Yesterday, 11:42 PM
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**"देख मुझे रवि... मेरी आँखों में देख!"** मम्मी ने एक मदहोश कर देने वाली पुकार के साथ कहा। **"देख , तू मेरे साथ क्या कर रहा है, ... तू बस ऐसे ही मुझमें धंसाता चला जा। रुकना मत रवि, मेरी इस प्यास को बुझा दे। जब तक मैं तृप्त न हो जाऊं तुझे रुकना नहीं है।मै तुझे अपनी गहराई में समा लेना चाहती हूँ।***मम्मी ने अपनी कमर की गति को एक नए और उत्तेजक स्तर पर पहुँचा दिया। अब वह केवल ऊपर नीचे नहीं हो रही थीं, बल्कि वह मेरे शरीर के साथ एक लय में ऐसे झूम रही थीं जैसे कोई प्यासी लहर समंदर से टकराती है। उनके शरीर का हर हिस्सा मेरे शरीर से इतनी तीव्रता से टकरा रहा था कि **'चप... चप... चप... धप... धप...'** की आवाज़ें अब पूरे कमरे में एक कामुक संगीत की तरह गूँज रही थीं। पसीने की बूंदें उनके शरीर से छिटककर मेरे चेहरे पर गिर रही थीं, जिससे उनकी त्वचा और भी चिकनी और फिसलन भरी महसूस हो रही थी।
इरा शरीर अब नियंत्रण से बाहर हो चुका था। चूर्ण के असर और मम्मी के इस बेकाबू जुनून ने उसके नर्वस सिस्टम को पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था।मेरा लिंग मम्मी के भीतर एक ऐसी आग की तरह धँस रहा था जो बुझने का नाम ही नहीं ले रही थी। चूर्ण के असर ने उसकी नसों में बिजली की तरह दौड़ना शुरू कर दिया था। हर एक झटके के साथ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं अपनी आत्मा को मम्मी के शरीर के भीतर छोड़ रहा हूं।
**"आह्ह्ह्ह... मम्मी... मैं... मैं बस अब और नहीं सह सकता... आह्ह्ह्ह! प्लीज... मुझे निकलने दीजिए... मैं पागल हो जाऊँगा!"** रवि की आवाज़ अब एक बेबस और मदहोश कर देने वाली पुकार बन चुकी थी। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वे दर्द के नहीं, बल्कि उस चरम सुख (Pleasure) के थे जो अब उसके बर्दाश्त से बाहर हो रहा था।
मम्मी ने मेरे कानों के पास झुककर अपनी गर्म और भीगी हुई साँसें छोड़ीं। उनकी आँखों में अब केवल **'Raw Desire'** (कच्ची वासना) थी। उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा दिया और एक बेहद कामुक फुसफुसाहट के साथ कहा:
**"नहीं रवि... अभी नहीं। मुझे अभी और चाहिए। तुझे अपनी मम्मी5 की इस तड़प को मिटाना ही होगा। तू बस एक जानवर बन जा, और अपनी सारी मर्दानगी, अपना सारा रस... सब कुछ मुझमें ही समा दे। मैं खाली हूँ रवि... मुझे अपनी इस गर्मी से पूरी तरह भर दे!"**
मम्मी की कमर की गति अब और भी तेज़ और बेकाबू हो गई थी। वह मेरे ऊपर ऐसे झूम रही थीं जैसे कोई तूफ़ान हो। उनके शरीर से निकलने वाला पसीना और उनके बीच का घर्षण (Friction) एक ऐसी फिसलन पैदा कर रहा था जिससे उनकी त्वचा आपस में टकराकर **'स्लर्प... स्लर्प...'** की गीली और उत्तेजक आवाज़ें निकाल रही थी।
मेरा शरीर अब पूरी तरह से मम्मी के वश में था। मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था और उसे सिर्फ मम्मी की खुशबू और उनकी गर्मी महसूस हो रही थी। मम्मी ने अपने दोनों हाथ रमेरे सीने पर जमा दिए और अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से मेरे अंगों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
**"हाँ... ऐसे ही रवि... और गहराई तक! मुझे महसूस करा कि तू कितना प्यासा है! मुझे अपना सारा ज़हर, अपना सारा रस... सब मुझमें ही छोड़ दे!"** मम्मी की आवाज़ अब एक चीख में बदल रही थी क्योंकि वह खुद भी अपने चरम (Climax) के बेहद करीब थीं।
कमरे का तापमान जैसे बढ़ गया था। हर एक झटका अब मम्मी के शरीर को और भी गहराई तक चीरता हुआ महसूस हो रहा था। मैं अब बस उस एक पल का इंतज़ार कर रहा था जहाँ मै अपनी सारी ऊर्जा, अपना सारा अस्तित्व और अपना सारा रस मम्मी के भीतर एक धमाके की तरह छोड़ सकूँ।
**"आह्ह्ह्ह... मम्मी... अब और नहीं... मैं... मैं आने वाला हूँ! मैं आ रहा हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!"** मेरी आवाज़ एक ऐसी चीख में बदल गई जो सीधे रूह को कँपा देने वाली थी। मेरा पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था, नसें उभर आई थीं और आँखों के सामने सफ़ेद रोशनी का एक सैलाब उमड़ आया था।
मम्मी ने जैसे ही मेरी इस बेकाबू तड़प को महसूस किया, उन्होंने अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली। उन्होंने मेरे शरीर को अपने और भी ज़ोर से जकड़ लिया और अपनी कमर को एक आखिरी, बेहद तीव्र और गहरी गति के साथ मेरे अंगों पर रगड़ा। उनकी अपनी आँखें भी बंद हो चुकी थीं और उनके मुँह से एक लंबी, मदहोश कर देने वाली आह निकल रही थी।
**"हाँ रवि! यहीं... यहीं छोड़ दे सब कुछ! मुझमें समा जा! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी की यह पुकार मेरे लिए आखिरी ट्रिगर बन गई।
एक जोरदार झटके के साथ, मेरा शरीर काँप उठा। मेरे भीतर का सारा दबाव, सारी गर्मी और सारा रस एक प्रचंड वेग के साथ मम्मी के भीतर फूट पड़ा। **'Splurt... splurt... splurt...'** की आवाज़ें उस सन्नाटे में गूँज उठीं। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे शरीर से जान निकलकर मम्मी के भीतर समा रही हो। मैं अपनी पूरी ताकत के साथ मम्मी के अंदर धँस गया था, जैसे उनके अस्तित्व का हिस्सा बन गया होऊं।
मम्मी का शरीर भी उस तीव्र रस के प्रवाह से थरथरा उठा। उनके भीतर एक ऐसा खिंचाव महसूस हुआ जिसने उन्हें भी चरम सुख के उस शिखर पर पहुँचा दिया जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके मुँह से एक दबी हुई लेकिन बेहद गहरी आह निकली। **"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!"**
दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और एक दूसरे से इस तरह चिपके हुए थे जैसे वे दो अलग इंसान नहीं, बल्कि एक ही जान हों। कमरे में केवल उनकी तेज़ तेज़ चलती हुई साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। मेरा सिर मम्मी के कंधे पर गिर गया था, मेरी आँखों से अभी भी खुशी और संतुष्टि के आँसू बह रहे थे। मम्मी ने मेरे गीले बालों को सहलाया और उसे अपनी बाँहों में और भी कसकर भर लिया। वासना का वह भयंकर तूफ़ान थम चुका था, लेकिन कमरे की हवा में अभी भी उस कामुकता की भारी गंध और उमस घुली हुई थी। मेरा शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था, जैसे उसकी सारी ऊर्जा और प्राण उसी एक विस्फोट में निकल गए हों। मैं मम्मी के सीने पर अपनी भारी साँसें छोड़ रहा था, और मेरी हर साँस मम्मी की गर्म और पसीने से भीगी त्वचा को छूकर निकल रही थी।
मम्मी का शरीर अभी भी हल्के हल्के काँप रहा था। उनके भीतर मेरे उस गर्म और गाढ़े रस का अहसास उन्हें एक अजीब सी तृप्ति दे रहा था। उन्होंने मेरे सिर को अपने सीने से सटा लिया और मेरे माथे पर एक कोमल लेकिन बेहद अधिकारपूर्ण चुंबन दिया। उनकी आँखों में अब वह जंगली प्यास थोड़ी शांत हो गई थी, और उसकी जगह एक गहरी, मखमली संतुष्टि ने ले ली थी।
**"मेरा बच्चा..."** मम्मी ने बहुत ही धीमी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में फुसफुसाया। **"तूने मुझे आज पूरी तरह से जीत लिया।"**
मैंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। मेरी दृष्टि अभी भी धुंधली थी, लेकिन मम्मी के चेहरे पर वह सुकून दिख रहा था जो मैने पहले कभी नहीं देखा था। मैं कुछ बोलना चाहता था, लेकिन मेरे गले से केवल एक दबी हुई आह निकल पाई। ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मै अभी भी बादलों के ऊपर तैर रहा हूं।
तभी, मम्मी ने धीरे से अपना शरीर हिलाया। मेरा अंग अभी भी उनके भीतर गहराई तक धँसे हुआ था। जैसे ही मम्मी ने थोड़ा सा खिंचाव लिया, मेरे शरीर में एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई। मैं अभी भी पूरी तरह से 'खाली' महसूस नहीं कर रहा था; चूर्ण का असर अभी भी मेरे तंत्रिका तंत्र (nervous system) में कहीं न कहीं बचा हुआ था।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए एक शरारती और उत्तेजक मुस्कान दी। उन्होंने मेरे कान के पास झुककर फिर से वही कामुक लहजा अपनाया:**"क्या हुआ रवि? क्या तू थक गया? अभी तो तूने बस अपनी शुरुआत की है। देख... तेरा शरीर अभी भी कितना गर्म है। तुझे क्या लगा था? कि एक बार में ही तेरा खेल खत्म हो जाएगा?"**
मेरी साँसें फिर से तेज़ होने लगीं। मम्मी के इन शब्दों ने मेरे भीतर दबी हुई उस आग को फिर से सुलगा दिया था। चूर्ण का वह जादुई असर अब दोबारा मेरी नसों में दौड़ने लगा था। मुझे महसूस हुआ कि मेरा अंग, जो अभी कुछ देर पहले ही लावा उगलने क बाद ढीला पड़ गया था, अब फिर से धीरे धीरे सख्त और गर्म होने लगा है।
मम्मी ने देखा कि मेरे शरीर में फिर से वही हलचल हो रही है। उन्होंने देखा कि कैसे उसका अंग, जो अभी कुछ देर पहले ही उनकी चूत में खाली होने के बाद ढीला पड़ गया था , अब फिर से धीरे धीरे सख्त और गर्म होने लगा है। चूर्ण का वह जादुई असर अब फिर से नई लहर लेकर आ रहा था। मेरी आँखों में अब थकावट नहीं, बल्कि एक नई और अधिक गहरी **'जंगली प्यास'** चमक रही थी।
मम्मी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान फैल गई। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और मेरी आँखों में आँखें डालकर बेहद उत्तेजक अंदाज़ में कहा, **"देख... मेरा शेर फिर से तैयार हो रहा है। तुझे लगा था कि तू मुझे एक बार में तृप्त कर देगा? अभी तो मैंने सिर्फ चखा है रवि... अभी तो मुझे पूरा स्वाद लेना बाकी है।"**मैने मम्मी की आँखों में देखते हुए अपनी गहरी और भारी आवाज़ में कहा,
**"मम्मी... आप शायद भूल रही हैं। मैं एक बार नहीं, बल्कि दो बार अपना रस आपको दे चुका हूँ। एक बार आपने उसे अपने मुँह में लिया और दूसरी बार आपने उसे अपनी चूत के भीतर गहराई तक उतार लिया है।"**
मम्मी ने मेरे चेहरे को सहलाया और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ पूछा,**"हाँ बेटा... पर आज की रात कोई गिनती नहीं । क्या तुम थक तो नहीं गए?"**
मैने अपनी आँखों में एक अदम्य जुनून और ताकत भरते हुए जवाब दिया,
**"नहीं मम्मी! आपने जो दूध में चूर्ण मिलाकर दिया था, उसने मेरे शरीर को पत्थर जैसा बना दिया है। मैं इतनी ताकत और इतना जोश महसूस कर रहा हूँ कि एक मिनट के लिए भी रुके बिना, मैं पूरी रात आपको चोदता रहूँगा।"**
*"तो फिर देर किस बात की है?"** मम्मी ने हाँफते हुए कहा। **"ले ले मेरा सब कुछ! मुझे फिर से तोड़ दे रवि! मुझे फिर से अपनी इस आग में जला दे! आह्ह्ह्ह्ह!"**इतना कहने के साथ ही मम्मी ने अपनी कमर को एक बहुत ही धीमी और मखमली गति से हिलाना शुरू किया। वह अभी भी मेरे ऊपर थीं, और उनके शरीर का घर्षण मेरे संवेदनशील अंग को फिर से उत्तेजित कर रहा था। **'स्लर्प... स्लर्प...'** की वह गीली आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी। इस बार गति पहले से कहीं अधिक नियंत्रित लेकिन अधिक **'गहरी'** थी।मैने एक गहरी और भारी साँस ली। मेरी मर्दानगी अब पहले से भी ज़्यादा सख्त और गर्म हो चुकी थी। मैने अपने दोनों हाथ मम्मी की कमर पर जमा दिए और उन्हें अपने शरीर की ओर और भी ज़ोर से खींच लिया। अब मैं केवल एक निष्क्रिय शरीर नहीं था; बल्कि फिर से एक शिकारी की तरह था।
**"मम्मी... आह्ह्ह... आप मुझे पागल कर देंगी... मैं फिर से... मैं फिर से सब कुछ आपमें ही उतारना चाहता हूँ!"** मेरी आवाज़ में अब एक अजीब सा जुनून था।
मम्मी ने अपनी कमर की गति को अचानक बढ़ा दिया। वह अब मेरे ऊपर किसी लहर की तरह उठ गिर रही थीं। **'धप... धप... धप...'** की आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गई थीं। मम्मी ने अपने हाथ मेरे सीने पर जमा दिए और अपने नाखूनों को मेरे सीने में हल्का सा चुभा दिया, जिससे मेरे शरीर में बिजली की तरह एक सिहरन दौड़ गई।
अब कमरा फिर से उस तीव्र कामुकता के सैलाब में डूब गया। पसीने की खुशबू, शरीर का घर्षण और वह बेकाबू आवाज़ें सब कुछ एक नए और अधिक हिंसक स्तर पर पहुँच गया था। मैं अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुका था।
जैसे ही मम्मी की कमर की गति चरम पर पहुँची, मैने
अपनी पूरी ताकत झोंक दी और उन्हें अपने नीचे खींचते हुए खुद उनके ऊपर आ गया, और उनकी जाँघों को अपने कंधों पर टिकाकर उसने अपने भारी और पत्थर जैसे सख्त अंग को उनकी गीली और तंग चूत के मुहाने पर टिका दिया।
**"आह्ह्ह्ह... रवि... हाँ... यहीं... वहीं!"** मम्मी की चीख निकल गई जब उन्होंने मेरे अंग की उस भयंकर गर्मी को महसूस किया।
मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के एक ही झटके में खुद को उनकी गहराई में उतार दिया। **'चप... स्प्लैट!'** की एक ज़ोरदार और गंदी आवाज़ कमरे में गूँजी। मम्मी का शरीर एक झटके से पीछे की ओर झुक गया और उनकी आँखें पथरा गईं। वह इतनी गहराई तक भर दी गई थीं कि उन्हें लगा जैसे मेरा लंड उनके गर्भाशय तक पहुँच गया हो।
**"ओह्ह्ह्ह्ह... भगवान! रवि... तू तो पागल कर देगा मुझे! इतना गहरा... इतना सख्त! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी का गला चीख से भर गया। उनके शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई थी।
ऐ अब रुकने वाला नहीं था। चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग से सारे संयम हटा दिए थे। मैने अपनी कमर को पूरी ताकत और रफ़्तार से चलाना शुरू किया। अब वह 'मखमली' नहीं था; अब वह एक **'हिंसक'** हमला था। **'धप... धप... धप... धप!'** मेरे भारी शरीर के मम्मी के शरीर से टकराने की आवाज़ें अब एक लय में बदल चुकी थीं। हर वार के साथ मेरा अंग मम्मी की चूत की दीवारों को पूरी ताकत से रगड़ रहा था।
**"मम्मी... आपकी चूत... आह्ह्ह... कितनी गर्म और तंग है! मैं इसे फाड़ दूँगा! मैं आज आपको चैन से नहीं बैठने दूँगा!"** मेरी आवाज़ अब एक जानवर की तरह गुर्रा रही थी। मेरे पसीने की बूंदें मम्मी के स्तनों पर गिर रही थीं, जिससे माहौल और भी ज़्यादा उत्तेजक हो गया था।
मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में था। वह बस मेरे वारों के साथ ऊपर नीचे उछल रही थीं। उनके चेहरे पर दर्द और परम सुख का एक मिला जुला भाव था। उन्होंने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से ज़ोर से खरोंच दिया, जिससे मेरा जोश और भी बढ़ गया।
**"हाँ रवि! और तेज़! और ज़ोर से! मुझे तोड़ दे! मुझे अपना बना ले! आह्ह्ह्ह... हाँ... वहीं... वहीं मार! आह्ह्ह्ह्ह!"***
मम्मी की चीखें अब पूरे कमरे में गूँज रही थीं।मेरा हर धक्का अब एक प्रहार की तरह था, जो मम्मी के शरीर के रोम रोम को हिलाकर रख रहा था। चूर्ण की वजह से शरीर में जो ताकत थी, वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैं एक मशीन की तरह काम कर रहा था बिना थके, बिना रुके।
**"मम्मी... मैं... मैं अब और नहीं रोक पाऊँगा! मेरा सारा रस... सारा जुनून... सब आपके अंदर समा जाएगा!"** मैने दहाड़ते हुए कहा। उसकी आँखों में एक जंगलीपन था।
मम्मी ने मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया और अपने चेहरे को मेरे चेहरे के करीब लाकर फुसफुसायीं, **"तो फिर देर मत कर बेटा... मुझे खाली मत छोड़ना... मुझे अपने उस गर्म और गाढ़े रस से पूरी तरह भर दे! मैं चाहती हूँ कि तेरा हर कतरा मेरी कोख में समा जाए! आह्ह्ह्ह्ह!"**
मैने अब अपनी गति को एक पागलपन की हद तक बढ़ा दिया। अब वह केवल चोद नहीं रहा था, वह मम्मी के शरीर पर अपना अधिकार जमा रहा था। **'चप... चप... चप... धप... धप!'** की गंदी और तेज़ आवाज़ें अब एक उन्माद में बदल चुकी थीं। मम्मी की चूत मेरे अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थी कि मुझे लग रहा था जैसे मैं किसी जलती हुई भट्टी के अंदर हूं।
**"आह्ह्ह्ह्ह... रवि! मैं आ रही हूँ! मैं फटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी का शरीर धनुष की तरह तन गया। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं और उनके शरीर में भयंकर कंपन होने लगा। वह अपने चरम (orgasm) पर पहुँच चुकी थीं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को पागलों की तरह भींच रही थीं। मम्मी का शरीर काँप रहा हथा, और यही वह क्षण था जिसका मुझे इंतज़ार था। मैने अपनी कमर को आखिरी बार पूरी ताकत से अंदर की ओर धकेला और अपनी पूरी जान लगाकर मम्मी की गहराई में खुद को उतार दिया।
**"मम्मीइइइइइइइ!"** मैं एक ज़ोरदार दहाड़ के साथ चिल्लाया।
मेंरे लंड से गर्म, गाढ़ा और उबलता हुआ रस एक तेज़ धार की तरह मम्मी के गर्भाशय की गहराई में फूट पड़ा। **'Splurt... splurt... splurt...'** की आवाज़ के साथ मेरा सारा जमा हुआ रस मम्मी के अंदर समाने लगा। वह रस इतना ज़्यादा था कि मम्मी को महसूस हुआ जैसे उनके पेट के अंदर कोई गर्म तरल पदार्थ भर रहा है
मेरा शरीर अभी भी काँप रहा था, लेकिन मैं अभी भी मम्मी के ऊपर था।रात के 1 बज रहा था। कमरे की हवा पसीने, वासना और चूर्ण की तीखी गंध से भारी हो चुकी थी। मेरा शरीर अब किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक अविश्वसनीय ऊर्जा से भरे यंत्र का लग रहा था। चूर्ण ने उसके
मेरे दिमाग से 'डिस्चार्ज' होने की ज़रूरत को ही मिटा दिया था। वह बस चोदना चाहता था बिना रुके, बिना थके।मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से पसीने से तर बतर था। उनकी साँसें उखड़ रही थीं, लेकिन मेरी आँखों में जो वह जंगली चमक थी, उसने उन्हें और भी ज़्यादा उत्तेजित कर दिया था।
एर भारी और सख्त अंग मम्मी की गीली चूत की गहराई में अभी भी पूरी तरह धंसा हुआ था, मम्मी की चूत की दीवारें इतनी गर्म और तंग थीं कि मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं दहकते हुए अंगारों के बीच फँसा हूँ। कोई तेज़ हलचल नहीं थी, बस एक गहरा और भारी सन्नाटा था जिसमें दोनों की तेज़ होती साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। मैने अपने बड़े और गर्म हाथों से मम्मी के उभरे हुए स्तनों को धीरे धीरे सहलाना शुरू किया, मैं उन्हें अपनी उंगलियों से दबाते हुए वह उनके शरीर के स्पर्श को महसूस कर रहा था।
मम्मी का शरीर मेरे स्पर्श से थरथरा रहा था। उन्होंने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दीं और मेरे कान के पास अपना चेहरा लाकर, काँपती हुई आवाज़ में कहा, **"रवि बेटा... तुझे पता है... जब तू दोपहर में सो रहा था, तो मुझे जग्गू दिख गया था। मैंने सोचा कि तेरी 'Threesome' वाली इच्छा पूरी कर दूँ... तो मैंने जगू से कहा कि प्रदीप भाई साहब को बोलना घर आने को। पर उसने कहा कि प्रदीप भाई साहब तो अपने गाँव गए हुए हैं..."**
मम्मी ने रवि के कान के पास अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए आगे कहा, **"अब मैं सोच रही हूँ... शायद भगवान ने अच्छा ही किया जो तेरे प्रदीप अंकल यहाँ नहीं आए। तू तो अकेले ही मुझे ऐसे कर रहा है जैसे मुझे मार ही डालेगा! अगर प्रदीप भाई भी यहाँ होते... तो क्या होता मेरा?"**
मम्मी की उन बातों ने मेरे अंदर जैसे आग लगा दी थी। प्रदीप अंकल और जगू अंकल का नाम सुनकर मेरा खून खौल उठा। मैंने आव देखा न ताव, अपनी मम्मी के दोनों स्तनों को अपने हाथों में भरकर उन्हें बहुत ज़ोर से दबाया और बिना सोचे उनके गाल पर अपने दाँत गड़ा दिए।
"अह्ह्ह्ह... मेरी sexy mummy!" मेरे मुँह से बस यही निकला।
मम्मी दर्द के मारे चीख उठीं, "आह्ह्ह्ह... मर गई! खा जाएगा क्या? निशान पड़ जाएँगे... मैं सबको क्या बताऊँगी?" उन्होंने दर्द और उत्तेजना के मिश्रण के साथ मुझसे कहा।
मैंने उनके चेहरे को देखते हुए बड़े बेफिक्र अंदाज़ में कहा, "बोल देना कि सोते समय कोई कीड़ा काट गया था।"
फिर मैंने थोड़ा और करीब जाकर उनकी आँखों में देखते हुए कहा, "और हाँ मम्मी, मैंने नोट किया है... जगू अंकल भी आप पर लाइन मारते हैं ना?"
मम्मी ने झेंपते हुए और मुझे हल्का सा धकेलते हुए कहा, "हट बदमाश! कैसी बात पूछता है अपनी माँ से? मैं बोला,***बताओ ना...मम्मी! " फिर उन्होंने एक लंबी साँस ली और अपनी बात जारी रखी, "हाँ, मर जाना! आज भी कह रहा था... प्रदीप भाई नहीं तो मुझे बताओ, मैं कर दूंगा जो भी करवाना है, उसका इशारा उसी तरफ था 'मर जाने' का।"
मम्मी की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी और चाहत थी।
मैंने शरारत भरे अंदाज़ में उनकी आँखों में देखते हुए कहा, "तो आप बुला लेती उनको..."
मम्मी ने झेंपते हुए और थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए कहा, "हट पागल! मैं कोई रंडी हूँ जो हर एक को देती फिरूँ?"
उनकी यह बात सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जाग उठा। मैंने उनके स्तनों को पहले से भी कहीं ज़्यादा ज़ोर से अपने हाथों में भींचा और अचानक अपना लिंग बाहर निकाला और एक ही झटके में उसे फिर से उनकी चूत के अंदर गहराई तक धँसा दिया।मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर कहा, "और तो किसी का पता नहीं मम्मी, पर मेरी तो आप रंडी ही हो।"
मम्मी की साँसें उखड़ गईं और उन्होंने एक गहरी आह भरते हुए बेहद मदहोश और टूटती हुई आवाज़ में कहा, "बेटा... सच में... तूने मुझे अपनी रंडी बना लिया है।"
जब झटके के साथ लंड पूरा अंदर घुसने के बाद मैने झटके लगाने शुरू किए तो उनकी चूत के तीव्र दवाब के कारण लंड की खाल रगड़ खा रही रही थी।उनके अंदर की मांसपेशियों ने मेरे लिंग को इतनी ज़ोर से भींचा कि मेरी खाल में एक तीखी जलन होने लगी। ऐसा लगा जैसे रगड़ की वजह से वहाँ की त्वचा छिल गई हो।
दर्द और उत्तेजना के उस अजीब मिश्रण के कारण मेरी साँसें थम गईं। मैंने खुद को थोड़ा पीछे खींचना शुरू किया। "आह्ह्ह... उफ्फ... मम्मी..." मैंने कराहते हुए कहा। जैसे ही मैंने अपना लिंग उनकी तंग चूत से बाहर निकाला, मुझे महसूस हुआ कि वो पूरी तरह से लाल हो चुका था और उस पर रगड़ की वजह से हल्की सूजन आ गई थी। "मम्मी... मेरे लिंग पर बहुत जलन हो रही है, शायद बहुत तेज़ झटकों और आपके अंदर की रगड़ की वजह से खाल छिल गई है," मैंने हाँफते हुए और अपने अंग पर फूँक मारते हुए कहा।
मम्मी की आँखें जो अब तक वासना से भरी थीं, एक पल के लिए ममता और फिक्र से भर गईं। उन्होंने अपनी मदहोश आँखें मुझ पर टिकाईं और एक भारी, काँपती हुई आवाज़ में बोलीं, "दिखा मुझे... ला ला बेटा, दिखा मुझे अपना नुनु।" उनके शब्दों में अब एक अजीब सा समर्पण था। मैंने अपना वो लाल और छिला हुआ अंग उनके चेहरे के बिल्कुल सामने कर दिया। वो उसे ऐसे निहार रही थीं जैसे कोई मरहम लगाने के लिए तैयार हो। "लाओ... अभी ठीक हो जाएगा," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।
इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, उन्होंने अपना चेहरा मेरे लिंग के पास लाया। उनके गर्म साँसों का अहसास मेरे लिंग की ऊपरी सतह पर महसूस हो रहा था। उन्होने बड़ी नजाकत से अपने मुंह से फूंक मारी जिससे मुझे थोड़ी राहत महसूस हुई ,फिर उन्होंने अपने होंठों को धीरे से मेरे लिंग के सिरे पर रखा और अपना ढेर सारा थूक उस पर गिरा दिया। "स्लर्प... चप... चप..." थूक की नमी और उनकी जीभ की गर्माहट ने मेरे शरीर में एक लहर दौड़ दी। उन्होंने अपनी जीभ को मेरे लिंग के चारों ओर घुमाना शुरू किया। वो सिर्फ चाट नहीं रही थीं, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी कीमती मलम से मेरी जलन को सहला रही हों। उनकी जीभ का हर एक चक्कर, हर एक स्पर्श उस जलन को सोख रहा था। "स्लर्प... उम्मम... आह्ह्ह..." उनकी जीभ के फिसलने की आवाज़ और उनके मुँह की गर्माहट ने मेरी जलन को धीरे धीरे एक सुखद अहसास में बदल दिया। कुछ ही देर में वो जलन पूरी तरह गायब हो गई और उसकी जगह एक तीव्र उत्तेजना ने ले ली। मम्मी ने भी शायद भांप लिया था कि उनका ये तरीका काम कर गया है।
जैसे ही उन्होंने मेरा लिंग अपने मुँह से बाहर निकाला, वो एक पल के लिए रुकीं। उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ वासना थी। उन्होंने बिना एक शब्द कहे अपना चेहरा ऊपर उठाया और सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए।
वह एक साधारण चुंबन नहीं था; वह दो प्यासे शरीरों का मिलन था जो एक दूसरे में समा जाने के लिए बेताब थे। जैसे ही उनके गर्म और गीले होंठ मेरे होंठों से टकराए, मेरे दिमाग में जैसे बिजली का एक तेज़ झटका लगा। उनके होंठों में मम्मी के उस कामुक रस का स्वाद था, जो अभी अभी मेरे लिंग से लिपटा हुआ था।
"उम्मम्मम... म्म्ममम..." उनकी सिसकी मेरे मुँह के अंदर ही दब कर रह गई। उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों के बीच में बुरी तरह फँसा लिया और अपनी जीभ को मेरे मुँह में पूरी ताकत से धकेल दिया। उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ ऐसे लड़ रही थी जैसे कोई युद्ध चल रहा हो। वह बहुत ही गहरी और भूखी Kiss थी। उनकी जीभ की हर हरकत में एक अजीब सी बेताबी थी, जैसे वो मेरे मुँह के अंदर के हर हिस्से को चख लेना चाहती हों।
मैंने भी हार नहीं मानी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके चेहरे को कसकर पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर और ज़ोर से खींच लिया। हमारे होंठों के बीच से निकलने वाली लार (saliva) एक धागे की तरह नीचे बहने लगी, जो उनकी छाती और मेरे सीने के बीच गिर रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." हमारे होंठों के टकराने और जीभों के आपस में रगड़ने की आवाज़ उस कमरे के सन्नाटे में बहुत ही गंदी और कामुक लग रही थी।
मम्मी ने इस Kiss को और भी गहरा बना दिया। उन्होंने अपना मुँह और भी ज़्यादा खोल दिया ताकि मैं उनकी जीभ को गहराई से महसूस कर सकूँ। उनकी साँसें अब बहुत तेज़ और गर्म हो गई थीं, जो सीधे मेरे फेफड़ों में जा रही थीं। Kiss करते करते उन्होंने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे ले जाकर मेरे बालों को ज़ोर से खींचना शुरू कर दिया, जिससे मेरा सिर पीछे की ओर झुक गया और उन्हें मुझे और भी गहराई से चूसने का मौका मिल गया।
उनकी Kiss में एक ऐसी तड़प थी जो मुझे पागल कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो सिर्फ मेरे होंठों को नहीं चूस रही हैं, बल्कि वो मेरे शरीर की पूरी आत्मा को अपने मुँह में खींच लेना चाहती हैं। उनके होंठों की कोमलता और उनकी जीभ की वो गीली और खुरदरी रगड़ सब कुछ एक साथ मिलकर मुझे चरम सुख की ओर धकेल रहा था।
Kiss के बीच में जब भी हम एक पल के लिए अलग होते, तो हमारे बीच एक लंबा, चिपचिपा लार का तार खिंच जाता, और फिर वो तुरंत ही दोबारा मेरे होंठों पर टूट पड़तीं।
उनकी आँखों में अब पूरी तरह से वासना का समंदर उमड़ रहा था। वह Kiss इतनी गहरी और बेकाबू हो चुकी थी कि मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका है और सिर्फ शरीर ही रह गया है। उनके होंठों की गर्मी और उनकी जीभ की गीली हरकतें मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थीं।
तभी मम्मी ने Kiss करते करते ही अपना एक हाथ नीचे की ओर खिसकाया। उनका हाथ धीरे धीरे मेरे पेट से होते हुए मेरे उस सख्त और उत्तेजित लिंग की तरफ बढ़ा। जैसे ही उनकी उंगलियों ने मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को छुआ, मेरी कमर में एक ज़ोरदार झटका लगा। "आह्ह्ह... मम्मी..." मेरे मुँह से एक दबी हुई कराह निकली, लेकिन उन्होंने मुझे Kiss करने से नहीं रोका। बल्कि उन्होंने अपने होंठों को और भी कस लिया।
उनका हाथ मेरे लिंग पर बहुत ही माहिर तरीके से घूमने लगा। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे लिंग की पूरी लंबाई को ऊपर से नीचे तक सहलाना शुरू किया। "स्लर्प... चप... चप..." हमारे होंठों से निकलती लार की आवाज़ और उनके हाथ की रगड़ ने माहौल को और भी गंदा और कामुक बना दिया था। उनकी पकड़ में एक अजीब सी ताकत थी, जैसे वो मेरे लिंग को पूरी तरह से अपना बना लेना चाहती हों।
मम्मी ने अचानक Kiss को थोड़ा धीमा किया, लेकिन उनके होंठ अभी भी मेरे होंठों से चिपके हुए थे। उन्होंने अपनी आँखों को खोलकर मेरी आँखों में देखा उनकी पुतलियाँ फैल चुकी थीं और उनमें सिर्फ एक ही चीज़ दिख रही थी: **भूख**। उन्होंने बहुत ही धीमी और भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, "बेटा... अब और इंतज़ार नहीं होता... मुझे फिर से अपने अंदर चाहिए... मुझे अपनी रंडी बना ले..."
उनके ये शब्द सुनकर मेरा खून उबल उठा। मैंने उन्हें झटके से बिस्तर पर लिटा दिया। उनकी कमर हवा में थोड़ी ऊपर उठी और उनकी चूत की वो गीली और लाल परत मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी। उनकी चूत से निकलने वाला चिपचिपा रस अब उनकी जाँघों के बीच बह रहा था।
मैंने बिना देर किए अपना लिंग उठाया और उनके चेहरे के पास ले गया। "मम्मी, अब आप तैयार हैं?" मैंने पूछा। उन्होंने बस अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने पैर फैला दिए, जैसे वो मुझे अपने अंदर बुला रही हों। मैंने अपने लिंग का सिरा उनकी गीली चूत के बिल्कुल मुहाने पर रखा। जैसे ही मैंने थोड़ा सा दबाव डाला, उनकी चूत की गर्मी ने मुझे फिर से झुलसा दिया।
मैंने एक गहरा और ज़ोरदार झटका मारा और अपना पूरा लिंग उनके अंदर गहराई तक उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..." उनकी चीख मेरे कानों में संगीत की तरह गूँजी, लेकिन मैंने उन्हें वो चरम सुख देने के बजाय एक नया और खौफनाक खेल खेलना शुरू किया। मैंने अपना लिंग उनकी तंग और गीली चूत के मुहाने से बाहर खींच लिया। मम्मी की आँखें फटी की फटी रह गईं, वो पूरी तरह से मेरे अंदर होने के लिए बेताब थीं, लेकिन मैंने उन्हें वो नहीं दिया।
मैंने उनके पैरों को और भी चौड़ा फैलाया और अपना सिर उनकी जाँघों के बीच ले जाकर उनकी चूत के ठीक नीचे अपना चेहरा टिका दिया। "बेटा... क्या कर रहे हो? अभी... अभी अंदर डालो... मैं मर जाऊँगी इंतज़ार करते हुए!" उन्होंने तड़पते हुए कहा, उनके शरीर में थरथराहट होने लगी थी।
लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी। मैंने अपना मुँह उनकी चूत के उस लाल और मांसल हिस्से पर टिका दिया जहाँ से उनका रस लगातार बह रहा था। "स्लर्प... चप... चप..." मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत की दरारों में बहुत गहराई तक उतारना शुरू कर दिया। मैंने उनके क्लिटोरिस (clitoris) को अपनी जीभ से ज़ोर से दबाना और सहलाना शुरू किया।
इरा शरीर अब नियंत्रण से बाहर हो चुका था। चूर्ण के असर और मम्मी के इस बेकाबू जुनून ने उसके नर्वस सिस्टम को पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था।मेरा लिंग मम्मी के भीतर एक ऐसी आग की तरह धँस रहा था जो बुझने का नाम ही नहीं ले रही थी। चूर्ण के असर ने उसकी नसों में बिजली की तरह दौड़ना शुरू कर दिया था। हर एक झटके के साथ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं अपनी आत्मा को मम्मी के शरीर के भीतर छोड़ रहा हूं।
**"आह्ह्ह्ह... मम्मी... मैं... मैं बस अब और नहीं सह सकता... आह्ह्ह्ह! प्लीज... मुझे निकलने दीजिए... मैं पागल हो जाऊँगा!"** रवि की आवाज़ अब एक बेबस और मदहोश कर देने वाली पुकार बन चुकी थी। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वे दर्द के नहीं, बल्कि उस चरम सुख (Pleasure) के थे जो अब उसके बर्दाश्त से बाहर हो रहा था।
मम्मी ने मेरे कानों के पास झुककर अपनी गर्म और भीगी हुई साँसें छोड़ीं। उनकी आँखों में अब केवल **'Raw Desire'** (कच्ची वासना) थी। उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा दिया और एक बेहद कामुक फुसफुसाहट के साथ कहा:
**"नहीं रवि... अभी नहीं। मुझे अभी और चाहिए। तुझे अपनी मम्मी5 की इस तड़प को मिटाना ही होगा। तू बस एक जानवर बन जा, और अपनी सारी मर्दानगी, अपना सारा रस... सब कुछ मुझमें ही समा दे। मैं खाली हूँ रवि... मुझे अपनी इस गर्मी से पूरी तरह भर दे!"**
मम्मी की कमर की गति अब और भी तेज़ और बेकाबू हो गई थी। वह मेरे ऊपर ऐसे झूम रही थीं जैसे कोई तूफ़ान हो। उनके शरीर से निकलने वाला पसीना और उनके बीच का घर्षण (Friction) एक ऐसी फिसलन पैदा कर रहा था जिससे उनकी त्वचा आपस में टकराकर **'स्लर्प... स्लर्प...'** की गीली और उत्तेजक आवाज़ें निकाल रही थी।
मेरा शरीर अब पूरी तरह से मम्मी के वश में था। मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था और उसे सिर्फ मम्मी की खुशबू और उनकी गर्मी महसूस हो रही थी। मम्मी ने अपने दोनों हाथ रमेरे सीने पर जमा दिए और अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से मेरे अंगों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
**"हाँ... ऐसे ही रवि... और गहराई तक! मुझे महसूस करा कि तू कितना प्यासा है! मुझे अपना सारा ज़हर, अपना सारा रस... सब मुझमें ही छोड़ दे!"** मम्मी की आवाज़ अब एक चीख में बदल रही थी क्योंकि वह खुद भी अपने चरम (Climax) के बेहद करीब थीं।
कमरे का तापमान जैसे बढ़ गया था। हर एक झटका अब मम्मी के शरीर को और भी गहराई तक चीरता हुआ महसूस हो रहा था। मैं अब बस उस एक पल का इंतज़ार कर रहा था जहाँ मै अपनी सारी ऊर्जा, अपना सारा अस्तित्व और अपना सारा रस मम्मी के भीतर एक धमाके की तरह छोड़ सकूँ।
**"आह्ह्ह्ह... मम्मी... अब और नहीं... मैं... मैं आने वाला हूँ! मैं आ रहा हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!"** मेरी आवाज़ एक ऐसी चीख में बदल गई जो सीधे रूह को कँपा देने वाली थी। मेरा पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था, नसें उभर आई थीं और आँखों के सामने सफ़ेद रोशनी का एक सैलाब उमड़ आया था।
मम्मी ने जैसे ही मेरी इस बेकाबू तड़प को महसूस किया, उन्होंने अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली। उन्होंने मेरे शरीर को अपने और भी ज़ोर से जकड़ लिया और अपनी कमर को एक आखिरी, बेहद तीव्र और गहरी गति के साथ मेरे अंगों पर रगड़ा। उनकी अपनी आँखें भी बंद हो चुकी थीं और उनके मुँह से एक लंबी, मदहोश कर देने वाली आह निकल रही थी।
**"हाँ रवि! यहीं... यहीं छोड़ दे सब कुछ! मुझमें समा जा! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी की यह पुकार मेरे लिए आखिरी ट्रिगर बन गई।
एक जोरदार झटके के साथ, मेरा शरीर काँप उठा। मेरे भीतर का सारा दबाव, सारी गर्मी और सारा रस एक प्रचंड वेग के साथ मम्मी के भीतर फूट पड़ा। **'Splurt... splurt... splurt...'** की आवाज़ें उस सन्नाटे में गूँज उठीं। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे शरीर से जान निकलकर मम्मी के भीतर समा रही हो। मैं अपनी पूरी ताकत के साथ मम्मी के अंदर धँस गया था, जैसे उनके अस्तित्व का हिस्सा बन गया होऊं।
मम्मी का शरीर भी उस तीव्र रस के प्रवाह से थरथरा उठा। उनके भीतर एक ऐसा खिंचाव महसूस हुआ जिसने उन्हें भी चरम सुख के उस शिखर पर पहुँचा दिया जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके मुँह से एक दबी हुई लेकिन बेहद गहरी आह निकली। **"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!"**
दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और एक दूसरे से इस तरह चिपके हुए थे जैसे वे दो अलग इंसान नहीं, बल्कि एक ही जान हों। कमरे में केवल उनकी तेज़ तेज़ चलती हुई साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। मेरा सिर मम्मी के कंधे पर गिर गया था, मेरी आँखों से अभी भी खुशी और संतुष्टि के आँसू बह रहे थे। मम्मी ने मेरे गीले बालों को सहलाया और उसे अपनी बाँहों में और भी कसकर भर लिया। वासना का वह भयंकर तूफ़ान थम चुका था, लेकिन कमरे की हवा में अभी भी उस कामुकता की भारी गंध और उमस घुली हुई थी। मेरा शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था, जैसे उसकी सारी ऊर्जा और प्राण उसी एक विस्फोट में निकल गए हों। मैं मम्मी के सीने पर अपनी भारी साँसें छोड़ रहा था, और मेरी हर साँस मम्मी की गर्म और पसीने से भीगी त्वचा को छूकर निकल रही थी।
मम्मी का शरीर अभी भी हल्के हल्के काँप रहा था। उनके भीतर मेरे उस गर्म और गाढ़े रस का अहसास उन्हें एक अजीब सी तृप्ति दे रहा था। उन्होंने मेरे सिर को अपने सीने से सटा लिया और मेरे माथे पर एक कोमल लेकिन बेहद अधिकारपूर्ण चुंबन दिया। उनकी आँखों में अब वह जंगली प्यास थोड़ी शांत हो गई थी, और उसकी जगह एक गहरी, मखमली संतुष्टि ने ले ली थी।
**"मेरा बच्चा..."** मम्मी ने बहुत ही धीमी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में फुसफुसाया। **"तूने मुझे आज पूरी तरह से जीत लिया।"**
मैंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। मेरी दृष्टि अभी भी धुंधली थी, लेकिन मम्मी के चेहरे पर वह सुकून दिख रहा था जो मैने पहले कभी नहीं देखा था। मैं कुछ बोलना चाहता था, लेकिन मेरे गले से केवल एक दबी हुई आह निकल पाई। ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मै अभी भी बादलों के ऊपर तैर रहा हूं।
तभी, मम्मी ने धीरे से अपना शरीर हिलाया। मेरा अंग अभी भी उनके भीतर गहराई तक धँसे हुआ था। जैसे ही मम्मी ने थोड़ा सा खिंचाव लिया, मेरे शरीर में एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई। मैं अभी भी पूरी तरह से 'खाली' महसूस नहीं कर रहा था; चूर्ण का असर अभी भी मेरे तंत्रिका तंत्र (nervous system) में कहीं न कहीं बचा हुआ था।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए एक शरारती और उत्तेजक मुस्कान दी। उन्होंने मेरे कान के पास झुककर फिर से वही कामुक लहजा अपनाया:**"क्या हुआ रवि? क्या तू थक गया? अभी तो तूने बस अपनी शुरुआत की है। देख... तेरा शरीर अभी भी कितना गर्म है। तुझे क्या लगा था? कि एक बार में ही तेरा खेल खत्म हो जाएगा?"**
मेरी साँसें फिर से तेज़ होने लगीं। मम्मी के इन शब्दों ने मेरे भीतर दबी हुई उस आग को फिर से सुलगा दिया था। चूर्ण का वह जादुई असर अब दोबारा मेरी नसों में दौड़ने लगा था। मुझे महसूस हुआ कि मेरा अंग, जो अभी कुछ देर पहले ही लावा उगलने क बाद ढीला पड़ गया था, अब फिर से धीरे धीरे सख्त और गर्म होने लगा है।
मम्मी ने देखा कि मेरे शरीर में फिर से वही हलचल हो रही है। उन्होंने देखा कि कैसे उसका अंग, जो अभी कुछ देर पहले ही उनकी चूत में खाली होने के बाद ढीला पड़ गया था , अब फिर से धीरे धीरे सख्त और गर्म होने लगा है। चूर्ण का वह जादुई असर अब फिर से नई लहर लेकर आ रहा था। मेरी आँखों में अब थकावट नहीं, बल्कि एक नई और अधिक गहरी **'जंगली प्यास'** चमक रही थी।
मम्मी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान फैल गई। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और मेरी आँखों में आँखें डालकर बेहद उत्तेजक अंदाज़ में कहा, **"देख... मेरा शेर फिर से तैयार हो रहा है। तुझे लगा था कि तू मुझे एक बार में तृप्त कर देगा? अभी तो मैंने सिर्फ चखा है रवि... अभी तो मुझे पूरा स्वाद लेना बाकी है।"**मैने मम्मी की आँखों में देखते हुए अपनी गहरी और भारी आवाज़ में कहा,
**"मम्मी... आप शायद भूल रही हैं। मैं एक बार नहीं, बल्कि दो बार अपना रस आपको दे चुका हूँ। एक बार आपने उसे अपने मुँह में लिया और दूसरी बार आपने उसे अपनी चूत के भीतर गहराई तक उतार लिया है।"**
मम्मी ने मेरे चेहरे को सहलाया और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ पूछा,**"हाँ बेटा... पर आज की रात कोई गिनती नहीं । क्या तुम थक तो नहीं गए?"**
मैने अपनी आँखों में एक अदम्य जुनून और ताकत भरते हुए जवाब दिया,
**"नहीं मम्मी! आपने जो दूध में चूर्ण मिलाकर दिया था, उसने मेरे शरीर को पत्थर जैसा बना दिया है। मैं इतनी ताकत और इतना जोश महसूस कर रहा हूँ कि एक मिनट के लिए भी रुके बिना, मैं पूरी रात आपको चोदता रहूँगा।"**
*"तो फिर देर किस बात की है?"** मम्मी ने हाँफते हुए कहा। **"ले ले मेरा सब कुछ! मुझे फिर से तोड़ दे रवि! मुझे फिर से अपनी इस आग में जला दे! आह्ह्ह्ह्ह!"**इतना कहने के साथ ही मम्मी ने अपनी कमर को एक बहुत ही धीमी और मखमली गति से हिलाना शुरू किया। वह अभी भी मेरे ऊपर थीं, और उनके शरीर का घर्षण मेरे संवेदनशील अंग को फिर से उत्तेजित कर रहा था। **'स्लर्प... स्लर्प...'** की वह गीली आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी। इस बार गति पहले से कहीं अधिक नियंत्रित लेकिन अधिक **'गहरी'** थी।मैने एक गहरी और भारी साँस ली। मेरी मर्दानगी अब पहले से भी ज़्यादा सख्त और गर्म हो चुकी थी। मैने अपने दोनों हाथ मम्मी की कमर पर जमा दिए और उन्हें अपने शरीर की ओर और भी ज़ोर से खींच लिया। अब मैं केवल एक निष्क्रिय शरीर नहीं था; बल्कि फिर से एक शिकारी की तरह था।
**"मम्मी... आह्ह्ह... आप मुझे पागल कर देंगी... मैं फिर से... मैं फिर से सब कुछ आपमें ही उतारना चाहता हूँ!"** मेरी आवाज़ में अब एक अजीब सा जुनून था।
मम्मी ने अपनी कमर की गति को अचानक बढ़ा दिया। वह अब मेरे ऊपर किसी लहर की तरह उठ गिर रही थीं। **'धप... धप... धप...'** की आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गई थीं। मम्मी ने अपने हाथ मेरे सीने पर जमा दिए और अपने नाखूनों को मेरे सीने में हल्का सा चुभा दिया, जिससे मेरे शरीर में बिजली की तरह एक सिहरन दौड़ गई।
अब कमरा फिर से उस तीव्र कामुकता के सैलाब में डूब गया। पसीने की खुशबू, शरीर का घर्षण और वह बेकाबू आवाज़ें सब कुछ एक नए और अधिक हिंसक स्तर पर पहुँच गया था। मैं अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुका था।
जैसे ही मम्मी की कमर की गति चरम पर पहुँची, मैने
अपनी पूरी ताकत झोंक दी और उन्हें अपने नीचे खींचते हुए खुद उनके ऊपर आ गया, और उनकी जाँघों को अपने कंधों पर टिकाकर उसने अपने भारी और पत्थर जैसे सख्त अंग को उनकी गीली और तंग चूत के मुहाने पर टिका दिया।
**"आह्ह्ह्ह... रवि... हाँ... यहीं... वहीं!"** मम्मी की चीख निकल गई जब उन्होंने मेरे अंग की उस भयंकर गर्मी को महसूस किया।
मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के एक ही झटके में खुद को उनकी गहराई में उतार दिया। **'चप... स्प्लैट!'** की एक ज़ोरदार और गंदी आवाज़ कमरे में गूँजी। मम्मी का शरीर एक झटके से पीछे की ओर झुक गया और उनकी आँखें पथरा गईं। वह इतनी गहराई तक भर दी गई थीं कि उन्हें लगा जैसे मेरा लंड उनके गर्भाशय तक पहुँच गया हो।
**"ओह्ह्ह्ह्ह... भगवान! रवि... तू तो पागल कर देगा मुझे! इतना गहरा... इतना सख्त! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी का गला चीख से भर गया। उनके शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई थी।
ऐ अब रुकने वाला नहीं था। चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग से सारे संयम हटा दिए थे। मैने अपनी कमर को पूरी ताकत और रफ़्तार से चलाना शुरू किया। अब वह 'मखमली' नहीं था; अब वह एक **'हिंसक'** हमला था। **'धप... धप... धप... धप!'** मेरे भारी शरीर के मम्मी के शरीर से टकराने की आवाज़ें अब एक लय में बदल चुकी थीं। हर वार के साथ मेरा अंग मम्मी की चूत की दीवारों को पूरी ताकत से रगड़ रहा था।
**"मम्मी... आपकी चूत... आह्ह्ह... कितनी गर्म और तंग है! मैं इसे फाड़ दूँगा! मैं आज आपको चैन से नहीं बैठने दूँगा!"** मेरी आवाज़ अब एक जानवर की तरह गुर्रा रही थी। मेरे पसीने की बूंदें मम्मी के स्तनों पर गिर रही थीं, जिससे माहौल और भी ज़्यादा उत्तेजक हो गया था।
मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में था। वह बस मेरे वारों के साथ ऊपर नीचे उछल रही थीं। उनके चेहरे पर दर्द और परम सुख का एक मिला जुला भाव था। उन्होंने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से ज़ोर से खरोंच दिया, जिससे मेरा जोश और भी बढ़ गया।
**"हाँ रवि! और तेज़! और ज़ोर से! मुझे तोड़ दे! मुझे अपना बना ले! आह्ह्ह्ह... हाँ... वहीं... वहीं मार! आह्ह्ह्ह्ह!"***
मम्मी की चीखें अब पूरे कमरे में गूँज रही थीं।मेरा हर धक्का अब एक प्रहार की तरह था, जो मम्मी के शरीर के रोम रोम को हिलाकर रख रहा था। चूर्ण की वजह से शरीर में जो ताकत थी, वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैं एक मशीन की तरह काम कर रहा था बिना थके, बिना रुके।
**"मम्मी... मैं... मैं अब और नहीं रोक पाऊँगा! मेरा सारा रस... सारा जुनून... सब आपके अंदर समा जाएगा!"** मैने दहाड़ते हुए कहा। उसकी आँखों में एक जंगलीपन था।
मम्मी ने मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया और अपने चेहरे को मेरे चेहरे के करीब लाकर फुसफुसायीं, **"तो फिर देर मत कर बेटा... मुझे खाली मत छोड़ना... मुझे अपने उस गर्म और गाढ़े रस से पूरी तरह भर दे! मैं चाहती हूँ कि तेरा हर कतरा मेरी कोख में समा जाए! आह्ह्ह्ह्ह!"**
मैने अब अपनी गति को एक पागलपन की हद तक बढ़ा दिया। अब वह केवल चोद नहीं रहा था, वह मम्मी के शरीर पर अपना अधिकार जमा रहा था। **'चप... चप... चप... धप... धप!'** की गंदी और तेज़ आवाज़ें अब एक उन्माद में बदल चुकी थीं। मम्मी की चूत मेरे अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थी कि मुझे लग रहा था जैसे मैं किसी जलती हुई भट्टी के अंदर हूं।
**"आह्ह्ह्ह्ह... रवि! मैं आ रही हूँ! मैं फटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी का शरीर धनुष की तरह तन गया। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं और उनके शरीर में भयंकर कंपन होने लगा। वह अपने चरम (orgasm) पर पहुँच चुकी थीं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को पागलों की तरह भींच रही थीं। मम्मी का शरीर काँप रहा हथा, और यही वह क्षण था जिसका मुझे इंतज़ार था। मैने अपनी कमर को आखिरी बार पूरी ताकत से अंदर की ओर धकेला और अपनी पूरी जान लगाकर मम्मी की गहराई में खुद को उतार दिया।
**"मम्मीइइइइइइइ!"** मैं एक ज़ोरदार दहाड़ के साथ चिल्लाया।
मेंरे लंड से गर्म, गाढ़ा और उबलता हुआ रस एक तेज़ धार की तरह मम्मी के गर्भाशय की गहराई में फूट पड़ा। **'Splurt... splurt... splurt...'** की आवाज़ के साथ मेरा सारा जमा हुआ रस मम्मी के अंदर समाने लगा। वह रस इतना ज़्यादा था कि मम्मी को महसूस हुआ जैसे उनके पेट के अंदर कोई गर्म तरल पदार्थ भर रहा है
मेरा शरीर अभी भी काँप रहा था, लेकिन मैं अभी भी मम्मी के ऊपर था।रात के 1 बज रहा था। कमरे की हवा पसीने, वासना और चूर्ण की तीखी गंध से भारी हो चुकी थी। मेरा शरीर अब किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक अविश्वसनीय ऊर्जा से भरे यंत्र का लग रहा था। चूर्ण ने उसके
मेरे दिमाग से 'डिस्चार्ज' होने की ज़रूरत को ही मिटा दिया था। वह बस चोदना चाहता था बिना रुके, बिना थके।मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से पसीने से तर बतर था। उनकी साँसें उखड़ रही थीं, लेकिन मेरी आँखों में जो वह जंगली चमक थी, उसने उन्हें और भी ज़्यादा उत्तेजित कर दिया था।
एर भारी और सख्त अंग मम्मी की गीली चूत की गहराई में अभी भी पूरी तरह धंसा हुआ था, मम्मी की चूत की दीवारें इतनी गर्म और तंग थीं कि मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं दहकते हुए अंगारों के बीच फँसा हूँ। कोई तेज़ हलचल नहीं थी, बस एक गहरा और भारी सन्नाटा था जिसमें दोनों की तेज़ होती साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। मैने अपने बड़े और गर्म हाथों से मम्मी के उभरे हुए स्तनों को धीरे धीरे सहलाना शुरू किया, मैं उन्हें अपनी उंगलियों से दबाते हुए वह उनके शरीर के स्पर्श को महसूस कर रहा था।
मम्मी का शरीर मेरे स्पर्श से थरथरा रहा था। उन्होंने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दीं और मेरे कान के पास अपना चेहरा लाकर, काँपती हुई आवाज़ में कहा, **"रवि बेटा... तुझे पता है... जब तू दोपहर में सो रहा था, तो मुझे जग्गू दिख गया था। मैंने सोचा कि तेरी 'Threesome' वाली इच्छा पूरी कर दूँ... तो मैंने जगू से कहा कि प्रदीप भाई साहब को बोलना घर आने को। पर उसने कहा कि प्रदीप भाई साहब तो अपने गाँव गए हुए हैं..."**
मम्मी ने रवि के कान के पास अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए आगे कहा, **"अब मैं सोच रही हूँ... शायद भगवान ने अच्छा ही किया जो तेरे प्रदीप अंकल यहाँ नहीं आए। तू तो अकेले ही मुझे ऐसे कर रहा है जैसे मुझे मार ही डालेगा! अगर प्रदीप भाई भी यहाँ होते... तो क्या होता मेरा?"**
मम्मी की उन बातों ने मेरे अंदर जैसे आग लगा दी थी। प्रदीप अंकल और जगू अंकल का नाम सुनकर मेरा खून खौल उठा। मैंने आव देखा न ताव, अपनी मम्मी के दोनों स्तनों को अपने हाथों में भरकर उन्हें बहुत ज़ोर से दबाया और बिना सोचे उनके गाल पर अपने दाँत गड़ा दिए।
"अह्ह्ह्ह... मेरी sexy mummy!" मेरे मुँह से बस यही निकला।
मम्मी दर्द के मारे चीख उठीं, "आह्ह्ह्ह... मर गई! खा जाएगा क्या? निशान पड़ जाएँगे... मैं सबको क्या बताऊँगी?" उन्होंने दर्द और उत्तेजना के मिश्रण के साथ मुझसे कहा।
मैंने उनके चेहरे को देखते हुए बड़े बेफिक्र अंदाज़ में कहा, "बोल देना कि सोते समय कोई कीड़ा काट गया था।"
फिर मैंने थोड़ा और करीब जाकर उनकी आँखों में देखते हुए कहा, "और हाँ मम्मी, मैंने नोट किया है... जगू अंकल भी आप पर लाइन मारते हैं ना?"
मम्मी ने झेंपते हुए और मुझे हल्का सा धकेलते हुए कहा, "हट बदमाश! कैसी बात पूछता है अपनी माँ से? मैं बोला,***बताओ ना...मम्मी! " फिर उन्होंने एक लंबी साँस ली और अपनी बात जारी रखी, "हाँ, मर जाना! आज भी कह रहा था... प्रदीप भाई नहीं तो मुझे बताओ, मैं कर दूंगा जो भी करवाना है, उसका इशारा उसी तरफ था 'मर जाने' का।"
मम्मी की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी और चाहत थी।
मैंने शरारत भरे अंदाज़ में उनकी आँखों में देखते हुए कहा, "तो आप बुला लेती उनको..."
मम्मी ने झेंपते हुए और थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए कहा, "हट पागल! मैं कोई रंडी हूँ जो हर एक को देती फिरूँ?"
उनकी यह बात सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जाग उठा। मैंने उनके स्तनों को पहले से भी कहीं ज़्यादा ज़ोर से अपने हाथों में भींचा और अचानक अपना लिंग बाहर निकाला और एक ही झटके में उसे फिर से उनकी चूत के अंदर गहराई तक धँसा दिया।मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर कहा, "और तो किसी का पता नहीं मम्मी, पर मेरी तो आप रंडी ही हो।"
मम्मी की साँसें उखड़ गईं और उन्होंने एक गहरी आह भरते हुए बेहद मदहोश और टूटती हुई आवाज़ में कहा, "बेटा... सच में... तूने मुझे अपनी रंडी बना लिया है।"
जब झटके के साथ लंड पूरा अंदर घुसने के बाद मैने झटके लगाने शुरू किए तो उनकी चूत के तीव्र दवाब के कारण लंड की खाल रगड़ खा रही रही थी।उनके अंदर की मांसपेशियों ने मेरे लिंग को इतनी ज़ोर से भींचा कि मेरी खाल में एक तीखी जलन होने लगी। ऐसा लगा जैसे रगड़ की वजह से वहाँ की त्वचा छिल गई हो।
दर्द और उत्तेजना के उस अजीब मिश्रण के कारण मेरी साँसें थम गईं। मैंने खुद को थोड़ा पीछे खींचना शुरू किया। "आह्ह्ह... उफ्फ... मम्मी..." मैंने कराहते हुए कहा। जैसे ही मैंने अपना लिंग उनकी तंग चूत से बाहर निकाला, मुझे महसूस हुआ कि वो पूरी तरह से लाल हो चुका था और उस पर रगड़ की वजह से हल्की सूजन आ गई थी। "मम्मी... मेरे लिंग पर बहुत जलन हो रही है, शायद बहुत तेज़ झटकों और आपके अंदर की रगड़ की वजह से खाल छिल गई है," मैंने हाँफते हुए और अपने अंग पर फूँक मारते हुए कहा।
मम्मी की आँखें जो अब तक वासना से भरी थीं, एक पल के लिए ममता और फिक्र से भर गईं। उन्होंने अपनी मदहोश आँखें मुझ पर टिकाईं और एक भारी, काँपती हुई आवाज़ में बोलीं, "दिखा मुझे... ला ला बेटा, दिखा मुझे अपना नुनु।" उनके शब्दों में अब एक अजीब सा समर्पण था। मैंने अपना वो लाल और छिला हुआ अंग उनके चेहरे के बिल्कुल सामने कर दिया। वो उसे ऐसे निहार रही थीं जैसे कोई मरहम लगाने के लिए तैयार हो। "लाओ... अभी ठीक हो जाएगा," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।
इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, उन्होंने अपना चेहरा मेरे लिंग के पास लाया। उनके गर्म साँसों का अहसास मेरे लिंग की ऊपरी सतह पर महसूस हो रहा था। उन्होने बड़ी नजाकत से अपने मुंह से फूंक मारी जिससे मुझे थोड़ी राहत महसूस हुई ,फिर उन्होंने अपने होंठों को धीरे से मेरे लिंग के सिरे पर रखा और अपना ढेर सारा थूक उस पर गिरा दिया। "स्लर्प... चप... चप..." थूक की नमी और उनकी जीभ की गर्माहट ने मेरे शरीर में एक लहर दौड़ दी। उन्होंने अपनी जीभ को मेरे लिंग के चारों ओर घुमाना शुरू किया। वो सिर्फ चाट नहीं रही थीं, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी कीमती मलम से मेरी जलन को सहला रही हों। उनकी जीभ का हर एक चक्कर, हर एक स्पर्श उस जलन को सोख रहा था। "स्लर्प... उम्मम... आह्ह्ह..." उनकी जीभ के फिसलने की आवाज़ और उनके मुँह की गर्माहट ने मेरी जलन को धीरे धीरे एक सुखद अहसास में बदल दिया। कुछ ही देर में वो जलन पूरी तरह गायब हो गई और उसकी जगह एक तीव्र उत्तेजना ने ले ली। मम्मी ने भी शायद भांप लिया था कि उनका ये तरीका काम कर गया है।
जैसे ही उन्होंने मेरा लिंग अपने मुँह से बाहर निकाला, वो एक पल के लिए रुकीं। उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ वासना थी। उन्होंने बिना एक शब्द कहे अपना चेहरा ऊपर उठाया और सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए।
वह एक साधारण चुंबन नहीं था; वह दो प्यासे शरीरों का मिलन था जो एक दूसरे में समा जाने के लिए बेताब थे। जैसे ही उनके गर्म और गीले होंठ मेरे होंठों से टकराए, मेरे दिमाग में जैसे बिजली का एक तेज़ झटका लगा। उनके होंठों में मम्मी के उस कामुक रस का स्वाद था, जो अभी अभी मेरे लिंग से लिपटा हुआ था।
"उम्मम्मम... म्म्ममम..." उनकी सिसकी मेरे मुँह के अंदर ही दब कर रह गई। उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों के बीच में बुरी तरह फँसा लिया और अपनी जीभ को मेरे मुँह में पूरी ताकत से धकेल दिया। उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ ऐसे लड़ रही थी जैसे कोई युद्ध चल रहा हो। वह बहुत ही गहरी और भूखी Kiss थी। उनकी जीभ की हर हरकत में एक अजीब सी बेताबी थी, जैसे वो मेरे मुँह के अंदर के हर हिस्से को चख लेना चाहती हों।
मैंने भी हार नहीं मानी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके चेहरे को कसकर पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर और ज़ोर से खींच लिया। हमारे होंठों के बीच से निकलने वाली लार (saliva) एक धागे की तरह नीचे बहने लगी, जो उनकी छाती और मेरे सीने के बीच गिर रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." हमारे होंठों के टकराने और जीभों के आपस में रगड़ने की आवाज़ उस कमरे के सन्नाटे में बहुत ही गंदी और कामुक लग रही थी।
मम्मी ने इस Kiss को और भी गहरा बना दिया। उन्होंने अपना मुँह और भी ज़्यादा खोल दिया ताकि मैं उनकी जीभ को गहराई से महसूस कर सकूँ। उनकी साँसें अब बहुत तेज़ और गर्म हो गई थीं, जो सीधे मेरे फेफड़ों में जा रही थीं। Kiss करते करते उन्होंने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे ले जाकर मेरे बालों को ज़ोर से खींचना शुरू कर दिया, जिससे मेरा सिर पीछे की ओर झुक गया और उन्हें मुझे और भी गहराई से चूसने का मौका मिल गया।
उनकी Kiss में एक ऐसी तड़प थी जो मुझे पागल कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो सिर्फ मेरे होंठों को नहीं चूस रही हैं, बल्कि वो मेरे शरीर की पूरी आत्मा को अपने मुँह में खींच लेना चाहती हैं। उनके होंठों की कोमलता और उनकी जीभ की वो गीली और खुरदरी रगड़ सब कुछ एक साथ मिलकर मुझे चरम सुख की ओर धकेल रहा था।
Kiss के बीच में जब भी हम एक पल के लिए अलग होते, तो हमारे बीच एक लंबा, चिपचिपा लार का तार खिंच जाता, और फिर वो तुरंत ही दोबारा मेरे होंठों पर टूट पड़तीं।
उनकी आँखों में अब पूरी तरह से वासना का समंदर उमड़ रहा था। वह Kiss इतनी गहरी और बेकाबू हो चुकी थी कि मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका है और सिर्फ शरीर ही रह गया है। उनके होंठों की गर्मी और उनकी जीभ की गीली हरकतें मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थीं।
तभी मम्मी ने Kiss करते करते ही अपना एक हाथ नीचे की ओर खिसकाया। उनका हाथ धीरे धीरे मेरे पेट से होते हुए मेरे उस सख्त और उत्तेजित लिंग की तरफ बढ़ा। जैसे ही उनकी उंगलियों ने मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को छुआ, मेरी कमर में एक ज़ोरदार झटका लगा। "आह्ह्ह... मम्मी..." मेरे मुँह से एक दबी हुई कराह निकली, लेकिन उन्होंने मुझे Kiss करने से नहीं रोका। बल्कि उन्होंने अपने होंठों को और भी कस लिया।
उनका हाथ मेरे लिंग पर बहुत ही माहिर तरीके से घूमने लगा। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे लिंग की पूरी लंबाई को ऊपर से नीचे तक सहलाना शुरू किया। "स्लर्प... चप... चप..." हमारे होंठों से निकलती लार की आवाज़ और उनके हाथ की रगड़ ने माहौल को और भी गंदा और कामुक बना दिया था। उनकी पकड़ में एक अजीब सी ताकत थी, जैसे वो मेरे लिंग को पूरी तरह से अपना बना लेना चाहती हों।
मम्मी ने अचानक Kiss को थोड़ा धीमा किया, लेकिन उनके होंठ अभी भी मेरे होंठों से चिपके हुए थे। उन्होंने अपनी आँखों को खोलकर मेरी आँखों में देखा उनकी पुतलियाँ फैल चुकी थीं और उनमें सिर्फ एक ही चीज़ दिख रही थी: **भूख**। उन्होंने बहुत ही धीमी और भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, "बेटा... अब और इंतज़ार नहीं होता... मुझे फिर से अपने अंदर चाहिए... मुझे अपनी रंडी बना ले..."
उनके ये शब्द सुनकर मेरा खून उबल उठा। मैंने उन्हें झटके से बिस्तर पर लिटा दिया। उनकी कमर हवा में थोड़ी ऊपर उठी और उनकी चूत की वो गीली और लाल परत मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी। उनकी चूत से निकलने वाला चिपचिपा रस अब उनकी जाँघों के बीच बह रहा था।
मैंने बिना देर किए अपना लिंग उठाया और उनके चेहरे के पास ले गया। "मम्मी, अब आप तैयार हैं?" मैंने पूछा। उन्होंने बस अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने पैर फैला दिए, जैसे वो मुझे अपने अंदर बुला रही हों। मैंने अपने लिंग का सिरा उनकी गीली चूत के बिल्कुल मुहाने पर रखा। जैसे ही मैंने थोड़ा सा दबाव डाला, उनकी चूत की गर्मी ने मुझे फिर से झुलसा दिया।
मैंने एक गहरा और ज़ोरदार झटका मारा और अपना पूरा लिंग उनके अंदर गहराई तक उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..." उनकी चीख मेरे कानों में संगीत की तरह गूँजी, लेकिन मैंने उन्हें वो चरम सुख देने के बजाय एक नया और खौफनाक खेल खेलना शुरू किया। मैंने अपना लिंग उनकी तंग और गीली चूत के मुहाने से बाहर खींच लिया। मम्मी की आँखें फटी की फटी रह गईं, वो पूरी तरह से मेरे अंदर होने के लिए बेताब थीं, लेकिन मैंने उन्हें वो नहीं दिया।
मैंने उनके पैरों को और भी चौड़ा फैलाया और अपना सिर उनकी जाँघों के बीच ले जाकर उनकी चूत के ठीक नीचे अपना चेहरा टिका दिया। "बेटा... क्या कर रहे हो? अभी... अभी अंदर डालो... मैं मर जाऊँगी इंतज़ार करते हुए!" उन्होंने तड़पते हुए कहा, उनके शरीर में थरथराहट होने लगी थी।
लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी। मैंने अपना मुँह उनकी चूत के उस लाल और मांसल हिस्से पर टिका दिया जहाँ से उनका रस लगातार बह रहा था। "स्लर्प... चप... चप..." मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत की दरारों में बहुत गहराई तक उतारना शुरू कर दिया। मैंने उनके क्लिटोरिस (clitoris) को अपनी जीभ से ज़ोर से दबाना और सहलाना शुरू किया।


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