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Incest परिवार के गंदे राज़
#31
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बरगद के पेड़ के नीचे दोनों कुछ देर और खड़े रहे। राधा की आँखों में अभी भी हल्की नमी थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक शांत मुस्कान तैर रही थी। अमन का हाथ उसकी कमर पर था। दोनों एक-दूसरे से कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन चुप्पी में भी बहुत कुछ कहा जा रहा था।
थोड़ी देर बाद राधा ने धीरे से कहा, “चलते हैं… देर हो रही है।”
अमन ने सिर हिलाया। दोनों पेड़ की छाँव से निकलकर फिर मेले की भीड़ में मिल गए। अब उनकी चाल पहले से धीमी थी। राधा कभी-कभी अमन की तरफ देख लेती और जल्दी से नजरें फेर लेती। अमन भी उसके चेहरे को बार-बार देख रहा था—जैसे पहली बार देख रहा हो।
वे एक छोटी सी दुकान के पास रुके। राधा ने एक हल्का गुलाबी रंग का चूड़ा चुना। अमन ने पैसे दे दिए। राधा ने मना किया, लेकिन अमन ने जिद की। “यादगार के लिए रख लो।” राधा ने चुपचाप चूड़ा ले लिया और अपनी कलाई में पहन लिया।
धूप ढलने लगी थी। आसमान में नारंगी रंग फैलने लगा। लाउडस्पीकर की आवाजें धीमी पड़ने लगी थीं। दोनों ने वापस बस स्टैंड की तरफ कदम बढ़ाए। रास्ते में राधा का हाथ अचानक अमन के हाथ में आ गया। इस बार उसने जानबूझकर पकड़ा था। अमन ने भी कसकर पकड़ लिया। दोनों हाथ जुड़े हुए बस तक पहुँचे।
बस में फिर खिड़की वाली सीट मिली। राधा खिड़की की तरफ बैठी। अमन उसके बगल में। बस चल पड़ी। खेत, पेड़ और धूल भरी सड़क पीछे छूटने लगी। दोनों काफी देर तक चुप रहे। फिर राधा ने बहुत धीमी आवाज में कहा,
“आज… सब कुछ बदल गया लग रहा है।”
अमन ने उसकी तरफ देखा। “हाँ।”
राधा ने आगे कहा, “मैं डरती थी कि तुम मुझे सिर्फ… वैसे ही देखोगे जैसे और लड़के देखते हैं। लेकिन तुमने…” वह पूरा वाक्य नहीं बोल पाई।
अमन ने उसका हाथ अपनी हथेली में लेकर कहा, “अब डरो मत। मैं हूँ न।”
राधा ने सिर हिलाया। उसकी उंगलियाँ अमन की उंगलियों में सिमट गईं। बाकी सफर दोनों ने चुपचाप हाथ पकड़े हुए तय किया।
गाँव पहुँचने पर बस से उतरे। शाम के अँधेरे में दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े थे। राधा ने धीरे से कहा, “मैं घर जा रही हूँ।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक से पहुँचना।”
राधा दो कदम चलकर रुकी। पीछे मुड़ी। आँखों में एक अलग सी चमक थी। “अमन… शुक्रिया।” फिर वह तेजी से अपने घर की तरफ चल दी।
अमन अपने घर की तरफ बढ़ा। दिमाग में पूरा दिन घूम रहा था—झूले, जलेबी, जादू का तंबू, बरगद के पेड़ के नीचे का चुंबन, और राधा के आँसू। पहली बार लगा कि उसने सिर्फ शरीर नहीं, दिल भी छू लिया है।
घर पहुँचकर उसने हाथ-मुँह धोया। खाना खाया। माँ ने पूछा, “प्रोजेक्ट कैसा रहा?” अमन ने सामान्य जवाब दिया। रात के खाने के बाद वह अपने कमरे में आया।
बारह बजने से पहले ही दरवाजे पर दस्तक हुई। रेणु थी। वह रिश्तेदारों के घर से लौट चुकी थी। लालटेन लेकर अंदर आई और दरवाजा बंद कर दिया।
“बताओ,” उसने सीधे कहा। “मेला कैसा रहा?”
अमन ने इस बार भी कुछ नहीं छुपाया। शुरू से अंत तक सब बता दिया—राधा के साथ घूमना, जादू के तंबू में उसका डर और सिमटना, बरगद के पेड़ के नीचे गरीब-अमीर वाली बात, उसका प्यार का इजहार, आँसू, और वह नरम चुंबन।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रही। जब अमन खत्म हुआ तो उसने धीरे से पूछा, “तुमने सच में दिल से कहा?”
अमन ने सिर हिलाया। “हाँ।”
रेणु थोड़ी देर चुप रही। फिर बोली, “अच्छा किया। लेकिन याद रखना—प्यार सिर्फ शब्दों और चुंबन से नहीं निभता। उसे निभाना पड़ता है। राधा गरीब घर की है, तुम इस घर के हो। आगे बहुत सी मुश्किलें आएंगी। तैयार रहना।”
उसने अमन का हाथ पकड़ा। “आज तुमने एक बड़ा कदम उठाया। दिल का कदम। शरीर का सबक तो मैं देती रहूँगी, लेकिन दिल का सबक तुम्हें खुद सीखना होगा।”
रेणु ने और ज्यादा कुछ नहीं कहा। बस उसके माथे पर हल्का सा हाथ फेरा और उठकर खड़ी हो गई।
“सो जाओ। कल बात करेंगे।”
वह चली गई।
अमन अकेला रह गया। कमरे में अँधेरा था। आँखें खुली थीं। हाथों में अभी भी राधा के हाथ की गर्माहट बाकी थी। होंठों पर उसके आँसुओं और चुंबन का अहसास था।
आज पहली बार उसने सिर्फ सीखा नहीं था।
आज उसने महसूस भी किया था।


सोमवार की सुबह अमन की आँख खुली तो उसने देखा कि कमला चाची उसके बिस्तर के ठीक सामने चारपाई पर बैठी हुई हैं।
वे उसे घूर रही थीं।
अमन की नींद एकदम उड़ गई। उसने धीरे से सिर उठाया। सुबह की उलझन में उसका लंड पूरी तरह खड़ा था और चादर के ऊपर साफ उभर रहा था। कमला चाची की निगाहें ठीक उसी जगह पर टिकी हुई थीं। उनकी आँखों में एक भूखी, प्यासी चमक थी। होठ हल्के से खुले हुए थे। अमन के मन में अचानक ख्याल आया—“चाची आज बहुत प्यासी लग रही हैं… लगता है इनके लिए कुछ करना पड़ेगा।”
वह उठकर बैठ गया। चादर संभालते हुए बोला, “अरे चाची… आप आज मेरे कमरे में कैसे?”
कमला चाची ने निगाहें उसके चेहरे पर उठाईं। आवाज में हल्की सी शरारत थी, “अपने बेटे के कमरे में नहीं आ सकती क्या?”
अमन ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, “आपका ही कमरा है चाची। जब मन करे आ जाइए… दिन हो या रात।”
कमला चाची की आँखें थोड़ी चौड़ी हुईं। फिर उन्होंने हँसते हुए कहा, “बहुत बड़ी-बड़ी बातें करने लगे हो। मुझसे उठाने की ताकत भी है तुम्हारे में?”
अमन ने आँखों में आँखें डालकर धीरे से जवाब दिया, “अरे चाची… चूहा बोरी नहीं उठा सकता। लेकिन फाड़ तो सकता है।”
कमला चाची एक पल के लिए स्तब्ध रह गईं। फिर जोर से हँस पड़ीं। उनकी हँसी में एक अजीब सी स्वीकृति थी। उन्होंने अमन को सिर से पाँव तक एक बार फिर घूरा, फिर धीरे से उठीं और कमरे से बाहर चली गईं। जाते समय दरवाजे पर खड़े होकर एक बार पीछे मुड़ीं। आँखों में वही प्यासी चमक बाकी थी।
अमन ने गहरी साँस ली। शरीर में एक अजीब सा उत्साह था।
कॉलेज पहुँचने पर राधा पहले से अपनी जगह पर बैठी थी। अमन के जाते ही उसने मुस्कुरा दिया। ब्रेक में दोनों टंकी के पास मिले। इस बार बातें और भी हल्की और प्यार भरी थीं। राधा ने उसके कॉलर का मुड़ा हुआ हिस्सा ठीक करते हुए कहा, “कल का दिन… बार-बार याद आ रहा है।”
अमन ने धीमे स्वर में जवाब दिया, “मुझे भी।”
घंटी बजने से पहले राधा ने अचानक उसके गाल पर हल्का सा चुंबन कर दिया। बहुत जल्दी और हल्का। फिर शर्माते हुए तेजी से अपनी कक्षा की तरफ चल दी। अमन खड़ा रह गया। गाल पर उसके होंठों की गर्माहट बाकी थी।
वह लौट ही रहा था कि पीछे से हल्की फुसफुसाहट सुनाई दी। दीवार के कोने के पास राजिया और वह तीसरा लड़का (भाई नहीं) खड़े थे। अमन ने रुककर कान लगा दिए।
राजिया धीमे स्वर में कह रही थी, “भाई आज घर के काम से बाहर गया है। रात को माँ जल्दी सो जाती है… पिताजी भी ऊपर वाले कमरे में रहते हैं। तू आ जा। आज खुलकर मजे लेंगे।”
लड़के ने जवाब दिया, “कितने बजे?”
“ग्यारह के बाद। पिछवाड़े वाले दरवाजे से आना। मैं खुला रखूँगी।”
दोनों की बातें साफ सुनाई दे रही थीं। अमन ने मन में नोट कर लिया। राजिया आज रात अकेली थी। और वह तीसरा लड़का उसके घर जाने वाला था।
अमन वहाँ से चुपचाप निकल गया। दिमाग में कई बातें एक साथ घूम रही थीं—सुबह कमला चाची की प्यासी निगाहें, राधा का गाल पर चुंबन, और अब राजिया का रात वाला प्लान।
शाम को घर लौटकर उसने सामान्य दिनचर्या निभाई। लेकिन मन बार-बार उन तीनों चीजों पर जा रहा था।
रात का इंतजार था।


रात के खाने के बाद अमन अपने कमरे में बैठा सोच रहा था।
सुबह कमला चाची की प्यासी निगाहें, राधा का गाल पर चुंबन, और सबसे ऊपर राजिया का रात वाला प्लान—सब एक साथ घूम रहे थे। तीसरा लड़का ग्यारह बजे के बाद पिछवाड़े वाले दरवाजे से आने वाला था। राजिया का भाई बाहर गया हुआ था। मौका साफ था।
बारह बजने से पहले रेणु आई। लालटेन लेकर। दरवाजा बंद करके बिस्तर के किनारे बैठ गई।
अमन ने सीधे पूछा, “दीदी… अगर आज रात मैं उस लड़के की जगह राजिया के पास चला जाऊँ… तो?”
रेणु की आँखें एकदम गंभीर हो गईं। वह कुछ देर चुप रही। कमरे में सिर्फ लालटेन की लौ काँप रही थी। फिर उसने धीरे से कहा,
“तुमने सोचा-समझा? यह खेल खतरनाक है। अगर पकड़े गए तो सब खुल जाएगा।”
अमन ने सिर हिलाया। “चेहरा ढक लूँगा। बोलूँगा नहीं। जो तुमने सिखाया है… वही इस्तेमाल करूँगा।”
रेणु ने लंबी साँस ली। कई पल तक अमन की आँखों में देखती रही। फिर बोली,
“जा सकते हो। लेकिन सुन लो—दिमाग से काम लेना। किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि तुम हो। चेहरा पूरी तरह ढके रहना। आवाज मत निकालना। और जल्दी वापस आ जाना। समझे?”
अमन ने सिर हिलाया। रेणु ने उसका हाथ पकड़ा।
“यह तुम्हारा पहला पूरा अनुभव होगा। जो सीखा है सब याद रखना। और नियंत्रण मत खोना।”
रेणु चली गई।
अमन ने तैयारी शुरू की। काले रंग की पैंट-कमीज पहनी। सिर पर मंकी कैप पहनी जिससे उसका पूरा चेहरा ढक गया। सिर्फ आँखें दिख रही थीं। ग्यारह बजने से थोड़ा पहले वह घर से निकल गया।
राजिया के घर का पिछवाड़ा सुनसान था। अमन एक पेड़ की छाँव में छिपकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वह तीसरा लड़का नजर आया। धीरे-धीरे दरवाजे की तरफ बढ़ रहा था।
जैसे ही वह पास आया, अमन ने जोर से चिल्लाया,
“चोर… चोर… चोर!”
लड़का डर के मारे काँप उठा। इधर-उधर देखा और भागते हुए गली की तरफ गायब हो गया। अमन ने कुछ पल इंतजार किया। फिर खुद धीरे से पिछवाड़े वाले दरवाजे की तरफ बढ़ा। दरवाजा खुला था।
अंदर हल्की सी रोशनी थी। राजिया अपने कमरे में खड़ी थी। उसने दरवाजे की आहट सुनी तो मुस्कुरा दी।
“आ गया… देर कर दी तूने।”
अमन ने कुछ नहीं कहा। मंकी कैप पहने वह अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया। राजिया ने उसकी तरफ देखा। चेहरा ढका हुआ देखकर थोड़ी हैरान हुई, लेकिन बोली,
“आज ड्रामा कर रहा है क्या? चल उतार टोपी।”
अमन ने टोपी नहीं उतारी। वह सीधे उसके पास गया। दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़ा और गहराई से चूम लिया। जीभ अंदर तक धंस गई। राजिया पहले चौंकी, फिर जवाब देने लगी। चुंबन लंबा और गहरा होता गया। अमन के हाथ उसकी कमर पर फिसल गए। उसने राजिया की कुर्ती ऊपर की और स्तनों को पकड़ लिया।
राजिया की साँसें तेज हो गईं। “आज तू बहुत अलग लग रहा है… जोर से चूम रहा है…”
अमन ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। कुर्ती और ब्रा एक साथ उतार दी। गोरे, गोल स्तन बाहर आ गए। अमन ने दोनों निप्पलों को बारी-बारी से मुँह में लिया। जीभ घुमाई, हल्के से काटा। राजिया की कमर उठने लगी।
“आह्ह… आज तू पागल हो रहा है क्या…”
अमन ने उसकी सलवार और पैंटी एक साथ नीचे खींच ली। राजिया की चूत पहले से गीली थी। अमन बिना किसी देर के उसके पैर फैलाकर झुक गया और जीभ चूत पर रख दी।
राजिया की लंबी सिसकारी निकली। “आह्ह्ह… क्या कर रहा है… जीभ… अंदर…”
अमन ने वही किया जो रेणु ने सिखाया था। जीभ से नीचे से ऊपर तक चाटा। बीच वाली घुंडी को चूसा। फिर जीभ अंदर तक डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। राजिया की जाँघें काँपने लगीं। उसने अमन का सिर पकड़कर और जोर से दबाने लगी।
“वहीं… वहीं रख… मत रुक… मैं… आ रही हूँ…”
कुछ ही देर में राजिया का शरीर अकड़ गया। उसका पहला पानी अमन के मुँह पर छूट गया। वह काँपती रही। अमन रुका नहीं। वह फिर से चाटने लगा। राजिया की सिसकारियाँ तेज होती गईं। दूसरी बार फिर से पानी निकला।
राजिया पागलों की तरह कराह रही थी। “तू… तू कौन है… आज इतना अलग… आह्ह्ह…”
अमन ने अभी भी कुछ नहीं कहा। उसने अपनी पैंट खोली। दस इंच का सख्त लंड बाहर निकला। राजिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाई। अमन ने उसके पैर उसके कंधों पर रखे और एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में धंसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा… फट जाएगी…” राजिया चीख उठी।
अमन ने रुककर उसे चूमा। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले प्यार से, गहराई से। हर धक्के के साथ राजिया की सिसकारी निकल रही थी। अमन उसके स्तनों को मसल रहा था, निप्पलों को चूस रहा था।
थोड़ी देर बाद गति तेज हो गई। अमन ने उसके दोनों हाथ ऊपर की तरफ पकड़ लिए और जोर-जोर से चोदने लगा।
“ले… ले पूरी… आज तेरी चूत फाड़ दूँगा…” उसने पहली बार गाली दी। आवाज बदलकर।
राजिया की आँखें खुली की खुली रह गईं। यह आवाज उस तीसरे लड़के की नहीं थी। लेकिन शरीर इतना मजा दे रहा था कि वह कुछ बोल नहीं पाई।
अमन ने पोजीशन बदली। राजिया को घुटनों के बल किया और पीछे से प्रवेश किया। एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी गाँड पर थप्पड़ मारे।
“आह्ह्ह… जोर से… और जोर से चोद… आज तू मार डालेगा…” राजिया बेलगाम हो चुकी थी।
अमन ने उसकी गाँड के छेद पर भी लंड का सिर लगाया। राजिया सहम गई।
“वहाँ… धीरे…”
अमन ने थूक लगाकर धीरे-धीरे गाँड में धंसाना शुरू किया। राजिया की चीखें दबी हुई निकल रही थीं। पूरा लंड अंदर जाने के बाद अमन ने जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए।
“ले रंडी… दोनों छेद तेरे आज खोल रहा हूँ…”
राजिया के मुँह से सिर्फ सिसकारियाँ और गालियाँ निकल रही थीं। अमन उसके हर छेद को बारी-बारी से इस्तेमाल कर रहा था। चूत, गाँड, फिर वापस चूत। राजिया बार-बार पानी छोड़ रही थी।
अभी रात लंबी थी।
अमन ने अभी सिर्फ शुरुआत की थी।


राजिया के कमरे में सिर्फ सिसकारियाँ और मांस की टकराहट की आवाजें गूँज रही थीं।
अमन अभी भी मंकी कैप पहने हुए था। चेहरा पूरी तरह ढका था। उसने राजिया को फिर से चित लिटा दिया। उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और पूरा लंड एक झटके में चूत में धंसा दिया। राजिया की पीठ बिस्तर से उठ गई।
“आह्ह्ह्ह… धीरे… बहुत गहरा… तू मार डालेगा आज…”
अमन ने जवाब में और जोर के धक्के लगाए। हर धक्के के साथ उसके अंडकोष राजिया की गाँड से टकरा रहे थे। उसने झुककर राजिया के दोनों स्तनों को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। दाँतों से निप्पल हल्के काटे। राजिया की उंगलियाँ उसकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।
“ले… ले पूरी चूत… आज तेरी यह फट जाएगी,” अमन ने आवाज बदलकर गाली दी।
राजिया की आँखें बार-बार अमन के ढके चेहरे पर जा रही थीं। यह आवाज, यह ताकत, यह तरीका—तीसरे लड़के का नहीं था। लेकिन शरीर इतना मजा ले रहा था कि वह कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी।
अमन ने अचानक लंड बाहर निकाला। राजिया कराह उठी। फिर उसने राजिया को अपनी तरफ खींचकर बैठने की पोजीशन में कर दिया। राजिया उसकी गोद में बैठ गई। अमन ने नीचे से लंड उसकी चूत में लगाया और राजिया की कमर पकड़कर उसे जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगा।
“खुद चल… रंडी की तरह बैठ जा मेरे लंड पर,” अमन ने कहा।
राजिया ने दोनों हाथ उसके कंधों पर रखे और खुद हिलेने लगी। उसके बड़े स्तन अमन के चेहरे के सामने ऊपर-नीचे हो रहे थे। अमन ने दोनों स्तनों को पकड़कर मुँह में भर लिया। राजिया की गति तेज होती गई। थोड़ी देर में उसका तीसरा पानी छूट गया। वह अमन के गले से चिपक गई और काँपती रही।
अमन ने उसे फिर से बिस्तर पर लिटाया। इस बार उसने राजिया के पैर पूरी तरह फैला दिए और कुत्ते की तरह पीछे से प्रवेश किया। एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे।
“आह्ह्ह… थप्पड़… और मार… जोर से चोद…” राजिया बेलगाम हो चुकी थी।
अमन ने लंड निकालकर इस बार उसकी गाँड में फिर से धंसा दिया। राजिया की चीख निकल गई।
“गाँड… फट रही है… लेकिन मत निकाल… पूरा अंदर रख…”
अमन ने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे और गाँड में जोर के धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ राजिया की गोरी गाँड लाल होती जा रही थी। थोड़ी देर बाद उसने फिर लंड चूत में डाल दिया। अब वह बारी-बारी से दोनों छेदों में घुस रहा था—कभी चूत, कभी गाँड। राजिया की सिसकारियाँ एक न रुकने वाली लड़ी बन गई थीं।
चौथी बार राजिया का पानी उसके लंड पर ही छूट गया। वह बिस्तर पर मुँह गड़ाकर कराह रही थी। अमन रुका नहीं। उसने राजिया को किनारे खींचकर बिस्तर के किनारे लिटाया। खुद खड़े होकर उसके पैर फैलाए और फिर से चोदने लगा। इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था।
“देख… कितना अंदर तक जा रहा है… तेरी चूत मेरे लंड की आकार ले रही है,” अमन ने गाली दी।
राजिया की आँखें उल्टी हो रही थीं। वह बस बार-बार कह रही थी, “और… और चोद… फाड़ दे… आज पूरी रंडी बना दे मुझे…”
अमन ने उसकी दोनों टाँगें अपने हाथों में लीं और उन्हें फैलाते हुए और तेज गति से धक्के लगाने लगा। कमरा सिसकारियों, थप्पड़ों और गीली आवाजों से भर चुका था। राजिया का पाँचवाँ पानी भी निकल गया। उसका शरीर अब काँप रहा था। पसीने से तर था। बाल बिखरे हुए थे।
अमन ने लंड बाहर निकाला। राजिया की चूत और गाँड दोनों से पानी रिस रहा था। उसने राजिया को घुटनों के बल बिस्तर पर किया और अपना लंड उसके मुँह के सामने ले गया।
“चूस… दोनों छेद इस्तेमाल हो चुके हैं… अब मुँह भी सँभाल…”
राजिया ने आँखें खोलीं। मंकी कैप पहने आदमी का लंड उसके होंठों पर था—गीला, चमकता हुआ, उसकी ही पानी से लथपथ। उसने मुँह खोला। अमन ने लंड उसके गले तक धंस दिया। राजिया गैग करते हुए भी चूसने लगी। अमन ने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू कर दिया।
“ले… ले गले तक… अच्छी रंडी है तू…”
राजिया की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन वह रोक नहीं रही थी। अमन कुछ देर तक उसका मुँह इस्तेमाल करता रहा। फिर लंड निकाला और फिर से उसकी चूत में धंसा दिया।
राजिया अब बोलने लायक नहीं रह गई थी। सिर्फ सिसकारियाँ और अस्पष्ट गालियाँ निकल रही थीं। अमन ने उसके दोनों हाथ पीछे मोड़कर पकड़ लिए और पूरे जोर से चोदने लगा। बिस्तर चरमरा रहा था।
छठा पानी राजिया का तब निकला जब अमन ने उसके निप्पल को जोर से काटते हुए सबसे गहरा धक्का मारा। राजिया की चीख पूरे कमरे में गूँज गई। उसका शरीर बार-बार अकड़ रहा था।
अमन अभी भी अंदर था। कठोर। और भूखा।
रात अभी खत्म नहीं हुई थी।


राजिया बिस्तर पर पसीने से तर पड़ी थी। शरीर काँप रहा था। छह बार पानी निकलने के बाद भी अमन का लंड उसके अंदर कठोर था। मंकी कैप अभी भी उसके चेहरे पर थी। आँखें चमक रही थीं।
अमन ने राजिया को फिर से घुटनों के बल कर दिया। डॉगी स्टाइल। उसने उसके दोनों हाथ पीछे मोड़कर पकड़े और एक झटके में पूरा लंड चूत में धंसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… फिर से… इतना जोर से… तू रुकेगा ही नहीं क्या…” राजिया की आवाज अब बैठ चुकी थी।
अमन ने जवाब में और तेज धक्के लगाए। हर धक्के के साथ राजिया की गोरी गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। थप्पड़ की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। अमन ने एक हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींच लिया।
“बोल… कैसी लग रही है आज तेरी चूत?”
“फट रही है… लेकिन मजा आ रहा है… और चोद… रंडी बना दे पूरी…”
अमन ने लंड निकाला और इस बार सीधे उसकी गाँड में धंसा दिया। राजिया की चीख निकल गई।
“गाँड… पूरी भर गई… धीरे… आह्ह्ह…”
अमन ने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे और गाँड में जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। राजिया का चेहरा बिस्तर में गड़ा हुआ था। सिसकारियाँ दबी हुई निकल रही थीं। थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। राजिया की गाँड खुली हुई काँप रही थी।
फिर अमन खुद बिस्तर पर लेट गया। उसने राजिया को अपनी तरफ खींचा और 69 की पोजीशन में उसके ऊपर उल्टा लिटा दिया। राजिया का मुँह उसके लंड के सामने था और उसकी चूत अमन के मुँह के ऊपर।
“चूस… और अपनी चूत मेरे मुँह में दबा…” अमन ने कहा।
राजिया ने थकी हुई हालत में भी अमन का लंड मुँह में ले लिया। अमन ने उसकी चूत पर जीभ फेर दी। दोनों एक साथ एक-दूसरे को चूसने लगे। राजिया के मुँह से लंड की सिसकारी निकल रही थी और अमन की जीभ उसकी चूत के अंदर तक जा रही थी। थोड़ी देर में राजिया का शरीर फिर से अकड़ने लगा।
अमन ने उसे फिर से नीचे उतारा। डॉगी स्टाइल में लाया। इस बार उसने लंड उसकी गाँड में डाला और एक हाथ से उसकी चूत में उंगलियाँ घुमा दीं। राजिया पागल हो रही थी।
“आह्ह्ह… दोनों जगह… एक साथ… मार डालेगा…”
अमन की गति बहुत तेज हो गई थी। गाँड में लंड और चूत में उंगलियाँ। राजिया की सिसकारियाँ अब चीखें बन चुकी थीं। अचानक उसका शरीर जोर से काँपा। आखिरी बार उसका पानी उंगलियों पर छूट गया। वह बिस्तर पर ढेर हो गई।
अमन ने उसके बाल पकड़े और गाँड में और तेज धक्के लगाने लगा। कुछ गहरे और जोरदार धक्कों के बाद उसका शरीर अकड़ गया। गरम, गाढ़ा पानी की धार उसने राजिया की गाँड के अंदर छोड़ दी। एक… दो… तीन… कई धारें। राजिया की गाँड पूरी भर गई। पानी बाहर भी रिसने लगा।
अमन कुछ देर तक उसी हालत में रहा। साँसें तेज चल रही थीं। फिर उसने धीरे से लंड बाहर निकाला। राजिया की गाँड से सफेद पानी निकल रहा था। चूत भी सूजी हुई और गीली थी।
राजिया पेट के बल पड़ी हुई काँप रही थी। अमन ने उसकी कमर पर हल्का हाथ फेरा। फिर अपनी पैंट पहनी। मंकी कैप अभी भी सिर पर थी।
राजिया ने थकी हुई आवाज में कहा, “तू… तू वह नहीं है… मैं जान गई थी… लेकिन…”
अमन ने कुछ नहीं कहा। वह दरवाजे की तरफ बढ़ा। राजिया ने पीछे मुड़कर देखने की कोशिश की लेकिन शरीर में ताकत नहीं बची थी।
अमन ने दरवाजा खोला और चुपचाप अँधेरे में निकल गया।
राजिया अकेली बिस्तर पर पड़ी रही। शरीर दर्द से भरा हुआ था, लेकिन संतुष्टि भी गहरी थी। आँखों में एक अजीब सा सवाल तैर रहा था—वह आदमी आखिर था कौन?
अमन घर की तरफ बढ़ रहा था। शरीर में थकान थी, लेकिन मन में एक अजीब सी जीत का अहसास था। पहली बार उसने किसी लड़की के साथ पूरा रात बिताया था। जो रेणु ने सिखाया था, लगभग सब इस्तेमाल कर लिया था।
रात गहरी थी।
Fuckuguy
albertprince547;
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RE: परिवार के गंदे राज़ - by Fuckuguy - 13-09-2026, 05:27 AM



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