28-09-2026, 07:06 AM
पायल जान गयी थी कि उसके कुंवारेपन का आखिरी दिन है. आने वाली स्थिति की कल्पना से उसकी चूचियों में खुमारी भर गई, निप्पल सख्त हो गये, चूत पानी से लबरेज़ हो गई। परन्तु काफी देर तक हिलती रही. उसके बाद फिर उसी तरह बलवंत की जोरदार आवाज सुनाई दी जो पायल की समझ से परे थी।
कुछ देर के बाद बलवंत के बैडरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई. उसने हिम्मत करके बस के बाहर झाँका और देखा कि वो लड़की लड़खड़ा कर चलती हुई गिर गई. शायद वह मासूम कोमल से लड़की बलवंत के विशाल लण्ड की जोरदार ठुकाई सहन नहीं कर पाई थी।
ड्राइवर ने उसे गोद में उठा कर एक कार में बिठा दिया।
उसके बाद बलवंत कल की तरह बाथरूम में आया और लाईट जला ली. परन्तु आज चुपचाप मूतने की बजाये पायल की ओर का आधा दरवाजा उसने खोल दिया. इधर पायल चुपचाप मुंह ढककर सोने का नाटक करती रही.
उसके बाद बलवंत बेपरवाही के साथ मूतने लगा।
पायल के कमरे में अँधेरा था और बाथरूम में लाइट जल रही थी। अपनी इस स्थिति की वजह से बलवंत पायल को नहीं देख सकता था पर पायल बलवंत तो साफ़ साफ़ देख सकती थी. इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए पायल ने धीरे से अपनी थोड़ी सी चादर हटा कर बाथरूम में देखा तो सन्न रह गई.
बलवंत अपने कूल्हों पर हाथ रखकर खड़ा था और उसका करीब आधा खड़ा लण्ड किसी होज़ पाइप के समान लग रहा था. उससे निकलता मूत ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई छोटा मोटा ट्यूबवैल चल रहा हो.
अब पायल समझ चुकी कि वो बेचारी लड़की क्यों गिर पड़ी।
मूतने के बाद बलवंत ने हाथ में पकड़कर लण्ड को ऊपर नीचे झटकते हुए साफ़ किया और सोने चला गया।
पायल आज की सारी कार्यवाही की वजह से थकी होने के कारण और शायद जिंदगी में पहली बार झड़ने की वजह से तुरंत सो गई।
उधर बलवंत को पूरा यकीन था कि पायल ने लण्ड का पूरा जायजा ले लिया है और लोहा पूरी तरह से गरम हो गया है. अब वह पूरी तरह से संतुष्ट था कि पायल उसके जाल में फँस चुकी है और कल थोड़ी से मेहनत के बाद अपने आप मेरा लण्ड मांगेगी।
उस औरतखोर को यह भी यकीन था कि पायल उन लड़कियों की तरह कमसिन और नादान नहीं है. और पायल का शरीर पूरी तरह उसका हैवी लण्ड लेने योग्य हो चुका है. बस पायल को थोड़ा सा गरम करने के बाद एक बार बस उसकी कमसिन कुंवारी चूत सील खोल ले, उसके बाद पायल लण्ड की गुलाम बन जाएगी और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दिन रात उसके लण्ड की अपने मुँह, चूत और शायद गांड से भी भरपूर सेवा करेगी. यह सोचते सोचते थका बलवंत सो गया।
अगले दिन जब पायल सोकर उठी तो करीब 11 बज चुके थे और लाउड स्पीकर की आवाज सुनकर वो समझ गई कि बलवंत किसी चुनाव सभा को सम्बोधित कर रहा है।
पायल उठकर अपने नित्य कर्म से निवृत होने लगी।
करीब एक घंटे बाद पायल ने भी अपना नोट्स बनाने का कार्य शुरू कर दिया।पूरा दिन गहमागहमी में निकल गया और दिनभर का चुनाव प्रचार समाप्त हो गया।
प्रचार समाप्ति के बाद बस की लॉबी में लोकल नेताओं के साथ बलवंत कोई मीटिंग वगैरह कर रहा था. इसी बीच मुँह हाथ धोने के बाद पायल ने अपनी काले रंग की नाईट ड्रेस पहनी . और अपने रूम में आराम करने लगी.
अब यह सोचकर पायल का दिल धड़कने लगा कि रोज़ की भांति आज फिर कोई मासूम लड़की बाहर से आकर अपना कुंवारापन इस बस में खो देगी।
कुछ देर के बाद ड्राइवर ने दरवाजा खटका कर कहा- बेबी डिनर तैयार है, आप आ जाइये. नेताजी आपका इन्तजार कर रहे हैं।
पायल धड़कते दिल के साथ डाइनिंग एरिया में आ गई.
काले नाइट ड्रेस में पायल को देखकर बलवंत की आँखों में एक अजीब से चमक आ गई और उसका मुँह खुला का खुला रह गया.
सकपका कर वह बोला- पायल, आज तो तुम बहुत सुन्दर लग रही हो.
उसकी बात सुनकर पायल शर्मा कर मुस्कुरा दी और डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना सर्व करने लगी.
खाने के दौरान बलवंत कनखियों से पायल के सौंदर्य को ही निहार रहा था। पायल भी मन ही मन अपने हुस्न पर गुमान कर रही थी।
खाना खाने के बाद अचानक बलवंत बस के नीचे चला गया और ड्राइवर को भी नीचे बुला लिया.पायल कुछ समझ नहीं आया.
2 मिनट में बलवंत वापस आ गया और ड्राइवर को अपने पास बुला कर कहा- भाई आज का दिन तो बहुत व्यस्त था, मैं बहुत थक गया हूँ, शरीर को मालिश की सख्त जरूरत है।
सुनकर ड्राइवर चला गया और पायल का दिल ये सोच कर धड़कने लगा कि वही रोज वाला रूटीन अब फिर चालू होगा। पायल उठकर अपने कमरे में जाने लगी तो बलवंत बोला- पायल , जब तक मालिश वाली आये, मेरे साथ बैठ जाओ.
मुस्कुराने की एक्टिंग करते हुए पायल धड़कते दिल के साथ बैठ गई और इधर उधर की बातें करने लगी.
पर बलवंत की नजर पायल के सीने पर टिकी थी और आँखों में हवस के डोरे तैर रहे थे। परन्तु शायद किसी झिझक की वजह से बलवंत पायल के साथ कोई शुरुआत नहीं कर पा रहा था।
इसी बीच ड्राइवर बस में आ गया और बोला- साहब, आज हम दूर दराज़ के इलाके में हैं. इसलिए कोई मालिश वाली नहीं मिली. सर मुझे खेद है.
बलवंत इस बात से निराश हो गया और उसने कहा- आज का दिन अधिक व्यस्त था और बदन की मालिश के बिना कल के काम के लिए तैयार होना बहुत मुश्किल होगा.
फिर ड्राइवर ने पायल की और देखते हुए कहा- साहब, आप मसाज के लिए पायल से मदद ले सकते हैं क्योंकि यह आपकी पर्सनल सेक्रेटरी है और ये आपकी मदद जरूर करेगी। मैं सही कह रहा हूँ ना पायल मैडम?
ड्राइवर के इस प्रपोजल से पायल को बहुत धक्का लगा। अब पायल को सब कुछ समझ आने लगा कि यूनियन नेताजी खाने के बाद बस से नीचे क्यों गए थे. वे शायद ड्राइवर के साथ मिलकर यही प्लान बनाने गए थे कि ड्राइवर कुछ देर में आकर ये कह दे कि मालिश वाली नहीं मिली और फिर पायल को फंसा देने का प्लान था।
अब पायल का दिल जोर जोर से धड़क रहा था. उसे लग रहा था कि वो पायल की छाती फाड़कर बाहर आ जायेगा. पायल का रोम रोम आने वाली स्थिति को भांपकर रोमांचित होकर खड़ा हो गया।
बिना कुछ कहे उसने बलवंत की ओर मुँह किया. उसने देखा कि बलवंत मुस्कुरा रहा है. और उसने तुरंत कहा- हाँ, यह एक अच्छा विचार है. और मुझे पता है कि पायल बहुत अच्छी लड़की है और वह इस स्थिति में मेरी मदद जरूर करेगी। मेरी मदद करोगी न?
पायल का दिल बहुत जोर से धड़क रहा था कि वह क्या कह सकती है. उसने सोचा कि फंस गई मैं आज तो!
और इस स्थिति में उसने कहा- ठीक है, मैं मदद करूंगी लेकिन केवल 15 मिनट के लिए! क्योंकि मैं भी थक गई हूं.
बलवंत ने कहा- धन्यवाद, 15 मिनट काफी है मुझे!
ड्राइवर और बलवंत की नजरें आपस में मिली और दोनों की होठों पर एक रहस्यमयी मुस्कराहट तैर गई। उसके बाद ड्राइवर मेरी ओर देखते हुए बस से उतर गया।
उसके बाद बलवंत पायल का हाथ पकड़ कर अपने कैबिन में चल दिया।
उहापोह की स्थिति में पायल भी बलवंत के पीछे पीछे धड़कते दिल के साथ चल दी। उसके ख्यालों में बलवंत का काला मोटा भुजंग जैसा लण्ड बार बार आ रहा था. वो सोच रही थी कि शायद उसके कुंवारेपन का आखिरी दिन है. आने वाली स्थिति की कल्पना से उसकी चूचियों में खुमारी सी भर गई और उनकी घुंडियां पूरी सख्ती पर आ गई. उसकी चूत खारे पानी से लबरेज़ हो गई।
कमरे में पहुंचने के बाद बलवंत ने उसे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा, खुद बाथरूम में घुस गया और कुछ देर के बाद सिर्फ लुंगी में टॉपलेस हो कर आ गया।
पायल ने नोटिस किया कि बलवंत ने अपना अंडरवियर भी नहीं पहना है क्योंकि लुंगी आगे से उसके खुले लण्ड की वजह से झूल रही थी। पायल उसके संपूर्ण मर्दाना शरीर से प्रभावित थी उसके छाती बालों से ढकी थी।
जबरदस्त औरतखोर बलवंत ने झट से ताड़ लिया कि पायल उसे घूर रही है, खास तौर पर उसके लुंगी में झूलते उसकी चूत के दुश्मन को। बलवंत इसे अपनी आधी जीत समझ रहा था।
लेकिन उसने एक खेल खेलने का फैसला किया क्योंकि उसे खुद पर पूरा भरोसा था कि पायल उसे एक घंटे के भीतर उससे हाथ जोड़ कर चोदने की गुहार लगाएगी. इसलिए वह बस बिस्तर पर लेट गया और उसने कहा- पायल मालिश शुरू करो।
पायल अपने होश में आई और उसने तेल की बोतल से अपनी हथेली पर थोड़ा तेल लगाकर बिस्तर के एक तरफ खड़ी होकर मालिश शुरू कर दी।
यह मालिश करने के लिए एक असुविधजनक स्थिति थी, इसे भांपते हुए बलवंत बोला- पायल , ऐसे मालिश ढंग से नहीं हो पायेगी और तुम्हारी ड्रेस भी ख़राब हो जाएगी. तुम ऐसा करो, बैड पर आ जाओ और मेरे ऊपर ऐसे बैठ जाओ जैसे घोड़े पर बैठते हैं. मेरे शरीर के दोनों और एक एक पैर रख लो.
पायल झिझकती हुई बैड पर चढ़ गई और बलवंत के दोनों तरफ एक एक पैर रखकर खड़ी हो गई और खड़े खड़े ही झुककर मालिश करने लगी।
शातिर बलवंत ने तुरंत अगली चल खेल दी और बोला- पायल ऐसे नहीं, मेरी गांड पर अपने चूतड़ टिकाकर बैठ जाओ और फिर मालिश करो.
पायल को गांड और चूतड़ जैसे खुले और देशी शब्द सुनकर झटका सा लगा. उसके पूरे बदन में एक झुरझुरी सी दौड़ गई और वो शरमाते झिझकते धीरे से बलवंत की सख्त गांड पर अपने नाजुक और कोमल चूतड़ टिकाकर बैठ गई।
क्योंकि बलवंत की पूरी गांड सख्त काले बालों से ढकी थी और उसने एक पतली से लुंगी ही पहनी थी. इस वजह से पायल के नाजुक और कोमल चूतड़ और कमसिन चूत उसके नर्म व मुलायम कपड़ों के भीतर से ही उस भैंसे जैसे बलवंत की गांड के बालों का खुरदरापन मालिश करते हुए आगे पीछे होने वजह से रगड़ खाने वजह से साफ़ महसूस कर रहे थे.
और इसी मर्दाने स्पर्श के अहसास से उसके मन की नारी सुलभ कुदरती भावनाओं के वेग की वजह से उसकी चूत भरभराकर पानी छोड़ने लगी थी. अब उसे यह डर सताने लगा था कि कुछ ही देर में उसकी चड्डी पूरी गीली होकर उसकी नाईट ड्रेस के लोअर को भी गीली कर देगी. और ऐसा ही चलता रहा तो बलवंत की लुंगी भी गीली हो जाएगी।
इससे पहले उसका ये डर सच साबित होता, बलवंत बोला- पायल, पीठ की मालिश बहुत हो गई अब मैं पलटता हूँ मेरी छाती की मालिश भी कर दो।
पायल यह सोच कर खुश थी और वह ऊपर से उठकर बैड के नीचे आ गई.
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बलवंत की बात सुनकर पायल की तन्द्रा भंग हुई और मालिश करने के लिए पहले वाली पोजीशन लेते लेते उसे ये बात अब समझ आ रही थी ये 15 मिनट की बात कर रहा है पर अब उसका 22 साल तक संभालकर रखा कुंवारापन कुछ ही पल का मेहमान है. बलवंत जैसा औरतखोर चाहे कितना भी नरमी से पेश आ रहा था पर उसने पिछले दो दिनों में देख लिया था कि इस सांड के लण्ड को हर रात चूत का पानी चखने की आदत है. कुछ देर बाद उसकी अनचुदी कुंवारी नाजुक सी चूत उसके लण्ड के नीचे दम तोड़ देगी।
इधर बलवंत को भी पायल कपड़ों में कतयी अच्छी नहीं लग रही थी. अब वह मन ही मन आगे का प्लान बनाने में जुट गया।
पायल डरते शरमाते धीरे धीरे अपनी कुंवारी चूत को कपड़ों समेत बलवंत के लण्ड पर टिकाने के लिए नीचे करने लगी. लण्ड पर चूत का पहला स्पर्श पाते ही बलवंत की तोप ने एकदम से सलामी दी यानि की जोर का झटका खाया. जिसे पायल की नाजुक सी चूत भांप गई और न चाहते हुए भी पायल के मुँह से एक दबी हुए सिसकारी निकल गई. जिसे अनुभवी औरतखोर बलवंत ने तुरंत सुन लिया और खुश हो गया।
अंदरूनी झिझक और नारी सुलभ हया की वजह से पायल ने अपना पूरा भार बलवंत के लण्ड पर नहीं डाला था. इसे अनुभवी बलवंत ने तुरंत भांपते हुए अपने हाथों को पायल के दोनों जांघों पर रखते हुए नीचे की और खींच लिया और अपना हथियार ढंग से पायल की नाजुक चूत की फांकों के बीच लम्बवत फंसा दिया.
इस अचानक हमले से पायल की जोरदार सिसकारी निकल गई और जैसे उसकी नजरें बलवंत से मिली बलवंत ने तुरंत उसे आँख मार दी। पायल इस दोहरे हमले से बुरी तरह शरमा गई.
इसी बीच बलवंत ने उसके हाथों में तेल की बोतल पकड़ा दी. पायल हिचकिचाते हुए काम्पते हाथों से बलवंत की छाती की मालिश में जुट गई.
क्योकि मालिश करने की वजह से पायल को लगातार आगे पीछे होना पड़ रहा था तो पहले से ही पानी से सराबोर उसकी चूत अब प्रकृति के नियमानुसार भरभराकर पानी छोड़ने पर मजबूर हो गई और पायल का डर सच हो गया. पायल की चूत अब बलवंत के लण्ड को अपने पानी से सराबोर करने लगी।
हालाँकि अनुभवी बलवंत को इसका अहसास हो चुका था पर वह जानबूझकर अनजान बना रहा क्योंकि वो आखिरी चोट करने से पहले लोहे को थोड़ा और गर्म करना चाहता था.
इधर चूत की गर्मी पाकर बलवंत का लण्ड अब अपने पूरे शवाब पर था. उधर लण्ड पर कुंवारी चूत के लगातार रगड़ों की वजह से पायल के छक्के छूटने लगे थे और उसकी साँसें भारी हो चली थी और वो झड़ने के करीब आती जा रही थी.
पर बलवंत अभी ये नहीं चाहता था क्योंकि उसे अभी पायल को और गर्म करके तड़फाना था.इसलिए उसने पायल के हाथ पकड़ लिए और मालिश करने से रोक लिया.
बलवंत की यह चाल पायल को बिल्कुल पसंद नहीं आई क्योंकि वो झड़ने के करीब थी और पायल की नाजुक अनचुदी चूत को गर्म कड़क लण्ड की तपिश से मजा आने लगा था।
पायल घायल शेरनी की भांति बलवंत की आँखों में घूरने लगी. पायल की आँखों में हवस के लाल डोरे तैर रहे थे।
परन्तु अनुभवी लंडबाज बलवंत इस खेल तो इसी प्रकार धीरे धीरे आगे बढ़ाकर पायल को बिल्कुल ऐसी हालत में ले जाना चाहता था जहाँ पढ़ी लिखी ऊँचे घराने की नाजुक सी पायल हाथ जोड़कर अनपढ़ अपराधी प्रवृति के शातिर औरतखोर बलवंत से अपनी कुंवारी नाजुक चूत का उद्घाटन उसके काले लौड़े से करवाने के लिए मिन्नतें करने लगे.
इसलिए चोदा चोदी के खेल में अनाड़ी पायल को झड़ने से पहले यहाँ रोकना जरूरी था क्योंकि बलवंत हर हाल में लगाम अपने हाथ में रखना चाहता था.
अपने लण्ड की गर्मी को और बढ़ाने के लालच में बलवंत बोला- पायल मेरी छाती पर निप्पल्स के आस-पास सर्कल में उँगलियाँ घुमाओ. ऐसा करने से सारी थकान उतर जाती है.
स्खलन के करीब पहुँचने के बाद बलवंत के रोकने से गुस्से से फनफनाई भोली पायल अनमने भाव से अपने दोनों हाथों के अंगूठों और तर्जनी उंगली को तेल में डुबोकर उसके दोनों निप्पल्स के चारों तरफ उँगलियों से सर्किल बनाने लगी.
ऐसा करने से बलवंत का लण्ड पूरी तरह से खड़ा होकर टाइट हो गया.लेकिन अभी बलवंत का लण्ड उसके पेट की तरफ झुका हुआ था इसी लिए पायल को वह सिर्फ एक सख्त डंडे से ज्यादा कुछ नहीं महसूस हो रहा था।
अब बलवंत बोला- पायल , मेरी निप्पल्स को चुटकी में पकड़ो!
भोली पायल ने बलवंत के दोनों निप्पलों को एकबार में ही पकड़ लिए.
अचानक वार से बलवंत गनगना उठा, उसके लण्ड ने एक झटका खाया जिसे पायल ने भी महसूस किया. और उत्तेजना में बलवंत ने अपने फैले हुए पैरों को सिकोड़ लिया. अचानक पैरों को सिकोड़ने से बलवंत का कड़क लण्ड बंधी हुई लुंगी और पेट के बीच से आगे उसकी नाभि की तरफ पायल की चूत पर घस्सा मारते हुए बाहर निकल आया.
अपने और पायल के मिलेजुले कामरस में सराबोर उसका भुरा रंग का बड़े आलू जैसा सुपारा पायल की आँखों के सामने आ गया. जिसे देखकर पायल की हल्की सी चीख निकल गयी.
पर अनुभवी बलवंत स्थिति को भांपते हुए संभाल लिया और ऐसे दिखावा किया जैसे कुछ नहीं हुआ हो. उसने पायल को मालिश पर ध्यान लगाने को कहा.
परन्तु बलवंत के निप्पल्स को बार बार चुटकियों में भींचते हुए उसकी डरी सहमी नजरें बलवंत के पेट पर अठखेलियां करते लंड राज के फैले फन पर आकर टिक रही थी.
अब शातिर बलवंत ने अगली चाल चली. वो बोला- पायल, अब यहीं बैठे बैठे मेरे सर पर भी तेल लगा दो.
पायल , जो अब पतवार बलवंत के हाथ में छोड़ चुकी थी, उसकी बात को मानते हुए उसके लण्ड की सवारी करते हुए आगे की और झुककर बलवंत के माथे पर तेल लगाने लगी और बार बार झुकने की वजह से बलवंत और पायल का शरीर का अगला हिस्सा आपस में रगड़ा खाने लगा.
माथे पर मालिश करने के प्रयास में जब भी पायल आगे झुकती तो उसके टॉप में कैद उसकी चूचियों की घुण्डियां अनायास ही बलवंत की नंगी छाती के सख्त बालों को स्पर्श कर जाती तो पायल को अनजाना सा मजेदार अनुभव देने लगती थी.
बढ़ती खुमारी की वजह से पायल अब जानबूझकर यह क्रिया दोहराकर अपने टॉप मैं कैद अपनी चूचियों की घुण्डियां और जोर से बलवंत की छाती के बालों से रगड़ने लगी.
पायल की भारी होती साँसों की वजह से स्थिति को भांपते हुए बलवंत ने अगला कदम उठाया और पायल के चूतड़ों के पीछे हाथों का सहारा देकर पायल को अपने पेट पर आगे की ओर खिसका कर कहा- पायल , अब सर के बालों में भी तेल डाल दो।
अब इस नई पोजीशन में पायल के और आगे सरकने के वजह से चूचियां बिल्कुल बलवंत के काले काले मोटे होठों की रेंज में आ गई। अब जैसे ही पायल तेल लगाने के लिए आगे झुकती, बलवंत की साँसों की गर्माहट टॉप के कपड़े को भेदते हुए पायल की नाजुक चूचियों से टकराती.
अब पायल जानबूझकर बलवंत के होंठों और अपनी चूचियों की दूरी घटाने लगी. और एक समय ऐसा आया कि पायल की नाजुक दायीं चूची की घुण्डी ने बलवंत के खुरदुरे काले होंठों छू लिया.
बलवंत के मुँह खून लग चुका था, उसने बिल्कुल देर ना करते हुए जैसे ही अगली बार पायल आगे झुकी, अपनी लम्बी सी जीभ निकाल कर हल्के से पायल की टॉप में ढकी दायीं चुची पर फिरा दी.
इस नए अनुभव से गनगनाई पायल ने अगली बार बायीं चुची पर जीभ फिरवा ली. हर बार अलग अलग चूची आगे करके पायल पागल सी होने लगी. इधर शातिर बलवंत जीभ का दबाव बढ़ाता जा रहा था।
अब पायल के अगले पाठ की बारी थी.
इसके लिए बलवंत ने अगली बार पायल की चूची की एक निप्पल को टॉप के कपड़े के ऊपर से ही अपने खुरदुरे होठों में पकड़ लिया और दूसरी चूची की निप्पल को अपने एक हाथ ही चुटकी में पकड़ लिया. अनाड़ी पायल इस दोहरे नए अनुभव से एकदम बौखला कर बेड से उतर कर नीचे खड़ी हो गई.
उसके ऐसा करते ही अब तक पायल के चूतड़ों के नीचे दबा हुआ करीब 8 इंच का मोटा कला लण्ड एक झटके से उठ खड़ा हुआ और लुंगी से बाहर आकर पायल को देखकर फुफकारने लगा.
उसका भुजंग जैसा लण्ड बस की छत की और ऐसे खड़ा था जैसे कोई मिसाईल लॉन्चिंग पैड पर उड़ने के लिए तैयार खड़ी हो.
लण्ड के इस रूप को देखते ही पायल बोली- ओह इतनी बड़ी सू सू!
उसकी इस बात को सुनकर बलवंत की हंसी निकल गई और वह हँसते हुए बोला- पायल, सुसु तो बच्चों की होती है, इसे तो लण्ड या लौड़ा कहते हैं. और इससे घबराओ मत यह तो तुम्हारे द्वारा की गई मेरे निप्पल्स की मालिश से खुश होकर कर खड़ा हो गया है और तुम्हारे अच्छे काम से खुश होकर तुम्हें सलामी दे रहा है और अपनी भी मालिश करवाने के लिए मचलने लगा है. पायल प्लीज इसकी भी मालिश कर दो.
अब तक पायल काफी आगे बढ़ चुकी थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये उसे क्या खुमारी सी चढ़ रही है.
इसी उधेड़बुन में अनायास ही उसके हाथ बलवंत के लण्ड की तरफ बढ़ गए. पायल का हाथ लगते ही लण्ड ने जोर का झटका सा खाया. पायल के छोटे-2 हाथों में लण्ड एक बड़ा से डंडे के समान लग रहा था और मुट्ठी में समा नहीं रहा था.
दोनों हाथों को ऊपर नीचे रखने के बावजूद लण्ड का बड़ा सा भाग हाथों के ऊपर-नीचे बाकी रह गया था.
पायल बलवंत के इस बमपिलाट मोटे लण्ड से अत्यंत प्रभावित होकर अपने हाथों में लण्ड को पकड़कर उसका अचरज भरी निगाहों से इस एक आँख वाले सांप का बिल्कुल नजदीक से मुआयना कर रही थी.
कुछ देर के बाद बलवंत के बैडरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई. उसने हिम्मत करके बस के बाहर झाँका और देखा कि वो लड़की लड़खड़ा कर चलती हुई गिर गई. शायद वह मासूम कोमल से लड़की बलवंत के विशाल लण्ड की जोरदार ठुकाई सहन नहीं कर पाई थी।
ड्राइवर ने उसे गोद में उठा कर एक कार में बिठा दिया।
उसके बाद बलवंत कल की तरह बाथरूम में आया और लाईट जला ली. परन्तु आज चुपचाप मूतने की बजाये पायल की ओर का आधा दरवाजा उसने खोल दिया. इधर पायल चुपचाप मुंह ढककर सोने का नाटक करती रही.
उसके बाद बलवंत बेपरवाही के साथ मूतने लगा।
पायल के कमरे में अँधेरा था और बाथरूम में लाइट जल रही थी। अपनी इस स्थिति की वजह से बलवंत पायल को नहीं देख सकता था पर पायल बलवंत तो साफ़ साफ़ देख सकती थी. इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए पायल ने धीरे से अपनी थोड़ी सी चादर हटा कर बाथरूम में देखा तो सन्न रह गई.
बलवंत अपने कूल्हों पर हाथ रखकर खड़ा था और उसका करीब आधा खड़ा लण्ड किसी होज़ पाइप के समान लग रहा था. उससे निकलता मूत ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई छोटा मोटा ट्यूबवैल चल रहा हो.
अब पायल समझ चुकी कि वो बेचारी लड़की क्यों गिर पड़ी।
मूतने के बाद बलवंत ने हाथ में पकड़कर लण्ड को ऊपर नीचे झटकते हुए साफ़ किया और सोने चला गया।
पायल आज की सारी कार्यवाही की वजह से थकी होने के कारण और शायद जिंदगी में पहली बार झड़ने की वजह से तुरंत सो गई।
उधर बलवंत को पूरा यकीन था कि पायल ने लण्ड का पूरा जायजा ले लिया है और लोहा पूरी तरह से गरम हो गया है. अब वह पूरी तरह से संतुष्ट था कि पायल उसके जाल में फँस चुकी है और कल थोड़ी से मेहनत के बाद अपने आप मेरा लण्ड मांगेगी।
उस औरतखोर को यह भी यकीन था कि पायल उन लड़कियों की तरह कमसिन और नादान नहीं है. और पायल का शरीर पूरी तरह उसका हैवी लण्ड लेने योग्य हो चुका है. बस पायल को थोड़ा सा गरम करने के बाद एक बार बस उसकी कमसिन कुंवारी चूत सील खोल ले, उसके बाद पायल लण्ड की गुलाम बन जाएगी और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दिन रात उसके लण्ड की अपने मुँह, चूत और शायद गांड से भी भरपूर सेवा करेगी. यह सोचते सोचते थका बलवंत सो गया।
अगले दिन जब पायल सोकर उठी तो करीब 11 बज चुके थे और लाउड स्पीकर की आवाज सुनकर वो समझ गई कि बलवंत किसी चुनाव सभा को सम्बोधित कर रहा है।
पायल उठकर अपने नित्य कर्म से निवृत होने लगी।
करीब एक घंटे बाद पायल ने भी अपना नोट्स बनाने का कार्य शुरू कर दिया।पूरा दिन गहमागहमी में निकल गया और दिनभर का चुनाव प्रचार समाप्त हो गया।
प्रचार समाप्ति के बाद बस की लॉबी में लोकल नेताओं के साथ बलवंत कोई मीटिंग वगैरह कर रहा था. इसी बीच मुँह हाथ धोने के बाद पायल ने अपनी काले रंग की नाईट ड्रेस पहनी . और अपने रूम में आराम करने लगी.
अब यह सोचकर पायल का दिल धड़कने लगा कि रोज़ की भांति आज फिर कोई मासूम लड़की बाहर से आकर अपना कुंवारापन इस बस में खो देगी।
कुछ देर के बाद ड्राइवर ने दरवाजा खटका कर कहा- बेबी डिनर तैयार है, आप आ जाइये. नेताजी आपका इन्तजार कर रहे हैं।
पायल धड़कते दिल के साथ डाइनिंग एरिया में आ गई.
काले नाइट ड्रेस में पायल को देखकर बलवंत की आँखों में एक अजीब से चमक आ गई और उसका मुँह खुला का खुला रह गया.
सकपका कर वह बोला- पायल, आज तो तुम बहुत सुन्दर लग रही हो.
उसकी बात सुनकर पायल शर्मा कर मुस्कुरा दी और डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना सर्व करने लगी.
खाने के दौरान बलवंत कनखियों से पायल के सौंदर्य को ही निहार रहा था। पायल भी मन ही मन अपने हुस्न पर गुमान कर रही थी।
खाना खाने के बाद अचानक बलवंत बस के नीचे चला गया और ड्राइवर को भी नीचे बुला लिया.पायल कुछ समझ नहीं आया.
2 मिनट में बलवंत वापस आ गया और ड्राइवर को अपने पास बुला कर कहा- भाई आज का दिन तो बहुत व्यस्त था, मैं बहुत थक गया हूँ, शरीर को मालिश की सख्त जरूरत है।
सुनकर ड्राइवर चला गया और पायल का दिल ये सोच कर धड़कने लगा कि वही रोज वाला रूटीन अब फिर चालू होगा। पायल उठकर अपने कमरे में जाने लगी तो बलवंत बोला- पायल , जब तक मालिश वाली आये, मेरे साथ बैठ जाओ.
मुस्कुराने की एक्टिंग करते हुए पायल धड़कते दिल के साथ बैठ गई और इधर उधर की बातें करने लगी.
पर बलवंत की नजर पायल के सीने पर टिकी थी और आँखों में हवस के डोरे तैर रहे थे। परन्तु शायद किसी झिझक की वजह से बलवंत पायल के साथ कोई शुरुआत नहीं कर पा रहा था।
इसी बीच ड्राइवर बस में आ गया और बोला- साहब, आज हम दूर दराज़ के इलाके में हैं. इसलिए कोई मालिश वाली नहीं मिली. सर मुझे खेद है.
बलवंत इस बात से निराश हो गया और उसने कहा- आज का दिन अधिक व्यस्त था और बदन की मालिश के बिना कल के काम के लिए तैयार होना बहुत मुश्किल होगा.
फिर ड्राइवर ने पायल की और देखते हुए कहा- साहब, आप मसाज के लिए पायल से मदद ले सकते हैं क्योंकि यह आपकी पर्सनल सेक्रेटरी है और ये आपकी मदद जरूर करेगी। मैं सही कह रहा हूँ ना पायल मैडम?
ड्राइवर के इस प्रपोजल से पायल को बहुत धक्का लगा। अब पायल को सब कुछ समझ आने लगा कि यूनियन नेताजी खाने के बाद बस से नीचे क्यों गए थे. वे शायद ड्राइवर के साथ मिलकर यही प्लान बनाने गए थे कि ड्राइवर कुछ देर में आकर ये कह दे कि मालिश वाली नहीं मिली और फिर पायल को फंसा देने का प्लान था।
अब पायल का दिल जोर जोर से धड़क रहा था. उसे लग रहा था कि वो पायल की छाती फाड़कर बाहर आ जायेगा. पायल का रोम रोम आने वाली स्थिति को भांपकर रोमांचित होकर खड़ा हो गया।
बिना कुछ कहे उसने बलवंत की ओर मुँह किया. उसने देखा कि बलवंत मुस्कुरा रहा है. और उसने तुरंत कहा- हाँ, यह एक अच्छा विचार है. और मुझे पता है कि पायल बहुत अच्छी लड़की है और वह इस स्थिति में मेरी मदद जरूर करेगी। मेरी मदद करोगी न?
पायल का दिल बहुत जोर से धड़क रहा था कि वह क्या कह सकती है. उसने सोचा कि फंस गई मैं आज तो!
और इस स्थिति में उसने कहा- ठीक है, मैं मदद करूंगी लेकिन केवल 15 मिनट के लिए! क्योंकि मैं भी थक गई हूं.
बलवंत ने कहा- धन्यवाद, 15 मिनट काफी है मुझे!
ड्राइवर और बलवंत की नजरें आपस में मिली और दोनों की होठों पर एक रहस्यमयी मुस्कराहट तैर गई। उसके बाद ड्राइवर मेरी ओर देखते हुए बस से उतर गया।
उसके बाद बलवंत पायल का हाथ पकड़ कर अपने कैबिन में चल दिया।
उहापोह की स्थिति में पायल भी बलवंत के पीछे पीछे धड़कते दिल के साथ चल दी। उसके ख्यालों में बलवंत का काला मोटा भुजंग जैसा लण्ड बार बार आ रहा था. वो सोच रही थी कि शायद उसके कुंवारेपन का आखिरी दिन है. आने वाली स्थिति की कल्पना से उसकी चूचियों में खुमारी सी भर गई और उनकी घुंडियां पूरी सख्ती पर आ गई. उसकी चूत खारे पानी से लबरेज़ हो गई।
कमरे में पहुंचने के बाद बलवंत ने उसे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा, खुद बाथरूम में घुस गया और कुछ देर के बाद सिर्फ लुंगी में टॉपलेस हो कर आ गया।
पायल ने नोटिस किया कि बलवंत ने अपना अंडरवियर भी नहीं पहना है क्योंकि लुंगी आगे से उसके खुले लण्ड की वजह से झूल रही थी। पायल उसके संपूर्ण मर्दाना शरीर से प्रभावित थी उसके छाती बालों से ढकी थी।
जबरदस्त औरतखोर बलवंत ने झट से ताड़ लिया कि पायल उसे घूर रही है, खास तौर पर उसके लुंगी में झूलते उसकी चूत के दुश्मन को। बलवंत इसे अपनी आधी जीत समझ रहा था।
लेकिन उसने एक खेल खेलने का फैसला किया क्योंकि उसे खुद पर पूरा भरोसा था कि पायल उसे एक घंटे के भीतर उससे हाथ जोड़ कर चोदने की गुहार लगाएगी. इसलिए वह बस बिस्तर पर लेट गया और उसने कहा- पायल मालिश शुरू करो।
पायल अपने होश में आई और उसने तेल की बोतल से अपनी हथेली पर थोड़ा तेल लगाकर बिस्तर के एक तरफ खड़ी होकर मालिश शुरू कर दी।
यह मालिश करने के लिए एक असुविधजनक स्थिति थी, इसे भांपते हुए बलवंत बोला- पायल , ऐसे मालिश ढंग से नहीं हो पायेगी और तुम्हारी ड्रेस भी ख़राब हो जाएगी. तुम ऐसा करो, बैड पर आ जाओ और मेरे ऊपर ऐसे बैठ जाओ जैसे घोड़े पर बैठते हैं. मेरे शरीर के दोनों और एक एक पैर रख लो.
पायल झिझकती हुई बैड पर चढ़ गई और बलवंत के दोनों तरफ एक एक पैर रखकर खड़ी हो गई और खड़े खड़े ही झुककर मालिश करने लगी।
शातिर बलवंत ने तुरंत अगली चल खेल दी और बोला- पायल ऐसे नहीं, मेरी गांड पर अपने चूतड़ टिकाकर बैठ जाओ और फिर मालिश करो.
पायल को गांड और चूतड़ जैसे खुले और देशी शब्द सुनकर झटका सा लगा. उसके पूरे बदन में एक झुरझुरी सी दौड़ गई और वो शरमाते झिझकते धीरे से बलवंत की सख्त गांड पर अपने नाजुक और कोमल चूतड़ टिकाकर बैठ गई।
क्योंकि बलवंत की पूरी गांड सख्त काले बालों से ढकी थी और उसने एक पतली से लुंगी ही पहनी थी. इस वजह से पायल के नाजुक और कोमल चूतड़ और कमसिन चूत उसके नर्म व मुलायम कपड़ों के भीतर से ही उस भैंसे जैसे बलवंत की गांड के बालों का खुरदरापन मालिश करते हुए आगे पीछे होने वजह से रगड़ खाने वजह से साफ़ महसूस कर रहे थे.
और इसी मर्दाने स्पर्श के अहसास से उसके मन की नारी सुलभ कुदरती भावनाओं के वेग की वजह से उसकी चूत भरभराकर पानी छोड़ने लगी थी. अब उसे यह डर सताने लगा था कि कुछ ही देर में उसकी चड्डी पूरी गीली होकर उसकी नाईट ड्रेस के लोअर को भी गीली कर देगी. और ऐसा ही चलता रहा तो बलवंत की लुंगी भी गीली हो जाएगी।
इससे पहले उसका ये डर सच साबित होता, बलवंत बोला- पायल, पीठ की मालिश बहुत हो गई अब मैं पलटता हूँ मेरी छाती की मालिश भी कर दो।
पायल यह सोच कर खुश थी और वह ऊपर से उठकर बैड के नीचे आ गई.
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बलवंत की बात सुनकर पायल की तन्द्रा भंग हुई और मालिश करने के लिए पहले वाली पोजीशन लेते लेते उसे ये बात अब समझ आ रही थी ये 15 मिनट की बात कर रहा है पर अब उसका 22 साल तक संभालकर रखा कुंवारापन कुछ ही पल का मेहमान है. बलवंत जैसा औरतखोर चाहे कितना भी नरमी से पेश आ रहा था पर उसने पिछले दो दिनों में देख लिया था कि इस सांड के लण्ड को हर रात चूत का पानी चखने की आदत है. कुछ देर बाद उसकी अनचुदी कुंवारी नाजुक सी चूत उसके लण्ड के नीचे दम तोड़ देगी।
इधर बलवंत को भी पायल कपड़ों में कतयी अच्छी नहीं लग रही थी. अब वह मन ही मन आगे का प्लान बनाने में जुट गया।
पायल डरते शरमाते धीरे धीरे अपनी कुंवारी चूत को कपड़ों समेत बलवंत के लण्ड पर टिकाने के लिए नीचे करने लगी. लण्ड पर चूत का पहला स्पर्श पाते ही बलवंत की तोप ने एकदम से सलामी दी यानि की जोर का झटका खाया. जिसे पायल की नाजुक सी चूत भांप गई और न चाहते हुए भी पायल के मुँह से एक दबी हुए सिसकारी निकल गई. जिसे अनुभवी औरतखोर बलवंत ने तुरंत सुन लिया और खुश हो गया।
अंदरूनी झिझक और नारी सुलभ हया की वजह से पायल ने अपना पूरा भार बलवंत के लण्ड पर नहीं डाला था. इसे अनुभवी बलवंत ने तुरंत भांपते हुए अपने हाथों को पायल के दोनों जांघों पर रखते हुए नीचे की और खींच लिया और अपना हथियार ढंग से पायल की नाजुक चूत की फांकों के बीच लम्बवत फंसा दिया.
इस अचानक हमले से पायल की जोरदार सिसकारी निकल गई और जैसे उसकी नजरें बलवंत से मिली बलवंत ने तुरंत उसे आँख मार दी। पायल इस दोहरे हमले से बुरी तरह शरमा गई.
इसी बीच बलवंत ने उसके हाथों में तेल की बोतल पकड़ा दी. पायल हिचकिचाते हुए काम्पते हाथों से बलवंत की छाती की मालिश में जुट गई.
क्योकि मालिश करने की वजह से पायल को लगातार आगे पीछे होना पड़ रहा था तो पहले से ही पानी से सराबोर उसकी चूत अब प्रकृति के नियमानुसार भरभराकर पानी छोड़ने पर मजबूर हो गई और पायल का डर सच हो गया. पायल की चूत अब बलवंत के लण्ड को अपने पानी से सराबोर करने लगी।
हालाँकि अनुभवी बलवंत को इसका अहसास हो चुका था पर वह जानबूझकर अनजान बना रहा क्योंकि वो आखिरी चोट करने से पहले लोहे को थोड़ा और गर्म करना चाहता था.
इधर चूत की गर्मी पाकर बलवंत का लण्ड अब अपने पूरे शवाब पर था. उधर लण्ड पर कुंवारी चूत के लगातार रगड़ों की वजह से पायल के छक्के छूटने लगे थे और उसकी साँसें भारी हो चली थी और वो झड़ने के करीब आती जा रही थी.
पर बलवंत अभी ये नहीं चाहता था क्योंकि उसे अभी पायल को और गर्म करके तड़फाना था.इसलिए उसने पायल के हाथ पकड़ लिए और मालिश करने से रोक लिया.
बलवंत की यह चाल पायल को बिल्कुल पसंद नहीं आई क्योंकि वो झड़ने के करीब थी और पायल की नाजुक अनचुदी चूत को गर्म कड़क लण्ड की तपिश से मजा आने लगा था।
पायल घायल शेरनी की भांति बलवंत की आँखों में घूरने लगी. पायल की आँखों में हवस के लाल डोरे तैर रहे थे।
परन्तु अनुभवी लंडबाज बलवंत इस खेल तो इसी प्रकार धीरे धीरे आगे बढ़ाकर पायल को बिल्कुल ऐसी हालत में ले जाना चाहता था जहाँ पढ़ी लिखी ऊँचे घराने की नाजुक सी पायल हाथ जोड़कर अनपढ़ अपराधी प्रवृति के शातिर औरतखोर बलवंत से अपनी कुंवारी नाजुक चूत का उद्घाटन उसके काले लौड़े से करवाने के लिए मिन्नतें करने लगे.
इसलिए चोदा चोदी के खेल में अनाड़ी पायल को झड़ने से पहले यहाँ रोकना जरूरी था क्योंकि बलवंत हर हाल में लगाम अपने हाथ में रखना चाहता था.
अपने लण्ड की गर्मी को और बढ़ाने के लालच में बलवंत बोला- पायल मेरी छाती पर निप्पल्स के आस-पास सर्कल में उँगलियाँ घुमाओ. ऐसा करने से सारी थकान उतर जाती है.
स्खलन के करीब पहुँचने के बाद बलवंत के रोकने से गुस्से से फनफनाई भोली पायल अनमने भाव से अपने दोनों हाथों के अंगूठों और तर्जनी उंगली को तेल में डुबोकर उसके दोनों निप्पल्स के चारों तरफ उँगलियों से सर्किल बनाने लगी.
ऐसा करने से बलवंत का लण्ड पूरी तरह से खड़ा होकर टाइट हो गया.लेकिन अभी बलवंत का लण्ड उसके पेट की तरफ झुका हुआ था इसी लिए पायल को वह सिर्फ एक सख्त डंडे से ज्यादा कुछ नहीं महसूस हो रहा था।
अब बलवंत बोला- पायल , मेरी निप्पल्स को चुटकी में पकड़ो!
भोली पायल ने बलवंत के दोनों निप्पलों को एकबार में ही पकड़ लिए.
अचानक वार से बलवंत गनगना उठा, उसके लण्ड ने एक झटका खाया जिसे पायल ने भी महसूस किया. और उत्तेजना में बलवंत ने अपने फैले हुए पैरों को सिकोड़ लिया. अचानक पैरों को सिकोड़ने से बलवंत का कड़क लण्ड बंधी हुई लुंगी और पेट के बीच से आगे उसकी नाभि की तरफ पायल की चूत पर घस्सा मारते हुए बाहर निकल आया.
अपने और पायल के मिलेजुले कामरस में सराबोर उसका भुरा रंग का बड़े आलू जैसा सुपारा पायल की आँखों के सामने आ गया. जिसे देखकर पायल की हल्की सी चीख निकल गयी.
पर अनुभवी बलवंत स्थिति को भांपते हुए संभाल लिया और ऐसे दिखावा किया जैसे कुछ नहीं हुआ हो. उसने पायल को मालिश पर ध्यान लगाने को कहा.
परन्तु बलवंत के निप्पल्स को बार बार चुटकियों में भींचते हुए उसकी डरी सहमी नजरें बलवंत के पेट पर अठखेलियां करते लंड राज के फैले फन पर आकर टिक रही थी.
अब शातिर बलवंत ने अगली चाल चली. वो बोला- पायल, अब यहीं बैठे बैठे मेरे सर पर भी तेल लगा दो.
पायल , जो अब पतवार बलवंत के हाथ में छोड़ चुकी थी, उसकी बात को मानते हुए उसके लण्ड की सवारी करते हुए आगे की और झुककर बलवंत के माथे पर तेल लगाने लगी और बार बार झुकने की वजह से बलवंत और पायल का शरीर का अगला हिस्सा आपस में रगड़ा खाने लगा.
माथे पर मालिश करने के प्रयास में जब भी पायल आगे झुकती तो उसके टॉप में कैद उसकी चूचियों की घुण्डियां अनायास ही बलवंत की नंगी छाती के सख्त बालों को स्पर्श कर जाती तो पायल को अनजाना सा मजेदार अनुभव देने लगती थी.
बढ़ती खुमारी की वजह से पायल अब जानबूझकर यह क्रिया दोहराकर अपने टॉप मैं कैद अपनी चूचियों की घुण्डियां और जोर से बलवंत की छाती के बालों से रगड़ने लगी.
पायल की भारी होती साँसों की वजह से स्थिति को भांपते हुए बलवंत ने अगला कदम उठाया और पायल के चूतड़ों के पीछे हाथों का सहारा देकर पायल को अपने पेट पर आगे की ओर खिसका कर कहा- पायल , अब सर के बालों में भी तेल डाल दो।
अब इस नई पोजीशन में पायल के और आगे सरकने के वजह से चूचियां बिल्कुल बलवंत के काले काले मोटे होठों की रेंज में आ गई। अब जैसे ही पायल तेल लगाने के लिए आगे झुकती, बलवंत की साँसों की गर्माहट टॉप के कपड़े को भेदते हुए पायल की नाजुक चूचियों से टकराती.
अब पायल जानबूझकर बलवंत के होंठों और अपनी चूचियों की दूरी घटाने लगी. और एक समय ऐसा आया कि पायल की नाजुक दायीं चूची की घुण्डी ने बलवंत के खुरदुरे काले होंठों छू लिया.
बलवंत के मुँह खून लग चुका था, उसने बिल्कुल देर ना करते हुए जैसे ही अगली बार पायल आगे झुकी, अपनी लम्बी सी जीभ निकाल कर हल्के से पायल की टॉप में ढकी दायीं चुची पर फिरा दी.
इस नए अनुभव से गनगनाई पायल ने अगली बार बायीं चुची पर जीभ फिरवा ली. हर बार अलग अलग चूची आगे करके पायल पागल सी होने लगी. इधर शातिर बलवंत जीभ का दबाव बढ़ाता जा रहा था।
अब पायल के अगले पाठ की बारी थी.
इसके लिए बलवंत ने अगली बार पायल की चूची की एक निप्पल को टॉप के कपड़े के ऊपर से ही अपने खुरदुरे होठों में पकड़ लिया और दूसरी चूची की निप्पल को अपने एक हाथ ही चुटकी में पकड़ लिया. अनाड़ी पायल इस दोहरे नए अनुभव से एकदम बौखला कर बेड से उतर कर नीचे खड़ी हो गई.
उसके ऐसा करते ही अब तक पायल के चूतड़ों के नीचे दबा हुआ करीब 8 इंच का मोटा कला लण्ड एक झटके से उठ खड़ा हुआ और लुंगी से बाहर आकर पायल को देखकर फुफकारने लगा.
उसका भुजंग जैसा लण्ड बस की छत की और ऐसे खड़ा था जैसे कोई मिसाईल लॉन्चिंग पैड पर उड़ने के लिए तैयार खड़ी हो.
लण्ड के इस रूप को देखते ही पायल बोली- ओह इतनी बड़ी सू सू!
उसकी इस बात को सुनकर बलवंत की हंसी निकल गई और वह हँसते हुए बोला- पायल, सुसु तो बच्चों की होती है, इसे तो लण्ड या लौड़ा कहते हैं. और इससे घबराओ मत यह तो तुम्हारे द्वारा की गई मेरे निप्पल्स की मालिश से खुश होकर कर खड़ा हो गया है और तुम्हारे अच्छे काम से खुश होकर तुम्हें सलामी दे रहा है और अपनी भी मालिश करवाने के लिए मचलने लगा है. पायल प्लीज इसकी भी मालिश कर दो.
अब तक पायल काफी आगे बढ़ चुकी थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये उसे क्या खुमारी सी चढ़ रही है.
इसी उधेड़बुन में अनायास ही उसके हाथ बलवंत के लण्ड की तरफ बढ़ गए. पायल का हाथ लगते ही लण्ड ने जोर का झटका सा खाया. पायल के छोटे-2 हाथों में लण्ड एक बड़ा से डंडे के समान लग रहा था और मुट्ठी में समा नहीं रहा था.
दोनों हाथों को ऊपर नीचे रखने के बावजूद लण्ड का बड़ा सा भाग हाथों के ऊपर-नीचे बाकी रह गया था.
पायल बलवंत के इस बमपिलाट मोटे लण्ड से अत्यंत प्रभावित होकर अपने हाथों में लण्ड को पकड़कर उसका अचरज भरी निगाहों से इस एक आँख वाले सांप का बिल्कुल नजदीक से मुआयना कर रही थी.


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