19-09-2026, 01:05 PM
बाबाजी ने मयूरी का हाथ अपने हाथ में लिया, हल्का-हल्का सहलाते हुए नरम स्वर में कहा,
“आराम से बताओ ना मयूरी… कैसे क्या हुआ था? शरमाओ मत। अब हम दोनों के बीच कोई बात छुपी नहीं है। तुम जो कुछ भी कहोगी, वो हमारे बीच ही रहेगा। तुम्हे तो पता है की मैं तुम्हारे घर का भला ही चाहता हूँ और हमारे बिच ऐसी कोई भी बात होगी वह तीसरे को अंदाजा तक नहीं होगा। तुम मुझे अपना हितेच्छु ही समजो।” बाबाजी उसे खुलने पर मजबूर कर रहे थे।
मयूरी ने एक लंबी, गहरी साँस ली। उसका चेहरा अभी भी लाल था। वह कुछ पल चुप रही, फिर धीरे-धीरे बोलने लगी,
“कल रात… मैंने ऋचा को खाना खिलाकर जल्दी सुला दिया था, उसकी आज एग्जाम भी तो थी, उसे जल्दी सो जाने को कहा और सुबह जल्दी उठ के बाकी की पढाई करने को कहा। क्योंकि आज उसका एग्जाम था। जब गोपाल आए, तो मैंने उन्हें खाना खिलाया। खाने के बाद वो कपड़े बदलकर मेरे पास आए…” मैत्री पटेल की रचना।
मयूरी फिर से रुक गई। उसकी उँगलियाँ अपनी साड़ी के पल्लू को कसकर पकड़ रही थीं।
बाबाजी ने धीरे से पूछा, “हाँ… बोलो… आगे क्या हुआ? बिना गभराए जो हुआ सब बताओ।” उनका लंड फिर से खड़ा होकर हुंकारने लगा था। धोती के अंदर वह फड़क रहा था।
मयूरी ने शर्माते हुए, लेकिन उत्तेजना भरी आवाज़ में आगे कहा,
“फिर… उन्होंने बड़े प्यार से मुझे लिटाया। मेरा ब्लाउस खोल दिया… और ब्रा के ऊपर से ही मेरी छातियों को चूमने लगे।”
बाबाजी ने उसके कंधे पे हाथ रखते हुआ कहा: “प्रिय, यह छातिया क्या होती है? अपनी भाषा में बोलो “बोबले” कहो। ठीक है!”
बाबाजी ने गौर से देखा की मयूरी ये सब बोलते हुए फिर से तेज़ साँसें लेने लगी थी। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
मयूरी ने जारी रखा,
“फिर उन्होंने मेरी ब्रा भी उतार दी… और ज़िंदगी में पहली बार उन्होंने पूरे पाँच मिनट तक सिर्फ़ मेरे बोब्लो को चूमा, चूसा और दबाया। उन्होंने आज तक ऐसा नहीं किया था। शायद… ये आपका दिया हुआ ज्ञान ही था… है ना बाबाजी?”
मयूरी की आँखों में आभार और शर्म का मिश्रण था।
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिलाया और बोले, “हाँ… मैंने उन्हें कुछ बातें समझाई थीं। और यह जरुरी भी था। जो कल हमने किया मैंने उसे करने को कहा। मेरे ख्याल से मैंने ठीक ही किया है न?”
मयूरी ने और शर्माते हुए “हाँ” कहा,
“उन्होंने मेरे बोब्लो पर शहद भी लगाया… और उसे चाटा भी…”
बाबाजी की शरारत जाग उठी। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा… तो अब तुम मुझे ये बताओ कि गोपाल ने तुम्हें अच्छी तरह चूसा… या मैंने कल चूसा था?”
मयूरी का पूरा चेहरा, गर्दन और कान तक लाल सुर्ख हो गया। उसने काँपते होंठों से सिर्फ़ इतना ही कहा,
“गुरु के आगे चेले की क्या बिसात बाबाजी जी…आपने बहोत अच्छे से चूसा था, अगर दूध होता तो आपका पेट भर ही जाता।” वह भी शायद बात को इसी तरह आगे ले जाना चाहती थी। बाबाजी का लंड जो देख लिया था।
बाबाजी अपनी तारीफ सुनकर मन ही मन बहुत खुश हुए। उनकी आँखों में विजय की चमक थी।
उन्होंने आगे पूछा, “और फिर… क्या हुआ?”
मयूरी ने सिर झुकाकर, बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
“जब वो मेरे थनों को चूस रहे थे… तो मेरा एक हाथ… अपनी… अपनी उस जगह पर था… और मैं जोर-जोर से उसे रगड़ रही थी…”
बाबाजी ने जानबूझकर स्पष्ट शब्द इस्तेमाल किया,
“उस जगह यानी… तुम्हारी चूत पर? मयूरी, बिना कोई शर्म रखे बोलती रहो।”
मयूरी ने शर्म से आँखें बंद कर लीं और हाँ में सिर हिला दिया। एडिटर फनलवर है।
“और फिर… जोर-जोर से करते-करते मैं वहीं… झड़ गई। पर मेरी प्यास अभी तक बुझी नहीं थी। मैंने जैसे ही उन्हें अपने ऊपर खींचकर बचा हुआ काम पूरा करना चाहा… वो एकदम से उठे और बाहर चले गए। मैं सोचती रह गई कि उन्होंने मुझे ऐसी अवस्था में छोड़कर कहाँ चले गए। थोड़ी देर बाद मैं आधी नंगी होकर बाहर गई तो देखा कि वो सोफे पर जाकर सो चुके हैं।”
मयूरी की आवाज़ में निराशा और भूख दोनों थी,
“मुझे उनका ये बर्ताव समझ नहीं आया… ना तो उन्होंने मुझे पूरी तरह संतुष्ट किया, ना ही खुद संतुष्ट हुए। जो उन्होंने कभी नहीं किया था…ऐसा कोई करता है भला? बिना चो......दे.......” वह चोदे शब्द को बहोत धीमे से बोली पर बाबाजी के कान में जा गिरे थे।
बाबाजी जी ने मन ही मन गोपाल की सहनशक्ति की तारीफ की। “साला… मादरचोद....अच्छा कंट्रोल रखा है। ऋचा का लालच बड़ा है। बेटी की चूत के आगे बीवी की चूत की कोई कीमत नहीं रखी। सब मेरे इस लंड के लिए छोड़ दी थी।”
फिर उन्होंने मयूरी को सांत्वना देते हुए कहा,
“देखो मयूरी… तुम चिंता मत करो। उसने अपनी तरफ़ से इतना कुछ किया, जो पहले कभी नहीं किया था। शायद थक गया होगा। अगर तुम अपनी तरफ़ से थोड़ा और प्रयास करती तो शायद वो बाहर नहीं जाते…या फिर यह वह क्रिया थी जो आम लोगो नहीं करते इस लिए शर्म भी आती होगी, उसने सोचा होगा की तुम क्या सोच रही होगी। बहोत से कारण हो सकते है। लेकिन उसने इतना तो किया आगे और ज्यादा करेगा।” उन्हों ने मयूरी की झांगो को थपथपाते हुए कहा।
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Maitri Patel का निर्माण।
“आराम से बताओ ना मयूरी… कैसे क्या हुआ था? शरमाओ मत। अब हम दोनों के बीच कोई बात छुपी नहीं है। तुम जो कुछ भी कहोगी, वो हमारे बीच ही रहेगा। तुम्हे तो पता है की मैं तुम्हारे घर का भला ही चाहता हूँ और हमारे बिच ऐसी कोई भी बात होगी वह तीसरे को अंदाजा तक नहीं होगा। तुम मुझे अपना हितेच्छु ही समजो।” बाबाजी उसे खुलने पर मजबूर कर रहे थे।
मयूरी ने एक लंबी, गहरी साँस ली। उसका चेहरा अभी भी लाल था। वह कुछ पल चुप रही, फिर धीरे-धीरे बोलने लगी,
“कल रात… मैंने ऋचा को खाना खिलाकर जल्दी सुला दिया था, उसकी आज एग्जाम भी तो थी, उसे जल्दी सो जाने को कहा और सुबह जल्दी उठ के बाकी की पढाई करने को कहा। क्योंकि आज उसका एग्जाम था। जब गोपाल आए, तो मैंने उन्हें खाना खिलाया। खाने के बाद वो कपड़े बदलकर मेरे पास आए…” मैत्री पटेल की रचना।
मयूरी फिर से रुक गई। उसकी उँगलियाँ अपनी साड़ी के पल्लू को कसकर पकड़ रही थीं।
बाबाजी ने धीरे से पूछा, “हाँ… बोलो… आगे क्या हुआ? बिना गभराए जो हुआ सब बताओ।” उनका लंड फिर से खड़ा होकर हुंकारने लगा था। धोती के अंदर वह फड़क रहा था।
मयूरी ने शर्माते हुए, लेकिन उत्तेजना भरी आवाज़ में आगे कहा,
“फिर… उन्होंने बड़े प्यार से मुझे लिटाया। मेरा ब्लाउस खोल दिया… और ब्रा के ऊपर से ही मेरी छातियों को चूमने लगे।”
बाबाजी ने उसके कंधे पे हाथ रखते हुआ कहा: “प्रिय, यह छातिया क्या होती है? अपनी भाषा में बोलो “बोबले” कहो। ठीक है!”
बाबाजी ने गौर से देखा की मयूरी ये सब बोलते हुए फिर से तेज़ साँसें लेने लगी थी। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
मयूरी ने जारी रखा,
“फिर उन्होंने मेरी ब्रा भी उतार दी… और ज़िंदगी में पहली बार उन्होंने पूरे पाँच मिनट तक सिर्फ़ मेरे बोब्लो को चूमा, चूसा और दबाया। उन्होंने आज तक ऐसा नहीं किया था। शायद… ये आपका दिया हुआ ज्ञान ही था… है ना बाबाजी?”
मयूरी की आँखों में आभार और शर्म का मिश्रण था।
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिलाया और बोले, “हाँ… मैंने उन्हें कुछ बातें समझाई थीं। और यह जरुरी भी था। जो कल हमने किया मैंने उसे करने को कहा। मेरे ख्याल से मैंने ठीक ही किया है न?”
मयूरी ने और शर्माते हुए “हाँ” कहा,
“उन्होंने मेरे बोब्लो पर शहद भी लगाया… और उसे चाटा भी…”
बाबाजी की शरारत जाग उठी। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा… तो अब तुम मुझे ये बताओ कि गोपाल ने तुम्हें अच्छी तरह चूसा… या मैंने कल चूसा था?”
मयूरी का पूरा चेहरा, गर्दन और कान तक लाल सुर्ख हो गया। उसने काँपते होंठों से सिर्फ़ इतना ही कहा,
“गुरु के आगे चेले की क्या बिसात बाबाजी जी…आपने बहोत अच्छे से चूसा था, अगर दूध होता तो आपका पेट भर ही जाता।” वह भी शायद बात को इसी तरह आगे ले जाना चाहती थी। बाबाजी का लंड जो देख लिया था।
बाबाजी अपनी तारीफ सुनकर मन ही मन बहुत खुश हुए। उनकी आँखों में विजय की चमक थी।
उन्होंने आगे पूछा, “और फिर… क्या हुआ?”
मयूरी ने सिर झुकाकर, बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
“जब वो मेरे थनों को चूस रहे थे… तो मेरा एक हाथ… अपनी… अपनी उस जगह पर था… और मैं जोर-जोर से उसे रगड़ रही थी…”
बाबाजी ने जानबूझकर स्पष्ट शब्द इस्तेमाल किया,
“उस जगह यानी… तुम्हारी चूत पर? मयूरी, बिना कोई शर्म रखे बोलती रहो।”
मयूरी ने शर्म से आँखें बंद कर लीं और हाँ में सिर हिला दिया। एडिटर फनलवर है।
“और फिर… जोर-जोर से करते-करते मैं वहीं… झड़ गई। पर मेरी प्यास अभी तक बुझी नहीं थी। मैंने जैसे ही उन्हें अपने ऊपर खींचकर बचा हुआ काम पूरा करना चाहा… वो एकदम से उठे और बाहर चले गए। मैं सोचती रह गई कि उन्होंने मुझे ऐसी अवस्था में छोड़कर कहाँ चले गए। थोड़ी देर बाद मैं आधी नंगी होकर बाहर गई तो देखा कि वो सोफे पर जाकर सो चुके हैं।”
मयूरी की आवाज़ में निराशा और भूख दोनों थी,
“मुझे उनका ये बर्ताव समझ नहीं आया… ना तो उन्होंने मुझे पूरी तरह संतुष्ट किया, ना ही खुद संतुष्ट हुए। जो उन्होंने कभी नहीं किया था…ऐसा कोई करता है भला? बिना चो......दे.......” वह चोदे शब्द को बहोत धीमे से बोली पर बाबाजी के कान में जा गिरे थे।
बाबाजी जी ने मन ही मन गोपाल की सहनशक्ति की तारीफ की। “साला… मादरचोद....अच्छा कंट्रोल रखा है। ऋचा का लालच बड़ा है। बेटी की चूत के आगे बीवी की चूत की कोई कीमत नहीं रखी। सब मेरे इस लंड के लिए छोड़ दी थी।”
फिर उन्होंने मयूरी को सांत्वना देते हुए कहा,
“देखो मयूरी… तुम चिंता मत करो। उसने अपनी तरफ़ से इतना कुछ किया, जो पहले कभी नहीं किया था। शायद थक गया होगा। अगर तुम अपनी तरफ़ से थोड़ा और प्रयास करती तो शायद वो बाहर नहीं जाते…या फिर यह वह क्रिया थी जो आम लोगो नहीं करते इस लिए शर्म भी आती होगी, उसने सोचा होगा की तुम क्या सोच रही होगी। बहोत से कारण हो सकते है। लेकिन उसने इतना तो किया आगे और ज्यादा करेगा।” उन्हों ने मयूरी की झांगो को थपथपाते हुए कहा।
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Maitri Patel का निर्माण।



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