20-09-2026, 04:49 PM
(10-09-2026, 11:20 AM)Fuckuguy Wrote: सोमवार की सुबह अमन कॉलेज के लिए निकला।
रात भर खँडहर का दृश्य उसके दिमाग में घूमता रहा। लड़की की आवाज, उसकी सिसकारियाँ, दोनों लड़कों की गालियाँ—सब साफ याद था। लेकिन उसका चेहरा नहीं दिखा था। दीवार के कोण और अँधेरे की वजह से सिर्फ शरीर दिखी थी। अब अमन का मन यही पूछ रहा था—वह कौन थी? कक्षा में है या किसी और सेक्शन में? जाना-पहचाना चेहरा तो नहीं?
कॉलेज पहुँचते ही उसने सामान्य दिनचर्या शुरू की। प्रार्थना, कक्षा, दोस्तों के साथ बैठना। लेकिन उसकी आँखें अब पहले से तेज थीं। हर लड़की को ध्यान से देख रहा था—आवाज मिलान करने की कोशिश में। जब कोई लड़की हँसती या बात करती तो वह कान लगा लेता। दोपहर के खाने के समय मैदान में बैठे दोस्तों के बीच भी उसका ध्यान चारों तरफ घूम रहा था।
एक बार उसे लगा कि पिछली बैंच पर बैठी लड़की की आवाज मिलती-जुलती है। लेकिन पक्का नहीं हो सका। छुट्टी के समय वह जानबूझकर उस समूह के पास से गुजरा जिसकी बात कल सुनी थी। दो लड़के तो वही लग रहे थे, लेकिन लड़की उनके साथ नहीं थी। अमन ने मन में नोट कर लिया—जल्दी पता चलेगा।
शाम को घर लौटा तो माँ ने सामान्य स्वर में पूछा, “आज कॉलेज कैसा रहा?” अमन ने सिर हिलाया और कमरे में चला गया। दिमाग में एक साथ दो चीजें चल रही थीं—खँडहर वाली लड़की का चेहरा ढूँढना और रात को रेणु के आने का इंतजार।
रात के खाने के बाद सब अपने कमरों में चले गए। अमन बैठा इंतजार कर रहा था। ठीक बारह बजे दरवाजे पर दस्तक हुई। रेणु अंदर आई। लालटेन कम रोशनी में थी। उसने दरवाजा बंद किया।
“कल सो गए थे,” रेणु ने सीधे कहा। “आज जगे हुए हो?”
अमन ने सिर हिलाया। रेणु बिस्तर के किनारे बैठ गई। उसकी आँखें अमन के चेहरे पर थीं।
“तुमने कुछ देखा है। बातों से लग रहा है। बताओ।”
अमन ने संक्षेप में बता दिया—पुराने मंदिर के खँडहर में तीन लोग, लड़की का चेहरा नहीं दिखी, लेकिन शरीर और आवाजें साफ याद हैं। रेणु सुनती रही। फिर हल्के से मुस्कुराई।
“कॉलेज में पता लगाने की कोशिश कर रहे हो न?”
अमन ने स्वीकार किया।
रेणु ने कहा, “अच्छा। आँखें खुल रही हैं। लेकिन याद रखना—बाहर की चीजें सिर्फ उत्तेजना देती हैं। असली शिक्षा यहीं है, इस घर में।”
वह थोड़ा करीब आई। “आज तुमने खुद चुंबन शुरू किया था। लंड भी दिखाया। आज मैं आगे बढ़ाऊँगी।”
रेणु ने अपना पल्लू हटाया। साड़ी के नीचे सिर्फ ब्लाउज था। उसने अमन का हाथ पकड़कर अपनी छाती पर रखा। ब्लाउज के ऊपर से ही। स्तन नरम और भारी थे। निप्पल कपड़े के नीचे सख्त हो रहे थे।
“महसूस करो,” रेणु ने धीरे से कहा। “यह सिर्फ बहन का शरीर नहीं। यह इच्छा का शरीर है। तुम्हारा लंड अभी कैसा है?”
अमन की आवाज कम थी, “पूरी तरह खड़ा है।”
रेणु ने उसका हाथ अपनी छाती पर और दबाया। “आज चुंबन तुमने लिया था। आज मैं लेती हूँ।”
वह आगे झुकी और अमन के होंठ पकड़ लिए। चुंबन इस बार गहरा था। जीभ अंदर तक चली गई। अमन ने जवाब दिया। दोनों की साँसें तेज हो गईं। रेणु का एक हाथ अमन की गर्दन पर था, दूसरा उसकी पैंट के नाड़े पर। उसने नाड़ा खोला। दस इंच का लंड बाहर निकल आया—सख्त, नसें फूली हुई, भारी।
रेणु ने उसे देखा। आँखों में फिर वही अचरज थी।
“इतना मोटा और लंबा… सच में बदल गया है।” उसने इसे अपने हाथ में लिया। हल्के से सहलाया। “आज सिर्फ इतना। मैं इसे पकड़ूँगी। तुम महसूस करो।”
उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे चलने लगीं—जड़ से लेकर सिर तक। कभी हल्के, कभी थोड़ा कसकर। अमन की कमर काँपने लगी। रेणु उसके कान में बोली,
“कल तुमने दूसरों को चोदते देखा। आज समझो कि शरीर कैसे प्रतिक्रिया देता है। जल्दी मत करना। बस महसूस करो।”
कुछ देर तक रेणु ने उसे अपने हाथ से सहलाया। अमन की साँसें तेज हो गईं, लेकिन रेणु ने पूरा नहीं होने दिया। उसने हाथ रोक लिया।
“बस। आज की शिक्षा यहीं खत्म।” उसने अमन का लंड छोड़ दिया और पल्लू ठीक किया। “कल रात और आगे बढ़ेंगे। शायद मुँह से भी सिखाऊँ। लेकिन सब्र रखो।”
रेणु उठ खड़ी हुई। दरवाजे तक जाकर बोली,
“कॉलेज में वह लड़की ढूँढते रहो। लेकिन घर की शिक्षा को प्राथमिकता देना। बाहर की चीजें तुम्हें सिर्फ उत्तेजित करेंगी। असली ताकत यहीं बनेगी।”
वह चली गई।
अमन अकेला रह गया। लंड अभी भी तना हुआ था, रेणु के हाथ की गर्माहट उस पर बची हुई थी। उसने खिड़की से बाहर देखा। हवेली शांत थी। लेकिन उसके अंदर अब दो आग जल रही थीं—एक खँडहर वाली अज्ञात लड़की की पहचान की, दूसरी रेणु की अगली शिक्षा की।
वह लेट गया। आँखें खुली थीं। दिमाग में रेणु के स्तनों का स्पर्श और खँडहर की सिसकारियाँ एक साथ घूम रही थीं।
कॉलेज की दिनचर्या वही रहेगी। लेकिन अब हर कक्षा, हर ब्रेक, हर लड़की की आवाज उसके लिए एक सवाल बन गई थी—क्या वही है?
और रातें… रातें अब रेणु की शिक्षा के लिए थीं।
मंगलवार की सुबह अमन कॉलेज गया।
कल रात रेणु के हाथ का स्पर्श और खँडहर की सिसकारियाँ दोनों उसके दिमाग में थीं। कक्षा में बैठे-बैठे वह बार-बार लड़कियों की आवाजें सुन रहा था। एक लड़की ने जब पानी माँगा तो उसकी आवाज कुछ मिलती-जुलती लगी। अमन ने ध्यान से देखा—चेहरा साधारण था, लेकिन पक्का अंदाजा नहीं लगा। ब्रेक में उसने उस समूह के दो लड़कों को दूर से देखा। वे सामान्य बातें कर रहे थे। लड़की उनके साथ नहीं थी। अमन ने मन में लिखा—जल्दी पता चलेगा।
पूरे दिन उसका ध्यान बँटा रहा। एक तरफ पढ़ाई, दूसरी तरफ वह अज्ञात आवाज। छुट्टी होते ही वह घर की तरफ निकला। दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—वह लड़की कौन है?
शाम को घर लौटा तो माँ ने सामान्य स्वर में पूछा, “आज कॉलेज कैसा रहा?” अमन ने सिर हिलाया और सीधे अपने कमरे में चला गया। वह इंतजार कर रहा था—रात का।
रात के खाने के बाद रेणु आई। लालटेन लेकर। दरवाजा बंद करके वह बिस्तर के किनारे बैठ गई।
अमन ने इस बार खुद पहल की। “दीदी, एक बात पूछनी है।”
रेणु ने देखा। “पूछो।”
“बाबा के कमरे से जो आवाज आई थी… वह कौन थी?”
रेणु कुछ पल चुप रही। फिर बोली, “तुमने सुना तो था। मैंने मना किया था फिर भी कान लगा लिए।” उसने अमन की आँखों में देखा। “अभी बताने का समय नहीं। जब तुम और तैयार हो जाओगे तब खुद देख लोगे। जबरदस्ती मत पूछो।”
अमन चुप नहीं बैठा। “तुम्हें घर के सारे मर्दों के बारे में कैसे पता? उनके… साइज के बारे में भी। तुमने कितनों को…”
रेणु की आँखों में हल्की चमक आई। उसने अमन का हाथ पकड़ा। “तुम अब सवाल पूछने लगे हो। यह अच्छी बात है। लेकिन जवाब एक साथ नहीं मिलेंगे। सबके अपने राज़ हैं। मैंने बहुत कुछ देखा और जाना है। तुम्हें भी धीरे-धीरे पता चलेगा। आज इतना काफी है।”
वह थोड़ा करीब आई। “आज तुम्हारी शिक्षा जारी रखनी है।”
रेणु ने अपना पल्लू हटाया। ब्लाउज के बटन खोले। उसके स्तन बाहर आ गए—सख्त निप्पल, गोल और भारी। उसने अमन का हाथ पकड़कर उन पर रख दिया।
“आज सीधे छुओ। कपड़े के बिना।”
अमन की हथेली पर नरम मांस और सख्त निप्पल महसूस हुए। रेणु ने आँखें बंद कर लीं। “हल्के से दबाओ… ऐसे…”
अमन ने वैसा ही किया। रेणु की साँस तेज हो गई। उसने अमन के लंड पर हाथ रखा—पैंट के ऊपर से। दस इंच का तनाव साफ महसूस हो रहा था।
“निकालो,” रेणु ने कहा।
अमन ने पैंट खोली। लंड बाहर आया। रेणु ने इसे अपने दोनों हाथों में लिया। धीरे-धीरे सहलाने लगी।
“कल तुमने दूसरों को देखा। आज समझो कि हाथ कैसे चलते हैं। जल्दी मत। मैं बताऊँगी कब रोकना है।”
उसकी उंगलियाँ जड़ से सिर तक फिसल रही थीं। कभी हल्के, कभी कसकर। अमन की कमर काँपने लगी। रेणु ने एक हाथ से उसके लंड को पकड़े रखा और दूसरे हाथ से अपना एक स्तन अमन के मुँह के पास ले गई।
“चूसो… हल्के से।”
अमन ने निप्पल मुँह में लिया। जीभ घुमाई। रेणु की सिसकारी निकली। दोनों की साँसें तेज हो गईं। कुछ देर तक यह चलता रहा—रेणु का हाथ उसके लंड पर, अमन का मुँह उसके स्तन पर।
फिर रेणु ने अचानक रोक दिया।
“बस। आज यहीं तक।” उसने अमन का लंड छोड़ दिया और ब्लाउज पहन लिया। “तुम पूछ रहे हो—कौन सबसे ज्यादा चुदाई कर चुकी है, किसका लंड कैसा है। जवाब धीरे-धीरे मिलेंगे। अभी अपनी शिक्षा पर ध्यान दो।”
रेणु दरवाजे तक गई। मुड़कर बोली,
“कॉलेज में वह लड़की ढूँढते रहो। लेकिन याद रखना—बाहर की उत्तेजना सिर्फ आग लगाती है। असली खेल यहीं है।”
वह चली गई।
अमन अकेला रह गया। मुँह में रेणु के निप्पल का स्वाद था, लंड पर उसके हाथ की गर्माहट। दिमाग में बाबा वाले कमरे का सवाल और खँडहर वाली लड़की दोनों घूम रहे थे।
वह लेट गया। आँखें खुली थीं। अब वह सिर्फ देखने वाला नहीं रह गया था। वह सवाल पूछने वाला बन चुका था। और रेणु उसके हर सवाल का जवाब एक नई शिक्षा के साथ दे रही थी।
बुधवार की सुबह अमन कॉलेज पहुँचा।
कक्षा में बैठते ही उसका ध्यान फिर लड़कियों की आवाजों पर था। वह लगातार उस अज्ञात आवाज को ढूँढ रहा था। ब्रेक के समय वह पानी लेने गया तो बरामदे के कोने से परिचित आवाजें सुनाई दीं। वही दो लड़के और वह लड़की बात कर रहे थे। अमन ने दीवार के सहारे खड़े होकर कान लगा दिए।
“रविवार को पुराने मंदिर के पीछे ही मिलना है,” एक लड़के ने कहा। “इस बार एक और लड़की लाएँगे।”
लड़की ने हँसते हुए पूछा, “कौन?”
“राधा। हमारी ही क्लास वाली। उसे कहेंगे कि वहाँ कोई नया वाला फोन या कुछ दिखाना है। जब पहुँच जाएगी तो… दोनों का मजा ले लेंगे। तू भी उस पर चढ़ जाना।”
दूसरे लड़के ने जोड़ा, “राधा थोड़ी सीधी है। पहले मना करेगी। लेकिन जब दोनों तरफ से दब जाएगी तो चुपचाप ले लेगी। तू बस उसे लेकर आ जा।”
लड़की ने सिर हिलाया। “ठीक है। रविवार दोपहर को ले चलूँगी। बाकी तुम दोनों सँभाल लेना।”
अमन की मुट्ठियाँ भींच गईं। राधा। उसकी अपनी क्लास की लड़की। शांत रहने वाली, कम बोलने वाली। वह उन्हें उस खँडहर में ले जाकर उसी हालत में पहुँचाने वाले थे जैसे कल उसने देखा था। अमन का दिल जोर से धड़कने लगा। वह वहीं से हट गया और सीधा अपनी कक्षा में लौट आया।
पूरे दिन उसका मन अशांत रहा। राधा को बचाना है—यह बात उसके दिमाग में बार-बार घूम रही थी। लेकिन कैसे? सिक्युरिटी में बताए तो सब सामने आ जाएगा। खुद जाकर रोके तो लड़के उससे लड़ सकते हैं। वह सोचता रहा, लेकिन कोई साफ रास्ता नहीं सूझा।
शाम को घर लौटा तो सामान्य दिनचर्या निभाई। खाना खाया, थोड़ी देर पढ़ाई की, लेकिन दिमाग राधा और रविवार के प्लान पर ही अटका रहा।
रात के बारह बजे रेणु आई। लालटेन लेकर। दरवाजा बंद करके वह बिस्तर के किनारे बैठ गई।
अमन ने इस बार थोड़ा उदास स्वर में कहा, “दीदी, आज कॉलेज में कुछ सुना।”
रेणु ने पूछा, “क्या?”
अमन ने संक्षेप में बता दिया—रविवार का प्लान, राधा को बहाने से ले जाना, फिर दोनों लड़कों और उस लड़की का इरादा। रेणु सुनती रही। फिर धीरे से बोली,
“तुम बचाना चाहते हो?”
अमन ने सिर हिलाया।
रेणु ने उसका हाथ पकड़ा। “सोच लो। दखल दोगे तो खुद फँस सकते हो। लेकिन अगर मन बना लिया है तो सोच-समझकर करना। अभी जल्दबाजी मत करो। रविवार अभी दूर है।”
फिर उसने अपना पल्लू हटाया। ब्लाउज के बटन खोले। स्तन बाहर आ गए।
“आज की शिक्षा जारी रखो। बाहर की बातें बाद में। पहले अपना शरीर और इच्छा समझो।”
उसने अमन का हाथ अपने स्तनों पर रखा। फिर उसकी पैंट खोली। दस इंच का लंड बाहर निकला। रेणु ने इसे अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। इस बार वह और करीब झुकी।
“आज मुँह से भी सिखाऊँगी,” उसने फुसफुसाकर कहा। “देखो और महसूस करो।”
रेणु ने अपना मुँह अमन के लंड के सिर के पास ले जाकर हल्के से जीभ फेरी। फिर धीरे से होंठों में लिया। अमन की कमर झटक उठी। रेणु ने धीरे-धीरे आगे बढ़ाया—आधा लंड मुँह में लेते हुए। उसकी जीभ घूम रही थी। एक हाथ से जड़ को सहला रही थी।
अमन की साँसें तेज हो गईं। उसने रेणु के बाल पकड़ लिए। रेणु ने कुछ देर तक यही किया—कभी गहरा, कभी सिर्फ सिर चूसते हुए। फिर अचानक रुक गई।
“बस। आज यहीं तक।” उसने मुँह हटाया और लंड को छोड़ दिया। “तुम्हारा शरीर अब अच्छी तरह प्रतिक्रिया दे रहा है। कल और आगे बढ़ेंगे।”
रेणु ने ब्लाउज पहन लिया। दरवाजे तक जाकर बोली,
“राधा वाली बात सोचो। लेकिन याद रखना—हर किसी को नहीं बचाया जा सकता। और जो बचाना चाहो, उसके लिए खुद मजबूत बनो। शिक्षा जारी रहेगी।”
वह चली गई।
अमन अकेला रह गया। मुँह में अभी भी रेणु की गर्माहट का अहसास था। लंड तना हुआ था। लेकिन दिमाग में राधा का चेहरा और रविवार का प्लान घूम रहा था।
वह लेट गया। आँखें खुली थीं। पहली बार उसने महसूस किया कि सिर्फ देखने और सीखने से आगे कुछ करना होगा। रविवार आ रहा था। और वह तय नहीं कर पा रहा था कि ठीक क्या करेगा।
bahut mast story
Raj


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)