Thread Rating:
  • 18 Vote(s) - 4 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
आप पढ़ चुके हैं कि कैसे मैंने मम्मी को थ्रिसम के लिए मनाया और फिर उस थ्रिसम के नशे में उन्हें उकसाते हुए उनकी चूत में अपना गरम लिंग उतार दिया। थ्रिसम के उस खौफनाक ख्याल ने मम्मी को इतना मदहोश कर दिया था कि वो अपनी ही चूत की गीली आग में जल रही थीं। लेकिन अभी तो रात जवान हुई थी और असली खेल तो अभी शुरू होना बाकी था। थ्रिसम की वो तड़प और मेरे लिंग की वो बेताबी अभी बुझी नहीं थी... अब आगे क्या हुआ, उस बेकाबू और जंगली रात का क्या मंजर था... चलिए देखते हैं।"
मम्मी का शरीर थरथरा रहा था, लेकिन यह थकावट की थरथराहट नहीं थी यह अभी भी दबी हुई वासना की तड़प थी। उन्होंने मेरी आँखों में देखा, और उनकी आँखों में वह चमक अभी भी बुझी नहीं थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी गीली और गर्म योनि के ऊपर रखा और जोर से दबाया। "हाँ रवि... मूझे अभी और करना ह मुझे अभी और चोदो," उन्होंने हाँफते हुए कहा। उनकी साँसें फिर से तेज होने लगीं और उन्होंने मेरी ओर देखते हुए एक ऐसी मांग की थी जिससे मेरा खून खौल उठा। " हाँ मुझे और चोदो... मुझे उनके आने का इंतज़ार नहीं हो रहा... मुझे अभी और भी गहरा और और भी गंदा चाहिए!" उनकी आँखों में वह भूख साफ़ दिख रही थी जो किसी भी चीज़ से शांत नहीं होने वाली थी।
जैसे ही मम्मी ने मेरा हाथ अपनी उस दहकती हुई, गीली गहराई पर टिकाया, मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उनकी योनि की गर्मी और वहाँ की धड़कन मेरी उंगलियों के जरिए सीधे मेरे दिमाग पर वार कर रही थी। मम्मी की आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बस एक जंगली भूख थी जो मुझे अंदर से जला रही थी। "मम्मी... आप पागल हो गई हैं क्या?" मैंने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, लेकिन मेरा हाथ खुद ब खुद उस गीलेपन को और गहराई से महसूस करने लगा।
मम्मी ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मुझे अपनी ओर खींच लिया। उनकी गरम साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। उन्होंने मेरे कान के पास आकर एक ऐसी बात फुसफुसायी जिससे मेरा खून खौल उठा। "पागल तो मैं तब होऊंगी रवि, जब तू मुझे पूरी रात चोदेगा... देख मेरी हालत, मेरा शरीर कैसे आग की तरह जल रहा है।"
तभी उनकी आँखों में एक ऐसी चमक आई जिसने मुझे हिला कर रख दिया। उन्होंने मुझे थोड़ा पीछे धकेला और बड़ी बेबाकी से मेरी आँखों में देखते हुए कहा, **"क्यों रवि? तू सोच रहा है कि मैं सिर्फ तेरे लिए तड़प रही हूँ? मुझे तो प्रदीप भाई साहब के साथ मिलकर ये सब करना है... मैं चाहती हूँ कि वो और तू, दोनों मिलकर मुझे इस कदर चोदो कि मैं होश ही खो दूँ!"**
प्रदीप अंकल का नाम सुनते ही मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल मच गई। उनकी बात सुनकर मेरी उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई थी। लेकिन मम्मी अभी रुकी नहीं थीं। उन्होंने मेरा हाथ फिर से पकड़ा और उसे अपनी जांघों के बीच और जोर से दबा दिया। उनकी आवाज़ में अब एक आदेश था और एक बेकाबू तड़प भी।
**"अरे छोड़ न प्रदीप भाई साहब की बात बाद में... पहले तू ही अपनी माँ को जी भर के चोद! मुझे अभी इसी वक्त चाहिए... मुझे अपनी इस प्यास को तेरी मर्दानगी से बुझाना है। आ और मुझे अपनी इस गीली आग में डुबो दे!"**
उनकी ये बेबाक मांग सुनकर मेरा सारा संयम टूट गया। उनकी आँखों की वो भूख और उनके शरीर की वो थरथराहट मुझे अपनी ओर खींच रही थी। मुझे अब और इंतज़ार नहीं करना था।
***उनकी ये गंदी और कामुक मांग सुनकर मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपना उत्तेजित और कड़ा हुआ अंग बाहर निकाला। मम्मी की नज़रें जैसे ही मेरे उस भारी और गर्म अंग पर पड़ीं, उनकी आँखें फैल गईं और उनके मुँह से एक लंबी, थ्रिलिंग आह निकली। "ओह गॉड... रवि... तू तो सच में एक मर्द बन गया है... आ... अब और इंतज़ार मत कर बेटा... अभी के अभी अपने hard और गर्म लंड से फाड़ दे अपनी माँ की चुत! मुझे अभी इसी वक्त चोद डाल!" उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना चेहरा पीछे की ओर झुका दिया।
इससे पहले कि मैं लंड उनकी चूत में डालता, मैंने अपना एक हाथ उनकी गीली और तड़पती हुई योनि के मुहाने पर रखा। जैसे ही मेरी उंगलियाँ उनकी उस गर्म और चिपचिपी गहराई को छू रही थीं, मम्मी का शरीर थरथराने लगा। मैंने अपनी उंगलियों को धीरे धीरे उनके अंदर धंसाना शुरू किया। "आह्ह्ह्ह... हाँ रवि... और गहरा... और गंदा कर मुझे... उफ़्फ़!" उनकी आवाज़ में अब सिर्फ और सिर्फ वासना थी। मैंने अपनी उंगलियों को उनके अंदर तेज़ी से ऊपर नीचे करना शुरू किया, जिससे उनके अंदर से निकलने वाला वो गंदा और चिकना तरल (fluid) मेरी उंगलियों पर लिपट गया। उनकी वो गीली और तड़पती हुई गहराई मेरी उंगलियों को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थी कि मुझे समझ आ गया कि वो अंदर से कितनी बेकाबू हो चुकी हैं।
मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं और बिना एक पल गँवाए उनका शरीर अपनी ओर खींचा और अपना वो तप्त और कड़ा अंग उनकी उस गीली और तड़पती हुई गहराई के मुहाने पर टिका दिया। जैसे ही मैंने हल्का सा दबाव डाला, मम्मी के मुँह से एक ऐसी गंदी और गहरी कराह निकली जो कमरे की खामोशी को चीर गई। "हाँ... हाँ रवि... वहीं... बिल्कुल वहीं... मार मुझे!" उन्होंने अपनी जांघों को और कसकर मेरी कमर के चारों ओर जकड़ लिया, जैसे वो मुझे अपने अंदर समा लेना चाहती हों।

मैंने एक झटके के साथ अपना पूरा लंड उनके उस तंग और गर्म छेद के अंदर उतार दिया। मम्मी का शरीर एक भयानक और सुखद झटके के साथ काँप उठा। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! रवि... तूने मुझे मार डाला... कितना गहरा... कितना गंदा है ये!" वो पागलों की तरह चिल्लाने लगीं। उनकी उंगलियाँ मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा रही थीं, जैसे वो दर्द और मज़े के बीच के उस महीन धागे को पकड़ने की कोशिश कर रही हों। उनकी वो गीली और गर्म दीवारें मेरे अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थीं कि मुझे लगा मेरा फटना तय है।
मैंने उनके शरीर को पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था। मैंने अपनी कमर को पीछे खींचकर एक ज़ोरदार झटका दिया और फिर पूरी ताकत के साथ उनके अंदर गहराई तक उतर गया। "आह्ह्ह... उफ़्फ़... रवि... और तेज़... और गंदा मार मुझे!" मम्मी की आवाज़ अब एक जानवर की तरह कराह रही थी। उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ वासना का समंदर था।
मैंने अपनी गति बढ़ा दी। हर झटके के साथ उनके शरीर से निकलने वाली वो 'छप छप' की गीली आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। उनकी योनि से निकलने वाला वो गाढ़ा और चिकना तरल अब मेरे अंग और उनकी जांघों के बीच फैलकर एक गंदी फिसलन पैदा कर रहा था। "हाँ... ऐसे ही... बिल्कुल ऐसे ही... आ... आह्ह्ह्ह!" वो अपनी आँखें मूँदकर पागलों की तरह सिर हिला रही थीं।

उनकी हर साँस में अब सिर्फ मेरा नाम और प्रदीप अंकल का ज़िक्र था, जो इस माहौल को और भी ज़्यादा गंदा और रोमांचक बना रहा था। "रवि... तू बिल्कुल प्रदीप जैसा कर रहा है... बस और ज़ोर से... मुझे तोड़ दे आज!" उनकी ये बात सुनकर मेरा खून और भी ज़्यादा खौल उठा। मैंने उनकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर उठा लिया ताकि मैं और भी गहराई तक पहुँच सकूँ। अब मैं बिना रुके, एक जंगली जानवर की तरह उन पर वार कर रहा था। उनकी तंग और गर्म गहराई मेरे हर झटके को सोख रही थी, और मैं बस उस चरम सुख की ओर बढ़ रहा था जहाँ सब कुछ खत्म हो जाने वाला था।
मैंने उनकी टांगों को अपने कंधों पर और भी ऊपर खींच लिया, जिससे उनकी वो तंग और गीली गहराई अब पूरी तरह से मेरे सामने खुली हुई थी। अब मैं उनके शरीर के एकदम करीब था, और हर झटके के साथ हमारा मांस आपस में टकराकर एक गंदी और कामुक 'चटाक चटाक' की आवाज़ कर रहा था। मम्मी का पूरा शरीर पसीने से तर बतर हो चुका था और उनकी छातियाँ उत्तेजना के मारे तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थीं।

"आह्ह्ह्ह! रवि... रुक मत बेटा... और ज़ोर से! मुझे पूरी तरह से मसल दे!" वो पागलों की तरह चिल्ला रही थीं। उनकी आवाज़ में अब कोई शर्म नहीं बची थी, सिर्फ एक भूखी और प्यासी औरत की तड़प थी। मैंने अपनी कमर की रफ़्तार और बढ़ा दी। अब मैं रुक नहीं रहा था, मैं बस उन पर वार कर रहा था। मेरी हर धक्के से लिंग उनके गर्भाशय के मुहाने से टकरा रहा था, जिससे उनके मुँह से बेकाबू कराहें निकल रही थीं।

"ओह गॉड... रवि... तू बहुत गंदा है... बिल्कुल प्रदीप भाई की तरह... आ... आह्ह्ह्ह!" उन्होंने मेरा नाम पुकारते हुए अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दिया ताकि मैं और भी गहराई तक जा सकूँ। उनकी वो गीली दीवारें मेरे अंग को इतनी ज़ोर से भींच रही थीं कि मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा वीर्य बस निकलने ही वाला है। उनकी योनि से निकलने वाला वो गर्म और चिकना तरल अब मेरे अंडकोष और उनकी जांघों के बीच एक गंदी फिसलन पैदा कर रहा था।
मैंने उनके दोनों हाथों को पकड़कर उनके सिर के ऊपर दीवार से सटा दिया और अब मैं एक जंगली जानवर की तरह उन पर टूट पड़ा था। "मम्मी... आप बहुत ज़्यादा गीली हैं... आप कितनी गंदी और कामुक हैं!" मैंने उनके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, जिससे उनकी उत्तेजना और भी बढ़ गई।

"हाँ... मैं बहुत गंदी हूँ... मुझे और गंदा कर दे रवि... मुझे अभी के अभी अपने अंदर तेरा गरम वीर्य अंदर चाहिए!" उनकी ये मांग सुनकर मेरा संयम टूट गया। मैंने अपनी रफ़्तार को अपनी चरम सीमा तक पहुँचा दिया। हर झटके के साथ मैं उनके अंदर और गहराई तक धँस रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी भारी साँसों की आवाज़ और हमारे अंगों के टकराने की वो गंदी आवाज़ गूँज रही थी। मैं बस उस पल का इंतज़ार कर रहा था जब मैं उनके उस तंग और गर्म मांस के अंदर अपना सारा गर्म वीर्य उगल दूँगा।लंड के अंदर और बाहर आने जाने की गति अब इतनी तेज़ हो चुकी थी कि मुझे अपनी आँखों के सामने अंधेरा सा दिखने लगा था। मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था; वो बिस्तर पर पागलों की तरह छटपटा रही थीं और उनकी कमर हर झटके के साथ मेरी तरफ ऊपर उठ रही थी, जैसे वो मुझे अपने अंदर और भी गहराई तक खींचना चाहती हों। "रवि... आ... आ... मैं आने वाली हूँ! मैं बस टूटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी आवाज़ एक चीख में बदल गई।

उनकी योनि की दीवारें अब मेरे अंग को इतनी ज़ोर से भींच रही थीं कि मुझे महसूस हुआ जैसे वो मुझे निचोड़ देंगी। उनकी उत्तेजना का चरम अब सामने था। मैंने उनके दोनों पैरों को और ज़ोर से अपने कंधों पर टिकाया और आखिरी कुछ झटके पूरी ताकत और पागलपन के साथ दिए। "मम्मी... मैं भी... मैं भी बस निकलने वाला हूँ!" मैंने उनके कान के पास गुर्राते हुए कहा।
तभी मम्मी का पूरा शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ अकड़ गया। उनकी आँखें पीछे की ओर पलट गईं और उनके मुँह से एक लंबी, थरथराती हुई कराह निकली। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
की वो लंबी कराह अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि मम्मी का पूरा शरीर किसी बिजली के झटके की तरह काँप उठा। उनकी योनि के अंदर की मांसपेशियाँ इतनी ज़ोर से मेरे अंग को जकड़ रही थीं कि मुझे लगा मेरा दम निकल जाएगा। वो चरम सुख (orgasm) के उस भयंकर दौर में थीं जहाँ उन्हें होश ही नहीं था कि वो कहाँ हैं। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! रवि...उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्
...रवि! मुझे मार डाल! आ... आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकराकर गूँज रही थी। उनके शरीर से पसीने की बूंदें टपक रही थीं और उनकी साँसें इतनी तेज़ थीं कि जैसे वो अभी दम तोड़ देंगी। उनके चरम सुख की वो तड़प इतनी तीव्र थी कि उनके पूरे शरीर में कंपन होने लगा।
उसी पल, मेरा भी सब्र का बांध टूट गया। मैंने अपनी कमर को एक आखिरी और सबसे गहरा झटका दिया, जैसे मैं उनके गर्भाशय के बिल्कुल मुहाने तक पहुँच जाना चाहता हूँ। "मम्मी... मैं... मैं आ गया! आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह!" मैंने चिल्लाते हुए अपना सारा ज़ोर लगा दिया।
मेरे अंग के अंदर से गर्म, गाढ़ा और उबलता हुआ वीर्य एक थपेड़े की तरह उनके अंदर फूट पड़ा। मैं महसूस कर सकता था कि मेरा सारा रस उनके उस तंग और गर्म मांस के अंदर कितनी गहराई तक जा रहा है। जैसे ही मेरा वीर्य उनके अंदर उगलना शुरू हुआ, मम्मी ने भी एक आखिरी बार अपने शरीर को ऐंठ लिया और उनके शरीर से एक ऐसी आवाज़ निकली जो दर्द और असीम सुख का मिश्रण थी।
हम दोनों ही पसीने से लथपथ, हाँफते हुए एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे में एक अजीब सी भारी और कामुक शांति छा गई थी, जिसे सिर्फ हमारी तेज़ चलती साँसों की आवाज़ तोड़ रही थी। मम्मी का शरीर अभी भी हल्के हल्के काँप रहा था और उनका चेहरा पूरी तरह से सुध बुध खो चुका था। उन्होंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा उनकी आँखों में अब भी वही वासना और एक अजीब सी संतुष्टि थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने भीगे हुए चेहरे के पास ले गईं, "रवि... तूने तो सच में मुझे तोड़ दिया..."
हम दोनों पसीने से लथपथ, बिस्तर पर एक दूसरे से चिपके हुए पड़े थे। कमरे में अब भी उस कामुकता की भारी गंध फैली हुई थी। मम्मी का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था, जैसे उनकी सारी ऊर्जा मैंने निचोड़ ली हो। उनकी आँखें आधी खुली थीं और साँसें अब धीरे धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उनके चेहरे पर जो सुकून था, वो बता रहा था कि उन्होंने अभी अभी स्वर्ग का अनुभव किया है।
मैंने उनके माथे से पसीने की एक लट हटाई और उनके चेहरे को प्यार से निहारा। तभी मम्मी ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और एक लंबी, थकी हुई आह भरी। उन्होंने अपनी एक हाथ से अपने बिखरे हुए बालों को पीछे किया और बहुत ही शरारती लेकिन थकी हुई मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।

उन्होंने अपनी कांपती हुई आवाज़ में, जो अभी भी उत्तेजना से भारी थी, धीरे से कहा, "रवि... तू सच में बहुत खराब है... बिल्कुल जंगली जानवर की तरह टूट पड़ा था मुझ पर।" उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से अपने पेट पर फेरा और फिर मेरी तरफ इशारा करते हुए अपनी बिखरी हुई हालत और लाल पड़ चुकी त्वचा को दिखाया। "देख... देख मेरी क्या हालत कर दी तूने! मैं तो हिल भी नहीं पा रही हूँ... मेरी तो पूरी जान ही निकल गई है।"
कहते हुए उन्होंने एक हल्की सी मुस्कान दी और अपनी आँखें मूँद लीं, जैसे वो अपनी इस 'शिकायत' का आनंद ले रही हों। उनकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसी शरारत थी जो कह रही थी कि उन्हें यह 'बुरा व्यवहार' बहुत पसंद आया। उन्होंने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया और धीरे से फुसफुसायीं, "इतनी ताकत कहाँ से लाता है तू? थोड़ा रहम भी कर लिया कर..."
उनकी ये बात सुनकर मुझे और भी ज़्यादा उन्हें अपनी बाहों में भींच लेने का मन करने लगा। उनकी ये थकी हुई और शरारती अदा मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी।
उनकी उस शरारती शिकायत ने मेरे अंदर की आग को फिर से भड़का दिया। मम्मी का वो थका हुआ लेकिन कामुक अंदाज़ मुझे और भी ज़्यादा उकसा रहा था। मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके माथे को चूमते हुए उनके कान के पास झुक गया। "मम्मी... अगर आपको ये हालत पसंद आई है, तो अगली बार मैं और भी ज़्यादा खराब बनूँगा," मैंने बहुत ही धीमी और गहरी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा।
उनकी साँसें एक बार फिर तेज़ होने लगीं। उन्होंने अपनी आँखें खोलीं और मुझे एक ऐसी नज़र से देखा जिसमें शिकायत कम और फिर से वही पुरानी प्यास ज़्यादा थी। "तू फिर से शुरू हो गया?" उन्होंने नकली गुस्से के साथ कहा, लेकिन उनके हाथ मेरे बालों में उलझ गए और उन्होंने मुझे अपनी तरफ और खींच लिया। "अभी तो मैं हिल भी नहीं पा रही हूँ, और तुझे फिर से वही सब करना है?"
मैंने मुस्कुराते हुए उनके गले पर अपने होंठ रख दिए। "हिलने की ज़रूरत ही क्या है? बस लेटे रहो और मुझे अपना काम करने दो।" मैंने धीरे से अपना हाथ उनके पसीने से भीगे हुए शरीर पर फेरा। उनकी त्वचा अभी भी गर्म थी और मेरे स्पर्श से वो हल्की सी सिहरन महसूस कर रही थीं। मैंने धीरे से उनके कान के नीचे अपनी जीभ से एक हल्का सा स्पर्श किया, जिससे उनके मुँह से एक दबी हुई कराह निकल पड़ी। "आह्ह्ह्ह... रवि... तू रुकता क्यों नहीं है?"
मैंने उनके शरीर के निचले हिस्से की तरफ हाथ बढ़ाया। जहाँ अभी कुछ देर पहले तक हम दोनों एक दूसरे में खोए हुए थे, वहाँ अब भी एक अजीब सी नमी और गर्माहट महसूस हो रही थी। मैंने महसूस किया कि उनकी योनि की दीवारें अभी भी धीरे धीरे स्पंदित (pulsating) हो रही थीं। "मम्मी, आपकी ये हालत बता रही है कि आप अभी थकी नहीं हैं... आप तो अभी भी मेरे लिए तरस रही हैं," मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर कहा।
उन्होंने अपनी पलकें झुका लीं और एक शरारती मुस्कान के साथ बोलीं, "शायद तू सही कह रहा है... तू इतना गंदा है कि मुझे अब आदत सी हो गई है।" उन्होंने अपनी जांघों को थोड़ा और फैला दिया, जैसे वो मुझे फिर से आमंत्रित कर रही हों। "देख... देख मेरी ये हालत... अब इसे ठीक भी तो कर दे।" उनकी आँखों में अब वो थकावट नहीं, बल्कि एक नई और तीव्र वासना चमक रही थी।
मम्मी की वो शरारती शिकायत और उनकी थकी हुई आवाज़ ने मेरे अंदर की आग को फिर से सुलगा दिया। उनकी बातों में जो इशारा था, उसने मेरे दिमाग में बिजली सी दौड़ा दी। मैंने उनके शरीर को और करीब खींच लिया, जिससे हमारा पसीने से भीगा हुआ मांस एक दूसरे से रगड़ खाने लगा। "मम्मी... अगर आपको लग रहा है कि मैंने आपको थका दिया है, तो आप गलत हैं। अभी तो खेल शुरू हुआ है," मैंने उनके कान के पास जाकर बहुत ही गहरी और भारी आवाज़ में कहा।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। उनकी आँखों में एक पल के लिए डर था, लेकिन अगले ही पल वही पुरानी भूखी वासना चमक उठी। उन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ अपनी उंगलियाँ मेरे सीने पर फेरते हुए कहा, "अच्छा? तो क्या तू मुझे फिर से बदमाशी करेगा?"
मैंने कोई जवाब नहीं दिया, बस उनके होंठों को अपने होंठों के नीचे दबा लिया। इस बार चुंबन धीमा नहीं था; यह एक भूखे शिकारी का हमला था। उनकी थकी हुई जीभ ने भी हार नहीं मानी और उसने मेरी जीभ का स्वागत किया। उनके शरीर में फिर से एक लहर दौड़ गई। मैंने महसूस किया कि उनकी योनि के पास का हिस्सा अब भी मेरे वीर्य और उनके अपने गीलेपन से पूरी तरह तर था।
मैंने धीरे से अपना हाथ उनके नीचे ले जाकर उनकी जांघों के बीच उस गीली जगह को छुआ। "आह्ह्ह्ह! रवि... नहीं... अभी नहीं..." वो कराह उठीं, लेकिन उन्होंने अपने पैर नहीं हटाए, बल्कि अपनी जांघों को और चौड़ा कर लिया ताकि मैं और गहराई तक पहुँच सकूँ। "तू सच में बहुत बदतमीज़ है... रुक जा..." उनकी आवाज़ में अब भी शिकायत थी, लेकिन उनका शरीर मुझे और पाने के लिए तड़प रहा था।
मैंने उनके कान के पास फुसफुसाया, "मम्मी, आप कह रही थीं कि मैं बहुत खराब हूँ... तो क्यों न मैं आज अपनी इस खराबी को और बढ़ा दूँ?" मैंने उनके शरीर को पलट दिया और अब मैं उनके ऊपर था। उनकी आँखें छत की ओर ताक रही थीं और उनकी साँसें फिर से तेज़ होने लगी थीं। मैंने उनके दोनों हाथों को पकड़कर उनके सिर के पास बिस्तर में गाड़ दिया। "आज मैं आपको चैन से सोने नहीं दूँगा। आज आप बस मेरी बन कर रहोगी।"
मम्मी की आँखों में वासना की ऐसी आग थी जो किसी को भी पागल कर दे। उन्होंने अपनी कमर को मेरी तरफ झटका दिया और मेरे कान के पास आकर एकदम गंदी और भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, **"तो फिर देर किस बात की है? रुक क्यों गया? चुपचाप घुस जा अपनी इस मां के भोसड़े में! जहाँ से तू निकला है, वहीं अपनी पूरी ताकत लगा दे! दिखा दे मुझे कि तू अपनी माँ को कितना खराब बना सकता है... हाँ, मार मुझे! पूरी तरह से अंदर घुस जा!"**

उनकी ये गंदी चुनौती सुनकर मेरा सब्र जवाब दे गया। मैंने अपने भारी और गरम अंग को उनके तंग और गीले भोसड़े के मुहाने पर टिकाया। जैसे ही मैंने एक ज़ोरदार झटका दिया, मेरा पूरा अंग उनके अंदर गहराई तक धंस गया।
**"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और चरम सुख का मिला जुला अहसास थी। उनके शरीर में एक ज़ोर का झटका लगा और उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उनके अंदर की तंगी इतनी ज़्यादा थी कि मुझे लगा जैसे मेरा मांस उनके अंदर पिघल रहा हो।
मैंने उनके चेहरे को जकड़ा और उनकी आँखों में देखते हुए गुर्राया, **"मम्मी, आपने ही तो कहा था घुसने के लिए... अब देखो कैसे मारता हु तुम्हारी भोसड़ी!"**
अब मैंने अपनी कमर के वारों की रफ़्तार बढ़ानी शुरू की। अब कमरे में सिर्फ हमारे शरीर के टकराने की 'चप चप' की आवाज़ और मम्मी की वो गंदी, बेकाबू चीखें गूँज रही थीं। "आह्ह्ह्ह... हाँ रवि! बिल्कुल वहीं! अपनी माँ का भोसड़ा फाड़ दे! और ज़ोर से!
जैसे ही मेरा मोटा और गरम अंग उनके अंदर पूरी तरह धँसा, मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया। उनके गले से एक ऐसी दबी हुई आह निकली जो किसी जानवर की पुकार जैसी लग रही थी। मैंने रुकने का नाम नहीं लिया; मैंने अपनी कमर को पीछे खींचा और फिर पूरी ताकत के साथ एक गहरा वार किया। **"चप... चप... चप..."** हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ अब पूरे कमरे में गूँज रही थी।
मम्मी का सिर बिस्तर पर बार बार टकरा रहा था, लेकिन उन्हें दर्द की नहीं, बल्कि उस बेहिसाब सुख की लत लग चुकी थी। उन्होंने अपने पैर मेरी कमर के चारों ओर कस लिए और अपने नाखूनों को मेरी पीठ में गाड़ दिया। वे पागलों की तरह चिल्ला रही थीं, **"आह्ह्ह्ह... हाँ रवि! मार मुझे! फाड़ दे मुझे! तेरा ये लौड़ा कितना बड़ा है... उफ़्फ़्फ़! अपनी माँ को अंदर से चीर दे!"**
उनकी ये गंदी बातें सुनकर मेरा खून उबलने लगा। मैंने उनकी कमर को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ा कि शायद वहां नीले निशान पड़ जाएं। मैंने अपनी रफ़्तार को और भी हिंसक कर दिया। अब मैं सिर्फ सेक्स नहीं कर रहा था, मैं उन्हें रौंद रहा था। हर वार के साथ मेरा अंग उनके गर्भाशय के मुहाने से टकरा रहा था, जिससे मम्मी की आँखें ऊपर चढ़ रही थीं और उनके मुँह से लार टपक रही थी।

मैंने उनके कान के पास झुककर गुर्राते हुए कहा, **"मम्मी, देखिये आपका बेटा कैसे आपके अंदर समा रहा है! आपका ये भोसड़ा कितना गरम और तंग है, ऐसा लग रहा है जैसे ये मुझे निगल जाएगा! क्या आपको मज़ा आ रहा है अपनी औलाद के इस गरम लौड़े से?"**
मम्मी ने बदहवास होकर जवाब दिया, **"हाँ... हाँ रवि! मुझे पागल कर दे! अपनी माँ का भोसड़ा बर्बाद कर दे! और ज़ोर से... और गहराई तक... आह्ह्ह्ह्ह!"**

कमरे की हवा में पसीने, वासना और उनके गीलेपन की गंध भर गई थी। मैं अब अपनी चरम सीमा के बहुत करीब था। मेरी कमर की हर चोट अब और भी तेज़ और बेकाबू होती जा रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि उनका भोसड़ा अब मेरे हर वार के साथ और भी ज़्यादा छटपटा रहा है और मुझे अंदर खींचने की कोशिश कर रहा है।
मैंने उनके पैरों को और भी ऊपर खींच लिया और उनके भोसड़े के एकदम मुहाने पर अपना भारी अंग टिकाकर एक ज़ोरदार झटका दिया। मम्मी का शरीर बिस्तर पर बुरी तरह उछला और उनकी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन उनकी आवाज़ में सिर्फ नशा और गालियाँ थीं। उन्होंने मेरे बालों को जकड़ लिया और चीखते हुए बोलीं, **"आह्ह्ह्ह! fuck... रवि! क्यों रुक रहा है? बेहनचोद... चोद दे अपनी माँ की भोसड़ी को! तेरी माँ की भोसड़ी मारूँ... हाँ! अपनी माँ की चूत को ऐसे ही रौंद दे! मार मुझे... अपनी इस माँ को अपना गुलाम बना ले! आज अपनी माँ की चूत को फाड़ के रख दे!"**
उनकी ये गंदी और बेबाक गालियाँ सुनकर मेरा मर्दाना जोश पागलपन की हद तक पहुँच गया। मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में जकड़ा और उनकी आँखों में देखते हुए एकदम हिंसक अंदाज़ में गुर्राया, **"मम्मी, आप तो पूरी तरह से एक नंबर की रंडी बन गई हैं! आपकी ये चूत... उफ़्फ़्फ़! आज मैं आपकी इस रंडी माँ की चूत को इतना मारूँगा कि आप कल तक चल भी नहीं पाएँगी! ले... ले मेरी रंडी माँ! ले ले अपने बेटे का ये अमर्यादित लौड़ा! आज बन जा मेरे बच्चे की माँ! अपनी इस चूत को मेरे इस भोसड़े के लिए समर्पित कर दे! आज मैं तुझे तेरी औकात दिखा दूँगा!"**
मैंने अपनी कमर की रफ़्तार को इतना बढ़ा दिया कि अब वारों के बीच में हवा भी नहीं जा पा रही थी। **'चप चप चप चप'** की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैं लंड को पागलों की तरह चूत के अंदर बाहर कर रहा था। मम्मी का पूरा शरीर अब बेकाबू होकर झटक रहा था। वे पागलों की तरह चिल्ला रही थीं, **"हाँ... हाँ रवि! मार मुझे! अपनी माँ की चूत को अपने मोटे लंड से बर्बाद कर दे! हाँ... बिल्कुल ऐसे ही! अपनी रंडी माँ को और ज़ोर से मार! उफ़्फ़्फ़... तेरा लौड़ा मेरी चूत को चीर रहा है! आह्ह्ह्ह्ह!"**
मैंने उनके कान के पास जाकर एकदम गंदी और भारी आवाज़ में फुसफुसाया, **"मम्मी, आज आपकी ये चूत सिर्फ मेरे लिए है।आज मैं आपकी इस रंडी चूत के अंदर अपना सारा गरम और गाढ़ा वीर्य इस तरह भर दूँगा कि आपकी चूत से बाहर बहता रहेगा! **"आह्ह्ह्ह्ह... उफ़्फ़्फ़!"** मम्मी ने एक ज़ोरदार चीख मारी जब मैंने उनके गर्भाशय के मुहाने पर एक बहुत ही गहरा और हिंसक प्रहार किया। उनकी आँखें पूरी तरह से ऊपर चढ़ गईं और शरीर में एक भयानक कंपन हुआ। मैंने अपनी कमर को पीछे खींचकर एक बार फिर पूरी ताकत के साथ उन्हें अंदर तक धँसा दिया। **"चप! चप! चप! चप!"** मांस के टकराने की आवाज़ अब और भी तेज़ और गंदी हो गई थी। मम्मी का गला बैठ चुका था, वे बस बेतहाशा चिल्ला रही थीं, **"हाँ रवि! मार मुझे! अपनी माँ की चूत को पूरी तरह से तहस नहस कर दे! हाँ... अपनी रंडी माँ को अपने लौड़े से भर दे! उफ़्फ़्फ़... मैं मर जाऊँगी... मुझे मार डाल मुझे!"** मैंने उनकी कमर को अपने पैरों से जकड़ लिया ताकि वे हिल भी न सकें और मैं उन्हें अपनी मर्दानगी से कुचल सकूँ। मैंने उनके कान को अपने दाँतों से काटते हुए गुर्राया, **"मारूँगा तुम्हे नही मम्मी,तुम्हारी चूत को मरूँगा ,आज मैं आपकी चूत को इतना खोल दूँगा कि आप हमेशा के लिए मेरे लौड़े गुलाम बन जाओगी! ले... ले मेरा ये लौड़ा चूत में समा ले!"** मेरा शरीर अब फटने को तैयार था। मेरी नसों में खून नहीं, बल्कि शुद्ध वासना दौड़ रही थी। मैंने अपनी रफ़्तार को एक पागल जानवर की तरह बढ़ा दिया। अब मैं सिर्फ सेक्स नहीं कर रहा था, मैं उनके शरीर के अंदर एक तबाही मचा रहा था। मम्मी का पूरा निचला हिस्सा मेरे वारों से बुरी तरह झटक रहा था और उनके भोसड़े से निकलने वाला गीलापन अब मेरे अंडकोषों को भी भिगो रहा था। **"आह्ह्ह्ह्ह... रवि... मैं आने वाली हूँ... मैं चरम पर हूँ... अपनी माँ की चूत में सब कुछ उंडेल दे! आह्ह्ह्ह्ह्ह!"**
और अपनी पूरी ताकत से उनके गर्भाशय के मुहाने पर अपना गरम और गाढ़ा वीर्य उंडेल दिया। मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वे बेतहाशा कांपने लगीं। हम दोनों ही चरम सुख की उस लहर में इस कदर डूब गए थे कि हमें दुनिया की सुध बुध नहीं रही। हम दोनों चोदने और चोदे जाने के उस पागलपन में इतने मगन थे कि हमें समय का बिलकुल भी पता ही नहीं चला।
जब मैं अपने आखिरी और सबसे हिंसक झटकों के साथ उनकी रंडी चूत को फाड़ रहा था, तभी पास के मंदिर के स्पीकर से आरती की गूँजती हुई आवाज़ सुनाई दी। उन पवित्र भजनों की आवाज़ और मेरे लौड़े के उन गंदे और रसीले झटकों के बीच का वो विरोधाभास हमें एक अलग ही दुनिया में ले गया। उस आवाज़ ने जैसे हमारे कानों में ये बता दिया कि सुबह के 4 बज चुके हैं और हम पूरी रात एक दूसरे के मांस में डूबे रहे।
क्लाइमेक्स के उस भारी सन्नाटे के बाद, मम्मी ने लंबी और गहरी साँस ली। उनके चेहरे पर थकान तो थी, लेकिन आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उन्होंने मेरी तरफ देखा और शरारत भरे लहजे में मुस्कुराते हुए कहा, **"आज फिर तुमने सुबह कर दी! कहाँ से आती है तुझमें इतनी है कामुकता? बिल्कुल जंगली जानवर की तरह टूट पड़ते हो मुझ पर।"** उनके बोलने के अंदाज़ में कोई शिकायत नहीं थी, बल्कि उनकी नज़रों में एक गहरी शरारत और प्यार था, जैसे वो मज़ाक कर रही हो ।

मैंने भी उन्हें उसी गहरी और मदहोश कर देने वाली नज़रों से देखा। मेरी आँखों में एक मूक सवाल था, जैसे मैं कह रहा हूँ *"बहुत चालाक हो आप, सारा इल्ज़ाम मुझ पर लगा रही हो, जबकि असली मज़ा तो आप ले रही थीं।"* लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं। मैं बस उनके और करीब आया और उनकी आँखों में आँखें डालकर बहुत ही प्यार से कहा, **"I love you, mummy."** इतना कहकर मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और एक गहरी और सुकून भरी आलिंगन में ले लिया। मम्मी ने भी मुस्कुराते हुए मेरे गाल पर एक कोमल चूमा दिया और धीरे से कहा, **"I love you too, beta."** वे पूरी तरह से मेरे सीने से चिपक गईं। हम दोनों धीरे धीरे अपनी भारी और तेज़ चलती साँसों को व्यवस्थित करने लगे, फिर हम दोनो बिना किसी कपड़े के, एक दूसरे के नग्न शरीर की गर्माहट को महसूस करते हुए, उसी बिस्तर पर एक दूसरे में सिमट कर सो गए
[+] 4 users Like Motalund14's post
Like Reply


Messages In This Thread
Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 08-08-2026, 11:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 01:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-08-2026, 02:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 09:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:19 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:21 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 01:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 03:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 08:41 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:18 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 01:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Ella - 12-08-2026, 02:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 02:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 04:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nomita - 12-08-2026, 04:17 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 05:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Suhana. - 12-08-2026, 07:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by shalini - 12-08-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 13-08-2026, 09:39 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-08-2026, 12:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 08:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 03:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 12:30 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 14-08-2026, 03:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fanfunda - 14-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 09:39 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 15-08-2026, 10:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 16-08-2026, 12:37 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 10:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nehapatel - 16-08-2026, 03:26 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 17-08-2026, 06:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-08-2026, 08:03 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 17-08-2026, 09:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 18-08-2026, 05:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 18-08-2026, 08:45 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 18-08-2026, 10:22 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Huzmakhan - 18-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rijwana Ansaari - 18-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by SweetSonali - 18-08-2026, 02:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 18-08-2026, 08:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:41 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:44 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 20-08-2026, 05:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 21-08-2026, 07:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 22-08-2026, 06:55 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 10:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 10:51 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 03:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 05:07 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by srider69 - 22-08-2026, 07:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 08:51 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by wetpussy - 23-08-2026, 02:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 23-08-2026, 03:06 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:25 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:29 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 24-08-2026, 07:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 24-08-2026, 09:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 10:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 24-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:01 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:02 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:31 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 05:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Kodom Ali Mastan - 25-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rizwan007 - 25-08-2026, 01:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by बहनचोद - 25-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Prativa Rani Saha - 25-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 02:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 02:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nova Dewan - 27-08-2026, 12:26 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Anusree - 27-08-2026, 01:36 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rinkp219 - 28-08-2026, 11:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 29-08-2026, 12:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 29-08-2026, 01:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by KGB - 30-08-2026, 10:26 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lavoni - 30-08-2026, 01:59 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Dhakaiya Mastan - 30-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Phallus - 30-08-2026, 02:50 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 31-08-2026, 06:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 31-08-2026, 08:04 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by LENNY - 31-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Tasnova - 31-08-2026, 02:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 31-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Intruder - 01-09-2026, 11:36 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 01-09-2026, 01:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 01-09-2026, 01:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Peeping Tom - 01-09-2026, 05:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 02-09-2026, 03:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lund8 - 01-09-2026, 10:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lund8 - 02-09-2026, 11:11 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 02-09-2026, 12:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 02-09-2026, 08:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 03-09-2026, 10:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 06-09-2026, 03:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Valson - 06-09-2026, 06:50 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 09-09-2026, 01:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Vik88 - 09-09-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Hijabi Maal - 09-09-2026, 02:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Lavoni - 09-09-2026, 02:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Esha. - 10-09-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 03:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 03:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-09-2026, 04:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 05:22 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Eswar P - 10-09-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 10:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-09-2026, 05:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 10:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by MARVIN - 10-09-2026, 07:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-09-2026, 10:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 10-09-2026, 11:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-09-2026, 02:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-09-2026, 02:52 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-09-2026, 06:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-09-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Viraj007 - 14-09-2026, 12:55 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-09-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-09-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Bulldozer - 14-09-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 11:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Blackheart - 16-09-2026, 11:56 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 07:47 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 07:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-09-2026, 09:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 16-09-2026, 09:44 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Farah - 16-09-2026, 09:55 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sharmin Shila - 16-09-2026, 10:03 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Pakeeza chut - 16-09-2026, 10:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-09-2026, 08:38 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-09-2026, 04:55 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 17-09-2026, 05:14 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-09-2026, 05:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 17-09-2026, 10:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 18-09-2026, 08:57 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by saya - 18-09-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-09-2026, 04:41 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:42 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - Yesterday, 11:55 PM



Users browsing this thread: 3 Guest(s)