23-09-2026, 02:51 PM
बाबाजी के घोड़े को मुंह में लेते ही मयूरी जैसे किसी नशे में चली गई थी। अब उसमें पहले वाली शर्म कम और एक अजीब सी भूख ज्यादा दिख रही थी। उसने अपनी जीभ, होंठ और दाँतों का पूरा इस्तेमाल करते हुए बाबाजी के मोटे लंड को सहलाना, चूसना और चुभलाना शुरू कर दिया। बाबाजी भी कभी कभी उसके मुंह को चोदते तो कभी उसके गले को। मयूरी भी अब जितना हो सके अपने मुंह को खोलती और लंड को गहराई तक जाने की जगह प्रदान करती थी। कोई देखे तो यकीन ही ना होता कि ये मयूरी आज पहली बार किसी का लंड चूस रही है।
उसके मुंह से ढेर सारी गर्म, चिपचिपी लार निकलकर बाबाजी के पूरे लंड को नहला रही थी। हर बार जब वह जोर से चूसती, तो “सड़प… सड़प… सड़प…” जैसी अश्लील, गीली आवाजें कमरे में गूंजने लगतीं। मयूरी भी बाबाजी के लंड का प्रीकम का स्वाद ले रही थी। अब वह काफी उत्तेजित थी उसकी चूत निरंतर उसकी झांगो को भिगोये जा रही थी। मयूरी को ऐसा अहसास अपने जीवन में पहली बार हो रहा था की बिना चुदाई उस की चूत इतना पानी बहा सकती है।
बाबाजी जी ने आँखें आधे बंद किए, गहरी साँसें लेते हुए कहा,
“मयूरी… सिर्फ घोड़े को चूसने से काम नहीं चलता मेरी जान… उसके नीचे दो भाई भी हैं, जो लटके हुए तुम्हारे प्रेम पाने की प्रतीक्षा कर रहे है। उनकी भी सेवा करो… अच्छे से…” कहते हुए उन्होंने हल्का सा इशारा अपने अंडकोष की तरफ किया। मैत्री की प्रस्तुति।
मयूरी ने घोड़े को मुंह से बाहर निकाला। उसके होंठ अब लार से चमक रहे थे। उसने लंड को हाथ में पकड़कर ऊपर-नीचे हिलाना शुरू किया और धीरे-धीरे नीचे की तरफ झुकी। लंड के नीचे की त्वचा थोड़ी ज्यादा कठोर और सिकुड़ी हुई थी, और वहाँ से एक गहरी, नशीली, पुरुषानी महक आ रही थी जो मयूरी के दिमाग को और भी भिगो रही थी और अति उत्तेजक बना रही थी।
उसने आँखें बंद कीं, मुंह खोला और बाबाजी जी के एक गुलाब जामुन को अपने गर्म, नरम मुंह में ले लिया।
“अह्ह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ़ मयूरी… उम्म्म्म…” बाबाजी के मुंह से लगातार सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मयूरी को समझ आ गया कि उन्हें यहाँ चुसवाने में बहुत ज्यादा मजा आ रहा है, यह भी मर्दों की सेवा का उसके लिए एक पाठ था। उसने दोनों गेंदों को बारी-बारी अपने मुंह में लिया, जीभ से चाटा, होंठों से चूसा। फिर दोनों को एक साथ मुंह में भरने की कोशिश की। उसके मोटे, गीले होंठ पक्क-पक्क की आवाजें करते हुए उनकी गेंदों को चूस रहे थे। साथ-साथ उसके हाथ उंगलिया और हथेली बाबाजी के लंड के आसपास घूम रही थी। लंड का सुपर अब चमड़ी से बाहर आता तो कभी अन्दर सरक जाता।
जब उसने आँखें खोलीं, तो नजारा बेहद अश्लील था - उसके मुंह में बाबाजी जी की दोनों गेंदें भरी हुई थीं, और उनका मोटा, लार से चमकता लंड ठीक उसकी दोनों आँखों के बीच में खड़ा था, उसके माथे को छू रहा था।
मयूरी ने शरारत से दाँतों से हल्का-हल्का काटना भी शुरू कर दिया।
बाबाजी जी के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। उनका हाथ मयूरी के बिखरे बालों में फँस गया और उन्होंने जोर से बाल खींचे।
“स्स्साह्ह्ह… कितनी शैतान और मादरचोद हो तुम… आज तो पूरी तरह खुल गई हो…”
मयूरी ने जवाब में और जोश दिखाया। उसने बाबाजी के गीले लंड और गेंदों वाले पूरे हिस्से को अपने चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया। उसकी लाल लिपस्टिक उनके लंड पर लग रही थी, काला काजल पिघलकर उसकी आँखों के नीचे फैल रहा था, और उसकी गर्म साँसें उनके अंडकोष को छू रही थीं।
उसका पूरा चेहरा अब लार, लिपस्टिक और काजल से सना हुआ था। उसके मुंह से बार-बार “उन्न्न… अह्ह्ह… उम्म्म…” जैसी दबी हुई कामुक आवाजें निकल रही थीं।
बाबाजी जी का नियंत्रण अब पूरी तरह टूट चुका था।
अचानक उन्होंने मयूरी के सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से करीब खींचा। बिना किसी चेतावनी के उनके घोड़े के मुंह से गर्म, गाढ़ी, सफेद झाग की तेज़ धार फूट पड़ी।
“आअह्ह्ह्ह्ह… ले ले मयूरी… सब ले ले…यह मेरे घोड़े की तरफ से प्रसाद तेरे मुंह को भेंट।”
पहली फुहार सीधे मयूरी के चेहरे पर पड़ी। कुछ उसके खुलते मुंह के अंदर चली गई, कुछ उसकी आँखों, नाक, गालों और ठोड़ी पर फैल गई। गर्म, चिपचिपा वीर्य उसके चेहरे को नहला रहा था। सहायिका सौनी पटेल।
मयूरी ने आँखें बंद कर लीं, मुंह खुला रखा और हाथ से लंड को मसलती रही। वह तब तक मसलती रही जब तक आखिरी बूँद भी उसके चेहरे या मुंह पर न आ जाए।
जब सब खत्म हुआ, तो मयूरी का पूरा चेहरा बाबाजी जी के वीर्य से चिपचिपा और गीला हो चुका था। कुछ बूँदें उसके गले की तरफ बह रही थीं। उसके बाल भी कुछ-कुछ जगहों पर चिपक गए थे।
वह हाँफ रही थी। उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। शर्म और संतोष का एक अजीब मिश्रण उसके चेहरे पर था।
बाबाजी जी ने प्यार से उसके बालों को सहलाया और धीरे से बोले,
“कैसा लगा मयूरी… गुरु का प्रसाद?”
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जुड़े रहिये दोस्तों...............
Maitri Patel का निर्माण।
उसके मुंह से ढेर सारी गर्म, चिपचिपी लार निकलकर बाबाजी के पूरे लंड को नहला रही थी। हर बार जब वह जोर से चूसती, तो “सड़प… सड़प… सड़प…” जैसी अश्लील, गीली आवाजें कमरे में गूंजने लगतीं। मयूरी भी बाबाजी के लंड का प्रीकम का स्वाद ले रही थी। अब वह काफी उत्तेजित थी उसकी चूत निरंतर उसकी झांगो को भिगोये जा रही थी। मयूरी को ऐसा अहसास अपने जीवन में पहली बार हो रहा था की बिना चुदाई उस की चूत इतना पानी बहा सकती है।
बाबाजी जी ने आँखें आधे बंद किए, गहरी साँसें लेते हुए कहा,
“मयूरी… सिर्फ घोड़े को चूसने से काम नहीं चलता मेरी जान… उसके नीचे दो भाई भी हैं, जो लटके हुए तुम्हारे प्रेम पाने की प्रतीक्षा कर रहे है। उनकी भी सेवा करो… अच्छे से…” कहते हुए उन्होंने हल्का सा इशारा अपने अंडकोष की तरफ किया। मैत्री की प्रस्तुति।
मयूरी ने घोड़े को मुंह से बाहर निकाला। उसके होंठ अब लार से चमक रहे थे। उसने लंड को हाथ में पकड़कर ऊपर-नीचे हिलाना शुरू किया और धीरे-धीरे नीचे की तरफ झुकी। लंड के नीचे की त्वचा थोड़ी ज्यादा कठोर और सिकुड़ी हुई थी, और वहाँ से एक गहरी, नशीली, पुरुषानी महक आ रही थी जो मयूरी के दिमाग को और भी भिगो रही थी और अति उत्तेजक बना रही थी।
उसने आँखें बंद कीं, मुंह खोला और बाबाजी जी के एक गुलाब जामुन को अपने गर्म, नरम मुंह में ले लिया।
“अह्ह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ़ मयूरी… उम्म्म्म…” बाबाजी के मुंह से लगातार सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मयूरी को समझ आ गया कि उन्हें यहाँ चुसवाने में बहुत ज्यादा मजा आ रहा है, यह भी मर्दों की सेवा का उसके लिए एक पाठ था। उसने दोनों गेंदों को बारी-बारी अपने मुंह में लिया, जीभ से चाटा, होंठों से चूसा। फिर दोनों को एक साथ मुंह में भरने की कोशिश की। उसके मोटे, गीले होंठ पक्क-पक्क की आवाजें करते हुए उनकी गेंदों को चूस रहे थे। साथ-साथ उसके हाथ उंगलिया और हथेली बाबाजी के लंड के आसपास घूम रही थी। लंड का सुपर अब चमड़ी से बाहर आता तो कभी अन्दर सरक जाता।
जब उसने आँखें खोलीं, तो नजारा बेहद अश्लील था - उसके मुंह में बाबाजी जी की दोनों गेंदें भरी हुई थीं, और उनका मोटा, लार से चमकता लंड ठीक उसकी दोनों आँखों के बीच में खड़ा था, उसके माथे को छू रहा था।
मयूरी ने शरारत से दाँतों से हल्का-हल्का काटना भी शुरू कर दिया।
बाबाजी जी के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। उनका हाथ मयूरी के बिखरे बालों में फँस गया और उन्होंने जोर से बाल खींचे।
“स्स्साह्ह्ह… कितनी शैतान और मादरचोद हो तुम… आज तो पूरी तरह खुल गई हो…”
मयूरी ने जवाब में और जोश दिखाया। उसने बाबाजी के गीले लंड और गेंदों वाले पूरे हिस्से को अपने चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया। उसकी लाल लिपस्टिक उनके लंड पर लग रही थी, काला काजल पिघलकर उसकी आँखों के नीचे फैल रहा था, और उसकी गर्म साँसें उनके अंडकोष को छू रही थीं।
उसका पूरा चेहरा अब लार, लिपस्टिक और काजल से सना हुआ था। उसके मुंह से बार-बार “उन्न्न… अह्ह्ह… उम्म्म…” जैसी दबी हुई कामुक आवाजें निकल रही थीं।
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अचानक उन्होंने मयूरी के सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से करीब खींचा। बिना किसी चेतावनी के उनके घोड़े के मुंह से गर्म, गाढ़ी, सफेद झाग की तेज़ धार फूट पड़ी।
“आअह्ह्ह्ह्ह… ले ले मयूरी… सब ले ले…यह मेरे घोड़े की तरफ से प्रसाद तेरे मुंह को भेंट।”
पहली फुहार सीधे मयूरी के चेहरे पर पड़ी। कुछ उसके खुलते मुंह के अंदर चली गई, कुछ उसकी आँखों, नाक, गालों और ठोड़ी पर फैल गई। गर्म, चिपचिपा वीर्य उसके चेहरे को नहला रहा था। सहायिका सौनी पटेल।
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जब सब खत्म हुआ, तो मयूरी का पूरा चेहरा बाबाजी जी के वीर्य से चिपचिपा और गीला हो चुका था। कुछ बूँदें उसके गले की तरफ बह रही थीं। उसके बाल भी कुछ-कुछ जगहों पर चिपक गए थे।
वह हाँफ रही थी। उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। शर्म और संतोष का एक अजीब मिश्रण उसके चेहरे पर था।
बाबाजी जी ने प्यार से उसके बालों को सहलाया और धीरे से बोले,
“कैसा लगा मयूरी… गुरु का प्रसाद?”
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