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Incest परिवार के गंदे राज़
#20
झाड़ियों के पीछे अमन की हथेली अब पूरी तरह अपनी पैंट पर दबी हुई थी। लंड इतना सख्त था कि दर्द होने लगा था। राधा का शरीर भी काँप रहा था। उसका चेहरा लाल हो चुका था—शर्म, डर और एक अजीब सी गर्मी से जो वह समझ नहीं पा रही थी।
खँडहर में राजिया अब पूरी तरह टूट चुकी थी। उसका भाई अभी भी उसकी गाँड में जोर-जोर से लंड धंसाए जा रहा था। हर धक्के के साथ राजिया की गोरी गाँड लाल होती जा रही थी। थप्पड़ों के निशान साफ दिख रहे थे। तीसरा लड़का उसके मुँह का इस्तेमाल कर रहा था। लार राजिया के स्तनों तक बह रही थी।
“आह्ह्ह… भाई… अब नहीं सह पाऊँगी… बहुत जोर से… गाँड फट जाएगी… लेकिन मत रुक… चोद… पूरी तरह खराब कर दे मुझे…” राजिया की आवाज अब टूट-टूटकर निकल रही थी।
भाई ने उसके बाल और जोर से पकड़कर सिर पीछे खींच लिया।
“बोल साली… तू क्या है मेरे लिए?”
“मैं… मैं तेरी बहन हूँ… और तेरी सबसे गंदी रंडी… सिर्फ तेरी… आह्ह्ह… और तेज… हाँ… वहीं मार…”
भाई ने अचानक लंड गाँड से निकाला। राजिया की लंबी सिसकारी निकली। फिर उसने राजिया को चित लिटा दिया। दोनों पैर उसके कंधों पर रखे और एक झटके में फिर से चूत में लंड धंसा दिया। इस बार उसकी गति बहुत तेज थी।
“आज तेरी चूत और गाँड दोनों याद रखेंगी कि तेरे सगे भाई ने कैसे चोदा,” भाई गाली दे रहा था। “ले… ले पूरा… रंडी बहन…”
तीसरे लड़के ने भी अपना लंड राजिया के मुँह से निकाला। वह राजिया के स्तनों के पास आ गया और उसके गोरे स्तनों को मसलते हुए अपना लंड उनके बीच रगड़ने लगा।
“इन मस्त चुचियों के बीच भी झाड़ूँगा आज… साली कितनी गरम है…”
राजिया अब बेकाबू हो चुकी थी। उसके नाखून जमीन में गड़ रहे थे। पसीने से उसका पूरा गोरा बदन चमक रहा था।
“आ रहा है… भाई… मैं झड़ने वाली हूँ… तुम भी भर दो अंदर… दोनों छेद में भर दो अपना पानी… आह्ह्ह्ह…”
भाई की गति और तेज हो गई। कुछ तेज और गहरे धक्कों के बाद उसका शरीर अकड़ गया। गरम पानी की धार राजिया की चूत में छूट गई। उसी समय राजिया भी काँप उठी। उसकी लंबी, कामुक चीख खँडहर में गूँज गई। तीसरे लड़के ने भी राजिया के स्तनों पर ही अपना पानी छोड़ दिया। सफेद धार उसके गोरे स्तनों पर फैल गई।
तीनों कुछ देर तक उसी हालत में पड़े रहे। साँसें तेज चल रही थीं। भाई का लंड अभी भी राजिया की चूत में था, धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था। राजिया की आँखें बंद थीं। उसके स्तन और जाँघें पसीने और पानी से चमक रही थीं।
भाई ने आखिरकार लंड बाहर निकाला। सफेद पानी राजिया की चूत से रिसकर जमीन पर गिरने लगा। उसने राजिया की गाँड पर एक आखिरी थप्पड़ मारा और बोला,
“अगली बार राधा को जरूर लाना। आज तूने दोनों छेद सँभाल लिए। अच्छी रंडी है मेरी बहन।”
राजिया थकी हुई आवाज में बोली, “लाऊँगी… कभी न कभी… अभी पानी पिला… प्यास लगी है…”
तीसरा लड़का हँसते हुए अपनी पैंट पहनने लगा। भाई भी कपड़े सँभालने लगा। राजिया धीरे-धीरे उठी। उसकी टाँगें काँप रही थीं। उसने कुर्ता नीचे किया और सलवार ऊपर खींची। पानी अभी भी उसकी जाँघों से रिस रहा था।
झाड़ियों के पीछे अमन ने राधा का हाथ दबाया। राधा का चेहरा सफेद पड़ चुका था। आँखों में आँसू थे। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। अमन ने इशारे से कहा—चलो यहाँ से।
दोनों बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी आवाज के झाड़ियों से निकलकर दूसरी तरफ चले गए। काफी दूर जाकर राधा ने अचानक रुककर अमन का हाथ पकड़ लिया।
“मैं… मैं घर जा रही हूँ,” उसकी आवाज काँप रही थी। “तुझसे… बाद में बात करूँगी।”
अमन ने कुछ नहीं कहा। वह खुद भी बोलने की हालत में नहीं था। उसका लंड अभी भी सख्त था और दिमाग में राजिया की चीखें, भाई की गालियाँ और बाबूजी-सुमन का दृश्य सब एक साथ घूम रहे थे।
राधा तेजी से अपने घर की तरफ चली गई। अमन वहीं खड़ा रह गया। सूरज ढलने लगा था।
आज उसने बहुत कुछ देख लिया था।
बाबूजी को।
सुमन को।
और अब राजिया को अपने सगे भाई के साथ।
घर लौटते समय उसके कदम भारी थे। रात को रेणु आने वाली थी। और अमन नहीं जानता था कि वह रेणु को आज की सारी बातें बताएगा या नहीं।


अमन घर पहुँचा तो सूरज लगभग डूब चुका था।
पैर भारी थे। दिमाग में राजिया की चीखें, उसके भाई की गालियाँ और बाबूजी-सुमन का दृश्य एक साथ घूम रहे थे। उसने मुँह-हाथ धोए, लेकिन वह गर्मी जो शरीर में उतर चुकी थी, नहीं गई। खाना उसने बहुत कम खाया। माँ ने पूछा तो बस सिर हिला दिया।
रात के बारह बजते-बजते रेणु आई। लालटेन लेकर। दरवाजा बंद करके वह बिस्तर के किनारे बैठ गई। अमन इस बार उसके चेहरे की तरफ सीधे देखा।
“दीदी, आज बहुत कुछ हुआ।”
रेणु ने शांत स्वर में कहा, “बताओ।”
अमन ने कुछ नहीं छुपाया। शुरू से अंत तक सब बता दिया—सुबह बाबूजी और सुमन का पूरा दृश्य, सुमन के खोले राज़, फिर राधा को बचाने जाना, राजिया का अपने सगे भाई और दूसरे लड़के के साथ खँडहर में संभोग, और राधा का सदमा।
रेणु끝까지 चुपचाप सुनती रही। जब अमन खत्म हुआ तो उसने धीरे से पूछा,
“तुमने राधा को सच्चाई दिखा दी। अच्छा किया। अब वह खुद समझ गई होगी कि कौन दोस्त है और कौन दुश्मन।”
अमन चुप रहा। रेणु ने उसका हाथ पकड़ा।
“आज तुमने बहुत कुछ देख लिया। शरीर की भूख भी देखी और दिल की कमजोरी भी। लेकिन एक बात याद रखना—सेक्स सिर्फ शरीर की जरूरत नहीं है। औरत या लड़की सिर्फ शरीर नहीं होती।”
अमन ने उसकी तरफ देखा। रेणु की आँखें गंभीर थीं।
“लड़की और औरत एक ऐसी चीज है कि अगर तुमने उसका दिल जीत लिया, तो वह मरते दम तक तुम्हारे साथ खड़ी रहेगी। चाहे दुनिया एक तरफ हो जाए। बस उसे खुश रखना आना चाहिए। उसके दिल की बात समझनी चाहिए। सिर्फ शरीर से खेलोगे तो वह शरीर दे देगी, लेकिन दिल नहीं। और बिना दिल के शरीर थोड़े दिन का मेला है।”
अमन चुपचाप सुन रहा था। रेणु ने आगे कहा,
“आजकल के लड़के सिर्फ चोदना चाहते हैं। बात करना, समझना, ख्याल रखना नहीं चाहते। तुम वैसा मत बनना। मैं तुम्हें सेक्स सिखा रही हूँ, सही है। लेकिन साथ में यह भी सिखाऊँगी कि लड़की से कैसे बात की जाए, उसका दिल कैसे जीता जाए, और उसे कैसे अपने पास हमेशा के लिए रखा जाए।”
उसने अमन का हाथ अपनी जाँघ पर रखा।
“आज की शिक्षा दो हिस्सों में होगी। पहला—शरीर। दूसरा—दिल।”
रेणु ने ब्लाउज के बटन खोले। स्तन बाहर आ गए। उसने अमन का हाथ उन पर रखा, फिर उसकी पैंट खोली। दस इंच का लंड सख्त निकल आया। रेणु ने इसे अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर मुँह के करीब ले जाकर पहले की तरह चूसने लगी—गहरा, धीरे, और नियंत्रित।
अमन की साँसें तेज हो गईं। रेणु ने कुछ देर तक यही किया, फिर मुँह हटाया और बोली,
“शरीर की भूख मिटाना आसान है। लेकिन किसी का दिल जीतना मुश्किल। राधा आज सदमे में है। अगर तुमने सही समय पर सही बात की, उसका ख्याल रखा, तो शायद वह तुम्हें सिर्फ बचाने वाला नहीं, समझदार दोस्त भी माने। जबरदस्ती मत करना। समय देना।”
रेणु ने फिर से लंड को मुँह में लिया। इस बार थोड़ी देर और गहराई से। अमन की उंगलियाँ उसके बालों में फँस गईं। फिर रेणु ने अचानक रोक दिया।
“बस। आज शरीर की शिक्षा यहीं तक। बाकी कल।”
उसने ब्लाउज पहन लिया। दरवाजे तक जाकर रुकी।
“अमन, एक बात और। तुम मुझसे कुछ मत छुपाना। जैसा आज सब बता दिया, वैसे ही आगे भी बताते रहना। मैं तुम्हें गलत नहीं होने दूँगी। न शरीर में, न दिल में।”
रेणु चली गई।
अमन अकेला रह गया। मुँह में रेणु की गर्माहट थी, लंड अभी भी तना हुआ था, लेकिन दिमाग में उसकी बातें गूँज रही थीं—दिल जीतना, खुश रखना, समय देना।
आज उसने बहुत कुछ देख लिया था।
अब वह समझ रहा था कि सिर्फ देखना और सीखना काफी नहीं।
सही गलत की समझ भी जरूरी है।
रात गहरी होती गई। अमन लेटा रहा। आँखें खुली थीं।
कल कॉलेज जाना था। राधा से सामना होना था। और रेणु की शिक्षा अब सिर्फ सेक्स तक सीमित नहीं रह गई थी।
Fuckuguy
albertprince547;
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RE: परिवार के गंदे राज़ - by Fuckuguy - 11-09-2026, 10:27 AM



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