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Adultery EK ADHURI LOVE STORY-(with a twist)
#16
वह दोनों पास के एक बड़े मॉल में गए। मॉल की भीड़ में, वे एक-दूसरे के करीब चल रहे थे, उनकी उँगलियाँ कभी-कभी एक-दूसरे को छू जाती थीं। उन्होंने एक फूड कोर्ट में जाकर बर्गर और कोल्ड ड्रिंक ली। खाने के दौरान भी, उनकी आँखें एक-दूसरे से मिलती रहती थीं, एक अनकही बात उनकी नज़रों में तैर रही थी।

" तुम्हें कहीं और ले जाना चाहता था," कौशिक ने कहा। "जहाँ कोई हमें परेशान न करे।"

मौशुमी ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक सवाल था।

कौशिक ने एक गहरी साँस ली। "चलो, मेरे साथ।"

वे दोनों फूड कोर्ट से निकले, मॉल की ऊपरी मंजिलों की ओर बढ़े। कौशिक उसे एक शांत जगह की ओर ले जा रहा था – एक आपातकालीन सीढ़ी। यह सीढ़ी आमतौर पर खाली रहती थी, क्योंकि लोग लिफ्ट या एस्केलेटर का उपयोग करते थे।

सीढ़ी के दरवाजे पर 'केवल आपातकाल में उपयोग करें' का बोर्ड लगा था। कौशिक ने दरवाजा खोला, और वे अंदर दाखिल हुए। अंदर हल्की रोशनी थी, और हवा में थोड़ी सी नमी थी। ऊपर की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ खाली थीं।

वे कुछ सीढ़ियाँ चढ़े, और फिर एक कोने में रुक गए। कौशिक ने मौशुमी को अपनी ओर खींचा, उसके हाथों को अपने हाथों में ले लिया।

"मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी," कौशिक ने फुसफुसाया, उसकी आँखों में एक गहरी भावना थी।

मौशुमी ने उसकी आँखों में देखा, उसका दिल फिर से तेज़ी से धड़कने लगा। "मुझे भी।"

कौशिक ने धीरे से मौशुमी के गालों को सहलाया, फिर उसके होंठों पर झुक गया। इस बार चुंबन और भी गहरा था, और भी भावुक। मौशुमी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होंठों को चूस रही थी, उसकी जीभ को अपनी जीभ से उलझा रही थी। उनकी लार का स्वाद उनके मुँह में घुल रहा था, एक मीठा, नमकीन स्वाद।

कौशिक के हाथ मौशुमी की कमर पर थे, उसे और करीब खींच रहे थे। मौशुमी के हाथ उसके कंधों पर टिके थे, उसकी उँगलियाँ उसके बालों में फँस गई थीं।

कुछ देर बाद, कौशिक ने अपने होंठ हटाए, उसकी आँखों में गहरी इच्छा थी। "मैं तुम्हें चाहता हूँ, माँ। अभी।"

मौशुमी का शरीर काँप रहा था। उसने एक पल के लिए सोचा, फिर धीरे से सिर हिलाया। "ठीक है।"

कौशिक के चेहरे पर एक जीत की मुस्कान आई। उसने धीरे से मौशुमी को सीढ़ियों पर बिठाया। मौशुमी ने अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर उठाया, ताकि वह आराम से बैठ सके।

कौशिक उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। मौशुमी ने उसकी आँखों में देखा, फिर धीरे से अपनी साड़ी को और ऊपर सरकाया, अपने पेटीकोट को भी। उसने अपनी पैंटी को थोड़ा नीचे खींचा, ताकि कौशिक को आसानी हो। उसकी पैंटी पहले से ही गीली थी, उसकी चूत से हल्की सी गंध आ रही थी, जो उत्तेजना में और भी बढ़ गई थी।

कौशिक ने धीरे से मौशुमी की पैंटी को एक तरफ किया। उसकी आँखें मौशुमी की चूत पर टिकी थीं, जो अब पूरी तरह से उजागर थी। उसकी गुलाबी पंखुड़ियाँ, उसके बाल, और बीच में उसकी छोटी सी क्लीट – सब कुछ उसकी आँखों के सामने था। मौशुमी की चूत थोड़ी फूली हुई थी, और उसकी नमी चमक रही थी।

कौशिक ने धीरे से अपना सिर झुकाया, और उसके होंठ मौशुमी की चूत पर आ टिके। मौशुमी ने एक गहरी आह भरी, उसकी उँगलियाँ कौशिक के बालों में फँस गईं। कौशिक ने धीरे से उसकी पंखुड़ियों को चूसा, अपनी जीभ से उसकी क्लीट को सहलाया। मौशुमी का शरीर एक झटके से काँप उठा।

"आह... कौशिक..." मौशुमी ने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में दर्द और आनंद दोनों थे।

कौशिक ने अपनी जीभ से उसकी क्लीट को धीरे-धीरे चाटा, फिर उसे अपने मुँह में लेकर चूसा। मौशुमी के मुँह से गहरी आहें निकल रही थीं, उसका शरीर हिल रहा था। उसने अपने पैरों को थोड़ा और फैलाया, ताकि कौशिक को और पहुँच मिल सके।

कौशिक ने अपनी जीभ से उसकी चूत के अंदरूनी हिस्सों को छुआ, उसकी नमी को महसूस करते हुए। मौशुमी का शरीर जल रहा था। उसे लग रहा था कि वह अब और बर्दाश्त नहीं कर पाएगी।

"आह... और... और तेज़..." मौशुमी ने हाँफते हुए कहा।

कौशिक ने उसकी बात मानी, अपनी जीभ को और तेज़ी से उसकी क्लीट पर घुमाया, उसे चूसते हुए। मौशुमी की चूत से रस बह रहा था, और कौशिक उसे चाट रहा था, उसकी नमी का स्वाद ले रहा था। उसका मुँह उसकी चूत से भर गया था, और वह उसे चूस रहा था, जैसे कोई प्यासा पानी पी रहा हो।

मौशुमी का शरीर एक झटके से काँप उठा, और वह चरम पर पहुँच गई। उसकी चूत से एक गर्म, चिपचिपा तरल पदार्थ निकला, जो कौशिक के मुँह में भर गया। कौशिक ने उसे निगल लिया, उसके चेहरे पर एक संतुष्टि की मुस्कान थी।

मौशुमी हाँफ रही थी, उसका शरीर पसीने से भीगा हुआ था। उसने अपनी आँखें खोलीं, कौशिक की तरफ देखा।

कौशिक ने धीरे से अपना सिर उठाया, उसके होंठों पर मौशुमी की चूत का स्वाद था। उसने अपनी पैंट खोली, अपना लण्ड बाहर निकाला। उसका लण्ड, जो पहले से ही कठोर था, अब और भी सख्त हो गया था। उसका सिर लाल था, और उस पर थोड़ी सी नमी चमक रही थी।

मौशुमी ने उसे देखा, उसकी आँखों में एक नई इच्छा जाग उठी थी। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया, और कौशिक के लण्ड को पकड़ा। उसका लण्ड गर्म और कठोर था, उसकी उँगलियों में mushkil se फिट हो रहा था। उसने उसे धीरे से सहलाया, ऊपर-नीचे करते हुए।

कौशिक ने मौशुमी को धीरे से उठाया, उसे सीढ़ियों की रेलण्ड की ओर धकेला। मौशुमी ने रेलण्ड का सहारा लिया, अपने नितंबों को थोड़ा बाहर निकालते हुए। कौशिक ने उसकी साड़ी, पेटीकोट को ऊपर उठाया, और उसकी पैंटी को घुटनों तक नीचे सरका दिया। मौशुमी की गोल, भरी हुई नितंबें अब पूरी तरह से उजागर थीं।

कौशिक ने अपने लण्ड को मौशुमी की चूत के पास ले गया। मौशुमी की चूत अभी भी गीली और फूली हुई थी। उसने धीरे से अपने लण्ड के सिर को उसकी चूत के मुहाने पर रखा। मौशुमी ने एक गहरी साँस ली, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

कौशिक ने धीरे से अपने लण्ड को उसकी चूत में धकेला। मौशुमी ने एक हल्की सी आह भरी, उसकी चूत उसे अंदर ले रही थी, जैसे किसी लंबे समय से भूखी हो। कौशिक का लण्ड धीरे-धीरे अंदर जा रहा था, उसकी चूत की दीवारों को रगड़ते हुए।

"आह... धीरे..." मौशुमी ने फुसफुसाया।

कौशिक ने उसकी बात मानी, धीरे-धीरे अंदर गया। उसका लण्ड पूरा अंदर चला गया, और दोनों के शरीर एक-दूसरे से जुड़ गए। उनकी चूत और लण्ड की रगड़ से एक हल्की सी गीली आवाज़ आ रही थी।

कौशिक ने अपने को आगे-पीछे करना शुरू किया, धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ा रहा था। मौशुमी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके शरीर को उस आनंद में डूब जाने दिया। कौशिक के नितंब उसकी नितंबों से टकरा रहे थे, एक लयबद्ध आवाज़ पैदा कर रहे थे।

"आह... हाँ... और तेज़" मौशुमी ने हाँफते हुए कहा।

कौशिक ने अपनी गति बढ़ाई, अपने लण्ड को उसकी चूत में तेजी से अंदर-बाहर कर रहा था। उनकी त्वचा एक-दूसरे से रगड़ रही थी, पसीना टपक रहा था। मौशुमी के मुँह से गहरी आहें निकल रही थीं, उसका शरीर काँप रहा था।

वे दोनों उस पल में पूरी तरह खो गए थे, जब अचानक उन्हें सीढ़ियों से ऊपर आने की आवाज़ें सुनाई दीं। कदमों की आवाज़ें तेज़ हो रही थीं।

दोनों एक झटके से रुक गए। उनकी आँखें एक-दूसरे से मिलीं, उनके चेहरे पर डर और घबराहट थी।

"कोई आ रहा है!" मौशुमी धिरे से बोली, उसकी आवाज़ काँप रही थी।
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RE: EK ADHURI LOVE STORY-(with a twist) - by Pramod_Bhasin - 22-09-2026, 12:43 AM



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