25-09-2026, 01:53 PM
भाग 2 आरंभ..................
मैं पायल ( काजल की बेटी ) एकबार फिर आप लोग के बीच उपस्थित हुं एक नई घटनाएं के साथ।
...............................
मम्मी के साथ हुऐ घटना को दो साल बीत चुके थे। उस 'घटना' के बाद के दो साल बहुत अजीब तरीके से बीते थे। मैं अपनी प्यारी मम्मी को एक कामुक प्राणी के रूप में देखने से खुद को रोक नहीं पा रही थी । उनके चिकने नग्न शरीर की छवियाँ, उनके साथ यौन संबंध बनाते हुए दृश्य, जिस तरह उन्होंने अपने बलात्कारी के सामने अपनी गांड खोली थी, जिस तरह उन्होंने उसका लंड चूसी थी , जिस तरह उन्होंने उसे चूमी थी और अपनी सुंदर टांगें उसकी कमर के चारों ओर लपेटी थीं, यहाँ तक कि बार-बार चरम सुख प्राप्त करते समय उनकी आहें और चीखें भी, सब कुछ मेरे दिमाग में हमेशा के लिए अंकित हो था। मैं मम्मी की तरफ ख़ुद को दिखाने से बचती थी । इस लिए मैं पापा को बिना बताए ( यह बात सिर्फ मम्मी को पता थी ) अपनी राजनीति विज्ञान की छूटी हुई पढ़ाई पुरी करने के लिए मीना बाजार से बिलासपुर के मंडी बाज़ार पहुंची। मंडी बाज़ार के " मांझी विश्वविद्यालय " पहुंची । वहां पहुंचने पर राजनीतिक विज्ञान के विख्यात प्रोफ़ेसर के द्वारा मुझे एमए की डिग्री हासिल करने के लिए भारतीय यूनियन व्यवस्था में आपराधिक तत्वों के बढ़ते प्रभाव पर एक थीसिस लिखने को निर्देश मिला ।
संयोग से उस समय 10 वीं यूनियन नेता के लिए चुनावों के प्रचार प्रसार चालू हो चुकी थी। उस चुनाव के दौरान एक उम्मीदवार यूनियन नेता बलवंत चौधरी से मैं मिली और उनसे आदेश ली उसके कार्यकलापों का अध्ययन करने और थीसिस लिखने के लिए उनके साथ रहने को । उन्होंने मुझे अनुमति दे दी।
बलवंत चौधरी एक सीट से यूनियन चुनाव लड़ रहे थे । वह पिछले तीन बार से जीते आ रहे थे और इस बार चौथी बार भी उसी सीट पर चुनाव लड़ने जा रहे थे।
मुझे बलवंत चौधरी में विशेष रुचि का कारण यह था की वह 20 साल पहले एक प्रसिद्ध अपराधी था, उसने बहुत सारे जघन्य अपराध किए थे और बाद में चुनाव लड़ कर राजनीति में आ गया.
और लोग कहते हैं कि उसने अपना पूरा जीवन गरीब लोगों की सेवा के लिए लगा दिया.
मेरे शोध के दौरान मुझे पता चला कि उसके निर्वाचन क्षेत्र के सामान्य लोग उससे बहुत खुश थे और कोई भी उसके खिलाफ नहीं बोलते थे ।
............….........................…...
एक शाम को लगभग चार बजे पायल बलवंत के कार्यालय पहुंची. उसे बलवंत के कार्यालय के बाहर लगभग 15 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़ी. तब चपरासी ने उसे अंदर जाने के लिए कहा.
जब वह कार्यालय में दाखिल हुई तो वहां कोई नहीं था इसलिए वह खुद खाली पड़ी कुर्सी पर बैठ गई।
4-5 मिनट के बाद भव्य व्यक्तित्व वाला एक विशाल व्यक्ति संलग्न शौचालय से बाहर आया और खुद का बलवंत चौधरी के रूप में परिचय दिया- " मुझे माफ करना मैडम, आपको इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, आप जानते हैं कि ये चुनाव के दिन हैं और चुनाव के लिए बहुत कम समय बचा है और मैं अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हुं " । और इसी बीच बलवंत चौधरी हाथ मिलाने की मुद्रा में हाथ पायल की ओर बढ़ाया।
पायल- ओह इट्स ऑल राइट, मुझे पता है कि आप एक बिजी आदमी हैं। सर , मुझे पता चला है कि आप एक चुनाव अभियान चला रहे हैं , इस चुनाव अभियान के दौरान आपके साथ रहना चाहती हूं, सर , मैं आपका बहुत आभारी रहूंगी अगर आप मुझे अपने अभियान पर साथ आने की अनुमति दें।
बलवंत चौधरी - अरे क्यों नहीं, मेरे व्यस्त कार्यक्रम के दौरान इतनी सुंदर लड़की का साथ रहना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात होगी।
पायल - थैंक यू सर, लेकिन आप अपना टूर कब शुरू करेंगे। मुझे पता है कि आप एक बिजी आदमी हैं।
बलवंत चौधरी - यह कल सुबह से होगा, और सुनो जैसा कि तुम्हे पता होगा कि मेरा निर्वाचन क्षेत्र बहुत बड़ा है, यात्रा कम से कम 15 दिनों के लिए होगी और आपको अपना सारा रोज़मर्रा का सामान और अतिरिक्त कपड़े वगैरह साथ ले लेना।
पायल - ओके सर , मैं कल सुबह यहाँ आ जाऊँगी। अब मुझे निकलना होगा क्योंकि बहुत सारी पैकिंग करनी है, धन्यवाद सर।
( जब पायल कमरे से बाहर निकल रही थी तो बलवंत उसकी पीछे से मटकती हुई गांड को देख रहा था और सोच रहा था कि इतनी कमसिन नाजुक कच्ची कली जैसे लड़की के साथ चुनाव प्रचार का अलग ही मज़ा आएगा और उसने योजना बनानी शुरू कर दी कि वह उसे कैसे फुसलाने वाला है क्योंकि वह उसके साथ कोई जोर आजमाईश करने के मूड में कतई नहीं था. इसके विपरीत वह धीरे धीरे प्यार से पटाकर पायल की मर्ज़ी से उसकी कुंवारी अनचुदी चूत का उद्धघाटन करने की फ़िराक में था )
ये सोचते सोचते बलवंत चौधरी के 8 इंची विशाल लंड में जबरदस्त तनाव आ गया और उसने तुरंत अपने ऑफिस की महिला चपरासी को बुला कर उसके मुँह में अपना लंड ठूंस दिया. और कुछ ही मिनटों में सारा माल उसके मुँह में छोड़कर दिया ।
आज महिला चपरासी भी हैरान थी कि यह हैवान इतनी जल्दी कैसे झड़ गया क्योंकि वह जानती थी कि ये साँड एक बार शुरू होने के बाद कम से कम एक घंटे तक उसकी चूत के परखच्चे उड़ा देता था।
उस महिला चपरासी ने बलवंत और पायल की बातें बाहर बैठकर सुनी थी। उसे मन ही मन उसकी होने वाली जबरदस्त चुदाई के बारे में सोचकर उस बेचारी पायल पर दया आ रही थी। वह समझ चुकी थी कि 15 दिनों के चुनाव प्रचार के दौरान पायल की कुंवारी चूत की धज्जिया उजाड़ कर उसका भोसड़ा बना देगा।
उधर दूसरी तरफ कमरे से बाहर निकलने के बाद पायल वलवंत के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुई. विशेषकर उसकी आँखों और उनकी आवाज़ दोनों में गहराई थी. और पहली मुलाकात में उन्हें किसी भी शरीर को आकर्षित करने में सक्षम था.
इसलिए उसने सोचा की शायद इन्ही खूबियों के कारण एक वलबंत अपराधी होने के बावजूद वह जनता के बीच में इतना लोकप्रिय था।
अगले दिन पायल जल्दी उठ गई और अपने बैग और सामान के साथ किराया के घर से वलबंत के कार्यालय पहुंच गई।
बलवंत चौधरी के कार्यालय के बाहर बहुत सारी गतिविधियाँ चल रही थीं क्योंकि वलवंत ने अपने चुनाव अभियान को शुरू करने के लिए एक समारोह की योजना बनाई थी और मीडिया के बहुत से लोगों को इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए आमंत्रित किया था।
पायल जब कार्यालय पहुंची तो महिला चपरासी ने उसे पहचान लिया और उससे कहा कि वह कुर्सियों की अग्रिम पंक्ति में बैठ जाए क्योंकि एक बड़ी सभा थी और वलवंत एकत्रित लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाला है।
अचानक लोगों ने वलबंत भाई जिन्दाबाद, जीतेगा भाई वलवंत भाई जीतेगा आदि चिल्लाना शुरू कर दिया।
बलवंत का भव्य स्वागत हुआ. वह पोडियम पर पहुँचा, जहां उसे बहुत सारे बड़े व्यापारी और अन्य लोग माला पहना रहे थे।
पायल सामने वाली कतार में ही बैठी थी, बलवंत ने उसे देखते ही पहचान लिया और इशारा करके मंच पर ही बुला लिया और मंच पर लगी कुर्सियों में से एक पर बैठने को कहा।
पायल अपनी इस इज्जत अफजाई पर अत्यंत प्रसन्न हुई।
फिर बलवंत ने अपने भाषण की शुरुआत अपनी गहरी आवाज से की और लोगों को अपने पिछले कार्यकालों के दौरान किए गए विकास कार्यों और पिछले अभियान के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के बारे में बताया।
भाषण के अंत में उसने विभिन्न लोगों के नाम का उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी बनाया था.
तभी उसने अचानक पायल का नाम लिया और कहा कि " मिस पायल इस अभियान के लिए मेरी निजी सचिव होंगी। "
एकदम सभी लोगों ने पायल को देखा और पायल इस अचानक मिली तवज्जो से गदगद हो गई. सभी मीडिया कैमरा पायल पर थे और वह इस सब से अभिभूत थी।
इधर बलवंत का सारा ध्यान पायल की चड्डी में छुपी चूत रानी पर था।
जब वाहनों का काफिला रवाना हुआ बलवंत ने पायल को कहा- तुम मेरे साथ मेरे विशेष रूप से तैयार की गई वॉल्वो बस में मेरे साथ ही रहोगी।
उस बस की छत में एक सुराख़ बना था जिसका इस्तेमाल बलवंत ने प्रचार के दौरान बस में लगी लिफ्ट पर खड़ा होकर भाषण इत्यादि के लिए प्रयोग करना था।
इसके अतिरिक्त उस बस में पीछे की और दो कमरे बने थे जिनके मध्य में एक कॉमन टॉयलेट था। आगे की ओर मुलाकातों के लिए एक लॉबी थी और बीच में एक और किचन और एक और डाइनिंग एरिया था। ड्राइवर केबिन और पीछे के हिस्से के बीच गिलास पार्टीशन था। पूरी बस वातानुकूलित थी।
बलवंत चौधरी ने पायल से कहा कि वह अपना सामान एक वह कमरा जो बस के पीछे की तरफ है, में स्थानांतरित कर दे. चूंकि उनका निर्वाचन क्षेत्र बहुत पिछड़ा हुआ है और अभियान के दौरान रहने के लिए कोई रेस्टहाउस या होटल नहीं हैं, इसलिए यह व्यवस्था की गई है.
पायल ने बलवंत चौधरी को उसे दी जा रही विशेष सुविधाओं के लिए धन्यवाद किया और उनसे पूछा कि उन्होंने अपने निजी सचिव के रूप में उनके नाम की घोषणा क्यों की?
वलबंत ने कहा कि यह तुम्हारे शोध कार्य में उसकी मदद करेगा क्योंकि निजी सचिव का काम करते समय उसे बहुत सारे काम संभालने होते हैं चुनाव कार्य जो उसे चुनाव प्रणाली का अध्ययन करने में मदद करेगा।
पायल ने फिर से बलवंत को धन्यवाद दिया और अपना सामान कमरे में शिफ्ट करना शुरू कर दी ।
दिन बहुत लंबा था और वलबंत ने कई स्थानों पर भाषण दिए. इस दौरान पायल यह नोटिस कर रही थी कि वलबंत जनता के बीच बहुत लोकप्रिय था. वह जहाँ भी रुकता था, वहां लोगों का एक बड़ा जमावड़ा हो रहा था।
बातचीत में दौरान कभी-कभी वलबंत पायल को उसके नाम से पुकार रहा था और इस दौरान उसने पायल को एकबार भी छूने के कोशिश नहीं की।
क्योंकि वलबंत एक मंझा हुआ औरतखोर था और इस मामले में पायल तो उसके लिए एक आसान शिकार थी । परन्तु वो बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था। उसे अपनी काम कला पर पूरा भरोसा था कि उसके कार्यकलापों की वजह से पायल अपने आप उसके लौड़े के नीचे आ जाएगी। और वह रात का इंतजार कर रहा था जिसके लिए उसने रात में करीब 10.30 बजे योजना बनाई थी।
रात के खाने की अच्छी व्यवस्था बस में ही की गई थी. रात के खाने के बाद बस का ड्राइवर अंदर आया और बलवंत से कहा- साहब आप आज के व्यस्त दिन की वजह से बहुत थक गए होंगे. मालिश के लिए मालिश वाला आया है, आप अपने बैडरूम में जाकर अच्छे से मालिश करवा कर तरोताज़ा हो जाएँ. कल का दिन आज से भी अधिक व्यस्त है।
बलवंत ने कहा- ठीक है, मालिश करने वाले को भेजो।
यह कहकर अपने बैडरूम में चला गया और पायल बर्तन समेटने में ड्राइवर की मदद करने लगी।
तभी अचानक पायल एक किशोर युवती को बस में चढ़ते देखकर ठिठक गई। पायल के हावभाव समझकर ड्राइवर ने बताया- यही लड़की साहब की मालिश करेगी।
ये सुनकर पायल को एक झटका सा लगा. वह लड़की पायल से भी साल दो साल छोटी थी।
पायल इतनी भी मासूम नहीं थी कि ये ना समझ सके कि वो लड़की बलवंत की किस तरह की मालिश करने वाली है। पायल यह सोच कर रोमांचित हो उठी कि उसका बैडरूम बिल्कुल बगल में ही है।
जब उस लड़की ने बलवंत के बैडरूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया तो पायल का दिल तेजी से धड़कने लगा। तेजी से धड़कते दिल के साथ पायल भी बेडरूम में अपने बिस्तर पर आ गई।
वह रात की खामोशी में यह सुनने की कोशिश कर रही थी कि बलवंत उस मासूम कमसिन कली लड़की के साथ क्या कर रहा था।
कुछ मिनटों के बाद उसने बलवंत के बेडरूम से हल्की-हल्की आवाज़ सुनी, उसने अंदाजा लगाया कि ये बलवंत के करहाने और सिसकारियों की आवाजें थी।
कुछ देर के बाद बलवंत के करहाने और सिसकारियों की आवाज़ बंद हो गई। फिर कुछ खटर-पटर की आवाजों के बाद उस लड़की की कराहटें और सिसकारियों की आवाजें आने लगी और कुछ समय बाद उसे लगा कि बस में झटके लग रहे हैं. अब उसे यकीन था कि दूसरे कमरे में क्या हो रहा है. वह इतनी भी मासूम नहीं थी कि उस कमरे में बलवंत और उस लड़की के बीच क्या हो रहा है
वह जानती है कि अब शुरुआत में उस लड़की से मालिश करवाने के बाद अब बलवंत उस लड़की की मालिश कर उसे कली से फूल बनाने में लगा हुआ है।
पायल से कुछ ही मीटर की दूरी पर होने के कारण यह सब हो रहा था. यही सोच सोच कर पायल का बुरा हाल था, उसके शरीर में अजीब सी संवेदनाएं महसूस होने लगीं, उसे लगा कि उसके निप्पल सख्त हो गए हैं और उसकी कुंवारी कच्ची चूत से कुछ गीला चिपचिपा पदार्थ निकलकर चड्डी को अपने रस में सराबोर कर रही थी।
जब पायल ने अपने निप्पलों को छुआ तो उसे और सनसनी हुई. फिर वह अपनी चूत के पास पहुँची और जब उसने चूत छुआ तो उसे एक नई सनसनी मिली, जिसका उसे कभी अनुभव नहीं था, लेकिन वह अभी भी इतनी मासूम थी कि उसे नहीं पता कि आगे क्या करना है. उसे पता नहीं था हस्तमैथुन कैसे करें।
वह बस दूसरे कमरे से आने वाली आवाज़ों को सुनती रही. उसने देखा कि मालिश करने वाली लड़की की कराहने की आवाज़ बहुत तेज़ हो गई है. लगभग 20 मिनट बीत चुके हैं लेकिन बस फिर भी झटके खा रही है. और 5 मिनट के बाद उसने बलवंत की एक बैल की तरह तेज़ आवाज़ सुनी. पायल को पता नहीं कि बलवंत को क्या हुआ है ? . उसने यह देखा कि बस ने अब झटके लेना बंद कर दिया है, वह चुप्पी थी, पायल भी थक गई थी इसलिए सो गई।
आधी रात में उसे फिर लगा कि बस में फिर से झटके आ रहे हैं और उस लड़की की फिर से करहाने की आवाज़ आ रही है.
उसने अपनी घड़ी में देखा तो सुबह के 4 बज रहे थे. वह हैरान थी कि यह आदमी क्या कर रहा है. वो उस लड़की को ऐसे चोद रहा है जैसे ये उसकी जिंदगी का आखिरी दिन और आखिरी लड़की हैं . उसने अंदाज़ लगाया कि ये बलवंत का पांचवा या छठा राउंड होगा। पायल को उस कमसिन मासूम सी लड़की पर बहुत दया आ रही थी।
फिर से उसने बलवंत के मुँह से एक जोर की आवाज़ सुनी और कुछ 10 मिनट के बाद उसने बेडरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनी. उसने अंदाजा लगाया कि अब वो लड़की वापस जा रही होगी।
उसने खिड़की से आँखें सटा कर बाहर झाँका और अँधेरे में उस मासूम लड़की को लड़खड़ाते हुए जाते देखा।
तभी बाथरूम में कुछ आहट सुनकर पायल चुपचाप लेट गई।
बलवंत ने बाथरूम की लाईट जला ली। हल्की सी झिरी से बलवंत का कला भुसन्ड लंड झलक रहा था.
उत्तेजना के मारे पायल का सारा शरीर कांपने लगा, उसकी चूचियों की निप्पल सख्त होकर अकड़ गई और उसकी कुंवारी कोमल चूत अनायास ही भरभरा कर उसकी चड्डी को फिर से गीली करने लगी।
बाथरूम से बलवंत के मूतने की तड़ तड़ की जोरदार आवाज़ आ रही थी। बलवंत जानबूझ कर कमोड के पानी के अंदर मूत की धार छोड़ कर पायल को गर्म कर रहा था।
उसे यकीन था कि उसकी पायल रानी जग रही होगी और ये सब सुनकर उसके जवान शरीर की जवान उमंगें कुलाचें भर रही होंगी।
औरतखोर बलवंत धीरे धीरे पायल को मन ही मन अपने लंड सेवा के लिए तैयार कर रहा था।
अब पायल समझ चुकी थी कि बलवंत कुंवारा होने के बावजूद अपनी हवस कैसे शांत कर रहा था। पायल का नजरिया बलवंत के प्रति पूर्णतया बदल चुका था।
पायल सुबह 6 बजे उठी और दोनों बेडरूम के बीच स्थित इनबिल्ट कॉमन टॉयलेट में घुस गई. उसने देखा कि बलवंत के बेडरूम की दरवाजे की झिरी से हल्की हल्की रोशनी आ रही है. इसका मतलब बलवंत ने अपनी कमरे के दरवाजे का पुरी तरह कुण्डी नहीं लगाई है।
पायल बिना कोई शोर किए दरवाजे के पास चली गई और कुछ साहस जुटाकर बलवंत के कमरे में झाँका तो उसके बदन को जोरदार झटका लगा. उसने देखा कि बलवंत पीठ के बल सो रहा है। उसका काला शरीर पर तेल लगा होने की वजह से चमक रहा है. उसकी टांगों के बीच अजगर के आकार का काला मोटा लौड़ा , जो मुरझाने के बावजूद अच्छे अच्छे मर्दों को शर्माने पर मजबूर कर दे, नजर आ रहा है। लौड़े के नीचे सेब के आकर के टट्टे नजर आ रहे थे सफ़ेद चादर पर कई जगह लाल लाल धब्बे पड़े हुए थे काले लौड़े पर भी लाल धब्बे होने की वजह से वो बैंगनी नजर आ रहा था।
ये नजारा देखकर पायल का हल्क सूख गया और उसने झट से पीछे हटते कांपते हाथों से दरवाजा बंद किया।
बलवंत जो कि सोने का नाटक कर रहा था समझ चुका था कि कबूतरी ने दाना चुग लिया है. अब दिल्ली दूर नहीं!
और अपने लौड़े पर हाथ फेरते हुए उसे बोला- तैयार हो जा साले … इस कबूतरी की कुंवारी चूत का मीठा रस तुझे एक आध दिन में नसीब होने वाला है।
यह दृश्य अभी भी पायल की आँखों के सामने ताजा है क्योंकि उसने पहली बार लौड़े को देखा था और वह भी बहुत बड़ा था. लेकिन वह बेडशीट पर लाल रंग के बारे में भी सोच रही थी. उसे इतनी समझ नहीं थी कि ये लाल रंग चादर और बलवंत के लौड़े पे कहाँ से लगा।
सुबह जब पायल उठी तो सुबह के 8 बज रहे थे, वह जल्दी से अपनी दिनचर्या से गुजरकर जब वह अपने कमरे से बाहर आई.
बलवंत अपना नाश्ता कर रहा था.
गुड मॉर्निंग कहकर बलवंत ने उसका अभिवादन किया और उसे नाश्ते के लिए आमंत्रित किया. पायल उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी. उसने देखा कि बलवंत के चेहरे पर आज एक अजीब सी मुस्कान है, वह इसके पीछे का कारण समझ रही थी।
नाश्ता खत्म करने के बाद बलवंत ने अपने कर्मचारियों को टूर शुरू करने का आदेश दिया। दिन के दौरान पायल ने देखा कि हालांकि बलवंत का व्यवहार सामान्य था लेकिन जब भी वह उसकी आँखों में देखता है तो उसके चेहरे पर वही अजीब सी मुस्कान आ जाती है।
दिन बीत गया।
कुछ देर आराम करने के बाद रात के खाने का ऑर्डर दिया गया और दोनों ने अपना डिनर शुरू कर दिया.
रात के खाने के बाद पायल को अनुमान था कि ड्राइवर मालिश वाली लड़की के साथ आएगा और बलवंत फिर से उस लड़की को मसाज आदि के लिए अपने कमरे में ले जाएगा.
लेकिन कुछ इंतज़ार के बाद ड्राइवर ने कहा- सर, आज दूसरी मालिश वाली आई है और सर, ये थोड़ी अनाड़ी है. पर आप किसी तरह काम चला लो! ये कहकर वो चला गया.
इधर बलवंत पायल की ओर हवस भरी मुस्कराहट से देखता हुआ अपने बैडरूम में चला गया।
पायल वहीं रुककर उस मालिश वाली लड़की को देखना चाहती थी. कुछ ही देर के बाद पायल ये देख कर हैरान रह गई कि एक बिल्कुल ही मासूम 18-19 साल की लड़की ने पायल से पूछा- मैडम आपकी मालिश करनी है क्या?
पायल सकपका कर बलवंत के बैडरूम की ओर इशारा करते हुए बोली- नहीं, वहां जाओ, वहां नेताजी की करनी है।
वो मासूम कातर निगहों से पायल को देखती हुई बलवंत के बैडरूम में चली गई।
पायल चुपचाप अपने कमरे में आ गई और ख़ामोशी से बगल वाले कमरे की दीवार पर कान लगा कर सुनने लगी। कल ही की तरह कुछ खटर पटर के बाद बलवंत की सिसकारियां और लड़की के मुंह से अजीब से गुं गुं की आवाजें आने लगी. फिर कुछ देर की उठा पटक के बाद उस लड़की की जोरदार चीख सुनाई दी, उसके बाद उस लड़की के घुटी घुटी सी आवाजें आने लगी।
अब बस कल ही की भांति जोर जोर से झटके लेने लगी थी। करीब 10 मिनट के बाद लड़की घुटी घुटी चीखें जोरदार सिसकारियों में बदल चुकी थी. करीब आधा घंटे तक बस हिलती रही. उसके बाद बलवंत ने बैल की तरह जोरदार आवाज मारी और फिर सबकुछ शांत हो गया।
पायल का सारा शरीर उत्तेजना के मारे बुरी तरह काँप रहा था, उसका रोयां रोयां खड़ा था, हलक सूख चुका था, चूचियां कड़क हो गई थी. उनकी घुंडियां शर्ट फाड़कर बाहर आना चाह रही थी. पायल की चूत से भयानक बहाव के कारण चड्डी पूरी गीली हो गई थी। पायल की हालत सूखी जमीन पर पड़ी मछली जैसी हो गई थी. उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह उसे क्या हो गया है, ये कैसी खुमारी चढ़ गई है।
पायल चुपचाप लेटकर अपने आप को शांत करते हुए सोने का प्रयास करने लगी।
अभी पायल को नींद आने ही वाली थी कि बस फिर हिलने लगी. लड़की की जोरदार सिसकारियां सुनाई देने लगी थी. पायल ने भी तुरंत अपना शर्ट ऊपर कर लिया और अपनी सख्त चूचियों पर हाथ फेरने लगी और जैसे ही पायल ने गलती से अपने चूचुक उँगलियों में पकड़े, उसके शरीर में एक झटका सा लगा और वह अत्यधिक उत्तेजित हो गई.
ये उसके लिए बिल्कुल नया अनुभव था. अनायास ही उसका एक हाथ चड्डी के अंदर चला गया.पायल को सफाई पसंद होने की वजह से अपने झांट साफ़ करके रखती है, उसने टूर से एक दिन पहले ही अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे.
चड्डी के अंदर हाथ जाते ही वो पहली बार अपनी गीली सफाचट चूत पर हाथ फिराने लगी. और जैसे ही पायल की उँगलियाँ गलती से चूत की भगनासा से टकराई, अचानक उसके पूरे शरीर में तूफ़ान सा आ गया और उसका पूरा शरीर सूखे पत्ते की तरह कांपने लगा.
पायल की जान सी निकल गई. इतना सुखद अनुभव पायल को 22 साल की जिंदगी में आज तक नहीं हुआ था. पूरे शरीर पर बेहोशी सी छा गई.
![[Image: RDT-20260921-1006182055382379758931159.png]](https://i.ibb.co/mrMrsFMD/RDT-20260921-1006182055382379758931159.png)
![[Image: RDT-20260921-1008322850631619189495740.webp]](https://i.ibb.co/tP8Yn8kx/RDT-20260921-1008322850631619189495740.webp)
मैं पायल ( काजल की बेटी ) एकबार फिर आप लोग के बीच उपस्थित हुं एक नई घटनाएं के साथ।
...............................
मम्मी के साथ हुऐ घटना को दो साल बीत चुके थे। उस 'घटना' के बाद के दो साल बहुत अजीब तरीके से बीते थे। मैं अपनी प्यारी मम्मी को एक कामुक प्राणी के रूप में देखने से खुद को रोक नहीं पा रही थी । उनके चिकने नग्न शरीर की छवियाँ, उनके साथ यौन संबंध बनाते हुए दृश्य, जिस तरह उन्होंने अपने बलात्कारी के सामने अपनी गांड खोली थी, जिस तरह उन्होंने उसका लंड चूसी थी , जिस तरह उन्होंने उसे चूमी थी और अपनी सुंदर टांगें उसकी कमर के चारों ओर लपेटी थीं, यहाँ तक कि बार-बार चरम सुख प्राप्त करते समय उनकी आहें और चीखें भी, सब कुछ मेरे दिमाग में हमेशा के लिए अंकित हो था। मैं मम्मी की तरफ ख़ुद को दिखाने से बचती थी । इस लिए मैं पापा को बिना बताए ( यह बात सिर्फ मम्मी को पता थी ) अपनी राजनीति विज्ञान की छूटी हुई पढ़ाई पुरी करने के लिए मीना बाजार से बिलासपुर के मंडी बाज़ार पहुंची। मंडी बाज़ार के " मांझी विश्वविद्यालय " पहुंची । वहां पहुंचने पर राजनीतिक विज्ञान के विख्यात प्रोफ़ेसर के द्वारा मुझे एमए की डिग्री हासिल करने के लिए भारतीय यूनियन व्यवस्था में आपराधिक तत्वों के बढ़ते प्रभाव पर एक थीसिस लिखने को निर्देश मिला ।
संयोग से उस समय 10 वीं यूनियन नेता के लिए चुनावों के प्रचार प्रसार चालू हो चुकी थी। उस चुनाव के दौरान एक उम्मीदवार यूनियन नेता बलवंत चौधरी से मैं मिली और उनसे आदेश ली उसके कार्यकलापों का अध्ययन करने और थीसिस लिखने के लिए उनके साथ रहने को । उन्होंने मुझे अनुमति दे दी।
बलवंत चौधरी एक सीट से यूनियन चुनाव लड़ रहे थे । वह पिछले तीन बार से जीते आ रहे थे और इस बार चौथी बार भी उसी सीट पर चुनाव लड़ने जा रहे थे।
मुझे बलवंत चौधरी में विशेष रुचि का कारण यह था की वह 20 साल पहले एक प्रसिद्ध अपराधी था, उसने बहुत सारे जघन्य अपराध किए थे और बाद में चुनाव लड़ कर राजनीति में आ गया.
और लोग कहते हैं कि उसने अपना पूरा जीवन गरीब लोगों की सेवा के लिए लगा दिया.
मेरे शोध के दौरान मुझे पता चला कि उसके निर्वाचन क्षेत्र के सामान्य लोग उससे बहुत खुश थे और कोई भी उसके खिलाफ नहीं बोलते थे ।
............….........................…...
एक शाम को लगभग चार बजे पायल बलवंत के कार्यालय पहुंची. उसे बलवंत के कार्यालय के बाहर लगभग 15 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़ी. तब चपरासी ने उसे अंदर जाने के लिए कहा.
जब वह कार्यालय में दाखिल हुई तो वहां कोई नहीं था इसलिए वह खुद खाली पड़ी कुर्सी पर बैठ गई।
4-5 मिनट के बाद भव्य व्यक्तित्व वाला एक विशाल व्यक्ति संलग्न शौचालय से बाहर आया और खुद का बलवंत चौधरी के रूप में परिचय दिया- " मुझे माफ करना मैडम, आपको इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, आप जानते हैं कि ये चुनाव के दिन हैं और चुनाव के लिए बहुत कम समय बचा है और मैं अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हुं " । और इसी बीच बलवंत चौधरी हाथ मिलाने की मुद्रा में हाथ पायल की ओर बढ़ाया।
पायल- ओह इट्स ऑल राइट, मुझे पता है कि आप एक बिजी आदमी हैं। सर , मुझे पता चला है कि आप एक चुनाव अभियान चला रहे हैं , इस चुनाव अभियान के दौरान आपके साथ रहना चाहती हूं, सर , मैं आपका बहुत आभारी रहूंगी अगर आप मुझे अपने अभियान पर साथ आने की अनुमति दें।
बलवंत चौधरी - अरे क्यों नहीं, मेरे व्यस्त कार्यक्रम के दौरान इतनी सुंदर लड़की का साथ रहना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात होगी।
पायल - थैंक यू सर, लेकिन आप अपना टूर कब शुरू करेंगे। मुझे पता है कि आप एक बिजी आदमी हैं।
बलवंत चौधरी - यह कल सुबह से होगा, और सुनो जैसा कि तुम्हे पता होगा कि मेरा निर्वाचन क्षेत्र बहुत बड़ा है, यात्रा कम से कम 15 दिनों के लिए होगी और आपको अपना सारा रोज़मर्रा का सामान और अतिरिक्त कपड़े वगैरह साथ ले लेना।
पायल - ओके सर , मैं कल सुबह यहाँ आ जाऊँगी। अब मुझे निकलना होगा क्योंकि बहुत सारी पैकिंग करनी है, धन्यवाद सर।
( जब पायल कमरे से बाहर निकल रही थी तो बलवंत उसकी पीछे से मटकती हुई गांड को देख रहा था और सोच रहा था कि इतनी कमसिन नाजुक कच्ची कली जैसे लड़की के साथ चुनाव प्रचार का अलग ही मज़ा आएगा और उसने योजना बनानी शुरू कर दी कि वह उसे कैसे फुसलाने वाला है क्योंकि वह उसके साथ कोई जोर आजमाईश करने के मूड में कतई नहीं था. इसके विपरीत वह धीरे धीरे प्यार से पटाकर पायल की मर्ज़ी से उसकी कुंवारी अनचुदी चूत का उद्धघाटन करने की फ़िराक में था )
ये सोचते सोचते बलवंत चौधरी के 8 इंची विशाल लंड में जबरदस्त तनाव आ गया और उसने तुरंत अपने ऑफिस की महिला चपरासी को बुला कर उसके मुँह में अपना लंड ठूंस दिया. और कुछ ही मिनटों में सारा माल उसके मुँह में छोड़कर दिया ।
आज महिला चपरासी भी हैरान थी कि यह हैवान इतनी जल्दी कैसे झड़ गया क्योंकि वह जानती थी कि ये साँड एक बार शुरू होने के बाद कम से कम एक घंटे तक उसकी चूत के परखच्चे उड़ा देता था।
उस महिला चपरासी ने बलवंत और पायल की बातें बाहर बैठकर सुनी थी। उसे मन ही मन उसकी होने वाली जबरदस्त चुदाई के बारे में सोचकर उस बेचारी पायल पर दया आ रही थी। वह समझ चुकी थी कि 15 दिनों के चुनाव प्रचार के दौरान पायल की कुंवारी चूत की धज्जिया उजाड़ कर उसका भोसड़ा बना देगा।
उधर दूसरी तरफ कमरे से बाहर निकलने के बाद पायल वलवंत के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुई. विशेषकर उसकी आँखों और उनकी आवाज़ दोनों में गहराई थी. और पहली मुलाकात में उन्हें किसी भी शरीर को आकर्षित करने में सक्षम था.
इसलिए उसने सोचा की शायद इन्ही खूबियों के कारण एक वलबंत अपराधी होने के बावजूद वह जनता के बीच में इतना लोकप्रिय था।
अगले दिन पायल जल्दी उठ गई और अपने बैग और सामान के साथ किराया के घर से वलबंत के कार्यालय पहुंच गई।
बलवंत चौधरी के कार्यालय के बाहर बहुत सारी गतिविधियाँ चल रही थीं क्योंकि वलवंत ने अपने चुनाव अभियान को शुरू करने के लिए एक समारोह की योजना बनाई थी और मीडिया के बहुत से लोगों को इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए आमंत्रित किया था।
पायल जब कार्यालय पहुंची तो महिला चपरासी ने उसे पहचान लिया और उससे कहा कि वह कुर्सियों की अग्रिम पंक्ति में बैठ जाए क्योंकि एक बड़ी सभा थी और वलवंत एकत्रित लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाला है।
अचानक लोगों ने वलबंत भाई जिन्दाबाद, जीतेगा भाई वलवंत भाई जीतेगा आदि चिल्लाना शुरू कर दिया।
बलवंत का भव्य स्वागत हुआ. वह पोडियम पर पहुँचा, जहां उसे बहुत सारे बड़े व्यापारी और अन्य लोग माला पहना रहे थे।
पायल सामने वाली कतार में ही बैठी थी, बलवंत ने उसे देखते ही पहचान लिया और इशारा करके मंच पर ही बुला लिया और मंच पर लगी कुर्सियों में से एक पर बैठने को कहा।
पायल अपनी इस इज्जत अफजाई पर अत्यंत प्रसन्न हुई।
फिर बलवंत ने अपने भाषण की शुरुआत अपनी गहरी आवाज से की और लोगों को अपने पिछले कार्यकालों के दौरान किए गए विकास कार्यों और पिछले अभियान के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के बारे में बताया।
भाषण के अंत में उसने विभिन्न लोगों के नाम का उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी बनाया था.
तभी उसने अचानक पायल का नाम लिया और कहा कि " मिस पायल इस अभियान के लिए मेरी निजी सचिव होंगी। "
एकदम सभी लोगों ने पायल को देखा और पायल इस अचानक मिली तवज्जो से गदगद हो गई. सभी मीडिया कैमरा पायल पर थे और वह इस सब से अभिभूत थी।
इधर बलवंत का सारा ध्यान पायल की चड्डी में छुपी चूत रानी पर था।
जब वाहनों का काफिला रवाना हुआ बलवंत ने पायल को कहा- तुम मेरे साथ मेरे विशेष रूप से तैयार की गई वॉल्वो बस में मेरे साथ ही रहोगी।
उस बस की छत में एक सुराख़ बना था जिसका इस्तेमाल बलवंत ने प्रचार के दौरान बस में लगी लिफ्ट पर खड़ा होकर भाषण इत्यादि के लिए प्रयोग करना था।
इसके अतिरिक्त उस बस में पीछे की और दो कमरे बने थे जिनके मध्य में एक कॉमन टॉयलेट था। आगे की ओर मुलाकातों के लिए एक लॉबी थी और बीच में एक और किचन और एक और डाइनिंग एरिया था। ड्राइवर केबिन और पीछे के हिस्से के बीच गिलास पार्टीशन था। पूरी बस वातानुकूलित थी।
बलवंत चौधरी ने पायल से कहा कि वह अपना सामान एक वह कमरा जो बस के पीछे की तरफ है, में स्थानांतरित कर दे. चूंकि उनका निर्वाचन क्षेत्र बहुत पिछड़ा हुआ है और अभियान के दौरान रहने के लिए कोई रेस्टहाउस या होटल नहीं हैं, इसलिए यह व्यवस्था की गई है.
पायल ने बलवंत चौधरी को उसे दी जा रही विशेष सुविधाओं के लिए धन्यवाद किया और उनसे पूछा कि उन्होंने अपने निजी सचिव के रूप में उनके नाम की घोषणा क्यों की?
वलबंत ने कहा कि यह तुम्हारे शोध कार्य में उसकी मदद करेगा क्योंकि निजी सचिव का काम करते समय उसे बहुत सारे काम संभालने होते हैं चुनाव कार्य जो उसे चुनाव प्रणाली का अध्ययन करने में मदद करेगा।
पायल ने फिर से बलवंत को धन्यवाद दिया और अपना सामान कमरे में शिफ्ट करना शुरू कर दी ।
दिन बहुत लंबा था और वलबंत ने कई स्थानों पर भाषण दिए. इस दौरान पायल यह नोटिस कर रही थी कि वलबंत जनता के बीच बहुत लोकप्रिय था. वह जहाँ भी रुकता था, वहां लोगों का एक बड़ा जमावड़ा हो रहा था।
बातचीत में दौरान कभी-कभी वलबंत पायल को उसके नाम से पुकार रहा था और इस दौरान उसने पायल को एकबार भी छूने के कोशिश नहीं की।
क्योंकि वलबंत एक मंझा हुआ औरतखोर था और इस मामले में पायल तो उसके लिए एक आसान शिकार थी । परन्तु वो बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था। उसे अपनी काम कला पर पूरा भरोसा था कि उसके कार्यकलापों की वजह से पायल अपने आप उसके लौड़े के नीचे आ जाएगी। और वह रात का इंतजार कर रहा था जिसके लिए उसने रात में करीब 10.30 बजे योजना बनाई थी।
रात के खाने की अच्छी व्यवस्था बस में ही की गई थी. रात के खाने के बाद बस का ड्राइवर अंदर आया और बलवंत से कहा- साहब आप आज के व्यस्त दिन की वजह से बहुत थक गए होंगे. मालिश के लिए मालिश वाला आया है, आप अपने बैडरूम में जाकर अच्छे से मालिश करवा कर तरोताज़ा हो जाएँ. कल का दिन आज से भी अधिक व्यस्त है।
बलवंत ने कहा- ठीक है, मालिश करने वाले को भेजो।
यह कहकर अपने बैडरूम में चला गया और पायल बर्तन समेटने में ड्राइवर की मदद करने लगी।
तभी अचानक पायल एक किशोर युवती को बस में चढ़ते देखकर ठिठक गई। पायल के हावभाव समझकर ड्राइवर ने बताया- यही लड़की साहब की मालिश करेगी।
ये सुनकर पायल को एक झटका सा लगा. वह लड़की पायल से भी साल दो साल छोटी थी।
पायल इतनी भी मासूम नहीं थी कि ये ना समझ सके कि वो लड़की बलवंत की किस तरह की मालिश करने वाली है। पायल यह सोच कर रोमांचित हो उठी कि उसका बैडरूम बिल्कुल बगल में ही है।
जब उस लड़की ने बलवंत के बैडरूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया तो पायल का दिल तेजी से धड़कने लगा। तेजी से धड़कते दिल के साथ पायल भी बेडरूम में अपने बिस्तर पर आ गई।
वह रात की खामोशी में यह सुनने की कोशिश कर रही थी कि बलवंत उस मासूम कमसिन कली लड़की के साथ क्या कर रहा था।
कुछ मिनटों के बाद उसने बलवंत के बेडरूम से हल्की-हल्की आवाज़ सुनी, उसने अंदाजा लगाया कि ये बलवंत के करहाने और सिसकारियों की आवाजें थी।
कुछ देर के बाद बलवंत के करहाने और सिसकारियों की आवाज़ बंद हो गई। फिर कुछ खटर-पटर की आवाजों के बाद उस लड़की की कराहटें और सिसकारियों की आवाजें आने लगी और कुछ समय बाद उसे लगा कि बस में झटके लग रहे हैं. अब उसे यकीन था कि दूसरे कमरे में क्या हो रहा है. वह इतनी भी मासूम नहीं थी कि उस कमरे में बलवंत और उस लड़की के बीच क्या हो रहा है
वह जानती है कि अब शुरुआत में उस लड़की से मालिश करवाने के बाद अब बलवंत उस लड़की की मालिश कर उसे कली से फूल बनाने में लगा हुआ है।
पायल से कुछ ही मीटर की दूरी पर होने के कारण यह सब हो रहा था. यही सोच सोच कर पायल का बुरा हाल था, उसके शरीर में अजीब सी संवेदनाएं महसूस होने लगीं, उसे लगा कि उसके निप्पल सख्त हो गए हैं और उसकी कुंवारी कच्ची चूत से कुछ गीला चिपचिपा पदार्थ निकलकर चड्डी को अपने रस में सराबोर कर रही थी।
जब पायल ने अपने निप्पलों को छुआ तो उसे और सनसनी हुई. फिर वह अपनी चूत के पास पहुँची और जब उसने चूत छुआ तो उसे एक नई सनसनी मिली, जिसका उसे कभी अनुभव नहीं था, लेकिन वह अभी भी इतनी मासूम थी कि उसे नहीं पता कि आगे क्या करना है. उसे पता नहीं था हस्तमैथुन कैसे करें।
वह बस दूसरे कमरे से आने वाली आवाज़ों को सुनती रही. उसने देखा कि मालिश करने वाली लड़की की कराहने की आवाज़ बहुत तेज़ हो गई है. लगभग 20 मिनट बीत चुके हैं लेकिन बस फिर भी झटके खा रही है. और 5 मिनट के बाद उसने बलवंत की एक बैल की तरह तेज़ आवाज़ सुनी. पायल को पता नहीं कि बलवंत को क्या हुआ है ? . उसने यह देखा कि बस ने अब झटके लेना बंद कर दिया है, वह चुप्पी थी, पायल भी थक गई थी इसलिए सो गई।
आधी रात में उसे फिर लगा कि बस में फिर से झटके आ रहे हैं और उस लड़की की फिर से करहाने की आवाज़ आ रही है.
उसने अपनी घड़ी में देखा तो सुबह के 4 बज रहे थे. वह हैरान थी कि यह आदमी क्या कर रहा है. वो उस लड़की को ऐसे चोद रहा है जैसे ये उसकी जिंदगी का आखिरी दिन और आखिरी लड़की हैं . उसने अंदाज़ लगाया कि ये बलवंत का पांचवा या छठा राउंड होगा। पायल को उस कमसिन मासूम सी लड़की पर बहुत दया आ रही थी।
फिर से उसने बलवंत के मुँह से एक जोर की आवाज़ सुनी और कुछ 10 मिनट के बाद उसने बेडरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनी. उसने अंदाजा लगाया कि अब वो लड़की वापस जा रही होगी।
उसने खिड़की से आँखें सटा कर बाहर झाँका और अँधेरे में उस मासूम लड़की को लड़खड़ाते हुए जाते देखा।
तभी बाथरूम में कुछ आहट सुनकर पायल चुपचाप लेट गई।
बलवंत ने बाथरूम की लाईट जला ली। हल्की सी झिरी से बलवंत का कला भुसन्ड लंड झलक रहा था.
उत्तेजना के मारे पायल का सारा शरीर कांपने लगा, उसकी चूचियों की निप्पल सख्त होकर अकड़ गई और उसकी कुंवारी कोमल चूत अनायास ही भरभरा कर उसकी चड्डी को फिर से गीली करने लगी।
बाथरूम से बलवंत के मूतने की तड़ तड़ की जोरदार आवाज़ आ रही थी। बलवंत जानबूझ कर कमोड के पानी के अंदर मूत की धार छोड़ कर पायल को गर्म कर रहा था।
उसे यकीन था कि उसकी पायल रानी जग रही होगी और ये सब सुनकर उसके जवान शरीर की जवान उमंगें कुलाचें भर रही होंगी।
औरतखोर बलवंत धीरे धीरे पायल को मन ही मन अपने लंड सेवा के लिए तैयार कर रहा था।
अब पायल समझ चुकी थी कि बलवंत कुंवारा होने के बावजूद अपनी हवस कैसे शांत कर रहा था। पायल का नजरिया बलवंत के प्रति पूर्णतया बदल चुका था।
पायल सुबह 6 बजे उठी और दोनों बेडरूम के बीच स्थित इनबिल्ट कॉमन टॉयलेट में घुस गई. उसने देखा कि बलवंत के बेडरूम की दरवाजे की झिरी से हल्की हल्की रोशनी आ रही है. इसका मतलब बलवंत ने अपनी कमरे के दरवाजे का पुरी तरह कुण्डी नहीं लगाई है।
पायल बिना कोई शोर किए दरवाजे के पास चली गई और कुछ साहस जुटाकर बलवंत के कमरे में झाँका तो उसके बदन को जोरदार झटका लगा. उसने देखा कि बलवंत पीठ के बल सो रहा है। उसका काला शरीर पर तेल लगा होने की वजह से चमक रहा है. उसकी टांगों के बीच अजगर के आकार का काला मोटा लौड़ा , जो मुरझाने के बावजूद अच्छे अच्छे मर्दों को शर्माने पर मजबूर कर दे, नजर आ रहा है। लौड़े के नीचे सेब के आकर के टट्टे नजर आ रहे थे सफ़ेद चादर पर कई जगह लाल लाल धब्बे पड़े हुए थे काले लौड़े पर भी लाल धब्बे होने की वजह से वो बैंगनी नजर आ रहा था।
ये नजारा देखकर पायल का हल्क सूख गया और उसने झट से पीछे हटते कांपते हाथों से दरवाजा बंद किया।
बलवंत जो कि सोने का नाटक कर रहा था समझ चुका था कि कबूतरी ने दाना चुग लिया है. अब दिल्ली दूर नहीं!
और अपने लौड़े पर हाथ फेरते हुए उसे बोला- तैयार हो जा साले … इस कबूतरी की कुंवारी चूत का मीठा रस तुझे एक आध दिन में नसीब होने वाला है।
यह दृश्य अभी भी पायल की आँखों के सामने ताजा है क्योंकि उसने पहली बार लौड़े को देखा था और वह भी बहुत बड़ा था. लेकिन वह बेडशीट पर लाल रंग के बारे में भी सोच रही थी. उसे इतनी समझ नहीं थी कि ये लाल रंग चादर और बलवंत के लौड़े पे कहाँ से लगा।
सुबह जब पायल उठी तो सुबह के 8 बज रहे थे, वह जल्दी से अपनी दिनचर्या से गुजरकर जब वह अपने कमरे से बाहर आई.
बलवंत अपना नाश्ता कर रहा था.
गुड मॉर्निंग कहकर बलवंत ने उसका अभिवादन किया और उसे नाश्ते के लिए आमंत्रित किया. पायल उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी. उसने देखा कि बलवंत के चेहरे पर आज एक अजीब सी मुस्कान है, वह इसके पीछे का कारण समझ रही थी।
नाश्ता खत्म करने के बाद बलवंत ने अपने कर्मचारियों को टूर शुरू करने का आदेश दिया। दिन के दौरान पायल ने देखा कि हालांकि बलवंत का व्यवहार सामान्य था लेकिन जब भी वह उसकी आँखों में देखता है तो उसके चेहरे पर वही अजीब सी मुस्कान आ जाती है।
दिन बीत गया।
कुछ देर आराम करने के बाद रात के खाने का ऑर्डर दिया गया और दोनों ने अपना डिनर शुरू कर दिया.
रात के खाने के बाद पायल को अनुमान था कि ड्राइवर मालिश वाली लड़की के साथ आएगा और बलवंत फिर से उस लड़की को मसाज आदि के लिए अपने कमरे में ले जाएगा.
लेकिन कुछ इंतज़ार के बाद ड्राइवर ने कहा- सर, आज दूसरी मालिश वाली आई है और सर, ये थोड़ी अनाड़ी है. पर आप किसी तरह काम चला लो! ये कहकर वो चला गया.
इधर बलवंत पायल की ओर हवस भरी मुस्कराहट से देखता हुआ अपने बैडरूम में चला गया।
पायल वहीं रुककर उस मालिश वाली लड़की को देखना चाहती थी. कुछ ही देर के बाद पायल ये देख कर हैरान रह गई कि एक बिल्कुल ही मासूम 18-19 साल की लड़की ने पायल से पूछा- मैडम आपकी मालिश करनी है क्या?
पायल सकपका कर बलवंत के बैडरूम की ओर इशारा करते हुए बोली- नहीं, वहां जाओ, वहां नेताजी की करनी है।
वो मासूम कातर निगहों से पायल को देखती हुई बलवंत के बैडरूम में चली गई।
पायल चुपचाप अपने कमरे में आ गई और ख़ामोशी से बगल वाले कमरे की दीवार पर कान लगा कर सुनने लगी। कल ही की तरह कुछ खटर पटर के बाद बलवंत की सिसकारियां और लड़की के मुंह से अजीब से गुं गुं की आवाजें आने लगी. फिर कुछ देर की उठा पटक के बाद उस लड़की की जोरदार चीख सुनाई दी, उसके बाद उस लड़की के घुटी घुटी सी आवाजें आने लगी।
अब बस कल ही की भांति जोर जोर से झटके लेने लगी थी। करीब 10 मिनट के बाद लड़की घुटी घुटी चीखें जोरदार सिसकारियों में बदल चुकी थी. करीब आधा घंटे तक बस हिलती रही. उसके बाद बलवंत ने बैल की तरह जोरदार आवाज मारी और फिर सबकुछ शांत हो गया।
पायल का सारा शरीर उत्तेजना के मारे बुरी तरह काँप रहा था, उसका रोयां रोयां खड़ा था, हलक सूख चुका था, चूचियां कड़क हो गई थी. उनकी घुंडियां शर्ट फाड़कर बाहर आना चाह रही थी. पायल की चूत से भयानक बहाव के कारण चड्डी पूरी गीली हो गई थी। पायल की हालत सूखी जमीन पर पड़ी मछली जैसी हो गई थी. उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह उसे क्या हो गया है, ये कैसी खुमारी चढ़ गई है।
पायल चुपचाप लेटकर अपने आप को शांत करते हुए सोने का प्रयास करने लगी।
अभी पायल को नींद आने ही वाली थी कि बस फिर हिलने लगी. लड़की की जोरदार सिसकारियां सुनाई देने लगी थी. पायल ने भी तुरंत अपना शर्ट ऊपर कर लिया और अपनी सख्त चूचियों पर हाथ फेरने लगी और जैसे ही पायल ने गलती से अपने चूचुक उँगलियों में पकड़े, उसके शरीर में एक झटका सा लगा और वह अत्यधिक उत्तेजित हो गई.
ये उसके लिए बिल्कुल नया अनुभव था. अनायास ही उसका एक हाथ चड्डी के अंदर चला गया.पायल को सफाई पसंद होने की वजह से अपने झांट साफ़ करके रखती है, उसने टूर से एक दिन पहले ही अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे.
चड्डी के अंदर हाथ जाते ही वो पहली बार अपनी गीली सफाचट चूत पर हाथ फिराने लगी. और जैसे ही पायल की उँगलियाँ गलती से चूत की भगनासा से टकराई, अचानक उसके पूरे शरीर में तूफ़ान सा आ गया और उसका पूरा शरीर सूखे पत्ते की तरह कांपने लगा.
पायल की जान सी निकल गई. इतना सुखद अनुभव पायल को 22 साल की जिंदगी में आज तक नहीं हुआ था. पूरे शरीर पर बेहोशी सी छा गई.
![[Image: RDT-20260921-1006182055382379758931159.png]](https://i.ibb.co/mrMrsFMD/RDT-20260921-1006182055382379758931159.png)
![[Image: RDT-20260921-1008322850631619189495740.webp]](https://i.ibb.co/tP8Yn8kx/RDT-20260921-1008322850631619189495740.webp)


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)