11-09-2026, 04:16 AM
RAZIA
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[/img]अमन घर के मुख्य द्वार से अंदर घुसा तो उसके पैर जैसे अपने नहीं लग रहे थे।
बाबूजी और सुमन का पूरा दृश्य उसकी आँखों के पीछे बार-बार दोहराया जा रहा था—सुमन की 36-32-36 वाली बॉडी, उसके बड़े गोरे स्तन जो बाबूजी के हाथों में मसले जा रहे थे, गाँड पर पड़ते थप्पड़, और सबसे ऊपर सुमन के मुँह से निकलते वे शब्द जो घर के राज़ खोल रहे थे। माँ के बारे में। रेणु के बारे में। और खुद अमन के बारे में।
वह सीधे अपने कमरे में गया और बिस्तर पर बैठ गया। थैला उसने खेत में ही छोड़ दिया था। हाथ काँप रहे थे। लंड पैंट में अभी भी आधा सख्त था। वह आँखें बंद करके बैठ गया, लेकिन आँखें बंद करते ही सुमन की सिसकारियाँ और बाबूजी की गालियाँ और तेज हो जातीं।
तभी अचानक, बिल्कुल अचानक, राधा का चेहरा सामने आ गया।
रविवार।
दोपहर।
पुराना मंदिर।
खँडहर।
अमन की आँखें एकदम खुल गईं। दिल ने एक जोर का धक्का मारा। वह बिस्तर से उछलकर खड़ा हो गया। समय कितना हुआ? धूप देखकर अंदाजा लगाया—अभी दोपहर पूरी तरह नहीं हुई थी। अभी भी मौका था।
वह बिना किसी को बताए घर से बाहर निकल पड़ा। तेजी से राधा के घर की तरफ भागा। गली-गली से गुजरते हुए उसका दिमाग एक साथ कई चीजों में बँटा था—बाबूजी का लंड, सुमन की चूत, रेणु के अधूरे जवाब, और राधा को होने वाला खतरा।
राधा के घर पहुँचकर उसने आँगन में देखा। राधा घर के बरामदे में खड़ी कपड़े सुखा रही थी। हल्के रंग की सलवार-सूट में वह साधारण लेकिन साफ-सुथरी लग रही थी। अमन ने बिना सोचे उसके पास जाकर कलाई पकड़ ली।
“राधा, एक मिनट। मेरे साथ चल। जरूरी बात है।”
राधा हैरान रह गई। “अमन? तू यहाँ? क्या हुआ?”
अमन ने उसे घर के पीछे वाली छोटी सी दीवार के किनारे खींच लिया, जहाँ कोई उन्हें आसानी से नहीं देख सकता था। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं।
“मेरी बात ध्यान से सुन। आज तू उस खँडहर मत जाना। बिल्कुल मत जाना।”
राधा की भौंहें चढ़ गईं। “क्या बकवास कर रहा है तू? कौन सा खँडहर?”
अमन ने उसकी दोनों कलाई पकड़कर अपनी तरफ किया। आँखों में आँखें डालकर बोला,
“दो लड़के और एक लड़की… वे तुझे आज दोपहर को पुराने मंदिर के पीछे खँडहर में बुला रहे हैं। फोन या कुछ दिखाने का बहाना करके। पहुँचते ही वे तीनों तुझे दबोच लेंगे। दोनों लड़के तुझे चोदेंगे और वह लड़की भी शामिल होगी। मैंने खुद उनका प्लान सुना है।”
राधा का चेहरा पल भर में बदल गया। पहले हैरानी, फिर गुस्सा, फिर अविश्वास।
“तू पागल हो गया है क्या? राजिया मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती। वह मेरी अच्छी सहेली है। और वे लड़के…”
अमन ने बीच में काटा। “राजिया…”
नाम सुनते ही उसके दिमाग में सब कुछ जुड़ गया। वही आवाज। वही हँसी। वही अंदाज। खँडहर में जो लड़की दोनों लड़कों के साथ थी, जिसका चेहरा अँधेरे और कोण की वजह से साफ नहीं दिखा था—वह राजिया ही थी।
“राजिया ही है वह,” अमन ने धीमे लेकिन सख्त स्वर में कहा। “मैंने उसे दोनों लड़कों के साथ खँडहर में देखा है। पूरी तरह। आज तू मान नहीं रही तो चल, मैं तुझे अभी दिखाता हूँ। लेकिन समय से पहले पहुँचना होगा। जितनी जल्दी उन्होंने बुलाया है, उससे पहले वहाँ छिप जाएँगे। फिर तू खुद देख लेना।”
राधा कई पल तक अमन की आँखों में देखती रही। उसमें झूठ नहीं दिख रहा था। डर था, बेचैनी थी, और एक अजीब सी सच्चाई थी। आखिरकार उसने धीरे से सिर हिलाया।
“ठीक है। चल। लेकिन अगर तूने झूठ बोला तो…”
दोनों चुपचाप निकल पड़े। रास्ता छोटा था लेकिन अमन तेज चल रहा था। राधा उसके पीछे-पीछे आ रही थी। पुराने मंदिर के पास पहुँचकर अमन ने उसे संकेत किया और दोनों खँडहर के पीछे वाली घनी झाड़ियों में दुबक गए। झाड़ियाँ इतनी मोटी थीं कि बाहर से दिखना मुश्किल था, लेकिन अंदर से सब साफ दिखाई दे रहा था।
थोड़ी देर इंतजार के बाद तीनों आ गए।
पहले दो लड़के, फिर उनके पीछे राजिया।
राजिया आज भी पहले जैसी गोरी और चमकदार लग रही थी। सफेद रंग की तंग कुर्ता-सलवार में उसका बदन साफ उभर रहा था। लंबे काले बाल खुले थे। चेहरा सुंदर था, लेकिन आँखों में वह शरारत थी जो अमन ने पहली बार खँडहर में महसूस की थी।
वे तीनों खँडहर के बीच में खड़े होकर राधा का इंतजार करने लगे।
एक लड़के ने (थोड़ा लंबा और मजबूत) कहा, “साली देर लगा रही है। कहा था दोपहर को।”
दूसरे लड़के ने सिगरेट जलाते हुए जवाब दिया, “आएगी। राजिया ने ठीक से बहाना किया है न?”
राजिया ने कंधे उचकाए। “मैंने कहा था फोन में नई मूवी की क्लिप है, दिखाऊँगी। लेकिन मैं पहले भी कहती थी—राधा बहुत शरीफ है। शायद डर गई हो। नहीं आएगी।”
समय बीतता गया। जब काफी देर हो गई और राधा नहीं आई तो बातें खुलने लगीं।
लंबे लड़के ने राजिया की कमर में हाथ डालते हुए कहा, “साली नहीं आई तो आज तू ही निपटा। मुझे तो उसकी चूत और गाँड दोनों आजमाने का मन था। तू जानती है न, मुझे राधा कितनी पसंद है।”
राजिया हँसी। हँसी में एक अजीब सा आराम था।
“तू तो मेरे अपने भाई है। अपनी बहन की सहेली को चोदने का प्लान बनाता है? शर्म नहीं आती?”
झाड़ियों के पीछे अमन और राधा दोनों की साँसें एक साथ रुक गईं।
भाई।
राजिया अपने सगे भाई के साथ खड़ी थी।
भाई ने राजिया के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा, “बहन होने के साथ-साथ तू मेरी सबसे अच्छी और सबसे गंदी रंडी भी है। आज राधा नहीं आई तो कोई बात नहीं। तू दोनों को सँभाल ले। इस साले को भी साथ ले लेते हैं।”
तीसरे लड़के ने हँसते हुए अपनी पैंट का नाड़ा खोोल दिया। उसका लंड पहले से ही आधा सख्त था।
राजिया ने कोई विरोध नहीं किया। बल्कि उसने खुद अपने कुर्ते के निचले बटन खोले और कुर्ता ऊपर तक उठा लिया। उसके गोरे, गोल और भारी स्तन बाहर आ गए। निप्पल गुलाबी-भूरे और पहले से सख्त थे। धूप में उसका गोरा बदन चमक रहा था।
“चलो फिर,” राजिया ने साफ आवाज में कहा। “आज तुम दोनों मुझे चोदो। भाई पहले मेरी चूत ले। तू मेरी गाँड। फिर बदल लेना।”
वह जमीन पर घुटनों के बल झुक गई। सलवार और पैंटी एक साथ नीचे सरका दी। उसकी गोरी, गोल गाँड धूप में नंगी चमकने लगी। बीच में गुलाबी चूत की दरार साफ दिख रही थी।
भाई ने पीछे से अपनी पैंट पूरी तरह उतार दी। उसका लंड मोटा, नसों वाला और पूरी तरह खड़ा था। उसने राजिया की गाँड के दोनों भाग फैलाए और बिना किसी और बात के अपना लंड उसकी चूत पर लगाकर एक झटके में अंदर तक धंस दिया।
“आह्ह्ह्ह… भाई… धीरे… कितना जोर से… आज भी मेरी चूत फाड़ रहा है तेरा लंड…” राजिया की लंबी सिसकारी निकली।
तीसरा लड़का आगे आकर उसके मुँह के सामने खड़ा हो गया। उसने राजिया के बाल पकड़कर अपना लंड उसके होंठों पर मारते हुए कहा,
“मुँह खोल रंडी। अपने भाई की लंड पीछे ले रही है तो मेरी आगे चूस।”
राजिया ने मुँह खोला। लंड अंदर चला गया। गले तक। वह गैग करते हुए भी चूसने लगी। पीछे से भाई जोर-जोर से धक्के मार रहा था। हर धक्के के साथ राजिया की गोरी गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। चूत की गीली आवाजें—छप-छप-छप—साफ सुनाई दे रही थीं।
“ले साली बहन… ले अपने सगे भाई का पूरा लंड… तेरी चूत आज भी उतनी ही गरम और टाइट है…” भाई गाली दे रहा था।
राजिया का मुँह भरा होने की वजह से सिर्फ गुनगुनाहट निकल रही थी, लेकिन उसकी आँखें मजे से बंद थीं।
झाड़ियों के पीछे अमन का लंड पैंट में पूरी तरह तनकर दर्द करने लगा था। राधा का शरीर काँप रहा था। उसका एक हाथ अपने मुँह पर था ताकि कोई आवाज न निकले। आँखें फटी की फटी थीं। वह अपनी सहेली को उसके अपने भाई और दूसरे लड़के से एक साथ चुदवाते देख रही थी।
दृश्य अभी और गंदा होने वाला था।
झाड़ियों के पीछे अमन और राधा की साँसें लगभग थम चुकी थीं।
खँडहर के बीचोबीच राजिया घुटनों के बल झुकी हुई थी। उसका गोरा बदन धूप में चमक रहा था। कुर्ता ऊपर उठा हुआ था, स्तन लटक रहे थे और हर धक्के के साथ जोर से हिल रहे थे। सलवार और पैंटी उसके घुटनों तक उलझी हुई थीं। पीछे से उसका सगा भाई पूरे जोर से उसकी चूत में लंड धंसाए जा रहा था। मोटा, नसों वाला लंड हर बार लगभग पूरा बाहर निकलता और फिर एक झटके में जड़ तक चला जाता।
“आह्ह्ह… भाई… धीरे… नहीं… जोर से ही रख… मेरी चूत फाड़ दे आज… पूरा अंदर तक डाल…” राजिया की आवाज कराह और मजे के बीच निकल रही थी।
तीसरा लड़का उसके मुँह के सामने खड़ा था। उसने दोनों हाथों से राजिया के बाल पकड़ रखे थे और अपना लंड उसके गले तक ठूंस रहा था। राजिया की आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन वह रुक नहीं रही थी। लार उसके मुँह के कोनों से बहकर ठुड्डी और स्तनों पर गिर रही थी।
“चूस जोर से साली… गला खोल… अपने भाई की बहन होकर भी कितनी अच्छी रंडी है तू…” तीसरे लड़के ने गाली दी।
भाई ने पीछे से राजिया की गोरी गाँड पर जोरदार थप्पड़ मारा। लाल निशान तुरंत उभर आया। फिर उसने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और धक्कों की गति और तेज कर दी।
“ले रंडी बहन… ले अपने सगे भाई का लंड… तेरी यह टाइट चूत सिर्फ मेरे लिए बनी है… आज राधा नहीं आई तो तुझे ही दोनों छेद खोलकर रखूँगा…”
राजिया ने मुँह से लंड निकालकर कराहते हुए जवाब दिया,
“हाँ… खोल दे… दोनों छेद खोल दे… मैं तेरी बहन हूँ और तेरी सबसे गंदी रंडी भी… आज जितना चाहे वैसा इस्तेमाल कर… आह्ह्ह… वहीं… वहीं मार…”
भाई ने अचानक लंड बाहर निकाला। राजिया की चूत से गीली आवाज निकली। उसने राजिया को पलट दिया। राजिया चित लेट गई। उसके गोरे स्तन दोनों तरफ फैल गए। भाई ने उसके दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिए और फिर से लंड चूत में धंसा दिया। इस बार आमने-सामने।
अब हर धक्के के साथ राजिया के स्तन जोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे। भाई ने झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया और दाँतों से हल्का काटा। राजिया की कमर उठ गई।
“आह्ह्ह… काट… हल्के से काट… और जोर से चोद… भाई… आज बहुत जोर से चोद मुझसे…”
तीसरा लड़का राजिया के सिर के पास आ गया। उसने फिर से अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। अब राजिया एक तरफ अपने सगे भाई से चुद रही थी और दूसरी तरफ दूसरे लड़के का लंड चूस रही थी।
झाड़ियों के पीछे राधा का पूरा शरीर काँप रहा था। उसका एक हाथ अपने मुँह पर दबा था। आँखों में पानी था—डर से, सदमे से, और एक अजीब सी गर्मी से जो वह समझ नहीं पा रही थी। अमन का हाल और बुरा था। उसका दस इंच का लंड पैंट में इतना तन चुका था कि दर्द हो रहा था। उसने अनजाने में अपनी पैंट के ऊपर से ही लंड को दबा लिया।
खँडहर में भाई ने अचानक गति बदल दी। उसने लंड बाहर निकाला और राजिया को फिर से घुटनों के बल कर दिया। इस बार उसने लंड को राजिया की गाँड की छेद पर लगा दिया।
“अब यह छेद भी लेगी मेरी प्यारी बहन। ढीली कर।”
राजिया ने चारपाई की जगह जमीन पर दोनों हाथ टिका दिए और सिर घुमाकर बोली,
“डाल… धीरे से डाल… तू बहुत मोटा है… आह्ह्ह… जा रहा है अंदर… भाई… फाड़ मत देना… पूरा… पूरा अंदर कर दे…”
भाई ने धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाव डालते हुए अपना लंड उसकी गाँड में धंसाना शुरू किया। आधा अंदर जाते ही राजिया की लंबी और कामुक चीख निकल गई।
“आह्ह्ह्ह… पूरा… अब पूरा डाल… मैं सह लूँगी… मैं तेरी रंडी बहन हूँ न…”
भाई ने एक झटके में बाकी का लंड अंदर कर दिया। राजिया का शरीर काँप उठा। फिर भाई ने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। गाँड की टकराहट की आवाज साफ आ रही थी।
तीसरे लड़के ने राजिया के बाल पकड़कर फिर से अपना लंड उसके मुँह में ठूंस दिया।
“अब दोनों छेद भरे हैं तेरे… बहन की तरह नहीं, रंडी की तरह चूस और ले…”
राजिया पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। उसके मुँह से सिर्फ गुनगुनाहट और सिसकारियाँ निकल रही थीं। भाई गाँड में चोद रहा था और तीसरा लड़का उसके मुँह का इस्तेमाल कर रहा था। गालियाँ एक के बाद एक निकल रही थीं।
“ले साली… ले अपने भाई का लंड गाँड में… आज तुझे याद रहेगा…”
“चूस जोर से… गला खोल… पूरी रंडी बन जा…”
“आह्ह… भाई… और तेज… दोनों… मुझे खराब कर दो पूरी…”
अमन ने राधा की तरफ देखा। राधा की साँसें तेज चल रही थीं। उसके होंठ काँप रहे थे। अमन का अपना शरीर भी आग की तरह जल रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि वह सिर्फ गुस्से में है या कुछ और भी महसूस कर रहा है।
खँडहर में तीनों की आवाजें और तेज होती जा रही थीं। भाई की गति बहुत तेज हो गई थी। राजिया की गोरी गाँड अब लाल हो चुकी थी थप्पड़ों और टकराहट से।
दृश्य अभी खत्म होने वाला नहीं था।
Fuckuguy
albertprince547;
albertprince547;


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