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Incest बाँझ बेटी की गलतफहमी ने बेटा दिया
#1
बाँझ बेटी की गलतफहमी ने बेटा दिया

मेरा नाम राजिंदर है. हम पुणे में रहते हैं. हमारे घर में 4 लोग हैं. मैं मेरी पत्नी सुषमा मेरा बेटा सफल और मेरी बेटी सपना।
 मैं 52 साल का हूँ और मेरी पत्नी 50 साल की है.
मैं एक सरकारी विभाग में उच्च पद पर कार्यरत हूँमेरे रिटायर होने में बस 
अब कुछ ही वर्ष शेष हैं। मैंने अपना सारा जीवन सादगी और कर्मठता से जिया हैअपनी पत्नी के अलावा कभी भी किसी दूसरी के साथ इसके पहले सम्भोग नहीं किया था और  ही मैं इन चक्करों में कभी पड़ा।
हाँकभी कभी अपने इस दोस्त के साथ महीने दो महीने में पीने पिलाने का 
दौर चल जाता है बस!
मेरी और मेरी पत्नी की सेक्स लाइफ बहुत अच्छी है. हम दोनों सेक्स के बहुत शौकीन हैं. दारू पीने के बाद तो मेरा लौड़ा काबू से बाहर हो जाता है और हम बहुत जोर शोर से चुदाई करते हैं. मेरा सेक्स स्टैमिना भी बहुत अच्छा है. मैं आधे घंटे से पहले डिस्चार्ज नहीं होता। मेरा लौड़ा भी लगभग 8 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा है. मेरी बीवी की चूत पहले पहले तो इतने मोटे लॅंड को नहीं ले पाती थी पर अब खूब मजे से उछल उछल कर चुदवाती है.
मेरा बेटा सफल मुंबई में रह कर नौकरी रहा है और 32 साल का है. और शादीशुदा है. उसकी पत्नी भी उसके साथ वहीँ रहती है.
मेरी बेटी की शादी नागपुर में हुई है. मेरे दामाद का नाम शुभम है.
यह कहानी मेरी बेटी के बारे में है. मेरी बेटी बहुत सुन्दर है. उसका शरीर बहुत भरा भरा सा है. उसके मुम्मे और चूतड काफी मोटे मोटे हैं. आप कह सकते हैं की वो एक सेक्स की देवी लगती है.
शादी के पहले उस पर बहुत लड़के मरते थे. मुझे पता है कि वो भी सेक्स की बहुत शौकीन है. उसका पति बहुत अच्छा है. दोनों की सेक्स लाइफ बहुत अच्छी थी. (मैंने कई बार उन्हें चुदाई करते देखा है, जब वो हमारे घर में आते थे).
मैं उनके लिए बहुत खुश था. मेरा अपनी बेटी के प्रति कोई सेक्स के विचार नहीं थे.
पर बेटी की जिंदगी में एक कमी थी जिस के कारण वो सदा दुखी रहती थी.
मेरी बेटी की जीवन में दुःख का कारण था उसके बच्चा होना।
मेरी बेटी और उसका पति बच्चा चाहते थे. असल में मेरा दामाद भी घर में अकेला बेटा था. उनका काफी बिज़नेस था इसलिए मेरी बेटी की सास चाहती थी कि उसका पोता हो ताकि उनका खानदान चलता रहे और घर में कोई छोटा बच्चा भी हो. मेरा दामाद और बेटी भी चाहते थे, पर बच्चा नहीं हो रहा था.
उसकी सास मेरी बेटी से बहुत नाराज़ रहती थी.
बेटी और दामाद ने डॉक्टर से भी टेस्ट करवाया पर दोनों में कोई भी कमी नहीं थी. शायद भगवान् को ही अभी उनके बच्चा होना मंजूर नहीं था.
पर बेटी की सास के लिए तो इतना काफी था की उसके बेटे में कोई कमी नहीं थी. तो सारा दोष मेरी बेटी पर ही डाल देती थी. वो उसे अक्सर बाँझ कहती थी.
वो मेरी बेटी तो तलाक देकर अपने बेटे की दूसरी शादी करवाना चाहती थी.
पर मेरा दामाद मेरी बेटी को बहुत प्यार करता था तो वो तलाक नहीं चाहता था पर बच्चा होने से परेशान तो था ही. मुझे भी डर था की कभी ना कभी वो अपनी माँ के दवाब में मेरी बेटी को बच्चे के लिए तलाक दे दे.
अक्सर मेरी बेटी अपनी माँ यानि मेरी पत्नी से फ़ोन पर यही दुःख ब्यान करती थी. और अक्सर रोती रहती थी.
पर हम भी क्या कर सकते थे.
बस भगवान् से प्रार्थना ही कर सकते थे, पर हर आने वाले दिन के साथ यह समस्या बढ़ती ही जा रही थी.
पर शायद भगवान् को कुछ और ही मंजूर था.
बात ऐसी हुई की मेरे छोटे भाई के बेटे की शादी थी. वो हमारे ही पास के मोहल्ले में रहते हैं. हमारा आपस में बहुत प्यार है. अब घर की शादी थी. बहुत से रीति रिवाज थे. फिर शादी के बाद में रिसेप्शन थी. और मेरी बेटी ही घर में एकमात्र लड़की थी तो मेरी बेटी और दामाद को लगभग 10 दिन के लिए बुला लिया था.
मेरे बेटे को छुट्टी की समस्या थी तो वो तो कोई 2- 3 दिन के लिए ही आने वाला था.
कई रिश्तेदार भी मेरे घर में ही रुकने वाले थे क्योंकि भाई के घर में इतनी जगह नहीं थी.
मेरी बेटी उसी दिन आयी थी.
शाम को हम सब मेरे भाई के घर गए थे. वहां पर पीने पिलाने का दौर खूब चला. मेरा दामाद भी शराब का शौकीन है. उसने भी खूब पी ली. मेरी बेटी ने भी लड़कियों के साथ मिल कर तीन चार पेग लगा लिए थे. पर आज कल के दौर में यह नार्मल चीज है. मुझे पता था की मेरी बेटी और दामाद पहले भी पी लेते थे.
आप सब तो जानते ही हैं कि शादी ब्याह में इंसान चकरघिन्नी बन के रह जाता है। मैं और पत्नी वापिस अपने घर में गए, बेटी और दामाद अभी भाई के घर ही थे, थोड़ी देर में आने वाले थे.
खाना पीना काफी कुछ निपट चुका था लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी था।  इस उधेड़बुन में उलझा था कि रानी, मेरी पत्नी, की आवाज ने मेरी तन्द्रा भंग की।
चाय पियोगे जी?’ वो पूछ रही थी।
चाय पीने का मन तो हो ही रहा था, मैंने उसकी तरफ देख के सहमति दे दी।
अभी लाई!’ वो बोली।
कुछ ही देर में वो दो कप चाय लिये आई और मेरे बगल में कुर्सी डाल कर बैठ गई।
मैंने देखा थकान के चिह्न उसके चेहरे पर भी झलक रहे थे।
मैंने चाय की चुस्की ली फिर मुस्कुरा के उसकी तरफ देखा।
ऐसे क्यों देख रहे हो? चाय अच्छी नहीं लगी क्या?’
चाय तो अच्छी है, लेकिन आज तो मेरा मन हो रहा है एक महीने से ऊपर हो गया!’ मैंने कहा और धीरे से उसकी जांघ पर हाथ रखा।
हटो जी, आप को तो एक ही बात सूझती है हमेशा! बच्चे बड़े हो गये, शादियाँ हो गईं लेकिन आप को तो बस एक ही चीज दिखाई देती है!’
अब क्या करूंतुम हो ही ऐसी प्यारी प्यारी!’ मैंने उसे मक्खन लगाया।
सब समझती हूँ इस चापलूसी का मतलब!’ कहते हुए उसने मेरा हाथ अपनी जांघ पर से हटा दिया।
अरे मान भी जा न। आज बहुत मूड बन रहा है मेरा, मेरा यह छोटू बेचैन है तेरी मुनिया से मिलने को!’
कोई चान्स नहीं है, घर मेहमानों से भरा पड़ा है! कुछ दिन और सब्र कर लो, फिर मिल लेना अपनी मुनिया से!’ वो बोली और उठ कर निकल ली।
मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझते हुए अपना ध्यान दूसरी जरूरी बातों पे लगाया और घर के कुछ काम करने में व्यस्त हो गया।
सब कुछ निपटने के बाद आधी रात से ऊपर ही हो चुकी थी, सब लोग जहाँ तहाँ सोये पड़े थे, मेरा मन भी सोने का हो रहा था, इसी चक्कर में मैंने सारे घर का चक्कर लगा लिया लेकिन कहीं भी कोई गुंजाइश नहीं मिली।
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बाँझ बेटी की गलतफहमी ने बेटा दिया - by Ting Ting - Yesterday, 09:13 AM



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