Thread Rating:
  • 18 Vote(s) - 4 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
आह्ह्ह्ह... उम्ममम... ओह्ह्ह मेरे भगवान!" मम्मी की आवाज़ बदल गई। वो अब दर्द से नहीं, बल्कि एक ऐसी उत्तेजना से तड़प रही थीं जो उनके काबू से बाहर जा रही थी। मैंने अपनी जीभ का इस्तेमाल उनकी चूत के हर कोने को चखने के लिए किया। मैं उनके बहते हुए चिपचिपे रस को पागलों की तरह चाट रहा था। "स्लर्प... स्लर्प... चप..." मेरी जीभ की तेज़ हरकतें उनकी चूत की दीवारों को सहला रही थीं।

मैं चाहता था कि वो इस प्यास से पागल हो जाएँ। मैं चाहता था कि उनका शरीर इतना तड़प जाए कि जब मैं अंत में अपना लिंग उनके अंदर डालूँ, तो वो झटकों के जवाब में मुझे पागल कर दें। मैंने अपनी जीभ से उनके छेद के अंदर ज़ोर से हवा फूँकी और फिर तुरंत ही अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू किया। "स्लर्प... उम्ममम..."

मम्मी के हाथ बिस्तर की चादर को इतनी ज़ोर से भींच रहे थे कि उनके नाखून सफेद पड़ गए थे। उनकी कमर बार बार ऊपर उठ रही थी, जैसे वो मेरे मुँह को अपनी चूत के और अंदर खींचना चाहती हों। "बेटा... प्लीज़... अब और नहीं सहा जाता... मेरा शरीर फट जाएगा... जल्दी से अपना लंड अंदर डाल दे... मैं पागल हो रही हूँ!" उनकी आवाज़ अब एक जानवर की तरह कराह रही थी।
उनकी तड़प अब उस स्तर पर पहुँच गई थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था और उनकी आँखों से उत्तेजना के आँसू बहने लगे थे। मैंने देखा कि उनकी चूत अब पूरी तरह से भीग चुकी थी और मेरा चेहरा उनके उस मीठे और गंदे रस से लथपथ हो गया था। "स्लर्प... स्लर्प... चप..." मैं अपनी जीभ की गति और तेज़ कर रहा था, जैसे मैं उनकी चूत के मांस को चबाना चाहता हूँ।

"आह्ह्ह्ह... नहीं... बेटा... बस कर... मैं... मैं फटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!" उनकी चीख पूरे कमरे में गूँज उठी। उनकी जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं और वो बार बार अपने पैरों को सिकोड़ रही थीं, जैसे वो अपने चरम सुख (orgasm) को रोकने की कोशिश कर रही हों, लेकिन मेरी जीभ का हर एक प्रहार उन्हें उस किनारे पर धकेल रहा था।

मैंने उनकी तड़प को और भड़काने के लिए एक चाल चली। मैंने अपनी जीभ को उनके क्लिटोरिस पर रखकर एक तेज़ और गोल चक्कर काटना शुरू किया और साथ ही अपनी उंगलियों को उनकी चूत के अंदर गहराई तक घुसा दिया। "स्लर्प... चप... उम्ममम..." मेरी उंगलियाँ उनकी गीली दीवारों को रगड़ रही थीं और मेरी जीभ उनके सबसे संवेदनशील हिस्से को ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी।

"ओह्ह्ह्ह... आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... हाँ... वहीं... वहीं कर! मैं... मैं आ रही हूँ... मैं आ रही हूँ... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी। उनके शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा और उनकी चूत से रस का एक तेज़ फव्वारा निकला जो सीधे मेरे मुँह में जा गिरा। वो अपने चरम सुख की लहरों में डूब रही थीं, उनका पूरा शरीर थरथरा रहा था।

लेकिन मैंने उन्हें पूरी तरह से ढीला नहीं होने दिया। जैसे ही उनकी पहली लहर शांत होने वाली थी, मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल लीं और अपना चेहरा उनकी चूत से हटाकर उनके चेहरे के पास ले गया। वो हाँफ रही थीं, उनकी आँखें आधी खुली थीं और उनके होंठ काँप रहे थे। वो पूरी तरह से बेजान और प्यासी लग रही थीं।

मैंने अपना खड़ा हुआ, तपा हुआ लिंग उनके चेहरे के सामने किया। "मम्मी, अब खेल खत्म हुआ। अब असली मज़ा शुरू होगा।" मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के, एक भूखी जानवर की तरह अपना मुँह खोला और मेरे लिंग को "...अपने होंठों के बीच ले लिया। उनकी आँखें पूरी तरह से मदहोश थीं और उनके चेहरे पर एक ऐसी वासना थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उन्होंने मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को अपनी जीभ से सहलाया और फिर उसे अपने मुँह के अंदर गहराई तक खींच लिया। "स्लर्प... गल्प... गल्प..." उनके मुँह की गर्मी और उनकी जीभ की गीली रगड़ ने मेरे दिमाग के सारे तार ढीले कर दिए।

"उम्ममम... म्म्ममम..." वो मेरे लिंग को अपने मुँह में ऐसे चूस रही थीं जैसे वो उनकी आखिरी भूख हो। उनकी जीभ मेरे लिंग के नीचे के हिस्से (frenulum) पर बहुत ही ज़ोर से रगड़ रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." उनके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें मेरे कानों में किसी नशीले संगीत की तरह गूँज रही थीं। मैंने उनके सिर को पकड़ लिया और उन्हें और भी ज़ोर से चूसने के लिए मजबूर किया। "हाँ मम्मी... ऐसे ही... और गहराई तक..." मैंने दांत पीसते हुए कहा।

लेकिन मैंने उन्हें बहुत देर तक मुँह से चूसने नहीं दिया। मैं चाहता था कि वो उस तड़प में तड़पें जो सिर्फ मेरे लिंग के अंदर जाने से ही खत्म होगी। मैंने उनके बालों को पकड़ा और उन्हें झटके से पीछे की ओर धकेला। "आह्ह्ह्ह... बेटा... अब और नहीं... मुझे अंदर चाहिए... अभी के अभी!" उन्होंने कराहते हुए कहा, उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ मेरा लिंग समाया हुआ था।

मैंने अपना लिंग उनके चेहरे से हटाया और उनके पैरों को और भी ज़्यादा ऊपर की ओर मोड़ दिया, जिससे उनकी चूत अब बिल्कुल मेरे सामने खुली और बेपर्दा खड़ी थी। उनकी चूत अभी भी मेरे जीभ के रस और उनके अपने रस से पूरी तरह से लथपथ और चमक रही थी। "स्लर्प... चप..." उनकी चूत की दीवारों से निकलने वाला रस अभी भी रिस रहा था।मैने वो सारा रस अपने हाथ से पोंछकर अपने लंड और अंडकोशों पर मिल दिया,जिसके कारण मेरी उतेजना और भी बढ़ गई।मेरा लंड अब बहुत ही सख्त हो गया था,इतना सख्त कि अब बर्दास्त के बाहर था और इंतजार करना,****मैंने अपना लिंग उठाया और सीधे उनकी चूत के मुहाने पर टिका दिया। "मम्मी, अब आप तैयार हो जाइए, क्योंकि अब मैं रुकने वाला नहीं हूँ।" मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा। मैंने एक ज़ोरदार झटका दिया और अपना पूरा लिंग उनकी तंग और गीली चूत के अंदर गहराई तक उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... आह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी चीख पूरे कमरे की दीवारों से टकराकर वापस आई।

उनकी चूत की तंग पकड़ ने मुझे लगभग पागल ही कर दिया। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरा लिंग चारों तरफ से जकड़ कर उसे चूस रही हों। मैंने तुरंत ही अपनी कमर चलाना शुरू कर दिया। "धप... ध"...धप धप धप धप! मेरी रफ्तार अब इतनी तेज़ हो गई थी कि बिस्तर के पायदान तक हिलने लगे थे। मम्मी की कराहें अब चीखों में बदल चुकी थीं। उनकी चूत की तंग पकड़ और उस गर्मी ने मुझे पागल कर दिया था, लेकिन मैं चाहता था कि वो इस वासना के चरम पर खुद को पूरी तरह समर्पित कर दें।

अचानक, मम्मी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने मेरे कंधों को अपने हाथों से मज़बूती से पकड़ लिया और अपनी कमर को बिस्तर से ऊपर की ओर उठा लिया। "बेटा... अब और नहीं... मुझे ऊपर आने दो... मुझे खुद को तुम्हारे ऊपर रखना है! मैं तुम्हें और भी गहराई से महसूस करना चाहती हूँ!" उनकी आँखों में एक जंगलीपन था, एक ऐसी भूख जो अब तक छुपी हुई थी।

इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, उन्होंने मुझे बिस्तर पर पीछे की ओर धकेल दिया। मैं बस देखता रह गया जब उन्होंने अपने घुटनों के बल बैठकर मेरे ऊपर अपनी जगह बनाई। उन्होंने अपने दोनों पैर मेरी कमर के दोनों ओर फैला दिए और अपने हाथों को मेरे सीने पर टिका दिया। अब वो मेरे ऊपर थीं, एक रानी की तरह जो अपने राजा को पूरी तरह अपने वश में करना चाहती थी।

"आह्ह्ह्ह्ह... बेटा... देखो मैं कैसे करती हूँ," उन्होंने हाँफते हुए कहा। उन्होंने धीरे से अपने कूल्हों को नीचे की ओर झुकाया और अपने गीले छेद को मेरे लिंग के सिरों पर टिकाया। जैसे ही उन्होंने अपना भार नीचे डाला, मेरा पूरा लिंग उनकी तंग और गर्म चूत के अंदर एक झटके में समा गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... इतना बड़ा... इतना गहरा!" उनकी आवाज़ में एक अजीब सी संतुष्टि और दर्द का मिश्रण था।

अब कंट्रोल उनके हाथों में था। उन्होंने अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू किया। "स्लर्प... चप... धप... धप..." उनकी चूत की गीली दीवारों और मेरे लिंग के बीच का घर्षण अब और भी ज़ोरदार हो गया था क्योंकि अब वो खुद अपनी गति तय कर रही थीं। वो ऊपर आतीं और फिर पूरी ताकत के साथ नीचे बैठतीं, जिससे मेरा लिंग उनके गर्भाशय के मुहाने को ज़ोर ज़ोर से टक्कर मारता। "धप! धप! धप!"

"ओह्ह्ह्ह... बेटा... हाँ... ऐसे ही... आह्ह्ह्ह्ह!" वो अपनी आँखें बंद करके अपना सिर पीछे की ओर झुका रही थीं। उनकी छाती तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी और उनके पसीने से लथपथ शरीर से एक मदहोश कर देने वाली गंध आ रही थी। वो अब पागलों की तरह ऊपर नीचे हो रही थीं, जैसे वो मेरे
* लिंग को अपनी चूत की गहराई में पूरी तरह से समा लेना चाहती हों। उनकी गति अब बेकाबू हो चुकी थी। वो इतनी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थीं कि उनके भारी स्तन मेरे सीने से टकरा रहे थे और उनकी चूत से निकलने वाला गीला रस मेरे पेट पर गिर रहा था। "स्लर्प... चप... धप! धप! धप!" हर प्रहार के साथ उनके शरीर से एक गंदी और कामुक आवाज़ निकल रही थी।

"आह्ह्ह्ह्ह... बेटा... मैं... मैं बस पहुँचने वाली हूँ... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़! बहुत ज़ोर से लग रहा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब एक चीख जैसी लग रही थी। उनकी कमर अब झटकों के साथ नहीं, बल्कि एक लय में घूम रही थी एक गोल चक्कर की तरह। वो अपने कूल्हों को मेरे लिंग के चारों ओर रगड़ रही थीं, जिससे
मेरा लंड कि do I piston की तरह उनकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था।

मैंने देखा कि उनकी आँखें पूरी तरह से सफ़ेद होने लगी थीं और उनका पूरा शरीर काँप रहा था। वो चरम सुख (orgasm) की दहलीज पर थीं। मैंने उनके कूल्हों को मज़बूती से पकड़ लिया और उन्हें और भी ज़ोर से नीचे की ओर दबाया। "मम्मी, खुद को छोड़ दो! पूरा अंदर ले लो!" मैंने गुर्राते हुए कहा।

जैसे ही मैंने उन्हें नीचे की ओर खींचा, मम्मी का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ अकड़ गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
"...आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

मम्मी की कराहें इतनी तेज़ थीं कि मुझे लगा वो पागल हो जाएँगी। मैं इतना कामुक हो गया था कि मेरा खुद पर काबू नहीं रहा। मैंने उनके कूल्हों को ज़ोर से पकड़ा और उन्हें पीछे की ओर धकेल दिया ताकि वो बिस्तर पर पेट के बल लेट जाएँ। उनकी हालत देखकर मेरी वासना और भी भड़क उठी। मैंने झटके से उनके ऊपर चढ़ते हुए उनकी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया। अब उनकी चूत बिल्कुल मेरी आँखों के सामने थी, पूरी तरह से खुली और लाल हो चुकी थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से उनके भारी और पसीने से ppलथपथ स्तनों को कस कस कर दबाना शुरू किया। "आह्ह्ह्ह... बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... बहुत ज़ोर से... आह्ह्ह्ह!" उनके स्तनों को मसलते हुए मैंने अपना लिंग उनकी चूत के मुहाने पर टिकाया और एक ज़ोरदार झटका दिया। "धप!" मेरा पूरा लिंग उनकी तंग और गीली गहराई में समा गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बहुत गहरा... बेटा... आह्ह्ह्ह्ह!"

अब मैंने अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया। मैं उनके कंधों पर टिकी उनकी टांगों को और ऊपर खींच रहा था ताकि मेरा लिंग उनकी चूत के सबसे निचले हिस्से तक पहुँच सके। "धप! धप! धप! धप!" मेरा लिंग उनके अंदर अंदर बाहर होने की आवाज़ और उनके स्तनों के दबने की आवाज़ मिलकर एक नशीला माहौल बना रही थी। मैं उनके स्तनों को इतनी ज़ोर से दबा रहा था कि मेरी उंगलियों के निशान उनकी खाल पर पड़ रहे थे। "आह्ह्ह्ह... हाँ... ऐसे ही... और ज़ोर से... धप! धप! धप!"

"...धप! धप! धप! मेरी रफ्तार और उनके स्तनों को मसलने के तरीके ने उन्हें एक अलग ही पागलपन की स्थिति में पहुँचा दिया था। मम्मी अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थीं। उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए मुझे अपने नीचे ज़ोर से धक्का दिया और मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, वो मेरे ऊपर आकर बैठ गईं।

लेकिन इस बार वो सिर्फ मेरे ऊपर नहीं थीं; उन्होंने अपने शरीर को एक बहुत ही कामुक औरะ विचित्र तरीके से घुमा लिया था। उन्होंने अपनी कमर को पूरी तरह से पलट दिया। अब उनकी चूत मेरे मुँह के ठीक ऊपर थी, और उनका मुँह मेरे लिंग के सिरों पर था। हम बिल्कुल **69 position** में थे। "आह्ह्ह्ह... बेटा... अब देखो मैं तुम्हें कैसे चूसती हूँ और तुम मुझे कैसे तृप्त करते हो," उन्होंने हाँफते हुए कहा।

उनकी चूत का गीलापन और उसकी गर्मी मेरे होठों और जीभ को छू रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." जैसे ही उन्होंने अपनी कमर को नीचे झुकाया, उनकी चूत का मुहाना मेरे मुँह पर आकर चिपक गया। उनकी चूत से रिस रहा गरम रस मेरे मुँह में भर गया। "उम्ममम... म्म्ममम..." मैंने उनके रस का स्वाद लेते हुए अपनी जीभ को उनकी चूत की दरारों में घुमाना शुरू कर दिया।

उधर, मम्मी का मुँह मेरे लिंग के एकदम ऊपर था। उन्होंने अपने होंठों को फैलाया और मेरे लिंग को अपने मुँह के अंदर गहराई तक खींच लिया। "गल्प... स्लर्प... गल्प...!" उनकी जीभ मेरे लिंग के निचले हिस्से को बार बार सहला रही थी। अब एक तरफ से मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था और दूसरी तरफ से वो मेरे लिंग को अपने मुँह में भर भर कर चूस रही थीं।

पूरे कमरे में सिर्फ दो तरह की आवाज़ें गूँज रही थीं एक तरफ मेरी जीभ के उनकी चूत पर चलने की 'स्लर्प' आवाज़ और दूसरी तरफ उनके मुँह से मेरे लिंग को चूसने की 'गल्प... गल्प...' की आवाज़। "आह्ह्ह्ह... बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... बहुत अच्छा लग रहा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की कराहें अब उनके मुँह के अंदर से ही आ रही थीं क्योंकि उनका मुँह मेरे लिंग से भरा हुआ था। वासना का यह स्तर इतना ऊँचा था कि मुझे लगा मेरा शरीर फटने को तैयार है।"
"...गल्प... स्लर्प... गल्प... हम दोनों ही उस चरम सुख के नशे में डूबे हुए थे कि अचानक मम्मी ने अपना मुँह मेरे लिंग से हटाया। वो बुरी तरह हाँफ रही थीं, उनके चेहरे पर वासना की एक अजीब सी चमक थी और उनकी आँखें पूरी तरह से मदहोश थीं। उन्होंने मेरे सीने पर हाथ रखा और मुझे थोड़ा पीछे धकेलते हुए कहा।
"...मम्मी ने जैसे ही अपना मुँह मेरे लिंग से हटाया, उनके होंठों से लार की एक लंबी लकीर टपक कर मेरे पेट पर गिर रही थी। उनकी साँसें इतनी तेज़ थीं कि जैसे कोई दौड़कर आया हो। "बेटा... अब और इंतज़ार नहीं होता... अब बस सीधे अंदर डाल दे... आह्ह्ह्ह्ह!" उन्होंने अपनी टांगों को और फैला दिया, उनकी चूत का गुलाबी और गीला छेद अब पूरी तरह से खुला हुआ और मेरे लिंग के लिए छटपटा रहा था।

मैंने उनके ऊपर झुककर अपनी पोजीशन बनाई। जैसे ही मैंने अपना भारी और सख्त लिंग उनकी चूत के मुहाने पर टिकाया, मम्मी ने अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दिया। "धप!" मेरा लिंग उनकी तंग और गरम चूत के अंदर गहराई तक समा गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... तू मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की चीख निकल गई और उन्होंने अपने नाखून मेरे कंधों में गड़ा दिए।

हम दोनों वासना के उस भंवर में खो गए थे जहाँ न समय का होश था और न ही दुनिया का। "धप! धप! धप! धप!" मेरी कमर की हर चोट के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। "स्लर्प... छप... छप..." उनकी चूत का गीला रस और मेरा वीर्य मिलकर एक अजीब सी आवाज़ पैदा कर रहे थे। हम दोनों एक दूसरे में पूरी तरह समा चुके थे। "आह्ह्ह्ह... बेटा... और ज़ोर से... और गहराई तक... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की कराहें अब बेकाबू हो रही थीं।

तभी, जैसे जैसे हम चरम सुख (orgasm) के करीब पहुँच रहे थे, बाहर से एक बहुत ही शांत और पवित्र आवाज़ सुनाई देने लगी , दूर मंदिर से शंख की आवाज़ और मंत्रों के जाप की मीठी आवाज़े गूँज सुनाई देने लगी। ..." मंदिर की घंटियों की 'टन टन' और मंत्रों की कानों में रास घोलने वाली उस पवित्र आवाज के उल्ट , कमरे के अंदर चल रहा ये चुदाई का खेल घोर कामुक , अनैतिक और पाप से भरा हुआ था ।

बाहर से आ रही वो 'पवित्र' आवाज़ और कमरे के अंदर चल रही वो 'अधार्मिक' और 'गंदी' चुदाई यह विरोधाभास हमारे उत्तेजना को और भी बढ़ा रहा था। मंदिर की घंटियों की आवाज़ के साथ मेरी कमर की गति और तेज़ हो गई। "टन... टन... टन..." और मेरी हर चोट के साथ मम्मी का शरीर झटके खा रहा था। "धप! धप! धप!"

...बेटा... मैं आने वाली हूँ... आह्ह्ह्ह्ह! बस थोड़ा और... और गहराई तक... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़!" मम्मी की आवाज़ अब एक चीख में बदल रही थी। मंदिर की घंटियों की आवाज़ तेज़ हो रही थी 'टन टन टन टन' और जैसे जैसे मंत्रों का स्वर ऊँचा हो रहा था, मेरी कमर की गति भी पागलपन की हद तक पहुँच गई थी। "धप! धप! धप! धप!"

बाहर से आ रही वो पवित्र ध्वनि और कमरे के अंदर हमारी चूत और लिंग के बीच होने वाला वो घिनौना और कामुक घर्षण 'छप... छप... स्लर्प...' एक ऐसा नशा पैदा कर रहा था जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था। मुझे महसूस हो रहा था कि मम्मी की चूत की दीवारें मेरे लिंग को ज़ोर से भींच रही हैं, जैसे वो मुझे अपने अंदर सोख लेना चाहती हों। "आह्ह्ह्ह्ह! बेटा... मेरा छेद... मेरा छेद फट जाएगा... तेरा बहुत बड़ा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी के चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं।
Like Reply


Messages In This Thread
Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 08-08-2026, 11:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 01:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-08-2026, 02:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 09:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:19 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:21 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 01:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 03:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 08:41 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:18 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 01:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Ella - 12-08-2026, 02:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 02:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 04:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nomita - 12-08-2026, 04:17 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 05:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Suhana. - 12-08-2026, 07:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by shalini - 12-08-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 13-08-2026, 09:39 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-08-2026, 12:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 08:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 03:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 12:30 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 14-08-2026, 03:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fanfunda - 14-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 09:39 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 15-08-2026, 10:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 16-08-2026, 12:37 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 10:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nehapatel - 16-08-2026, 03:26 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 17-08-2026, 06:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-08-2026, 08:03 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 17-08-2026, 09:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 18-08-2026, 05:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 18-08-2026, 08:45 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 18-08-2026, 10:22 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Huzmakhan - 18-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rijwana Ansaari - 18-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by SweetSonali - 18-08-2026, 02:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 18-08-2026, 08:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:41 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:44 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 20-08-2026, 05:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 21-08-2026, 07:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 22-08-2026, 06:55 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 10:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 10:51 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 03:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 05:07 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by srider69 - 22-08-2026, 07:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 08:51 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by wetpussy - 23-08-2026, 02:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 23-08-2026, 03:06 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:25 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:29 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 24-08-2026, 07:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 24-08-2026, 09:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 10:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 24-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:01 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:02 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:31 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 05:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Kodom Ali Mastan - 25-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rizwan007 - 25-08-2026, 01:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by बहनचोद - 25-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Prativa Rani Saha - 25-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 02:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 02:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nova Dewan - 27-08-2026, 12:26 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Anusree - 27-08-2026, 01:36 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rinkp219 - 28-08-2026, 11:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 29-08-2026, 12:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 29-08-2026, 01:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by KGB - 30-08-2026, 10:26 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lavoni - 30-08-2026, 01:59 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Dhakaiya Mastan - 30-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Phallus - 30-08-2026, 02:50 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 31-08-2026, 06:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 31-08-2026, 08:04 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by LENNY - 31-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Tasnova - 31-08-2026, 02:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 31-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Intruder - 01-09-2026, 11:36 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 01-09-2026, 01:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 01-09-2026, 01:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Peeping Tom - 01-09-2026, 05:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 02-09-2026, 03:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lund8 - 01-09-2026, 10:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lund8 - 02-09-2026, 11:11 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 02-09-2026, 12:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 02-09-2026, 08:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 03-09-2026, 10:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 06-09-2026, 03:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Valson - 06-09-2026, 06:50 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 09-09-2026, 01:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Vik88 - 09-09-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Hijabi Maal - 09-09-2026, 02:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lavoni - 09-09-2026, 02:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Esha. - 10-09-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 03:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 03:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-09-2026, 04:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 05:22 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Eswar P - 10-09-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 10:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-09-2026, 05:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 10:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by MARVIN - 10-09-2026, 07:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 10:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 10-09-2026, 11:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-09-2026, 02:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-09-2026, 02:52 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-09-2026, 06:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-09-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Viraj007 - 14-09-2026, 12:55 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-09-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-09-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Bulldozer - 14-09-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 11:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Blackheart - 16-09-2026, 11:56 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 07:47 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 07:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 09:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 16-09-2026, 09:44 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Farah - 16-09-2026, 09:55 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sharmin Shila - 16-09-2026, 10:03 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Pakeeza chut - 16-09-2026, 10:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-09-2026, 08:38 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-09-2026, 04:55 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 17-09-2026, 05:14 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-09-2026, 05:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 17-09-2026, 10:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 18-09-2026, 08:57 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 18-09-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-09-2026, 04:41 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:42 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:55 PM



Users browsing this thread: 3 Guest(s)