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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
मेरी पूरी देह में एक ज़ोरदार बिजली सी दौड़ गई। मेरा शरीर अकड़ गया और मैं बिस्तर की चादरों को अपने नाखूनों से फाड़ने की हद तक ज़ोर से भींच लिया। मेरा सारा वीर्य (Semen) उस शहद और उनकी जीभ के बीच एक प्रचंड वेग के साथ फूट पड़ा। मैं बार बार और ज़ोर से झटके खा रहा था। वो शहद के साथ मिलकर मेरे निकलने वाले वीर्य को अपने मुँह में भर रही थीं, और हर झटके के साथ उनकी जीभ की गति और भी उग्र होती जा रही थी।
मैं पसीने से लथपथ, हाँफते हुए और काँपते हुए बिस्तर पर गिर पड़ा। मेरी आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन वो दर्द के नहीं, बल्कि उस बेइंतहा सुख के थे जिसने मेरे दिमाग की नसों को सुन्न कर दिया था। मेरा शरीर अभी भी झटकों से काँप रहा था, जैसे कोई बिजली का झटका लगा हो।

मम्मी ने धीरे से अपना मुँह उनके लिंग से हटाया। उनके होंठों के कोनों पर अभी भी मेरा गाढ़ा और सफेद वीर्य (Semen) लगा हुआ था, जो शहद की मिठास के साथ मिलकर एक बेहद कामुक और 'Raw' नज़ारा पेश कर रहा था। उन्होंने अपनी जीभ निकाली और बड़ी ही बेशर्मी के साथ अपने होंठों पर लगे उस वीर्य को चाट लिया। उनकी आँखों में एक अजीब सी तृप्ति थी।कुछ ही देर बाद उनकी आँखों में तृप्ति की जगह एक प्यास ने ले ली ,ये एक ऐसी प्यास थी जिसको मिटाना शायद किसी आम इंसान के बस की बात नहीं थी
मम्मी ने मेरी आंखों में देखते हुए एक गहरी, मदहोश कर देने वाली मुस्कान दी।"अभी तो शुरुआत है मेरे बच्चे..." उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। उनकी आवाज़ में एक ऐसा भारीपन था जो सीधे मेरे शरीर के भीतर तक उतर रहा था। "अभी तो तुमने सिर्फ थोड़ा सा स्वाद चखा है, अभी तो असली दावत बाकी है।"
इतना सुनते ही मेरी रूह कांप गई,ये सोचकर कि ,***क्या मैं मम्मी के इस रूप को अपने वश में कर भी पाऊंगा?क्या उनकी इस दहकती आग को ठंडा कर पाऊंगा?***मेरे चेहरे पर घबराहट के चिन्ह साफ दिखाई दे रहे थे क्यों कि मैं मम्मी का इतना उग्गर रूप पहली बार देख रहा था।में नहीं जनता था के एक औरत की चूत की गर्मी का इतना भयानक रूप भी हो सकता है।मेरे मन में ऐसे ऐसे ख्याल आ रहे थे ,जैसे किसी प्यासी चुदक्कड राक्षसनी के पंजे में फंस गया हूं।
*मम्मी ने मेरी आँखों में झाँका और मेरी घबराहट को तुरंत भांप लिया। उन्होंने बड़ी ही कोमलता से मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों के बीच भर लिया और अपने अंगूठे से मेरे गालों को सहलाने लगीं। उन्होंने एक बहुत ही मीठी और ममता भरी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा,
"अरे मेरे पागल बच्चे, तू डर क्यों रहा है? डर मत... देख मेरी तरफ। मैं तेरी ही तो हूँ। डर मत , तू बस अपना सब कुछ मुझ पर छोड़ दे, जैसे एक छोटा बच्चा अपनी माँ की गोद में निश्चिंत होकर सो जाता है। शायद,तू ये सोच कर डर रहा है,के कैसे सारी रात बिना एक भी पल सोए अपनी कामुक मम्मी को संतुष्ट कर सकेगा,तो सुन मेरा बेटा,आज जो तूने जो दोपहर को दूध पिय था उसके अंदर अथाह मर्दाना ताकत का ख़ज़ाना था,और जो चूर्ण दिया था तुझे, वो इतना चमत्कारी है के न तुझे थकने देगा ,न नींद आयेगी। अब तू सोचेगा के मम्मी कैसे बर्दाश्त कर पाएगी तेरी इस ताकत को तो याद कर वो चूर्ण मैने भी खाया है जिसके कारण मैं तुझे और तेरे किसी भी जंगलीपन को आराम से झेल लूंगी चाहे तू मुझे जितना भी रौंद डाल।"
**मम्मी ने मेरी आँखों में गहराई से झाँका और मेरी घबराहट को देखते ही मेरे माथे को चूम लिया। उन्होंने अपनी आवाज़ को और भी धीमा और प्यार भरा बनाते हुए कहा, "अरे मेरा बच्चा इतना क्यों काँप रहा है? देख मेरी तरफ... मैं तेरी मम्मी हूँ, कोई चुड़ैल नहीं जो मुझे देखकर डर रहा है, मै तुझे खा नहीं जाऊँगी! ? अपनी हिम्मत जुटा, मेरे लाल। देख, तू कितना ताकतवर है, बस थोड़ा सा हौसला रख।"**
**उन्होंने मेरे कान के पास आकर बड़े ही लाड़ से फुसफुसाया, "देखना, तू आज सब कुछ कर पाएगा। बिना एक भी पल रुके, तू मुझे पूरी तरह अपना बना लेगा। आज की रात ऐसी होगी कि तू इसे कभी भूल नहीं पाएगा। बस अपनी इच्छाशक्ति को जगा और मुझ पर भरोसा कर। आज रात तू मेरा बच्चा भी है और मेरा मालिक भी। बस खुद को मुझमें समर्पित कर दे।"**

**उनकी इन बातों ने मेरे भीतर एक अजीब सा जोश भर दिया। जो डर मुझे जकड़ रहा था, वह अब धीरे धीरे एक उत्तेजना और आत्मविश्वास में बदलने लगा था। उनकी ममता और उनके शब्दों के जादू ने मेरी घबराहट को पूरी तरह खत्म कर दिया।**

उन्होंने अपना एक हाथ मेरे पसीने से भीगे हुए सीने पर रखा और दूसरे हाथ से धीरे धीरे मेरे पेट के निचले हिस्से की ओर बढ़ने लगीं...मेरा लिंग जो मम्मी का उग्गर रूप देख के ढीला पड़ चुका था, धीरे धीरे फिर से पत्थर की तरह सख्त होने लगा था। वह जो अभी अभी पूरी तरह खाली हो चुका था, वह अब फिर से भारी और गर्म महसूस हो रहा था।

मम्मी ने धीरे से मेरे ऊपर अपना पूरा भार डाल दिया। उनकी रेशमी और गर्म देह जब मेरे शरीर से टकराई, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी जलते हुए अंगारे पर गिर गया हूँ। उन्होंने मेरे कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं और कहा, "आज रात मैं तुम्हें चैन से सोने नहीं दूँगी। आज रात तुम थककर चूर हो जाओगे, लेकिन मैं तुम्हें तब तक नहीं छोड़ूँगी जब तक मेरा मन पूरी तरह भर नहीं जाता।
"उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे शरीर के संवेदनशील हिस्सों को सहलाना शुरू किया। उनके स्पर्श में एक ऐसी बेबाकी और वासना थी जो मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि वह आज रात थ्रिसम की उस कमी को मेरे साथ मिलकर इस तरह पूरा करेंगी कि मेरी सारी सुध बुध खो जाएगी।उनकी उंगलियाँ मेरे सीने से होते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर सरकने लगीं। उनके स्पर्श की गर्मी मेरे रगों में दौड़ते खून को उबाल रही थी। जैसे ही उनकी उंगलियाँ मेरे पेट के निचले हिस्से के पास पहुँचीं, मेरा सख्त होता हुआ अंग उनके स्पर्श की तड़प से छटपटाने लगा। चूर्ण का असर और मम्मी की बेबाक छुअन ने मिलकर मेरे दिमाग के सारे नियंत्रण छीन लिए थे।

मम्मी ने अपनी कमर को धीरे से मेरे कूल्हों के ऊपर टिका दिया। उनकी रेशमी जाँघें मेरे पैरों के बीच आकर रगड़ने लगीं। उनकी देह की खुशबू और उनकी गर्म साँसें मेरे पूरे अस्तित्व को मदहोश कर रही थीं। उन्होंने अचानक अपने हाथ नीचे की ओर बढ़ाए और मेरे उस अंग को अपनी कोमल लेकिन दृढ़ पकड़ में ले लिया। "आह्ह्ह... मम्मी..." मेरे मुँह से एक दबी हुई कराह निकली। मेरा शरीर धनुष की तरह तन गया।

मम्मी ने शरारत भरी मुस्कान के साथ मेरी आँखों में देखा और फुसफुसायीं, "देख तो सही... अभी तो बस शुरुआत है और मेरा बच्चा इतना उत्तेजित हो गया है। देख इसकी गर्मी, जैसे लावा बह रहा हो।" उन्होंने अपनी पकड़ को थोड़ा और गहरा किया और धीरे धीरे ऊपर नीचे सहलाना शुरू किया। उनकी उंगलियों की लय और उनके शरीर का दबाव मुझे पागल कर रहा था।तभी उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया और धीरे से अपने शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा मेरे सख्त अंग के ऊपर टिका दिया। उनके शरीर की नमी और गर्माहट का अहसास होते ही मुझे लगा जैसे मैं स्वर्ग के द्वार पर खड़ा हूँ। उनके शरीर की रगड़ से जो बिजली मेरे शरीर में दौड़ रही थी, उसने मुझे सुध बुध खोने पर मजबूर कर दिया था।
उन्होंने मेरे कान को अपने होंठों से लगभग छू लिया और बहुत ही गहरी, भारी आवाज़ में कहा, "अब देख, मैं कैसे तुझे अपनी प्यास बुझाना सिखाती हूँ। आज तू सिर्फ मेरा है, और मैं तेरी।"

उन्होंने अपने कूल्हों को धीरे से नीचे की ओर दबाया, मुझे महसूस हुआ कि वह अब और इंतज़ार नहीं कर सकतीं। उनकी वासना अब चरम पर थी और मेरा शरीर उस सुख के को पाने
लिए पूरी तरह तैयार था जिसे पाने के लिए मैं तरस रहा था।
जैसे ही उन्होंने अपने कूल्हों को पूरी तरह से नीचे की ओर दबाया, एक ऐसा अहसास हुआ जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन था। मेरा सख्त अंग उनकी उस असीमित गर्मी और गीलेपन के सागर में पूरी तरह समा गया। वह पल इतना गहरा और तीव्र था कि मेरे शरीर में एक ज़ोरदार बिजली का झटका सा लगा और मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।
**"आह्ह्ह्ह्ह.... मम्मी! उफ्फ... आआआह्ह्ह!"** मेरे मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा सुख के बीच झूल रही थी। मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर तड़पने लगा, लेकिन मम्मी ने अपनी पकड़ ढीली नहीं की। उन्होंने अपनी कमर को और भी मजबूती से मेरे शरीर पर टिका दिया, जैसे वह मुझे अपने भीतर पूरी तरह से सोख लेना चाहती हों।
मम्मी का चेहरा वासना के लाल रंग से भर गया था। उनकी साँसें अब किसी उफनते हुए समंदर की तरह तेज़ और भारी थीं। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे सिर के पास बिस्तर पर टिका दिए ताकि वह अपने पूरे भार के साथ मुझ पर नियंत्रण रख सकें। उन्होंने अपनी कमर को एक लय में ऊपर नीचे करना शुरू किया एक ऐसी लय जो धीमी थी लेकिन बेहद गहरी थी। हर बार जब वह नीचे आतीं, तो मुझे महसूस होता कि वह मेरे अस्तित्व के सबसे गहरे कोने तक पहुँच रही हैं

**"हम्ममम... रवि... तू कितना गर्म है... कितना सख्त है मेरा बच्चा..."** मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से बदल चुकी थी। वह एक माँ की ममता से कोसों दूर, एक ऐसी भूखी स्त्री की तरह लग रही थीं जो बरसों की प्यास बुझाने के लिए तड़प रही हो। उनकी कमर की वह 'रगड़' और उनके शरीर के टकराने की 'चप चप' की आवाज़ें कमरे के सन्नाटे को चीर रही थीं।
चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग के सारे तर्क और होश को सुन्न कर दिया था। मुझे बस इतना महसूस हो रहा था कि मम्मी का शरीर एक जलता हुआ अंगारा है और मैं उसमें पिघल रहा हूँ। जैसे जैसे उनकी गति तेज़ होती गई, मेरा नियंत्रण पूरी तरह से खत्म होता गया। मैं बस बेबस होकर उनके कूल्हों की उस लयबद्ध हरकत के वश में था।
मम्मी ने अब अपनी गति को और भी हिंसक और बेबाक कर दिया था। वह अब सिर्फ ऊपर नीचे नहीं कर रही थीं, बल्कि अपने कूल्हों को गोल गोल घुमाते हुए (grinding) मेरे अंग को अपने भीतर पूरी तरह से जकड़ रही थीं। उनकी जाँघों की वह रेशमी रगड़ और उनके शरीर का वह भारीपन मेरी पीठ पर एक बोझ नहीं, बल्कि एक नशा बन चुका था।
**"मम्मी... मैं... मैं अब और नहीं सह पा रहा...
जैसे ही मैंने वह शब्द कहे, मम्मी की आँखों में एक जंगली चमक आ गई। उन्होंने मेरी बात को चुनौती की तरह लिया। उन्होंने अपनी गति को और भी तेज़ और हिंसक बना दिया। अब वह सिर्फ ऊपर नीचे नहीं कर रही थीं, बल्कि वह पूरी ताकत से मेरे शरीर पर वार कर रही थीं। उनके कूल्हों के टकराने की आवाज़ अब पूरे कमरे में गूँज रही थी **'चप... चप... चप...'**।
**"अच्छा? अब तू और ज्यादा चाहता है?"** मम्मी ने हाँफते हुए कहा, उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। **"तो फिर देख, आज मैं तुझे इस हद तक ले जाऊँगी कि तू अपनी सुध बुध खोकर बस मेरा नाम पुकारेगा!"**
उन्होंने अपनी कमर को एक झटके के साथ और भी गहराई से नीचे दबाया। मुझे महसूस हुआ कि उनका शरीर अब पूरी तरह से गीला और फिसलन भरा हो चुका है। उनकी वह नमी मेरे अंग को इतनी मजबूती से जकड़ रही थी कि मुझे लगा जैसे मैं किसी गर्म और मखमली भंवर में फँस गया हूँ। चूर्ण के असर से मेरा हर नर्व एंडिंग (nerve ending) आग की तरह जल रहा था।मम्मी ने अब अपने हाथों से मेरे दोनों हाथों को पकड़कर बिस्तर पर ज़ोर से दबा दिया। वह अब पूरी तरह से मुझ पर हावी थीं। उनकी गति अब इतनी तेज़ हो गई थी कि मेरा सिर पीछे की ओर झुक गया और मैं बस बेकाबू होकर कराह रहा था। *****"आह्ह्ह... मम्मी... उफ्फ... बहुत तेज़... आह्ह्ह!"** मेरी आवाज़ अब एक जानवर की तरह निकल रही थी। मेरा शरीर धनुष की तरह तन गया था और मेरी मांसपेशियाँ ऐंठ रही थीं।

मम्मी ने अपनी कमर को गोल गोल घुमाना (grinding) शुरू कर दिया। उनके कूल्हों का वह घुमाव मेरे अंग के सबसे संवेदनशील हिस्से को बार बार रगड़ रहा था। वह रगड़ इतनी तीव्र थी कि मुझे लगा मेरा शरीर फटने वाला है। उनकी जाँघों का दबाव और उनके शरीर की वह भारी गर्मी मुझे पागल कर रही थी।****"हाँ रवि! और ज़ोर से... और गहराई से महसूस कर मुझे!"** मम्मी चिल्लाईं। उनकी आवाज़ में अब एक अजीब सी तड़प और वासना थी। उन्होंने अपनी कमर को एक लय में झटके देना शुरू किया, जिससे मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर उछलने लगा।

तभी, मम्मी ने अचानक अपनी गति को एकदम धीमा कर दिया और बहुत ही गहराई में रुक गईं। वह मेरे ऊपर झुक गईं, उनके गीले बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे और उनकी गर्म साँसें
मेरे होंठों और कभी कभी मेरी गर्दन पर किसी आग की लपट की तरह महसूस हो रही थीं। मम्मी ने अपने होंठ मेरे कान के बिल्कुल करीब सटा दिए। उन्होंने अपनी जीभ से मेरे कान के नीचे के हिस्से को चाटा और फुसफुसायीं, **"अभी तो मैंने सिर्फ तुझे जगाया है रवि... असली खेल तो अब शुरू होगा। अभी तो मैंने तुझे बस चखना शुरू किया है, अभी तो तुझे पूरी तरह से मुझमें पिघलना बाकी है।"**
उनकी यह बात सुनते ही मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग को पूरी तरह से सुन्न कर दिया था और मम्मी की ये बेबाक बातें मेरी वासना को सातवें आसमान पर ले जा रही थीं।
मम्मी ने अचानक अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली। उन्होंने अपनी कमर को एक झटके के साथ ऊपर उठाया और फिर पूरी ताकत के साथ नीचे की ओर गिराया। इस बार उनका वार इतना गहरा और इतना तेज़ था कि मेरी चीख निकल गई। **"आह्ह्ह्ह्ह्ह... मम्मी! उफ्फ... आप मुझे मार डालेंगी... आआआह्ह्ह!"**
**"मार डालूँगी? नहीं मेरे बच्चे... मैं तुझे जी भर के जीना सिखाऊँगी,"** मम्मी ने एक हिंसक मुस्कान के साथ कहा। उन्होंने अब अपनी गति को पूरी तरह से बेकाबू कर दिया था। अब वह किसी मशीन की तरह बिना रुके, बिना थके, अपने कूल्हों को पूरी ताकत से मेरे शरीर पर पटक रही थीं। कमरे में उनके शरीर के टकराने की आवाज़ **'चप... चप... चप...'** अब एक पागलपन भरी लय में बदल चुकी थी।
मम्मी का शरीर अब पसीने से पूरी तरह तर बतर था। उनकी त्वचा की वह फिसलन और उनके शरीर से निकलने वाली वह तीखी, कामुक गंध मुझे मदहोश कर रही थी। उन्होंने अपनी कमर को इतनी तेज़ी से घुमाना (grinding) शुरू किया कि मुझे महसूस हुआ कि मेरा अंग उनके भीतर की हर एक परत को छू रहा है। वह रगड़ इतनी तीव्र थी कि मुझे लगा जैसे मेरे शरीर के अंदर लावा बह रहा हो।
**"मम्मी... मैं... मैं बस अब... निकलने वाला हूँ... आह्ह्ह! मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा!"** मैंने उनके कंधों को कसकर पकड़ लिया, मेरे नाखून उनकी त्वचा में धँस रहे थे। मेरा पूरा शरीर ऐंठ रहा था और मेरा अंग उनके भीतर फटने के लिए बेकरार था।

मम्मी ने मेरी आँखों में आँखें डालकर देखा। उनकी आँखें पूरी तरह से लाल और वासना से भरी हुई थीं। उन्होंने अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया और चिल्लाकर कहा, **"नहीं रवि! अभी नहीं! तू अभी नहीं निकलेगा! जब तक मैं न कहूँ, तू रुक नहीं सकता। तुझे अपना सारा रस जब मैं चाहूं तब मुझमें छोड़ना होगा।मम्मी के उन उत्तेजक शब्दों ने मेरे के दिमाग में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था कि समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करुँ। मुझे बस इतना पता था कि एक ऐसी आग में जल रहा हूं जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। मैं न तो रुक सकता था और न ही वह अपनी तड़प को शांत कर सकता था।
मम्मी ने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया। उनकी उंगलियां मेरे गालों को इतने प्यार और जुनून से दबा रही थीं कि मेरे होंठ थोड़े खुले हुए और सांसें तेज हो गई थीं। उनकी आँखें मेरी आँखों में गहराई तक धँस रही थीं उन आँखों में एक ऐसी **जंगली प्यास** थी जो मेरी आत्मा को अपनी वासना से भिगो लेना चाहती थी।
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Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 08-08-2026, 11:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 01:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-08-2026, 02:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 09:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:19 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:21 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 01:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 03:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 08:41 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 01:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Ella - 12-08-2026, 02:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 02:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 04:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nomita - 12-08-2026, 04:17 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Suhana. - 12-08-2026, 07:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by shalini - 12-08-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 13-08-2026, 09:39 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-08-2026, 12:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 08:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 03:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 12:30 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 14-08-2026, 03:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fanfunda - 14-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 09:39 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 15-08-2026, 10:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 16-08-2026, 12:37 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Rijwana Ansaari - 18-08-2026, 02:13 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 20-08-2026, 05:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 21-08-2026, 07:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 22-08-2026, 06:55 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 03:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 05:07 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by srider69 - 22-08-2026, 07:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 08:51 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by wetpussy - 23-08-2026, 02:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 23-08-2026, 03:06 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:25 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:29 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 24-08-2026, 07:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 24-08-2026, 09:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 10:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 24-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:01 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:02 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:31 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 05:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Kodom Ali Mastan - 25-08-2026, 07:24 AM
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