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Thriller बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ?
#35
अगली सुबह, हरीश अपनी मोटरसाइकिल से 'वटिका लिमिटेड' के ऑफिस पहुँचा। वह बाहर खड़ा होकर इंतजार करने लगा। कुछ समय बाद, एक मारुति रिट्ज कार आकर रुकी। कार से चैताली उतरी। उसने नीले रंग का सलवार-कमीज पहना था और गले में गुलाबी दुपट्टा था। उसका कमीज थोड़ा पारदर्शी था, जिससे उसकी सफेद ब्रा की रूपरेखा साफ नजर आ रही थी। उसकी 38 की छातियाँ हर कदम के साथ हल्का सा हिल रही थीं।

हरीश ने मौका देखा और जानबूझकर उससे टकरा गया।

"ओह! आई एम सॉरी, चैताली जी!" हरीश ने चेहरे पर मासूमियत लाते हुए कहा।

चैताली ने चौंककर देखा और मुस्कुराई। "अरे हरीश! तुम यहाँ कैसे? क्या काम था?"

"बस, पास में ही एक मीटिंग थी, तो सोचा आपसे मिल लूँ। आप आज बहुत सुंदर लग रही हैं," हरीश ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा।

चैतली थोड़ी शर्माई। "शुक्रिया। लेकिन मुझे ऑफिस के अंदर जाना है, समय हो रहा है।"

"अरे, अभी तो 15 मिनट बाकी हैं। पास में ही एक नया कॉफी आउटलेट खुला है, चलिए एक कॉफी पीते हैं। मेरी तरफ से ट्रीट," हरीश ने प्रस्ताव रखा।

चैताली ने अपनी घड़ी देखी और फिर हरीश की ओर। "ठीक है, जल्दी से चलते हैं।"

कॉफी शॉप के एक शांत कोने में बैठकर जब चैताली कॉफी का घूँट ले रही थी, हरीश ने धीरे से अपनी जेब से वह चांदी का पेंडेंट निकाला। उसने उसे चैताली की आँखों के ठीक सामने हिलाना शुरू किया।

"चैताली .... मेरी बात सुनो," हरीश की आवाज अब गहरी और अधिकारपूर्ण हो गई थी। "तुम्हारी पलकें भारी हो रही हैं। तुम गहरी नींद में जा रही हो। मेरा हर शब्द तुम्हारा आदेश है।"

चैताली की आँखें धीरे-धीरे स्थिर हो गईं। उसकी चेतना लुप्त हो गई और वह एक जीवित पुतले की तरह हरीश को देखने लगी।

"अब सुनो," हरीश ने कहा। "तुम वापस ऑफिस जाओ। तुम बिल्कुल सामान्य व्यवहार करोगी। लेकिन जब मैं तुम्हें फोन करूँगा, तुम बिना सवाल किए मेरे निर्देशों का पालन करोगी। समझी?"

"जी... समझ गई," चैताली ने एक सपाट आवाज में जवाब दिया।

हरीश ने पेंडेंट वापस रखा और मुस्कुराया। उसने चैताली को खड़े होने के लिए कहा। फिर हरीश ने अपना फ़ोन निकला और चैताली की एक पिक खींची जिसमे उसके नयन नक्श और भर पुर फिगर अच्छी तरह नज़र आ रहा था। "अब जाओ।"

चैताली उठी और चुपचाप अपने ऑफिस की ओर चल दी। 

हरीश ने तुरंत विवेक को फोन लगाया। "भाई, जाल बिछ चुका है। तू बताए हुए लोकेशन पर पहुँच जा।"

कुछ समय बाद, विवेक का मैसेज आया: "मैं पहुँच गया हूँ। वह कहाँ है?"

हरीश ने चैताली की फोटो विवेक को भेज दी। "यह रहा तेरा शिकार। इसे पहचान ले।"

फिर हरीश ने चैताली को कॉल किया। "चैतली, अभी ऑफिस से ब्रेक लो और अपनी कार लेकर सेक्टर 14 लोकल मार्केट के उस पुराने बरगद के पेड़ के पास आओ। वहाँ कोई तुम्हारा इंतजार कर रहा है।"

सम्मोहित चैतली ने बिना एक पल गंवाए चुप चाप ऑफिस से निकली और अपनी कार में मार्केट की ओर चल दी।
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RE: बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ? - by MohdIqbal - 31-08-2026, 12:51 AM



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