12-09-2026, 09:45 PM
अशोक ने एक पल के लिए ठहरकर इस दृश्य को निहारा, फिर बिना किसी और देरी के, उसने अपनी उंगलियों को चैताली की पैंटी के ऊपरी हिस्से पर रखा। पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा दबाव के साथ, उसने उसके चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियों की हर गति से पैंटी का कपड़ा उसकी त्वचा पर खिसकता और उसे और भी अधिक उत्तेजित करता जा रहा था।
राघव का हाथ चैताली के मुलायम गालों से धीरे से हट गया। उसने अपने होंठों को उसके माथे से अलग किया, जहाँ अभी तक उसने गर्म साँसों के साथ कई चुम्बन छोड़े थे। चैताली की नींद इतनी गहरी थी कि वह राघव के इन सब कार्यों से बिल्कुल अनजान बनी हुई थी। उसका शरीर सोफे पर आराम से लेटा हुआ था, एक हाथ तकिया के नीचे दबा हुआ और दूसरा अपने पेट पर टिका हुआ। उसकी आँखों की पलकें शांत थीं, लम्बी पलकों के नीचे छुपी आँखें सपनों में डूबी हुई थीं। उसकी साँसें धीमी और नियमित थीं, जो उसकी निश्चिंत नींद का सबूत दे रही थीं।
राघव ने चैताली के शांत चेहरे को कुछ पलों तक निहारा। फिर वह धीरे से खड़ा हुआ, अपने पैरों को सोफे से दूर करते हुए। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे कोई नई योजना उसके मन में पक रही हो। उसने अपने दाँतों से निचला होंठ दबाया और अपनी जाँघों के बीच महसूस हो रही गर्मी को अनदेखा करने की कोशिश की। लेकिन उसका शरीर उसके आदेशों का पालन करने को तैयार नहीं था।
धीरे से, जैसे कोई चोर किसी कीमती चीज़ को छूने से पहले सावधानी बरतता है, राघव ने अपनी उँगलियों को अपनी पतलून के बटन पर रखा। एक क्लिक की आवाज़ के साथ बटन खुल गया। फिर उसने ज़िप को नीचे की ओर खिसकाया, धातु के दाँत एक-एक करके अलग होते गए। जैसे ही ज़िप पूरी तरह खुली, उसकी पतलून थोड़ी ढीली हो गई। राघव ने अपने अंदरूनी कपड़ों को भी नीचे धकेला, और अंततः उसका मोटा, गरमा गरम लन्ड बाहर आ गया, जो हवा के स्पर्श से और भी अधिक सख्त हो गया।
उसी क्षण राघव ने आसिफ की ओर मुड़कर देखा और एक गहरी, धमकी भरी गुर्राहट के साथ बोला, "और... चैताली के बूब्स भी नंगे कर दे। जल्दी कर।" उसकी आवाज़ में एक अजीब सी रौनक थी, जैसे वह किसी खेल के नियम बता रहा हो। राघव अपने नंगे लन्ड को हाथ से पकड़े हुए था, उसकी निगाहें चैताली के शरीर पर टिकी हुई थीं।


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