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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
रवि की भारी साँसों की आवाज़ कमरे के सन्नाटे में गूँज रही थी। वह गहरी और थकी हुई नींद में डूब चुका था। उसकी नींद इतनी गहरी थी कि उसे अपने आसपास की दुनिया का कोई होश नहीं था।
मम्मी उसे देख रही थीं। रवि को इस तरह बेसुध होकर सोते हुए देख उनके दिल में एक अजीब सी ममता और फिक्र जाग उठी। उनके मन में एक माँ वाली ममता उमड़ रही थी। उन्होंने धीरे से उसके माथे पर हाथ फेरा वह हाथ जो कुछ देर पहले तक उत्तेजना और वासना से भरा था, अब सिर्फ एक माँ की ममता और देखभाल से भरा था।
'कितना थका हुआ लग रहा है मेरा बच्चा,' उन्होंने मन ही मन सोचा। उनके दिमाग में अब कोई कामुक विचार नहीं थे, बल्कि सिर्फ रवि की सेहत और उसकी सुकून भरी नींद की चिंता थी। उन्होंने देखा कि रवि के चेहरे पर नींद में भी एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे वह किसी अधूरेपन से जूझ रहा हो।
**"मम्मी ने कमरे का AC फुल स्पीड पर कर दिया ताकि बाहर की उमस भरी गर्मी कमरे के भीतर न पहुँच सके और एक ठंडी सी सिहरन पूरे माहौल में फैल जाए। वह चाहती थीं कि रवि बिना किसी परेशानी के अपनी नींद पूरी कर सके।।"**उनके मन में बस एक ही ख्याल था 'सो जा मेरे लाल,उसके बाद तो तुझे सारी रात मेरे साथ जागकर बहुत काम करना है।'
वह कुछ देर तक वहीं बैठी रही, बस उसे सोते हुए देखती रहीं। एक माँ की तरह, जो अपने बच्चे की हर छोटी बड़ी ज़रूरत का ख्याल रखती है। उनकी आँखों में रवि के लिए कामुक भावना के साथ प्रेम और उसकी सुरक्षा की भावना भी थी। वह चाहती थीं कि जब रवि उठे, तो वह पूरी तरह तरोताजा और ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करे।
मम्मी ने रवि को चादर से अच्छे से ढँक दिया और उसके माथे को चूमकर एक लंबी सांस ली। उनके मन में एक अजीब सा सुकून था कि उन्होंने अपने बेटे की सेहत और उसकी रात की ऊर्जा के लिए जो किया है, वह सफल रहा। अब उन्हें भी खुद को थोड़ा आराम देना था, क्योंकि उन्हें पता था कि आज की रात बहुत लंबी और थका देने वाली होने वाली है। रवि को पूरी रात बिना रुके अपनी भूख मिटाने के लिए तैयार करना था, और इसके लिए मम्मी को भी खुद को भी तरोताजा रखना ज़रूरी था।

मम्मी ने भी अपनी आँखें मूँद लीं और कुछ देर के लिए गहरी नींद की आगोश में चली गईं। कमरे में एक भारी और शांत सन्नाटा पसर गया था।

लेकिन मम्मी की नींद बहुत कच्ची थी। जैसे ही कुछ देर बाद उनकी आँख खुली, उन्होंने घड़ी की तरफ देखा। उन्हें अहसास हुआ कि अगर वह अभी नहीं उठीं, तो दुकान का काम पिछड़ जाएगा। उन्होंने खुद को झटके से संभाला और अपनी थकान को किनारे रख दिया। उनके दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी रवि की रात की 'जरूरतों' को पूरा करने के लिए उन्हें पूरी तरह तैयार रहना है।

मम्मी जल्दी से उठीं, अपना चेहरा धोया और खुद को तैयार किया। उन्होंने सोचा कि दुकान का काम निपटाकर वह जल्दी घर लौट आएँगी ताकि रवि के जागने से पहले वह खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से उस 'तूफान' के लिए तैयार कर सकें जो आज रात उनके साथ होने वाला था।

बिना किसी शोर के, मम्मी दबे पाँव कमरे से बाहर निकलीं और सीधे दुकान की तरफ चल दीं। उनके मन में एक तरफ ममता थी और दूसरी तरफ उस आने वाली रात का एक अनजाना सा रोमांच।
मम्मी दुकान की तरफ बढ़ तो रही थीं, लेकिन उनके दिमाग में जो चल रहा था, वह किसी भी आम औरत के ख्यालों से कोसों दूर और बेहद **'खतरनाक'** था। दुकान की भीड़ और शोर के बीच भी उनका मन बार बार उसी कमरे की ओर भाग रहा था जहाँ रवि बेसुध सोया हुआ था।

जैसे जैसे वह कदम बढ़ा रही थीं, उनके मन में एक विचार किसी ज़हरीली लत की तरह फैलता जा रहा था। वह सोच रही थीं कि आज की रात सिर्फ रवि के लिए ही क्यों? रवि का जोश, उसका वह जंगलीपन और उसकी वह भूख... क्या वह अकेले ही इस सब को संभाल पाएँगी? क्या वह रवि की उस बेतहाशा प्यास को पूरी रात तृप्त कर पाएँगी?

तभी उनके दिमाग के एक अंधेरे कोने से एक ऐसा ख्याल निकला जिसने उनके शरीर में एक सिहरन पैदा कर दी। **परदीप भाई साहब...'**

मम्मी के कदम एक पल के लिए ठिठके। उन्होंने खुद को झकझोरा, लेकिन वह ख्याल अब उनके काबू में नहीं था। उनके मन में एक बहुत ही **'Taboo'** और **'Dark'** योजना आकार ले रही थी। वह सोच रही थीं कि अगर प्रदीप भाई साहब भी वहाँ होते, तो नज़ारा कितना अलग होता। रवि का वह कच्चा जोश और अंकल का वह अनुभवी और भारीपन... अगर ये दोनों मिलकर उन्हें घेर लेते, तो क्या होता?

'क्या यह गलत है?' उनके मन ने एक पल के लिए पूछा, लेकिन तुरंत ही उनकी कामुक कल्पनाओं ने उस सवाल को दबा दिया। उन्हें लगा कि अगर अंकल भी इस खेल का हिस्सा बन जाएँ, तो आज की रात सिर्फ सेक्स नहीं, बल्कि एक ऐसा **'Carnival of Pleasure'** होगा जिसे रवि और वह कभी नहीं भूल पाएंगे। वह कल्पना मात्र से ही महसूस कर सकती थीं कि कैसे तीन जिस्म एक दूसरे में उलझे होंगे, कैसे वह अंकल और रवि के बीच में पिसती हुई उस चरम सुख की लहर को महसूस करेंगी।रवि की तरफ से उसे कोई डर नहीं था क्योंकि वो तो पहले से ही इस threesom को महसूस करना चाहता था ,इसका भागीदार बनकर।

मम्मी के चेहरे पर एक अजीब सी, गहरी और रहस्यमयी मुस्कान आ गई। वह जानती थीं कि वह क्या करने वाली हैं। वह अंकल को बुलाने का विचार अब सिर्फ एक ख्याल नहीं, बल्कि एक **'Mission'** बन चुका था। वह चाहती थीं कि आज की रात उनके जीवन की सबसे **'Wild'** और **'Unforgettable'** रात हो।

दुकान पहुँचते पहुँचते उनके मन में सब तय हो चुका था। वह अब सिर्फ एक माँ या एक औरत नहीं थीं, वह एक ऐसी खिलाड़ी बन चुकी थीं जो आज रात एक बहुत बड़ा और **'Hot'** खेल खेलने वाली थीं।
मम्मी की धड़कनें अब इतनी तेज हो गई थीं कि उन्हें महसूस हो रहा था कि उनका सीना किसी पिंजरे में बंद पंछी की तरह फड़फड़ा रहा है। दुकान के काउंटर के पीछे खड़े होकर वह ग्राहकों को सामान तो दे रही थीं, लेकिन उनकी आँखों के सामने जो दृश्य नाच रहे थे, वे किसी भी सभ्य इंसान के होश उड़ा देने के लिए काफी थे।

उनके मन में एक गहरा और डरावना सवाल बार बार कौंध रहा था **'क्या मैं वाकई यह कर पाऊँगी? इस उम्र में... क्या मेरा शरीर एक साथ दो मर्दों के इस बेतहाशा, जंगली और बेकाबू वार को झेल पाएगा?'** वह कल्पना कर रही थीं कि एक तरफ रवि का वह कच्चा, अनियंत्रित और युवा जोश होगा, और दूसरी तरफ अंकल का वह भारी, अनुभवी और ताकतवर मर्दानापन। वह सोच रही थीं कि जब ये दो विपरीत ताकतें उनके जिस्म पर एक साथ हमला करेंगी, तो क्या वह उस सुख के भंवर में डूबकर संभल पाएँगी या फिर पूरी तरह टूट जाएँगी? उन्हें डर था कि कहीं यह रोमांच उनके शरीर के लिए बहुत भारी न पड़ जाए।

लेकिन जैसे ही यह डर उनके मन में गहरा उतरने लगा, उन्होंने अपनी आँखें जोर से बंद कीं और अपने अतीत के उन अंधेरे और नशीले पन्नों को पलटने लगीं। वह खुद को झकझोरते हुए मन ही मन मुस्कुराईं और सोचने लगीं, **'डर कैसा? मैं तो पहले भी इन सब रास्तों पर चल चुकी हूँ। प्रदीप अंकल और उनके दोस्तों के साथ... मैंने तो सिर्फ थ्रिसम ही नहीं, बल्कि फोरसम के भी वो नशीले और गंदे स्वाद चखे हैं जिन्हें याद करके आज भी जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती है।'** उन पुरानी यादों ने उनके भीतर दबी हुई उस 'बदमाश' औरत को पूरी तरह जगा दिया था।

तभी उनके दिमाग में एक ऐसा विचार आया जिसने उनके होश उड़ा दिए और उनके चेहरे पर एक गहरी, कामुक मुस्कान ला दी। वह सोचने लगीं कि इस बार का खेल पिछले अनुभवों से कहीं ज्यादा **'Dark'** और **'Intense'** होने वाला है। * इस बार खेल में कोई अजनबी नहीं, बल्कि मेरा अपना रवि है। मेरा अपना खून! जब वह पहली बार इस थ्रिसम के खौफनाक और मदहोश कर देने वाले चक्रव्यूह में कदम रखेगा, जब वह अपनी आँखों से देखेगा कि उसकी माँ दो मर्दों के बीच कैसे पिस रही है और कैसे उन दोनों के वार को झेल रही है... तो वह नज़ारा कितना मस्ती भरा होगा!'**


वह कल्पना कर रही थीं कि रवि को अंदाज़ा भी नहीं होगा कि आज की रात उसके लिए क्या होने वाला है। वह सोच रही थीं कि जब रवि अपनी माँ के साथ एक निजी पल बिताने की उम्मीद कर रहा होगा, लेकिन जैसे ही उसकी नज़र अंकल के उस भारी और मदहोश कर देने वाले साये पर पड़ेगी, उसके चेहरे के हाव भाव हैरानी और खुशी में बदल जायेंगे,क्योंकि उसकी भी तो दिली इच्छा है मेरे और प्रदीप भाई साहब के साथ मिलकर मजे यानि threesom करने की। वह देखना चाहेगा कि कैसे उसकी माँ, जिसे वह अब तक सिर्फ एक माँ के रूप में देखता आया था, दो मर्दों के बीच एक खिलौने की तरह पिस रही है। वह देखना चाहेगा कि कैसे अंकल का अनुभव और रवि का कच्चा जोश मिलकर उसके जिस्म को एक युद्ध के मैदान में बदल देंगे।

मम्मी के मन में एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना का मेल था। उन्होंने सोचा, **'रवि को इस थ्रिसम का हिस्सा बनाकर मैं उसे वो सब सिखाऊँगी जो उसने कभी सपनों में भी नहीं सोचा होगा। वह देखेगा कि कैसे एक औरत दो मर्दों के वार को अपने भीतर समा लेती है। वह देखेगा कि कैसे उसकी माँ की चीखें और उसकी सिसकियाँ एक साथ मिलकर कमरे की हवा को और भी भारी और गंदा बना देंगी।'**

तभी उनके दिमाग में एक व्यावहारिक चिंता ने दस्तक दी। **'पर अगर थ्रिसम हुआ, तो मैं एक पल के लिए भी सो नहीं पाऊँगी। कल रात की थकान अभी उतरी भी नहीं है और अगर मैं इस पागलपन में बीमार पड़ गई तो काम कैसे चलेगा?'** उन्होंने अपनी थकान और शरीर की सीमाओं को महसूस किया, लेकिन उनकी कामुकता उनके डर पर भारी पड़ रही थी। उन्होंने तुरंत एक योजना बनाई, **'नहीं, मैं रवि को छुट्टी करवा लूँगी।हम दोनों मिलकर एक दूसरे को बारी बारी से रेस्ट देंगे।सुबह रवि दुकान खोल लेगा मै पूजा पाठ के बाद सो के अपनी नींद पूरी कर लूंगी ,फिर मैं दुकान देख लूंगी रवि नींद पूरी कर लेगा।


अब उनके पास सब कुछ तय था। डर और रोमांच के इस भंवरजाल में फंसी मम्मी ने अपनी हिम्मत जुटाई और फैसला किया कि अब और इंतज़ार नहीं किया जा सकता।


**अब मम्मी देख रही थीं कि प्रदीप अंकल की तरफ कोई आता जाता मिले, ताकि वह उनके ज़रिए प्रदीप अंकल को सुनहरा संदेश भेज सकें कि आज रात घर आ जाएँ। वैसे तो मम्मी रवि को भी भेज सकती थीं, पर वह तो गहरी नींद में था और पता नहीं कब जागे। उन्होंने सोचा, 'चलो, इसी बहाने रवि के लिए भी एक सरप्राइज हो जाएगा उसकी अधूरी इच्छा पूरी करने वाला एक जबरदस्त सरप्राइज ,मदहोश कर देने वाला सरप्राइज!'**
**तभी मम्मी की नज़र गली से जाते हुए एक आदमी पर पड़ी। वह जग्गू अंकल थे वही जग्गू जो प्रदीप का सामान लेने अक्सर हमारी दुकान पर आया करते थे। उन्हें देखते ही मम्मी खुशी से झूम उठीं और तुरंत उन्हें आवाज़ लगाई, "जग्गू! अरे ओ जग्गू! ज़रा सुनो तो!"**

**मम्मी की आवाज़ सुनकर उन्होंने अपनी बाइक रोकी और दौड़ते हुए मम्मी के पास आ गए। "जी बहनजी, " जग्गू अंकल ने बड़े अदब से कहा।**

**मम्मी ने इधर उधर देखते हुए धीरे से कहा, "जग्गू, प्रदीप भाई साहब को बोलना कि आज रात को कोई ज़रूरी काम है, तो घर आ जाएँ।"**

**जैसे ही मम्मी ने यह कहा, दोनों की नज़रें मिलीं। उन दोनों की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वे आँखों ही आँखों में कोई गहरा और गुप्त राज साझा कर रहे हों। तभी अचानक जग्गू अंकल ने शरारत भरी मुस्कान के साथ अपनी एक आँख दबाई और बोले, "अरे बहनजी! कभी हमें भी कोई जरुरी काम बता दिया करो, हम भी आजकल सब कामों में काफी माहिर हो गए हैं,और हर काम तसल्लीबख्श करते हैँ!"**

**मम्मी ने जग्गू अंकल की इस बेशर्म और नटखट बात पर उन्हें मुस्कुराते हुए झिड़क दिया और कहा, "चुप रहो बदतमीज़! अपनी उम्र देखो और अपनी बातें देखो, बस जाओ यहाँ से!"**
पर भाभी जी(जग्गू अंकल मम्मी को कभी भाभी जी तो कभी बहनजी कहकर बुलाता था),प्रदीप भाई साहब तो......

**"पर भाभी जी, प्रदीप भाई साहब तो......"

*जग्गू ने प्रदीप अंकल के बारे में मम्मी से क्या कहा? और उस रात आखिर क्या क्या हुआ? यह जानने के लिए कृपया अगला पार्ट पढ़ें। और हाँ, आप सभी पाठकों से गुज़ारिश है कि कमेंट में अपनी कल्पना ज़रूर लिखें कि आखिर जग्गू अंकल ने मम्मी को प्रदीप अंकल के बारे में क्या कहा होगा!*
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Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 08-08-2026, 11:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 01:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-08-2026, 02:12 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:19 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:34 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Nomita - 12-08-2026, 04:17 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Suhana. - 12-08-2026, 07:15 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by shalini - 12-08-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 13-08-2026, 09:39 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-08-2026, 12:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:19 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 08:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 03:48 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 14-08-2026, 03:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fanfunda - 14-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 04:58 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:43 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 16-08-2026, 12:37 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Rijwana Ansaari - 18-08-2026, 02:13 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:01 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Kodom Ali Mastan - 25-08-2026, 07:24 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 31-08-2026, 06:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 31-08-2026, 08:04 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by LENNY - 31-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Tasnova - 31-08-2026, 02:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 31-08-2026, 09:46 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 01-09-2026, 01:05 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Peeping Tom - 01-09-2026, 05:08 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 03-09-2026, 10:31 PM
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