31-08-2026, 01:34 PM
चंदन बाबा (चौंकने का ढोंग करते हुए): "अच्छा? तो क्या... मीरा और तुम्हारे बीच कुछ चल रहा है?"
शेर (थूक निगलते हुए कुटिलता से हँसा): "कुछ-कुछ समझिए बाबा! पर साली बहुत सती-सावित्री बनती है... अभी पूरी तरह मेरे काबू में नहीं आई है। उसको पूरी तरह अपने शिकंजे में कसने के लिए मुझे आपकी मदद चाहिए होगी... मंज़ूर है?"
चंदन बाबा समझ गए कि शेर के असली खेल का पर्दाफाश करने का यह सबसे सही मौका है। उन्होंने अपने चेहरे पर वासना और लालच की एक गहरी परत चढ़ाई।
चंदन बाबा (मुखबिर का किरदार निभाते हुए, हवस का झूठा नाटक करके बोले): "मंज़ूर है शेर! पर एक बात बता... अगर मैं तेरा साथ दूँ, तो क्या कभी मुझे भी मीरा बिटिया के साथ मौका मिलेगा?"
शेर यह सुनते ही ठाहाका मारकर हँस पड़ा।
शेर (मूंछों पर ताव देते हुए, नफ़रत भरे लहज़े में बोला): "पूरा मौका देंगे बाबा! अरे, उसको तो मैं पूरी रंडी और अपनी रखैल बनाकर छोड़ूँगा... जब तक वो मेरी जूतियों में आकर नहीं गिरेगी, तब तक मेरे दिल को सुकून नहीं मिलेगा!"
शेर के मुँह से मीरा के लिए इतनी नफ़रत और घिनौने शब्द सुनते ही चंदन बाबा का मुँह खुला का खुला रह गया।
चंदन बाबा का अंदरूनी मन इस बात को सुनकर खौल उठा। वे मन ही मन स्तब्ध रह गए उसके दिल में अपनी मालकिन 'मीरा बिटिया' के लिए इतनी ज़हरीली नफ़रत और इंतकाम की आग जल रही है।
भले ही वे मुखबिर होने का नाटक कर रहे थे, पर शेर के मन में मीरा जैसी बेकसूर औरत के लिए इतनी गहरी नफ़रत और हवस देखकर चंदन का खून खौल उठा।
भीतर ही भीतर उस दरिंदे के प्रति उनका घिन और नफ़रत का भाव इस कदर बढ़ गया कि उन्हें लगा वे उसी वक्त शेर की गर्दन दबोच लें, पर सरताज के प्लान को कामयाब बनाने के लिए उन्हें खुद पर काबू रखना पड़ा।
चंदन बाबा का दिमाग अब एक अनुभवी जासूस की तरह काम कर रहा था। शेर के मुँह से मीरा के लिए ज़हर उगलते शब्द सुनकर वे ताड़ गए कि यह मामला सिर्फ़ एक खूबसूरत औरत के लिए अंधी वासना का नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी नफ़रत, रंजिश या कोई बड़ा इंतकाम छुपा हुआ है।
शेर की असली जड़ तक पहुँचने के लिए।
चंदन बाबा (डरे हुए इंसान का ढोंग करते हुए, चेहरे पर शिकन लाकर बोले): "पर शेर... एक बात बता, क्या तुझे सरताज से डर नहीं लगता? अगर उसे ज़रा भी भनक लग गई तो? मैंने अपनी आँखों से देखा है कि वह अपने दुश्मनों को किस तरह मारता है! आईपीएस अफ़सर है भाई, पूरे शहर में उसका खौफ और रुतबा चलता है... हम गरीब नौकर भला उसके सामने कैसे टिक पाएँगे?"
सरताज का नाम सुनते ही शेर के चेहरे की रंगत पल भर के लिए बदली और वह तुरंत सतर्क हो गया। उसने चंदन बाबा को तिरछी नज़रों से देखा।
शेर (आँखें सिकोड़कर, थोड़ा संभलते हुए बोला): "बाबा... आप सवाल बहुत पूछ रहे हैं! इतनी बातें खंगालने की आपको ज़रूरत नहीं है। बस आप डरिए मत और इतना भरोसा रखिए... वो सरताज भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता!"
शेर के इस जवाब से चंदन बाबा का शक यकीन में बदल गया। शेर के पास सरताज के खिलाफ़ भी कोई बहुत बड़ा ढाल या कमजोरी थी, जिसकी बदौलत वह इतना बेखौफ़ होकर यह घिनौना खेल खेल रहा था।
शेर का शातिर दिमाग सतर्क हो गया था। उसने अपनी तिरछी नज़रों से चंदन बाबा के चेहरे के हाव-भाव को ताड़ा और उसके मन में शक का हल्का सा बीज अंकुरित हो गया।
शेर (आँखों में संशय लाते हुए): "बाबा... आप सरताज और दुनियादारी की बातें छोड़िए! पहले मोबाइल निकालिए और अपनी इस प्यारी मीरा बिटिया की तस्वीरों को दोबारा गौर से देखिए। मुझे भी तो पता चले कि आपको उसमें क्या-क्या अच्छा लगा... और आप अपनी इस मालकिन के साथ क्या-क्या करना चाहते हैं? ज़रा मैं भी तो सुनूँ आपके दिल की बात!"
चंदन बाबा तुरंत ताड़ गए कि अगर उन्होंने ज़रा सी भी संकोच दिखाया, तो शेर का शक यकीन में बदल जाएगा और सरताज का पूरा प्लान चौपट हो जाएगा। उन्हें अब बिना किसी झिझक के 'पूर्ण कामुक' होने का ढोंग रचना था।
उन्होंने कांपती उंगलियों से मोबाइल स्क्रीन पर मीरा की उन बेपर्दा तस्वीरों को खोला। अपनी आँखों में हवस की चमक लाते हुए वे तस्वीर को घूरने लगे।
चंदन बाबा (गहरी साँस खींचकर, थूक निगलते हुए बोले): "देख शेर... इसके ये गुलाबी रसीले होंठ देखकर दिल करता है कि इन्हें अपने मुँह में भीचकर तब तक चूसता रहूँ जब तक इसका सारा रस न निकल जाए! और यह देख, स्लिप से बाहर झांकते इसके भरे-पूरे मम्मे... मेरा मन करता है कि इसके बदन से ये बचे-कुचे कपड़े भी नोचकर फेंक दूँ, अपने इन सख्त हाथों से इसके दोनों मम्मों को मसलूँ और इनके कड़क निप्पलों को मुँह में भरकर देर तक चूसूँ..."
वे रुक-रुककर तस्वीरें खिसकाते रहे और अपनी आवाज़ को पूरी तरह कामुक बनाते चले गए।
चंदन बाबा (आगे बोलते हुए): "फिर धीरे-धीरे नीचे सरकूँ... इसकी पतली सिल्क की पैंटी को नीचे खींचकर फेंक दूँ और इसकी इन गोरी, चिकनी जाँघों के बीच अपनी जीभ से..."
बोलते-बोलते चंदन बाबा का अपना अंदरूनी मन ग्लानि, शर्म और दर्द से चीख उठ रहा था। वे मन ही मन भगवान से और अपनी आत्मा से बिलखकर माफ़ी माँग रहे थे।
(चंदन मन ही मन तड़पकर रो पड़े: "हे राम! हे हनुमान जी... मुझे माफ़ कर देना! अपनी ही बहु-बेटी जैसी मीरा के लिए अपने मुँह से ऐसे घिनौने शब्द निकालने पड़ रहे हैं! इस एक नकाब को ओढ़ने के लिए मुझे अपनी मर्यादा की बलि देनी पड़ रही है... हे प्रभु, इस पाप की सजा मुझे देना पर मेरी नीयत को साफ रखना!")
लेकिन बाहर से चंदन बाबा का चेहरा पूरी तरह एक वासना से अंधे हुए ठरकी मर्द जैसा दिख रहा था। शेर ने जब चंदन बाबा के मुँह से इतने कामुक और अश्लील शब्द सुने, तो उसका शक पूरी तरह काफूर हो गया। उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
शेर जब चंदन बाबा की बातें सुनकर संतुष्ट होकर मूंछों में मुस्कुराया, तो चंदन बाबा ने राहत की साँस ली। लेकिन ठीक उसी पल, वियाग्रा की लगातार बढ़ रही आँच, नीली फिल्मों की अश्लीलता और मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहे मीरा के उस बेपर्दा हुस्न के मिले-जुले असर ने एक भयंकर गुल खिलाया।
मुखबिर का नकाब ओढ़कर मुख से वे जो अश्लील शब्द केवल नाटक के तौर पर बोल रहे थे, वे शब्द अनजाने में ही उनके अपने भटकते दिमाग की फैंटेसी बनने लगे।
चंदन (अपनी उखड़ी साँसों को सँभालते हुए, मन ही मन सिहर उठे): "हे ईश्वर... यह मैं क्या सोच रहा हूँ? मैं तो सिर्फ़ नाटक कर रहा था ना? पर... पर अगर यह सब सच हो जाए तो? अगर सचमुच मुझे अपनी इस प्यारी मीरा के रसीले होंठों को चूसने और उसके इस मखमली, भरे-पूरे बदन को अपनी बाहों में भीचने का मौका मिल जाए... तो कितना मज़ा आएगा!"
उनके गठीले जिस्म में एक मादक सिहरन दौड़ गई। धोती के अंदर उनके कड़क हो चुके अंग की अकुलाहट ने उनके मन में उठते इस नए, पापी विचार पर मुहर लगा दी।
चंदन (आगे अपने भटकते मन से बड़बड़ाए): "क्या... क्या सचमुच मैं अपनी प्यारी मीरा बिटिया के साथ यह सब कर सकता हूँ? क्या ऐसा दिन आएगा जब यह गोरा, बेपर्दा जिस्म मेरे नीचे बिखरा होगा?"
साठ साल का चंदन सरताज के लिए जासूस बनने निकला था, पर वासना की इस ज़हरीली लहर ने उसके भीतर के असली मर्द को पूरी तरह से बहका दिया था। अब वह सिर्फ़ अभिनय नहीं कर रहा था, बल्कि अनजाने में ही उस घिनौने सपने का मज़ा भी लेने लगा था।
शेर (थूक निगलते हुए कुटिलता से हँसा): "कुछ-कुछ समझिए बाबा! पर साली बहुत सती-सावित्री बनती है... अभी पूरी तरह मेरे काबू में नहीं आई है। उसको पूरी तरह अपने शिकंजे में कसने के लिए मुझे आपकी मदद चाहिए होगी... मंज़ूर है?"
चंदन बाबा समझ गए कि शेर के असली खेल का पर्दाफाश करने का यह सबसे सही मौका है। उन्होंने अपने चेहरे पर वासना और लालच की एक गहरी परत चढ़ाई।
चंदन बाबा (मुखबिर का किरदार निभाते हुए, हवस का झूठा नाटक करके बोले): "मंज़ूर है शेर! पर एक बात बता... अगर मैं तेरा साथ दूँ, तो क्या कभी मुझे भी मीरा बिटिया के साथ मौका मिलेगा?"
शेर यह सुनते ही ठाहाका मारकर हँस पड़ा।
शेर (मूंछों पर ताव देते हुए, नफ़रत भरे लहज़े में बोला): "पूरा मौका देंगे बाबा! अरे, उसको तो मैं पूरी रंडी और अपनी रखैल बनाकर छोड़ूँगा... जब तक वो मेरी जूतियों में आकर नहीं गिरेगी, तब तक मेरे दिल को सुकून नहीं मिलेगा!"
शेर के मुँह से मीरा के लिए इतनी नफ़रत और घिनौने शब्द सुनते ही चंदन बाबा का मुँह खुला का खुला रह गया।
चंदन बाबा का अंदरूनी मन इस बात को सुनकर खौल उठा। वे मन ही मन स्तब्ध रह गए उसके दिल में अपनी मालकिन 'मीरा बिटिया' के लिए इतनी ज़हरीली नफ़रत और इंतकाम की आग जल रही है।
भले ही वे मुखबिर होने का नाटक कर रहे थे, पर शेर के मन में मीरा जैसी बेकसूर औरत के लिए इतनी गहरी नफ़रत और हवस देखकर चंदन का खून खौल उठा।
भीतर ही भीतर उस दरिंदे के प्रति उनका घिन और नफ़रत का भाव इस कदर बढ़ गया कि उन्हें लगा वे उसी वक्त शेर की गर्दन दबोच लें, पर सरताज के प्लान को कामयाब बनाने के लिए उन्हें खुद पर काबू रखना पड़ा।
चंदन बाबा का दिमाग अब एक अनुभवी जासूस की तरह काम कर रहा था। शेर के मुँह से मीरा के लिए ज़हर उगलते शब्द सुनकर वे ताड़ गए कि यह मामला सिर्फ़ एक खूबसूरत औरत के लिए अंधी वासना का नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी नफ़रत, रंजिश या कोई बड़ा इंतकाम छुपा हुआ है।
शेर की असली जड़ तक पहुँचने के लिए।
चंदन बाबा (डरे हुए इंसान का ढोंग करते हुए, चेहरे पर शिकन लाकर बोले): "पर शेर... एक बात बता, क्या तुझे सरताज से डर नहीं लगता? अगर उसे ज़रा भी भनक लग गई तो? मैंने अपनी आँखों से देखा है कि वह अपने दुश्मनों को किस तरह मारता है! आईपीएस अफ़सर है भाई, पूरे शहर में उसका खौफ और रुतबा चलता है... हम गरीब नौकर भला उसके सामने कैसे टिक पाएँगे?"
सरताज का नाम सुनते ही शेर के चेहरे की रंगत पल भर के लिए बदली और वह तुरंत सतर्क हो गया। उसने चंदन बाबा को तिरछी नज़रों से देखा।
शेर (आँखें सिकोड़कर, थोड़ा संभलते हुए बोला): "बाबा... आप सवाल बहुत पूछ रहे हैं! इतनी बातें खंगालने की आपको ज़रूरत नहीं है। बस आप डरिए मत और इतना भरोसा रखिए... वो सरताज भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता!"
शेर के इस जवाब से चंदन बाबा का शक यकीन में बदल गया। शेर के पास सरताज के खिलाफ़ भी कोई बहुत बड़ा ढाल या कमजोरी थी, जिसकी बदौलत वह इतना बेखौफ़ होकर यह घिनौना खेल खेल रहा था।
शेर का शातिर दिमाग सतर्क हो गया था। उसने अपनी तिरछी नज़रों से चंदन बाबा के चेहरे के हाव-भाव को ताड़ा और उसके मन में शक का हल्का सा बीज अंकुरित हो गया।
शेर (आँखों में संशय लाते हुए): "बाबा... आप सरताज और दुनियादारी की बातें छोड़िए! पहले मोबाइल निकालिए और अपनी इस प्यारी मीरा बिटिया की तस्वीरों को दोबारा गौर से देखिए। मुझे भी तो पता चले कि आपको उसमें क्या-क्या अच्छा लगा... और आप अपनी इस मालकिन के साथ क्या-क्या करना चाहते हैं? ज़रा मैं भी तो सुनूँ आपके दिल की बात!"
चंदन बाबा तुरंत ताड़ गए कि अगर उन्होंने ज़रा सी भी संकोच दिखाया, तो शेर का शक यकीन में बदल जाएगा और सरताज का पूरा प्लान चौपट हो जाएगा। उन्हें अब बिना किसी झिझक के 'पूर्ण कामुक' होने का ढोंग रचना था।
उन्होंने कांपती उंगलियों से मोबाइल स्क्रीन पर मीरा की उन बेपर्दा तस्वीरों को खोला। अपनी आँखों में हवस की चमक लाते हुए वे तस्वीर को घूरने लगे।
चंदन बाबा (गहरी साँस खींचकर, थूक निगलते हुए बोले): "देख शेर... इसके ये गुलाबी रसीले होंठ देखकर दिल करता है कि इन्हें अपने मुँह में भीचकर तब तक चूसता रहूँ जब तक इसका सारा रस न निकल जाए! और यह देख, स्लिप से बाहर झांकते इसके भरे-पूरे मम्मे... मेरा मन करता है कि इसके बदन से ये बचे-कुचे कपड़े भी नोचकर फेंक दूँ, अपने इन सख्त हाथों से इसके दोनों मम्मों को मसलूँ और इनके कड़क निप्पलों को मुँह में भरकर देर तक चूसूँ..."
वे रुक-रुककर तस्वीरें खिसकाते रहे और अपनी आवाज़ को पूरी तरह कामुक बनाते चले गए।
चंदन बाबा (आगे बोलते हुए): "फिर धीरे-धीरे नीचे सरकूँ... इसकी पतली सिल्क की पैंटी को नीचे खींचकर फेंक दूँ और इसकी इन गोरी, चिकनी जाँघों के बीच अपनी जीभ से..."
बोलते-बोलते चंदन बाबा का अपना अंदरूनी मन ग्लानि, शर्म और दर्द से चीख उठ रहा था। वे मन ही मन भगवान से और अपनी आत्मा से बिलखकर माफ़ी माँग रहे थे।
(चंदन मन ही मन तड़पकर रो पड़े: "हे राम! हे हनुमान जी... मुझे माफ़ कर देना! अपनी ही बहु-बेटी जैसी मीरा के लिए अपने मुँह से ऐसे घिनौने शब्द निकालने पड़ रहे हैं! इस एक नकाब को ओढ़ने के लिए मुझे अपनी मर्यादा की बलि देनी पड़ रही है... हे प्रभु, इस पाप की सजा मुझे देना पर मेरी नीयत को साफ रखना!")
लेकिन बाहर से चंदन बाबा का चेहरा पूरी तरह एक वासना से अंधे हुए ठरकी मर्द जैसा दिख रहा था। शेर ने जब चंदन बाबा के मुँह से इतने कामुक और अश्लील शब्द सुने, तो उसका शक पूरी तरह काफूर हो गया। उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
शेर जब चंदन बाबा की बातें सुनकर संतुष्ट होकर मूंछों में मुस्कुराया, तो चंदन बाबा ने राहत की साँस ली। लेकिन ठीक उसी पल, वियाग्रा की लगातार बढ़ रही आँच, नीली फिल्मों की अश्लीलता और मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहे मीरा के उस बेपर्दा हुस्न के मिले-जुले असर ने एक भयंकर गुल खिलाया।
मुखबिर का नकाब ओढ़कर मुख से वे जो अश्लील शब्द केवल नाटक के तौर पर बोल रहे थे, वे शब्द अनजाने में ही उनके अपने भटकते दिमाग की फैंटेसी बनने लगे।
चंदन (अपनी उखड़ी साँसों को सँभालते हुए, मन ही मन सिहर उठे): "हे ईश्वर... यह मैं क्या सोच रहा हूँ? मैं तो सिर्फ़ नाटक कर रहा था ना? पर... पर अगर यह सब सच हो जाए तो? अगर सचमुच मुझे अपनी इस प्यारी मीरा के रसीले होंठों को चूसने और उसके इस मखमली, भरे-पूरे बदन को अपनी बाहों में भीचने का मौका मिल जाए... तो कितना मज़ा आएगा!"
उनके गठीले जिस्म में एक मादक सिहरन दौड़ गई। धोती के अंदर उनके कड़क हो चुके अंग की अकुलाहट ने उनके मन में उठते इस नए, पापी विचार पर मुहर लगा दी।
चंदन (आगे अपने भटकते मन से बड़बड़ाए): "क्या... क्या सचमुच मैं अपनी प्यारी मीरा बिटिया के साथ यह सब कर सकता हूँ? क्या ऐसा दिन आएगा जब यह गोरा, बेपर्दा जिस्म मेरे नीचे बिखरा होगा?"
साठ साल का चंदन सरताज के लिए जासूस बनने निकला था, पर वासना की इस ज़हरीली लहर ने उसके भीतर के असली मर्द को पूरी तरह से बहका दिया था। अब वह सिर्फ़ अभिनय नहीं कर रहा था, बल्कि अनजाने में ही उस घिनौने सपने का मज़ा भी लेने लगा था।
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