11-09-2026, 02:17 PM
गोपाल ने शराब का एक और घूँट लिया और काँपती आवाज़ में बोला,
“नहीं बाबाजी… शायद वो डर गई थी… या फिर मेरा मुंह उसके मुंह में होने की वजह से वो चीख नहीं पाई। पर उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गई थीं। मैंने अपना दाहिना हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रख दिया और उसके नींबू जैसे छोटे-छोटे स्तनों को जी भरकर दबाया। बाबाजी… उसके होंठों का रस पीने में जितना मजा आ रहा था, उतना मुझे आज तक शराब पीने में भी नहीं आया। उसके पास एक मदोश कर देनेवाला रस है। अभी अभी उसका रस भर रहः है। उसकी चूत वाले हिस्से से गर्म-गर्म हवा के झोंके मेरी जाँघ पर लग रहे थे। मैंने अपना हाथ नीचे सरकाना चाहा, पर तभी मादरचोद, मयूरी अचानक वहाँ आ गई और उसने सारा खेल बिगाड़ दिया। चिल्ला-चिल्लाकर पूरा घर सर पर उठा लिया। ऋचा को खींचकर ले गई। मैंने भी उसी वक्त सोचा कि अब मुंह लगाना उचित नहीं… पूरी बोतल पीकर सो गया। बस उसी दिन से मयूरी ने मुझे अपने पास आने नहीं दिया।”
बाबाजी जी का लंड गोपाल की इस Confession को सुनकर हिनहिनाने लगा था। उनकी धोती के अंदर मोटा साँप फन फैलाकर तन गया।
बाबाजी ने एक गहरी साँस ली और बोले,
“देखो गोपाल… तुमने जो मयूरी की नजरों के सामने किया, वो गलत था। लेकिन मेरे हिसाब से तुम भी अपनी जगह सही हो। अगर वो तुम्हें अपनी चूत नहीं देगी, तो तुम्हें कहीं न कहीं मुंह तो मारना ही है ना? और जब घर के अंदर ही ऐसी जवान, ताज़ी और नाजुक रस से भरी हुई,लड़की मौजूद हो, तो बाहर क्यों जाना? ठीक है ना?” मैत्री की पेशकश।
गोपाल बाबाजी की इन खुली और पापपूर्ण बातों को सुनकर हक्का-बक्का रह गया। उसकी आँखें फैल गईं। वह कुछ पल तक बोल ही नहीं पाया, बस बाबाजी को घूरता रहा।
बाबाजी ने आगे झुककर, अपनी आवाज़ को और गहरी और सम्मोहक बनाते हुए कहा,
“देखो गोपाल, मेरी बात ध्यान से सुनो। मैं सिर्फ़ यही चाहता हूँ कि तुम्हारे घर में कोई लड़ाई-झगड़ा न हो, शांति बनी रहे। मैंने आज मयूरी को भी बहुत समझाया है। अगर तुम मेरे हिसाब से चलोगे, तो तुम अपनी हर इच्छा, फिर चाहे वो मयूरी की हो या ऋचा की, पूरी कर सकते हो।”
गोपाल की सांस तेज़ हो गई। उसने हड़बड़ाकर पूछा,
“इच्छा… मेरी कौन-सी इच्छा बाबाजी जी?”
बाबाजी ने एक पल रुककर, आँखों में चमक भरकर कहा,
“अब भी नहीं समझे? ठीक है, मेरे मुंह से सुन ना चाहते हो! तो फिर साफ़-साफ़ सुन लो… अगर तुम चाहो, तो तुम अपनी पत्नी मयूरी को भोगने के साथ-साथ अपनी बेटी ऋचा के साथ भी वो सब कुछ कर सकते हो, जिसके बारे में तुम दिन-रात सोचते रहते हो। जिसके बारे में सोचकर अभी भी तुम्हारा लंड खड़ा हुआ है। उसका रस जी भर के पि सकते हो चाहे फिर ऊपर से या फिर निचे का भी।”
गोपाल ने हड़बड़ाकर अपनी गोद की तरफ देखा। उसकी धोती एक तरफ सरक गई थी और उसका 5 इंच का मोटा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा था, सिर पर एक बूँद चमक रही थी। उसने जल्दी से हाथ से छुपाने की कोशिश की। सहायक सौनी पटेल।
बाबाजी मुस्कुराए।
“अब मेरी बात ध्यान से सुनो। ऋचा को प्राप्त करने और उसका रस पिने के लिए सब से पहले तुम्हें मयूरी का विश्वास जीतना होगा। आज जब घर जाओ तो पहले की सारी बातों के लिए उससे माफी माँग लेना। उसे कहना कि तुम शराब पीना पूरी तरह छोड़ रहे हो। और उसमे मयूरी का साथ चाहिए। और रात को जब तुम उसके पास जाओ तो…”
बाबाजी ने जानबूझकर बात बीच में ही रोक दी।
गोपाल अधीर होकर बोला,
“तो क्या बाबाजी जी…? बोलिए ना… पूरा बताइए…”
*************************************************.
बने रहिये दोस्तों.
मैत्री पटेल की पेशकश.
“नहीं बाबाजी… शायद वो डर गई थी… या फिर मेरा मुंह उसके मुंह में होने की वजह से वो चीख नहीं पाई। पर उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गई थीं। मैंने अपना दाहिना हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रख दिया और उसके नींबू जैसे छोटे-छोटे स्तनों को जी भरकर दबाया। बाबाजी… उसके होंठों का रस पीने में जितना मजा आ रहा था, उतना मुझे आज तक शराब पीने में भी नहीं आया। उसके पास एक मदोश कर देनेवाला रस है। अभी अभी उसका रस भर रहः है। उसकी चूत वाले हिस्से से गर्म-गर्म हवा के झोंके मेरी जाँघ पर लग रहे थे। मैंने अपना हाथ नीचे सरकाना चाहा, पर तभी मादरचोद, मयूरी अचानक वहाँ आ गई और उसने सारा खेल बिगाड़ दिया। चिल्ला-चिल्लाकर पूरा घर सर पर उठा लिया। ऋचा को खींचकर ले गई। मैंने भी उसी वक्त सोचा कि अब मुंह लगाना उचित नहीं… पूरी बोतल पीकर सो गया। बस उसी दिन से मयूरी ने मुझे अपने पास आने नहीं दिया।”
बाबाजी जी का लंड गोपाल की इस Confession को सुनकर हिनहिनाने लगा था। उनकी धोती के अंदर मोटा साँप फन फैलाकर तन गया।
बाबाजी ने एक गहरी साँस ली और बोले,
“देखो गोपाल… तुमने जो मयूरी की नजरों के सामने किया, वो गलत था। लेकिन मेरे हिसाब से तुम भी अपनी जगह सही हो। अगर वो तुम्हें अपनी चूत नहीं देगी, तो तुम्हें कहीं न कहीं मुंह तो मारना ही है ना? और जब घर के अंदर ही ऐसी जवान, ताज़ी और नाजुक रस से भरी हुई,लड़की मौजूद हो, तो बाहर क्यों जाना? ठीक है ना?” मैत्री की पेशकश।
गोपाल बाबाजी की इन खुली और पापपूर्ण बातों को सुनकर हक्का-बक्का रह गया। उसकी आँखें फैल गईं। वह कुछ पल तक बोल ही नहीं पाया, बस बाबाजी को घूरता रहा।
बाबाजी ने आगे झुककर, अपनी आवाज़ को और गहरी और सम्मोहक बनाते हुए कहा,
“देखो गोपाल, मेरी बात ध्यान से सुनो। मैं सिर्फ़ यही चाहता हूँ कि तुम्हारे घर में कोई लड़ाई-झगड़ा न हो, शांति बनी रहे। मैंने आज मयूरी को भी बहुत समझाया है। अगर तुम मेरे हिसाब से चलोगे, तो तुम अपनी हर इच्छा, फिर चाहे वो मयूरी की हो या ऋचा की, पूरी कर सकते हो।”
गोपाल की सांस तेज़ हो गई। उसने हड़बड़ाकर पूछा,
“इच्छा… मेरी कौन-सी इच्छा बाबाजी जी?”
बाबाजी ने एक पल रुककर, आँखों में चमक भरकर कहा,
“अब भी नहीं समझे? ठीक है, मेरे मुंह से सुन ना चाहते हो! तो फिर साफ़-साफ़ सुन लो… अगर तुम चाहो, तो तुम अपनी पत्नी मयूरी को भोगने के साथ-साथ अपनी बेटी ऋचा के साथ भी वो सब कुछ कर सकते हो, जिसके बारे में तुम दिन-रात सोचते रहते हो। जिसके बारे में सोचकर अभी भी तुम्हारा लंड खड़ा हुआ है। उसका रस जी भर के पि सकते हो चाहे फिर ऊपर से या फिर निचे का भी।”
गोपाल ने हड़बड़ाकर अपनी गोद की तरफ देखा। उसकी धोती एक तरफ सरक गई थी और उसका 5 इंच का मोटा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा था, सिर पर एक बूँद चमक रही थी। उसने जल्दी से हाथ से छुपाने की कोशिश की। सहायक सौनी पटेल।
बाबाजी मुस्कुराए।
“अब मेरी बात ध्यान से सुनो। ऋचा को प्राप्त करने और उसका रस पिने के लिए सब से पहले तुम्हें मयूरी का विश्वास जीतना होगा। आज जब घर जाओ तो पहले की सारी बातों के लिए उससे माफी माँग लेना। उसे कहना कि तुम शराब पीना पूरी तरह छोड़ रहे हो। और उसमे मयूरी का साथ चाहिए। और रात को जब तुम उसके पास जाओ तो…”
बाबाजी ने जानबूझकर बात बीच में ही रोक दी।
गोपाल अधीर होकर बोला,
“तो क्या बाबाजी जी…? बोलिए ना… पूरा बताइए…”
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बने रहिये दोस्तों.
मैत्री पटेल की पेशकश.



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