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Adultery EK ADHURI LOVE STORY-(with a twist)
#15
ऑटो आगे बढ़ गया। वह अपने ऑफिस की ओर जा रही थी, लेकिन उसका मन कहीं और था। कौशिक के स्पर्श की गरमाहट, उसके होंठों का स्वाद, उसकी उँगलियों की नमी – सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था।

वह मुश्किल से अपने ऑफिस, ATI Systems, पहुँची। घड़ी की सूई नौ बजने वाली थी। वह अपनी सीट पर बैठी ही थी कि उसके बॉस, मिस्टर राव, उसके पास आए।

"मौशुमी, तुम्हें क्लाइंट साइट पर जाना होगा," मिस्टर राव ने कहा। "एक अर्जेंट मीटिंग है। दो नए लोग आए हैं, उन्हें सिस्टम का ओरिएंटेशन देना है।"

मौशुमी ने सिर हिलाया। वह पहले से ही थोड़ी परेशान थी, और यह नया काम उसे और तनाव दे रहा था। वह अपनी फाइलें लेकर निकली, क्लाइंट साइट की ओर।

क्लाइंट साइट पर पहुँचने पर, मौशुमी को दो अधेड़ उम्र के सज्जन मिले। उनके नाम श्रीकांत और रमेश थे। उनकी उम्र 50 के आसपास थी, और उनकी आँखें मौशुमी को देखते ही चमक उठीं। मौशुमी ने उन्हें देखकर ही समझ लिया कि उनकी नीयत अच्छी नहीं थी।

"नमस्ते, मौशुमी जी," श्रीकांत ने कहा, । "आप तो बहुत खूबसूरत हैं। एटीआई सिस्टम्स ने इतनी सुंदर मैनेजर कब से रखी है?"

मौशुमी ने उनकी बात को अनसुना किया, अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की। "मैं मौशुमी दास हूँ, ट्रेनिंग मैनेजर। मैं आपको सिस्टम के बारे में बताऊँगी।"

रमेश ने एक गंदी हँसी हँसी। "सिस्टम तो हम समझ लेंगे, मौशुमी जी। आप अपना परिचय दीजिए। कहाँ से हैं, शादीशुदा हैं?"

मौशुमी का खून खौल उठा। उसने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं। "मेरी निजी जानकारी मेरे काम से संबंधित नहीं है। कृपया हम काम पर ध्यान दें।"

"अरे, क्यों इतना गुस्सा होती हैं?" श्रीकांत ने कहा, उसके करीब आने की कोशिश करते हुए। "हम तो बस थोड़ा जान-पहचान बढ़ा रहे थे। बेंगलुरु में नए हैं, कोई दोस्त नहीं है।"

मौशुमी ने एक गहरी साँस ली। उसने अपनी आवाज़ को शांत रखने की कोशिश की। "मुझे अपना काम खत्म करना है। अगर आपको सिस्टम के बारे में कोई सवाल है, तो पूछिए। अन्यथा, मैं चली जाऊँगी।"

"अरे, इतनी जल्दी क्या है?" रमेश ने कहा, उसके कंधे पर हाथ रखने की कोशिश करते हुए। "थोड़ी देर बैठो, चाय पीते हैं। फिर हम आपको बेंगलुरु घुमाएँगे।"

मौशुमी ने झटके से अपना कंधा हटाया। "मुझसे दूर रहिए!" उसकी आवाज़ थोड़ी ऊँची हो गई थी। "अगर आपने फिर ऐसी हरकत की, तो मैं आपके बॉस से शिकायत करूँगी।"

दोनों आदमी हँसने लगे। "शिकायत? कौन सुनेगा आपकी?" श्रीकांत ने कहा। "हम तो बस मज़ाक कर रहे थे। आप तो बहुत संवेदनशील हैं।"

मौशुमी ने अपनी फाइलें समेटीं। "मुझे खेद है, लेकिन मैं ऐसे माहौल में काम नहीं कर सकती। मैं अपने बॉस को सूचित करूँगी।" वह तेज़ी से कमरे से बाहर निकली, उन दोनों की हँसी उसके पीछे गूँज रही थी।

वह अपने ऑफिस वापस पहुँची, उसका चेहरा लाल था, और उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मिस्टर राव ने उसे देखा।

"क्या हुआ मौशुमी? तुम ठीक हो?"

मौशुमी ने उन्हें सारी बात बताई। मिस्टर राव ने उसे दिलासा दिया और कहा कि वह इस मामले को देखेंगे। मौशुमी अपनी सीट पर बैठ गई, उसका मन और भी अशांत हो गया था। उसे कौशिक की याद आ रही थी, उसकी सुरक्षा की भावना जो वह उसके साथ महसूस करती थी।

दोपहर में, लगभग दो बजे, उसके फोन पर एक मैसेज आया। कौशिक का था। 'मैं तुम्हारे ऑफिस के पास हूँ। आओ, भूख लगी है।'

मौशुमी ने अपने दिल की सुनी। उसने मिस्टर राव को बताया कि उसे कुछ अर्जेंट काम है और वह बाहर जा रही है। वह ऑफिस से निकली, उसका दिल एक बार फिर उम्मीद और डर के बीच झूल रहा था।

कौशिक ऑफिस के बाहर खड़ा था, एक कैज़ुअल टी-शर्ट और जींस में। उसे देखकर मौशुमी के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई।

"तुम आ गए," मौशुमी ने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी राहत थी।

"हाँ, कॉलेज में मन नहीं लगा," कौशिक ने मुस्कुराते हुए कहा। "चलो, कहीं कुछ खाते हैं।"
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RE: EK ADHURI LOVE STORY-(with a twist) - by Pramod_Bhasin - 21-09-2026, 09:06 PM



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