06-09-2026, 11:21 PM
फिर अचानक डोरबेल बजी ...मम्मी और रामु घबरा गए की कौन आगया ...फिर दोनों ने कपडे पहने और रामु ने देखा तो कोरियर वाला था फिर पार्सल लेके रामु ने दरवाजा बंद कर दिया और सीधा मम्मी के पास आगया ......और मम्मी की चूचियां ब्लाउज़ के ऊपर से दबाते हुए पुछा ......क्या लगा आपको की साहब आगये ......मम्मी बोली नहीं मैं जानती थी की तुम्हारे साहब नहीं होंगे क्यों की वो तो कई दिनों के लिए बाहर गए है .....रामु ने कहा .....अगर साहब होते भी तभी मैं आपकी चुदाई करता उनके सामने ........मम्मी उसकी बात से शर्मा गई .......बोली......तेरा दिमाग ख़राब हो गया है क्या ........फिर रामु ने बोला.....अरे मालकिन मैं तो मज़ाक कर रहा था ......मैं जानती हु तुम मज़ाक कर रहे हो ........
रामू ने माँ की शर्माती हुई बात सुनकर और भी जोश में आकर उनकी चूचियों को और जोर से दबाया। "अरे मालकिन, शर्माने की क्या बात है। ये चूचियां तो मेरे लिए ही हैं।" उसने माँ के ब्लाउज के बटन खोलकर अंदर हाथ डाला और उनकी नंगी चूचियों को सीधे छूने लगा।
माँ ने आँखें बंद करके सांस ली, "रामू... प्लीज... अभी पापा जा ही चुके हैं, थोड़ा इंतजार कर लेते।"
लेकिन रामू का जोश बढ़ चुका था। उसने माँ को दीवार से सटाया और उनके होंठों पर अपना मुँह चिपका दिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे के मुँह में घुस रही थीं। रामू ने माँ की साड़ी को ऊपर उठाकर उनकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया।
रामू ने माँ की शर्माती हुई बात सुनकर और भी जोश में आकर उनकी चूचियों को और जोर से दबाया। "अरे मालकिन, शर्माने की क्या बात है। ये चूचियां तो मेरे लिए ही हैं।" उसने माँ के ब्लाउज के बटन खोलकर अंदर हाथ डाला और उनकी नंगी चूचियों को सीधे छूने लगा।
माँ ने आँखें बंद करके सांस ली, "रामू... प्लीज... अभी पापा जा ही चुके हैं, थोड़ा इंतजार कर लेते।"
लेकिन रामू का जोश बढ़ चुका था। उसने माँ को दीवार से सटाया और उनके होंठों पर अपना मुँह चिपका दिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे के मुँह में घुस रही थीं। रामू ने माँ की साड़ी को ऊपर उठाकर उनकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया।


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