26-09-2026, 01:47 PM
बाबाजी ने मयूरी की पूरी तरह नंगी, घने बालों वाली चूत को कुछ पल और देखा, फिर प्यार भरी आवाज़ में बोले,
“तुम एक काम करो मयूरी… यहाँ आराम से बैठ जाओ। मैं इसे साफ़ कर देता हूँ। और आगे जेक तू अपनी बेटी को भी सिखा सकती है। कैसे अपने इस कोमल अंगो को साफ़ सुथरा और आकर्षक बनाए रखना है। आखिर आगे जाके उसे भी तो यही करना है।”
बेटी की बात सुनते ही,मयूरी कुछ बोल पाती, उससे पहले ही बाबाजी नंगे ही उठे और तेज़ी से बाथरूम की तरफ गए। कुछ ही सेकंड बाद शेविंग किट लेकर वापस आ गए। मयूरी का दिल जोरों से धड़क रहा था। वह शर्म से लाल हो गई, लेकिन विरोध भी नहीं किया। बाटी की बात सुनते वह और भी कामुक हो रही थी। लेखिका मैत्री है।
बाबाजी ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसके पैरों को थोड़ा फैलाया और गर्म पानी से पहले हल्का सा भीगा लिया। फिर शेविंग क्रीम की ठंडी, सफेद फेन को अपनी हथेली पर लिया और धीरे-धीरे उसकी चूत पर फैलाने लगे। ठंडी क्रीम और उनकी गर्म उँगलियों के स्पर्श से मयूरी के शरीर में करंट-सा दौड़ गया।
“अह्ह्ह…” वह हल्के से सिसक उठी।
बाबाजी ने रेजर उठाया और बेहद सावधानी से, प्यार से बाल साफ़ करने लगे। जैसे-जैसे घने काले बाल हटते गए, उसके अंदर छुपी हुई गुलाबी, रसीली, एकदम सफेद चूत उजागर होती गई। पाँच-सात मिनट में ही बाबाजी के जादुई हाथों ने उसकी चूत को बिल्कुल नंगी, चिकनी और चमकदार बना दिया।
मयूरी ने नीचे देखा और हैरान रह गई। उसकी चूत अब बिल्कुल जवानी जैसी लग रही थी एक नाजुक, फूली हुई, गीली और पूरी तरह जिवंत।
बाबाजी ने पानी के छींटे मारे, साफ किया और फिर पहली बार अपने कठोर, मोटी उँगलियों को उसकी चिकनी चूत पर जोर से फेरा।
“अह्ह्ह्ह्ह… म्म्म्म्म्म…” मयूरी के मुंह से लंबी सिसकारी निकल गई।
बाबाजी की बीच वाली उँगली उसके फूले हुए होंठों के बीच फंस गई। जैसे ही उन्होंने हल्का दबाव दिया, उँगली आधे तक उसके अंदर चली गई।
मयूरी का पूरा शरीर कमान की तरह तन गया। उसकी कमर ऊपर उठ गई।
“अह्ह्ह्ह्ह्ह… बाबाजी जी…!”
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए उँगली को एक झटके से बाहर खींचा। उँगली के साथ ही उसकी चूत से ढेर सारा गाढ़ा, चिपचिपा रस छींटों के रूप में बाहर निकला। कुछ बूँदें सीधे बाबाजी के चेहरे और खुले मुंह पर गिर गईं।
उन्होंने जीभ से एक बूँद चखी और कामुक स्वर में बोले,
“वाह… तुम्हारी बिल्ली का दूध तो बड़ा मीठा है मयूरी… बहुत स्वादिष्ट।”
ये सुनकर मयूरी की शर्म और उत्तेजना दोनों चरम पर पहुँच गई। उसने बाबाजी के बालों को दोनों हाथों से पकड़ा, उनके सिर को जोर से अपनी चूत पर दबाया और फुसफुसाकर बोली,
“तो पी लो ना बाबाजी जी… सब आपके लिए ही है… जी भरकर पीजिए…वह रस छोड़ती रहेगी और आप पीते रहिये।”
बाबाजी ने कोई जवाब नहीं दिया। बस अपनी गर्म, चौड़ी जीभ को पूरी तरह फैलाकर उसकी चूत पर रख दी और लंबी-लंबी चाट शुरू कर दी। पहले उसके ऊपरी हिस्से को, फिर फूले हुए छोटे होंठों को, और फिर क्लिटोरिस (चूत के दाने) को।
मयूरी की आँखें बंद हो गईं। वह अब पूरी तरह मजा ले रही थी। सहायिका सौनी पटेल।
बाबाजी ने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए, अपना पूरा चेहरा उसकी जाँघों के बीच दबा दिया और जोर-जोर से चूसने लगे। जैसे ही उन्होंने उसके दाने को होंठों में पकड़कर जोर से मसला और चूसा, मयूरी का शरीर बुरी तरह तड़प उठा।
“आअह्ह्ह्ह… बाबाजी… उफ्फ… नहीं… बहुत जोर से… अह्ह्ह!”
वह अपने हाथों से बाबाजी का सिर पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बाबाजी खाए हुए थे। उन्होंने दाने को मुँह में दबाए रखा और तेज़ी से चूसते रहे। उनकी जीभ अंदर-बाहर घुस रही थी, उँगलियाँ भी साथ दे रही थीं।
अचानक मयूरी की चूत के अंदर से “कल-कल” की आवाज आने लगी। उसका शरीर काँपने लगा।
“मैं… मैं आ रही हूँ… बाबाजी… अह्ह्ह्ह! अब टिक नहीं पाउंगी बाबाजी आपके कमाल के आगे।”
जैसे ही उसका तेज़ ऑर्गेज्म आया, गर्म, मीठा रस की धार बाबाजी के मुंह में छूट गई। बाबाजी ने चटोरे की तरह पूरा रस पी लिया, कोई बूँद भी बाहर नहीं जाने दी।
मयूरी के शरीर में एक के बाद एक झटके लग रहे थे, और हर झटके के साथ उसकी चूत अपना रस बाबाजी के मुंह में डाले जा रही थी। वह बाबाजी के मुँह पर अपनी चूत रगड़ते हुए चीखती रही, और फिर पूरी तरह निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी।
उसकी साँसें फूली हुई थीं। चेहरा पसीने और उत्तेजना से लाल था। आज उसने अपनी पूरी जिंदगी में इतना तीव्र सुख शायद पहली बार महसूस किया था।
वह नंगी पड़ी-पड़ी सोच रही थी, अब आगे बाबाजी क्या करेंगे?
सिर्फ एक ही चीज बची थी अब… पूरी चुदाई। संपादिका फनलवर।
इस ख्याल से ही उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए। उसकी अभी भी काँपती चूत से रस टपक रहा था, और वह बाबाजी की अगली हरकत का इंतजार कर रही थी।
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जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri Patel की प्रस्तुति।
“तुम एक काम करो मयूरी… यहाँ आराम से बैठ जाओ। मैं इसे साफ़ कर देता हूँ। और आगे जेक तू अपनी बेटी को भी सिखा सकती है। कैसे अपने इस कोमल अंगो को साफ़ सुथरा और आकर्षक बनाए रखना है। आखिर आगे जाके उसे भी तो यही करना है।”
बेटी की बात सुनते ही,मयूरी कुछ बोल पाती, उससे पहले ही बाबाजी नंगे ही उठे और तेज़ी से बाथरूम की तरफ गए। कुछ ही सेकंड बाद शेविंग किट लेकर वापस आ गए। मयूरी का दिल जोरों से धड़क रहा था। वह शर्म से लाल हो गई, लेकिन विरोध भी नहीं किया। बाटी की बात सुनते वह और भी कामुक हो रही थी। लेखिका मैत्री है।
बाबाजी ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसके पैरों को थोड़ा फैलाया और गर्म पानी से पहले हल्का सा भीगा लिया। फिर शेविंग क्रीम की ठंडी, सफेद फेन को अपनी हथेली पर लिया और धीरे-धीरे उसकी चूत पर फैलाने लगे। ठंडी क्रीम और उनकी गर्म उँगलियों के स्पर्श से मयूरी के शरीर में करंट-सा दौड़ गया।
“अह्ह्ह…” वह हल्के से सिसक उठी।
बाबाजी ने रेजर उठाया और बेहद सावधानी से, प्यार से बाल साफ़ करने लगे। जैसे-जैसे घने काले बाल हटते गए, उसके अंदर छुपी हुई गुलाबी, रसीली, एकदम सफेद चूत उजागर होती गई। पाँच-सात मिनट में ही बाबाजी के जादुई हाथों ने उसकी चूत को बिल्कुल नंगी, चिकनी और चमकदार बना दिया।
मयूरी ने नीचे देखा और हैरान रह गई। उसकी चूत अब बिल्कुल जवानी जैसी लग रही थी एक नाजुक, फूली हुई, गीली और पूरी तरह जिवंत।
बाबाजी ने पानी के छींटे मारे, साफ किया और फिर पहली बार अपने कठोर, मोटी उँगलियों को उसकी चिकनी चूत पर जोर से फेरा।
“अह्ह्ह्ह्ह… म्म्म्म्म्म…” मयूरी के मुंह से लंबी सिसकारी निकल गई।
बाबाजी की बीच वाली उँगली उसके फूले हुए होंठों के बीच फंस गई। जैसे ही उन्होंने हल्का दबाव दिया, उँगली आधे तक उसके अंदर चली गई।
मयूरी का पूरा शरीर कमान की तरह तन गया। उसकी कमर ऊपर उठ गई।
“अह्ह्ह्ह्ह्ह… बाबाजी जी…!”
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए उँगली को एक झटके से बाहर खींचा। उँगली के साथ ही उसकी चूत से ढेर सारा गाढ़ा, चिपचिपा रस छींटों के रूप में बाहर निकला। कुछ बूँदें सीधे बाबाजी के चेहरे और खुले मुंह पर गिर गईं।
उन्होंने जीभ से एक बूँद चखी और कामुक स्वर में बोले,
“वाह… तुम्हारी बिल्ली का दूध तो बड़ा मीठा है मयूरी… बहुत स्वादिष्ट।”
ये सुनकर मयूरी की शर्म और उत्तेजना दोनों चरम पर पहुँच गई। उसने बाबाजी के बालों को दोनों हाथों से पकड़ा, उनके सिर को जोर से अपनी चूत पर दबाया और फुसफुसाकर बोली,
“तो पी लो ना बाबाजी जी… सब आपके लिए ही है… जी भरकर पीजिए…वह रस छोड़ती रहेगी और आप पीते रहिये।”
बाबाजी ने कोई जवाब नहीं दिया। बस अपनी गर्म, चौड़ी जीभ को पूरी तरह फैलाकर उसकी चूत पर रख दी और लंबी-लंबी चाट शुरू कर दी। पहले उसके ऊपरी हिस्से को, फिर फूले हुए छोटे होंठों को, और फिर क्लिटोरिस (चूत के दाने) को।
मयूरी की आँखें बंद हो गईं। वह अब पूरी तरह मजा ले रही थी। सहायिका सौनी पटेल।
बाबाजी ने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए, अपना पूरा चेहरा उसकी जाँघों के बीच दबा दिया और जोर-जोर से चूसने लगे। जैसे ही उन्होंने उसके दाने को होंठों में पकड़कर जोर से मसला और चूसा, मयूरी का शरीर बुरी तरह तड़प उठा।
“आअह्ह्ह्ह… बाबाजी… उफ्फ… नहीं… बहुत जोर से… अह्ह्ह!”
वह अपने हाथों से बाबाजी का सिर पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बाबाजी खाए हुए थे। उन्होंने दाने को मुँह में दबाए रखा और तेज़ी से चूसते रहे। उनकी जीभ अंदर-बाहर घुस रही थी, उँगलियाँ भी साथ दे रही थीं।
अचानक मयूरी की चूत के अंदर से “कल-कल” की आवाज आने लगी। उसका शरीर काँपने लगा।
“मैं… मैं आ रही हूँ… बाबाजी… अह्ह्ह्ह! अब टिक नहीं पाउंगी बाबाजी आपके कमाल के आगे।”
जैसे ही उसका तेज़ ऑर्गेज्म आया, गर्म, मीठा रस की धार बाबाजी के मुंह में छूट गई। बाबाजी ने चटोरे की तरह पूरा रस पी लिया, कोई बूँद भी बाहर नहीं जाने दी।
मयूरी के शरीर में एक के बाद एक झटके लग रहे थे, और हर झटके के साथ उसकी चूत अपना रस बाबाजी के मुंह में डाले जा रही थी। वह बाबाजी के मुँह पर अपनी चूत रगड़ते हुए चीखती रही, और फिर पूरी तरह निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी।
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सिर्फ एक ही चीज बची थी अब… पूरी चुदाई। संपादिका फनलवर।
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