02-09-2026, 08:54 PM
![[Image: grok-1787906915471.jpg]](https://i.ibb.co/20Qg3FRy/grok-1787906915471.jpg)
रामू ने रुही की दोनों टाँगें अपने कंधों पर और चढ़ा दीं। कोण टूट गया। उनका मोटा लंड उसकी तंग चूत में जड़ तक धँसा हुआ था। पहले धीमे थे। अब नहीं।
एक झटका—पूरा, भारी, बिना पूछे।
“आह्ह्ह्ह्ह! रामू जी… लंड… आपका लंड मेरी चूत फाड़ रहा है… निकल… प्लीज निकल…!”
“नहीं निकलेगा।” आवाज़ सख्त थी। उन्होंने उसकी कलाई सोफे के ऊपर दबाई। दूसरा हाथ उसके मुम्मे पर गया—दबाया, मरोड़ा, निपल को उंगली से काटा। “यह चूत मेरी है। ये मुम्मे मेरे हैं। आज तू सहेगी।”
दूसरा झटका और तेज़। सोफा खटका। रुही की चूत ने लंड को जकड़ लिया, फिर भी दर्द से आवाज़ फटी—
“आह्ह्ह! गाँड तक चुभ रहा है… बहुत गहरा… मेरी चूत फट गई रामू जी… तारस… अपनी रंडी पर तारस खाओ…!”
रामू झुके। उसके खुले मुँह में थूक दिया, फिर जीभ चूसी, फिर कमर और ज़ोर से मारी। चूत की गीली आवाज़—थप थप थप—कमरे में बजने लगी। रुही की चीखें टूटकर सिसकी हो रही थीं, सिसकी फिर चीख।
“बोल,” उन्होंने दाँत भींचे। “किसकी चूत चुद रही है?”
“आप… आपकी… रामू जी की चूत… अह्ह्ह्ह… सनी की नहीं… आपकी… मारो… लेकिन तारस… एक सेकंड तारस…!”
उन्होंने तारस नहीं दिया। उन्होंने उसकी एक टाँग और फैलाई, लंड पूरा खींचकर फिर एक झटके में गाड़ दिया। रुही की पीठ सोफे से उछली। मुम्मे हिल गए। लेस की ब्रा बाजू तक खिसक चुकी थी।
“आह्ह्ह्ह्ह! चुदाई… ऐसी चुदाई… मैं मर रही हूँ… मेरी गाँड भी दब गई आपके नीचे… रामू जी धीरे… मैं नाज़ुक हूँ… अह्ह… नाज़ुक चूत है मेरी… इतना मोटा लंड मत पीटो…!”
“नाज़ुक है तो और भी मेरी है।” उन्होंने उसके गाल पर हल्की थप्पड़ मारी—इतनी कि शर्म जले, इतनी नहीं कि बस दर्द हो। “चीख। पूरे घर को बता। तेरी चूत रामू की चुदाई खा रही है।”
रुही रोते-चीखते बोली, “खा रही है… खा रही है… आपकी चूत आपकी चुदाई खा रही है… बस गाँड मत खोलो अभी… चूत ही ले लो… चूत फट रही है फिर भी ले लो… अह्ह्ह्ह!”
बेडरूम तक आवाज़ गई। जामिल की कमर थमी। सोनिया ने कान लगाया।
लिविंग रूम में रामू ने रुही को लगभग सोफे से मोड़ दिया—कमर नीचे, छाती तकिए पर, गाँड थोड़ी उठी। लंड चूत से एक पल निकला, गीला, तना। फिर उन्होंने उसके नितंब पर थप्पड़ मारा और उसी झटके में चूत में फिर घुसे।
“आह्ह्ह्ह्ह! पीछे से… यह वाला नहीं… बहुत गहरा बैठता है… रामू जी मेरी चूत बची नहीं… मुम्मे दबाओ… मुम्मे दبا के मारो… तारस मुम्मों पर करो, चूत पर मत…!”
रामू ने दोनों मुम्मे पीछे से आकर मसल दिए—खुरदरे हाथ, सख्त पकड़। निपल उनके पोरों में दब गए। उसी समय लंड ने चूत पीटना शुरू किया—रफ, लय टूटी हुई, कभी पूरा बाहर, कभी जड़ तक।
रुही की आवाज़ अब भीख की नहीं, टूटी हुई मादा की थी—
“चोदो… चोद दो रामू जी… मेरी चूत चोद दो… मैं आपकी रंडी… आपकी बहू… अह्ह… लंड निकालोगे तो मैं रोऊँगी… अंदर रखो… अंदर मारो… गाँड मत छेड़ो बस चूत मारो… अह्ह्ह्ह चूत मारो…!”
“गाँड बाद में,” उन्होंने उसके कान में कहा। “पहले इस चूत को याद दिलाऊँ सनी का लंड कहाँ रह गया था। बोल—उसका छोटा था न?”
रुही ने शर्म से मुँह तकिए में दबाया, फिर चीखकर निकाला, “छोटा था… कमजोर था… आपका लंड… आपका लंड मेरी चूत का मालिक है… अह्ह्ह… मालिक चोदो… तारस मत खाओ… नहीं… तारस खाओ… मुझे पता नहीं… मैं पागल हूँ… चोदो…!”
रामू ने उसकी बालों की मुट्ठी पकड़ी। सिर पीछे खींचा। चेहरा खुला। चुदाई और तेज़। चूत की दीवारें लंड को चाट रही थीं, फिर भी रुही की चीख दर्द और मजे दोनों की थी।
“आह्ह्ह्ह! आ रही हूँ… चूत फट के आ रही हूँ… रामू जी रुक… नहीं रुक… भर दो… लंड की धार चूत में छोड़ दो… मुम्मे काटो… गाँड थप्पड़ मारो… मैं सह लूँगी… अपनी बहू को बर्बाद कर दो… अह्ह्ह्ह्ह!”
उन्होंने गाँड पर दो थप्पड़ मारे—सट, सट। लंड चूत में धँसा रहा। रुही की चीख बेडरूम तक सीधी गई। जामिल ने साँस ली। सोनिया ने फुसफुसाया, “सुन, अब तारस नहीं माँग रही… बर्बाद होने को कह रही है।”
सोफे पर रामू ने आखिरी लय पकड़ी—रफ, गहरा, बिना छूट। रुही के नाखून चमड़े में गड़े। आँसू, लार, पसीना। मुँह खुला—
“रामू जी… चूत आपकी… गाँड आपकी… मुम्मे आपके… चुदाई आपकी… मैं आपकी… सनी का घर छोड़… यह सोफा मेरा सुहाग है… अह्ह… अह्ह्ह… मारो मारो मारो…!”
रामू ने उसके अंदर ही रहकर कमर जाम ली। लंड धड़क रहा था। रुही की चूत स्पंदित हो रही थी—फाटी हुई, गीली, समर्पित। उन्होंने उसका गला नहीं दबाया, सिर्फ दाढ़ी उसके गाल से सटाई।
“अब रो,” उन्होंने कहा। “लेकिन लंड निकलेगा नहीं। तेरी चूत आज रात खाली नहीं रहेगी।”
रुही ने काँपते हुए सिर हिलाया। आवाज़ अब चीख से छोटी थी, लेकिन और गहरी—
“मत निकालना… चूत में रखो… मैं सहूँगी… आपकी रंडी सहेगी… तारस बाद में देना… अभी चुदाई दो… अभी लंड दो… रामू जी… मैं झुक गई… पूरी… चूत से गाँड तक आपकी…”
तकिए तले फोन फिर काँपा। साइलेंट।
सनी की कॉल।
और घर के दोनों कमरों में सिर्फ एक बात बच गई थी—रुही की चूत रामू के लंड पर टिकी हुई थी, और उसकी चीख अब तारस नहीं, समर्पण बन चुकी थी।


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