09-09-2026, 10:15 AM
कभी-कभी लगता है, कहानी लिखना आसान है…
मुश्किल तो उस ख़ामोशी को सहना है, जो कहानी ख़त्म होने के बाद मिलती है।
इस कहानी पर एक भी टिप्पणी नहीं आई…
न किसी ने कहा “अच्छी थी”, न किसी ने पूछा “आगे क्या होगा?”,
न ही कोई छोटी-सी शिकायत की।
सच कहूँ तो एक लेखक को केवल पाठकों की संख्या नहीं चाहिए होती,
कभी-कभी बस दो शब्द चाहिए होते हैं…
ताकि यह यक़ीन हो सके कि जो भावनाएँ उसने शब्दों में पिरोईं,
वे किसी के दिल तक पहुँची भी थीं।
फिर भी कोई शिकायत नहीं है…
बस थोड़ा-सा अफ़सोस है कि जिस कहानी को लिखने में अपना दिल लगा दिया,
उसके हिस्से में पाठकों की ख़ामोशी आई।
ख़ैर… लिखना तो जारी रहेगा।
बस अगली बार यूँ ख़ामोशी से मत गुज़र जाना…
एक छोटी-सी टिप्पणी ही कर देना।
मुश्किल तो उस ख़ामोशी को सहना है, जो कहानी ख़त्म होने के बाद मिलती है।
इस कहानी पर एक भी टिप्पणी नहीं आई…
न किसी ने कहा “अच्छी थी”, न किसी ने पूछा “आगे क्या होगा?”,
न ही कोई छोटी-सी शिकायत की।
सच कहूँ तो एक लेखक को केवल पाठकों की संख्या नहीं चाहिए होती,
कभी-कभी बस दो शब्द चाहिए होते हैं…
ताकि यह यक़ीन हो सके कि जो भावनाएँ उसने शब्दों में पिरोईं,
वे किसी के दिल तक पहुँची भी थीं।
फिर भी कोई शिकायत नहीं है…
बस थोड़ा-सा अफ़सोस है कि जिस कहानी को लिखने में अपना दिल लगा दिया,
उसके हिस्से में पाठकों की ख़ामोशी आई।
ख़ैर… लिखना तो जारी रहेगा।
बस अगली बार यूँ ख़ामोशी से मत गुज़र जाना…
एक छोटी-सी टिप्पणी ही कर देना।




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