और उसके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें अब काबू से बाहर हो चुकी थीं।)*

**दादाजी:** (पसीने से तरबतर होकर और गुर्राते हुए) "बोल! बोल क्या चाहती है? क्या तुझे और चाहिए? बोल!"

*(दादाजी ने अचानक अपनी गति धीमी की और मम्मी के संवेदनशील हिस्से पर अपने लंड के ऊपरी हिस्से से रगड़ना शुरू कर दिया, जिससे मम्मी का पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह कांप उठा।)*

*(मम्मी की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वो दर्द के नहीं, बल्कि चरम सुख के थे। दादाजी की रगड़ उसे पागल कर रही थी। उसने अपनी टाँगों को और भी कसकर दादाजी की कमर के चारों ओर लपेट लिया, मानो वह उन्हें खुद के और करीब खींचना चाहती हो।)*
[Image: porngif-0c3f22261352e5910a60df6c341be24f.gif]
**मम्मी:** (बेकाबू होकर चिल्लाते हुए) "हाँ! हाँ पापाजी! और... और ऐसा ही कीजिये! आह्ह्ह! मुझे बर्बाद कर दीजिये... आह्ह्ह! मैं मर जाऊँगी... मुझे और गहराई तक चाहिए! आह्ह्ह!"

*(मम्मी की यह पुकार दादाजी के भीतर के जानवर को पूरी तरह जगा चुकी थी। उनकी आँखों में वासना की एक अजीब सी चमक आ गई। उन्होंने मम्मी की कमर को अपने हाथों से इतनी जोर से पकड़ा कि वहाँ नीले निशान पड़ सकते थे, और फिर एक साथ तीन-चार बेहद गहरे और हिंसक झटके दिए।)*

**दादाजी:** (गरजते हुए) "तो ले! ले सारा सुख! आज तुझे बता दूँगा कि असली मर्द क्या होता है!"

*(कमरे में 'छपाक-छपाक' की आवाजें तेज हो गईं क्योंकि मम्मी की अत्यधिक गीली चूत और दादाजी के पसीने ने मिलकर माहौल को और भी कामुक बना दिया था। मम्मी का शरीर अब नियंत्रण खो चुका था, वह बस झटकों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी।)*

*(मम्मी का गला अब पूरी तरह बैठ चुका था, वह सिर्फ ऊँची और टूटी हुई आवाज़ों में सिसक रही थी। उसके शरीर का निचला हिस्सा अब पूरी तरह से दादाजी के नियंत्रण में था। वह बस एक खिलौना बनकर रह गई थी जिसे दादाजी अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल कर रहे थे।)*

**मम्मी:** (अपनी आँखें घुमाते हुए और शरीर को ढीला छोड़ते हुए) "आह्ह्ह... पापाजी... आह्ह्ह! मेरा... मेरा सब कुछ... आप ही का है... आह्ह्ह! मुझे खत्म कर दीजिये... आह्ह्ह!"


*(भले ही दादाजी ने प्यार दिखाया था, लेकिन उनके अंदर का पुरुष अभी भी पूरी तरह जागृत था। मम्मी के शरीर की खुशबू और उसकी गीली चूत की महक ने उन्हें फिर से उत्तेजित कर दिया। उन्होंने मम्मी को धीरे से पलटा और उसे फिर से घुटनों और कोहनियों के बल टिका दिया, ताकि उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से ऊपर की ओर उभरा हुआ दिखे।)*

*(मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से समर्पण कर चुका था। उसने खुद को उसी अवस्था में स्थिर कर लिया, मानो वह जानती हो कि आगे क्या होने वाला है। दादाजी उसके ठीक पीछे घुटनों के बल बैठ गए और अपना गरम, मोटा और गीला लंड उसकी चूत के द्वार पर टिका दिया।)*

**दादाजी:** (एक गहरी और भारी साँस लेते हुए) "तू कितनी भी प्यारी क्यों न लगे..."
[Image: 39182]

*(दादाजी ने बिना किसी देरी के अपना पूरा भार आगे बढ़ाया और अपना विशाल, गरम लंड एक ही झटके में मम्मी की तंग और गीली चूत के अंदर गहराई तक उतार दिया। मम्मी का शरीर झटके से आगे की ओर झुका और उसके मुँह से एक दर्द भरी लेकिन आनंदित चीख निकल गई।)*

**मम्मी:** "आह्ह्ह्ह! पापाजी... उफ़्फ़! कितना गहरा... आह्ह्ह!"

*(लंड के अंदर जाते ही मम्मी का पूरा शरीर थरथराने लगा। दादाजी ने उसे कसकर पकड़ लिया ताकि वह संतुलन न खो दे। उन्होंने रुकने के बजाय, धीरे-धीरे लेकिन लयबद्ध तरीके से पीछे खींचना और फिर से अंदर धकेलना शुरू किया। हर बार जब उनका भारी लंड मम्मी की चूत की दीवारों को छूता, वह गीली और संकुचित होकर उसे जकड़ लेती।)*

*(कमरे में फिर से वही 'चप-चप' की आवाज़ें गूँजने लगीं। दादाजी का हर झटका अब पहले से ज्यादा नियंत्रित था, लेकिन उसमें एक गहरा जुनून था। वे मम्मी के उभारते हुए नितंबों को अपने हाथों से दबा रहे थे, जिससे मांस में अंगूठे के निशान बन रहे थे।)*

**दादाजी:** (साँसें फूलते हुए और भारी स्वर में) "देख... देख कैसे मेरा लंड तेरी इस छोटी सी चूत में समा रहा है... तू कितनी टाइट है मेरी बच्ची..."

*(दादाजी ने अपनी गति बढ़ा दी। अब उनके झटके धीमे नहीं रह गए थे। वे अपनी पूरी ताकत लगाकर मम्मी के कूल्हों पर प्रहार कर रहे थे। हर बार जब उनका लंड अंदर जाता, मम्मी का पूरा शरीर आगे की तरफ उछलता और फिर दादाजी के अगले झटके से वापस पीछे की ओर दब जाता।)*

*(मम्मी की हालत खराब हो रही थी। उसकी आँखें आधी खुली थीं और वह बेसुध होकर बस आहें भर रही थी। उसके हाथ बिस्तर की चादर को इतनी जोर से पकड़े हुए थे कि उसकी उंगलियाँ सफेद पड़ गई थीं।)*

*(मम्मी का शरीर अब केवल दर्द सहन नहीं कर रहा था, बल्कि दादाजी के हर गहरे प्रहार के साथ उसकी चूत के भीतर एक बिजली जैसी लहर दौड़ रही थी। दादाजी का मोटा लंड जब उसकी संवेदनशील दीवारों को रगड़ते हुए अंदर-बाहर हो रहा था, तो उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका रोम-रोम पिघल रहा हो। उसने अपने कूल्हों को पीछे की ओर धकेलना शुरू कर दिया, ताकि दादाजी का लंड और भी गहराई तक जा सके।)*

*(उसकी सिसकियां अब कामुक आहों में बदल चुकी थीं। वह अब दर्द से नहीं, बल्कि चरम सुख की चाहत में छटपटा रही थी।)*

**मम्मी:** (अपनी आँखें मूँदते हुए और कमर को झटकों के साथ तालमेल बिठाते हुए) "आह्ह्ह..."

*(दादाजी अचानक ठिठके। उन्होंने महसूस किया कि उनके शब्दों के लहजे में कठोरता आ गई थी। उन्होंने एक लंबी और गहरी साँस ली, जिससे उनके फेफड़ों में भरा तनाव कम हुआ। उन्होंने अपनी आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि असीम प्रेम और वासना का मिश्रण लाया। उन्होंने मम्मी के कंधों को सहलाया और बहुत ही कोमल स्पर्श के साथ उसे अपने करीब खींचा।)*

*(अब उनके झटके बदलने लगे। वे अब गुस्से में नहीं, बल्कि एक प्रेमी की तरह धीरे-धीरे और बहुत ही गहराई से मम्मी के भीतर प्रवेश करने लगे। हर प्रहार में एक ठहराव था, एक अहसास था, जैसे वे मम्मी के शरीर के हर हिस्से को महसूस करना चाहते हों।)*

**मम्मी:** (अपनी आँखें मूँदते हुए और एक गहरी आह भरते हुए) "आह्ह... पापा जी... आप... आप कितने अच्छे हैं... आपके इस बड़े से लंड से मुझे इतना सुख मिल रहा है... मैं आपकी हूँ... पूरी तरह आपकी..."

*(मम्मी के इन शब्दों ने दादाजी के संयम की आखिरी दीवार भी तोड़ दी। वह अब और इंतज़ार नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने मम्मी के शरीर को पूरी तरह से ऊपर उठाया और उसे अपने ऊपर बैठा लिया। अब मम्मी का पूरा वजन दादाजी के लंड पर था, जिससे उसका प्रवेश और भी गहरा और तीव्र हो गया।)*
[Image: 39163]
*(मम्मी के अचानक ऊपर बैठने और अपने पूरे वजन को दादाजी के कठोर लंड पर डाल देने से, उसकी चीख निकल गई। यह दर्द नहीं था, बल्कि एक ऐसा चरम सुख था जिसने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया। वह अब दादाजी के ऊपर बैठकर खुद ही लय बनाने लगी। उसकी कमर की हरकतें अब और भी तेज और बेकाबू होती जा रही थीं।)*

*(दादाजी नीचे लेटे हुए बस ऊपर देखते रहे, उनकी आँखों में वासना और अधिकार की चमक साफ दिख रही थी। उन्होंने अपने दोनों हाथ मम्मी की पतली कमर पर टिका दिए ताकि वह संतुलन बना सके और अपनी मर्दानगी का पूरा प्रदर्शन कर सकें। कमरे में अब सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की 'चप-चप' की आवाज़ गूँज रही थी।)*

**मम्मी:** (साँसें फूलते हुए और जोर-जोर से हाँफते हुए) "आह्ह... पापा जी... ओह्ह... मेरा पेट... आपका लंड... मेरे एकदम अंदर तक जा रहा है... आह्ह!"
[Image: 35775]
*(मम्मी अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुकी थी। वह अपने घुटनों के बल झुककर और फिर वापस उठकर, एक पागलपन भरी लय में दादाजी के ऊपर चढ़-उतर रही थी। उसके स्तनों के उभार दादाजी की छाती से टकरा रहे थे, जिससे एक अलग ही सनसनी पैदा हो रही थी। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उसकी आँखें आधी खुली और आधी बंद थीं, जैसे वह किसी सपने की दुनिया में पहुँच गई हो।)*

*(मम्मी की ये बेकाबू हरकतें देखकर दादाजी के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने मम्मी की कमर को इतनी जोर से पकड़ा कि उनकी उंगलियां मम्मी की खाल में धंस गईं। अब दादाजी ने खुद को रोक कर नहीं रखा; उन्होंने अपनी कमर को ऊपर की तरफ झटके देना शुरू कर दिया, जिससे मम्मी का ऊपर बैठना और भी हिंसक और तीव्र हो गया।)*

*(अब कमरे में होने वाली आवाज़ें और भी बढ़ गई थीं। मम्मी के शरीर के टकराने की आवाज़ और उसकी ऊँची होती हुई आहें पूरे माहौल को और भी कामुक बना रही थीं। दादाजी के हर झटके के साथ मम्मी का शरीर पीछे की ओर झुक जाता और फिर वह झटके से वापस ऊपर आती, जिससे उनका लंड उसकी चूत की गहराईयों को पूरी तरह से नाप रहा था।)*

*(मम्मी का चेहरा लाल हो चुका था और उसके होंठ प्यास से सूखे लग रहे थे। वह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, उसे उस चरम सुख की तलाश थी जो उसके बिल्कुल करीब था। उसने अपना सिर दादाजी के कंधे पर रख दिया और उनके कान के पास फुसफुसाई।)*

**मम्मी:** (बिल्कुल टूटी हुई आवाज़ में) "पापा जी... मैं..."

**मम्मी:** (सिसकते हुए और अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश करते हुए) "...मैं निकलने वाली हूँ... आह्ह! बहुत ज़्यादा हो रहा है... पापा जी, रुकिए मत... और ज़ोर से...!"

*(मम्मी की बात सुनकर दादाजी के भीतर की मर्दाना ताकत और बढ़ गई। उन्होंने मम्मी की कमर को जकड़कर उसे अपने और करीब खींच लिया ताकि कोई भी जगह खाली न रहे। अब दादाजी की गति और भी प्रचंड हो गई थी। वे अपनी पूरी ताकत से मम्मी के शरीर के अंदर घुस रहे थे और बाहर निकाल रहे थे।)*
[Image: 35286]
*(कमरे का तापमान मानो बढ़ गया था। मम्मी का शरीर अब थरथराने लगा था। उसकी टांगें कांप रही थीं और वह दादाजी के कंधों को नाखूनों से खरोंच रही थी। उसके अंदर की मांसपेशियां दादाजी के लंड को इतनी कसकर जकड़ रही थीं कि दादाजी को भी महसूस हो रहा था कि वह शिखर के बेहद करीब हैं।)*

*(अचानक, मम्मी का पूरा शरीर अकड़ गया। उसकी पीठ धनुष की तरह मुड़ गई और उसकी आँखों से खुशी के आंसू बह निकले। वह चिल्ला नहीं पाई, बस उसके गले से एक दबी हुई, लंबी सिसकी निकली।)*

**मम्मी:** "आह्ह्ह्ह.... पापा जी.... आआआह्ह्ह!!!!"

*(मम्मी के इस चरम सुख (orgasm) के अनुभव ने दादाजी को भी पागल कर दिया। जैसे ही मम्मी का शरीर थरथराया और उसकी योनि की दीवारें दादाजी के लंड को बुरी तरह भींचने लगीं, दादाजी ने अपनी अंतिम शक्ति बटोरी। उन्होंने मम्मी की कमर को अपने सीने से चिपका लिया और एक बहुत ही गहरा, शक्तिशाली झटका दिया।)*

*(अगले ही पल, दादाजी के शरीर में एक जबरदस्त कंपन हुआ। उनके चेहरे पर एक अजीब सा सुकून और जुनून उभरा। उन्होंने अपनी पूरी ताकत के साथ मम्मी के गर्भाशय के ठीक मुहाने पर गर्म, गाढ़ा वीर्य (semen) छोड़ना शुरू कर दिया।)*
[Image: porngif-b87bd9770f91987e9a9e717a7096265c.gif]
**दादाजी:** (एक भारी और गहरी आवाज़ निकालते हुए) "ओह्ह्ह्ह.... मेरी बहू.... तू तो पागल कर देगी मुझे...."

*(दादाजी का वीर्य लगातार मम्मी के अंदर गिरता जा रहा था। वह इतना गर्म और गाढ़ा था कि मम्मी को अपने पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी गर्मी और भरा हुआ अहसास महसूस हो रहा था। मम्मी का शरीर अभी भी थराहट से कांप रहा था, उसका दम फूल रहा था और वह दादाजी के सीने पर अपना चेहरा टिकाए हुए बस भारी सांसें ले रही थी।)*

*(कुछ देर तक दोनों ऐसे ही एक-दूसरे से लिपटे रहे, केवल उनके हाफने की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। धीरे-धीरे दादाजी की उत्तेजना शांत होने लगी, लेकिन उन्होंने अभी भी मम्मी को अपने नीचे दबा रखा था। उन्होंने प्यार से मम्मी के पसीने से तर-बतर बालों को पीछे हटाया और उसके माथे को चूमा।)*

**दादाजी:** (धीमी और भरी हुई आवाज़ में, जिसमें थकान और संतुष्टि दोनों झलक रही थी) "तू आज सच में हद पार कर गई... मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बहू इतनी... इतनी जानलेवा होगी।"

*(उन्होंने मम्मी के चेहरे को अपने हाथों के बीच लिया और उसकी गीली आँखों में देखते हुए मुस्कुराए। मम्मी का चेहरा शर्म और सुकून के मिले-जुले भावों से भरा था। वह अभी भी पूरी तरह से होश में नहीं आई थी, उसकी साँसें अभी भी अनियमित चल रही थीं।)*

**मम्मी:** (बहुत धीमी आवाज़ में, लगभग बुदबुदाते हुए) "ये सब आपकी वजह से है... आपने मुझे ऐसा बनाया है..."

*(मम्मी की इन बातों ने दादाजी के दिल में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। उन्होंने मम्मी को और भी कसकर अपनी बाहों में भर लिया, जैसे वह उसे दुनिया की हर नज़र से छुपा लेना चाहते हों। कमरे की मद्धम रोशनी में मम्मी का चेहरा किसी खिलते हुए गुलाब की तरह लग रहा था, जिसकी पंखुड़ियाँ अब भी उत्तेजना से गुलाबी थीं।)*

*(दादाजी ने धीरे से अपना हाथ मम्मी के पेट के निचले हिस्से पर फेरा, जहाँ अभी भी दादाजी के वीर्य की गरमाहट महसूस की जा सकती थी। उन्होंने उसकी आँखों में आँखें डालकर पूछा।)*

**दादाजी:** "तो क्या अब तुझे अपनी इस नई पहचान से डर लग रहा है? या फिर तू चाहती है कि हम इसे यहीं खत्म न करें?"

*(मम्मी ने अचानक खुद को दादाजी की बाहों से छुड़ा लिया। उसके शरीर में अभी भी वो थरथराहट बाकी थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी दृढ़ता आ गई थी। उसने बिना कुछ कहे बिस्तर से उठने की कोशिश की, जिससे उसके शरीर से दादाजी का वीर्य रिसकर चादर पर गिरने लगा।)*

*(वह लड़खड़ाते हुए उठी और पास पड़े अपने कपड़े उठाने लगी। वह तेज़ी से अपने बदन को ढंकने लगी, जैसे वह उस कामुकता और शर्मिंदगी के अहसास को तुरंत ओढ़ लेना चाहती हो। कपड़े पहनते समय उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे, लेकिन उसकी चाल में एक जल्दबाजी थी।)*

*(कपड़े पहनने के बाद मम्मी ने पलटकर दादाजी की तरफ देखा। उसकी आँखों में अभी भी वही उलझन थी जो अभी-अभी हुई थी, लेकिन उसने अपने चेहरे पर एक सख्त मुखौटा चढ़ा लिया था। वह दरवाजे की ओर बढ़ने लगी, लेकिन रुककर एक आखिरी बार दादाजी की ओर देखा।)*

**मम्मी:** (अपनी आवाज़ को स्थिर करने की कोशिश करते हुए) "अब जो होना है कल होगा... अभी मैं जाती हूँ।"

*(उसने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और बिना पीछे मुड़े कमरे से बाहर निकल गई। उसके कदमों की आहट गलियारे में गूँज रही थी, जो धीरे-धीरे कम होती गई।)*
Like Reply


Messages In This Thread
RE: SASUR AUR BAHU KE KAMUK KISSE SHORT GIF (LUND TIGHT) - by rajusethzee - 02-10-2026, 11:30 AM



Users browsing this thread: 2 Guest(s)