15-09-2026, 01:14 PM
मूवी खत्म होते ही हॉल की लाइटें जल उठीं।
अमन और राधा दोनों उठे। हाथ अभी भी एक-दूसरे में फँसे हुए थे। राधा के गाल हल्के लाल थे, आँखों में वह शर्मीली चमक बाकी थी जो सिर्फ अमन के लिए थी। दोनों धीरे-धीरे भीड़ के साथ बाहर निकले। शहर की शाम घिर चुकी थी। आसमान में नारंगी रंग के आखिरी निशान बचे थे। सड़क पर गाड़ियों की रोशनी तेज हो रही थी।
अमन ने राधा के कान के पास झुककर बहुत धीमे स्वर में कहा,
“आज का दिन… मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगा।”
राधा ने उसका हाथ और कस लिया। आवाज में हल्की सिहरन थी, “मैं भी नहीं… अमन।”
वे चुपचाप बस स्टैंड की तरफ चलने लगे। गली अपेक्षाकृत सुनसान थी। दोनों के कदम मिलकर चल रहे थे। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहे थे—मूवी वाले अँधेरे कोने की यादें अभी ताजा थीं।
तभी पीछे से एक तेज, गुस्से भरी इंजन की आवाज ने हवा को चीर दिया।
अमन ने झटके से पीछे मुड़ा।
एक मोटरसाइकिल पागलों की रफ्तार से उनकी तरफ आ रही थी। हेडलाइट इतनी तेज थी कि आँखें चौंधिया गईं। लेकिन रोशनी के पीछे का चेहरा अमन ने साफ पहचान लिया।
राजिया का भाई।
आँखें तरेरी हुईं। दाँत भींचे हुए। चेहरे पर पागलपन और जलन साफ लिखी थी। वह जानबूझकर अमन को कुचलने वाला था।
समय जैसे थम सा गया।
“राधा!!” अमन ने चीखते हुए राधा को पूरी ताकत से एक तरफ धकेल दिया।
खुद भी आखिरी पल में शरीर को मोड़ते हुए साइड में कूद पड़ा।
मोटरसाइकिल ठीक उसी जगह से गुजरी जहाँ एक सेकंड पहले अमन खड़ा था। हवा के झोंके ने दोनों के बाल उड़ा दिए। राजिया का भाई नियंत्रण पूरी तरह खो बैठा। हैंडल उसके हाथ से छूट गया। मोटरसाइकिल लड़खड़ाई, चीखी, और फिर सीधी सड़क के किनारे वाली गहरी खाई की तरफ उड़ गई।
एक जोरदार, दिल दहला देने वाली आवाज।
फिर… सन्नाटा।
अमन जमीन पर गिरा हुआ था। हाथ-पैर पर खरोंचें आ गई थीं। साँसें तेज चल रही थीं। उसने तुरंत उठकर राधा की तरफ देखा। राधा कुछ कदम दूर दीवार से सटकर खड़ी काँप रही थी। आँखों में आँसू और डर दोनों थे।
दोनों ने एक साथ खाई की तरफ देखा।
नीचे अँधेरा था। मोटरसाइकिल की हेडलाइट टेढ़ी होकर जल रही थी। रोशनी में राजिया के भाई का शरीर अजीब अंदाज में पड़ा दिख रहा था। हिल नहीं रहा था। बिल्कुल नहीं।
दूर से लोगों की आवाजें आने लगीं। किसी ने चिल्लाया, “एक्सीडेंट हो गया!” कोई दौड़ता हुआ आ रहा था। किसी ने फोन निकाला। सिक्युरिटी की सायरन दूर से सुनाई देने लगी।
अमन ने राधा का हाथ पकड़ा। आवाज कठोर और तेज थी,
“चल… अभी यहाँ से जाना है।”
राधा की आवाज टूट रही थी, “अमन… वह… वह तो मर गया न…?”
अमन ने जवाब नहीं दिया। सिर्फ उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया और दोनों तेजी से बस स्टैंड की तरफ भागे। एक बस आ ही रही थी। दोनों ने बिना टिकट लिए ही चढ़कर पीछे की सीट पर बैठ गए। बस चल पड़ी।
खिड़की से पीछे देखते रहे। भीड़ जमा हो चुकी थी। रोशनी में लोग खाई के किनारे झुककर देख रहे थे। सिक्युरिटी की गाड़ी पहुँच चुकी थी।
राधा का सिर अमन के कंधे पर टिक गया। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। अमन ने उसका हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया। खुद की धड़कन भी अभी तक नहीं थमी थी।
बहुत देर तक दोनों ने कुछ नहीं कहा। बस के अंदर सिर्फ इंजन की आवाज और राधा की काँपती साँसें थीं।
गाँव के स्टॉपेज पर बस रुकी। दोनों उतरे। रात का अँधेरा अब गहरा हो चुका था। गली सुनसान थी।
राधा ने अमन को देखते हुए बहुत धीमी आवाज में कहा,
“अमन… उसने जानबूझकर मारा था न?”
अमन ने उसकी आँखों में देखा। कुछ पल चुप रहा। फिर सिर हिलाया।
“हाँ। जानबूझकर।”
राधा की आँखों से आँसू बह निकले। अमन ने उसके आँसू पोंछे।
“घर जाओ राधा। आज और कुछ मत सोचना। मैं ठीक हूँ।”
राधा ने उसका हाथ नहीं छोड़ा। “तुम… संभाल के रहना। वादा करो।”
अमन ने उसके हाथ को अपने गाल से लगाया। “वादा। अब जाओ।”
राधा ने एक लंबी निगाह और डाली, फिर तेजी से अपने घर की तरफ चल दी। अमन अकेला खड़ा रहा। उसके हाथ अभी भी हल्के काँप रहे थे।
वह घर की तरफ बढ़ा। कदम भारी थे। दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
राजिया का भाई अब नहीं रहा।
लेकिन क्या यह घटना यहीं खत्म हो गई थी?
या यह तो बस शुरुआत थी किसी और बड़े तूफान की…
अमन ने गली के मोड़ पर रुककर पीछे मुड़ा। अँधेरा खाली था। लेकिन उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई अब भी उसे देख रहा हो।
वह नहीं जानता था कि इस रात के बाद गाँव में बहुत कुछ बदलने वाला था।
अमन और राधा दोनों उठे। हाथ अभी भी एक-दूसरे में फँसे हुए थे। राधा के गाल हल्के लाल थे, आँखों में वह शर्मीली चमक बाकी थी जो सिर्फ अमन के लिए थी। दोनों धीरे-धीरे भीड़ के साथ बाहर निकले। शहर की शाम घिर चुकी थी। आसमान में नारंगी रंग के आखिरी निशान बचे थे। सड़क पर गाड़ियों की रोशनी तेज हो रही थी।
अमन ने राधा के कान के पास झुककर बहुत धीमे स्वर में कहा,
“आज का दिन… मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगा।”
राधा ने उसका हाथ और कस लिया। आवाज में हल्की सिहरन थी, “मैं भी नहीं… अमन।”
वे चुपचाप बस स्टैंड की तरफ चलने लगे। गली अपेक्षाकृत सुनसान थी। दोनों के कदम मिलकर चल रहे थे। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहे थे—मूवी वाले अँधेरे कोने की यादें अभी ताजा थीं।
तभी पीछे से एक तेज, गुस्से भरी इंजन की आवाज ने हवा को चीर दिया।
अमन ने झटके से पीछे मुड़ा।
एक मोटरसाइकिल पागलों की रफ्तार से उनकी तरफ आ रही थी। हेडलाइट इतनी तेज थी कि आँखें चौंधिया गईं। लेकिन रोशनी के पीछे का चेहरा अमन ने साफ पहचान लिया।
राजिया का भाई।
आँखें तरेरी हुईं। दाँत भींचे हुए। चेहरे पर पागलपन और जलन साफ लिखी थी। वह जानबूझकर अमन को कुचलने वाला था।
समय जैसे थम सा गया।
“राधा!!” अमन ने चीखते हुए राधा को पूरी ताकत से एक तरफ धकेल दिया।
खुद भी आखिरी पल में शरीर को मोड़ते हुए साइड में कूद पड़ा।
मोटरसाइकिल ठीक उसी जगह से गुजरी जहाँ एक सेकंड पहले अमन खड़ा था। हवा के झोंके ने दोनों के बाल उड़ा दिए। राजिया का भाई नियंत्रण पूरी तरह खो बैठा। हैंडल उसके हाथ से छूट गया। मोटरसाइकिल लड़खड़ाई, चीखी, और फिर सीधी सड़क के किनारे वाली गहरी खाई की तरफ उड़ गई।
एक जोरदार, दिल दहला देने वाली आवाज।
फिर… सन्नाटा।
अमन जमीन पर गिरा हुआ था। हाथ-पैर पर खरोंचें आ गई थीं। साँसें तेज चल रही थीं। उसने तुरंत उठकर राधा की तरफ देखा। राधा कुछ कदम दूर दीवार से सटकर खड़ी काँप रही थी। आँखों में आँसू और डर दोनों थे।
दोनों ने एक साथ खाई की तरफ देखा।
नीचे अँधेरा था। मोटरसाइकिल की हेडलाइट टेढ़ी होकर जल रही थी। रोशनी में राजिया के भाई का शरीर अजीब अंदाज में पड़ा दिख रहा था। हिल नहीं रहा था। बिल्कुल नहीं।
दूर से लोगों की आवाजें आने लगीं। किसी ने चिल्लाया, “एक्सीडेंट हो गया!” कोई दौड़ता हुआ आ रहा था। किसी ने फोन निकाला। सिक्युरिटी की सायरन दूर से सुनाई देने लगी।
अमन ने राधा का हाथ पकड़ा। आवाज कठोर और तेज थी,
“चल… अभी यहाँ से जाना है।”
राधा की आवाज टूट रही थी, “अमन… वह… वह तो मर गया न…?”
अमन ने जवाब नहीं दिया। सिर्फ उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया और दोनों तेजी से बस स्टैंड की तरफ भागे। एक बस आ ही रही थी। दोनों ने बिना टिकट लिए ही चढ़कर पीछे की सीट पर बैठ गए। बस चल पड़ी।
खिड़की से पीछे देखते रहे। भीड़ जमा हो चुकी थी। रोशनी में लोग खाई के किनारे झुककर देख रहे थे। सिक्युरिटी की गाड़ी पहुँच चुकी थी।
राधा का सिर अमन के कंधे पर टिक गया। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। अमन ने उसका हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया। खुद की धड़कन भी अभी तक नहीं थमी थी।
बहुत देर तक दोनों ने कुछ नहीं कहा। बस के अंदर सिर्फ इंजन की आवाज और राधा की काँपती साँसें थीं।
गाँव के स्टॉपेज पर बस रुकी। दोनों उतरे। रात का अँधेरा अब गहरा हो चुका था। गली सुनसान थी।
राधा ने अमन को देखते हुए बहुत धीमी आवाज में कहा,
“अमन… उसने जानबूझकर मारा था न?”
अमन ने उसकी आँखों में देखा। कुछ पल चुप रहा। फिर सिर हिलाया।
“हाँ। जानबूझकर।”
राधा की आँखों से आँसू बह निकले। अमन ने उसके आँसू पोंछे।
“घर जाओ राधा। आज और कुछ मत सोचना। मैं ठीक हूँ।”
राधा ने उसका हाथ नहीं छोड़ा। “तुम… संभाल के रहना। वादा करो।”
अमन ने उसके हाथ को अपने गाल से लगाया। “वादा। अब जाओ।”
राधा ने एक लंबी निगाह और डाली, फिर तेजी से अपने घर की तरफ चल दी। अमन अकेला खड़ा रहा। उसके हाथ अभी भी हल्के काँप रहे थे।
वह घर की तरफ बढ़ा। कदम भारी थे। दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
राजिया का भाई अब नहीं रहा।
लेकिन क्या यह घटना यहीं खत्म हो गई थी?
या यह तो बस शुरुआत थी किसी और बड़े तूफान की…
अमन ने गली के मोड़ पर रुककर पीछे मुड़ा। अँधेरा खाली था। लेकिन उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई अब भी उसे देख रहा हो।
वह नहीं जानता था कि इस रात के बाद गाँव में बहुत कुछ बदलने वाला था।
Fuckuguy
albertprince547;
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