21-09-2026, 07:02 PM
(This post was last modified: 24-09-2026, 04:22 PM by Asschaser. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
Rakhi, Sunil's wife ki side story
रात के एक बज चुके थे। राखी अपने बेडरूम में खड़ी थी, पसीने से तर, उसकी हरी साड़ी अभी भी उसके शरीर से चिपकी हुई थी। शीशे में अपने प्रतिबिंब को देखते हुए उसने धीरे से साड़ी का पल्लू खींचा। उसके गाल अभी भी लाल थे, आंखों में वो अजीब सी चमक जो कामुक संतुष्टि और अधूरी इच्छा के बीच झूलती है।
"काश..." उसने धीरे से कहा, हाथ में आईफोन कसकर पकड़े हुए, "उसका नाम पूछ लेती।"
होटल के बाथरूम का वो दृश्य फिर से उसकी आंखों के सामने तैरने लगा। वो अजनबी... कितना हैंडसम था, कितना बोल्ड। उसने उसकी ब्रा के हुक खोले थे, उसकी चूचियों को कैसे मसला था... पर फिर वो रुक गया। समय की कमी। बस कुछ ही मिनटों का वो सुख, और फिर अलविदा।
राखी ने अपनी साड़ी उतारी। उसका शरीर अभी भी गर्म था, उसकी चूत अभी भी गीली थी। वो उस अधूरे मिलन से संतुष्ट नहीं थी। उसे और चाहिए था... बहुत ज्यादा।
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"मैम साहब..."
ड्राइवर की आवाज़ से वो चौंकी। मोहन... पिछले पाँच साल से उनका ड्राइवर। उसने दरवाज़े की दरार से झाँका। सुनील बेड पर तड़प रहे थे, नशे में धुत्त।
"क्या है?" राखी ने पूछा, अपने कंधे पर पल्लू रखते हुए जानबूझकर थोड़ा नीचे झुकी।
"साहब को सुला दिया मैंने," मोहन ने कहा, उसकी आंखें राखी की गर्दन पर टिकी हुई थीं, "कुछ और ज़रूरत हो तो... बोलिए।"
उसने अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड को खुजलाते हुए कहा। राखी समझ गई। पर वो मोना नहीं थी। उसे ये लो-क्लास मर्द पसंद नहीं थे... चाहे वो ड्राइवर हो, नौकर हो, या माली। उसे चाहिए थे वेल-बिल्ट, अमीर, सोफिस्टिकेटेड मर्द... जैसे आज वो होटल में मिला था।
"नहीं, तुम जा सकते हो," राखी ने ठंडे से कहा, अपनी आवाज़ में वो अकड़ जो अमीर घरों की औरतों में होती है।
मोहन ने निराश होकर सिर झुकाया। "जी मैम।"
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राखी ने दरवाज़ा बंद कर दिया। उसने अलमारी खोली और एक सफेद, पारदर्शी नाइटी निकाली। रेशम का कपड़ा उसकी उंगलियों के बीच फिसल रहा था। उसने कपड़े उतारे... पहले ब्लाउज, फिर पेटीकोट, फिर ब्रा। उसका शरीर अभी भी कांप रहा था।
नाइटी पहनते हुए उसने खुद को शीशे में देखा। उसके बूब्स का आकार पूरी तरह से दिख रहा था, नाइटी के नीचे उसकी गोल गांड का आकार साफ झलक रहा था। वो 39 की हो चुकी थी, पर लगती अभी भी 30 की। उसने अपने बाल खोले, वो कंधों तक गिर रहे थे।
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"उफ्फ..." वो बेड पर गिरी, अपने पैर फैलाते हुए।
उसकी चूत में आग लगी हुई थी। वो बाथरूम का सीन याद करने लगी... कैसे उस अजनबी ने उसे पकड़ा था, कैसे उसकी चूचियों को मसला था, कैसे उसने उसका लंड अपने मुंह में लिया था... पर फिर क्या हुआ? कुछ नहीं। समय नहीं था।
"रंडी..." वो खुद को गाली देते हुए बोली, "क्यों नहीं पूछा उसका नाम?"
उसने अपना फोन उठाया। दो बज चुके थे। नींद तो आनी नहीं थी। उसने सोचा, क्यों ना थोड़ा पोर्न देख लूँ? शायद राहत मिले।
उसने अपने फोन पर एक वेबसाइट खोली। "Hot Wife Fantasies" - उसका पसंदीदा कैटेगरी। उसने एक वीडियो चलाया... एक खूबसूरत औरत, उसके पति के सामने किसी दूसरे मर्द से चुद रही थी।
राखी का हाथ अपनी नाइटी के नीचे चला गया। उसने अपनी पेंटी को छुआ... पूरी गीली हो चुकी थी। उसने धीरे से अपनी पेंटी नीचे की, अपनी टांगें फैलाई।
"उम्म्म..." उसकी हल्की सी आवाज़ निकली।
उसने अपनी उंगली अपनी चूत पर रखी। वो गीली, गरम, और तरस रही थी। उसने धीरे से उंगली अंदर डाली।
"आह्ह..." उसने सिर उठाया, अपनी आंखें बंद कर लीं।
वो उस अजनबी को याद कर रही थी... उसकी आंखें, उसका बोल्ड अंदाज़, उसका वो मोटा लंड जो उसने अपने मुंह में लिया था। काश वो उसे और चूस पाती... काश वो उसे अपनी चूत में ले पाती...
उसने अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। "फच... फच... फच..." की आवाज़ आ रही थी। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, उसका पानी उसकी उंगलियों से बह रहा था।
"और ज़ोर से..." वो खुद से बोली, "चोद मुझे... और ज़ोर से..."
उसने अपनी दूसरी हाथ से अपनी चूची पकड़ी, ज़ोर से दबाया। उसकी नाइटी अब कंधे से सरक चुकी थी, उसका एक बूब्स पूरी तरह से बाहर आ चुका था। उसने अपनी उंगली से अपने निप्पल को ट्विस्ट किया।
"आह्ह... माँ..." उसने कराही।
वो अब तेज़ी से अपनी उंगली अंदर-बाहर कर रही थी। उसकी चूत से "फच... फच..." की आवाज़ तेज़ हो गई थी। उसने अपनी टांगें और फैला दीं, अपनी गांड हवा में उठा दी।
"वो अजनबी..." वो बड़बड़ाई, "कितना अच्छा चोदता वो... उफ्फ... उसका लंड..."
उसने अपनी उंगली और गहरी डाली। उसकी चूत की दीवारें उसकी उंगली को चूस रही थीं। उसने अपनी क्लिट को अपनी अंगूठे से रगड़ना शुरू किया।
"आह्ह... आह्ह... मैं आ रही हूँ..." उसने कराहते हुए कहा।
उसका शरीर कांपने लगा। उसकी चूत ने उसकी उंगली को कसकर पकड़ लिया। एक लहर दौड़ी... और फिर...
"आह्ह्ह्ह्ह..." वो ज़ोर से चिल्लाई, अपना पानी छोड़ते हुए।
वो थककर बेड पर गिर गई। पर उसकी चूत अभी भी गर्म थी... अभी भी तरस रही थी। उसे असली लंड चाहिए था... उस अजनबी का...
"काश..." उसने धीरे से कहा, "काश वो यहाँ होता..."
उसने अपनी गीली उंगली अपने मुंह में डाली... और धीरे से चूसने लगी। उसकी आंखें बंद थीं... और वो सिर्फ उसी अजनबी को याद कर रही थी... जिसका नाम भी उसे नहीं पता था...
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" />
[To be continued...]
रात के एक बज चुके थे। राखी अपने बेडरूम में खड़ी थी, पसीने से तर, उसकी हरी साड़ी अभी भी उसके शरीर से चिपकी हुई थी। शीशे में अपने प्रतिबिंब को देखते हुए उसने धीरे से साड़ी का पल्लू खींचा। उसके गाल अभी भी लाल थे, आंखों में वो अजीब सी चमक जो कामुक संतुष्टि और अधूरी इच्छा के बीच झूलती है।
"काश..." उसने धीरे से कहा, हाथ में आईफोन कसकर पकड़े हुए, "उसका नाम पूछ लेती।"
होटल के बाथरूम का वो दृश्य फिर से उसकी आंखों के सामने तैरने लगा। वो अजनबी... कितना हैंडसम था, कितना बोल्ड। उसने उसकी ब्रा के हुक खोले थे, उसकी चूचियों को कैसे मसला था... पर फिर वो रुक गया। समय की कमी। बस कुछ ही मिनटों का वो सुख, और फिर अलविदा।
राखी ने अपनी साड़ी उतारी। उसका शरीर अभी भी गर्म था, उसकी चूत अभी भी गीली थी। वो उस अधूरे मिलन से संतुष्ट नहीं थी। उसे और चाहिए था... बहुत ज्यादा।
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" />"मैम साहब..."
ड्राइवर की आवाज़ से वो चौंकी। मोहन... पिछले पाँच साल से उनका ड्राइवर। उसने दरवाज़े की दरार से झाँका। सुनील बेड पर तड़प रहे थे, नशे में धुत्त।
"क्या है?" राखी ने पूछा, अपने कंधे पर पल्लू रखते हुए जानबूझकर थोड़ा नीचे झुकी।
"साहब को सुला दिया मैंने," मोहन ने कहा, उसकी आंखें राखी की गर्दन पर टिकी हुई थीं, "कुछ और ज़रूरत हो तो... बोलिए।"
उसने अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड को खुजलाते हुए कहा। राखी समझ गई। पर वो मोना नहीं थी। उसे ये लो-क्लास मर्द पसंद नहीं थे... चाहे वो ड्राइवर हो, नौकर हो, या माली। उसे चाहिए थे वेल-बिल्ट, अमीर, सोफिस्टिकेटेड मर्द... जैसे आज वो होटल में मिला था।
"नहीं, तुम जा सकते हो," राखी ने ठंडे से कहा, अपनी आवाज़ में वो अकड़ जो अमीर घरों की औरतों में होती है।
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नाइटी पहनते हुए उसने खुद को शीशे में देखा। उसके बूब्स का आकार पूरी तरह से दिख रहा था, नाइटी के नीचे उसकी गोल गांड का आकार साफ झलक रहा था। वो 39 की हो चुकी थी, पर लगती अभी भी 30 की। उसने अपने बाल खोले, वो कंधों तक गिर रहे थे।
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" />"उफ्फ..." वो बेड पर गिरी, अपने पैर फैलाते हुए।
उसकी चूत में आग लगी हुई थी। वो बाथरूम का सीन याद करने लगी... कैसे उस अजनबी ने उसे पकड़ा था, कैसे उसकी चूचियों को मसला था, कैसे उसने उसका लंड अपने मुंह में लिया था... पर फिर क्या हुआ? कुछ नहीं। समय नहीं था।
"रंडी..." वो खुद को गाली देते हुए बोली, "क्यों नहीं पूछा उसका नाम?"
उसने अपना फोन उठाया। दो बज चुके थे। नींद तो आनी नहीं थी। उसने सोचा, क्यों ना थोड़ा पोर्न देख लूँ? शायद राहत मिले।
उसने अपने फोन पर एक वेबसाइट खोली। "Hot Wife Fantasies" - उसका पसंदीदा कैटेगरी। उसने एक वीडियो चलाया... एक खूबसूरत औरत, उसके पति के सामने किसी दूसरे मर्द से चुद रही थी।
राखी का हाथ अपनी नाइटी के नीचे चला गया। उसने अपनी पेंटी को छुआ... पूरी गीली हो चुकी थी। उसने धीरे से अपनी पेंटी नीचे की, अपनी टांगें फैलाई।
"उम्म्म..." उसकी हल्की सी आवाज़ निकली।
उसने अपनी उंगली अपनी चूत पर रखी। वो गीली, गरम, और तरस रही थी। उसने धीरे से उंगली अंदर डाली।
"आह्ह..." उसने सिर उठाया, अपनी आंखें बंद कर लीं।
वो उस अजनबी को याद कर रही थी... उसकी आंखें, उसका बोल्ड अंदाज़, उसका वो मोटा लंड जो उसने अपने मुंह में लिया था। काश वो उसे और चूस पाती... काश वो उसे अपनी चूत में ले पाती...
उसने अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। "फच... फच... फच..." की आवाज़ आ रही थी। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, उसका पानी उसकी उंगलियों से बह रहा था।
"और ज़ोर से..." वो खुद से बोली, "चोद मुझे... और ज़ोर से..."
उसने अपनी दूसरी हाथ से अपनी चूची पकड़ी, ज़ोर से दबाया। उसकी नाइटी अब कंधे से सरक चुकी थी, उसका एक बूब्स पूरी तरह से बाहर आ चुका था। उसने अपनी उंगली से अपने निप्पल को ट्विस्ट किया।
"आह्ह... माँ..." उसने कराही।
वो अब तेज़ी से अपनी उंगली अंदर-बाहर कर रही थी। उसकी चूत से "फच... फच..." की आवाज़ तेज़ हो गई थी। उसने अपनी टांगें और फैला दीं, अपनी गांड हवा में उठा दी।
"वो अजनबी..." वो बड़बड़ाई, "कितना अच्छा चोदता वो... उफ्फ... उसका लंड..."
उसने अपनी उंगली और गहरी डाली। उसकी चूत की दीवारें उसकी उंगली को चूस रही थीं। उसने अपनी क्लिट को अपनी अंगूठे से रगड़ना शुरू किया।
"आह्ह... आह्ह... मैं आ रही हूँ..." उसने कराहते हुए कहा।
उसका शरीर कांपने लगा। उसकी चूत ने उसकी उंगली को कसकर पकड़ लिया। एक लहर दौड़ी... और फिर...
"आह्ह्ह्ह्ह..." वो ज़ोर से चिल्लाई, अपना पानी छोड़ते हुए।
वो थककर बेड पर गिर गई। पर उसकी चूत अभी भी गर्म थी... अभी भी तरस रही थी। उसे असली लंड चाहिए था... उस अजनबी का...
"काश..." उसने धीरे से कहा, "काश वो यहाँ होता..."
उसने अपनी गीली उंगली अपने मुंह में डाली... और धीरे से चूसने लगी। उसकी आंखें बंद थीं... और वो सिर्फ उसी अजनबी को याद कर रही थी... जिसका नाम भी उसे नहीं पता था...
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