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Incest परिवार के गंदे राज़
#42
रात के खाने के बाद घर धीरे-धीरे शांत हो गया।
अमन अपने कमरे में लेटा हुआ था। दिन भर की बातें दिमाग में घूम रही थीं—सुबह कमला चाची का गोद में बैठना और स्तन दबाना, फिर खेत में रुक्साना का टाइट काला सूट, बगीचे के अंदर उसकी नंगी सफेद गाँड, और वह जानबूझकर उठाया हुआ अंदाज। शरीर में एक बेचैनी थी।
बारह बजने से थोड़ा पहले दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन उठकर बैठ गया।
“दीदी,” उसने सीधे पूछा, “मुझे आपके साथ पूरी रात बिताने का मौका कब मिलेगा?”
रेणु की आँखों में हल्की मुस्कान तैर गई। उन्होंने अमन का हाथ पकड़ लिया।
“बहुत जल्दी,” उन्होंने धीमे स्वर में कहा। “सब्र का फल मीठा होता है।”
अमन उनके करीब खिसक गया। रेणु ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया और गहराई से चूम लिया। चुंबन इस बार पहले से लंबा और गहरा था। जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। अमन के हाथ रेणु की कमर पर चले गए। उसने उन्हें और करीब खींच लिया।
रेणु ने अमन की पैंट का नाड़ा खोला। लंड बाहर निकल आया—सख्त और गर्म। रेणु ने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर झुककर लंड को मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ सिर चूसा, जीभ घुमाई, फिर धीरे-धीरे और गहराई तक ले गईं। गले तक। अमन की उंगलियाँ उनके बालों में फँस गईं।
“दीदी…” अमन की आवाज काँप रही थी।
रेणु ने जवाब में और जोर से चूसा। कभी पूरा लंड मुँह में ले लेतीं, कभी निकालकर सिर्फ सिर को चाटतीं। उनकी जीभ नसों पर घूम रही थी। अमन की साँसें तेज हो गईं। कमर अपने आप हिलने लगी।
थोड़ी देर बाद रेणु ने लंड मुँह से निकाला। लार से चमक रहा था। उन्होंने खुद सलवार नीचे सरका दी और बिस्तर पर लेट गईं। पैर फैला दिए।
“अब तुम करो,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा।
अमन उनके पैरों के बीच झुक गया। उसने पहले नाक से उनकी चूत की खुशबू ली। फिर जीभ निकालकर नीचे से ऊपर तक चाटा। रेणु की कमर हिल गई। अमन ने बीच वाली घुंडी को मुँह में लिया और हल्के-हल्के चूसने लगा। कभी जीभ अंदर डालता, कभी बाहर निकालकर चाटता।
रेणु की सिसकारियाँ दबी हुई निकल रही थीं। उनके हाथ अमन के बालों में कस गए।
“हाँ… वहीं… जीभ अंदर… और तेज…”
अमन ने वैसा ही किया। जीभ तेजी से अंदर-बाहर होने लगी। साथ में ऊपर वाली जगह को भी अंगूठे से सहलाता रहा। रेणु का शरीर काँपने लगा। जाँघें अमन के सिर को जकड़ रही थीं। थोड़ी देर में उनका शरीर अकड़ गया। पानी अमन के मुँह और ठुड्डी पर छूट गया। रेणु लंबी सिसकारी के साथ काँपती रहीं।
अमन ऊपर आया। रेणु ने उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होंठ चूमने लगीं—अपना ही स्वाद लेते हुए। दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे से चिपके रहे। साँसें तेज चल रही थीं।
रेणु ने अमन के माथे पर चुंबन करते हुए फिर कहा,
“सब्र का फल मीठा होता है अमन। बहुत जल्दी… पूरी रात बिताने का मौका मिलेगा। तब तुम जो चाहोगे, कर सकोगे।”
अमन ने उनकी आँखों में देखा। “मैं इंतजार करूँगा दीदी।”
रेणु मुस्कुराईं। उन्होंने अमन के बाल सहलाए। “आज दिन कैसा रहा? कुछ खास हुआ?”
अमन ने सुबह कमला चाची वाली बात संक्षेप में बता दी। रुक्साना वाले बगीचे और मूतने वाले दृश्य को उसने थोड़ा छुपाते हुए सिर्फ इतना कहा कि खेत में रुक्साना मिली थीं और आम तोड़े। रेणु ने गंभीर होकर सुना लेकिन ज्यादा नहीं पूछा।
“कमला चाची अब दिन में भी खेलने लगी हैं,” रेणु ने कहा। “संभाल के रहना। और बाहर की औरतों के साथ जल्दबाजी मत करना।”
अमन ने सिर हिलाया।
रेणु ने कपड़े ठीक किए और उठ खड़ी हुईं। लालटेन उठाई। दरवाजे तक जाकर बोलीं,
“सो जाओ। कल फिर मिलेंगे।”
वह चली गईं।
अमन अकेला रह गया। होंठों पर रेणु का स्वाद था। दिमाग में कमला चाची के स्तन, रुक्साना की सफेद गाँड और रेणु का वादा—सब एक साथ तैर रहे थे।
“बहुत जल्दी…” उसने अपने आप से दोहराया।
नींद धीरे-धीरे आई।


बुधवार की सुबह अमन कॉलेज पहुँचा।
दिन सामान्य लग रहा था। कक्षा में राधा अपनी जगह पर बैठी थी। अमन के जाते ही उसने मुस्कुरा दिया। दोनों की निगाहें मिलीं। ब्रेक में अमन ने राधा को पीछे वाले शांत कोने में बुलाया।
“कल छुट्टी नहीं है… लेकिन हम कॉलेज आकर भी नहीं आ सकते,” अमन ने धीमे स्वर में कहा।
राधा ने उसकी तरफ देखा। “मतलब?”
अमन ने थोड़ा करीब आकर कहा, “कल कॉलेज बंक करके पास के शहर चले जाते हैं। मूवी देखते हैं। पूरा दिन सिर्फ हम दोनों का।”
राधा की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। गाल हल्के लाल हो गए। “मूवी…? अकेले?”
अमन ने उसका हाथ पकड़ लिया। “हाँ। कोई नहीं जानेगा। सुबह कॉलेज की तरफ निकलेंगे, लेकिन बस पकड़कर शहर चले जाएँगे। शाम तक वापस आ जाएँगे।”
राधा कुछ पल चुप रही। फिर धीरे से मुस्कुराई। “ठीक है… चलते हैं।”
दोनों की आँखों में उत्साह था। वे और थोड़ी देर खड़े बातें करते रहे—कौन सी मूवी देखेंगे, कहाँ बैठेंगे, कैसे समय निकालेंगे। राधा बीच-बीच में शर्मा रही थी, लेकिन उसकी आँखों में खुशी साफ झलक रही थी।
वे दोनों इतने में व्यस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि थोड़ी दूर, दीवार के पीछे कोई खड़ा उनकी सारी बातें सुन रहा था।
वह व्यक्ति राजिया का भाई था।
वह काफी दिनों से राधा को पसंद करता था। चुपके-चुपके देखा करता था। लेकिन आज जब उसने अमन और राधा की योजना सुनी—कॉलेज बंक करके शहर जाकर मूवी देखने की—तो उसके चेहरे पर गुस्सा तैर आया। आँखें त हो गईं। उसने मुट्ठी भींच ली।
“साला… मेरी राधा को लेकर घूमेगा?” उसने दबी आवाज में कहा। “मैं इसे छोड़ूँगा नहीं।”
उसके दिमाग में तुरंत एक खतरनाक ख्याल आया। वह अमन को सबक सिखाने का प्लान बनाने लगा।
कॉलेज खत्म होने के बाद अमन और राधा ने एक-दूसरे को नजरों से इशारा किया। कल का प्लान पक्का हो चुका था। अमन घर की तरफ निकला। दिल में हल्की सी बेचैनी और उत्साह दोनों थे।
घर पहुँचकर उसने जल्दी से हाथ-मुँह धोया। खाना खाया। सरला चाची ने उसके लिए मिठाई निकाली। कमला चाची ने दूर से ही एक लंबी निगाह डाली, लेकिन अमन ने इस बार ज्यादा देर नहीं ठहरी।
रात को खाना खाकर वह जल्दी अपने कमरे में चला गया। आज कोई खास बात नहीं हुई घर में। मन कल की मूवी और राधा के साथ बिताए जाने वाले समय में उलझा हुआ था।
रेणु भी नहीं आईं। शायद व्यस्त थीं।
अमन ने लाइट बुझा दी और बिस्तर पर लेट गया। आँखें बंद करते ही राधा का चेहरा आँखों के सामने आ गया—मुस्कान, शर्माना, और कल का वादा।
वह मुस्कुराया और जल्दी सो गया।
घर शांत था। लेकिन कहीं बाहर, राजिया के भाई के मन में एक काला प्लान पक रहा था।
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गुरुवार की सुबह अमन कॉलेज बैग लेकर निकला, लेकिन उसका मन कॉलेज में नहीं था।
गली के मोड़ पर राधा पहले से खड़ी थी। हल्के गुलाबी रंग का सलवार-सूट पहना था। बालों में दो छोटी लटें थीं। चेहरे पर हल्की सिंदूरी चमक और आँखों में उत्साह साफ दिख रहा था। अमन को देखते ही वह मुस्कुरा दी।
“तैयार हो?” अमन ने धीमे स्वर में पूछा।
राधा ने सिर हिलाया। “हाँ… चलो।”
दोनों कॉलेज की तरफ थोड़ा चलकर फिर दूसरी गली से निकल गए। बस स्टैंड पर जाकर पास के शहर जाने वाली बस पकड़ी। खिड़की वाली सीट पर बैठे। रास्ता लगभग एक घंटे का था। दोनों ज्यादा नहीं बोले, लेकिन कभी-कभी उनकी निगाहें मिल जातीं और दोनों मुस्कुरा देते। राधा का हाथ बीच-बीच में अमन के हाथ के करीब आ जाता। अमन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। राधा ने छुड़ाया नहीं।
शहर पहुँचकर दोनों बस से उतरे। सिनेमा हॉल पास ही था। अमन ने दो टिकट लिए—सबसे आखिरी कतार के कोने वाले सीट की। हॉल में अंदर घुसते समय राधा की साँसें थोड़ी तेज हो गई थीं। अमन ने उसका हाथ फिर से पकड़ लिया।
मूवी शुरू होने में थोड़ी देर थी। हॉल में अँधेरा गहरा था। आखिरी कतार के कोने में दोनों बैठ गए। आसपास बहुत कम लोग थे। पीछे दीवार थी। कोई उन्हें आसानी से नहीं देख सकता था।
लाइट्स बुझ गईं। स्क्रीन पर ट्रेलर चलने लगे। अमन ने धीरे से राधा की तरफ देखा। राधा भी उसकी तरफ देख रही थी। दोनों की आँखें अँधेरे में मिलीं। अमन ने अपना हाथ बढ़ाकर राधा का हाथ पकड़ लिया। उंगलियाँ एक-दूसरे में फँस गईं।
थोड़ी देर बाद अमन ने और हिम्मत करके अपना हाथ राधा की जाँघ पर रख दिया। सलवार के ऊपर से। राधा सहम गई। उसने अमन की तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं बोली। अमन का हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरकने लगा। जाँघ के अंदरूनी हिस्से तक। राधा की साँसें तेज हो गईं। उसने अमन का हाथ पकड़ लिया, लेकिन हटाया नहीं। बस पकड़े रखा।
मूवी शुरू हो गई। रोमांटिक गाने वाले सीन आ रहे थे। अमन ने राधा के कान के पास मुँह लाकर बहुत धीमे स्वर में कहा,
“तुम आज बहुत सुंदर लग रही हो… दिल नहीं भर रहा देखने से।”
राधा की आवाज काँप रही थी। “यहाँ… कोई सुन लेगा…”
अमन ने उसके कान की लौ को हल्के से होंठों से छुआ। “कोई नहीं सुन रहा। सिर्फ हम दोनों हैं।”
राधा ने आँखें बंद कर लीं। अमन ने उसका चेहरा अपनी तरफ मोड़ा और धीरे से होंठों पर अपने होंठ रख दिए। चुंबन बहुत नरम था। पहले सिर्फ होंठों का स्पर्श। फिर थोड़ा गहरा। राधा की साँस अमन के मुँह में मिल गई। उसने धीरे-धीरे जवाब देना शुरू कर दिया। अमन की जीभ उसके होंठों पर फिसली। राधा की उंगलियाँ अमन की कमीज में कस गईं।
चुंबन टूटने के बाद दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। अमन ने फिर से उसके गाल, ठुड्डी और गर्दन पर हल्के-हल्के चुंबन दिए। राधा की गर्दन में सिहरन दौड़ गई। उसने अमन का सिर पकड़कर अपनी तरफ और खींच लिया।
“अमन…” उसकी आवाज बहुत धीमी और काँपती हुई थी। “मैं… डर रही हूँ…”
अमन ने उसके माथे पर चुंबन करते हुए कहा, “डरो मत। मैं हूँ न। कोई नहीं देख रहा हमें।”
उसने धीरे से अपना हाथ राधा की कमीज के अंदर सरका दिया। बाजू के नीचे से। उंगलियाँ उसके गर्म स्तन तक पहुँच गईं। ब्रा के ऊपर से। राधा की लंबी सिसकारी निकली। उसने अमन का हाथ पकड़ लिया, लेकिन फिर छोड़ दिया। अमन ने धीरे-धीरे स्तन को सहलाना शुरू किया। गोलाई को महसूस किया। निप्पल पर उंगली फेरी। राधा की कमर कुर्सी पर हिलने लगी।
“आह्ह… अमन… धीरे…” उसकी आवाज में डर और मजा दोनों थे।
अमन ने उसके होंठ फिर से चूम लिए। इस बार चुंबन और गहरा था। जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। नीचे उसका हाथ लगातार राधा के स्तन को दबा रहा था, सहला रहा था। राधा की साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं। वह अमन के कंधे पर सिर रखकर सिसकारियाँ ले रही थी।
मूवी का गाना चल रहा था। स्क्रीन पर हीरो-हीरोइन रोमांस कर रहे थे। लेकिन आखिरी कतार के कोने में दो और शरीर एक-दूसरे में खो रहे थे।
अमन ने राधा के कान में फुसफुसाया, “तुम्हारा दिल इतनी तेज धड़क रहा है… मुझे भी सुनाई दे रहा है।”
राधा ने जवाब में सिर्फ और करीब सट गई। अमन का हाथ अब ब्रा के अंदर तक पहुँच चुका था। नंगी गर्माहट उसके हाथ में थी। उसने निप्पल को हल्के से मरोड़ा। राधा की सिसकारी दब गई। उसने अमन के होंठों को फिर से पकड़ लिया।
पूरी मूवी के दौरान दोनों बार-बार चूमते रहे। कभी लंबे चुंबन, कभी गर्दन पर, कभी गाल पर। अमन का हाथ कभी स्तन पर रहता, कभी जाँघ के अंदर। राधा कभी उसका हाथ रोकती, कभी खुद और दबा देती। दोनों की दुनिया अब सिर्फ उस अँधेरे कोने तक सिमट चुकी थी।
मूवी का आधा हिस्सा खत्म हो चुका था। लेकिन अमन और राधा के लिए समय रुक सा गया था।

मूवी का दूसरा हाफ शुरू हो चुका था।
हॉल में अँधेरा और गहरा हो गया था। स्क्रीन पर रोमांटिक गाने चल रहे थे। हीरो हीरोइन को गोद में लेकर घूम रहा था। लेकिन आखिरी कतार के कोने में अमन और राधा की दुनिया अब पूरी तरह अलग हो चुकी थी।
अमन का हाथ अभी भी राधा की कमीज के अंदर था। ब्रा के अंदर। उसने उसके नरम, गर्म स्तन को पूरा मुट्ठी में भर रखा था। निप्पल उसकी उंगलियों के बीच में था। वह धीरे-धीरे निप्पल को मरोड़ रहा था, दबा रहा था, गोला बना रहा था। राधा की साँसें अब नियंत्रण में नहीं थीं। हर बार जब अमन निप्पल को कसता, राधा की कमर कुर्सी पर उठ जाती और दबी हुई सिसकारी निकलती।
“आह्ह… अमन… बहुत जोर से… मत…” राधा की आवाज काँप रही थी। लेकिन उसने अमन का हाथ नहीं हटाया। बल्कि अपनी हथेली उसके हाथ के ऊपर रखकर और जोर से दबाने लगी।
अमन ने उसका चेहरा अपनी तरफ मोड़ा। दोनों की साँसें एक-दूसरे के मुँह में मिल रही थीं। उसने राधा के निचले होंठ को दाँतों से हल्के से पकड़ा और खींचा। फिर जीभ से उसके पूरे होंठों को चाटा। राधा पागलों की तरह उसके मुँह से चिपक गई। चुंबन अब नरम नहीं रह गया था। गीला, गहरा और भूखा हो चुका था। दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुँह में उलझ रही थीं। लार की हल्की आवाज अँधेरे में भी सुनाई दे रही थी।
अमन ने दूसरा हाथ भी राधा की जाँघ पर रखा। सलवार के ऊपर से अंदर की तरफ सरकाया। जाँघ के बिलकुल अंदरूनी हिस्से तक पहुँच गया। उंगलियाँ गर्म थीं। राधा की जाँघ काँपने लगी। अमन ने और ऊपर सरकाया। अब उसकी उंगलियाँ राधा की चूत के बिलकुल पास थीं—सलवार और पैंटी के ऊपर से।
राधा की आँखें खुली की खुली रह गईं। उसने अमन का हाथ पकड़ लिया।
“नहीं… अमन… यहाँ… मत…” उसकी आवाज में डर और इच्छा दोनों साफ थे।
अमन ने उसके कान में होंठ रखकर फुसफुसाया, “कोई नहीं देख रहा राधा… सिर्फ मैं और तुम… तुम्हारा शरीर कितना काँप रहा है मेरे हाथ में…”
उसने उंगलियों से हल्के से दबाव डाला। राधा की कमर जोर से उठी। एक लंबी, दबी हुई सिसकारी निकल गई। उसने अमन के कंधे में मुँह गड़ा दिया। अमन की उंगलियाँ अब धीरे-धीरे गोला बनाते हुए उसकी चूत को सहला रही थीं। सलवार गीली होने लगी थी।
“अमन… मैं… गीली हो रही हूँ…” राधा की आवाज रोने जैसी हो गई थी। शर्म और मजे से।
अमन ने उसका चेहरा ऊपर उठाया और फिर से चूम लिया। इस बार चुंबन में एक अजीब सी भूख थी। नीचे उसका हाथ लगातार काम कर रहा था। कभी हल्का, कभी थोड़ा जोर से। राधा की जाँघें अपने आप खुलने लगीं। उसने अमन का हाथ और जोर से अपनी तरफ दबा लिया।
अमन ने कमीज के अंदर वाले हाथ से ब्रा का हुक खोलने की कोशिश की। एक हुक खुला। राधा के स्तन और आजाद हो गए। अमन ने पूरा स्तन मुट्ठी में भर लिया। निप्पल को दो उंगलियों के बीच लेकर धीरे-धीरे घुमाने लगा। साथ ही नीचे वाली उंगलियाँ भी रुक नहीं रही थीं।
राधा अब पूरी तरह बिखर चुकी थी। उसका सिर अमन के कंधे पर था। मुँह से सिर्फ सिसकारियाँ और अस्पष्ट आवाजें निकल रही थीं।
“आह्ह… उंह्ह… अमन… मुझे… कुछ हो रहा है…”
अमन ने गति थोड़ी तेज कर दी। ऊपर निप्पल मरोड़ रहा था, नीचे चूत सहला रहा था। राधा की साँसें रुक-रुककर चल रही थीं। अचानक उसका शरीर अकड़ गया। जाँघें जोर से काँपीं। उसने अमन को इतनी जोर से जकड़ लिया कि अमन की साँस भी अटक गई। एक लंबी, काँपती हुई सिसकारी निकलते हुए राधा का पानी सलवार में छूट गया।
वह अमन के सीने से चिपकी हुई काँपती रही। बहुत देर तक।
अमन ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। राधा की आँखें नम थीं। गाल लाल थे। होंठ सूजे हुए और खुले हुए। अमन ने उसके माथे, आँखों और होंठों पर बहुत नर्म चुंबन दिए।
“तुम… बहुत प्यारी लग रही हो इस हालत में,” उसने फुसफुसाकर कहा।
राधा ने शर्म से आँखें बंद कर लीं। “मैं… इतनी… यहाँ… क्या कर बैठी…”
अमन ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा, “तुमने कुछ नहीं किया। मैंने किया। और मुझे कोई पछतावा नहीं।”
उसने राधा को और करीब खींच लिया। दोनों की धड़कनें अभी भी तेज चल रही थीं। अमन का लंड पैंट में पूरी तरह तना हुआ था, लेकिन उसने आगे बढ़ने की कोशिश नहीं की। सिर्फ राधा को अपने से चिपकाए रखा। उसके बालों में मुँह रखकर साँस लेता रहा।
मूवी का आखिरी गाना चल रहा था। स्क्रीन पर हीरो-हीरोइन गले मिल रहे थे। लेकिन आखिरी कतार के कोने में दो शरीर पसीने और साँसों में नहाए हुए एक-दूसरे से चिपके थे।
राधा ने धीरे से अमन का हाथ पकड़ा। उंगलियाँ अभी भी काँप रही थीं।
“अमन… मैं तुमसे… बहुत प्यार करने लगी हूँ…”
अमन ने उसके हाथ को चूम लिया। “मैं भी राधा… तुमसे बहुत…”
मूवी खत्म होने वाली थी। लाइट्स जलने वाली थीं। दोनों ने जल्दी से कपड़े ठीक किए। राधा ने ब्रा का हुक वापस लगाया। अमन ने उसकी कमीज ठीक की। दोनों की आँखों में अभी भी वह भूख और प्यार बाकी था।
लाइट्स जल गईं। लोग उठने लगे। अमन और राधा भी उठे। हाथ पकड़े हुए। दोनों के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी।
हॉल से बाहर निकलते समय राधा ने अमन का हाथ और कसकर पकड़ लिया।
“घर तक छोड़ना…” उसने धीमे स्वर में कहा।
अमन ने सिर हिलाया। दोनों अँधेरी गली से होते हुए बस स्टैंड की तरफ चल दिए। दिल अभी भी जोर से धड़क रहे थे। शरीर अभी भी एक-दूसरे की गर्माहट माँग रहे थे।
लेकिन दोनों को नहीं पता था कि उनके पीछे अँधेरे में कोई और भी चल रहा था। गुस्से और जलन से भरा हुआ।
Fuckuguy
albertprince547;
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RE: परिवार के गंदे राज़ - by Fuckuguy - 15-09-2026, 01:04 PM



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