31-08-2026, 01:32 PM
नया मोड़ —4
शाम को जब चाय बनाने की बारी आई, तो शेर ने अपने कमरे में छिपाई हुई जड़ी-बूटी वाली वैद की तेज़ देसी वियाग्रा की गोली निकाली, उसे बारीक पीसा और चंदन बाबा की गरम चाय में पूरी मिला दी।
चाय पीने के करीब दो घंटे बाद, चंदन बाबा को अपने शरीर में अजीब सी बेचैनी महसूस होने लगी। उनके जिस्म का खून तेज़ी से दौड़ने लगा और उनकी सफ़ेद धोती के अंदर एक हल्की सी हलचल शुरू हो गई—उनका सोया हुआ औज़ार सालों बाद अंगड़ाई लेने लगा था।
चंदन बाबा के चेहरे पर घबराहट साफ़ दिख रही थी, वे बार-बार अपनी धोती संभाल रहे थे और ईश्वर का नाम जपकर अपना ध्यान भटकाने की पूरी कोशिश कर रहे थे।
दूर खड़ा शेर चंदन की इस बेचैनी को ताड़ रहा था।
शेर (मुस्कुराते हुए, मन ही मन बड़बड़ाया): "अबे भाई! असर तो शुरू हो रहा है... पर यह बुड्ढा अभी भी खुद को काबू कर रहा है। एक गोली से इसका पूरा किला नहीं ढहेगा। साले को रोज़ दो-तीन गोलियां ठोकनी पड़ेंगी, ताकि दिन-रात इसका औज़ार बाँस की तरह तना रहे! जब 24 घंटे नीचे दबाव बना रहेगा, तो साले की सारी भगती अपने आप हवा हो जाएगी!"
रात को डिनर का काम निपटाने के बाद, चंदन बाबा अपनी इस अजीब सी शारीरिक बेचैनी से परेशान होकर सीधे नौकरों वाले क्वार्टर में चले आए। शेर भी उनके पीछे-पीछे क्वार्टर में आ पहुँचा।
क्वार्टर में आने के बाद भी चंदन बाबा की बेचैनी कम नहीं हो रही थी। वैद की उस तेज़ जड़ी-बूटी का असर अपनी चरम पर था, और उनकी धोती के अंदर का तनाव घटने का नाम ही नहीं ले रहा था। वे बार-बार करवटें बदल रहे थे और माथे से पसीना पोंछ रहे थे।
शेर तो इसी मौके की फिराक में बैठा था। उसने सहानुभूति बतलाते हुए बेहद आत्मीय आवाज़ में पूछा।
शेर: "क्या बात है चंदन बाबा? मैं शाम से देख रहा हूँ, आपकी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है... चेहरा लाल हो रखा है और बहुत बेचैन दिख रहे हो। कोई तकलीफ है क्या?"
चंदन (अपनी घबराहट छुपाते हुए, धीमी आवाज़ में बोला): "नहीं... नहीं शेर भाई, ऐसी कोई बात नहीं है। बस ऐसे ही शरीर में थोड़ी अजीब सी गर्माहट और बेचैनी लग रही है।"
शेर (बिस्तर पर थोड़ा करीब खिसकते हुए): "अरे बाबा! हम दोनों यहाँ एक ही छत के नीचे रहते हैं, सुख-दुख के साथी हैं। अगर आपस में अपनी परेशानी शेयर नहीं करेंगे तो किससे करेंगे? आप निसंकोच बताओ, आखिर बात क्या है?"
शेर के काफी कुरेदने और दबाव बनाने के बाद, बेबस और परेशान चंदन बाबा ने आखिरकार सच उगल दिया।
चंदन (नज़रें झुकाकर, बेहद शर्मिंदगी के साथ फुसफुसाया): "क्या बताऊँ शेर भाई... शाम से ही न जाने शरीर में कैसी आग लगी हुई है। मेरे निचले अंग में ऐसा कड़ापन और खिंचाव आ गया है जो घटने का नाम ही नहीं ले रहा। इतनी उम्र में ऐसा कभी नहीं हुआ मेरे साथ... बहुत तकलीफ हो रही है।"
यह सुनते ही शेर के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई, जिसे उसने तुरंत छुपा लिया और हल्का सा हँसते हुए बोला।
शेर (मूंछों पर ताव देते हुए): "अरे बाबा! इसमें घबराने और शर्माने की क्या बात है? यह तो बहुत अच्छी बात है! यह तो इस बात का सबूत है कि आप अभी भी अंदर से पूरी तरह जवान हो! साला जवानी फिर से लौट आई है आपकी!"
चंदन (सिर हिलाते हुए, माथे का पसीना पोंछकर बोला): "नहीं भाई... यह उम्र के हिसाब से ठीक नहीं है। ईश्वर जाने क्या हो गया है, ध्यान लगाने की कोशिश कर रहा हूँ पर यह तनाव खत्म ही नहीं हो रहा।"
शेर ने तुरंत अपने पाँसे फेंकने शुरू कर दिए। उसने अपने मोबाइल की तरफ इशारा किया।
शेर (धीमी आवाज़ में बोला): "देखो बाबा, जब बदन के उस निचले हिस्से में इतना कड़ापन आ जाए, तो ध्यान लगाने से काम नहीं चलता। मेरे साथ तो ऐसा हफ़्ते में चार बार होता है! अब इस कोठी में और कोई औरत तो है नहीं, मीरा मेमसाहब के अलावा..." (उसने मीरा का नाम जान-बूझकर लिया था) "...और उनको तो हम हाथ लगा नहीं सकते! यह अलग बात है कि जब मेरा खड़ा होता है, तो दिल तो यही करता है कि समाज की सारी दीवारें तोड़ दूँ, पर मन मार कर रह जाना पड़ता है। तो मैं तो सीधा मोबाइल पर नीली फ़िल्में देखता हूँ और अपना काम चला लेता हूँ।"
चंदन बाबा ने हैरत और शर्म से शेर की तरफ देखा और शेर से पूछा, "मीरा बेटिया का नाम क्यों लिया तुमने, मेरी इस परेशानी के साथ?"
शेर संभाला और उसने कहा, "मैं तो बस उदाहरण दे रहा था।"
शेर (अपना मोबाइल निकालकर): "आप एक काम करो बाबा... मैं अपने मोबाइल से आप के मोबाइल पे कुछ भेजता हूँ, इसमें एक से बढ़कर एक गरमा-गरम फ़िल्में हैं। आप बाथरूम में जाएँ और इन्हें देखकर अपने हाथ से ही खुद को हल्का कर लो... जब तक वीर्य बाहर नहीं निकलेगा, आपका यह तनाव और बेचैनी खत्म नहीं होगी!"
शेर ने जाल पूरी तरह बिछा दिया था। वह देखना चाहता था कि क्या चंदन बाबा इस नीली फ़िल्मों के लालच को स्वीकार करते हैं या नहीं।
चंदन बाबा ने तुरंत अपना सिर हिलाते हुए साफ इंकार कर दिया। वे अपनी मर्यादा और उसूलों के सख्त पक्के थे।
चंदन (नज़रें चुराते हुए, सख्त आवाज़ में बोले): "नहीं-नहीं शेर भाई, यह सब पाप है! मैं यह गंदे काम नहीं कर सकता। थोड़ी देर में अपने आप सब ठीक हो जाएगा...।"
शेर ने जब देखा कि चंदन इतनी आसानी से झांसे में नहीं आ रहा, तो उसने चंदन की बढ़ती उम्र और सेहत का झूठा खौफ दिखाकर उसे डराना शुरू किया।
शेर (गंभीर चेहरा बनाकर, बड़ी चिंता जताते हुए बोला): "अरे बाबा, आप समझ नहीं रहे हैं! मैंने डाक्टरों से सुना है कि इस उम्र में जब बदन में इतना कड़ापन और खून का दबाव बन जाए, और अगर वीर्य बाहर न निकले... तो सीधा दिल का दौरा पड़ जाता है! नसों में खून जम जाता है आदमी का! अब आप ही सोचो... आपकी पत्नी यहाँ पास में तो हैं नहीं कि आप उनके साथ सो सको, और रण्डी बाज़ार जाने की इस उम्र में आपकी उम्र और इज़्ज़त इजाज़त नहीं देती। तो मेरी तो यही सीधी सलाह है कि बाथरूम में जाकर खुद को हल्का कर आओ।"
चंदन बाबा के चेहरे पर अब डर के भाव साफ़ दिखने लगे थे। वे अपनी इस अजीब सी शारीरिक हालत और शेर की बातों से अंदर से घबराने लगे थे।
शेर ने लोहा गर्म देखकर मीरा का नाम बीच में उछाल दिया ताकि चंदन की नसों में हवस का ज़हर तेज़ी से घुलना शुरू हो जाए।
शेर (आँखें मूँदकर, बड़ी बेशर्मी से फुसफुसाया):
"और देखिए बाबा... इसमें शर्माने की कोई बात नहीं है। जब बदन में वासना की आग चढ़ती है और बंदा उसे दबाने की कोशिश करता है ना, तो दिमाग में बहुत गंदे-गंदे ख्याल आने लगते हैं। सच कहूँ तो जब मेरी ऐसी हालत हो जाती है, तो मुझे भी यह मीरा मेमसाहब बहुत अच्छी लगने लगती हैं! अब बताओ, बंदा करे भी तो क्या करे? साली एकदम हीरोइन जैसी तो लगती हैं... गोरा बदन, कसे हुए मम्मे! जब वो पतली सी साड़ी पहनकर कोठी में घूमती हैं और उनका चिकना पेट दिखाई देता है, तो नियत अपने आप डोल जाती है। ऊपर से उनका वो कयामत जैसा चेहरा, भरे-भरे होंठ, और चलने पर हिलती हुई वो गाँड... सच कहूँ बाबा, जब भी वो सामने से गुजरती हैं, तो नज़रें हटाना मुश्किल हो जाता है। उनकी चौड़ी कमर और वो ढलका हुआ पल्लू देखकर तो शरीर का सारा खून नीचे दौड़ने लगता है। ऐसे में दिमाग भटकना तो लाज़मी है।"
चंदन बाबा ने हैरत और सदमे से शेर की तरफ देखा।
शेर (अपने मोबाइल से चंदन के मोबाइल पे कुछ फ़िल्में भेज दी): "इसीलिए तो कह रहा हूँ बाबा! अपने दिमाग को सही ठिकाने पर रखने के लिए और मेमसाहब पर से गंदी नज़र हटाने के लिए मैं यह वीडियो देख लेता हूँ और खुद को हल्का कर लेता हूँ। आप भी जाओ... कोई पाप नहीं लगेगा, अपनी जान बचाओ और दिमाग को शांत करो!"
शेर की बातें चंदन बाबा के दिमाग में हलचल मचाने लगी थीं। एक तरफ सेहत का डर, नीचे उठती हुई असहनीय कड़ापन और दूसरी तरफ शेर द्वारा मीरा के जिस्म का किया गया ज़िक्र—चंदन बाबा पहली बार धर्मसंकट और भयानक उलझन में फँसते दिख रहे थे।
चंदन बाबा की बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी। वैद की दवा का असर इतना ज़बरदस्त था कि पिछले आधे घंटे से उनका कड़ा हुआ अंग घटने के बजाय और सख्त होता जा रहा था। नीचे खिंचाव और बदन की गर्माहट से उनका दिमाग सुन्न होने लगा था।
उन तीस मिनटों में शेर की कही हुई बातें बार-बार चंदन बाबा के कानों में गूँज रही थीं— "साली एकदम हीरोइन जैसी तो लगती हैं... गोरा बदन, कसे हुए मम्मे..."
चंदन बाबा ने अपनी आँखें बंद करके खुद को धिक्कारा, "हे राम! यह मैं क्या सोच रहा हूँ... मीरा तो मेरी बिटिया जैसी है! छी!"
लेकिन जैसे ही उन्होंने 'बिटिया' का ख्याल दिल में लाया, धोती के अंदर दबा उनका अंग ढीला होने के बजाय और ज्यादा अकड़ गया। ऐसा लगा जैसे बदन की हवस उनके संस्कारों पर हावी हो रही हो।
उनके मन के किसी काले कोने से एक गंदी आवाज़ आई— "बिटिया होगी तो क्या हुआ... है तो औरत ही ना! देख तो सही शेर क्या बोल रहा था... कैसा कड़कड़ाता बदन पाया है मीरा ने!"
गर्माहट और शारीरिक पीड़ा जब बर्दाश्त से बाहर हो गई, तो आख़िरकार चंदन बाबा का संयम टूट गया।
उन्होंने झिझकते और कांपते हाथों से मोबाइल उठाया और बिना शेर की तरफ देखे, चुपचाप दबे पाँव बाथरूम की तरफ बढ़ गए।
बाहर बिस्तर पर लेटा शेर ज़हरीली हँसी हँस रहा था। उसका पहला तीर निशाने पर लग चुका था—उसने 60 साल के उस 'साधु' चंदन बाबा के हाथ में पहली बार हवस का हथियार थमा दिया था।
बाथरूम में खुद को हल्का करने के बाद भी चंदन बाबा का दिल जोरों से धड़क रहा था। उन्होंने बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बेसिन के नल को तेज़ धार में खोल दिया। पानी की तेज़ आवाज़ के बीच, उन्होंने कांपते हाथों से अपना फोन निकाला और सरताज का नंबर मिलाया।
फोन की दूसरी तरफ जैसे ही सरताज ने कॉल उठाई, चंदन बाबा की आवाज़ शर्म, घबराहट और ग्लानि से थरथरा उठी।
चंदन बाबा (धीमी और कांपती आवाज़ में, सिसकते हुए): "सरताज... बेटा, मैं... ! मुझसे बहुत बड़ा अधर्म होने जा रहा है... मेरे मन में, मेरी नीयत में पता नहीं क्या ज़हर घुल गया है!"
सरताज फोन पर चंदन बाबा की ऐसी हालत सुनकर हैरान रह गया।
सरताज (चिंतित होकर): "बाबा? क्या हुआ? आप इतने घबराए हुए क्यों हैं? शांत होइए और साफ़-साफ़ बताइए कि बात क्या है?"
चंदन बाबा ने बेहद शर्मिंदगी के साथ सरताज को जिस्म में उठ रही अनियंत्रित गर्मी और बाथरूम में खुद को हल्का करने की पूरी बात बताई। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे शेर ने उन्हें पोर्न देखने की सलाह दी थी। वे इतने परेशान और लाचार थे कि उस वक्त उन्हें शेर की बात सही लगने लगी थी।
सरताज एक समझदार और व्यावहारिक इंसान था; बाबा की हालत और लक्षणों को सुनते ही वह तुरंत ताड़ गया कि बाबा को धोखे से कोई ताकतवर सेक्सुअल एनहांसमेंट ड्रग दी गई है।
सरताज (गंभीरता से): "बाबा, आप अपने आप को दोष मत दीजिए। जो लक्षण आप बता रहे हैं, उससे साफ़ लग रहा है कि आपको किसी ने बहुत तेज़ ताक़त की दवा खिलाई है... पर सवाल यह है कि ऐसा कौन करेगा और क्यों? बाबा, क्या आज आपने घर या क्वार्टर में कुछ अजीब देखा?"
चंदन बाबा ने अपनी साँसें संभालीं और आज दिन भर का मंज़र याद करने लगे।
चंदन बाबा (फुसफुसाते हुए): "सरताज... आज जब मैं घर आया था, तो मैंने देखा कि शेर रसोई के पास मीरा का हाथ ज़बरदस्ती पकड़े खड़ा था। उस वक्त मीरा का चेहरा डर से बिल्कुल पीला पड़ा हुआ था। मुझे यह देखकर बिल्कुल अच्छा नहीं लगा, इसलिए उसके बाद से मैं एक साए की तरह मीरा के आसपास ही रहा, ताकि शेर उसे दोबारा परेशान न कर सके।"
बाबा की यह बात सुनते ही सरताज का दिमाग तेज़ी से चलने लगा। उसके सामने पूरी तस्वीर साफ़ होने लगी।
सरताज तुरंत समझ गया कि चंदन बाबा का वहाँ मौजूद होना शेर के मंसूबों के बीच में रोड़ा बन रहा था। शेर जानता था कि जब तक चंदन बाबा जैसा इंसान पहरा दे रहा है, वह मीरा पर सीधा हमला नहीं कर सकता।
इसीलिए शेर ने बाबा के दिमाग और बदन के साथ यह घिनौना खेल खेला था—ताकि बाबा खुद अपनी वासना के जाल में उलझकर अपराधबोध से भर जाएँ और मैदान छोड़ दें।
सरताज ने यह गहरी चाल और शेर का ख़तरनाक खेल मन ही मन समझ लिया, लेकिन उसने अपने इस विचार को बाबा के सामने ज़ाहिर नहीं होने दिया। वह जानता था कि अगर बाबा को शेर के असली इरादों का इल्म हुआ, तो वे शर्म और ग्लानि से ही मर जाएँगे।
सरताज (अत्यंत शांत और गंभीर लहज़े में): "बाबा... आप जो कह रहे हैं, मैं सब समझ रहा हूँ। आप बिल्कुल मत घबराइए। बस मेरी एक बात याद रखिए—आपको बहुत सतर्क और सावधान रहने की ज़रूरत है। शेर जैसा दिख रहा है, बात उससे कहीं ज़्यादा पेचीदा है। आप खुद को संभालिए और हर चीज़ पर नज़र रखिए।"
सरताज ने फोन डिस्कनेक्ट किया और कमरे में शांत खड़ा होकर गहरी सोच में डूब गया। उसका तेज़, विश्लेषणात्मक आईपीएस दिमाग अब एक-एक कड़ी को आपस में जोड़ने में लग गया था।
उसे अच्छी तरह याद था कि जब शंकर मीरा को ब्लैकमेल कर रहा था, तब मीरा ने बिना किसी झिझक के सीधे उसके पास आकर सब सच बता दिया था। लेकिन आज... आज जब शेर खुलेआम अपनी सीमाएं लांघ रहा है, तो मीरा पूरी तरह खामोश क्यों है? वह उससे अपनी नज़रें चुरा रही है, बातें छिपा रही है।
तभी सरताज की सोच का रुख बदला और एक हकीकत उसके दिमाग में कौंधी।
"शंकर के समय..." सरताज ने मन ही मन सोचा, "...तब मैं उसका पति नहीं था। तब मैं सिर्फ़ उसका एक अच्छा दोस्त और एक आईपीएस अफ़सर था। मीरा ने उस वक्त भी अपने पति आरव से शंकर वाली बात पूरी तरह छिपाकर रखी थी। उसने आरव को कभी भनक तक नहीं लगने दी थी।"
सरताज की आँखें गंभीर हो गईं। स्थिति अब उसकी समझ में आ रही थी।
जब कोई औरत किसी मर्द को अपना पति मान लेती है, तो उसके सामने अपने सम्मान पर लगे दाग़ या किसी ब्लैकमेलिंग की बात स्वीकार करना उसके लिए सबसे कठिन हो जाता है। मीरा के मन में आत्मग्लानि और डर का ऐसा पहाड़ बन चुका था कि वह सरताज से नज़रें मिलाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही थी।
"बात सिर्फ़ इतनी नहीं है कि मीरा डर रही है..." सरताज ने अपनी मुट्ठियाँ कसते हुए सोचा, "ज़रूर उस नीच शेर के हाथ मीरा की कोई बहुत बड़ी कमजोरी या ब्लैकमेलिंग का हथियार लग चुका है। कोई ऐसी मजबूरी, जिसकी वजह से मीरा घुट-घुटकर ज़हर पी रही है, पर मुँह नहीं खोल रही।"
"मुझे सब्र से काम लेना होगा," सरताज का चेहरा फौलादी हो गया, "पहले मुझे शेर के इस पूरे खेल और उसकी चाल को गहराई से समझना होगा। और जैसे ही मुझे उस 'हथियार' का पता चलेगा जो उसने मीरा के खिलाफ थाम रखा है... सबसे पहले मैं उस लीवरेज को ही शेर के हाथों से छीनूँगा।"
बाथरूम से बाहर निकलकर चंदन बाबा ने मोबाइल टेबल पर रख दिया और चुपचाप अपने बिस्तर पर जाकर लेट गए। उनका शरीर तो ढीला पड़ चुका था, पर उनका दिमाग शांत होने के बजाय एक मानसिक भंवर में फँस चुका था।
बाहर से दिखने में वे केवल एक ढलती उम्र के इंसान लग रहे थे, लेकिन इस एक ही इंसान के भीतर अब तीन अलग-अलग किरदार जन्म ले चुके थे, जो उनके वजूद को तीन दिशाओं में खींच रहे थे।
बाथरूम में नल के तेज़ पानी के शोर में सरताज से हुई गुप्त बातचीत अभी भी उनके कानों में गूँज रही थी। सरताज के कहने पर उन्हें पहला किरदार निभाना था—शेर के सामने पूरी तरह कामुक और भटका हुआ बनने का नाटक करना, ताकि शेर का भरोसा जीतकर उसके असली इरादों और ब्लैकमेलिंग की कड़ी को पकड़ा जा सके।
दूसरा किरदार सरताज का एक सतर्क और वफ़ादार खबरी बनने का था, जो शेर की हर चाल की खबर सीधे आईपीएस अफ़सर तक पहुँचाएगा।
लेकिन इन दोनों मुखौटों के पीछे, एक तीसरा और सबसे ख़तरनाक किरदार अनजाने में जन्म ले रहा था—असली चंदन का भटका हुआ रूप।
बिस्तर पर लेटे-लेटे छत को घूरते हुए चंदन बाबा मन ही मन सिहर उठे। नीली फ़िल्मों की अश्लीलता, वैद की दी हुई वियाग्रा के असर और पसीने से भीगी पीली मिडी ड्रेस में मीरा के बेपर्दा दृश्यों ने उनके बूढ़े, कसरती जिस्म में दबी हवस को धीरे-धीरे सुलगा दिया था।
चंदन (मन ही मन गहरी आत्मग्लानि और अनचाहे खिंचाव से जूझते हुए): "हे राम... यह मुझे क्या होता जा रहा है? मैं सरताज का खबरी बनकर इस घर को बचाने निकला हूँ, पर मेरी नीयत क्यों डोल रही है? सच में... आज उस पीली मिडी ड्रेस में मीरा कितनी सुंदर लग रही थी। कपड़े का कसाव उसके भरे-पूरे सीने और गोरी रानों को किस तरह बेपर्दा कर रहा था... मैंने आज से पहले कभी उसे इस नज़र से क्यों नहीं देखा?"
चंदन बाबा ने अपनी आँखें कसकर बंद कीं, पर वो अश्लील मंज़र आँखों से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था। शेर का कहा एक-एक शब्द अब उनके अपने भटकते दिमाग की हकीकत बनता जा रहा था।
वे सरताज के निर्देश पर शेर के आगे शिकार बनने का स्वांग रचने वाले थे, लेकिन मीरा का वह सुडौल, गोरा और महकता हुआ जिस्म अब उनकी अपनी दबी हुई वासना का केंद्र बनता जा रहा था।
'बिटिया' शब्द, जो अब तक उनके चरित्र की सबसे पवित्र ढाल था, हवस की इस पहली खुराक और दिमाग में चल रहे इस तीन-स्तरीय खेल के बीच धीरे-धीरे धुँधलाने लगा था।
उधर पास के तख्त पर लेटा शेर चादर के अंदर से चंदन बाबा की उखड़ी हुई साँसों और बेचैनी को सुन रहा था। शेर के चेहरे पर एक घिनौनी मुस्कान तैर गई—वह समझ रहा था कि उसका शिकार पूरी तरह जाल में फँस चुका है।
उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि बाबा सरताज के इशारे पर उसके राज़दार बनने का नाटक कर रहे हैं, और न ही बाबा को यह अहसास था कि नाटक करते-करते उनका अपना मन सचमुच पाप की दलदल में उतरने लगा है।
सुबह उठते ही चंदन बाबा के मन में कल रात की हरकत को लेकर भारी आत्मग्लानि हुई। उन्होंने तुरंत हाथ-मुँह धोया और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे ताकि मन से वे सारे गंदे विचार निकल जाएँ।
पाठ समाप्त करने के बाद जैसे ही चंदन बाबा ने आसन समेटा, पास ही खड़ा शेर कुटिल मुस्कान के साथ उनके सामने आ गया।
शेर: "राम-राम बाबा! कहिए, अब कैसी तबीयत है आपकी? कल रात वाली समस्या सुलझी या अब भी वही हाल है?"
चंदन बाबा (गंभीरता से नज़रें चुराते हुए): "हाँ... अब थोड़ा बेहतर लग रहा है, पर नसों में गर्माहट अभी भी बनी हुई है।"
शेर (मूंछों पर ताव देते हुए): "आपका तो कभी-कभार ऐसा होता है बाबा, पर जब से मैं आया हूँ, मेरा मन तो हर रोज़ बागी होता रहता है!"
चंदन बाबा (चौंककर उसकी तरफ देखते हुए): "बागी? किसलिए भाई?"
शेर (अपनी आँखों में कामुकता लाते हुए फुसफुसाया): "कभी आपने अपनी इस प्यारी 'बिटिया' को गौर से देखा है बाबा? कितनी खूबसूरत है, कितनी सेक्सी है! जब वो साड़ी में होती है और उसकी नंगी कमर झलकती है, तो दिल करता है कि अपनी इस सख्त हथेली से उस मखमली कमर को सहला लूँ... अपने होंठों से उसकी नग्नता को चूम लूँ!"
चंदन बाबा (गुस्से और घिन से झल्लाकर बोले): "बंद करो शेर! मेरे सामने अपनी ज़ुबान से ऐसी घटिया बातें निकालने की हिम्मत भी मत करना!"
शेर (हाथ जोड़कर कमीनी हँसी हँसते हुए): "अरे चंदन बाबा, आप तो बुरा मान गए! मैं तो बस इतना कह रहा हूँ कि कभी उस देवी को एक सेक्सी औरत के नज़रिए से देखकर तो देखिए... आपकी आँखें खुल जाएँगी!"
शेर ने चंदन बाबा की झल्लाहट को देखकर अपनी आँखें मटकाते हुए एक कदम और नज़दीक बढ़ाया।
शेर (अपनी छाती पर हाथ रखते हुए, धीमी आवाज़ में बोला): "बाबा, ग़ुस्सा छोड़िए और ज़रा एक मिनट के लिए अपने दिल पर हाथ रखकर सच-सच कहिए... क्या आपकी प्यारी मीरा बिटिया लाखों में एक और बेहद ख़ूबसूरत नहीं है?"
चंदन बाबा के भीतर सरताज की दी हुई हिदायत और दवा की नसों में उबलती गर्मी एक साथ कौंधी। वे चाहते तो इस बात को खारिज कर सकते थे, पर उनके मुँह से अनजाने में सच निकल गया।
चंदन बाबा (निगाहें झुकाकर, दबी आवाज़ में): "हाँ... ख़ूबसूरत तो है..."
शेर (हँसते हुए): "तो फिर मैंने क्या ग़लत कह दिया बाबा?"
चंदन बाबा (सँभलते हुए): "पर मैंने उसे कभी इस नीयत या ऐसी नज़र से नहीं देखा, शेर!"
शेर (उनकी आँखों में आँखें डालकर, मुस्कान के साथ): "अच्छा? तो क्या आप अपनी उसी मीरा बिटिया का वो असली और मादक रूप देखना चाहते हैं, जो आज तक सिर्फ़ बंद कमरों में छुपा रहा है?"
चंदन बाबा के भीतर का 'मुखबिर' तुरंत सतर्क हो गया। उन्हें सरताज के कहने पर शेर का भरोसा जीतना था और उसके घिनौने खेल की तह तक पहुँचना था। उन्होंने अपनी झिझक का नाटक छोड़ा और उत्सुकता का नकाब ओढ़ लिया।
चंदन बाबा (मुखबिर का किरदार निभाते हुए, उत्सुकता से बोला): "हाँ... दिखाओ, क्या कहना चाहते हो तुम?"
शेर के चेहरे पर जीत की ख़बीस मुस्कान फैल गई। उसने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और गैलरी खोलकर स्क्रीन चंदन बाबा के मुँह के सामने कर दी।
शेर (अभिमान से फुसफुसाया): "यह देखिए... दो दिन पहले जब मालकिन अपने कमरे में बेखबर सो रही थीं, तब ली थीं यह तस्वीरें!"
चंदन बाबा की नज़रें मोबाइल स्क्रीन पर पड़ते ही फटी की फटी रह गईं। स्क्रीन पर तीन तस्वीरें थीं, जिनमें मीरा बिस्तर पर बेसुध सोई हुई थी।
पतली सिल्क की स्लिप ऊपर खिसकी हुई थी, जिससे उसकी गोरी और बेपर्दा जाँघें पूरी तरह नंगी छलक रही थीं। उसके भरे-पूरे मम्मे स्लिप से ५०% से भी ज़्यादा बाहर निकले हुए थे और गुलाबी निप्पल का उभार साफ़ झिलमिला रहा था। पतली पैंटी के पार से उसकी कमर और पेट का उफ़ान उस शांत माहौल में किसी बिखरे हुए हुस्न की तरह दिख रहा था।
चंदन बाबा ने मोबाइल की स्क्रीन पर टिकी अपनी फटी आँखों को बड़ी मुश्किल से हटाया। उनके माथे पर पसीने की बारीक बूँदें उभर आई थीं।
एक तरफ सरताज के खबरी की सतर्कता थी, तो दूसरी तरफ सोई हुई मीरा के बेपर्दा हुस्न का वह ख़तरनाक नज़ारा उनके दिमाग में भट्टी की तरह सुलग रहा था।
चंदन बाबा (हकलाते और घबराए हुए लहज़े में बोले): "यह... यह तस्वीरें तुम्हारे पास कैसे आईं शेर? तुम कमरे के अंदर कैसे गए?"
शेर (कुटिलता से हँसते हुए मोबाइल वापस जेब में रखते हुए बोला): "अरे बाबा! आप बस मज़ा लीजिए... यह मत पूछिए कि तस्वीरें कैसे आईं! तस्वीरें देखिए और दिल पर हाथ रखकर बताइए—क्या अब भी आपको अपनी यह मीरा बिटिया सेक्सी नहीं दिखती? क्या आपका दिल नहीं करता कि एक रात इसके पास जाकर बेफ़िक्र सो जाएँ?"
चंदन बाबा के मुँह से कोई शब्द नहीं निकला।
चंदन बाबा ने खुद को संभाला और अपने चेहरे पर वासना का झूठा असर लाते हुए पूरी तरह मुखबिर के रोल में ढल गए।
चंदन बाबा (हवस का नाटक करते हुए और जीभ से होंठ सुखाकर बोले): "हाँ... सही कह रहे हो तुम शेर। मीरा बिटिया... सचमुच बहुत सेक्सी लग रही है। क्या... क्या तुम्हारे पास ऐसी और भी तस्वीरें हैं?"
शेर ने अपनी आँखें सिकोड़ीं और चंदन बाबा को शक की निगाह से देखा।
शेर (मुस्कुराहट दबाकर): "बाबा, आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं?"
चंदन बाबा ने तुरंत बात को संभालते हुए अपनी आँखों में वही ठरकीपन दिखाया जो शेर देखना चाहता था।
चंदन बाबा (बात सँभालते हुए): "अरे भाई, मैं तो बस इसलिए कह रहा था... क्या तुम यह तस्वीरें मेरे फोन पर भेज सकते हो? रात को नीली फ़िल्में देखने के बजाय... अपनी इस मालकिन को देखकर ही काम चला लिया करूँगा।"
उसी वक्त चंदन बाबा का अपना अंदरूनी मन शर्म और ग्लानि से फटा जा रहा था। वे मन ही मन तड़प उठे।
(चंदन मन ही मन रोते हुए सोचे: "हे राम! सरताज, तुमने मुझे किस धर्मसंकट में फँसा दिया है! मुझे अपनी ही बिटिया समान बहु का यह बेपर्दा रूप देखना पड़ रहा है... और ऊपर से ऐसा नाटक करना पड़ रहा है जैसे मैं और तस्वीरें देखने के लिए मरा जा रहा हूँ। ईश्वर मुझे इस पाप के लिए कभी माफ़ नहीं करेगा!")
शेर ने चंदन बाबा की यह बात सुनी, तो उसके चेहरे की शक की लकीरें गायब हो गईं और उसकी घिनौनी हँसी पूरे कमरे में गूँज उठी।
शेर ने अपने फोन पर बटन दबाकर वे तीनों तस्वीरें चंदन बाबा के व्हाट्सएप पर भेज दीं और जेब में हाथ डालते हुए एक मुस्कान के साथ मुस्कुराया।
शेर: "तस्वीरें तो बहुत हैं बाबा! पर अभी के लिए आप इन तीन तस्वीरों से ही काम चलाइए। हर रोज़ मैं आपको कुछ नया भेजूंगा... आपकी हर रात का नया जुगाड़! पर बदले में आपको मेरा एक काम करना होगा।"
चंदन बाबा ने मोबाइल में मैसेज की टोन सुनी और चेहरे पर उत्सुकता का नाटक बनाए रखा, जबकि अंदर से उनका कलेजा काँप रहा था।
चंदन बाबा (मुखबिर के अंदाज़ में, बात खंगालते हुए बोले): "किस बात का साथ भाई? कैसा काम?"
शेर (अपनी आँखों में वही शैतानी चमक लाते हुए): "बस इतना कि आप मेरे और मीरा के बीच में कभी नहीं आएँगे।"
Deepak Kapoor
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