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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
**खाना खाकर हम कमरे में पहुँचे ही थे कि कमरे की तेज रोशनी से मम्मी का गोरा मुखड़ा चमचमा उठा,रोशनी ने माहौल को एक अजीब सी गर्माहट दे दी थी। मम्मी ने बेड पर बैठते हुए एक लंबी सांस ली और अपने पल्लू को ठीक करने लगीं। "रवि, आज खाना थोड़ा भारी हो गया ना?, पेट में कुछ भारीपन सा लग रहा है," उन्होंने बहुत ही सहजता से कहा, जैसे कोई माँ अपने बेटे से बात करती है।**
**मैंने उनके पास बैठकर कहा, "नहीं मम्मी, खाना तो बहुत बढ़िया बना था। शायद आप थक गई हैं।" मैंने अपनी नज़रें उनके चेहरे से नहीं हटाई थीं। कमरे की लाइट इतनी साफ़ थी कि उनकी साड़ी के रेशम की चमक और उनके गले की बारीक नसों की हरकत साफ़ दिख रही थी।**
**"थकान तो है, पर नींद नहीं आ रही," उन्होंने अपनी आँखों को मलते हुए कहा। जैसे ही उन्होंने हाथ उठाया, उनकी साड़ी का पल्लू उनके कंधे से फिसलकर नीचे गिर गया, जिससे उनके कंधे का एक हिस्सा पूरी तरह से साफ़ दिखने लगा। मैंने अपनी नज़रें घुमाने की कोशिश की, लेकिन मेरा शरीर जैसे वहीं जम गया था।**
**"मम्मी, आपकी तबीयत ठीक तो है ना? आपके चेहरे पर थोड़ी लालिमा लग रही हैं," मैंने बहाना बनाते हुए उनके माथे की ओर हाथ बढ़ाया। मेरा हाथ जब उनके माथे को छूने के लिए बढ़ा, तो मेरा हाथ जानबूझकर उनके गालों को छूते हुए उनकी गर्दन के पास से गुजरा। वह स्पर्श बहुत हल्का था, लेकिन जैसे ही मेरी उंगलियां उनकी गर्म त्वचा से टकराईं, मुझे महसूस हुआ कि वह सिहर उठीं।**
**"हाँ... ठीक हूँ मैं," उन्होंने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा। उनकी सांसें अब थोड़ी तेज़ होने लगी थीं। बातचीत अब खाने और थकान से हटकर एक अनकहे अहसास की ओर मुड़ रही थी। मैंने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि धीरे से उनकी कलाई को पकड़ लिया। "मम्मी, आपकी कलाई तो बहुत गर्म है। क्या आपको वाकई बुखार जैसा महसूस हो रहा है?"**
**मैंने उनके हाथ की उंगलियों को अपनी उंगलियों के बीच फँसा लिया। वह स्पर्श अब पूरी तरह से जानबूझकर किया गया था। उनकी आँखों में एक डर था, लेकिन उस डर के पीछे एक गहरी चाहत भी थी जो वह शब्दों में नहीं कह पा रही थीं। कमरे का सन्नाटा अब हमारी बढ़ती हुई धड़कनों से भरने लगा था। बातचीत अब घरेलू नहीं रही थी; अब शब्दों की जगह हमारे शरीर की गर्मी और स्पर्श का खेल शुरू हो चुका था।
मैंने उनके हाथ की पकड़ को थोड़ा और मजबूत किया और धीरे से उनकी हथेली को सहलाने लगा। "मम्मी, आपकी धड़कनें भी बहुत तेज़ चल रही हैं, क्या आप वाकई ठीक महसूस कर रही हैं?" मेरी आवाज़ अब पहले से कहीं ज्यादा भारी और गहरी हो चुकी थी।
उन्होंने अपनी नज़रें नीचे झुका लीं, जैसे वह उस स्पर्श के बोझ को सह नहीं पा रही थीं। "रवि... यह क्या कर रहे हो तुम? हमें सो जाना चाहिए," उन्होंने कहने की कोशिश की, लेकिन उनके शब्दों में वह सख्ती नहीं थी जो एक माँ के पास होनी चाहिए। इसके बजाय, उनकी आवाज़ में एक अजीब सी थरथराहट और समर्पण था।
जैसे ही मैंने उनके हाथ को चूमते हुए अपनी गर्दन के पास ले जाने की कोशिश की, उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं। कमरे की रोशनी में उनके चेहरे का हर भाव साफ़ था उनकी बंद पलकें, उनकी चढ़ती हुई सांसें और उनके होंठों का हल्का सा खुलना। वह पूरी तरह से मेरे स्पर्श के प्रभाव में आ चुकी थीं। अब घरेलू बातों का सिलसिला खत्म हो चुका था और कमरे का तापमान उस आग से भी ज्यादा बढ़ गया था जो अब हमारे बीच सुलगने लगी थी।
परंतु, मेरा इरादा कुछ और ही था। मैं तो बस एक समर्पित बेटे की तरह उनकी सेवा कर रहा था। मेरा मन तो बस उनकी थकान मिटाने और उन्हें सुकून देने में लगा था। "मम्मी, आप बस आँखें बंद करके लेट जाइए, मैं बस अभी आपके सिर को और आराम दे देता हूँ ताकि आपको गहरी नींद आ सके," मैंने बहुत ही आदर और प्रेमपूर्ण स्वर में कहा। मेरा स्पर्श अब पूरी तरह से निस्वार्थ और सेवा भाव से भरा था। मैं बस यह चाहता था कि वह चैन से सो सकें।
लेकिन जैसे जैसे मेरी उंगलियां उनके सिर और गर्दन के आसपास घूम रही थीं, उनके शरीर की प्रतिक्रिया कुछ अलग ही कहानी कह रही थी। उनकी सांसें अब सिर्फ थकान की वजह से नहीं फूल रही थीं, बल्कि उनमें एक अजीब सी तड़प और गर्मी थी। मालिश के उस सुखद स्पर्श ने उनके भीतर की दबी हुई इच्छाओं को जगा दिया था। उनकी बंद पलकें थरथरा रही थीं और उनके होंठ बार बार हल्के से खुल रहे थे।

अचानक, उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ थाम लिया। इस बार उनकी पकड़ में कोई हिचकिचाहट नहीं थी, बल्कि एक गहरी बेताबी थी। उन्होंने अपनी आँखें धीरे से खोलीं उन आँखों में अब थकान नहीं, बल्कि एक गहरा निमंत्रण था। "रवि..." उन्होंने बहुत ही धीमी और भारी आवाज़ में पुकारा, "इतनी सेवा... क्या सिर्फ इतना ही काफी है?" उनके शब्दों में छिपा हुआ अर्थ और उनकी उंगलियों का मेरे हाथ को अपनी ओर खींचना साफ़ बता रहा था कि वह अब सिर्फ मालिश से संतुष्ट नहीं थीं। वह मुझे अपने और करीब बुला रही थीं।
**"मम्मी ने जब मेरा हाथ खींचकर मुझे अपनी ओर बुलाया , मेरे अंदर का सारा संयम एक पल में राख हो गया। मुझे पता था कि हम पहले भी तीन एक हो चुके हैं, लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे मैंने अभी तक उन्हें छुआ ही नहीं। उनके होंठों से निकले उस निमंत्रण ने मेरे खून में आग लगा दी।"**
**"मैंने उनके चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा। उनकी आँखों में जो चमक थी, वह किसी भी दवाई से कहीं ज्यादा असरदार थी। मैं उनके और करीब झुका। हमारी सांसें आपस में टकरा रही थीं। मैंने बिना एक पल गँवाए उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह चुंबन कोई शुरुआत नहीं थी, बल्कि उस बेकाबू जुनून का हिस्सा था जो हमें बार बार एक दूसरे में डुबो देता है। उनके होंठों का वह स्वाद... वह मखमली अहसास मुझे फिर से पागल करने के लिए काफी था।"**
**"जैसे ही हमारे होंठ मिले, मम्मी ने भी पूरी शिद्दत से मेरा जवाब दिया। उन्होंने मुझे अपने और करीब खींच लिया, जैसे वह मुझे अपने शरीर के भीतर समा लेना चाहती हों। उनके हाथों की पकड़ मेरी पीठ पर और मजबूत होती जा रही थी। वह चुंबन अब सिर्फ होंठों तक सीमित नहीं रहा, वह एक गहरी और बेकाबू भूख में बदल चुका था। मुझे महसूस हो रहा था कि वह भी उतनी ही बेताब थीं जितना मैं।"मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी मीठे शहद में डूब रहा हूँ। उनके होंठों का स्वाद इतना गहरा और नशीला था कि मेरा दिमाग सुन्न पड़ गया।**
**शुरुआत में वह चुंबन थोड़ा धीमा था, जैसे मैं उनके स्वाद को चख रहा हूँ, लेकिन जल्द ही मेरी भूख बढ़ती गई। मैंने अपने होंठों को उनके होंठों के बीच और गहराई से दबाना शुरू कर दिया। उनकी जीभ ने भी जैसे मेरा स्वागत किया एक ऐसी बेताबी के साथ जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। हमारे होंठों के बीच की वह नमी और वह गर्माहट मेरे पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ रही थी।**
**मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर के नीचे ले जाकर उन्हें अपनी ओर और जोर से खींच लिया, ताकि हमारे शरीर के बीच की एक इंच की दूरी भी खत्म हो जाए। मैं उनके शरीर की हर धड़कन को अपने सीने पर महसूस कर पा रहा था। उनके गले से निकल रही वह दबी हुई सिसकी मेरे कानों में किसी संगीत की तरह गूँज रही थी। वह चुंबन अब और भी उग्र और गहरा होता जा रहा था, और मुझे महसूस हो रहा था कि अब हम दोनों ही इस आग से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं ढूँढना चाहते।**
**वह चुंबन कोई साधारण चुंबन नहीं था। वह एक ऐसा टकराव था जिसमें दो जिस्म एक दूसरे में समा जाने के लिए पागल थे। उनके होंठों का स्वाद इतना मीठा और मदहोश करने वाला था कि मेरी रूह कांप उठी। मैंने अपनी जीभ को उनके होंठों के बीच की दरार से अंदर धकेला और उनके मुँह के भीतर के उस गर्म और गीले अहसास को पूरी शिद्दत से चखने लगा। मम्मी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी; उन्होंने मेरे गले में अपनी बाहें कस लीं और मुझे और भी गहराई से अपने भीतर खींचने की कोशिश करने लगीं। हमारी सांसें एक दूसरे में उलझ रही थीं और कमरे की हवा उस बेकाबू जुनून से भारी हो गई थी।**। **हम दोनों इस कदर जंगली और बेकाबू हो गए थे कि ऐसा लग रहा था मानो उस चुंबन के ज़रिए हम एक दूसरे के अस्तित्व का सारा रस पी जाना चाहते हों।
**उस चुंबन ने हमारे बीच की सारी मर्यादाओं को जलाकर राख कर दिया था। हम अब सिर्फ दो इंसान नहीं थे, बल्कि दो भूखे शिकारी थे जो एक दूसरे को निगल जाने के लिए बेताब थे। वह चुंबन इतना हिंसक और बेकाबू हो गया कि हमारे बीच की कोमलता पूरी तरह गायब हो गई।**
**मम्मी और मैं, दोनों ही इस कदर जंगली हो गए थे कि हमारे बीच अब सिर्फ एक बेकाबू जुनून बचा था। मैं उनके गालों को अपने दांतों से इतनी जोर से काटने लगा कि उनके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई ऐसा लग रहा था मानो मैं उनके मांस को अपने भीतर खींच लेना चाहता हूँ। वह दर्द नहीं था, वह एक ऐसी भूख थी जो शरीर के हर हिस्से को अपने वश में करना चाहती थी। हम एक दूसरे के शरीर को इतनी जोर से दबा रहे थे और ऐसे जकड़ रहे थे जैसे हम उन्हें अपने शरीर का हिस्सा बना लेना चाहते हों या फिर उन्हें वहीं से उखाड़ फेंकना चाहते हों। हमारे हाथों की पकड़ इतनी मजबूत और बेताब थी कि ऐसा लग रहा था जैसे हम एक दूसरे के अस्तित्व को ही कुचल देना चाहते हैं। उस पल में कोई नियम नहीं था, कोई शर्म नहीं थी सिर्फ एक पागलपन था, एक ऐसा उन्माद जहाँ हम एक दूसरे के जिस्म को पूरी तरह से चीर देने और उसमें समा जाने के लिए पागल थे।**
**जैसे ही मैंने उनके कपड़ों को बेतरतीब ढंग से उनके जिस्म से हटाया, मेरी साँसें थम सी गईं। उनके शरीर का रंग ऐसा लग रहा था मानो शुद्ध सफेद दूध में हल्का सा लाल सिंदूर मिला दिया गया हो एक ऐसा अद्भुत और नशीला दृश्य जिसे देखकर मेरी आँखों में वासना की आग और भी तेज हो गई। उनके वह मोटे ,गोल स्तन, और गहरी नाभि देखकर मैं पूरी तरह से अपना होश खो बैठा। मेरा पागलपन अब सीमा पार कर चुका था।**

**मैंने उनके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और उन्हें इतनी जोर से दबाया कि मेरी उंगलियां उनके मांस में धंस गईं। मैं कभी उन्हें अपने दांतों से जगह जगह काट लेता, जैसे मैं उन्हें चखकर नहीं बल्कि उन्हें खाकर ही मानूँगा। मेरा जुनून इतना बढ़ गया था कि मैं उनके उन भारी और मखमली स्तनों को अपने मुँह में भरकर उन्हें पूरी तरह से निगल जाने की कोशिश करने लगा।**
**मम्मी भी अब पूरी तरह से हिंसक और बेकाबू हो चुकी थीं। उन्होंने आव देखा न ताव, मेरी टी शर्ट को झटके से उतारकर दूर फेंक दिया। हम दोनों के शरीर अब पसीने से इस कदर तर बतर हो चुके थे कि ऐसा लग रहा था मानो किसी ने हम पर बाल्टी भर पानी डाल दिया हो। पसीने की उस फिसलन और हमारे बीच की उस बेकाबू गर्मी ने माहौल को और भी ज्यादा नशीला और जंगली बना दिया था।*
**पसीने से तरबतर हमारे शरीर एक दूसरे से ऐसे चिपक रहे थे जैसे दो जलते हुए अंगारे। मैं पूरी तरह से पागल हो चुका था। मैं उनके गालों, उनके होंठों और उनके पेट को पागलों की तरह चाट रहा था। मेरी जीभ उनकी नाभि के गहरे गड्ढे में बार बार उतर रही थी, जैसे मैं वहाँ से उनके शरीर का सारा रस चूस लेना चाहता हूँ। मैं जैसे जैसे नीचे की ओर बढ़ रहा था, मेरा जुनून बढ़ता ही जा रहा था।**
**मम्मी भी अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुकी थीं। वह मुझे और भी हिंसक तरीके से अपने करीब खींच रही थीं। वह मुझे इतनी जोर से स्मूच (smooch) कर रही थीं कि हमारी साँसें एक दूसरे के गले में उलझ रही थीं। वह मेरे कंधों , गालों और मेरी मर्दाना छाती के निपलो पर अपने दांतों से इतनी जोर से काट रही थीं कि दर्द और सुख का अहसास एक हो गया था।**
मैंने एक ही झटके के साथ मम्मी की पेटी को फाड़ के दूर फेंक दिया, मेरा चेहरा उनकी जाँघों के बीच उस बाल रहत गर्म और गीली जगह पर पहुँचा, तभी अचानक एक ऐसा मोड़ आया जिसने हमें पूरी तरह से बेकाबू कर दिया। मेरा उत्तेजित और तड़पता हुआ अंग ठीक उनके मुँह के सामने था,मम्मी ने मेरे अंडरवियर को अपने दोनों ओर से पकड़ कर झट से उतर कर दूर फेंक दिया ,पसीने और वासना की उस चरम स्थिति में, हम दोनों ने बिना सोचे समझे एक दूसरे के जिस्म को अपना शिकार बनाने का फैसला कर लिया।**
**अब हम दोनों '69' की उस पागलपन भरी स्थिति में थे। एक ही समय में हम दोनों एक दूसरे के सबसे निजी और नशीले हिस्सों को अपने मुँह और जीभ से तृप्त करने के लिए बेताब थे। वह दृश्य इतना हिंसक और कामुक था कि कमरे की हवा भी हमारी भारी साँसों और जिस्मों की रगड़ से थरथरा रही थी। हम दोनों एक दूसरे को निगल जाने के लिए एक ही समय में ऊपर और नीचे की ओर बढ़ रहे थे, जैसे कोई दो भूखे शिकारी एक ही शिकार पर टूट पड़े हों।**
**पसीने से लथपथ और एक दूसरे के जिस्म में खोए हुए, हम दोनों अब उस पागलपन की दहलीज पर थे जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
**कमरे में सिर्फ हमारी भारी साँसों और गीले जिस्मों के आपस में टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैं उनके निचले हिस्से को अपनी जीभ और मुँह से इतनी तीव्रता से चख रहा था कि उनके शरीर में बिजली की लहरें दौड़ रही थीं। वहीं दूसरी ओर, मम्मी मेरे अंग को अपने मुँह में लेकर इतनी बेरहमी और जुनून से चूस रही थीं कि मेरा पूरा वजूद काँप उठा। वह हिंसक थीं, बेकाबू थीं, और उनकी जीभ का हर स्पर्श मुझे पागल कर रहा था।**

**तभी, वह पल आ गया जिसका इंतज़ार हमारा शरीर कर रहा था। चरम सुख की वह लहर इतनी तीव्र थी कि हम दोनों का नियंत्रण पूरी तरह टूट गया। जैसे ही मम्मी का शरीर तड़पा और मैं अपनी पूरी ताकत से झटक उठा, हम दोनों का स्खलन (ejaculation) एक साथ हुआ। वह गर्म और गाढ़ा तरल एक दूसरे के मुँह में समा गया। हम दोनों एक दूसरे के स्वाद और उस गर्म प्रवाह को महसूस करते हुए हाँफ रहे थे, हमारे मुँह उस मिलन के अवशेषों से भरे हुए थे। वह क्षण सिर्फ शारीरिक नहीं था, वह एक जंगली और अदम्य जुनून का विस्फोट था।**
**स्खलन की उस तीव्र लहर के थमने के बाद भी, हम दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं और शरीर पसीने से चिपचिपा था। हमारे मुँह अभी भी उस गर्म और गाढ़े तरल से भरे हुए थे। कमरे में एक भारी और कामुक सन्नाटा था, जिसे सिर्फ हमारी थकी हुई साँसों की आवाज़ तोड़ रही थी।**

**तभी, मम्मी ने धीरे से अपना सिर उठाया और मेरी आँखों में एक ऐसी नज़र डाली जिसमें अभी भी वही जंगलीपन और गहरा लगाव था। उन्होंने अपना हाथ मेरे चेहरे पर फेरा और मुझे अपनी ओर खींचा। मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया और हम एक बहुत ही गहरे और लंबे 'किस' (Kiss) में डूब गए।**

**वह चुंबन साधारण नहीं था। जैसे ही हमारे होंठ एक दूसरे से मिले, हमारे मुँह में मौजूद वह मिश्रित तरल हमारा अपना और उनका एक दूसरे के साथ घुलने लगा। वह स्वाद इतना नशीला और अनूठा था कि जैसे ही वह हमारी जीभ पर मिला, एक नई तरह की उत्तेजना हमारे शरीर में दौड़ गई। हम एक दूसरे के स्वाद को चख रहे थे, उस गर्म और नम मिश्रण को अपनी जीभों से आपस में साझा कर रहे थे। वह चुंबन उस मिलन का सार था एक ऐसा स्वाद जो सिर्फ हम दोनों के बीच का था, जो उस पागलपन और जुनून की गवाही दे रहा था जो हमने अभी अभी जीया था।**
> "...उस नशीले स्वाद और पसीने की चिपचिपाहट के साथ, हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों में उलझे हुए, गहरी और थकी हुई नींद की आगोश में समा गए। वह रात हमारे जुनून की गवाह थी, लेकिन हमें नहीं पता था कि अगली सुबह एक और भी खतरनाक और रोमांचक प्यास लेकर आने वाली है।"
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Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 08-08-2026, 11:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 01:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-08-2026, 02:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 09:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:19 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:21 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 01:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 03:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 08:41 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 10:18 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 01:49 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Ella - 12-08-2026, 02:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 02:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 04:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nomita - 12-08-2026, 04:17 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 05:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Suhana. - 12-08-2026, 07:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by shalini - 12-08-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 13-08-2026, 09:39 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-08-2026, 12:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 08:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 03:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 12:30 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 14-08-2026, 03:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fanfunda - 14-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 09:39 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 15-08-2026, 10:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 16-08-2026, 12:37 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 10:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nehapatel - 16-08-2026, 03:26 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 17-08-2026, 06:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-08-2026, 08:03 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 17-08-2026, 09:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 18-08-2026, 05:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 18-08-2026, 08:45 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 18-08-2026, 10:22 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Huzmakhan - 18-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rijwana Ansaari - 18-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by SweetSonali - 18-08-2026, 02:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 18-08-2026, 08:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:41 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:44 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 20-08-2026, 05:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 21-08-2026, 07:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 22-08-2026, 06:55 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 10:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 10:51 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 03:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 05:07 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by srider69 - 22-08-2026, 07:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 08:51 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by wetpussy - 23-08-2026, 02:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 23-08-2026, 03:06 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:25 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:29 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 24-08-2026, 07:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 24-08-2026, 09:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 10:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 24-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:01 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:02 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:31 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 05:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Kodom Ali Mastan - 25-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 07:33 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rizwan007 - 25-08-2026, 01:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by बहनचोद - 25-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Prativa Rani Saha - 25-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 02:40 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 25-08-2026, 02:43 PM
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