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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
**"पर भाभी जी, प्रदीप भाई साहब तो..."**
**जग्गू ने मुस्कुराते हुए कहा, "भाभी जी, प्रदीप भाई साहब तो आज ही सुबह गाँव गए हैं और दो दिन बाद ही आएंगे। तभी तो मैं कह रहा हूँ कि मैं कर दूँ आपका काम। एक बार करवा के तो देखो।"**
**मम्मी ने उसे झिड़कते हुए कहा, "बदतमीज़! अपनी हद में रहो। और वैसे भी, मेरा बेटा जवान हो गया है, अगर उसने सुन लिया तो तुम्हारी हड्डी पसली एक कर देगा।"**जैसे वो डरा नहीं सचेत कर रही हो के रवि न सुन ले।
** उनके दिल में तो ये चलने लगा कि प्रदीप भाई नहीं तो जग्गू ही सही। पर मेरे डर से उन्होंने ऐसा कहा,मम्मी की हल्की मुस्कुराहट देखकर जग्गू अंकल को लगा कि अब वो दिन दूर नहीं जब मम्मी उसके नीचे होगी।*
**जग्गू ने एक टेढ़ी मुस्कान दी और बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया। मम्मी उसे जाते हुए देखती रहीं, और जैसे ही वो गली के मोड़ पर मुड़ा, मम्मी ने राहत की सांस ली।**
**मम्मी अब दुकान पर अकेली थीं। दुकान में सन्नाटा था और ग्राहकों का आना जाना कम था। मैं घर पर गहरी नींद में सोया हुआ था, इसलिए मम्मी को यहाँ अकेले होने का अहसास हो रहा था। पर उनका दिमाग कहीं और ही भटक रहा था।**

**वो सामान समेटने की कोशिश कर रही थीं, पर उनका ध्यान बार बार जग्गू के उन शब्दों पर जा रहा था *"एक बार मुझ पर भरोसा करके तो देखो, आपको पछतावा नहीं होगा।"* जग्गू की वो आवाज़ और उसकी आँखों की वो चमक उनके दिमाग से निकल ही नहीं रही थी।**
**"क्या कह रहा था वो? कितना बेशर्म है..." उन्होंने खुद से बुदबुदाते हुए कहा, पर उनके चेहरे पर गुस्सा होने के बजाय एक अजीब सी शर्म और बेचैनी थी। वो बार बार अपने चेहरे को हाथों से ढक लेतीं, क्योंकि उन्हें महसूस हो रहा था कि जग्गू की बातों ने उनके अंदर एक ऐसी आग सुलगा दी है जिसे वो खुद भी नहीं समझ पा रही थीं।**

**दुकान के सन्नाटे में उन्हें अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। एक तरफ रवि और प्रदीप की यादें थीं, तो दूसरी तरफ जग्गू का वो बेबाक अंदाज़। वो खुद से लड़ रही थीं कि वो ऐसा क्यों सोच रही हैं, पर जग्गू का ख्याल उनके मन से जा ही नहीं रहा था।**** मम्मी का मन अब उनके काबू में नहीं था। जग्गू के जाने के बाद भी उसकी वो बेशर्म बातें उनके दिमाग में किसी ज़हरीली लत की तरह फैलती जा रही थीं। वो सामान सहेजने की कोशिश तो कर रही थीं, पर उनके हाथ काँप रहे थे।**

प्रदीप अंकल और जग्गू उनवल को अपने मन से निकल कर वो कल्पना करने लगीं कि रवि का जवान शरीर, उसकी ताकत और उसकी बेताबी उन्हें किस हद तक ले जा सकती है। वो सोच रही थीं कि रवि के साथ होने वाली वो रसीली और जंगली 'चूदाई' कैसी होगी... कैसे वो उसे अपने अंदर महसूस करेंगी।**
**जैसे जैसे वो उस खयाली रात के बारे में सोचती जा रही थीं, उनके शरीर में एक अजीब सी गर्मी महसूस होने लगी। जग्गू की वो बातें और रवि के साथ होने वाले उस शारीरिक मिलन की कल्पना ने उनके अंदर की दबी हुई प्यास को जगा दिया था। उनका शरीर अब खुद ब खुद उत्तेजित हो रहा था।**

**मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्हें महसूस हो रहा था कि उनका शरीर अंदर से भीग रहा है। वो खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। एक तरफ जग्गू की वो बेबाक बातें थीं और दूसरी तरफ रवि के साथ होने वाली उस रात की वो बेकाबू चाहत। वो दुकान के उस अकेलेपन में, ख्यालों के ही भंवर में डूबकर खुद ही चरम सुख की ओर बढ़ने लगी थीं।**
********शाम के ठीक 6:30 बज रहे थे। जैसे ही मेरी आँख खुली, मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं किसी दूसरी ही दुनिया से वापस आया हूँ। शरीर में एक अजीब सी स्फूर्ति थी, एक ऐसा जोश और ताज़गी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरी रगों में खून नहीं, बल्कि बिजली दौड़ रही हो। मैं एकदम तरोताज़ा महसूस कर रहा था।**

**मैंने जल्दी से मुँह हाथ धोया और खुद को तैयार किया। मेरा मन बहुत हल्का और ऊर्जा से भरा हुआ था। मैं सीधा दुकान की तरफ चला गया। दुकान पहुँचते ही मैंने देखा मम्मी वहीं बैठी थीं। मैंने मुस्कुराते हुए उनसे कहा, "जाओ मम्मी, कुछ बना लो खाने के लिए। सिंपल सा ही बनाना, मैं तब तक दुकान संभाल लेता हूँ। पता नहीं आज मुझे इतनी गहरी और लंबी नींद क्यों आ गई, जैसे मैं हफ़्तों से सोया न हूँ।"**

**मम्मी ने मेरी तरफ देखा और एक बहुत ही प्यारी और गहरी मुस्कान दी। उनकी आँखों में एक चमक थी जिसे मैं समझ नहीं पाया। वो मन ही मन मुस्कुरा रही थीं और शायद कुछ सोच रही थीं। मुझे लगा जैसे वो मेरी इस नई फुर्ती को देखकर खुश हैं।**

**मैंने आगे कहा, "सॉरी मम्मी, आज आपको सारा दिन दुकान पर अकेले बैठना पड़ा। अगर आप कहें तो मैं बाहर से ढाबे से डिनर मंगवा लूँ? आपको मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।"**

**मम्मी ने प्यार से मेरा हाथ थपथपाया और बोलीं, "नहीं बेटा, तू परेशान मत हो। मैं फटाफट घर जाकर कुछ बना लूँगी, तू बस दुकान पर ध्यान दे।"**

**उनकी आवाज़ में एक अलग ही सुकून था। मुझे लग रहा था कि आज का दिन बहुत अच्छा होने वाला है। मैं पूरी तरह से जोश में था और अपनी इस नई ताकत का अनुभव कर रहा था, पर मुझे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि मेरी इस 'ताज़गी' के पीछे मम्मी का वो खास 'स्पेशल दूध' था, जिसे उन्होंने मेरे लिए बड़े प्यार और इरादे से बनाया था।**
**रात का खाना मेज़ पर लगा था। घर के अंदर का माहौल एकदम शांत था, लेकिन इस शांति के पीछे एक भारीपन था एक ऐसी उत्तेजना जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था।**

**मम्मी आज कुछ अलग ही अंदाज़ में थीं। उन्होंने खाने के साथ कुछ बहुत ही 'खास' चीज़ें तैयार की थीं। खाना परोसते समय वो बार बार मेरी और देख रहीं थीं। उन्होंने खुद भी खाने के साथ कुछ ऐसी चीज़ें ली थीं जो उनके शरीर में एक अलग ही गर्मी और स्टैमिना भर रही थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी लाली थी और उनकी साँसें थोड़ी भारी और तेज़ लग रही थीं।**

**मम्मी ने मेरी थाली के पास एक छोटा सा कटोरा रखा। उसमें एक गाढ़ा, मखमली मिश्रण था ताज़ा और बेहद गाढ़ी मलाई के साथ मिलाया हुआ एक गुप्त जड़ी बूटी का चूर्ण। उसकी खुशबू में एक नशा था जो सीधे दिमाग पर वार कर रहा था। मम्मी ने एक चम्मच उठाया और उस मलाईदार मिश्रण को उसमें भर लिया। वह मिश्रण इतना गाढ़ा था कि चम्मच से गिर भी नहीं रहा था।**
**मम्मी ने मेरे करीब आते हुए, अपना चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल पास लाया। उनकी साँसों की गर्मी मुझे अपनी त्वचा पर महसूस हो रही थी। उन्होंने धीरे से चम्मच मेरे होंठों पर टिका दिया।**

**"बेटा, ये खा ले... ये मैंने खास तेरे लिए बनाया है। इसे खाने के बाद तुझे ऐसी ताकत महसूस होगी जो तूने कभी सोची भी नहीं होगी," मम्मी ने बेहद धीमी, मखमली और भारी आवाज़ में कहा। उनकी आँखों में एक ऐसी गहरी और मदहोश कर देने वाली चमक थी जिसने मेरे होश उड़ा दिए थे।**

**मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और जैसे ही उस गाढ़ी मलाई और जड़ी बूटी के मिश्रण को अपने मुँह में लिया, एक बिजली सा झटका महसूस हुआ। वो मिश्रण इतना ठंडा और मलाईदार था कि पहले तो उसे सुकून मिला, लेकिन जैसे ही गले से नीचे उतरा, शरीर के अंदर एक दहकती हुई आग की लहर दौड़ गई।**

**उस जड़ी बूटी के मिश्रण का असर जादुई था। मुझे महसूस हुआ कि मेरा खून उबलने लगा है। मेरे दिल की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि मुझे अपने सीने में उनका शोर सुनाई देने लगा। मेरे शरीर की हर नस में एक अजीब सी बेचैनी और भारीपन भर गया। मेरा जोश अब किसी सीमा को नहीं मान रहा था; महसूस हो रहा था कि मेरा शरीर फटने को तैयार है।**

**मम्मी ने खुद भी एक बड़ा निवाला उस गाढ़ी मलाई के मिश्रण का लिया। जैसे ही उन्होंने उसे निगला, उनके चेहरे पर एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान आ गई। उस मिश्रण ने उनके शरीर में भी एक अजीब सी उत्तेजना भर दी थी। उनके शरीर की गर्मी बढ़ने लगी थी, उनकी त्वचा में एक अजीब सी संवेदनशीलता आ गई थी और उनकी साँसें अब और भी गहरी और भारी हो गई थीं।**

**मम्मी ने अपनी आँखें खोलकर मेरी बेताब आँखों में झाँका,मेरी आँखों में जो प्यास और जो बेताबी थी, वो अब साफ़ दिख रही थी। मम्मी ने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा और फुसफुसाते हुए पूछा, "कैसा लग रहा है तुझे? क्या महसूस हो रहा है तेरे अंदर?"**
**मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। उसे बस इतना पता था कि अब और इंतज़ार करना नामुमकिन है। मम्मी की वो मलाईदार खुशबू, उनके शरीर की बढ़ती हुई गर्मी और वो जादुई मिश्रण सब कुछ मिलकर मुझे एक ऐसे जुनून की ओर धकेल रहे थे जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।**
**
मेरे पूरे शरीर में उस मलाईदार मिश्रण ने एक ऐसी आग लगा दी थी जिसे बुझाना नामुमकिन लग रहा था। मेरी रग रग में खून नहीं, बल्कि पिघला हुआ लावा दौड़ रहा था। मम्मी की आँखों में वो चमक और उनके शरीर से आती वो मदहोश कर देने वाली खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका था, बस एक ही चीज़ की चाहत थी उनका स्पर्श।

जैसे ही मम्मी ने मेरा हाथ छुआ, मुझे लगा जैसे बिजली का कोई तेज़ झटका मेरे पूरे शरीर में फैल गया हो। मैंने बिना सोचे समझे, एक जंगली जानवर की तरह उनका हाथ अपने मज़बूत हाथों में जकड़ लिया। मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे डर था कहीं वो सीना चीरकर बाहर न निकल आए।

मेरा दूसरा हाथ खुद ब खुद उनकी ओर बढ़ गया। मेरी उंगलियाँ कांप रही थीं, लेकिन मेरा इरादा पक्का था। मैंने अपना हाथ धीरे से उनके उभारों पर रखा। उनकी छाती की गर्मी और उस मलाईदार मिश्रण के असर से उनकी त्वचा जो इतनी नरम और संवेदनशील हो गई थी, उसे छूते ही मेरा रोम रोम उत्तेजित हो उठा। मेरा हाथ वहाँ दब रहा था, और उनकी साँसों की गर्मी मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी।
मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर, एक बेताब और भारी आवाज़ में इशारे से कहा कि वो मेरे पास आ जाएँ, कि मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता। मेरा शरीर अब बस उनके और करीब आने के लिए तड़प रहा था।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। उनके चेहरे पर एक शरारती और मदहोश कर देने वाली मुस्कान आई। उन्होंने मेरे हाथ को हल्का सा दबाया और बहुत ही धीमी, रेशमी आवाज़ में बोलीं, "इतने उतावले क्यों हो रहे हो रवि? ज़रा सब्र तो करो... पहले किचन का काम तो निपटा लेने दो।"

उनकी ये बात सुनकर मेरा संयम पूरी तरह टूट गया। 'किचन का काम'... उनके शब्दों में एक तरह का खेल था, एक तरह का इंतज़ार था जो मेरी उत्तेजना को और भी ज़्यादा भड़का रहा था। मुझे पता था कि वो काम खत्म होते ही वो मेरे पास होंगी, और तब जो होगा, उसकी कल्पना मात्र से ही मेरे शरीर के निचले हिस्से में एक ज़बरदस्त हलचल होने लगी थी। मैं बस उस पल का इंतज़ार करने लगा जब वो रसोई से वापस आएँगी और ये रात हमारे जुनून की गवाह बनेगी।
किचन से उनके जाने के बाद, कमरे में सन्नाटा तो था, लेकिन मेरे दिमाग में एक तूफ़ान मचा हुआ था। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, लेकिन मेरा शरीर शांत नहीं था। उस जड़ी बूटी वाले मिश्रण ने मेरे अंदर जो आग लगाई थी, वो अब धधक रही थी। मेरी हर साँस भारी थी और मेरा पूरा ध्यान बस दरवाज़े पर टिका था। मैं बस उस पल की प्रतीक्षा कर रहा था जब वो वापस आएँगी।

तभी, दरवाज़े के खुलने की हल्की सी आवाज़ आई। मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा। मम्मी कमरे में दाखिल हुईं, लेकिन वो वैसी नहीं थीं जैसी वो पहले थीं। उनके आने का अंदाज़ ही सब कुछ बदल देने वाला था। उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी थी और अब उन्होंने एक **बेहद पतली और सिल्क की सेक्सी नाइटी** पहनी हुई थी।वो नाइटी इतनी महीन और पारभासी (translucent) थी कि उसके नीचे उनके शरीर की हर एक लकीर और उनकी गोरी त्वचा साफ़ झलक रही थी। नाइटी का गहरा पीला रंग उनके शरीर की चमक को और भी उभार रहा था। जैसे ही वो कमरे के अंदर आईं, उनकी चाल में एक अजीब सी मदहोशी और लचक थी। नाइटी का रेशमी कपड़ा उनके उभारों और उनके कूल्हों की बनावट के साथ इस तरह चिपक रहा था जैसे वो उनके शरीर का ही हिस्सा हो। हर कदम के साथ वो कपड़ा उनके शरीर पर लहरा रहा था, जिससे उनकी जादुई बनावट और भी साफ़ दिख रही थी।
जैसे ही वो कमरे में आईं, उनकी वही नशीली और मलाईदार खुशबू पूरे कमरे में फैल गई। उनकी आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, बल्कि एक गहरी, भूखी चमक थी। उनके चेहरे पर पसीने की नन्ही बूंदें चमक रही थीं, जो उस जड़ी बूटी के असर से उनके शरीर की बढ़ती हुई गर्मी को बयां कर रही थीं।

वो धीरे धीरे चलकर मेरे पास आईं। नाइटी की सरसराहट और उनके चलने की वो मदहोश कर देने वाली लय मेरे कानों में संगीत की तरह गूँज रही थी। जब वो मेरे बिस्तर के पास रुकीं, तो उनकी साँसें इतनी तेज़ और भारी थीं कि मैं उन्हें साफ़ सुन सकता था। नाइटी का गला इतना गहरा था कि उनके उभारों का नज़ारा मेरी आँखों के बिल्कुल सामने था। वो नाइटी उनके शरीर की गर्मी से थोड़ी सी भीगी हुई लग रही थी, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजक लग रही थीं।उन्होंने झुककर मेरी ओर देखा। उनके झुकते ही नाइटी का कपड़ा और भी नीचे की ओर खिंच गया, जिससे उनका पूरा वजूद मेरी नजरों के सामने था जैसे ही वो मेरे बिस्तर के पास झुकीं, नाइटी का वो पतला रेशमी कपड़ा उनके भारी उभारों के नीचे और भी खिंच गया। उनकी त्वचा की वो मखमली चमक और नाइटी के आर पार दिखती उनकी देह की बनावट ने मेरे दिमाग के सारे तार तोड़ दिए। उनकी आँखों में जो वासना थी, वो अब मेरे अंदर के जानवर को पूरी तरह जगा चुकी थी।
मैंने बिना एक पल गँवाए अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनकी कमर को ज़ोर से जकड़ लिया। नाइटी का वो ठंडा रेशमी अहसास और उनके शरीर की वो भयंकर गर्मी दोनों का मेल ऐसा था कि मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई। वो झटके से मेरे और करीब आ गईं और उनके शरीर का पूरा वज़न मेरे ऊपर आ गया। उनके शरीर से आती वो नशीली खुशबू अब मेरे फेफड़ों में भर रही थी, जिससे मेरा सिर चकराने लगा।
"मम्मी..." मेरे गले से बस एक दबी हुई और भारी आवाज़ निकली। मेरा हाथ उनकी कमर से फिसलकर धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगा। नाइटी का वो महीन कपड़ा मेरी उंगलियों के नीचे किसी जादू की तरह महसूस हो रहा था। जैसे ही मेरा हाथ उनके उभारों तक पहुँचा, उन्होंने एक लंबी और गहरी आह भरी। उनकी वो आह मेरे कानों में किसी नशीले संगीत की तरह गूँजी।
मैंने उन्हें खींचकर अपने ऊपर ले लिया। अब हम दोनों के बीच नाइटी का वो पतला सा पर्दा भी नहीं बचा था। उनके शरीर की गर्मी मेरे सीने से टकरा रही थी। मैंने अपना चेहरा उनकी गर्दन के पास ले जाकर उनकी उस मलाईदार त्वचा को चूमना शुरू किया। उनकी गर्दन से उठती वो गरमाहट और उनकी तेज़ होती साँसें बता रही थीं कि वो भी अब और इंतज़ार नहीं कर सकतीं।

उनके हाथ मेरे बालों में उलझ गए और उन्होंने मुझे और भी ज़ोर से अपनी ओर खींच लिया। नाइटी का वो रेशमी कपड़ा अब उनके शरीर से इस तरह चिपक गया था जैसे वो उनके जिस्म का ही हिस्सा हो। मैंने उनके कानों के पास फुसफुसाते हुए कहा, "अब और इंतज़ार नहीं होता..." मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए अपनी उंगलियाँ मेरे होंठों पर रखीं और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ धीरे से कहा, "तो फिर देर किस बात की है रवि? आज रात हमें रुकना नहीं है।"

उनके इन शब्दों ने मेरे अंदर के संयम की आखिरी दीवार को भी ढहा दिया। मैंने उनके होंठों को अपने होंठों के नीचे दबा लिया और उस रात का वो उन्माद शुरू हुआ जिसे हम दोनों ही सदियों तक याद रखने वाले थे।जैसे ही हमारे होंठ मिले, कमरे की हवा में एक तरह का विस्फोट सा हुआ। वो चुंबन सिर्फ एक शुरुआत थी; उसमें हम दोनो की कामुकता और उस जड़ी बूटी का नशा मिला हुआ था। उनकी जीभ मेरी जीभ से टकराई और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर में बिजली का एक तेज़ झटका लगा हो। उनकी पकड़ मेरी पीठ पर और भी मज़बूत हो गई, जैसे वो मुझे अपने शरीर के अंदर समा लेना चाहती हों।

मैंने उनके शरीर को और भी गहराई से महसूस करने के लिए उनके शरीर को ऊपर की ओर खींचा। नाइटी का वो पतला रेशमी कपड़ा अब हमारे बीच एक बाधा बन रहा था। मैंने अपने हाथों को उनकी कमर से ऊपर ले जाते हुए उनके उभारों को अपनी मुट्ठी में भर लिया। जैसे ही मेरी उंगलियों ने नाइटी के कपड़े के ऊपर से उनके गर्म और सख्त उभारों को छुआ, उनके मुँह से एक बहुत ही गहरी और कामुक 'आह' निकली। वो थरथरा उठीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया, जिससे उनकी वो मखमली गर्दन पूरी तरह से मेरे सामने खुल गई।मैंने अपना चेहरा उनकी गर्दन की ओर झुकाया और उनकी उस कोमल त्वचा को अपने दांतों से हल्का सा काटते हुए चूमना शुरू किया। उनकी खुशबू और उनके शरीर की गर्मी मुझे पूरी तरह से मदहोश कर रही थी। मेरा एक हाथ अब नाइटी के नीचे चला गया उसकी त्वचा इतनी चिकनी और मखमली थी कि मेरा हाथ फिसलने लगा। जैसे ही मेरी उंगलियां उनकी कमर के निचले हिस्से और उनके कूल्हों के पास पहुँचीं, उनकी साँसें और भी तेज़ और उखड़ी हुई हो गईं।"रवि... आह... और सहलाओ..." उनकी आवाज़ में एक अजीब सी बेताबी थी, जो मुझे और भी उग्र बना रही थी।
मैंने नाइटी के पतले स्ट्रैप्स को धीरे से उनके कंधों से नीचे सरका दिया। अब वो नाइटी उनके शरीर पर बस एक बोझ की तरह लटक रही थी। मैंने एक झटके में उस नाइटी को उनके ऊपर से हटा दिया, और अब वो पूरी तरह से मेरे सामने थीं बिना किसी पर्दे के, अपनी पूरी कामुकता के साथ। उनके शरीर की चमक और उनकी बनावट को देखकर मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उनके उभारों की गोरापन और उनकी देह की वो लचक किसी खुदा की बनाई हुई सबसे खूबसूरत चीज़ लग रही थी।

मैंने उन्हें बिस्तर पर धीरे से लिटाया और उनके ऊपर झुक गया। अब हमारा पूरा शरीर एक दूसरे से रगड़ खा रहा था। उनके शरीर की गर्मी मेरे शरीर की गर्मी से मिलकर एक आग पैदा कर रही थी। मैंने उनके स्तनों के बीच अपना चेहरा छिपा लिया और उन्हें चूमना शुरू किया, जबकि मेरा हाथ उनके शरीर के सबसे निजी और संवेदनशील हिस्सों की तलाश में नीचे की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही मेरा हाथ उनके सबसे संवेदनशील और गीले हिस्से के करीब पहुँचा, उन्होंने अचानक मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और मुझे थोड़ा पीछे धकेला। उनकी आँखों में एक शरारती और बेहद कामुक चमक थी। उन्होंने धीरे से कहा, "रवि, आज सिर्फ तुम ही नहीं, मैं भी तुम्हें महसूस करना चाहती हूँ।"******इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, उन्होंने अपनी कामुक आँखों में एक ऐसी बेताबी भरी कि मेरा पूरा अस्तित्व काँप उठा। उनकी उंगलियाँ किसी कुशल जादूगर की तरह काम कर रही थीं। उन्होंने सबसे पहले मेरी शर्ट के पहले बटन पर अपनी पकड़ बनाई और एक झटके में उसे खोल दिया। जैसे ही शर्ट का पहला बटन खुला, कमरे की ठंडी हवा मेरे गर्म सीने से टकराई, लेकिन उनकी गर्म साँसें मेरे शरीर पर आग लगा रही थीं। उनकी उंगलियाँ जब मेरे बटन खोलती जा रही थीं, तो मुझे उनके हाथों की थरथराहट महसूस हो रही थी वो भी उतनी ही उत्तेजित थीं जितने मैं। शर्ट के हर बटन के खुलने के साथ मेरी धड़कनें तेज़ होती जा रही थीं। जब शर्ट पूरी तरह खुली और कंधों से फिसलकर ज़मीन पर गिरी, तो मुझे एक अजीब सी बेबसी और समर्पण का अहसास हुआ। उनकी नज़रें मेरे नग्न सीने पर ऐसे टिकी थीं जैसे वो मेरी त्वचा को अपनी आँखों से छू रही हों।
फिर उन्होंने मेरे बेल्ट की तरफ हाथ बढ़ाया। बेल्ट के खुलने की वो 'क्लिक' की आवाज़ सन्नाटे में गूँज उठी और मेरे कानों में किसी संगीत की तरह लगी। उनकी उंगलियाँ मेरी पैंट की ज़िप पर पहुँचीं। जैसे ही उन्होंने ज़िप को नीचे की ओर खींचा, एक तेज़ सरसराहट हुई जिसने मेरे पूरे शरीर में बिजली दौड़ा दी। पैंट को नीचे सरकाते हुए उनकी नज़रें लगातार मेरे शरीर के हर उभार को निहार रही थीं। उनके चेहरे पर एक ऐसी भूख थी जिसे देखकर मेरा रोम रोम उत्तेजित हो उठा।
अब बस मेरी अंडरवियर ही बची थी। उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डालकर एक गहरी और मदहोश कर देने वाली मुस्कान दी। जैसे ही उन्होंने अंडरवियर के इलास्टिक को नीचे की ओर खींचना शुरू किया, मेरे शरीर के भीतर का तनाव चरम पर पहुँच गया। जैसे ही कपड़ा नीचे फिसला, मेरा उत्तेजित और सख्त लिंग झटके के साथ बाहर निकला। वो पूरी ताकत और गर्व के साथ हवा में लहराते हुए बाहर आया, जैसे मम्मी को 'सलामी' दे रहा हो। वो पूरी तरह से तना हुआ, लाल और उत्तेजित था, जो उनकी आँखों के सामने अपनी मौजूदगी का ऐलान कर रहा था।
उसे बाहर निकलते देख उनकी साँसें अचानक रुक गईं और उनकी आँखें फैल गईं। उनके चेहरे पर एक ऐसी प्यास और हैरानी का मिला जुला भाव था जिसे देख कर मेरा लिंग और भी ज़्यादा सख्त हो गया। वो मेरे उस उभार को देखकर खुद को रोक नहीं पाईं। उनकी नज़रें मेरे उस हिस्से पर जम गईं जो अब उनके ठीक सामने था, और उनके मुँह से एक दबी हुई 'आह' निकल गई। उस पल मुझे महसूस हुआ कि हम दोनों ही उस आग के घेरे में थे जहाँ अब सिर्फ और सिर्फ वासना का राज था
मम्मी की उस कामुक प्यास ने मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था। उन्होंने मेरे नग्न शरीर को इस तरह से घेर लिया था जैसे मैं उनका अपना शिकार हूँ और अब मेरा बचना नामुमकिन है। उन्होंने बहुत ही नजाकत और गहराई के साथ अपना चेहरा मेरे माथे के पास लाया और एक लंबी, मखमली और गर्म चुंबन मेरे माथे पर अंकित कर दिया। वो चुंबन सिर्फ एक स्पर्श नहीं था, बल्कि मेरे बदन पर कब्जा कर लेने का एक गहरा ऐलान था।"मेरा बच्चा... आज तू सिर्फ मेरा है," उन्होंने मेरे कान के पास फुसफुसाते हुए कहा। उनकी आवाज़ में एक ऐसी भारीपन और प्यास थी जिसने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए। "आज मैं तुझे अपनी रूह तक में उतार लूँगी।"

फिर उनकी गर्म साँसें मेरी आँखों के ऊपर महसूस होने लगीं। उन्होंने अपनी जीभ से मेरी पलकों को धीरे से सहलाया और फिर मेरी आँखों के चारों ओर अपने होंठों को फेरते हुए एक गहरा अहसास दिया। "आँखें बंद मत करना रवि... देखना कि तेरी मम्मी तुझे कैसे अपना बना रही है," उन्होंने शरारत और वासना भरी आवाज़ में कहा।उनकी जीभ मेरे गालों पर किसी मखमली लहर की तरह दौड़ रही थी। जैसे ही उन्होंने मेरे गालों को अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें ज़ोर से चूसना शुरू किया, मेरे मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकल गई *"आह्ह्ह... मम्मी..."* मेरा शरीर उनके स्पर्श से कांप उठा। उन्होंने मेरे गाल के मांस को अपने दांतों से हल्का सा दबाया और फिर उसे ज़ोर से चूसने लगीं।***"उफ़्फ़... मम्मी, बहुत... बहुत अच्छा लग रहा है," मैं सिसकते हुए बोला। मेरा गला सूख रहा था और मेरी साँसें उखड़ने लगी थीं।उन्होंने मेरे गाल को चूसते हुए ही धीरे से कहा, "अभी तो शुरुआत है मेरे लाल... अभी तो तुझे पता भी नहीं कि मैं तेरे शरीर के साथ क्या क्या कर सकती हूँ। बस अपनी सिसकियाँ संभाल कर रख, क्योंकि आज रात तू बहुत शोर मचाने वाला है।"

उनके दांतों का वो हल्का सा दबाव और फिर उनकी जीभ का गीलापन मेरे गालों पर एक मीठा दर्द और असीम सुख दे रहा था। मैं उनके जादू के वश में था, बस उनकी हर हरकत पर अपनी सिसकियों के साथ प्रतिक्रिया दे रहा था।
उनकी यात्रा अब मेरी गर्दन की ओर बढ़ी। उन्होंने मेरी गर्दन के हर मोड़ को अपने होंठों से चूमना शुरू किया। उनकी जीभ मेरी गर्दन के नीचे की नसों पर ऐसे खेल रही थी जैसे कोई संगीतकार वाद्य यंत्र बजा रहा हो। उन्होंने मेरे कंधों को अपने दांतों से हल्का सा काटते हुए चूसना शुरू किया, जिससे मेरे शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई। उनकी उंगलियाँ मेरी बाहों पर रेंग रही थीं, हर एक इंच को चूमते हुए और सहलाते हुए।

जैसे ही उनका चेहरा मेरे सीने तक पहुँचा, मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उन्होंने मेरे सीने के एक एक इंच को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी जीभ की वो गीली और गर्म छुअन मेरे सीने की मांसपेशियों को पिघला रही थी। फिर उनकी नज़रें मेरे निप्पल्स पर टिकीं। उन्होंने उन्हें अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें इतनी शिद्दत से चूसना शुरू किया कि मेरी आँखें बंद होने लगीं। वो उन्हें अपने दांतों से हल्के से दबा रही थीं और फिर अपनी जीभ से उनके चारों ओर गोल गोल घूम रही थीं। उनका ये तरीका किसी अनुभवी स्त्री जैसा था, जो जानती थी कि पुरुष के शरीर का कौन सा हिस्सा उसे पागल कर सकता है।मम्मी की वह प्यासी जीभ अब मेरे पेट के निचले हिस्से की ओर एक शिकारी की तरह रेंग रही थी। उन्होंने अपनी गर्दन झुकाई और उनकी गर्म साँसें मेरी नाभि (Nabi) पर महसूस होने लगीं। उन्होंने अपनी जीभ को मेरी नाभि के चारों ओर एक घेरे की तरह घुमाना शुरू किया, जैसे वो किसी कीमती रत्न को चख रही हों। फिर, उन्होंने अपनी जीभ को उस गहरे गड्ढे में पूरी गहराई से उतार दिया। उस गीले और गर्म स्पर्श ने मेरे पेट की मांसपेशियों में एक ज़ोरदार ऐंठन पैदा कर दी।
6*"आह्ह्ह... मम्मी... उफ़्फ़... वहाँ नहीं... उफ़्फ़!"* मैं बिस्तर पर तड़पने लगा, मेरी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी।

लेकिन वो रुकी नहीं। नाभि से आगे बढ़ते हुए उनकी जीभ मेरे पेट के निचले हिस्से के बालों वाले हिस्से को सहलाते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगी। उन्होंने मेरी जांघों के बीच के उस बेहद संवेदनशील हिस्से को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी जीभ का हर प्रहार मेरे नर्वस सिस्टम में बिजली की लहरें छोड़ रहा था। उन्होंने मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से को अपने होंठों से चूमना शुरू किया, उनकी गर्म साँसें और गीली जीभ मुझे पागल कर रही थीं।मैं पूरी तरह से बेबस होकर तड़प रहा था। मेरी सिसकियाँ अब चीखों में बदलने लगी थीं। "मम्मी... प्लीज़... मुझे मार डालोगी आप... उफ़्फ़!" मैं दर्द और सुख के उस मिश्रण से तड़प रहा था जो सिर्फ वो ही दे सकती थीं।

तभी उन्होंने एक और ज़ोरदार झटका दिया। उन्होंने मेरे दोनों अंडकोषों (Testicles) को अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें बहुत ही कोमलता और गहराई से चूसना शुरू कर दिया। वो अहसास इतना तीव्र था कि मेरा पूरा शरीर धनुष की तरह खिंच गया। मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा और मैं बस उनके स्पर्श के आगे हार मान चुका था। उन्होंने मेरे अंडकोषों को अपने मुँह में भरकर ऐसे चूस रही थीं जैसे वो दुनिया का सबसे मीठा फल हो।

इसके बाद, उन्होंने अपने होंठों को मेरे लिंग के ठीक नीचे तक लाया। उन्होंने मेरे लिंग को छूना शुरू नहीं किया, बल्कि उसके चारों ओर, उसके आधार (Base) और उसके आसपास के हिस्से को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे लिंग के ठीक बगल में अपनी जीभ फेर रही थीं, जिससे मेरा लिंग हवा में और भी ज़्यादा छटपटा रहा था और सख्त हो रहा था। मैं तड़प रहा था कि वो बस उस मुख्य हिस्से को छू लें, लेकिन वो मुझे तड़पाने का खेल खेल रही थीं।
तभी उन्होंने अचानक अपनी जीभ को थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे लिंग की टिप (Tip) पर अपनी जीभ का एक हल्का सा, बहुत ही कोमल स्पर्श दिया। वो स्पर्श इतना हल्का था कि लगा जैसे कोई पंख छू गया हो, लेकिन उस एक सेकंड के स्पर्श ने मेरे पूरे शरीर में एक विस्फोट कर दिया। मेरा लिंग टिप से लेकर जड़ तक थरथरा उठा। मैं तड़प उठा, "मम्मी... उफ़्फ़... प्लीज... अब और नहीं सह सकता मैं!" मेरी आवाज़ अब एक बेबस पुकार बन चुकी थी।
लेकिन वो मुझे और तड़पाना चाहती थीं। उन्होंने अपने होंठों से लिंग को छूने के बजाय, अपनी उंगलियों से धीरे से मेरे लिंग के ऊपर शहद (Honey) की एक गाढ़ी और चिपचिपी धार गिराना शुरू किया। वो सुनहरा, मीठा और ठंडा शहद मेरे गर्म और तने हुए लिंग के ऊपर धीरे धीरे बहने लगा। शहद की वो मिठास और उसकी चिपचिपाहट मेरे लिंग की नसों पर महसूस हो रही थी।जैसे ही शहद मेरी टिप तक पहुँचा, उनकी आँखों में एक जंगली चमक आ गई। उन्होंने अपनी जीभ को पूरी तरह फैलाया और उस शहद से सने हुए मेरे लिंग को चाटना शुरू किया। शहद की मिठास और उनकी जीभ का गर्म, गीलापन मिलकर एक ऐसा नशा पैदा कर रहे थे कि मुझे लग रहा था मैं होश खो दूँगा। वो शहद को चाटते हुए अपनी जीभ को लिंग के ऊपर और नीचे बहुत ही तेज़ी से फेर रही थीं।

शहद की वजह से उनकी जीभ और मेरे लिंग के बीच एक अजीब सी घर्षण (Friction) पैदा हो रही थी एक चिपचिपा और बेहद कामुक अहसास। वो शहद को चाटते हुए बीच बीच में अपनी जीभ से लिंग के ऊपरी हिस्से (Glans) को गहराई से सहला रही थीं। "मम्मी... आह्ह्ह... ये क्या कर रही हो आप... मैं फट जाऊँगा... उफ़्फ़!" मैं बिस्तर की चादरों को अपने हाथों से ज़ोर से भींच रहा था, मेरी कमर बार बार ऊपर की ओर उठ रही थी जैसे मैं उनके मुँह में खुद को झोंक देना चाहता हूँ।

उन्होंने अब अपने होंठों को लिंग के चारों ओर कसकर लपेट लिया और शहद के साथ मिलकर एक ज़ोरदार 'सक्शन' (Suction) बनाना शुरू किया। शहद की मिठास और उनकी जीभ की वो रेंगती हुई हरकत मुझे पागल कर रही थी। वो शहद को चाट रही थीं और साथ ही मेरे लिंग को अपनी जीभ के दबाव से दबा रही थीं। मेरा पूरा शरीर पसीने से तर बतर हो चुका था और मैं बस उस एक पल का इंतज़ार कर रहा था जब वो शहद और उनकी जीभ का ये खेल मेरे चरम सुख (Orgasm) तक ले जाएगा।
शहद और उनकी जीभ का वो तालमेल मेरे दिमाग के सारे तार झकझोर रहा था। शहद की चिपचिपाहट और उनकी जीभ की गर्मी मिलकर एक ऐसा नशा पैदा कर रही थी कि मुझे अपनी सुध बुध नहीं रही थी।

जैसे जैसे वो शहद को चाटती रहीं, उनकी जीभ की गति और तेज़ होती गई। अब वो सिर्फ चाट नहीं रही थीं, बल्कि अपनी जीभ को शहद के साथ मेरे लिंग के ऊपर एक लय में ऊपर नीचे रगड़ रही थीं। शहद की वजह से उनकी जीभ और मेरे लिंग के बीच एक बहुत ही गहरा और 'Slick' (फिसलन भरा) घर्षण पैदा हो रहा था। हर बार जब वो अपनी जीभ को लिंग की टिप से लेकर जड़ तक खींचतीं, तो शहद की मिठास और उनके मुँह की गर्माहट मेरे पूरे अस्तित्व को हिला देती
"मम्मी... आह्ह्ह... बस... अब और नहीं... मैं... मैं निकलने वाला हूँ!" मैं चीख उठा, मेरी कमर बेतहाशा ऊपर नीचे होने लगी। मेरा लिंग अब इतना सख्त हो चुका था कि मुझे लग रहा था वो फट जाएगा।

तभी उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने मुझे पूरी तरह से सुन्न कर दिया। उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे अंडकोषों को ऊपर की ओर उठाया और अपने मुँह को मेरे लिंग के चारों ओर पूरी तरह से कस लिया। उन्होंने एक बहुत ही ज़ोरदार और गहरा 'सक्शन' (Suction) लेना शुरू किया। शहद की वजह से उनकी जीभ मेरे लिंग के हर एक कोने, हर एक नस को पूरी तरह से ढंक रही थी। वो शहद को ऐसे चाट रही थीं जैसे वो दुनिया का सबसे स्वादिष्ट अमृत हो।
उनकी जीभ की वो रेंगती हुई हरकत और मुँह का वो गहरा खिंचाव... आह्ह्ह! मुझे महसूस हुआ कि मेरा नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो गया है। मेरी आँखों के सामने सफ़ेद रोशनी की लकीरें दौड़ने लगीं। "मम्मी... उफ़्फ़... मम्मी... आआआआह्ह्ह्ह!"
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