22-09-2026, 08:58 PM
कौशिक ने तुरंत अपना लण्ड बाहर निकाला, मौशुमी की चूत से एक 'श्लिकिंग' की आवाज़ आई। उसने मौशुमी की पैंटी को ऊपर खींचा, उसकी साड़ी और पेटीकोट को ठीक किया। वे दोनों तेज़ी से नीचे की ओर भागे, कदमों की आवाज़ें अभी भी ऊपर से आ रही थीं।
वे नीचे पहुँचे, और मॉल के अंदर भीड़ में गुम हो गए। उनके दिल तेज़ी से धड़क रहे थे, उनके शरीर पसीने से भीगे हुए थे। वे एक-दूसरे की ओर देख रहे थे, उनकी आँखों में एक अनकही बात थी – डर, रोमांच, और अधूरी इच्छा।
"बाल-बाल बचे," कौशिक ने हाँफते हुए कहा।
मौशुमी ने एक गहरी साँस ली। "चलो, अब घर चलते हैं।"
वे दोनों मॉल से बाहर निकले, एक ऑटो लिया, और घर की ओर चल दिए। रास्ते भर वे खामोश रहे, लेकिन उनके मन में वही घटना घूम रही थी। अधूरी इच्छा, पकड़े जाने का डर, और एक-दूसरे के प्रति बढ़ती हुई ललक।
शाम को वे घर पहुँचे। मौशुमी ने चाबी से दरवाज़ा खोला, और अंदर दाखिल हुई।
"अलोक?" मौशुमी ने कहा, उसकी आवाज़ में आश्चर्य था।
अंदर से आवाज़ आई, "हाँ, मौशुमी। आज जल्दी छुट्टी मिल गई। गाड़ी भी ठीक हो गई। सरप्राइज़!"
मौशुमी और कौशिक की नज़रें मिलीं। उनके चेहरे पर एक ही भाव था – निराशा। उनकी आज की रात की उम्मीदें धूल में मिल गई थीं। आलोक का घर पर होना उनके बीच की उस आग को फिर से बुझा गया था, जो अभी-अभी भड़की थी। मौशुमी ने एक गहरी साँस ली, अपनी साड़ी का पल्लू कसकर पकड़ा। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी, एक अधूरी कहानी की पीड़ा। कौशिक ने अपना सिर हिलाया, उसकी आँखों में भी वही निराशा थी। आज भी उनकी प्रेम कहानी अधूरी ही रह गई थी।


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