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Adultery मीना बाजार - A innocent Mother and Daughter
#58
अब आगे....

और उधर बलवंत पायल द्वारा इस प्रकार अपने लंड का दर्शन करते देख अपनी जीत पर मन ही मन ख़ुशी से फुले नहीं समां रहा था।

पायल को अचंभित सा बैठा देख बलवंत ने कार्यवाही को आगे बढ़ाने की सोची और अपने हाथों को पायल के लण्ड थामे हाथों पर रखकर ऊपर नीचे हरकत करवाने लगा और बोला- पायल, कहाँ खो गई? मालिश करो बेचारे की!

बलवंत की इस हरकत पर पायल होश में आई और अपने हाथों को ऊपर- नीचे करते अपने नाजुक हाथों से बलवंत के लण्ड लम्बाई चौड़ाई और सख्ताई को नापती हुई लण्ड की मालिश करने लगी.
अनुभवी चोदू बलवंत ने इसी तरह कुछ देर मालिश करवाने के बाद पायल से रुकने के लिए इशारा किया और कहा- पायल, अब मेरी थकान उतर गई है. अब मैं तुम्हारी मालिश करके तुम्हारी थकान भी उतार देता हूँ. क्योंकि तुम भी सारा दिन मेहनत करके थक गई होगी. और इसी बहाने मैं तुम्हें और अच्छे से मालिश करने के नए तरीके सीखा दूंगा ताकि तुम कल भी मेरी मालिश उन नए तरीकों से कर सको।

यह कह कर बलवंत बेड पर से खड़ा हो गया और अपनी लुंगी उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया. लम्बा चौड़ा काला भुसन्ड भैंसे सा बालों से भरा बदन और दोनों टांगों के बीच में लम्बा और पायल के बाजू जितना मोटा मूसल जैसा भयानक लण्ड का नजर देख का पायल एकदम हक्की बक्की रह गई और शर्म के मारे दोनों हाथों से पायल ने अपना चेहरा ढक लिया.

बलवंत बोला- पायल शर्माओ मत. मैंने लुंगी इसलिए उतारी कि कहीं तुम्हारी मालिश करते समय इसमें तेल न लग जाये. और पायल , जवान और खूबसूरत लड़कियां मर्द के नंगे बदन से शर्माती नहीं, उसकी सराहना करती हैं. ऐसा बलिष्ठ बदन और ऐसा घोड़े जैसा लण्ड देखकर तो तुम्हारी उम्र की लड़कियों की लार टपक जाती है. अब तो मैं तुझे भी नंगी करूँगा.

यह सुनकर पायल ने हाथों से ढका अपना चेहरा पीछे घुमा लिया और जोर- जोर से सिर हिलाते हुए बोली- नहीं-नहीं… मुझे नहीं देखना आपको नँगा. और न ही मैं अपने कपड़े उतारूंगी. मुझे बहुत शर्म आ रही है बलवंत जी !

पायल के मन की स्थिति को समझते हुए बलवंत ने कहा- अच्छा मत देखो मुझे नँगा. तुम यहाँ रखे स्टूल पर बैठ जाओ. मैं तुम्हारे पीछे खड़ा होकर तुम्हारी मालिश कर देता हूँ. ऐसा करने से तुम्हारी बात भी रह जाएगी और मेरे कपड़ों में तेल भी नहीं लगेगा.
यह कहकर बलवंत पायल के पीछे आ गया और पायल को पीछे से पकड़कर सहारा देते हुए वहां रखे इस स्टूल पर बिठा दिया.

फिर अपने दोनों हाथों से हौले- हौले पायल के दोनों कंधे दबाने लगा. जीवन में पहली बार मरदाना हाथों के सख्त मगर प्यार भरे स्पर्श से पायल के बदन में एक झुरझुरी सी दौड़ गई और एक अजीब से सनसनाहट होने लगी.
बलवंत बार-बार दोनों हाथों को पीठ से शुरू करके कन्धों पर से होते हुए छाती पर जहाँ से पायल की चूचियों का उभार शुरू होता था वहां तक ले जा रहा था. ऐसा करते समय पायल के पीछे खड़े बलवंत के हाथ पायल की छाती पर पहुँचते तो बलवंत का शरीर पायल के निकट आ जाता और बलवंत का खड़ा हुआ लण्ड बार बार पायल की पीठ पर छू जाता.

हरामी और एक्सपिरिएंस्ड चोदू बलवंत जानबूझ कर अपने कूल्हों को भी थोड़ा आगे की तरफ बढ़ा कर लण्ड का दबाव पायल की नाजुक पीठ पर बढ़ा देता. उसके बार- बार ऐसा करने से पायल के शरीर में फिर से एक अजीब सी झनझनाहट शुरू होने लगी और खुमारी सी भरने लगी.

इधर बलवंत भी जब भी अपने हाथों को कन्धों से नीचे छाती की तरफ लाता तो उन्हें पायल की चूचियों पर थोड़ा और आगे की तरफ बढ़ा देता. थोड़ा- थोड़ा करके हरामी बलवंत के अनुभवी हाथ पायल की चूचियों की घुंडियों की ओर बढ़ने लगे.

बलवंत की मंशा अभी तक पायल को पता नहीं थी, वो तो बस उसके सख्त और अनुभवी औरतखोर मरदाना हाथों से मिलने वाले अपने अपने यौवन के इस नए और सुखद अनुभव को पूरे मजे के साथ महसूस कर रही थी।

दो तीन बार इस क्रिया को करने के बाद अब बलवंत के हाथों की उँगलियाँ पायल के कपड़ों के ऊपर से ही चूचियों की घुंडियों तक पहुँच गई और बलवंत के अनुभवी हाथों ने पायल के कपड़ों के ऊपर से ही निप्पलों का ठीक ठीक अंदाजा लगा लिया.

अब पायल को एक नया ही अनुभव होने लगा. जैसे ही बलवंत की उंगलियाँ पायल के निप्पल को छूती, उसके मुँह से एक हल्की सिसकी निकल जाती और पायल की चूत फिर से कमरस छोड़ने लगी।

पायल की हालत को समझ कर बलवंत ने धीरे से अपने होंठ पायल के कान के पास ले जाकर फुसफुसाते हुए पूछा- क्यों पायल रानी, मालिश में मजा आ रहा है न?
कान मैं फुसफुसाते समय चोदु राजा बलवंत ने अपने काम अनुभव का इस्तेमाल करते हुए धीरे से अपने जीभ निकलकर पायल के कान के छेद में हल्के से फिरा दी. और पायल के दोनों निप्पलों को उसके पहने हुए कपड़ों के ऊपर से अनुभव करते हुए एक साथ अपने हाथों की चुटकियों मैं हल्के से दबा दिया.

बलवंत की इस हरकत से पायल के बदन ने जोर का झटका खाया और ना चाहते हुए भी उसके मुँह से सिसकती लरजती आवाज मैं निकल गया- हाँ, बहुत मजा आ रहा है बलवंत जी !

चुदक्कड़ बलवंत को तो बस इसी बात का इंतजार था.

अब बलवंत ने अगला कदम उठाया और अपना मुँह पायल के दूसरे कान के पास ले जाकर उसके कान के साथ होंठ टच करते हुए और उसके इस कान में भी हल्की सी जीभ फिराते हुए बोला- पायल अगर मालिश का अल्टीमेट मजा लेना है तो अपना टी शर्ट उतार दो और फिर देखो मालिश का असली मजा!

और पायल के हाँ कहने से पहले ही बलवंत उसकी टी शर्ट को नीचे से पकड़कर उतरने का उपक्रम करने लगा. पायल ने भी बिना कुछ सोचे समझे बेहोशी से आलम में अनायास ही अपने हाथ ऊपर उठा दिए.

बलवंत ने भी सुनहरी मौका देखकर झट से पायल के संगमरमरी जैसी बदन को उसके टीशर्ट से आज़ाद कर दिया.

ऊपरी बदन नँगा होते ही एसी की ठंडी हवा लगने से पायल कुछ होश में आई और उस पर फिर शर्म हावी होने लगी. उसने अपने दोनों हाथ अपनी दोनों चूचियों पर रख लिये और अपना सिर झुका लिया.

उसके नाजुक और संगमरमरी बदन को बलवंत देखकर दंग रह गया, उसे अपनी किस्मत पर रश्क होने लगा, उसकी लार टपकने लगी. वह सोच रहा था कि आज तक उसके नीचे आकर लड़की से औरत बनने वाली सबसे खूबसूरत बदन वाली लड़की होगी ये।

बलवंत ने फिर से अपनी पोजीशन ले ली और मालिश शुरू कर दी. अब बलवंत के हाथ पायल की नंगी पीठ पर थे जिन्हें वह आगे बढ़ाता हुआ उसकी बगलों के नीचे से होते हुए बेधड़क पायल की खुली चूचियों पर फिरने लगा.

अब उसका लण्ड पायल की नंगी पीठ पर ठोकर मार रहा था.

चूचियों पर हाथ फिराते-फिराते बलवंत बीच-बीच में अपनी चुटकियों में पायल के नाजुक निप्पलों को हल्के से दबा देता था जिससे पायल के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती थी. उसकी साँसें गहरी और लम्बी होने लगी. अब वह बीच- बीच में अपने दोनों हाथ बलवंत के हाथों पर रखकर उन्हें वहीं रोक लेती थी जैसे इशारा कर रही हो कि ‘प्लीज, मेरे निप्पलों को अपनी चुटकियों में पकड़े रहो. इन्हें यहाँ से न हटाओ.’

लोहा गर्म देखकर बलवंत पायल की नाजुक चूचियों को हाथों में लेकर और दोनों निप्पलों को हल्के से चुटकियों में दबाकर नीचे झुका और पीछे से उसकी पीठ से लेकर गर्दन तक जीभ फिराते हुए अपने होंठ उसके कान के पास ले गया.

कुछ देर तक कान के छेद मैं जीभ फिरने के बाद बोला- पायल ये क्या हैं?

पायल ने शर्म के मारे कोई जवाब नहीं दिया.

बलवंत फिर से मुट्ठी में पकड़ी चूचियों और चुटकियों में पकड़ी उसकी निप्पल पर थोड़ा प्रेशर डालते हुए बोला- पायल , बताओ न इन्हें क्या बोलते हैं?

पायल हल्के स्वर में- दुद्धू!

बलवंत- सुनाई नहीं दिया पायल, जरा फिर से बोलो?

पायल थोड़ा जोर से बोली- दुद्धू!


बलवंत - नहीं पायल रानी, दुद्धू तो शरीफ लड़कियों के होते हैं, नॉटी लड़कियों की नहीं, नॉटी लड़कियों की तो चूचियाँ होती हैं.

बलवंत - फिर से बोलो, क्या होती हैं?

पायल - चूचिया बलवंत जी !

बलवंत अब सिर्फ निप्पल्स पर प्रेशर डालते हुए- ये क्या होते हैं?

पायल हल्के से- निप्पल।

बलवंत निप्पलों को जोर से दबाते हुए- जोर से बोलो क्या?

पायल खुमारी भरी कम्पकपाती आवाज में- निप्पल्स।

बलवंत - शाबाश पायल ।

अब बलवंत ने अगला कदम बढ़ाया और पायल को सहारा देते हुए खड़ा कर दिया. उसका हाथ पकड़कर बेड के पास ले आया और बलवंत खुद पैर नीचे लटका कर बेड पर बैठ गया.
मदमस्त हुई पायल को अपनी उसने गोदी में इस प्रकार बैठा लिया कि पायल की पीठ बलवंत के पेट से सटी थी और बलवंत की दोनों टाँगें पायल की दोनों टांगों के बीच में थी. बलवंत का खम्बे जैसा लण्ड पायल की स्लेक्स से ढकी चूत के सामने से होता हुआ पायल के पेट तक पहुँच रहा था, जिसकी वजह से पायल अपनी जगह से आगे नहीं हिल सकती थी।

बलवंत ने पायल को चुदाई के लिए तैयार करने की अपनी कार्यवाही आगे बढ़ाई और एक हाथ से पायल की चूचियों को सहलाता रहा. दूसरे हाथ को वो पायल के नर्म पेट पर हाथ फेरने लगा और उसे धीरे- धीरे नीचे की तरफ बढ़ाने लगा जो बलवंत का असली टारगेट था.

अभी तक पायल की कुंवारी चूत चड्डी में छुपकर चोदू बलवंत की हरकतों की वजह से आंसू बहा रही थी.

अब पायल भी समझ चुकी थी कि उसका कुंवारापन अब कुछ ही देर का मेहमान है क्योंकि उसे अपनी कुंवारी नाजुक चूत का दुश्मन यानि बलवंत का खड़ा लण्ड लार टपकता झटके मरता हुआ अपनी आँखों के सामने नजर आ रहा था.

उसे अब सिर्फ इसी बात की चिंता सता रही थी कि आखिर ये हवाई जहाज जैसा लण्ड उसकी छोटी से नाजुक चूत में कैसा घुसेगा. उसे पिछली रातों को बलवंत के बेड और लण्ड पर लगे लाल रंग का मतलब कुछ कुछ समझ आ रहा था।

पायल सोचने लगी कि कैसे उसकी नाजुक सी कुंवारी चूत इस हैवी लण्ड का ताव सह पाएगी. परन्तु उसका चंचल मन तुरंत उसे समझाने लगा कि अभी दो दिनों से लगातार बलवंत अपने इसी अनुभवी लण्ड से उससे भी कमसिन लड़कियों को औरत बना चुका है, अब जो होगा देखा जायेगा.

पायल को सपने में भी ये गुमान नहीं है कि अभी कुछ ही देर में ये औरतखोर अनुभवी बलवंत अपनी सेक्सी चालों से गर्म करके इतना मजबूर कर देगा कि वो खुद गर्म तवे पर पड़ी पानी की बूंदों के समान छनछनायेगी और बलवंत के लण्ड से अपनी नाजुक अनचुदी चूत छिदवाने के लिए भीख मांगेगी।

पायल ने महसूस किया कि बलवंत के एक हाथ की उँगलियाँ अब उसकी कुंवारी चूत की तरफ धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और अंत में उसको सहलाने लगी थी. बलवंत की ये हरकतें पायल के जिस्म में एक अजीब सी आग लगा रही थी. वह तो बस इतना जानती थी कि उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था, उसकी शर्मोहया अब धीरे-धीरे उसका साथ छोड़ रही थी.

अब बलवंत ने अपनी तर्जनी उंगली का दबाव पायल की क्लाइटोरिस (चूत के दाने) के ऊपर बढ़ाया. यह पायल के लिए एक और नया अनुभव था. अनुभवी चोदू बलवंत अपने एक एक नए दांव से पायल की जवानी को पस्त कर रहा था क्योंकि अब जवानी के नशे में चूर और बलवंत की उँगलियों द्वारा की जा रही हरामी हरकतों के वजह से पायल के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी फूटने लगी थी.

वक्त की नजाकत को समझ ज्यादा समय न खराब करते हुए बलवंत ने अचानक पायल की बाहों में हाथ डालकर उसे खड़ाकर दिया. पायल का मुँह दूसरी तरफ था और पायल के चूतड़ बलवंत की तरफ थे.

बलवंत ने इसी मुद्रा में पायल की स्लेक्स की इलास्टिक में उँगलियाँ फँसाते हुए उसकी स्लेक्स और पैंटी को एक साथ एक ही झटके में नीचे की तरफ सरका दिया.

पायल के गोल-गोल गोरे चूतड़ नंगे हो चुके थे.

पैंटी और स्लेक्स उतरते ही पायल की नाजुक कुंवारी चूत की मस्त महक कमरे में फैलकर बलवंत सांड के नथुनों से टकराई. जिसे महसूस करके बलवंत के हथियार ने एक मस्त अंगड़ाई ली और आगे के युद्ध के लिए तैयारी करने लगा.

बलवंत ने स्लेक्स और पैंटी पायल के बदन से अलग करने के प्रयास में पायल के बाएं पैर को उठाने का प्रयास करने लगा. मगर पायल ने अपने आप एक एक करके दोनों पैर उठाए और स्लेक्स और पेंटी को अलविदा कह कर मादरजात नंगी हो गई.

अब बलवंत बोला- पायल , मेरी तरफ घूमकर जरा अपने अनमोल हुस्न का नजारा तो करवाओ!

पायल ने शर्म के मारे बात अनसुनी कर दी.

पर बलवंत पायल के सामने चला गया.पायल ने शर्मा कर अपनी दोनों टाँगें आपस में भींच ली और अपने दोनों हाथ अपनी चूचियों पर रख लिया.

बलवंत ने आगे बढ़कर पायल के झुके हुए सिर को ठोड़ी पकड़कर अपने एक हाथ की उँगलियों का सहरा देते हुए ऊपर उठाया और आगे बढ़कर अपने सख्त काले होंठ पायल के नाजुक गुलाबी होंठों पर रखकर गहराई से चुम्बन करने लगा.

अपने दूसरे हाथ से पायल के हाथ छाती पर से हटा दिए. पायल बलवंत के चुम्बन में डूब गई थी. अब बलवंत की जीभ पायल के मुंह का कुंवारापन समाप्त करके उसके दांतों को गिन रही थी. इसी पोजीशन में बलवंत ने पायल को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी बाहों में लिए-लिए बेड पर लिटा दिया.

पायल जोर-जोर से सांसें ले रही थी और उसकी चूचियां ऊपर नीचे होकर अपने बलवंत को चखने की दावत दे रही थी जिन्हें खाने के लिए बलवंत भी बेड पर आ गया.

वो लेटी हुई पायल के बगल में बैठकर आगे झुककर अपनी जीभ से पायल की दायीं चूची के निप्पल को चखते हुए छेड़ने लगा. अपने बाएं हाथ की चुटकी से पायल की बायीं चूची के निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा.

फिर उसने अपने दाएं हाथ को पायल की नंगी हो चुकी चूत की तरफ बढ़ाया.उसके इस तिहरे वार से से हैरान पायल ने अपनी दोनों टाँगें जोर से भींच ली.

पर अनुभवी चोदू बलवंत ने कोई जबरदस्ती नहीं की. वह धीरे- धीरे जीभ से कभी उसके दाएं निप्पल को छेड़ता, फिर उसके इर्द गिर्द सर्किल बनाता, कभी होंठों में दबाकर हल्के दबाव के साथ चुमला देता.और जैसी हरकत मुँह से करता, वैसी ही हरकत अपने बाएं हाथ से उसके बाएं निप्पल के साथ करता.साथ साथ बलवंत दाएं हाथ को पायल की भिंची हुई टांगों के जोड़ पर हल्के-हल्के फिराता रहा.

इन सारी हरकतों के एक साथ चलने से पायल पर ऐसा असर हुआ कि उसकी शर्म अब बस के बाहर जा चुकी थी. उसने अपनी और अपनी नाजुक चूत की किस्मत का फैसला अब बलवंत और उसके लण्ड के हवाले करने का फैसला कर लिया था.

और बलवंत की कुछ ही देर की मेहनत के बाद पायल धीरे-धीरे अपनी टांगों को फ़ैलाने लगी. अब बलवंत उंगली से उसकी चूत को रगड़ने लगा.

पायल के मुँह से जोर-जोर की सिसकारियां फूट पड़ी. पायल को पता ही नहीं चला कि कब उसने अपनी दोनों टांगें पूरी तरह से फैलाकर चौड़ी कर ली.

इधर अनुभवी बलवंत इसी बात का फायदा उठाकर उंगली से उसकी गीली हो चुकी कुंवारी चूत के दरवाजे को खोलने के कोशिश करने लगा. धीरे-धीरे उसने 2 इंच तक उंगली चूत में घुसा दी.पायल की चूत की सील को बिल्कुल सलामत पाकर बलवंत ख़ुशी से झूम उठा और उसका लण्ड ख़ुशी से इतरा कर ठुमकने लगा.

अब बलवंत सरक कर पायल की दोनों टांगों के बीच में आकर बैठ गया और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर दोनों चुटकियों में पायल के निप्पलों को पकड़ लिया और आगे झुककर जीभ पायल के गीली चूत पर फिराई.

बलवंत की इस हरकत पर पायल चिहुंक पड़ी और बोली- ये आप क्या कर रहे हैं बलवंत जी ?

चोदू बलवंत उसकी दोनों फैली हुई टांगों के बीच घुटनों के बल खड़ा होकर अपने लण्ड को पुचकारता हुआ पायल की आँखों में आंखें डालकर बोला- पायल खेल अब बहुत हो गया. ये अब तेरी चुदाई की तैयारी है. तू अब देखती जा … पहले मैं जीभ से तेरी चूत को चाटूँगा. फिर तुझे अपना ये लण्ड चूसाऊँगा. देखना फिर तू अपने आप मुझसे कहेगी कि ‘ बलवंत मुझे चोदो’ और अब ध्यान से सुन मेरी बात … अब शर्माना बंद कर दे और मेरी आँखों में आँखें डालकर देख और पूरी रंडी बनकर अपने युनियन नेता से चुद. अपनी नथ उतराई को यादगार बना ले. जिंदगी में यह सुनहरी मौका एक ही बार आता है।

बलवंत अब अपनी पर आ चुका था. वह एक पढ़ी लिखी एक बड़े बिजनेस मैन की बेटी पर कोई शर्म नहीं कर रहा था और पायल से ऐसे बात कर रहा था जैसे किसी चुड़क्कड़ रंडी से बात कर रहा हो।

बलवंत फिर से नीचे झुककर जीभ से पायल की नाजुक चूत के टीट को चाटने लगा और पायल की बेचैनी बढ़ने लगी. बलवंत करीब दो मिनट तक चूत को चाटता रहा और चुटकियों से उसकी दोनों चूचियां के निप्पलों को भींचता रहा.

पायल भी मस्त होकर सिर इधर उधर झटकने लगी. उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसका शरीर एकदम हल्का सा क्यों होने लगा है. पायल की कुंवारी चूत फचाफच पानी की बरसात सी करके बलवंत के मुँह को भिगो रही थी. बलवंत की इस हरकत से वह धीरे-धीरे चरम पर पहुंचती हुई झड़ने के एकदम करीब थी.

परन्तु पायल के चरम पर पहुँचने से कुछ पहले अनुभवी बलवंत ने पायल की इस स्थिति को भांपकर उसे और तड़पाने के मकसद से बिल्कुल झड़ने के करीब पहुँची पायल की टपकती सिसकती चूत पर से अपना मुँह हटा लिया.

उसकी इस हरकत पर पायल फुंफकार उठी और बदला लेने को आतुर नागिन की तरह लाल लाल आँखों से बलवंत की और घूरने लगी.
परन्तु इसकी परवाह न करते हुए अनुभवी बलवंत घुटनों के बल पायल की टांगों के बीच में बैठ गया. उसने पायल की दोनों टांगें अपने कन्धों पर चढ़ा ली और उसकी गुस्से से भरी आँखों में बेशर्मी से झांकते हुए अपने खरतनाक लण्ड के सुपारे को पायल की नाजुक और अभी तक कुंवारी चूत के मुँह पर भिड़ाकर हल्का हल्का रगड़ा लगाना शुरू कर दिया.

गर्मागर्म कड़क और चिकने लण्ड के अपनी नाजुक चूत पर पहले मर्दाना स्पर्श ने पायल को अलग ही मजेदार और नए अनुभव हुऐ. उसे लगा कि कोई जलता हुआ अंगारा उसकी चूत के मुँह पर रगड़ा जा रहा है.

पायल की मस्ती अब चरम के करीब पहुँच चुकी थी. परन्तु बलवंत ने फिर चाल खेली, वह चूत पर लण्ड के सुपारे के चार-पांच घस्से मारकर उसे पीछे हटा लेता था. पायल का हाल जल बिन सूखी और गर्म रेत पर पड़ी मछली जैसा हो गया था. उसे अब बलवंत द्वारा चूत से लण्ड हटाना एक पल के लिए भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

इधर काम क्रीड़ा विशारद बलवंत अपनी इस हरकत से बाज ही नहीं आ रहा था. वह पायल की आँखों में हवस भरी आँखों से झांकते हुए चार पांच हल्के घस्से लगाता और आँख मारकर अपने काले होंठों पर जीभ फिराते हुए लण्ड पीछे हटा लेता.

इधर पायल अब अपनी दोनों टांगों को बलवंत के कन्धों से उतर कर उसके कमर के इर्द गिर्द लपेट कर बलवंत को अपने से दूर जाने से रोकने का प्रयास करने लगी और अपनी चूत को ऊपर की और उछाल कर बलवंत के लण्ड से स्पर्श न टूटने देने की नाकाम कोशिश करने लगी.

अंत में अपनी हवस से मजबूर होकर पायल लगातार बेशर्मी से बलवंत से निगाहें मिलाते हुए बोली- बलवंत जी कुछ करो न … मुझ से अब रुका नहीं जा रहा.

बलवंत - तो मैं क्या कर सकता हूँ पायल रानी तुम खुद ही बताओ?

पायल - मुझे नहीं पता … बस आप जल्दी से कुछ करो.

बलवंत- पायल खुलकर कहो कि तुम नेता से क्या उम्मीद करती हो?

पायल अब सारी बची खुची सारी शर्मोहया को त्याग कर बेशर्मी से बलवंत की आँखों में आँखें डालकर बोली- नेता जी प्लीज अपनी जनता का उद्धार कर दो.

बलवंत अपने गर्म लौड़े को देखकर- नहीं पायल , ऐसे नहीं चलेगा. सिर्फ मेरे लण्ड के घस्सों से तेरा काम तो बन जाएगा. पर मेरा लण्ड तो प्यासा ही रह जाएगा.

पायल - तो फिर मैंने आपको कहाँ रोका है? आप भी अपना काम कर लो और बुझा लो अपने इस लण्ड की प्यास!

बलवंत - देख लो पायल , कहीं तुम यहाँ से बाहर जाकर ये न कहना की एक बड़े नेता ने एक मजबूर लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ लड़की से औरत बनाया फिर सारी रात कई बार चोद कर उसकी नाजुक कुंवारी फूल सी चूत का भोसड़ा बना दिया
.
पायल - नहीं नेता जी , मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी. प्लीज, अब जो करना है जल्दी से कर दो अब मुझसे और नहीं सहा जाता.

बलवंत - सोच लो … तुम एक पढ़ी लिखी लड़की हो. और मैं एक अनपढ़ आदमी.

पायल - अरे नेता प्लीज, अब छोड़ो न ये सारी बातें! और चोदो मुझे. और बना दो लड़की से औरत! मैं कसम कहती हूँ कि बाहर जाकर किसी से कुछ नहीं कहूँगी. यहाँ तक कि जब तक चुनाव प्रचार का काम चलेगा, मैं आपकी पर्सनल रंडी बनकर रहूँगी. रातों को आपसे अपनी इस चूत को चुदवाऊंगी और पूरे दिन जब आप बस से सर बाहर निकाल कर भाषण देंगे तब आपकी धोती से निकलकर आपके लण्ड को चूस चूस कर आपको मजा दूँगी।

बलवंत‌ पायल की बात से खुश होते हुए अपनी उँगलियों से उसकी कुंवारी चूत के गुलाबी चूत के छेद को चौड़ा करके बोला- ऐसी बात है तो ठीक है पायल . पकड़ो मेरा लण्ड और लगाओ अपनी चूत पर! और बोलो ‘नेताजी मेरी नाजुक कुंवारी चूत का अपने मोटे काले लण्ड से उद्घाटन कर दो.’

पायल हड़बड़ी में लण्ड को अपनी चूत के गुलाबी छेद की सीध में लाकर- नेताजी, मेरी नाजुक कुंवारी चूत का अपने मोठे काले लण्ड से उद्घाटन कर दो प्लीज.

बलवंत- और सुनो, अपने किये वादे पर कायम रहना क्योंकि ये चुदाई आज रात की आखिरी चुदाई नहीं है. मैं तुम्हें सुबह के चार बजे तक चोदूंगा. और पहली बार चूत के उद्घाटन के बाद तुम अपनी चूत को आराम देने के लिए मेरे लण्ड को चूसोगी. और अपनी कुंवारी गांड भी मेरे लण्ड के हवाले करोगी बोलो है मंजूर?

पायल बिना अंजाम की परवाह किये- मुझे आपकी सारी शर्तें मंजूर हैं नेता जी . अब और न तड़पाओ.

बलवंत ने पायल की गांड के नीचे एक बड़ा सा तकिया लगाया जिससे उसकी नाजुक सी कुंवारी चूत का गुलाबी लसलसा मुँह कुछ और खुल गया.

बलवंत - तो लो पायल , इस अनपढ़ नेता का मोटा सा कला लण्ड एक पढ़ी लिखी नाजुक सी लड़की की नाजुक सी चूत में उसी के बहुत आग्रह पर! लो सम्भालो इसे!

ये कहते-कहते बलवंत ने पायल के नाजुक हाथ में थमा अपने कड़क काले लण्ड का मोटा सुपारा अपनी गांड की हरकत से पायल की छोटी सी चूत के नर्म लसलसे गुलाबी मुँह में भिड़ाकर फंसा दिया.

अपनी गांड को थोड़ा और आगे बढ़ाते ही बलवंत के अनुभवी लण्ड को पायल के कुंवारी चूत की झिल्ली महसूस हुई और झिल्ली पर कड़क लण्ड का प्रेशर पड़ते ही अब तक हवस में मस्तायी पायल के माथे पर पसीना सा आ गया.

पायल अपने को छुड़ाने के प्रयास में पीछे की और सरकते हुए- अरे नेता जी , मुझे तो दर्द हो रहा है प्लीज इसे मेरे चूत से बाहर निकालिये.अनुभवी बलवंत ने पायल के हावभाव देखकर झट लगाम अपने हाथ में लेते हुए पायल के दोनों कंधो को अपने हाथों से पकड़कर उसे दबोच लिया.

बलवंत - ऐसे कैसे निकाल लूँ बहन की लौड़ी … इतना आगे जा कर मेरा लण्ड कभी वापस नहीं आता. पायल अब तो ये हरामजादा तेरा अब तक संभाल कर रखा कौमार्य भंग करके ही मानेगा. देख अभी दो सेकंड में मेरा ये हथियार तुझे लड़की से औरत बनाकर सुबह तक तुझे इस पर तिगड़ी नाच नचाकर तेरी इस नाजुक सी चूत का भोसड़ा ना बना दे तो मेरा नाम बलवंत यूनियन नेता नहीं.

पायल - नेता जी नहीं हींहीं ईईई …

बलवंत कसी हुई चूत का मजा लेते हुए- आह … मजा आ गया आज तो। और इस प्रकार बलवंत के लण्ड ने पायल को लड़की से औरत बना दिया. चूत की सील टूटते ही बिस्तर लाल होने लगा. बलवंत ने धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हुए अपना मोटा लण्ड जड़ तक पायल की नाजुक सी चूत में बैठा दिया.

पायल की चीखें रोकने के लिए एक हाथ पायल के मुँह पर रखा एक हाथ से पायल का एक निप्पल पकड़ा और आगे झुककर मुँह में दूसरा निप्पल पकड़ कर चूस लिया.

पहले बलवंत ने लण्ड की धकपेली से पायल की चूत में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई और फिर जब पायल की चूत मोटे लण्ड की कुछ अभयस्त सी हो गई तो उसकी झन्नाटेदार चुदाई शुरू कर दी.

दर्द के मारे पायल के आँखों से आंसू बह रहे थे और बलवंत के मोटे काले टट्टे पायल की नाजुक गांड को जोर जोर से थपकाने लगे थे.

कुछ ही देर की झन्नाटेदार चुदाई के बाद बलवंत ने महसूस किया कि पायल की चूत अब पूरी तरह लण्ड की आदी हो गई है तो बलवंत ने पायल के मुँह पर से अपना हाथ हटा लिया.

पायल - नेता जी मुझे नहीं पता था कि चुदाई ऐसे होती है. अगर मुझे पहले इस दर्द का पता होता तो मैं आपसे कभी अपनी चूत नहीं मरवाती. और अगर में उन लड़कियों की चुदाई देख लेती तो पहले ही यहाँ से भाग जाती.

बलवंत- नहीं मेरी प्यारी पायल , तुझे चोदने का प्रोग्राम तो मैंने उसी दिन बना लिया था जिस दिन तू पहली बार मुझ से मिलने मेरे ऑफिस में आई थी.और उन दोनों लड़कियों की चुदाई तो मैंने अपनी इस कबूतरी को दाना डालने के लिए की थी. क्योंकि मुझे पता था कि अपनी हमउम्र और अपने से भी काम उम्र लड़कियों को मुझसे चुदती देखकर तुम्हारे भी अरमान जागेंगे और नारी सुलभ व्यवहार के कारण तुम्हारा मन भी चुदाई के लिए लालयित होगा.मुझे पता था की उनकी चीखने चिल्लाने की आवाजें तुम्हें डरा कर मुझे मेरे असली मकसद में कामयाब नहीं होने देंगी. इसीलिए उनकी चूत के सील तोड़ने से पहले में उनके मुंह में कपड़ा ठूंस देता था ताकि मेरी भयंकर चुदाई की वजह से उनकी चीखो पुकार से तू डरकर भाग न जाये. क्योंकि मैं समझता था कि तुझ जैसी जवान और खूबसूरत लड़की मेरे जैसे काले कलूटे के जाल में सीधे-सीधे नहीं आएगी. इसीलिए मैंने जानबूझ कर दूसरे कमरे में तुम्हारी मौजूदगी में उन्हें सारी-सारी रात जोर-जोर से चोदा ताकि तुम्हारी जवानी के अरमानों को पंख लग जाएँ.
और देख लो … ऐसा हुआ भी! तुम मेरा लण्ड अपनी चूत के अंदर खाए पड़ी हो. और अब तो रोज दिन रात तुम इस बस में नंगी रहोगी. मैं इसी बस में तुम्हारी रिसर्च पूरी कराऊंगा और तुम चुदाई के सब्जेक्ट में पीएचडी करके ही इस बस से बाहर जा पाओगी.

बलवंत की हरकतों और इन अश्लील बातों से पायल का दर्द अब कुछ कम होने लगा और उसकी जगह एक नई मस्ती ने ले ली थी. बलवंत की खुली और गर्म अश्लील बातें, चूचियों पर उसके मुँह और हाथों की हरकतें और चूत में आगे पीछे होकर धमाल मचता उसका लण्ड पायल को एक नया ही आनन्द प्रदान कर रहा था.

पूरा कमरा में पायल की गांड पर पड़ती थापों के संगीत से गूँज रहा था. उसका बदन हल्का सा होने लगा और अनायास ही उसने अपने दोनों पैरों का शिकंजा बनाकर बलवंत की कमर को पैरों के घेरे में ले लिया और बलवंत के हर झटके के साथ अपने पैरों की जकड़ को बढ़ा देती थी ताकि उसका लण्ड पायल की बच्चेदानी के मुँह पर ठोकर मारे. बच्चेदानी के मुँह पर पड़ने वाली हर ठोकर पायल का मजा दुगना कर देती थी.

बलवंत को समझ आ गया था कि पायल को अब सेक्स का पूरा मजा आने लगा है. तो खिलाड़ी ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

टाइट चूत में बलवंत के मोटे कड़क लण्ड के लगातार घर्षण से पायल क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ने लगी और करीब पांच मिनट की धकाधक चुदाई के बाद पायल बोली- नेता जी , प्लीज अब किसी हाल में मत रुकना. मुझे कुछ होने वाला है.

बलवंत - हाँ पायल , अब तू अपनी जिंदगी में लण्ड के नीचे आकर पहली बार झड़ेगी.

पायल - नेता जी … प्लीज डोंट स्टॉप.

बलवंत - अरे पायल , मैं तो कम से कम 20 मिनट तक तुम्हें ऐसे ही चोद सकता हूँ.

अत्यधिक मजे और उत्तेजना की वजह से अब शब्दों ने पायल का साथ छोड़ दिया था- आआह उहहह सी सी, आआह उहहह सी सी,उईईई मेरी मां मैं गईईईई ईईई ईईईई…

और इस प्रकार बलवंत के लण्ड की लगातार पड़ रही ठोकों के आगे पायल की चूत पस्त होकर जवाब दे गई और कर झड़ने लगी. उसके रक्त मिश्रित कामरस बेड की चादर भीगने लगी.
इसके बाद भी सांड जैसे बलवंत ने उस फूल सी लड़की पर कोई दया नहीं दिखाई और करीब आधे घंटे तक फुल स्पीड से लगातार चोदता रहा और उसकी चूत की धज्जिया उड़ा कर रख दी.

पायल करीब 4 बार और झड़कर जब थक गई तो बोली- नेता जी , अब बस भी करो मेरी जान निकलोगे क्या?

बलवंत- नहीं पायल , तुम तो मेरी जान हो. अब मैं अपनी जान कैसे निकाल सकता हूँ. तुम्हारा काम तो हो गया पर मेरा अभी बाकी है. मैंने तुम्हें बहुत मजे दे दिए. अब मेरी बारी है इसलिए तुम ऊपर आकर मेरा खड़ा लण्ड अपनी चूत में ले लो और अपनी दोनों चुटकियों में पकड़कर मेरे निप्पलों को मसलो. ऐसा करने से मैं जल्दी ही झड़ जाऊँगा।

पायल - ठीक है नेता जी .

और पायल ने बलवंत के लण्ड पर बैठकर गप से अपनी खुल चुकी चूत में जड़ तक ले लिया. बलवंत के दोनों निप्पलों को अपने दोनों हाथों की चुटकियों में पकड़कर मसलने लगी।

बलवंत - शाबाश पायल रानी मजा आ गया!

पायल - नेता जी , अब क्या करूँ?

बलवंत - पायल , अब मेरे लण्ड पर ऊपर नीचे होकर उठक बैठक करो.

पायल एक होनहार आज्ञाकारी शिष्या की तरह बलवंत की बात मान कर पूरे जोश में लण्ड पर ऊपर नीचे होने लगी. और साथ साथ बलवंत के दोनों निप्पलों को अपने दोनों हाथों की चुटकियों में पकड़ कर मसलती रही.

करीब पांच मिनट बाद पायल - नेता जी आप मेरी चूत का बैंड कब तक बजाओगे?

बलवंत - आअह बस हो गया मेरी प्यारी पायलईईईईरानी !

पायलट की चूत में बलवंत का लण्ड थोक में झड़ने लगता है और पायल उसकी पिचकारियों को महसूस करती है.

पायल - अरे नेता जी , आप मेरे अंदर ये क्या पिचकारियां सी छोड़ रहे हैं?

बलवंत - पायल , मेरा ये मेरा वीर्य निकलकर तुम्हारी प्यारी प्यारी चूत में जा रहा है. वाह पायल … मजा आ गया आज तो! बेशक ये मेरी आज तक की सबसे बढ़िया चुदाई रही ।
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तभी पायल को अपनी मां के साथ हुऐ कुत्रित की यादें ताजा हो गई उसने तुरंत बलवंत के कमरे से बाहर निकल आया। और अपने कमरे में वापस आ गई और अपने किये पर पछतावा करने लगी।

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अगली सुबह वह नेता जी के कार्यक्रम को छोड़कर अपने विश्वविद्यालय कैम्प वापस लौट आई ।
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RE: मीना बाजार - दोबारा फिर - by Puja3567853 - 01-10-2026, 03:11 PM



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