11-09-2026, 02:24 PM
अगली सुबह बाबाजी हमेशा की तरह ठीक 4 बजे उठ गए। उन्होंने स्नान किया, पूजा-अर्चना की और मंदिर में आने वाले भक्तों को प्रसाद बाँटने लगे। सुबह की शीतल हवा में अगरबत्ती की महक फैली हुई थी। मैत्री की प्रस्तुति।
तभी कॉलेज की सफ़ेद शर्ट और नीली स्कर्ट में ऋचा आती हुई दिखाई दी। उसका गुलाबी चेहरा, लंबे काले बाल और अभी-अभी खिल रही जवानी देखकर बाबाजी का मन एक पल में खिल उठा। किस्मत अच्छी थी - इस समय मंदिर में कोई और नहीं था।
ऋचा ने पास आकर बाबाजी को प्रणाम किया और झुककर उनके पैर छू लिए। उसके बाल उनके घुटनों पर बिखर गए।
बाबाजी ने प्यार भरे हाथ से उसके कंधे को पकड़कर उसे ऊपर उठाया। फिर दोनों हाथों से उसके नाजुक चेहरे को थाम लिया और माथे पर हाथ फेरते हुए बोले,
“सुखी रहो बेटी… हमेशा सुखी रहो।”
ऋचा ने शर्माते हुए कहा,
“बाबाजी जी… आज से मेरे एग्जाम शुरू हो रहे हैं। इसलिए आपका और भगवान का आशीर्वाद लेने आई थी।”
बाबाजी मुस्कुराए,
“हमारा आशीर्वाद तो सदा तुम्हारे साथ है बेटी। ये लो… प्रसाद।”
उन्होंने एक केला उठाकर उसके हाथ में रख दिया। केला देखकर ऋचा के होंठों पर एक अनोखी, शर्मीली मुस्कान तैर गई।
बाबाजी ने पूछा, “क्या हुआ? क्यों मुस्कुरा रही हो?”
ऋचा ने सिर झुकाकर कहा, “जी… कुछ नहीं… बस ऐसे ही… अच्छा, मैं चलती हूँ। और हाँ… मैं 3 बजे आऊँगी… ट्यूशन के लिए।” सहायिका सौनी पटेल।
बाबाजी ने सिर हिलाया, “हाँ याद है। जाओ… और अच्छे से एग्जाम दो। अरे रुको…”
वे पलटे और मंदिर में पड़ा एक पेन उठा लाए।
“तुम इस पेन से एग्जाम देना। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ रहेगा।”
इतना कहकर बाबाजी ने पेन को ऋचा की सफ़ेद शर्ट की जेब में डालना शुरू किया। दूसरे हाथ से उन्होंने जेब के किनारे को पकड़ लिया और पेन को धीरे-धीरे अंदर सरकाया।
उनकी उँगलियाँ जानबूझकर ऋचा के उभर रहे स्तनों के गुदाज, कोमल मांस पर रगड़ खा रही थीं। पेन की नोक सीधे उसके खड़े निप्पल पर आकर रुकी। बाबाजी ने हल्का दबाव देकर उसे और अंदर धकेला, जैसे जानबूझकर उसकी संवेदनशील जगह को छू रहे हों।
ऋचा की साँसें एकदम तेज हो गईं। उसकी आँखों में गुलाबी तड़का लग गया। एक अजीब-सी गर्माहट उसके पूरे शरीर में फैल गई। बाबाजी का गर्म हाथ अपनी छाती पर और पेन की रगड़ अपने निप्पल पर… वह कुछ बोल नहीं पाई। बस उसके होंठ हल्के से खुल गए और साँसें फूलने लगीं।
बाबाजी ने धीरे से हाथ हटाया और मुस्कुराते हुए कहा, “जाओ बेटी… भगवान तुम्हारा साथ दें।”
ऋचा जल्दी से पलटी और लगभग भागती हुई मंदिर से बाहर निकल गई। जाते-जाते उसकी भरी हुई, नाजुक गांड थिरक रही थी। बाबाजी उसे देखते रहे, उनके होंठों पर एक संतुष्ट, भूखी मुस्कान थी। निर्मात्री मैत्री पटेल।
नाश्ता करने और थोड़ा आराम करने के बाद 11 बज गए। मयूरी के आने का समय हो चुका था।
मयूरी का ख्याल आते ही बाबाजी का लंड फिर से फड़क उठा। उन्होंने धोती को एक तरफ सरका दिया और अपना मोटा, गर्म लंड बाहर निकाल लिया। आँखें बंद करके उन्होंने कल की यादों में खो जाना शुरू कर दिया। मयूरी के भारी तरबूज जैसे स्तन, शहद और दूध से चिपचिपे निप्पल, उसके मुँह से निकली कराहें…
वे जोर-जोर से मुठ मारने लगे। ठीक उसी समय बाहर से मयूरी की मीठी, थोड़ी घबराई हुई आवाज आई,
“बाबाजी जी… बाबाजी जी… कहाँ हैं आप?”
******************************************.
आज के लिए यही तक दोस्तों।
आगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद तुरंत।
तब तक के लिए हमेशा की तरह Maitri Patel की तरफ से जय भारत।।
तभी कॉलेज की सफ़ेद शर्ट और नीली स्कर्ट में ऋचा आती हुई दिखाई दी। उसका गुलाबी चेहरा, लंबे काले बाल और अभी-अभी खिल रही जवानी देखकर बाबाजी का मन एक पल में खिल उठा। किस्मत अच्छी थी - इस समय मंदिर में कोई और नहीं था।
ऋचा ने पास आकर बाबाजी को प्रणाम किया और झुककर उनके पैर छू लिए। उसके बाल उनके घुटनों पर बिखर गए।
बाबाजी ने प्यार भरे हाथ से उसके कंधे को पकड़कर उसे ऊपर उठाया। फिर दोनों हाथों से उसके नाजुक चेहरे को थाम लिया और माथे पर हाथ फेरते हुए बोले,
“सुखी रहो बेटी… हमेशा सुखी रहो।”
ऋचा ने शर्माते हुए कहा,
“बाबाजी जी… आज से मेरे एग्जाम शुरू हो रहे हैं। इसलिए आपका और भगवान का आशीर्वाद लेने आई थी।”
बाबाजी मुस्कुराए,
“हमारा आशीर्वाद तो सदा तुम्हारे साथ है बेटी। ये लो… प्रसाद।”
उन्होंने एक केला उठाकर उसके हाथ में रख दिया। केला देखकर ऋचा के होंठों पर एक अनोखी, शर्मीली मुस्कान तैर गई।
बाबाजी ने पूछा, “क्या हुआ? क्यों मुस्कुरा रही हो?”
ऋचा ने सिर झुकाकर कहा, “जी… कुछ नहीं… बस ऐसे ही… अच्छा, मैं चलती हूँ। और हाँ… मैं 3 बजे आऊँगी… ट्यूशन के लिए।” सहायिका सौनी पटेल।
बाबाजी ने सिर हिलाया, “हाँ याद है। जाओ… और अच्छे से एग्जाम दो। अरे रुको…”
वे पलटे और मंदिर में पड़ा एक पेन उठा लाए।
“तुम इस पेन से एग्जाम देना। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ रहेगा।”
इतना कहकर बाबाजी ने पेन को ऋचा की सफ़ेद शर्ट की जेब में डालना शुरू किया। दूसरे हाथ से उन्होंने जेब के किनारे को पकड़ लिया और पेन को धीरे-धीरे अंदर सरकाया।
उनकी उँगलियाँ जानबूझकर ऋचा के उभर रहे स्तनों के गुदाज, कोमल मांस पर रगड़ खा रही थीं। पेन की नोक सीधे उसके खड़े निप्पल पर आकर रुकी। बाबाजी ने हल्का दबाव देकर उसे और अंदर धकेला, जैसे जानबूझकर उसकी संवेदनशील जगह को छू रहे हों।
ऋचा की साँसें एकदम तेज हो गईं। उसकी आँखों में गुलाबी तड़का लग गया। एक अजीब-सी गर्माहट उसके पूरे शरीर में फैल गई। बाबाजी का गर्म हाथ अपनी छाती पर और पेन की रगड़ अपने निप्पल पर… वह कुछ बोल नहीं पाई। बस उसके होंठ हल्के से खुल गए और साँसें फूलने लगीं।
बाबाजी ने धीरे से हाथ हटाया और मुस्कुराते हुए कहा, “जाओ बेटी… भगवान तुम्हारा साथ दें।”
ऋचा जल्दी से पलटी और लगभग भागती हुई मंदिर से बाहर निकल गई। जाते-जाते उसकी भरी हुई, नाजुक गांड थिरक रही थी। बाबाजी उसे देखते रहे, उनके होंठों पर एक संतुष्ट, भूखी मुस्कान थी। निर्मात्री मैत्री पटेल।
नाश्ता करने और थोड़ा आराम करने के बाद 11 बज गए। मयूरी के आने का समय हो चुका था।
मयूरी का ख्याल आते ही बाबाजी का लंड फिर से फड़क उठा। उन्होंने धोती को एक तरफ सरका दिया और अपना मोटा, गर्म लंड बाहर निकाल लिया। आँखें बंद करके उन्होंने कल की यादों में खो जाना शुरू कर दिया। मयूरी के भारी तरबूज जैसे स्तन, शहद और दूध से चिपचिपे निप्पल, उसके मुँह से निकली कराहें…
वे जोर-जोर से मुठ मारने लगे। ठीक उसी समय बाहर से मयूरी की मीठी, थोड़ी घबराई हुई आवाज आई,
“बाबाजी जी… बाबाजी जी… कहाँ हैं आप?”
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आज के लिए यही तक दोस्तों।
आगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद तुरंत।
तब तक के लिए हमेशा की तरह Maitri Patel की तरफ से जय भारत।।



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