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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
बाबाजी ने संतुष्ट मुस्कान के साथ मयूरी के वीर्य से सने चेहरे को देखा और धीरे से बोले, “ये सब साफ़ कर लो मयूरी… अपने चेहरे से… उँगलियों से समेटकर… और पूरा का पूरा पी जाओ। गुरु का प्रसाद है… तुम्हारे चेहरे पर रौनक आ जाएगी। और तुम्हे मेरा यह लंड जब चाहो तब तुम्हे प्रसाद देता रहेगा। मेरा यह प्रसाद किसी भी औरत के लिए अमृत सामान है।” मैत्री की प्रस्तुति।

मयूरी ने बिना किसी विरोध के, शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में अपनी उँगलियों से अपने गालों, ठोड़ी, नाक और होंठों पर फैले गाढ़े, सफेद रस को समेटना शुरू कर दिया। हर बार जब वह उँगलियाँ मुंह में डालकर चूसती, तो “सड़प… सड़प…” की गीली आवाजें निकलतीं। स्वाद थोड़ा खारा, थोड़ा मीठा और बेहद नशीला था। उसे खुद हैरानी हुई कि उसे ये स्वाद बुरा नहीं लग रहा था, बल्कि एक अजीब सी तृप्ति मिल रही थी।
 
जब उसका चेहरा लगभग साफ हो गया, तो बाबाजी ने पूछा,
 
“बोलो… कैसा लगा मयूरी?”
 
मयूरी ने शर्म से आँखें झुकाते हुए, लेकिन पूरी ईमानदारी से कहा,
 
“अच्छा था बाबाजी… मतलब… बहुत अच्छा था। मैंने आज तक इस बारे में सोचा भी नहीं था। पर… मुझे ये करना भी पसंद आया और… इसका स्वाद भी। आगे से मैं ऐसा करती रहूंगी बाबाजी।”
 
उसकी आवाज में अब पहले से ज्यादा खुलापन आ चुका था। वह बाबाजी के लंड और उनके वीर्य की तारीफ करते हुए थोड़ा-थोड़ा खुल रही थी।
 
बाबाजी मुस्कुराए और बोले,
 
“ये तो बहुत अच्छी बात है। अब ठीक इसी तरह तुम्हें गोपाल के घोड़े को भी अपने मुंह का हुनर दिखाना है। और फिर शायद वो भी तुम्हारी बिल्ली का दूध पीने के लिए तैयार हो जाए।”
 
मयूरी ने एक गहरी साँस ली। उसकी आवाज अब भारी और थरथराती हुई थी,
 
“मेरी बिल्ली का दूध वो कभी नहीं पियेंगे बाबाजी… शुरू-शुरू में एक-दो बार उन्होंने वहाँ चुम्बन तो दिया था… लेकिन उससे आगे कभी नहीं बढ़े। और सच कहूँ तो… मुझे हमेशा से ही ये चाहत रही है कि कोई… मतलब गोपाल… मेरी चूत वाले हिस्से को जी भरकर प्यार करे… चूमे… चाटे…”
 
ये बोलते-बोलते मयूरी की आवाज़ पूरी तरह से भारी हो गई। उसकी साँसें तेज हो रही थीं और उसकी जाँघें आपस में हल्के से रगड़ रही थीं। उत्तेजना अब उसके पूरे शरीर पर हावी होती जा रही थी। संपादिका फनलवर है।
 
बाबाजी ने उसी शैतानी अंदाज में कहा,
 
“वो नहीं करता तो कोई बात नहीं… मैं हूँ ना। मैं कर दूंगा तुम्हारी बिल्ली को वैसे भी मेरा यह घोडा खाने को बेताब रहता है।”
 
मयूरी इस बात का इंतजार ही कर रही थी। वह कुछ नहीं बोली। बस चुपचाप, मूक सहमति में बैठी रही। उसकी आँखें झुकी हुई थीं, लेकिन शरीर की हर हरकत बता रही थी कि वह तैयार है।
 
बाबाजी ने गंभीर स्वर में कहा,
 
“अब खड़े हो जाओ मयूरी… और अपने सारे कपड़े उतार दो। सारे के सारे।”
 
मयूरी किसी मंत्रमुग्ध की तरह उठ खड़ी हुई। उसने पहले पीली सूट की कमीज पकड़ी और एक झटके में ऊपर खींच दी। क्योंकि ब्रा नहीं पहनी थी, उसके दोनों भरे-भरे, गोल, दूधिया मुम्मे उछलकर बाबाजी की आँखों के सामने नाचने लगे। उन पर गुलाबी निप्पल पूरी तरह सख्त होकर खड़े थे।
 
फिर उसने पायजामी की इलास्टिक पकड़ी और उसे धीरे-धीरे नीचे खिसका दिया। अब सामने थी उसकी सफेद, फूल वाली कच्छी, जो पूरी तरह भीग चुकी थी। काम रस छन-छन कर कच्छी के कपड़े से बाहर रिस रहा था और उसकी जाँघों पर चमकदार निशान छोड़ रहा था।
 
बाबाजी ने इशारा किया। मयूरी ने उनकी आँखों में देखते हुए कच्छी को भी नीचे उतार दिया।
 
जैसे ही कच्छी उसके पैरों से उतरी, बाबाजी की नजरें उसकी चूत पर जाकर अटक गईं। वहाँ घना, काला जंगल था। सतपुड़ा के घने जंगलों जैसा घना और अनछुआ।
 
बाबाजी कुछ पल तक देखते रहे, फिर बोले,
 
“ये क्या मयूरी… तुमने अपने शरीर के सबसे सुंदर और नाजुक हिस्से को इन घने बालों के पीछे छुपा रखा है? इस तरह तो कोई भी यहाँ मुंह नहीं मार पाएगा।”
 
ये बात सुनकर मयूरी का दिल एक पल के लिए बैठ गया। उसकी आँखों में हल्का सा दर्द और शर्म उभर आई।
 
बाबाजी ने तुरंत उसकी भावना समझ ली और प्यार से बोले,
 
“मेरा मतलब ये नहीं है कि तुम्हारी चूत खराब है। बल्कि ये है कि तुम्हें इसे साफ़-सुथरा, बिल्कुल नंगा और मुलायम रखना चाहिए। जैसे तुम्हारे होंठ नरम और गुलाबी हैं, ठीक वैसे ही ये भी हैं। लेकिन इन घने झांटो की वजह से वो नरमी और कोमलता पूरी तरह महसूस नहीं हो पाएगी। समझी? हर औरत या लड़की को अपनी चूत साफ़-सुथरी रखनी चाहिए ताकि मर्द उसमे से अपना अमृत निकाल सके और पि सके, समजी?” बाबाजी बार-बार हर औरत या लड़की का उल्लेख कर रहे थे ताकि मयूरी को समज आ जाए की उसकी बेटी को भी यही करना है। सहायिका सौनी पटेल।
 
मयूरी ने शर्म से सिर हिलाया और धीरे से बोली,
 
“जी… समझ गई।”
 
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जुड़े रहिये दोस्तों।


Maitri Patel का साहस।
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Messages In This Thread
सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 27-06-2026, 05:02 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Rizzi1198 - 30-07-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-08-2026, 06:21 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 28-08-2026, 05:28 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-09-2026, 06:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 08-09-2026, 10:10 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-09-2026, 05:04 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-09-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-09-2026, 09:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-09-2026, 05:39 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-09-2026, 04:27 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 23-09-2026, 02:55 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Tadpole - 23-09-2026, 07:12 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Wanton - 23-09-2026, 07:24 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 01-10-2026, 09:20 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Bumchod - 05-10-2026, 05:27 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-10-2026, 08:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-10-2026, 07:50 PM



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